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कांग्रेस को वोट देने वाले हिन्दुओं अब तो आंखें खोल लो; कोर्ट में टिक नहीं सकी कांग्रेस की ‘भगवा आतंकवाद’ की थ्योरी, साध्वी प्रज्ञा-कर्नल पुरोहित सहित सभी बरी: पीड़ितों को मिलेगा 2-2 लाख रूपए का मुआवजा

अपने मुस्लिम वोट बैंक को खुश करने इस्लामिक आतंकवादियों को बचाने हिन्दू विरोधी कांग्रेस समर्थित यूपीए द्वारा "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" नाम देकर हिन्दू नहीं सनातन को कलंकित किया जा रहा था। वैसे सनातन को कलंकित करने का सिलसिला अभी भी नहीं बंद नहीं है। जब साध्वी प्रज्ञा ने अपने चुनाव अभियान हेमंत करकरे, ATS अधिकारी के खिलाफ बयान देने पर कांग्रेस चुनाव आयोग पहुँच गयी थी। करकरे ने जितने अत्याचार इन तीनों पर किये थे अगर उसका 1% भी किसी मुस्लिम आतंकवादी के साथ कर दिया होता वह आतंकवादी जेल से बाहर ही नहीं आता बलवा मच गया होता। 

संक्षेप में इतना ही कहना कि इन तीनों की पीड़ा को अप्रैल/मई 2012 के Organiser के पृष्ठ 18 पर Agenga में तत्कालीन महामहिम प्रतिभा पाटिल के नाम प्रकाशित पत्र(सम्पादित) में पढ़ सकते हैं। अगर Organiser में पूरा पत्र पढ़ने को मिल जाए, रोंगटे  खड़े हो जायेंगे।      

साल 2008 के मालेगाँव ब्लास्ट मामले में NIA की एक विशेष अदालत ने गुरुवार (31 जुलाई 2025) को सभी आरोपितों को बरी कर दिया है। इसमें बीजेपी की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह, लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित समेत कुल 7 लोग शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि NIA आरोपों को साबित करने में नाकाम रही है। कोर्ट ने कहा कि NIA ने यह तो साबित कर दिया कि मालेगाँव में बम धमाका हुआ था, लेकिन यह साबित करने में नाकाम रही कि बाइक में बम प्लांट किया गया था। इसी के साथ कोर्ट ने पीड़ित परिवार को ₹2 लाख मुआवजा देने के आदेश दिए हैं।

कोर्ट ने विस्फोट के सभी छह पीड़ितों के परिवारों को 2-2 लाख रुपये और सभी घायल पीड़ितों को 50,000 रुपये मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है। एनआईए की स्पेशल कोर्ट फैसला आने से पहले मामले में आरोपी भाजपा की पूर्व सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित समेत सभी सात आरोपी अदालत पहुंच गए थे।

मामला 29 सितंबर 2008 में हुए मालेगाँव बम धमाका से जुड़ा है, जिसमें 6 लोगों की मौत हुई थी। हादसे में 100 से अधिक लोग घायल हुए थे। शुरुआत में मामले की जाँच महाराष्ट्र ATS ने की थी, लेकिन 2011 में NIA को जाँच सौंपी गई थी। NIA ने 5 साल की जाँच के बाद चार्जशीट में 7 लोगों को आरोपित बनाया था।

इनमें भोपाल की पूर्व बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, कर्नल प्रसाद पुरोहित, रमेश उपाध्याय अजय राहिलकर, 

इसी ब्लास्ट से भगवा आतंकवाद जैसे शब्दों को जन्म हुआ था
मामले में पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित (रि) सहित सात लोग आरोपी बनाए गए हैं। मामला देश के अति संवेदनशील मामलों में से एक है, क्योंकि मालेगांव ब्लास्ट के बाद से ही हिंदू आतंकवाद और भगवा आतंकवाद जैसे शब्दों का जन्म हुआ। बता दें, ब्लास्ट केस में कुल 12 लोगों पर आरोप लगे थे लेकिन स्पेशल एनआईए कोर्ट में केस शुरू होने से पहले ही पांच लोगों को बरी कर दिया गया था।  
19 अप्रैल को सुरक्षित रखा था आदेश

19 अप्रैल को अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था. शुरुआत में सातों आरोपियों को फैसले के लिए आठ मई को पेश होने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, बाद में फैसला 31 जुलाई के लिए पुननिर्धारित कर दिया गया। 

हेमंत करकरे ने की थी इस मामले में जांच

केस की जांच का प्रारंभिक संचालन एटीएस के विशेष महानिरीक्षक हेमंत करकरे कर रहे थे। बाद में 26/11 के मुंबई आतंकवादी हमलों के दौरान वे शहीद हो गए थे। मामले में एटीएस ने 2009 में अपना आरोपपत्र दायर किया था।

सुधाकर चतुर्वेदी, समीर कुलकर्णी और सुधाकरधर द्विवेदी शामिल थे।

साध्वी को दिखाए पोर्न, कर्नल को नंगा कर पीटा, मेजर को बेटी से रेप की धमकी… क्या सुशील शिंदे के कबूलनामे से भरेंगे वो जख्म जो कांग्रेस ने 'हिन्दू आतंकवाद' और ‘भगवा आतंकवाद’ साबित करने हिन्दू समाज को दिए?

एक कहावत है कि सच परेशान हो सकता है पराजित नहीं। ये प्याज के छिलके तो अब उतरने शुरू हुए हैं। आगे-आगे देखिए क्योकि अभी बहुत कुछ खुलने को हैं। और इन षड्यंत्रों का पर्दाफाश भी इन्ही पार्टियों द्वारा होगा। पूर्व ग्रह मंत्री सुशील कुमार शिंदे को यह भी बताना चाहिए कि Lt Col पुरोहित को किस अपराध में गिरफ्तार किया गया था? ताकि यूपीए कांग्रेस समर्थित समस्त सियासतखोरों को जनता पानी पी-पीकर इनकी पीढ़ियों को कोसे।   

लेकिन चुनावों के दौरान साध्वी प्रज्ञा द्वारा ATS प्रमुख करकरे की मौत पर अपनी ख़ुशी व्यक्त पर हंगामा करने कांग्रेसियों वालों को भी शर्म से डूब मरना चाहिए। बेशर्म चुनाव आयोग तक पहुँच गए थे। साध्वी पीड़ित थी, बेकसूर होते जुल्मो की पराकाष्ठा साध्वी ही नहीं पुरोहित और असीमानंद ने झेली थी। जब इनकी सात्विकता दूषित की जा रही थी तब क्यों गुलामों की तरह चुप रहे। सही कहा है गुलाम को लाख राजशाही चोला पहना दो गुलाम गुलाम ही रहेगा। जिस तरह इनकी सात्विकता नष्ट की गयी थी अगर वही आतंकी कसाब के साथ हुआ होता चील-कौओं की तरह चीख-चीखकर आसमान सिर पर उठा लिया होता ऐसे मातम कर रहे होते जैसे इनके घरों में शोक हो रहा हो। हिन्दुओं को भी अब अपनी ऑंखें और दिमाग दोनों खोलकर यूपीए में शामिल कांग्रेस समेत जितनी भी पार्टियां थी, सबका तिरस्कार करना चाहिए। इतिहास साक्षी जिस-जिसने भी युगों-युगों अति प्राचीन सनातन का अपमान किया है, सभी धूल में मिल गए। वर्तमान समय में भी कुछ मिल गए और कुछ लाइन में हैं।       

‘भगवा आतंकवाद’…. ये एक ऐसा शब्द था जिसने भारतीय राजनीति की रूख को मोड़ दिया। बलिदान, त्याग और भारतीय परंपरा से संबंधित केसरिया रंग को बदनाम करने के कारण कांग्रेस  बर्बादी के कगार पर पहुँच गई। राजनीति में इस शब्द के इस्तेमाल का परिणाम ये हुआ कि पिछले 10 सालों से कॉन्ग्रेस सत्ता में लौटने के लिए संघर्ष कर रही है, लेकिन नजदीकी भविष्य में इसकी संभावना नहीं दिख रही है।

कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए-2 सरकार में केंद्रीय गृहमंत्री रहे सुशील कुमार शिंदे ने भी इस बात को मान लिया है कि इस शब्द का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था। उन्होंने माना कि उनकी पार्टी कांग्रेस ने इस शब्द का इस्तेमाल करने के लिए कहा था। उन्होंने कहा कि आतंकवाद भगवा या रेड या सफेद नहीं होता। आतंकवाद… आतंकवाद होता है।

कर्नल श्रीकांत पुरोहित और साध्वी प्रज्ञा  

सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि उस वक्त रिकॉर्ड पर जो आया था, उन्होंने वही कहा था। ये उनकी पार्टी कांग्रेस ने बताया था कि भगवा आतंकवाद हो रहा है। उन्होंने कहा कि उस वक्त पूछा गया था तो उस बारे में उन्होंने बोल दिया था भगवा आतंकवाद। बस इतना ही है। दरअसल, शिंदे से पहले गृहमंत्री रहने के दौरान कॉन्ग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने भगवा आतंकवाद शब्द का इस्तेमाल किया था।

राजनीति से रिटायरमेंट ले चुके सुशील कुमार शिंदे ने कहा, “आतंकवाद शब्द लगाया, लेकिन सही बोले तो क्यों आतंकवाद शब्द लगाया मुझे पता नहीं है। लगाना नहीं चाहिए। ये गलत था। भगवा टेररिस्ट… ऐसा नहीं बोलना चाहिए। ये उस पार्टी की विचारधारा होती है। ये चाहे भगवा हो या रेड हो या सफेद हो। ऐसा कोई आतंकवाद नहीं होता है।”

दरअसल, भारत के गृहमंत्री रहते हुए सुशील कुमार शिंदे ने 20 जनवरी 2013 को जयपुर में आयोजित कांग्रेस के चिंतन शिविर के दौरान कहा था कि भाजपा और आरएसएस के कैंपों में ‘हिंदू आंतकवादियों’ को प्रशिक्षण दिया जाता है। आलोचना के बाद शिंदे ने कहा था, “ये सब इतनी बार अख़बार में आ गया है। ये कोई नई चीज़ नहीं है जो मैंने आज कही है। ये भगवा आतंकवाद की ही बात मैंने की है।”

कांग्रेस ने तुष्टिकरण के लिए अपनाया ‘भगवा आतंकवाद’

दरअसल, अपने बयान के पीछे शिंदे एक कथित रिपोर्ट का हवाला दिया था। उन्होंने कहा था, “हमारे पास रिपोर्ट आ गई है। जाँच में भाजपा हो या आरएसएस के ट्रेनिंग कैंप, हिंदू आतंकवाद बढ़ाने का काम देख रहे हैं। समझौता एक्सप्रेस रेलगाड़ी का धमाका हो, मक्का मस्जिद ब्लास्ट हो या फिर मालेगाँव, हिंदू चरमपंथियों ने वहाँ जाकर बम धमाके करवाए और फिर कह दिया कि ये धमाके अल्पसंख्यकों ने करवाए।”

सुशील कुमार शिंदे ने कहा था कि ऐसी कोशिशों से देश को सतर्क रहना चाहिए। शिंदे के इस बयान पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने उन्हें मुबारकवाद दी थी। इससे पहले गृहमंत्री रहते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने साल 2010 में सबसे पहले भगवा आतंकवाद शब्द का प्रयोग किया था।
केंद्रीय गृहमंत्री के रूप में 25 अगस्त 2010 को डीजीपी और आईजी के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए चिदंबरम ने कहा था, “मैं आपको सावधान करना चाहता हूँ कि भारत में युवा पुरुषों एवं महिलाओं को कट्टरपंथी बनाने के प्रयासों में कोई कमी नहीं आयी है। इसके अलावा हाल में ‘भगवा आतंकवाद’ सामने आया है, जो अतीत में कई बम विस्फोटों में पाया गया है..।”

भगवा आतंक शब्द का सबसे पहले उपयोग

Saffron Terrorism जिसे हिंदी में भगवा आतंकवाद कहा जाता है, का सबसे पहले उपयोग कांग्रेस के प्रति हमदर्दी रखने वाले अंग्रेजी के पत्रकार प्रवीण स्वामी ने किया था। साल 2002 के गुजरात दंगों के दौरान रिपोर्टिंग करते हुए प्रवीण स्वामी ने ‘Saffron Terror’ नाम के हेडलाइन से एक रिपोर्ट लिखी थी। इसमें स्वामी ने बताया था कि हिंदुओं ने मुस्लिमों पर अत्याचार किए थे।
स्वामी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था, “स्कूल शिक्षक नजीर खान पठान 28 फरवरी (2002) को सुबह 9 बजे नरौरा में स्टेट ट्रांसपोर्ट वर्कशॉप के पीछे अपने घर से टहलने के लिए निकले थे। वे याद करते हैं कि नटराज होटल के सामने मुख्य चौक पर पहले से ही भीड़ जमा थी। वे सभी भगवा दुपट्टा और खाकी शॉर्ट्स पहने हुए थे। उनमें से ज़्यादातर के हाथों में तलवारें थीं।”

अपनी रिपोर्ट में उन्होंने आगे लिखा, “वहाँ दो पुलिस जीप खड़ी थीं और दो सफ़ेद एंबेसडर कारें थीं, जिन पर लाल बत्ती लगी हुई थी। मैं वहाँ से लगभग 100 मीटर दूर था। वहाँ खड़े लोगों में से एक विश्व हिंदू परिषद के नेता प्रवीण तोगड़िया थे। थोड़ी देर बाद वे चले गए और भीड़ ने गाली-गलौज वाले नारे लगाने शुरू कर दिए। हमलावरों ने हम पर पत्थर फेंके और हमने भी उसी तरह जवाब दिया।”
अपनी रिपोर्ट उन्होंने आगे लिखा, “गोलीबारी में चार मुस्लिम लोग मारे गए, जिससे पड़ोस की रक्षा करने वालों को पीछे हटना पड़ा। स्थानीय नूरानी मस्जिद को आग लगा दी गई और उसके गुंबद पर भगवा झंडा फहराया गया। फातिमा बी उन सैकड़ों लोगों में से एक थीं जिन्होंने राज्य परिवहन कर्मचारी कॉलोनी में छिपने की कोशिश की थी।…”

कांग्रेस ने लपक लिया मौका

कांग्रेस गुजरात दंगों को लेकर भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमलावर रही है। उन्हें फँसाने के लिए तरह-तरह के जतन किए गए, लेकिन आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया और कहा कि इसमें तत्कालीन गुजरात सरकार एवं वहाँ के मुख्यमंत्री नरेेंद्र मोदी की इसमें कोई भूमिका नहीं है। भाजपा नेता का कहना था कि इसके बावजूद कांग्रेस उन्हें तरह-तरह से प्रताड़ित करती रही।
कांग्रेस ने अपने वोटबैंक मुस्लिमों को साधने के लिए इस शब्द को अपना लिया और इसका जमकर प्रचार किया। परिणाम ये हुआ कि कांग्रेस के खिलाफ आक्रोश बढ़ता गया। पी. चिदंबरम ने इसे खूब उछाला। उस समय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह थे और यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गाँधी थी। सत्ता के गलियारे में कहा जाता था कि सोनिया गाँधी ही अप्रत्यक्ष रूप से सत्ता चलाती थी।
उस समय कांग्रेस में जनार्दन द्विवेदी, सीपी जोशी, मणिशंकर अय्यर, अहमद पटेल जैसे नेता सोनिया गाँधी के सबसे करीबी नेताओं में शामिल थे। कहा जाता है कि सोनिया गाँधी से इन नेताओं से सलाह लिए बिना कोई कदम नहीं उठाती थी। जिस समय भगवा आतंकवाद शब्द को राष्ट्रीय मीडिया में कांग्रेस में हवा दी गई, उस समय केंद्रीय गृहमंत्री आरके सिंह थे।
इन नेताओं ने भगवा आतंकवाद शब्द को मजबूत करने के लिए अंतिम समय तक प्रयास किया। समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट, मक्का मस्जिद ब्लास्ट, मालेगाँव ब्लास्ट जैसे कई आतंकवादी हमलों में हिंदुओं के नामों को आगे किया गया। मालेगाँव धमाका साल 2008 में हुआ था, लेकिन इससे काफी पहले ही कांग्रेस सरकार देश की बहुसंख्यक आबादी को विलेन बनाने के लिए काम पर लग चुकी थी।
महाराष्ट्र के मालेगाँव में 29 सितम्बर 2008 को एक मोटरसाइकिल में धमाका हुआ, जिसमें 6 लोग मारे गए। इसी मालेगाँव धमाका मामले के बाद कांग्रेस ने हिन्दू आतंकवाद की थ्योरी को आगे बढ़ाना चालू कर दिया। इस मामले में कई ऐसे लोगों को पकड़ा गया जो कि हिन्दू संगठनों से जुड़े हुए थे। कई ऐसे गवाह लाए गए, जिनसे जबरदस्ती बयान दिलवाए गए।
महाराष्ट्र के मालेगाँव में 29 सितम्बर 2008 को एक मोटरसाइकिल में धमाका हुआ, जिसमें 6 लोग मारे गए। इसी मालेगाँव धमाका मामले के बाद कांग्रेस ने हिन्दू आतंकवाद की थ्योरी को आगे बढ़ाना चालू कर दिया। इस मामले में कई ऐसे लोगों को पकड़ा गया जो कि हिन्दू संगठनों से जुड़े हुए थे। कई ऐसे गवाह लाए गए, जिनसे जबरदस्ती बयान दिलवाए गए।
RSS और VHP नेताओं को इस मामले में फँसाने की साजिश भी रची गई। यह अब काम तब की महाराष्ट्र ATS ने किया। मालेगाँव धमाके में साध्वी प्रज्ञा, कर्नल पुरोहित, स्वामी असीमानंद समेत कई हिन्दू व्यक्ति आरोपित बनाए गए। कर्नल पुरोहित को इस मामले में RDX देने का आरोपित बताया गया। साध्वी प्रज्ञा पर धमाके के लिए बाइक देने का आरोप लगा। जो उन्होंने 2 साल पहले ही बेच दी थी। 
इस धमाके में आरोपित बनाए गए कई लोगों को समझौता एक्सप्रेस और मक्का मस्जिद ब्लास्ट मामले में भी आरोपित बनाया गया था। इसी के बाद पूरा नैरेटिव बुना जाने लगा कि देश में हिन्दू आंतकवाद भी है। इन लोगों से मनवाफिक बयान दिलवाने के लिए इन लोगों को तरह-तरह से प्रताड़ित किया गया। इन पर थर्ड डिग्री का इस्तेमाल किया गया।
कर्नल पुरोहित को नंगा करके पीटा गया। उनकी टाँग तोड़ी दी गई। उनसे कहा गया कि मालेगाँव मामले में तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ और RSS और VHP के नेताओं का नाम लें और यह बात स्वीकार कर लें कि धमाका उन्हीं ने किया था। इसके अलावा साध्वी प्रज्ञा को इतना मारा गया कि उनकी रीढ़ की हड्डी में तक समस्या आ गई और उन्हें वेंटीलेटर पर भर्ती होना पड़ा। उन्हें पोर्न दिखाया गया।
इतना ही नहीं, साल 2013 में भगवा आतंकवाद को स्थापित करने के लिए 10 हिंदुओं का नाम जारी किया। NIA द्वारा जारी लिस्ट में उन लोगों के नाम जारी किए गए, जिनके तार संघ या अन्य हिंदुत्ववादी संगठनों से जुड़े थे। इनमें सुनील जोशी, लोकेश शर्मा, संदीप डांगे, स्वामी असीमानंद, देवेंद्र गुप्ता, राजेंद्र, चंद्रशेखर लेवे, रामजी कालसांगरा, कमल चौहान, मुकेश वासानी के नाम थे।
ये सभी समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट, मक्का मस्जिद ब्लास्ट, अजमेर ब्लास्ट में वांछित बताए गए थे। हालाँकि, बाद में कोर्ट ने असीमानंद को बरी कर दिया। कर्नल पुरोहित और साध्वी प्रज्ञा को बेल दे दिया। इसके अलावा भी अधिकांश आरोपित बरी हो गए। इन मामलों में गवाह बनाए गए 17 लोग अपने बयान से मुकर गए और कहा कि उनसे जबरन गवाही दिलवाई गई थी।
इस तरह कांग्रेस ने एक नैरेटिव बुना था। इसमें सोनिया गाँधी और उनके सलाहकारों की महती भूमिका बताई जाती है। हालाँकि, धीरे-धीरे यह नैरेटिव ध्वस्त हो गया और इसका खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ा। भगवा आतंकवाद शब्द कांग्रेस की ताबूत में एक मजबूत कील साबित हुआ। इसके बाद संसाधनों पर पहला अधिकार मुस्लिमों का और विवादास्पद सांप्रदायिक बिल जैसे कारनामों ने कांग्रेस को गर्त में पहुँचा दिया।
इसका ये परिणाम हुआ कि साल 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की भारी जीत हुई और वे प्रधानमंत्री बने। इसके बाद साल 2019 और साल 2024 में भी भाजपा अपनी जीत को लगातार दोहरा कर एक इतिहास रच दिया। कांग्रेस को जब तक इसका अहसास होता, तब तक उसकी नैया डूब चुकी थी। इस तरह कांग्रेस ने अपनी अस्तित्व को मिटाने की दिशा में कदम बढ़ा दिया।
आखिरकार यह कदम कितना घातक सिद्ध हुआ, यह सुशील कुमार शिंदे के बयान से सिद्ध हो गया। उनकी आवाज में इस बात का स्पष्ट दर्द है कि कांग्रेस को भगवा के साथ आतंकवाद शब्द का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था। भगवा सिर्फ शब्द नहीं है, यह भारतीय संस्कृति का रंग है। यह बलिदान और गर्व का प्रतीक है।
कांग्रेस के दरबारी नेताओं ने इसे कलंकित करके भारतीय संस्कृति को बदनाम करने का जो खेल रचा, उसमें सोनिया गाँधी जैसी असली भारत से अनजान नेत्री फँस गईं और लगभग 140 साल अपनी पुरानी पार्टी को इस मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया, जहाँ अस्तित्व की लड़ाई लड़नी पड़ रही है। 
अब जिस तरह राहुल गाँधी द्वारा भारत विरोधी ताकतों के संपर्क आकर जो बोल रहे हैं उससे LoP पद भी कलंकित ही नहीं हो रहा बल्कि संविधान की भी खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही है। जिसे I.N.D.I. गठबंधन में शामिल कोई गंभीरता से नहीं ले रहा विपरीत इसके राहुल की चापलूसी में लगे हुए है। उनका भी वही हाल होने वाला जो आज कांग्रेस का हो रहा है। 99 सीट आने पर कांग्रेस इसे अपनी जीत न समझे, बल्कि बुझता दीया हमेशा ज्यादा टिमटिमाता है।  

रहस्योघाटन : क्या UPA काल में पाकिस्तान के इशारों पर चलती थी भारत सरकार?

आज जिस तरह कांग्रेस के आतंकवाद, पाकिस्तान और चीन के साथ संबंधों का खुलासा हो रहा है, उसे देख हर देशप्रेमी कांग्रेसी को चाहे वह किसी भी जाति, धर्म, मजहब अथवा समुदाय से हो, देशहित में कांग्रेस और यूपीए समर्थक हर पार्टी को त्याग देना चाहिए। विशेषकर हर हिन्दू को। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं भूतपूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुख़र्जी ने भी अपनी पुस्तक तक में सोनिया के हिन्दू विरोधी होने का जिक्र किया है। 
स्मरण हो, 1962 भारत-चीन युद्ध के दौरान कम्युनिस्ट पार्टी ने जवानों के लिए खून देने से साफ इंकार कर दिया था। फिर किस आधार पर कम्युनिस्ट भारत की जनता से वोट मांगते हैं? और जनता भी इतनी मुर्ख है, चुनावों में इनको वोट दे आती है। 

लेकिन डाटा वैज्ञानिक डॉ गौरव प्रधान द्वारा सोनिया कांग्रेस का आतंकवाद के साथ चोली-दामन का साथ होने के कई प्रमाण दिए हैं। वैसे इन मुद्दों पर यदाकदा चर्चा होती रहती भी थी। लेकिन कांग्रेस को एक बेगुनाह दोषी के रूप में हमारा मीडिया प्रस्तुत करता रहा। हैरानी की बात यह है कि कुर्सी की खातिर यूपीए को समर्थन दे रही पार्टियां भी खामोश रही। चुनावों में ये ही सभी पार्टियां अपने-आपको बहुत बड़ा देश-हितैषी और जनहित की बात करते नज़र आते हैं, जबकि हकीकत में कर इसके विपरीत हैं। 

मेरी अपनी व्यक्तिगत राय यह है कि इन देश विरोधी पार्टियों को बेनकाब करने के लिए व्यापक स्तर पर अजित डोवाल, कर्नल पुरोहित, साध्वी प्रज्ञा और स्वामी असीमानंद आदि के कटु अनुभवों को उजागर करना चाहिए। 2019 चुनाव में साध्वी प्रज्ञा द्वारा अपने दर्द भरे अनुभव सार्वजनिक करने पर विपक्ष चुनाव आयोग तक पहुँच जाता है, लेकिन चुनाव आयोग भी सच्चाई को छिपाने के लिए प्रज्ञा पर ही अंकुश लगा देती है। 

जिस कश्मीरी कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद के राज्य सभा से विदाई समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी प्रशंसा में कसीदे तो खूब पढ़े, लेकिन आज़ाद की देश विरोधी हरकतों को क्यों भूल गए? क्या मोदी को आज़ाद की वास्तविकता नहीं मालूम थी?      
कर्नल पुरोहित का पाक में जासूसी नेटवर्क इतना मजबूत था कि आतंकी हाफिज सईद और लख्वी तक उनसे डरते थे। 

कर्नल पुरोहित 9 साल बाद नवी मुंबई की तालोजा जेल से रिहा हो गए है। उनकी रिहाई के बाद कई खुलासे सामने आ रहे है। एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा डाटा वैज्ञानिक गौरव प्रधान ने किया है। 

डॉक्टर गौरव प्रधान ने कई बड़े नेताओं पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं, जिनकी सत्यता की जांच की जानी बेहद जरूरी हो गयी है। 

2010 में होनी थी सोनिया गाँधी और हाफिज सईद की मुलाकात ?

डॉक्टर प्रधान ने खुलासा किया है कि 2010 में सोनिया गाँधी और हाफिज सईद की मुलाकात होनी थी। पाकिस्तानी आतंकी हाफिज सईद इटालियन माता से 2010 में मिलना चाहता था, मगर इटालियन माता ने इंकार कर दिया क्योंकि इसमें काफी रिस्क था। 

वैसे सोनिया गांधी की आतंकियों से हमदर्दी कोई नयी बात नहीं है, इससे पहले पूर्व कानून मंत्री सलमान खुर्शीद भी आजमगढ़ की चुनावी रैली में कबूल कर चुके हैं कि बाटला हाउस एनकाउंटर में आतंकियों के मारे जाने की तस्वीरें देखकर सोनिया गांधी रो पड़ी थी। 

वैसे चर्चा भी है कि डॉ सुब्रमण्यम स्वामी ने भी कई बार सोनिया गाँधी और आतंकवादियों के बीच कुछ साठगाँठ होने की बात करते रहते हैं। 

दाऊद को बचाने के लिए अजित डोवाल को करवाया गिरफ्तार?

डॉक्टर प्रधान ने ये भी खुलासा किया कि 2005 में सोनिया-मनमोहन की सरकार के दौरान आज के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल को मुंबई में गिरफ्तार कर लिया गया था, क्योंकि उन्होंने पाकिस्तान मे बैठे दाऊद को मारने की पूरी योजना बना ली थी। 

पाकिस्तान के कहने पर कर्नल पुरोहित को किया गिरफ्तार!

डॉक्टर गौरव प्रधान ने ये भी खुलासा किया कि 26/11 के मुंबई आतंकी हमले से ठीक पहले ही कर्नल पुरोहित को गिरफ्तार किया गया, क्योंकि कर्नल पुरोहित सेना के जासूस थे और 26/11 आतंकी हमले के प्लान के बारे में जानते थे। 

डॉ गौरव ने ये भी बताया कि कर्नल पुरोहित की पत्नी अपर्णा पुरोहित ने कहा था कि पाकिस्तान चाहता था कि कर्नल पुरोहित को गिरफ्तार कर लिया जाए और सोनिया-मनमोहन सरकार भी इसके बारे में विचार भी कर रही थी।

अपने खुफिया मिशन के दौरान  कर्नल पुरोहित पाकिस्तान के कई संवेदनशील और नापाक राज जान गए थे, कर्नल पुरोहित का बड़ा जासूसी नेटवर्क भी पाकिस्तान में खुफिया जानकारियां जुटा रहा था। इसीलिए पाकिस्तान कर्नल पुरोहित की कस्टडी की मांग कर रहा था..

गौरव प्रधान ने आगे खुलासा किया कि पाकिस्तानी जनरल पाशा के कहने पर ही कर्नल पुरोहित को ठीक 26/11 आतंकी हमले से पहले गिरफ्तार कर लिया गया, क्योंकि पाकिस्तानियों को शक था कि कर्नल पुरोहित को इस आतंकी हमले की भनक लग चुकी थी और वो हमले को विफल कर सकते थे..

कश्मीरी और कोंग्रेसी नेता आतंकियों की मदद करते थे?

इसके बाद डॉक्टर प्रधान ने और भी ज्यादा सनसनीखेज खुलासे करते हुए बताया कि कर्नल पुरोहित को पता चल गया था कि एक कश्मीरी नेता जो जम्मू कश्मीर का मुख्यमंत्री भी था, वो और कांग्रेसी नेता “मिया आज़ाद” (गुलाम नबी आज़ाद) एक ही गाड़ी में घुमते थे और उनके साथ उसी गाडी में आतंकी भी घूमते थे। गाड़ी पर लाल बत्ती लगी होने के चलते किसी को कानो-कान खबर तक नहीं होती थी। इसी नेता की गाड़ी का इस्तेमाल करके 2005 से लेकर 2010 तक कश्मीर में पैसों की फंडिंग में भी की गयी। 

हिन्दू आतंकवाद जुमले को साबित करने की साजिश?

डॉक्टर गौरव प्रधान ने खुलासा किया कि 26/11 मुंबई हमले का पूरा षड्यंत्र हिन्दुओ को आतंकी घोषित करने के लिए पाकिस्तान ने रचा था, ताकि इस्लामिक कट्टरपंथी आतंकियों पर से ध्यान हटाया जा सके। प्लान था कि आतंकी हमला करने के बाद सभी आतंकियों को मार दिया जाएगा और इस हमले को भी हिन्दू आतंकवाद से जोड़ दिया जाएगा..

उन्होंने बताया कि “26/11 आरएसएस की साजिश” नाम की किताब तो पहले से छाप कर रख ली गयी थी, जिसका विमोचन कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह ने खुद किया था। गौरव प्रधान ने खुलासा किया कि जब आतंकी मुंबई में घुसे, उससे पहले ही देश के कई नेता इसके बारे में जानते थे और उन्होंने हेमंत करकरे को ख़ास निर्देश दिए थे कि एक भी आतंकी ज़िंदा ना बचने पाए..

मगर सिपाही तुकाराम ओम्बले ने कांग्रेस और पाकिस्तान की सारी योजना पर पानी फेर दिया और आतंकी कसाब को जिन्दा पकड़ लिए गया। आतंकियों ने हेमंत करकरे को पहचाना नहीं और धोखे से उन्हें गोली मार दी..

पी चिदंबरम, सुशील कुमार शिंदे, अहमद पटेल और सोनिया गांधी का साजिश में हाथ?

इस पूरी साजिश के पीछे डॉक्टर प्रधान ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम, पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे और अहमद पटेल का नाम लिया। उन्होंने साजिश के पीछे इटालियन आंटी कहते हुए सोनिया गाँधी की और भी इशारा किया। 

लाल कृष्ण आडवाणी, नरेंद्र मोदी और बाल ठाकरे को मारने की साजिश?

डॉक्टर प्रधान ने खुलासा किया कि मुद्रिक में पाकिस्तानियों और भारत के गद्दारों की एक मीटिंग हुई थी, पाकिस्तान भारत की सैन्य ख़ुफ़िया एजेंसियों के बारे में जानना चाहता था। इसी मीटिंग में योजना रखी गयी कि बीजेपी नेता लाल कृष्ण आडवाणी, गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे को मार दिया जाये। मगर इटालियन माता ने इंकार कर दिया क्योंकि 2009 के चुनाव आने वाले थे और हिंदूवादी नेताओं के मारे जाने से कांग्रेस को चुनाव में नुक्सान होने का डर था। 

मोदी को फंसाने के लिए असीमानंद पर दबाव?

उन्होंने आगे खुलासा किया कि 26/11 हमले का पूरा का पूरा प्लान राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) को आतंकी संगठन बताकर हिन्दू आतंकवाद को सिद्ध करने के मकसद से बनाया गया था। इसी तरह समझौता एक्सप्रेस ट्रेन में ब्लास्ट के बाद गिरफ्तार किये गए पाकिस्तानी आतंकी को छोड़ दिया गया और स्वामी असीमानंद को इस केस में फंसा दिया गया। 

स्वामी असीमानंद को गिरफ्तार करके थर्ड डिग्री की यातनाएं दी गयीं और उनसे कहा गया कि यदि इन यातनाओं से बचना है तो गुजरात के एक बड़े बीजेपी नेता (नरेंद्र मोदी) का नाम ले लो।  इंकार करने पर असीमानंद को और यातनाएं दी गयी, ऐसा ही साध्वी प्रज्ञा के साथ भी किया गया। 

योजना थी कि 26/11 के आतंकी हमले में सभी आतंकियों को मार कर सारा इल्जाम आरएसएस पर लगा कर संघ को आतंकी संगठन घोषित किया जायेगा। इसके बाद नरेंद्र मोदी और अमित शाह को भी इसी तरह के केस में फंसा दिया जाएगा क्योंकि इटालियन माता 2004 से ही जानती थी की ये दोनों उसके लिए बड़ा खतरा है। 

10 सालों तक जनरल पाशा का था भारत पर राज?

गौरव प्रधान ने दावा किया कि दरअसल 2004 से 2014 तक देश में मनमोहन-सोनिया नहीं बल्कि पाक आईएसआई का जनरल पाशा राज कर रहा था, जो वो चाहता था वही यहाँ होता था।  डॉक्टर गौरव प्रधान ने बताया कि कर्नल पुरोहित का पाकिस्तान में काफी अच्छा जासूसी नेटवर्क था, जिसके कायल खुद अजित डोभाल भी थे। अजित डोभाल भी ये देखकर हैरान थे कि कर्नल पुरोहित ने अपने इसी जासूसी नेटवर्क के दम पर सात बार पाकिस्तान की साजिशों और हमलों को विफल कर दिया था..

डॉक्टर प्रधान ने ये खुलासा भी किया कि कर्नल पुरोहित का पाकिस्तान में जासूसी नेटवर्क इतना मजबूत था कि आतंकी हाफिज सईद और लख्वी तक उनसे डरते थे। इसी डर से दोनों आतंकी आकाओं की सुरक्षा भी पाकिस्तान ने बढ़ा दी थी। 

कर्नल पुरोहित पाक खुफिया एजेंसी और पाक आतंकियों दोनों के निशाने पर थे। जनरल पाशा के इशारे पर कांग्रेस सरकार ने कर्नल पुरोहित को गिरफ्तार कर जेल में डलवा दिया और बेपनाह यातनाएं दी। पूरी कोशिश की गयी कि इस देशभक्त सेना के अफसर को आतंकी घोषित कर दिया जाये!