Showing posts with label #Col Purohit. Show all posts
Showing posts with label #Col Purohit. Show all posts

मालेगांव की हिंसा और कांग्रेस का काला चेहरा

अजय कुमार, उगता भारत 
इतना ही नहीं देश की राजनीति का रंग-ढंग भी बदल गया है। जो नेता पहले चुनाव नजदीक आते ही मौलानाओं और मुस्लिम धर्मगुरुओं की चौखट पर पहुंच जाया करते थे, इफ्तार पार्टियां देना जिनका अपना शगल था, वह अब सत्ता के लिए मंदिर-मंदिर चक्कर लगा रहे हैं।

2008 में महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए बम विस्फोट का मामला एक बार फिर से सुर्खियां बटोर रहा है। वजह वही पुरानी है और निशाने पर एक बार फिर से कांग्रेस और उसके नेता हैं, जो करीब दो दशकों से देश में ‘हिन्दू आतंकवाद’ का नैरेटिव सेट करने में लगे हैं। कांग्रेस का दोहरा चरित्र ही है कि जब कोई इस्लाम से ताल्लुक रखने वाला आतंकवादी पकड़ा जाता है तो वह चीखने चिल्लाने लगती है कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता है, लेकिन इसके उलट देश पर कथित तौर पर हिन्दू आतंकवाद का ‘लेबल’ लगाने के लिए 2008 में हुए महाराष्ट्र के मालेगांव विस्फोट के असली गुनाहागारों को छोड़कर हिन्दू नेताओं और साधु-संतों को फंसाने के लिए उसकी तरफ से साजिश रची जाने लगती है।

इतना ही नहीं इस कृत्य को अमलीजामा पहनाने के लिए कई कांग्रेसी नेता नहीं तत्कालीन महाराष्ट्र और दिल्ली की मनमोहन सरकार ने भी अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। इसी के बाद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, सुधाकर द्विवेदी, मेजर रमेश उपाध्याय (सेवानिवृत्त), अजय रहीरकर, सुधाकर द्विवेदी, सुधाकर चतुर्वेदी और समीर कुलकर्णी आदि सभी को जेल भेज दिया गया था। आज की तारीख में यह सभी जमानत पर बाहर हैं। उस समय हालत यह थी कि इन्हें अपराध कबूलने के लिए बुरी तरह से टार्चर भी किया गया था। अब यह खुलासा हुआ है कि उस समय की कांग्रेस सरकारों ने तत्कालीन सांसद और मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नेता इंद्रेश कुमार को भी विस्फोट कांड में आरोपी बनाने का षड्यंत्र रचा था। रिपोर्टों के मुताबिक मालेगांव विस्फोट कांड के समय कांग्रेस के नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और उस समय के केन्द्रीय मंत्री पी. चिदंबरम कई पुलिस अधिकारियों और एटीएस के साथ मिलकर इस साजिश को अंजाम देने में लगे थे, इसमें काफी हद तक वह सफल भी हो गए थे, लेकिन समय बदला, सरकारें बदलीं और कांग्रेस की साजिश से पर्दा भी धीरे-धीरे हटने लगा है।
इतना ही नहीं देश की राजनीति का रंग-ढंग भी बदल गया है। जो नेता पहले चुनाव नजदीक आते ही मौलानाओं और मुस्लिम धर्मगुरुओं की चौखट पर पहुंच जाया करते थे, इफ्तार पार्टियां देना जिनका अपना शगल था, वह अब सत्ता के लिए मंदिर-मंदिर चक्कर लगा रहे हैं। माथे पर तिलक लगाए घूम रहे हैं। ऐसे समय में जब हिन्दुत्व की राजनीति चरम पर है तब मालेगांव विस्फोट कांड में हिन्दू नेताओं और धर्मगुरुओं के फंसाने की खबर का खुलासा होने के बाद कांग्रेस के लिए मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं लेकिन सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि इस तरह के षड्यंत्र का पर्दाफाश होने के बाद वह बुद्धिजीवी चुप्पी साधे हुए हैं जो मुसलमानों के खिलाफ कथित उत्पीड़न के नाम पर हो-हल्ला मचाते रहते हैं। अब कोई पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, राहुल गांधी, चिदंबरम, सलमान खुर्शीद, मणिशंकर अय्यर, शशि थरूर, ओवैसी, फिल्म अभिनेता नसीरूद्दीन शाह, आमिर खान, शाहरूख खान, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, राजद के तेजस्वी यादव जैसे लोगों और नेताओं से यह कल्पना कैसे कर सकता है कि यदि यह प्रोपोगंडा करते मिल जाते हैं कि देश में मुसलमान डर हुआ है तो इस बात पर भी अपनी प्रतिक्रिया देंगे कि मालेगांव विस्फोट कांड में हिन्दू नेताओं को फंसाने की जो साजिश की गई थी, वह शर्मनाक थी।
दरअसल, मालेगांव विस्फोट कांड के एक गवाह के यह खुलासा करने के बाद राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ कि उसके ऊपर हिन्दू नेताओं का नाम लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। आश्चर्य नहीं कि मुंबई के तत्कालीन आतंकवाद निरोधक दस्ते यानी एटीएस ने उसे योगी आदित्यनाथ और आरएसएस के चार नेताओं का नाम लेने के लिए मजबूर भी किया था और प्रताड़ित भी। तब इस एटीएस के अतिरिक्त आयुक्त थे परमबीर सिंह, जो इस समय कई गंभीर आरोपों से घिरे हुए हैं और फिलहाल निलंबित हैं। मालेगांव मामले के गवाह ने एटीएस पर जो सनसनीखेज आरोप लगाया, वह एनआईए की विशेष अदालत के समक्ष लगाया। यह पहली बार नहीं, जब इस तरह की बातें सामने आई हैं। इससे पहले भी मालेगांव मामले के अन्य गवाह इसी तरह के आरोप लगा चुके हैं। यह भी ध्यान रहे कि महाराष्ट्र में गुजरात पुलिस के हाथों एक मुठभेड़ में मारी गई लश्कर-ए-तैयबा की आतंकी इशरत जहां को किस प्रकार कांग्रेस और अन्य दलों के नेताओं द्वारा निर्दोष साबित करने की सियासी मुहिम चलाई गई थी। इसकी भी अनदेखी नहीं की जा सकती कि 2008 के मालेगांव कांड में हुई गिरफ्तारियों के बाद तुष्टिकरण की सियासत करने वालों द्वारा ही कथित तौर पर हिंदू आतंकवाद का जुमला उछाला गया था।
यह पहली घटना नहीं थी। 2008 में ही मुंबई में भीषण आतंकी हमले के बाद एक पुस्तक लिखकर देश-दुनिया को दहलाने वाले इस हमले को आरएसएस की साजिश बताने की बड़ी बेशर्मी से कोशिश की गई थी। जिन्होंने भी ऐसी कोशिश की, उन्हें शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा, लेकिन इससे यह तो पता चल ही गया कि किस तरह से समय-समय पर कुछ नेताओं और सरकारों द्वारा हिंदू आतंकवाद का हौवा खड़ा करने की चेष्टा की जाती रही थी। इस कृत्य में तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के कई केंद्रीय मंत्री भी शामिल थे। उनकी ओर से भी यह कहा जा रहा था कि हिंदू आतंकवाद उभर आया है। यह वह दौर था, जब तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अमेरिकी राजदूत से कहा था कि भारत को लश्कर और जैश सरीखे आतंकी संगठनों से ज्यादा खतरा हिंदू संगठनों के अतिवाद से है। इस सबको देखते हुए यह आवश्यक ही नहीं, अनिवार्य है कि इस सवाल का जवाब तलाशने की कोई कोशिश की जाए कि मालेगांव मामले की जांच के नाम पर देश-दुनिया को गुमराह करने की कोशिश तो नहीं की गई? इस सवाल का जवाब इसलिए खोजा जाना चाहिए, क्योंकि आरोप-प्रत्यारोप से कुछ हासिल होने वाला नहीं है। यह सामने आना ही चाहिए कि कहीं किसी साजिश या फिर संकीर्ण राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए तो हिंदू आतंकवाद का जुमला नहीं गढ़ा गया? यदि यह साबित होता है कि किसी राजनीतिक मकसद से हिंदू आतंकवाद का जुमला गढ़ा गया तो फिर यह भी साफ होगा कि आतंकवाद से लड़ने के नाम पर देश की सुरक्षा व्यवस्था और साथ ही जांच एजेंसियों से खिलवाड़ भी किया गया।

यह गलत नहीं है कि मालेगांव विस्फोट कांड में भाजपा और आरएसएस नेताओं को फंसाने और उनका चरित्र हनन की साजिश का खुलासा होने के बाद बीजेपी और आरएसएस नेता कांग्रेस के खिलाफ हमलावर हैं। इस हकीकत से भी मुंह नहीं मोड़ा जा सकता है कि कांग्रेस नेताओं पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी, पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, दिग्विजय सिंह और सलमान खुर्शीद देश में हिन्दू आतंकवाद का हौवा खड़ा कर रहे हैं। सलमान खुर्शीद ने तो अपनी किताब में हिन्दुओं की तुलना आतंकवादी संगठन बोको हरम और आईएसआई तक से कर दी है। आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने तब सत्तारुढ़ और अब विपक्ष में बैठी कांग्रेस एवं अन्य राजनीतिक दलों और उनके नेताओं की आलोचना करते हुए कहा कि सबने मिलकर एक बड़ा पाप और अपराध किया था, हिन्दुओं को आतंकवादी ठहराने की साजिश रची गई थी। इंद्रेश कुमार ने कांग्रेस और उसकी गठबंधन सरकार के साथ खड़े नेताओं और दलों को भी गंदी राजनीति और झूठी साजिश के साथ खड़ा होने का गुनाहागार बताया ताकि तथाकथित भगवा आतंकी मामलों में भाजपा और आरएसएस के नेताओं को फंसाया जा सके। इंद्रेश कुमार ने अपने बयान में दावा किया कि एटीएस ने उसे प्रताड़ित किया और अपने कार्यालय में अवैध रूप से बैठाया। इस मामले में अब तक 220 गवाहों से पूछताछ हो चुकी है और उनमें से 15 मुकर गए हैं। इंद्रेश कुमार ने दावा किया कि तत्कालीन यूपीए सरकार ने तथाकथित भगवा आतंकी मामलों में भाजपा और आरएसएस के नेताओं को घसीटने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी, लेकिन किसी भी प्राथमिकी में हमारे नाम नहीं जोड़ सकी, क्योंकि उनके पास कोई सबूत नहीं था।

रहस्योघाटन : क्या UPA काल में पाकिस्तान के इशारों पर चलती थी भारत सरकार?

आज जिस तरह कांग्रेस के आतंकवाद, पाकिस्तान और चीन के साथ संबंधों का खुलासा हो रहा है, उसे देख हर देशप्रेमी कांग्रेसी को चाहे वह किसी भी जाति, धर्म, मजहब अथवा समुदाय से हो, देशहित में कांग्रेस और यूपीए समर्थक हर पार्टी को त्याग देना चाहिए। विशेषकर हर हिन्दू को। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं भूतपूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुख़र्जी ने भी अपनी पुस्तक तक में सोनिया के हिन्दू विरोधी होने का जिक्र किया है। 
स्मरण हो, 1962 भारत-चीन युद्ध के दौरान कम्युनिस्ट पार्टी ने जवानों के लिए खून देने से साफ इंकार कर दिया था। फिर किस आधार पर कम्युनिस्ट भारत की जनता से वोट मांगते हैं? और जनता भी इतनी मुर्ख है, चुनावों में इनको वोट दे आती है। 

लेकिन डाटा वैज्ञानिक डॉ गौरव प्रधान द्वारा सोनिया कांग्रेस का आतंकवाद के साथ चोली-दामन का साथ होने के कई प्रमाण दिए हैं। वैसे इन मुद्दों पर यदाकदा चर्चा होती रहती भी थी। लेकिन कांग्रेस को एक बेगुनाह दोषी के रूप में हमारा मीडिया प्रस्तुत करता रहा। हैरानी की बात यह है कि कुर्सी की खातिर यूपीए को समर्थन दे रही पार्टियां भी खामोश रही। चुनावों में ये ही सभी पार्टियां अपने-आपको बहुत बड़ा देश-हितैषी और जनहित की बात करते नज़र आते हैं, जबकि हकीकत में कर इसके विपरीत हैं। 

मेरी अपनी व्यक्तिगत राय यह है कि इन देश विरोधी पार्टियों को बेनकाब करने के लिए व्यापक स्तर पर अजित डोवाल, कर्नल पुरोहित, साध्वी प्रज्ञा और स्वामी असीमानंद आदि के कटु अनुभवों को उजागर करना चाहिए। 2019 चुनाव में साध्वी प्रज्ञा द्वारा अपने दर्द भरे अनुभव सार्वजनिक करने पर विपक्ष चुनाव आयोग तक पहुँच जाता है, लेकिन चुनाव आयोग भी सच्चाई को छिपाने के लिए प्रज्ञा पर ही अंकुश लगा देती है। 

जिस कश्मीरी कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद के राज्य सभा से विदाई समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी प्रशंसा में कसीदे तो खूब पढ़े, लेकिन आज़ाद की देश विरोधी हरकतों को क्यों भूल गए? क्या मोदी को आज़ाद की वास्तविकता नहीं मालूम थी?      
कर्नल पुरोहित का पाक में जासूसी नेटवर्क इतना मजबूत था कि आतंकी हाफिज सईद और लख्वी तक उनसे डरते थे। 

कर्नल पुरोहित 9 साल बाद नवी मुंबई की तालोजा जेल से रिहा हो गए है। उनकी रिहाई के बाद कई खुलासे सामने आ रहे है। एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा डाटा वैज्ञानिक गौरव प्रधान ने किया है। 

डॉक्टर गौरव प्रधान ने कई बड़े नेताओं पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं, जिनकी सत्यता की जांच की जानी बेहद जरूरी हो गयी है। 

2010 में होनी थी सोनिया गाँधी और हाफिज सईद की मुलाकात ?

डॉक्टर प्रधान ने खुलासा किया है कि 2010 में सोनिया गाँधी और हाफिज सईद की मुलाकात होनी थी। पाकिस्तानी आतंकी हाफिज सईद इटालियन माता से 2010 में मिलना चाहता था, मगर इटालियन माता ने इंकार कर दिया क्योंकि इसमें काफी रिस्क था। 

वैसे सोनिया गांधी की आतंकियों से हमदर्दी कोई नयी बात नहीं है, इससे पहले पूर्व कानून मंत्री सलमान खुर्शीद भी आजमगढ़ की चुनावी रैली में कबूल कर चुके हैं कि बाटला हाउस एनकाउंटर में आतंकियों के मारे जाने की तस्वीरें देखकर सोनिया गांधी रो पड़ी थी। 

वैसे चर्चा भी है कि डॉ सुब्रमण्यम स्वामी ने भी कई बार सोनिया गाँधी और आतंकवादियों के बीच कुछ साठगाँठ होने की बात करते रहते हैं। 

दाऊद को बचाने के लिए अजित डोवाल को करवाया गिरफ्तार?

डॉक्टर प्रधान ने ये भी खुलासा किया कि 2005 में सोनिया-मनमोहन की सरकार के दौरान आज के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल को मुंबई में गिरफ्तार कर लिया गया था, क्योंकि उन्होंने पाकिस्तान मे बैठे दाऊद को मारने की पूरी योजना बना ली थी। 

पाकिस्तान के कहने पर कर्नल पुरोहित को किया गिरफ्तार!

डॉक्टर गौरव प्रधान ने ये भी खुलासा किया कि 26/11 के मुंबई आतंकी हमले से ठीक पहले ही कर्नल पुरोहित को गिरफ्तार किया गया, क्योंकि कर्नल पुरोहित सेना के जासूस थे और 26/11 आतंकी हमले के प्लान के बारे में जानते थे। 

डॉ गौरव ने ये भी बताया कि कर्नल पुरोहित की पत्नी अपर्णा पुरोहित ने कहा था कि पाकिस्तान चाहता था कि कर्नल पुरोहित को गिरफ्तार कर लिया जाए और सोनिया-मनमोहन सरकार भी इसके बारे में विचार भी कर रही थी।

अपने खुफिया मिशन के दौरान  कर्नल पुरोहित पाकिस्तान के कई संवेदनशील और नापाक राज जान गए थे, कर्नल पुरोहित का बड़ा जासूसी नेटवर्क भी पाकिस्तान में खुफिया जानकारियां जुटा रहा था। इसीलिए पाकिस्तान कर्नल पुरोहित की कस्टडी की मांग कर रहा था..

गौरव प्रधान ने आगे खुलासा किया कि पाकिस्तानी जनरल पाशा के कहने पर ही कर्नल पुरोहित को ठीक 26/11 आतंकी हमले से पहले गिरफ्तार कर लिया गया, क्योंकि पाकिस्तानियों को शक था कि कर्नल पुरोहित को इस आतंकी हमले की भनक लग चुकी थी और वो हमले को विफल कर सकते थे..

कश्मीरी और कोंग्रेसी नेता आतंकियों की मदद करते थे?

इसके बाद डॉक्टर प्रधान ने और भी ज्यादा सनसनीखेज खुलासे करते हुए बताया कि कर्नल पुरोहित को पता चल गया था कि एक कश्मीरी नेता जो जम्मू कश्मीर का मुख्यमंत्री भी था, वो और कांग्रेसी नेता “मिया आज़ाद” (गुलाम नबी आज़ाद) एक ही गाड़ी में घुमते थे और उनके साथ उसी गाडी में आतंकी भी घूमते थे। गाड़ी पर लाल बत्ती लगी होने के चलते किसी को कानो-कान खबर तक नहीं होती थी। इसी नेता की गाड़ी का इस्तेमाल करके 2005 से लेकर 2010 तक कश्मीर में पैसों की फंडिंग में भी की गयी। 

हिन्दू आतंकवाद जुमले को साबित करने की साजिश?

डॉक्टर गौरव प्रधान ने खुलासा किया कि 26/11 मुंबई हमले का पूरा षड्यंत्र हिन्दुओ को आतंकी घोषित करने के लिए पाकिस्तान ने रचा था, ताकि इस्लामिक कट्टरपंथी आतंकियों पर से ध्यान हटाया जा सके। प्लान था कि आतंकी हमला करने के बाद सभी आतंकियों को मार दिया जाएगा और इस हमले को भी हिन्दू आतंकवाद से जोड़ दिया जाएगा..

उन्होंने बताया कि “26/11 आरएसएस की साजिश” नाम की किताब तो पहले से छाप कर रख ली गयी थी, जिसका विमोचन कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह ने खुद किया था। गौरव प्रधान ने खुलासा किया कि जब आतंकी मुंबई में घुसे, उससे पहले ही देश के कई नेता इसके बारे में जानते थे और उन्होंने हेमंत करकरे को ख़ास निर्देश दिए थे कि एक भी आतंकी ज़िंदा ना बचने पाए..

मगर सिपाही तुकाराम ओम्बले ने कांग्रेस और पाकिस्तान की सारी योजना पर पानी फेर दिया और आतंकी कसाब को जिन्दा पकड़ लिए गया। आतंकियों ने हेमंत करकरे को पहचाना नहीं और धोखे से उन्हें गोली मार दी..

पी चिदंबरम, सुशील कुमार शिंदे, अहमद पटेल और सोनिया गांधी का साजिश में हाथ?

इस पूरी साजिश के पीछे डॉक्टर प्रधान ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम, पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे और अहमद पटेल का नाम लिया। उन्होंने साजिश के पीछे इटालियन आंटी कहते हुए सोनिया गाँधी की और भी इशारा किया। 

लाल कृष्ण आडवाणी, नरेंद्र मोदी और बाल ठाकरे को मारने की साजिश?

डॉक्टर प्रधान ने खुलासा किया कि मुद्रिक में पाकिस्तानियों और भारत के गद्दारों की एक मीटिंग हुई थी, पाकिस्तान भारत की सैन्य ख़ुफ़िया एजेंसियों के बारे में जानना चाहता था। इसी मीटिंग में योजना रखी गयी कि बीजेपी नेता लाल कृष्ण आडवाणी, गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे को मार दिया जाये। मगर इटालियन माता ने इंकार कर दिया क्योंकि 2009 के चुनाव आने वाले थे और हिंदूवादी नेताओं के मारे जाने से कांग्रेस को चुनाव में नुक्सान होने का डर था। 

मोदी को फंसाने के लिए असीमानंद पर दबाव?

उन्होंने आगे खुलासा किया कि 26/11 हमले का पूरा का पूरा प्लान राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) को आतंकी संगठन बताकर हिन्दू आतंकवाद को सिद्ध करने के मकसद से बनाया गया था। इसी तरह समझौता एक्सप्रेस ट्रेन में ब्लास्ट के बाद गिरफ्तार किये गए पाकिस्तानी आतंकी को छोड़ दिया गया और स्वामी असीमानंद को इस केस में फंसा दिया गया। 

स्वामी असीमानंद को गिरफ्तार करके थर्ड डिग्री की यातनाएं दी गयीं और उनसे कहा गया कि यदि इन यातनाओं से बचना है तो गुजरात के एक बड़े बीजेपी नेता (नरेंद्र मोदी) का नाम ले लो।  इंकार करने पर असीमानंद को और यातनाएं दी गयी, ऐसा ही साध्वी प्रज्ञा के साथ भी किया गया। 

योजना थी कि 26/11 के आतंकी हमले में सभी आतंकियों को मार कर सारा इल्जाम आरएसएस पर लगा कर संघ को आतंकी संगठन घोषित किया जायेगा। इसके बाद नरेंद्र मोदी और अमित शाह को भी इसी तरह के केस में फंसा दिया जाएगा क्योंकि इटालियन माता 2004 से ही जानती थी की ये दोनों उसके लिए बड़ा खतरा है। 

10 सालों तक जनरल पाशा का था भारत पर राज?

गौरव प्रधान ने दावा किया कि दरअसल 2004 से 2014 तक देश में मनमोहन-सोनिया नहीं बल्कि पाक आईएसआई का जनरल पाशा राज कर रहा था, जो वो चाहता था वही यहाँ होता था।  डॉक्टर गौरव प्रधान ने बताया कि कर्नल पुरोहित का पाकिस्तान में काफी अच्छा जासूसी नेटवर्क था, जिसके कायल खुद अजित डोभाल भी थे। अजित डोभाल भी ये देखकर हैरान थे कि कर्नल पुरोहित ने अपने इसी जासूसी नेटवर्क के दम पर सात बार पाकिस्तान की साजिशों और हमलों को विफल कर दिया था..

डॉक्टर प्रधान ने ये खुलासा भी किया कि कर्नल पुरोहित का पाकिस्तान में जासूसी नेटवर्क इतना मजबूत था कि आतंकी हाफिज सईद और लख्वी तक उनसे डरते थे। इसी डर से दोनों आतंकी आकाओं की सुरक्षा भी पाकिस्तान ने बढ़ा दी थी। 

कर्नल पुरोहित पाक खुफिया एजेंसी और पाक आतंकियों दोनों के निशाने पर थे। जनरल पाशा के इशारे पर कांग्रेस सरकार ने कर्नल पुरोहित को गिरफ्तार कर जेल में डलवा दिया और बेपनाह यातनाएं दी। पूरी कोशिश की गयी कि इस देशभक्त सेना के अफसर को आतंकी घोषित कर दिया जाये!