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एक साध्वी को पोर्न दिखाने, अंडा खिलाने, निर्वस्त्र करने वाले पुरुष पुलिस वालों को दंड कब? रात भर पिटाई, रीढ़ की हड्डी तोड़ दी, 24 दिनों तक रखा भूखा… आज भी ‘कांग्रेस का टॉर्चर’ भोग रहीं प्रज्ञा सिंह ठाकुर

                   साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर (फाइल फोटो- facebook- sadhvi pragya singh thakur)
मालेगांव ब्लास्ट पर जुलाई 31 को आया निर्णय मामूली निर्णय नहीं। इन निर्णय ने कांग्रेस ही इसकी सारी समर्थक पार्टियों UPA से लेकर INDI गठबंधन सभी को बेनकाब कर दिया है। इतना ही नहीं, हिन्दू और मुसलमान सभी के लिए आंखे और दिमाग खोलने वाला है। किस तरह देश में हिन्दू-मुस्लिम फसाद बनाये रखा था। जो पार्टियां अपने धर्म की नहीं हो सकती किसी की नहीं हो सकती। हिन्दुओं कांग्रेस, वामपंथियों और INDI गठबंधन को वोट देने से पहले इन फसादी पार्टियों से पूछो कि क्या कसाब समेत जितने भी इस्लामिक आतंकवादियों को पकड़ जेलों में रखने पर उन्हें हलाल खिलाया था या झटका? जब उनके मजहब देखते हुए हलाल परोसा गया फिर एक साध्वी को अंडा खिलाकर क्यों साध्वी की सात्विकता को बर्बाद किया? किसके कहने पर ऐसा घिनौना अत्याचार किया गया था? जब साध्वी एक महिला थी फिर क्यों पुरुष पुलिस कर्मियों को उसे निर्वस्त्र करने को कहा गया? क्या देश में महिला पुलिसकर्मियों का अकाल पड़ गया था? 
समाचार है कि इस फैसले के खिलाफ कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट जाने का प्लान कर रहे हैं, हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट उपरोक्त प्रश्नों का भी जवाब इन हिन्दू विरोधियों, ATS और सरकार से पूछे। साध्वी प्रज्ञा कसूरवार थी या नहीं एक महिला थी। क्यों एक महिला वो भी एक साध्वी को पोर्न दिखाई?   

  

मालेगाँव ब्लास्ट 2008 मामले में NIA की विशेष अदालत ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत सभी 7 आरोपितों को बरी कर दिया है। 17 वर्षों बाद भले ही ‘भगवा आतंकवाद’ की कहानी झूठी साबित हो गई हो लेकिन आरोपित बनाई गईं साध्वी प्रज्ञा को मिली प्रताड़ना कांग्रेस के काले कारनामों का चिट्ठा दिखाती है।

कोर्ट के निर्णय आने के बाद साध्वी प्रज्ञा ने जज के सामने अपनी बात भी रखी। उन्होंने कहा, “मैंने हमेशा ही कहा कि जिन्हें भी जाँच के लिए बुलाया जाता है, उसके पीछे कोई आधार होना चाहिए। मुझे बिना किसी आधार के जाँच के लिए बुलाया गया और गिरफ्तार कर प्रताड़ित किया गया। मेरा पूरा जीवन बर्बाद हो गया। मैं एक साधु का जीवन जी रही थी, पर मुझे फँसाकर झूठे आरोप लगाए गए। कोई भी हमारे साथ खड़ा होने को तैयार नहीं था।”

अपनी बात जारी रखते हुए साध्वी प्रज्ञा ने आगे कहा, “मैं जिंदा हूँ क्योंकि मैं एक संन्यासी हूँ। एक साजिश के तहत भगवा को बदनाम किया गया। आज भगवा की जीत हुई है, हिंदुत्व की जीत हुई है और ईश्वर उन आरोपितों के दंड देगा। हालाँकि, जिन्होंने भारत और भगवा को बदनाम किया, उन्हें अभी तक आपने गलत साबित नहीं किया है।”

गौरतलब है कि 29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के मालेगाँव में भिक्खू चौक मस्जिद के पास धमाका हुआ। मोटरसाइकिल में बांधकर किए गए इस धमाके में 6 लोग मारे गए थे और 100 से भी अधिक लोग घायल हुए थे। इसके तहत साध्वी प्रज्ञा समेत 7 लोगों पर UAPA, आतंकवाद, आर्म्स एक्ट और IPC की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। 17 वर्षों तक इसे लेकर मुकदमा चला। 323 गवाह पेश किए गए। इनमें से 37 गवाह अपने बयान से मुकर गए। इसके अलावा बचाव पक्ष के भी 8 गवाह पेश हुए।

प्रताड़ना के 17 वर्ष

मध्य प्रदेश के भोपाल से भाजपा की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा को ब्लास्ट के बाद 23 अक्टूबर 2008 को ATS ने गिरफ्तार किया। साध्वी प्रज्ञा पर आरोप लगा कि विस्फोट में इस्तेमाल की गई एलएमएल फ्रीडम मोटरसाइकिल के इंजन और चेसिस नंबर से पता चला कि वह बाइक साध्वी प्रज्ञा के नाम पर रजिस्टर्ड थी। हालाँकि रजिस्ट्रेशन नंबर फर्जी पाया गया था।

महाराष्ट्र ATS ने दावा किया था कि उस मोटरसाइकिल का इस्तेमाल विस्फोटक लगाने के लिए किया गया और इसी आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया। इस दौरान उन्हें इस कदर प्रताड़ित किया गया कि मेडिकल इमरजेंसी के तहत वह वेंटिलेटर तक पहुँच गईं।

अप्रैल 2011 में यह मामला राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को सौंपा गया, जिसने ATS की जाँच में कई खामियाँ पाईं। NIA ने अपनी जाँच में ये भी कहा कि मोटरसाइकिल भले ही प्रज्ञा के नाम पर थी, लेकिन उसका इस्तेमाल रामचंद्र कलसांगरा नामक फरार आरोपित कर रहा था।

UAPA के तहत साध्वी पर की गई कार्रवाई भी दोषपूर्ण मानी गई। NIA ने जब जमानती वारंट जारी किया तब साध्वी प्रज्ञा ने साल 2020 में अपने साथ हुए अमानवीय व्यवहार को लेकर रिपब्लिक टीवी को एक साक्षात्कार दिया।

इसमें उन्होंने बताया था कि मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह के सामने 3-4 पुलिसकर्मियों ने उन्हें बहुत अधिक प्रताड़ना दी थी। उन्हें हिरासत में लेकर पूरी रात बेल्ट से इस तरह पीटा गया कि उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गई और उन्हें वेंटिलेटर पर जाना पड़ा था।

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने बताया कि हिरासत के दौरान उनको पुरुष कैदियों के साथ रखकर पॉर्न वीडियो दिखाया जाता था और साध्वी होने का लिहाज किए बिना उनसे भद्दे सवाल किए जाते थे। उन्होंने बताया था कि पहले उनको भगवा आतंकी कहा गया, फिर भारत को आतंकवादी देश घोषित करवाने का प्रयास किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि ये सारा षड्यंत्र कॉन्ग्रेस का था।

भूख, मार और बिजली के झटके

साध्वी प्रज्ञा ने बताया था कि उन्हें चमड़े की बेल्ट से पीटा जाता था। उन्हें 24 दिनों तक भूखा रखा गया था। उनको बिजली के झटके दिए जाते थे। गाली-गलौज तो उनके साथ आम बात हो गई थी। उनको लगातार पीटने के लिए 5-6 पुलिस वाले लगाए जाते थे और जब वह थक जाते थे तो दूसरे पुलिसकर्मी उनको पीटने लग जाते थे। इनके पैरे के तलवे तक में बेल्ट से पीटा गया। पिटाई के दौरान उनका पूरा नर्वस सिस्टम सुन्न पड़ जाता था।

साध्वी प्रज्ञा की यातनाएँ सिर्फ बेल्ट की मार तक ही सीमित नहीं रहीं थीं। उन्हें उल्टा लटकाकर मारा जाता था और हाथों को गर्म पानी में नमक डालकर डुबोया जाता था। हाथ फट जाते थे तो जख्मों पर नमक छिड़का जाता था।

उन्होंने बताया कि जेल में उन्हें इतनी गंदी-गंदी गालियां दी जाती थीं जिन्हें कोई स्त्री सुन भी नहीं सकती। उन्हें निर्वस्त्र किए जाने की बार-बार धमकी दी जाती थी। भोजन में उन्हें अंडा खाने के लिए मजबूर किया जाता था जबकि वे शाकाहारी हैं।

साध्वी प्रज्ञा को मिली प्रताड़नाओं से उनके पूरे शरीर में सूजन आ गई थी। कई हिस्सो में पस पड़ गया था। आज भी वह कई शारीरिक परेशानियों से जूझ रही हैं। उन्हें कैंसर और न्यूरो की बीमारी तक हो गई। अपनी प्रताड़ना के बारे में बताते हुए साध्वी प्रज्ञा कोर्ट में रो पड़ी थीं।

अवलोकन करें:-

आज जब साध्वी प्रज्ञा ठाकुर समेत सभी आरोपितों के बरी किया गया तो साध्वी ने कहा कि षडयंत्र के तहत भगवा को बदनाम किया गया, आज हिंदुत्व की जीत हुई है।

कर्नल का पैर तोड़ा, नंगा कर प्राइवेट पार्ट पर मारा; भगवा आतंकी का लगा लें ठप्पा, बेगुनाही के बावजूद बन जाएँ मालेगाँव ब्लास्ट के गुनाहगार: कैसे कांग्रेस की सरकार में सेना के अधिकारियों पर ढाया गया जुल्म, पत्नी-बेटी के रेप की देते थे धमकी

कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित (बाएँ) और मेजर रमेश उपाध्याय (दाएँ) (साभार: Hindustan Times/Navbharat times)
कोर्ट से सच्चाई छिपाने का कांग्रेस का एक लम्बा इतिहास है। याद हो, सच्चाई जानने जब कोर्ट के आदेश पर अयोध्या में राममन्दिर परिसर में खुदाई हुई, इतने प्रमाण मिले सब छुपा लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट में सबूत के तौर पर दिखाया सिर्फ एक खम्बा। ये तो तत्कालीन उत्तर प्रदेश पुरातत्व निदेशक के के मोहम्मद ने सेवानिर्वित होने के बाद स्पष्ट लिखा कि मन्दिर कभी का बन गया होता अगर कांग्रेस और वामपंथियों ने कोर्ट में झूठ नहीं बोला होता। खुदाई में मन्दिर होने के बहुत प्रमाण मिले जो कोर्ट में पेश नहीं किये गए। ठीक वही हिन्दू विरोधी नीति देश में हो रहे धमाकों में इस्लामिक आतंकवादियों को बचाने निर्दोष और बेगुनाह हिन्दुओं चाहे वह साधु, संत, साध्वी या फौजी ही क्यों न हो, को पकड़ हिन्दू-भगवा आतंकवाद कहा जाता था।       

देशभक्ति और देश को आज़ादी दिलवाने की दुहाई देने वाली कांग्रेस और इसकी समर्थक पार्टियों ने इस्लामिक आतंकवादियों को बचाने हमारे फौजियों को भी अपमानित करने का कोई मौका नहीं छोड़ा। आर्मी चीफ बिपिन रावत(स्व) को तो कांग्रेस के एक नेता ने "सड़क का गुंडा" तक बोल दिया था। 

मालेगांव धमाके को अंजाम देने वाले इस्लामिक आतंकवादियों को बचाने बेगुनाह हिन्दुओं को जेल में डाल यूपीए सरकार में अपनी महत्वकांक्षा बनाये रखने के लिए तत्कालीन ATS हेमंत करकरे ने इन बेगुनाह साधु, साध्वी और फौजियों पर जुल्म करने हैवानियत की परिकाष्ठा तक को तार-तार कर दिया था। ये तो परमपिता परमेश्वर का इन पर आशीर्वाद था कि आज हमारे बीच है। अन्यथा इनकी राम नाम सत्य करने की करकरे ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। उस प्राणी की तकलीफ का अनुमान लगाया जा सकता है जब उसके प्राइवेट पार्ट पर प्रहार किया जाए। 

तरस आता है उन हिन्दुओं पर जो कांग्रेस को समर्थन और वोट देते हैं। यूपीए समय में मुस्लिम तुष्टिकरण अपनी चरम पर था। हिन्दुओं को गुलाम बनाए जाने Communal Violence Bill बनाया गया। ये तो हिन्दुओं का भाग्य था कि 2014 चुनावों में यूपीए सत्ता से बाहर हो गयी। अगर दुर्भाग्य से 2014 में यूपीए सरकार वापस आ गयी होती हिन्दू त्राहिमाम कर रहा होता। सिर्फ कांग्रेस ही नहीं यूपीए में शामिल जितनी भी पार्टियां है हिन्दू एकजुट होकर पूछे कि इस्लामिक आतंकवादियों को बचाने क्यों "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" कहकर हिन्दुओं को अपमानित किया गया था?

 

कांग्रेस अपनी नीचता से अभी भी बाज नहीं आ रही। कल(31 जुलाई) को IndiaTV पर आज की बात में समाचार था कि कांग्रेस नेता पृथ्वी राज चौहान कह रहा है कि हिन्दू नहीं सनातन आतंकवाद कहना चाहिए।          

मालेगाँव बम धमाका मामले में गुरुवार (31 जुलाई, 2025) को साध्वी प्रज्ञा, कर्नल श्रीकांत पुरोहित और मेजर रमेश उपाध्याय समेत 7 लोगों को बाइज्जत बरी कर दिया। कोर्ट को इन लोगों के खिलाफ मालेगाँव धमाके में कोई सबूत नहीं मिले। इसी के साथ पिछले 17 वर्षों से चली आ रही ‘भगवा आतंकवाद’ की थ्योरी का अंतिम संस्कार हो गया।

17 वर्षों तक इन हिन्दुओं को केवल इसलिए प्रताड़ित किया जाता रहा ताकि कांग्रेस की मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति चमक सके। कांग्रेस की इस तुष्टिकरण की राजनीति का शिकार भारतीय सेना के दो अफसर भी हुए। उनके परिवारों तक को नहीं छोड़ा गया, उनके सैन्य करियर बर्बाद कर दिए गए, देश की दशकों तक सेवा के बावजूद उन्हें जनता में शर्मिंदगी झेलनी पड़ी और वामपंथी मीडिया ने उनका वर्षों तक पीछा किया।

कर्नल का पैर तोड़ा, नंगा कर प्राइवेट पार्ट पर मारा

भारतीय सेना में देश की सेवा करने वाले लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित को कांग्रेस  सरकार ने आतंकवादी साबित करने की कोशिश की। उन्हें मालेगाँव ब्लास्ट 2008 की जिम्मेदारी लेने के लिए यातनाएँ दी गईं थी। कर्नल से सेना की खुफिया जानकारी जुटाने की कोशिश की गई। कर्नल के साथ पाकिस्तान पहुँचे विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान से भी बुरा बर्ताव किया गया।

यहाँ तक कि कर्नल का पैर तोड़ा गया, नंगा कर प्राइवेट पार्ट पर मारा गया, बाल पकड़कर खींचे जाता था। उन्हें वर्षों तक जेल में रखा। इस दौरान उन्हें सेना की नौकरी से भी हाथ धोना पड़ गया। महाराष्ट्र ATS गवाहों को भी बंदूक की नोक पर बयान दिलवाती थी। कोर्ट को कर्नल पुरोहित ने बताया था कि यह सब तत्कालीन UPA सरकार और राज्य की कांग्रेस NCP सरकार के इशारे पर किया गया था।

कोर्ट के सामने कर्नल पुरोहित ने बयान दिया था कि कांग्रेस सरकार ने तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ, विश्व हिंदू परिषद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोगों को फँसाने की साजिश की थी। कर्नल से भी मामले में उनका नाम लेने का दबाव डाला गया था। कर्नल के परिवार को भी फँसाने की धमकी दी गई थी।

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क्या कांग्रेस के DNA में ही हिन्दू जहर है? कांग्रेस ने जहर उगलना नहीं किया बंद: कांग्रेस MP रेणुका च
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मेजर की बेटी से रेप और पत्नी को नंगा करने की दी गई थी धमकी

मेजर रमेश उपाध्याय के सेनानी थे। उन्हें भी तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने मालेगाँव बम धमाका मामले में फँसाया गया था। कांग्रेस सरकार के इशारे पर ATS उन्हें प्रताड़ित करती थी। यहाँ तक कि उनकी पत्नी को नंगा घुमाने और बेटी के रेप तक की धमकी दी गई। मेजर उपाध्याय को भी बम धमाके की जिम्मेदारी लेने के लिए मानसिक और शारीरिक शोषण किया गया था।
ATS ने मेजर उपाध्याय को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया था। मेजर पर MCOCA लगाने की धमकी देकर आतंकवादी करार दिया गया, उनके किराए के घर को भी खाली करवाया गया। मेजर का परिवार सड़क पर आ गया था। मेजर के शादीशुदा बेटियों के घर पर भी ATS ने छापा मारा। मेजर का पॉलीग्राफ और नारको टेस्ट भी करवाया गया और क्लीन चिट मिलने के बाद कोर्ट के सामने पेश नहीं की।

कांग्रेस को वोट देने वाले हिन्दुओं अब तो आंखें खोल लो; कोर्ट में टिक नहीं सकी कांग्रेस की ‘भगवा आतंकवाद’ की थ्योरी, साध्वी प्रज्ञा-कर्नल पुरोहित सहित सभी बरी: पीड़ितों को मिलेगा 2-2 लाख रूपए का मुआवजा

अपने मुस्लिम वोट बैंक को खुश करने इस्लामिक आतंकवादियों को बचाने हिन्दू विरोधी कांग्रेस समर्थित यूपीए द्वारा "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" नाम देकर हिन्दू नहीं सनातन को कलंकित किया जा रहा था। वैसे सनातन को कलंकित करने का सिलसिला अभी भी नहीं बंद नहीं है। जब साध्वी प्रज्ञा ने अपने चुनाव अभियान हेमंत करकरे, ATS अधिकारी के खिलाफ बयान देने पर कांग्रेस चुनाव आयोग पहुँच गयी थी। करकरे ने जितने अत्याचार इन तीनों पर किये थे अगर उसका 1% भी किसी मुस्लिम आतंकवादी के साथ कर दिया होता वह आतंकवादी जेल से बाहर ही नहीं आता बलवा मच गया होता। 

संक्षेप में इतना ही कहना कि इन तीनों की पीड़ा को अप्रैल/मई 2012 के Organiser के पृष्ठ 18 पर Agenga में तत्कालीन महामहिम प्रतिभा पाटिल के नाम प्रकाशित पत्र(सम्पादित) में पढ़ सकते हैं। अगर Organiser में पूरा पत्र पढ़ने को मिल जाए, रोंगटे  खड़े हो जायेंगे।      

साल 2008 के मालेगाँव ब्लास्ट मामले में NIA की एक विशेष अदालत ने गुरुवार (31 जुलाई 2025) को सभी आरोपितों को बरी कर दिया है। इसमें बीजेपी की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह, लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित समेत कुल 7 लोग शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि NIA आरोपों को साबित करने में नाकाम रही है। कोर्ट ने कहा कि NIA ने यह तो साबित कर दिया कि मालेगाँव में बम धमाका हुआ था, लेकिन यह साबित करने में नाकाम रही कि बाइक में बम प्लांट किया गया था। इसी के साथ कोर्ट ने पीड़ित परिवार को ₹2 लाख मुआवजा देने के आदेश दिए हैं।

कोर्ट ने विस्फोट के सभी छह पीड़ितों के परिवारों को 2-2 लाख रुपये और सभी घायल पीड़ितों को 50,000 रुपये मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है। एनआईए की स्पेशल कोर्ट फैसला आने से पहले मामले में आरोपी भाजपा की पूर्व सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित समेत सभी सात आरोपी अदालत पहुंच गए थे।

मामला 29 सितंबर 2008 में हुए मालेगाँव बम धमाका से जुड़ा है, जिसमें 6 लोगों की मौत हुई थी। हादसे में 100 से अधिक लोग घायल हुए थे। शुरुआत में मामले की जाँच महाराष्ट्र ATS ने की थी, लेकिन 2011 में NIA को जाँच सौंपी गई थी। NIA ने 5 साल की जाँच के बाद चार्जशीट में 7 लोगों को आरोपित बनाया था।

इनमें भोपाल की पूर्व बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, कर्नल प्रसाद पुरोहित, रमेश उपाध्याय अजय राहिलकर, 

इसी ब्लास्ट से भगवा आतंकवाद जैसे शब्दों को जन्म हुआ था
मामले में पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित (रि) सहित सात लोग आरोपी बनाए गए हैं। मामला देश के अति संवेदनशील मामलों में से एक है, क्योंकि मालेगांव ब्लास्ट के बाद से ही हिंदू आतंकवाद और भगवा आतंकवाद जैसे शब्दों का जन्म हुआ। बता दें, ब्लास्ट केस में कुल 12 लोगों पर आरोप लगे थे लेकिन स्पेशल एनआईए कोर्ट में केस शुरू होने से पहले ही पांच लोगों को बरी कर दिया गया था।  
19 अप्रैल को सुरक्षित रखा था आदेश

19 अप्रैल को अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था. शुरुआत में सातों आरोपियों को फैसले के लिए आठ मई को पेश होने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, बाद में फैसला 31 जुलाई के लिए पुननिर्धारित कर दिया गया। 

हेमंत करकरे ने की थी इस मामले में जांच

केस की जांच का प्रारंभिक संचालन एटीएस के विशेष महानिरीक्षक हेमंत करकरे कर रहे थे। बाद में 26/11 के मुंबई आतंकवादी हमलों के दौरान वे शहीद हो गए थे। मामले में एटीएस ने 2009 में अपना आरोपपत्र दायर किया था।

सुधाकर चतुर्वेदी, समीर कुलकर्णी और सुधाकरधर द्विवेदी शामिल थे।

मालेगांव की हिंसा और कांग्रेस का काला चेहरा

अजय कुमार, उगता भारत 
इतना ही नहीं देश की राजनीति का रंग-ढंग भी बदल गया है। जो नेता पहले चुनाव नजदीक आते ही मौलानाओं और मुस्लिम धर्मगुरुओं की चौखट पर पहुंच जाया करते थे, इफ्तार पार्टियां देना जिनका अपना शगल था, वह अब सत्ता के लिए मंदिर-मंदिर चक्कर लगा रहे हैं।

2008 में महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए बम विस्फोट का मामला एक बार फिर से सुर्खियां बटोर रहा है। वजह वही पुरानी है और निशाने पर एक बार फिर से कांग्रेस और उसके नेता हैं, जो करीब दो दशकों से देश में ‘हिन्दू आतंकवाद’ का नैरेटिव सेट करने में लगे हैं। कांग्रेस का दोहरा चरित्र ही है कि जब कोई इस्लाम से ताल्लुक रखने वाला आतंकवादी पकड़ा जाता है तो वह चीखने चिल्लाने लगती है कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता है, लेकिन इसके उलट देश पर कथित तौर पर हिन्दू आतंकवाद का ‘लेबल’ लगाने के लिए 2008 में हुए महाराष्ट्र के मालेगांव विस्फोट के असली गुनाहागारों को छोड़कर हिन्दू नेताओं और साधु-संतों को फंसाने के लिए उसकी तरफ से साजिश रची जाने लगती है।

इतना ही नहीं इस कृत्य को अमलीजामा पहनाने के लिए कई कांग्रेसी नेता नहीं तत्कालीन महाराष्ट्र और दिल्ली की मनमोहन सरकार ने भी अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। इसी के बाद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, सुधाकर द्विवेदी, मेजर रमेश उपाध्याय (सेवानिवृत्त), अजय रहीरकर, सुधाकर द्विवेदी, सुधाकर चतुर्वेदी और समीर कुलकर्णी आदि सभी को जेल भेज दिया गया था। आज की तारीख में यह सभी जमानत पर बाहर हैं। उस समय हालत यह थी कि इन्हें अपराध कबूलने के लिए बुरी तरह से टार्चर भी किया गया था। अब यह खुलासा हुआ है कि उस समय की कांग्रेस सरकारों ने तत्कालीन सांसद और मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नेता इंद्रेश कुमार को भी विस्फोट कांड में आरोपी बनाने का षड्यंत्र रचा था। रिपोर्टों के मुताबिक मालेगांव विस्फोट कांड के समय कांग्रेस के नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और उस समय के केन्द्रीय मंत्री पी. चिदंबरम कई पुलिस अधिकारियों और एटीएस के साथ मिलकर इस साजिश को अंजाम देने में लगे थे, इसमें काफी हद तक वह सफल भी हो गए थे, लेकिन समय बदला, सरकारें बदलीं और कांग्रेस की साजिश से पर्दा भी धीरे-धीरे हटने लगा है।
इतना ही नहीं देश की राजनीति का रंग-ढंग भी बदल गया है। जो नेता पहले चुनाव नजदीक आते ही मौलानाओं और मुस्लिम धर्मगुरुओं की चौखट पर पहुंच जाया करते थे, इफ्तार पार्टियां देना जिनका अपना शगल था, वह अब सत्ता के लिए मंदिर-मंदिर चक्कर लगा रहे हैं। माथे पर तिलक लगाए घूम रहे हैं। ऐसे समय में जब हिन्दुत्व की राजनीति चरम पर है तब मालेगांव विस्फोट कांड में हिन्दू नेताओं और धर्मगुरुओं के फंसाने की खबर का खुलासा होने के बाद कांग्रेस के लिए मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं लेकिन सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि इस तरह के षड्यंत्र का पर्दाफाश होने के बाद वह बुद्धिजीवी चुप्पी साधे हुए हैं जो मुसलमानों के खिलाफ कथित उत्पीड़न के नाम पर हो-हल्ला मचाते रहते हैं। अब कोई पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, राहुल गांधी, चिदंबरम, सलमान खुर्शीद, मणिशंकर अय्यर, शशि थरूर, ओवैसी, फिल्म अभिनेता नसीरूद्दीन शाह, आमिर खान, शाहरूख खान, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, राजद के तेजस्वी यादव जैसे लोगों और नेताओं से यह कल्पना कैसे कर सकता है कि यदि यह प्रोपोगंडा करते मिल जाते हैं कि देश में मुसलमान डर हुआ है तो इस बात पर भी अपनी प्रतिक्रिया देंगे कि मालेगांव विस्फोट कांड में हिन्दू नेताओं को फंसाने की जो साजिश की गई थी, वह शर्मनाक थी।
दरअसल, मालेगांव विस्फोट कांड के एक गवाह के यह खुलासा करने के बाद राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ कि उसके ऊपर हिन्दू नेताओं का नाम लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। आश्चर्य नहीं कि मुंबई के तत्कालीन आतंकवाद निरोधक दस्ते यानी एटीएस ने उसे योगी आदित्यनाथ और आरएसएस के चार नेताओं का नाम लेने के लिए मजबूर भी किया था और प्रताड़ित भी। तब इस एटीएस के अतिरिक्त आयुक्त थे परमबीर सिंह, जो इस समय कई गंभीर आरोपों से घिरे हुए हैं और फिलहाल निलंबित हैं। मालेगांव मामले के गवाह ने एटीएस पर जो सनसनीखेज आरोप लगाया, वह एनआईए की विशेष अदालत के समक्ष लगाया। यह पहली बार नहीं, जब इस तरह की बातें सामने आई हैं। इससे पहले भी मालेगांव मामले के अन्य गवाह इसी तरह के आरोप लगा चुके हैं। यह भी ध्यान रहे कि महाराष्ट्र में गुजरात पुलिस के हाथों एक मुठभेड़ में मारी गई लश्कर-ए-तैयबा की आतंकी इशरत जहां को किस प्रकार कांग्रेस और अन्य दलों के नेताओं द्वारा निर्दोष साबित करने की सियासी मुहिम चलाई गई थी। इसकी भी अनदेखी नहीं की जा सकती कि 2008 के मालेगांव कांड में हुई गिरफ्तारियों के बाद तुष्टिकरण की सियासत करने वालों द्वारा ही कथित तौर पर हिंदू आतंकवाद का जुमला उछाला गया था।
यह पहली घटना नहीं थी। 2008 में ही मुंबई में भीषण आतंकी हमले के बाद एक पुस्तक लिखकर देश-दुनिया को दहलाने वाले इस हमले को आरएसएस की साजिश बताने की बड़ी बेशर्मी से कोशिश की गई थी। जिन्होंने भी ऐसी कोशिश की, उन्हें शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा, लेकिन इससे यह तो पता चल ही गया कि किस तरह से समय-समय पर कुछ नेताओं और सरकारों द्वारा हिंदू आतंकवाद का हौवा खड़ा करने की चेष्टा की जाती रही थी। इस कृत्य में तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के कई केंद्रीय मंत्री भी शामिल थे। उनकी ओर से भी यह कहा जा रहा था कि हिंदू आतंकवाद उभर आया है। यह वह दौर था, जब तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अमेरिकी राजदूत से कहा था कि भारत को लश्कर और जैश सरीखे आतंकी संगठनों से ज्यादा खतरा हिंदू संगठनों के अतिवाद से है। इस सबको देखते हुए यह आवश्यक ही नहीं, अनिवार्य है कि इस सवाल का जवाब तलाशने की कोई कोशिश की जाए कि मालेगांव मामले की जांच के नाम पर देश-दुनिया को गुमराह करने की कोशिश तो नहीं की गई? इस सवाल का जवाब इसलिए खोजा जाना चाहिए, क्योंकि आरोप-प्रत्यारोप से कुछ हासिल होने वाला नहीं है। यह सामने आना ही चाहिए कि कहीं किसी साजिश या फिर संकीर्ण राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए तो हिंदू आतंकवाद का जुमला नहीं गढ़ा गया? यदि यह साबित होता है कि किसी राजनीतिक मकसद से हिंदू आतंकवाद का जुमला गढ़ा गया तो फिर यह भी साफ होगा कि आतंकवाद से लड़ने के नाम पर देश की सुरक्षा व्यवस्था और साथ ही जांच एजेंसियों से खिलवाड़ भी किया गया।

यह गलत नहीं है कि मालेगांव विस्फोट कांड में भाजपा और आरएसएस नेताओं को फंसाने और उनका चरित्र हनन की साजिश का खुलासा होने के बाद बीजेपी और आरएसएस नेता कांग्रेस के खिलाफ हमलावर हैं। इस हकीकत से भी मुंह नहीं मोड़ा जा सकता है कि कांग्रेस नेताओं पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी, पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, दिग्विजय सिंह और सलमान खुर्शीद देश में हिन्दू आतंकवाद का हौवा खड़ा कर रहे हैं। सलमान खुर्शीद ने तो अपनी किताब में हिन्दुओं की तुलना आतंकवादी संगठन बोको हरम और आईएसआई तक से कर दी है। आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने तब सत्तारुढ़ और अब विपक्ष में बैठी कांग्रेस एवं अन्य राजनीतिक दलों और उनके नेताओं की आलोचना करते हुए कहा कि सबने मिलकर एक बड़ा पाप और अपराध किया था, हिन्दुओं को आतंकवादी ठहराने की साजिश रची गई थी। इंद्रेश कुमार ने कांग्रेस और उसकी गठबंधन सरकार के साथ खड़े नेताओं और दलों को भी गंदी राजनीति और झूठी साजिश के साथ खड़ा होने का गुनाहागार बताया ताकि तथाकथित भगवा आतंकी मामलों में भाजपा और आरएसएस के नेताओं को फंसाया जा सके। इंद्रेश कुमार ने अपने बयान में दावा किया कि एटीएस ने उसे प्रताड़ित किया और अपने कार्यालय में अवैध रूप से बैठाया। इस मामले में अब तक 220 गवाहों से पूछताछ हो चुकी है और उनमें से 15 मुकर गए हैं। इंद्रेश कुमार ने दावा किया कि तत्कालीन यूपीए सरकार ने तथाकथित भगवा आतंकी मामलों में भाजपा और आरएसएस के नेताओं को घसीटने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी, लेकिन किसी भी प्राथमिकी में हमारे नाम नहीं जोड़ सकी, क्योंकि उनके पास कोई सबूत नहीं था।