कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित (बाएँ) और मेजर रमेश उपाध्याय (दाएँ) (साभार: Hindustan Times/Navbharat times) कोर्ट से सच्चाई छिपाने का कांग्रेस का एक लम्बा इतिहास है। याद हो, सच्चाई जानने जब कोर्ट के आदेश पर अयोध्या में राममन्दिर परिसर में खुदाई हुई, इतने प्रमाण मिले सब छुपा लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट में सबूत के तौर पर दिखाया सिर्फ एक खम्बा। ये तो तत्कालीन उत्तर प्रदेश पुरातत्व निदेशक के के मोहम्मद ने सेवानिर्वित होने के बाद स्पष्ट लिखा कि मन्दिर कभी का बन गया होता अगर कांग्रेस और वामपंथियों ने कोर्ट में झूठ नहीं बोला होता। खुदाई में मन्दिर होने के बहुत प्रमाण मिले जो कोर्ट में पेश नहीं किये गए। ठीक वही हिन्दू विरोधी नीति देश में हो रहे धमाकों में इस्लामिक आतंकवादियों को बचाने निर्दोष और बेगुनाह हिन्दुओं चाहे वह साधु, संत, साध्वी या फौजी ही क्यों न हो, को पकड़ हिन्दू-भगवा आतंकवाद कहा जाता था।
देशभक्ति और देश को आज़ादी दिलवाने की दुहाई देने वाली कांग्रेस और इसकी समर्थक पार्टियों ने इस्लामिक आतंकवादियों को बचाने हमारे फौजियों को भी अपमानित करने का कोई मौका नहीं छोड़ा। आर्मी चीफ बिपिन रावत(स्व) को तो कांग्रेस के एक नेता ने "सड़क का गुंडा" तक बोल दिया था।
मालेगांव धमाके को अंजाम देने वाले इस्लामिक आतंकवादियों को बचाने बेगुनाह हिन्दुओं को जेल में डाल यूपीए सरकार में अपनी महत्वकांक्षा बनाये रखने के लिए तत्कालीन ATS हेमंत करकरे ने इन बेगुनाह साधु, साध्वी और फौजियों पर जुल्म करने हैवानियत की परिकाष्ठा तक को तार-तार कर दिया था। ये तो परमपिता परमेश्वर का इन पर आशीर्वाद था कि आज हमारे बीच है। अन्यथा इनकी राम नाम सत्य करने की करकरे ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। उस प्राणी की तकलीफ का अनुमान लगाया जा सकता है जब उसके प्राइवेट पार्ट पर प्रहार किया जाए।
तरस आता है उन हिन्दुओं पर जो कांग्रेस को समर्थन और वोट देते हैं। यूपीए समय में मुस्लिम तुष्टिकरण अपनी चरम पर था। हिन्दुओं को गुलाम बनाए जाने Communal Violence Bill बनाया गया। ये तो हिन्दुओं का भाग्य था कि 2014 चुनावों में यूपीए सत्ता से बाहर हो गयी। अगर दुर्भाग्य से 2014 में यूपीए सरकार वापस आ गयी होती हिन्दू त्राहिमाम कर रहा होता। सिर्फ कांग्रेस ही नहीं यूपीए में शामिल जितनी भी पार्टियां है हिन्दू एकजुट होकर पूछे कि इस्लामिक आतंकवादियों को बचाने क्यों "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" कहकर हिन्दुओं को अपमानित किया गया था?
कांग्रेस अपनी नीचता से अभी भी बाज नहीं आ रही। कल(31 जुलाई) को IndiaTV पर आज की बात में समाचार था कि कांग्रेस नेता पृथ्वी राज चौहान कह रहा है कि हिन्दू नहीं सनातन आतंकवाद कहना चाहिए।
मालेगाँव बम धमाका मामले में गुरुवार (31 जुलाई, 2025) को साध्वी प्रज्ञा, कर्नल श्रीकांत पुरोहित और मेजर रमेश उपाध्याय समेत 7 लोगों को बाइज्जत बरी कर दिया। कोर्ट को इन लोगों के खिलाफ मालेगाँव धमाके में कोई सबूत नहीं मिले। इसी के साथ पिछले 17 वर्षों से चली आ रही ‘भगवा आतंकवाद’ की थ्योरी का अंतिम संस्कार हो गया।
17 वर्षों तक इन हिन्दुओं को केवल इसलिए प्रताड़ित किया जाता रहा ताकि कांग्रेस की मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति चमक सके। कांग्रेस की इस तुष्टिकरण की राजनीति का शिकार भारतीय सेना के दो अफसर भी हुए। उनके परिवारों तक को नहीं छोड़ा गया, उनके सैन्य करियर बर्बाद कर दिए गए, देश की दशकों तक सेवा के बावजूद उन्हें जनता में शर्मिंदगी झेलनी पड़ी और वामपंथी मीडिया ने उनका वर्षों तक पीछा किया।
कर्नल का पैर तोड़ा, नंगा कर प्राइवेट पार्ट पर मारा
भारतीय सेना में देश की सेवा करने वाले लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित को कांग्रेस सरकार ने आतंकवादी साबित करने की कोशिश की। उन्हें मालेगाँव ब्लास्ट 2008 की जिम्मेदारी लेने के लिए यातनाएँ दी गईं थी। कर्नल से सेना की खुफिया जानकारी जुटाने की कोशिश की गई। कर्नल के साथ पाकिस्तान पहुँचे विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान से भी बुरा बर्ताव किया गया।
यहाँ तक कि कर्नल का पैर तोड़ा गया, नंगा कर प्राइवेट पार्ट पर मारा गया, बाल पकड़कर खींचे जाता था। उन्हें वर्षों तक जेल में रखा। इस दौरान उन्हें सेना की नौकरी से भी हाथ धोना पड़ गया। महाराष्ट्र ATS गवाहों को भी बंदूक की नोक पर बयान दिलवाती थी। कोर्ट को कर्नल पुरोहित ने बताया था कि यह सब तत्कालीन UPA सरकार और राज्य की कांग्रेस NCP सरकार के इशारे पर किया गया था।
कोर्ट के सामने कर्नल पुरोहित ने बयान दिया था कि कांग्रेस सरकार ने तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ, विश्व हिंदू परिषद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोगों को फँसाने की साजिश की थी। कर्नल से भी मामले में उनका नाम लेने का दबाव डाला गया था। कर्नल के परिवार को भी फँसाने की धमकी दी गई थी।
क्या कांग्रेस के DNA में ही हिन्दू जहर है? कांग्रेस ने जहर उगलना नहीं किया बंद: कांग्रेस MP रेणुका च
मेजर की बेटी से रेप और पत्नी को नंगा करने की दी गई थी धमकी
मेजर रमेश उपाध्याय के सेनानी थे। उन्हें भी तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने मालेगाँव बम धमाका मामले में फँसाया गया था। कांग्रेस सरकार के इशारे पर ATS उन्हें प्रताड़ित करती थी। यहाँ तक कि उनकी पत्नी को नंगा घुमाने और बेटी के रेप तक की धमकी दी गई। मेजर उपाध्याय को भी बम धमाके की जिम्मेदारी लेने के लिए मानसिक और शारीरिक शोषण किया गया था।
ATS ने मेजर उपाध्याय को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया था। मेजर पर MCOCA लगाने की धमकी देकर आतंकवादी करार दिया गया, उनके किराए के घर को भी खाली करवाया गया। मेजर का परिवार सड़क पर आ गया था। मेजर के शादीशुदा बेटियों के घर पर भी ATS ने छापा मारा। मेजर का पॉलीग्राफ और नारको टेस्ट भी करवाया गया और क्लीन चिट मिलने के बाद कोर्ट के सामने पेश नहीं की।
साभार- ममता बनर्जी के फेसबुक से पश्चिम बंगाल के मालदा से दिल्ली के गीता कॉलोनी में रहने आए एक बंगाली प्रवासी परिवार ने सोशल मीडिया पर लाइक्स और चर्चा में आने के लिए एक ऐसा वीडियो बनाया जिसके कारण राजनीतिक उठापटक मच गई। इसके बाद पुलिस जाँच हुई तो मामले की सच्चाई सामने आ गई।
शनिवार (26 जुलाई 2025) को एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें मुख्तार खान अपने छोटे से बच्चे के कान और चेहरे के साथ अपनी पत्नी सजनूर बीबी के चेहरे को भी दिखलाकर बंगाली भाषा में यह कहता नजर आ रहा है कि उन दोनों के साथ मारपीट की गई है और साधारण कपड़ों में आए कुछ पुलिस वालों ने उनसे 25,000 रुपए भी वसूले हैं। वीडियो में जीपीएस ट्रैक में लिखा है कि यह वीडियो नई दिल्ली के गीता कॉलोनी में बनाया गया है।
ममता ने लपका मौका
सोशल मीडिया में वायरल होते ही पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधने का मौका नहीं छोड़ा। 27 जुलाई 2025 को वीडियो को साझा करते हुए ममता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “भयानक, बेहद भयावह! देखिए मालदा के चंचल से दिल्ली आए एक प्रवासी परिवार के बच्चे और उसकी माँ को दिल्ली पुलिस ने कितनी बुरी तरह से मारा है।”
Atrocious!! Terrible!!
See how Delhi police brutally beat up a kid and his mother, members of a migrant family from Malda's Chanchal.
See how even a child is not spared from the cruelty of violence in the regime of linguistic terror unleashed by BJP in the country against the… pic.twitter.com/IwAXkQwy9V
ममता बनर्जी ने आगे लिखा, “देखिए किस तरह बच्चों तक को हिंसा की क्रूरता से बक्शा नहीं जा रहा है। भाषाई आतंक के दौर में बीजेपी ने देश के बंगालियों के खिलाफ हिंसा शुरू कर दी है। हमारा देश किस दिशा में जा रहा है?”
पुलिस ने की पड़ताल
टीएमसी सुप्रीमो के इस ट्वीट के बाद पूर्वी दिल्ली के डीसीपी अभिषेक धनिया ने इस मामले की पूरी पड़ताल करवाई। सीसीटीवी फुटेज और परिवार से कड़ाई से पूछताछ की। पूरी जाँच के बाद डीसीपी ने अपना बयान जारी किया।
उन्होंने बताया कि यह पूरा मामला ही झूठा था और महिला ने मालदा जिले में रहने वाले अपने एक रिश्तेदार के कहने पर भी झूठा वीडियो बनाया था। यह रिश्तेदार एक राजनीतिक कार्यकर्ता है जिसने जानबूझकर इस तरह का वीडियो बनवाया जिससे वह किसी तरह का राजनीतिक लाभ उठा सके।
डीसीपी अभिषेक ने कहा, “पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने ‘X’ पर एक पोस्ट किया, जिसमें कहा गया कि दिल्ली पुलिस ने एक बंगाली भाषी महिला और उसके बच्चे के साथ मारपीट की। जानकारी मिलते ही हमने जाँच शुरू की और पता चला कि महिला का नाम सजनूर बीबी है। वह अपने पति मुख्तार खान और दो बच्चों के साथ पश्चिम विनोद नगर के मजबूर नगर में रहती है। पूछताछ के दौरान उसने बताया कि 26 जुलाई की रात लगभग 10:30 बजे चार पुलिसकर्मी सिविल ड्रेस में उनके घर आए और उन्हें एक सुनसान जगह ले जाकर पीटा, साथ ही ₹25,000 की माँग की, जो उन्होंने बाद में दे दिए।”
#WATCH | Delhi | DCP East Delhi, Abhishek Dhania, says, "West Bengal CM posted on 'X' that a Bengali-speaking woman and her child were assaulted by the Delhi Police. Right after receiving the information, we initiated the inquiry and discovered that the lady's name is Sanjanu… https://t.co/64nB4ZTijqpic.twitter.com/gofxwwYXBs
डीसीपी ने आगे कहा, “मामले की गंभीरता को देखते हुए हमने कई टीमें गठित कीं। तकनीकी और स्थानीय इंटेलिजेंस के साथ-साथ सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हमने कई सबूत इकट्ठा किए। उन सबूतों के आधार पर हमें यह ज्ञात हुआ कि महिला द्वारा बताई गई पूरी कहानी निराधार है। महिला अपनी मर्जी से दोपहर 12:03 बजे दोनों बच्चों के साथ घर से निकली। उसके साथ किसी के भी होने की बात CCTV फुटेज में सामने नहीं आई।”
डीसीपी अभिषेक ने बताया कि पूछताछ में महिला ने यह भी बताया कि वह रास्ता भटक गई थी। किसी स्थानीय की मदद से उसने अपने मामा को फोन किया। वह पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में रहता है और एक राजनीतिक कार्यकर्ता है। उसके कहने पर ही उसने यह झूठा वीडियो बनाया और उसे भेजा, जिसे बाद में स्थानीय मीडिया में प्रसारित किया गया।
डीसीपी ने कहा, “गहन जाँच और पूछताछ के बाद ये बात सामने आई है कि पूरा वीडियो झूठा और मनगढ़ंत है। इस वीडियो को जानबूझकर सोशल मीडिया पर फैलाया गया ताकि दिल्ली पुलिस की छवि को नुकसान पहुँचाया जा सके। आगे की जाँच अभी भी जारी है।”
यूजर्स ने भी ममता ‘दीदी’ को लताड़ा
पुलिस के बयान के बाद एक्स पर कई यूजर्स ने TMC सुप्रीमो और कोलकाता पुलिस को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। एक यूजर ने कहा कि कोलकाता पुलिस ने फेक न्यूज़ फैलाने के एवज में ममता बनर्जी का अकाउंट सस्पेंड नहीं किया, उन्हें कोई नोटिस जारी नहीं किया। लेकिन इसी जगह कोई दूसरा होता तो उसका अकाउंट अब तक बंद हो चुका होता। समानता सभी नागरिकों के लिए एक जैसी होनी चाहिए। जय हिंद।
एक अन्य यूजर ने दिल्ली पुलिस के लिए लिखा कि दिल्ली पुलिस को निराधार आरोप लगाने के लिए ममता बनर्जी पर मुकदमा करना चाहिए। एक यूजर ने लिखा, “हम सभी को पता है कि अब चुनाव होने वाले हैं तो बंगाल की ओर से इस तरह के अनगिनत ड्रामा देखने को मिलेंगे।”
सेना में जाकर देशसेवा करने वाले एक कर्नल को कांग्रेस सरकार ने आतंकवादी सिद्ध करने की कोशिश की। उसे धमाके के एक मामले में आरोपित बनाया गया। कर्नल के साथ पाकिस्तान में विमान दुर्घटना के बाद पहुँचे विंग कमांडर अभिनन्दन वर्धमान से भी बुरा बर्ताव किया गया। यहाँ तक कि कर्नल का पैर तोड़ा गया, उसके वरिष्ठ अधिकारी और पुलिस वालों ने उसे मारा। अवैध रूप से उसे बंद रखा। सालों तक जेल में रखा। उसकी सैन्य सेवा को भी प्रभावित किया गया।
यह कहानी किसी तानाशाही वाले देश की नहीं बल्कि भारत की है जहाँ कांग्रेस शासन में ‘भगवा आतंकवाद’ का नैरेटिव गढ़ने के लिए साधुओं, सैन्यकर्मियों और हिन्दू हितों के लिए काम करने वालों को निशाने पर लिया गया। 2008 में हुए मालेगाँव धमाका मामले में मुकदमे में आरोपी बनाए गए लेफ्टिनेंट श्रीकांत प्रसाद पुरोहित की कहानी पीड़ाजनक और गुस्से से भरने वाली है। कर्नल पुरोहित ने बुधवार (8 मई, 2024) को मुंबई के एक कोर्ट में अपनी पीड़ा बताई।
उन्होंने बताया, “मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया गया जो किसी जानवर के साथ भी नहीं किया जाता। मेरे साथ युद्ध बंदी से भी बदतर व्यवहार किया गया। हेमंत करकरे, परमबीर सिंह और कर्नल श्रीवास्तव लगातार इस बात पर जोर देते रहे कि मैं मालेगाँव बम धमाके के लिए खुद को जिम्मेदार बता दूँ। उन्होंने मुझसे कहा कि मैं RSS, VHP के वरिष्ठ नेताओं और उत्तर प्रदेश के तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ का नाम लूँ। उन्होंने मुझे 3 नवम्बर, 2008 तक यातनाएँ दी।”
उन्होंने कोर्ट को बताया कि मालेगाँव में धमाके के बाद उन्हें पंचमढ़ी से गिरफ्तार किए जाने के बाद जबरदस्ती एक जगह अवैध रूप से रखा गया। कर्नल पुरोहित ने बताया कि उन्हें खंडाला के बंगले में रखा गया जहाँ उन्हें प्रताड़ित किया गया। उनको 29 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था और उन्हें 3 नवम्बर तक प्रताड़ित किया गया था। इस दौरान ATS अधिकारी परमबीर सिंह, हेमंत करकरे और अन्य अधिकारियों ने मारा और उनका घुटना तोड़ दिया। इसकी वजह से उन्हें चलने में परेशानी होती है।
कर्नल पुरोहित को जब पकड़ा गया तब वह इंटेलिजेंस के लिए काम कर चुके थे और SIMI, ISI समेत तमाम देश विरोधी गतिविधि को रोकने में काफी हद तक सफल रहे थे। मालेगाँव मामले की जाँच के नाम पर उनसे इन आतंकी संगठनों पर की गई कार्रवाई और उनके मुखबिरों के बारे में बताने को कहा गया। कर्नल पुरोहित ने आरोप लगाया कि उनके साथ यह ज्यादती इसलिए हुई क्योंकि तब की केंद्र और महाराष्ट्र की कॉन्ग्रेस सरकार ऐसा चाहती थीं। यह सब उनकी शह पर हो रहा था।
कर्नल पुरोहित को मारने तक की योजना बनाई गई थी। उनका एनकाउंटर करने का प्लान था। 2018 में लिखे गए एक पत्र में कर्नल पुरोहित ने बताया था कि पूछताछ के दौरान उनके कपड़े उतारे गए, उनके प्राइवेट पार्ट पर वार किया गया और उनके बाल पकड़ कर खींचा गया। उन्हें शारीरिक यातनाएँ देकर दबाव डाला गया कि वह मालेगाँव धमाके में जिम्मेदारी स्वीकार कर लें। उन पर दबाव डाला गया कि वह RSS-VHP नेताओं का नाम लें और योगी आदित्यनाथ को भी आतंक के मामले में फँसाएँ।
कर्नल पुरोहित ने जिन हेमंत करकरे पर यातना देने का आरोप लगाया है, उनकी 26/11 हमले में आतंकियों ने हत्या कर दी थी। परमबीर सिंह बाद में मुंबई के पुलिस कमिश्नर बने थे लेकिन उनके ऊपर उगाही के गंभीर आरोप लगे थे। वह भगोड़े भी घोषित किए गए थे। कर्नल पुरोहित ने मुंबई के कोर्ट को बताया है कि उनको यह यातनाएँ हिन्दू आतंकवाद का नैरेटिव गढ़ने के लिए दी जा रहीं थी। इसके लिए पहले से ही प्लान बनाया गया था।
इसी समय पर एनसीपी नेता शरद पवार हिन्दू आतंकवाद की बातें कर रहे थे। कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम यह सिद्ध करने में लगा था कि देश में सिर्फ इस्लामी आतंकवाद नहीं है बल्कि हिन्दू आतंकवाद नाम का भी कुछ होता है। यहाँ तक कि 26/11 हमले को तक हिन्दू आंतकवाद से जोड़ने की साजिश हुई थी। यह सब वोटबैंक और कॉन्ग्रेस की हिन्दू घृणा के कारण फल फूल रहा था। वामपंथी पत्रकार इस बात को और हवा दे रहे थे।
कर्नल पुरोहित को दी प्रताड़नाओं की तुलना अगर 2019 बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तान में विमान क्रैश होने के कारण गिरे विंग कमांडर अभिनन्दन वर्धमान से की जाए तो पाकिस्तान का बर्ताव कॉन्ग्रेस सरकार से अच्छा दिखेगा। अभिनन्दन वर्धमान को जहाँ कुछ घंटों के लिए ही पाकिस्तान रख पाया था, वहीं कर्नल पुरोहित को मात्र इसलिए सालों तक जेल में रखा गया ताकि हिन्दू आतंकवाद का फर्जी नैरेटिव गढ़ा जा सके और बहुसंख्यक आबादी को आतातायी घोषित किया जाए।
विंग कमांडर अभिनन्दन वर्धमान को मोदी सरकार 48 घंटों के भीतर पाकिस्तान से वापस ले आई थी। पाकिस्तान खुद ही विंग कमांडर वर्धमान को सौंपने को मजबूर हो गया था क्योंकि उसे पता था कि मोदी सरकार अपने सैनिक के लिए कोई भी बड़ा कदम उठा सकती है। दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस का रवैया था कि देश की करोड़ों जनता का दशकों का सेना में विश्वास टूट जाए, इसलिए एक सैनिक को ही आतंकी घोषित करने का प्रयास करो। उसे हिन्दू आतंकवादी बताओ।
पाकिस्तान के पूर्व पीएम और तहरीक ए इंसाफ पार्टी (PTI) के चेयरमैन इमरान खान ने पिछले दिनों आरोप लगाया था कि जेलों में बंद पीटीआई की महिला कार्यकर्ताओं के साथ रेप हो रहा है। शनिवार (27 मई 2023) की देर रात मुल्क के आंतरिक मामलों के मंत्री ( Interior Minister) राणा सनाउल्लाह ने इमरान के आरोपों को बेबुनियाद करार दिया था। उन्होंने इसे पीटीआई कार्यकर्ताओं की साजिश बताया। सनाउल्लाह के इस बयान पर इमरान खान ने पलटवार किया। रविवार (28 मई) को इमरान ने कहा कि सरकार के मंत्री अपने काले कारनामों को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।
इमरान ने जमान पार्क स्थित अपने घर से पीटीआई समर्थकों को संबोधित किया। इमरान खान ने कहा कि राणा सनाउल्लाह की प्रेस कॉन्फ्रेंस (शनिवार) के बाद मुझे अपनी बात पर यकीन हो गया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की फासीवादी सरकार के मंत्री काले कारनामों को छिपाने के लिए कवर-अप करने की कोशिश कर रहे हैं। इमरान खान ने जेल में बंद अपनी पार्टी के महिला कार्यकर्ताओं के प्रति चिंता जताते हुए न्यायपालिका से स्वतः संज्ञान लेने की माँग की।
सनाउल्लाह का दावा
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान के गृहमंत्री सनाउल्लाह ने इमरान और उनके समर्थकों पर सरकार को बदनाम करने के लिए साजिश रचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ख़ुफ़िया एजेंसियों ने एक कॉल इंटरसेप्ट किया है। इस कॉल में पीटीआई के वर्कर्स कथित तौर पर एनकाउंटर और रेप की साजिश रचने की बात करते हुए पाए गए हैं। इसके कुछ ही घंटों के बाद इमरान ने आरोप लगाने शुरू किए।
रिपोर्टों के मुताबिक, राणा सनाउल्लाह ने दावा किया कि इंटरसेप्ट किए गए कॉल में पीटीआई कार्यकर्ता के घर रेड डालने के और गोलीबारी की साजिश की बात सामने आई। कथित तौर पर पीटीआई के लोग यह कह रहे थे कि रेड के बहाने हुई फायरिंग में मौतों को दुनिया में मानवाधिकार उल्लंघन के रूप में दिखाया जा सकता है। ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून‘ के मुताबिक, राणा ने कहा कि इसी तरह पीटीआई महिला कार्यकर्ताओं की रेप की फर्जी कहानियाँ बनाने को लेकर भी बातचीत हुई थी। सनाउल्लाह के अनुसार कुछ ही देर के बाद इमरान खान ने पीटीआई महिला कार्यकर्ताओं से बलात्कार का आरोप लगा दिया।
क्या कहा था इमरान ने?
दरअसल 9 मई 2023 को इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद पूरा पाकिस्तान जल उठा था। पीटीआई कार्यकर्ताओं ने मुल्क भर में प्रदर्शन किया था। पीटीआई कार्यकर्ताओं और इमरान समर्थकों ने देश के सैन्य प्रतिष्ठानों पर भी हमले कर दिए थे। प्रदर्शनकारियों में बड़े पैमाने पर महिलाएँ भी शामिल थीं। हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारियों को जेल में डाला गया। महिलाओं समेत सैकड़ों लोग अब भी हिरासत में है। इमरान ने जेल में बंद इन्हीं महिलाओं के साथ बदसलूकी और बलात्कार का आरोप लगाया था।
इमरान ने कहा था कि जेल में बंद महिला पार्टी वर्कर्स के साथ गलत सलूक किया जा रहा है। रेप की भी खबरें मिल रही हैं।
दीपक सोनवणे और उनके साथी (फोटो साभार: सोशल मीडिया) "Love Jehad" की शुरुआत 80 दशक में केरल से हुई थी, तब किसी भी पार्टी ने तुष्टिकरण के चलते इसे गंभीरता से नहीं लिया और जनता को 'गंगा-जमुना तहजीब' और संविधान की दुहाई देकर गुमराह किया जाता रहा है। जहाँ तक हिन्दू-मुस्लिम नारों की बात है, किसी में मुस्लिम ठेकेदारों से पूछने का साहस नहीं की हिन्दुओं को जातियों के नाम पर बाँटने से पहले बताओं क्या तुम एक हो, हिन्दुओं में कोई भी जाति हो एक ही मंदिर में जाते हैं और अंतिम संस्कार भी एक ही शमशान घाट पर होता है, जबकि मुस्लिम समाज में स्थिति एकदम विपरीत है। शिया हो, सुन्नी हो, बेरलवी, अहमदी, अथवा वहाबी आदि अनेकों जातियां है जो अपनी अपनी मस्जिदों नमाज पढ़ सकते हैं, शादी कर सकते हैं,और अपने अपने कब्रिस्तानों में मुर्दा दफना सकते हैं, किसी में इसके विरुद्ध जाने अथवा इस अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाने का साहस नहीं।
नवंबर 18 को News18 पर अमिश देवगन के शो "आर पार" पर मौलानाओं का दोगलापन उस समय सामने जब शोएब जमई ने मुग़ल बाबर को हिन्दुस्थान का जीजा बताने पर चर्चा में शामिल सुभिहि खान ने जवाब देते अपने पति का नाम लेकर कहा कि इस हिसाब से 'मेरे पति तुम्हारे जीजा है', तुरंत शो में शामिल तीनो तथाकथित मुसलमानो ने कहा 'हम तुम्हे मुसलमान ही नहीं मानते।' इस मुद्दे पर बहस बहुत गरमा गयी। हिन्दू-मुस्लिम भाई-भाई की बात भी बेकार साबित। केवल इन्ही शब्दों ने उन मौलानाओं को बेनकाब भी कर दिया जो टीवी पर आकर चाशनी में डूबी बातें करते हैं, लेकिन टीवी से बाहर कहीं अधिक जहरीले हैं। हर देशप्रेमी हिन्दू-मुसलमान को ऐसे मौलानाओं से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। सरकार को ऐसे दोगलों की गंभीरता से जाँच करवानी चाहिए। बातें और काम इनके हिसाब से होता रहे तो सेकुलरिज्म वरना फिरकापरस्ती तो है ही, क्यों दोगलों? हिन्दू से शादी कर सुभिहि क्यों मुसलमान नहीं? अब इसे तुम्हारा दोगलापन न कहा जाए तो क्या कहा जाए।
टीवी पर चर्चाओं में ऐसे दोगले मौलानाओं को बेनकाब करने एक्स-मुस्लिमों को भी बुलाया जाए, जैसे News Nation अपने शो 'इस्लाम क्या कहता है' में बुलाते हैं। मौलाना या तो पसीना पोंछते नज़र आते हैं या चर्चा छोड़कर जाते देखे जाते हैं।
जहाँ तक हिन्दू-मुस्लिम के बीच शादी की बात है, ऐसे अनेक किस्से हैं जहाँ शादी से पहले या बाद में धर्म परिवर्तन की बात ही नहीं हुई। केवल एक उदाहरण देता हूँ: जनाब राईस अहमद साहब का, जो सिनेमा घरों पर फिल्मों के परदे बनाते थे, हिन्दू लड़की से प्यार हो गया, अपनी प्रेमिका पत्नी का धर्म नहीं छुड़वाया, एक छत के नीचे नमाज भी हो रही है और पूजा भी, चार बच्चे हुए दो के नाम हिन्दू और दो के मुस्लिम। और मजे की बात, 1975/76 में बहुचर्चित फिल्म आयी "जय संतोषी माँ", उस फिल्म के परदे बनाने का ठेका उन्ही को मिला था। जिस सिनेमा हॉल पर यह फिल्म का प्रदर्शन हो रहा होता था, वहां सिनेमा घर के बाहर हार-फूल बिकते थे, लोग स्क्रीन पर हार-फूल ही नहीं, पैसे भी चढ़ाते थे। हर शो में हाल में लाइन मैन और सफाई कर्मचारियों को कम से कम 30 रूपए की कमाई होती थी। खैर, जनाब राईस साहब ने अपनी हिन्दू पत्नी के कहने पर एक बहुत ही खूबसूरत मंदिर बनाया जो एक होने की वजह से एक ही सिनेमा घर पर रखा जा सकता था। फिल्म वितरक ने माँगा नहीं दिया, पिताश्री एम बी एल निगम ने माँगा नहीं दिया स्पष्ट शब्दों में कहा यह मंदिर घर जाएगा, इसे अपनी पत्नी के कहने पर बनाया है। कई बार मेरे निवास स्थान पर भी आए। दरिया गंज में उनका स्टूडियो था। ये होता है प्रेम और जो आजकल चल रहा है इसे हिन्दुओं को अपने मकड़जाल में फ़ांस इस्लामीकरण करना। खैर, देखिये मौलानाओं का दोगलापन। वीडियो:
श्रद्धा वॉकर की हत्या (Shraddha Walker Murder Case) से पूरा देश सन्न है। इसी बीच शुक्रवार (18 नवंबर 2022) को एक ऐसा मामला सामने आया, जिसमें पीड़ित एक दलित लड़का है। मुस्लिम प्रेमिका होने के कारण इस युवक को तरह-तरह की प्रताड़ना दी जा रही है। इसमें उसकी प्रेमिका का भी हाथ है। इस मामले में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के एक नेता का नाम भी सामने आया है।
दलित युवक दीपक सोनवणे महाराष्ट्र के संभाजीनगर में स्थित मराठवाड़ा प्रौद्योगिकी संस्थान (MIT) में पढ़ाई करता है। यहाँ उसकी एक मुस्लिम लड़की सना फरहीन शाहमीर शेख से दोस्ती हुई, जो बाद में प्रेम संबंधों में बदल गई। अब दीपक को सना के परिवार से लगातार प्रताड़ना मिल रही है और उससे जबरन वसूली की जा रही है। यहाँ तक कि उसका जबरन खतना भी कर दिया गया।
दीपक सोनवणे ने संभाजीनगर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना दर्द साझा किया। दीपक ने बताया कि उसकी मुस्लिम प्रेमिका के परिवार में इस्लामवादियों को इस मामले में हर कदम पर प्रभावशाली स्थानीय सांसद इम्तियाज जलील का लगातार समर्थन मिल रहा है। इम्तियाज जलील AIMIM का सांसद हैं।
दीपक सोनवणे ने अपनी गर्लफ्रेंड सना फरहीन शाहमीर शेख के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस आयुक्त, संभाजीनगर को संबोधित शिकायत में शाहमीर शमशुद्दीन शेख, ख्वाजा सैय्यद, शबाना बेगम शेख, साजिया सदफ शाहमीर शेख, AIMIM के सांसद इम्तियाज जलील और उनके अंगरक्षकों के नाम हैं।
कॉलेज में शुरू हुआ लव अफेयर
दीपक सोनवणे ने संभाजीनगर के मराठवाड़ा प्रौद्योगिकी संस्थान से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। सना उसकी सहपाठी थी। दोनों पहले दोस्त बने और फिर दोनों के बीच प्यार हो गया। दीपक सोनवणे ने अपनी शिकायत में कहा, “सना शेख और मैं एमआईटी कॉलेज में साल 2018 से हम सहपाठी थे। सना और मैं परिचित हो गए। उसके बाद हमारा यह प्रेम प्रसंग हुआ। सना ने मुझे शादी का लालच दिया और कहा, ‘मैं तुमसे शादी करना चाहता हूँ। तुम इस्लाम कबूल कर लो। नमाज पढ़ो, कुरान पढ़ो’।”
दीपक सोनवणे ने अपनी शिकायत में आगे लिखा, “मैंने उसे माता-पिता (अब्बू शाहमीर शमशुद्दीन शेख और अम्मी शबाना बेगम शेख) से यह बात कही। उन्होंने मुझे आश्वासन दिया कि वे अपनी बेटी को ठीक से समझाएँगे और मुझे चिंता नहीं करनी चाहिए।”
प्रताड़ना की हुई शुरुआत
दीपक सोनवणे ने बताया कि उन्हें किस तरह की यातनाओं से होकर गुजरना पड़ा। उन्होंने कहा, “मार्च 2021 में उसके अम्मी-अब्बू, चाचा और बहन ने मुझे गुलमंडी इलाके में मिलने के लिए बुलाया। जब मैं वहाँ गया तो उन्होंने मुझे अपनी बाइक वहीं खड़ी करने को कहा और कहा कि ‘हम सभी को कहीं बाहर जाने की जरूरत है। जैसे ही मैंने उन्हें मना किया, ख्वाजा सैय्यद और शाहमीर शेख मुझे जबरन अपने घर ले गए। वहां उन्होंने मुझे कमरे में बंद कर दिया।”
दीपक सोनवणे ने आगे बताया, “शाहमीर शेख और ख्वाजा सैय्यद ने मेरे कपड़े उतार दिए। शबाना बेगम और साजिया सदफ ने मेरे हाथ-पैर बाँधकर मेरे मुँह में कपड़ा डाल दिया। इसके बाद शाहमीर शेख ने मेरे शरीर पर पेशाब कर दिया। इसका वीडियो सना और शाहमीर शेख के मोबाइल पर शूट किया गया था। इसके बाद उन्होंने मुझे इस्लाम में धर्मांतरित करने का दबाव बनाने के लिए पीटना शुरू कर दिया।”
In his FIR, he says, he was in a relationship with Sana Shaikh and wanted to marry her. She married him and later blackmailed him and got her family to torture him. Shahmir Shaikh peed on him and shot a video of the act, which they used to extract money from him.
Shahmir, his mother Shabana and others forced Deepak Sonawne to listen to Zakir Naik’s videos trying to brainwash him. Deepak Sonawne’s FIR says they extracted almost 11 lakhs from him threatening to leak the video.
दीपक सोनवणे ने आगे कहा, “उसके बाद सना और उसकी माँ एवं बहन मुझे सिटी चौक थाने के पीछे की गली में एक अस्पताल ले गए और कहा कि हम यहाँ तुम्हें मुस्लिम बनने के लिए लाए हैं। हम यहाँ तुम्हारा खतना करा रहे हैं। अगर आप यहाँ किसी से कुछ कहोगे तो हम तुम्हारा वीडियो वायरल कर देंगे और समाज में तुम्हें बदनाम करेंगे।”
दीपक ने बताया कि इस दौरान आरोपितों ने उसे और उसके परिवार को मारने की धमकी भी दी। दीपक ने आगे कहा, “हम तुम्हें और तुम्हारे परिवार को भी मार डालेंगे। उनकी बात सुनकर मैं बहुत डरा हुआ था, क्योंकि मेरी और मेरे परिवार की जान खतरे में थी। अगर मेरा वीडियो वायरल हुआ तो मैं बदनाम हो जाऊँगा।”
दीपक ने आगे बताया, “उन्होंने इसका फायदा उठाया और मेरा खतना कार दिया। इसके बाद मुझसे कहा कि तुम अब एक सच्चे मुसलमान हो। अगर तुमने किसी को बताया कि क्या हुआ है तो याद रखना, तुम्हें इसका पछतावा होगा। इसके बाद वे लोग मुझे वापस गुलमंडी ले आए। मैं वहाँ से अपने घर आया और फिर मैंने सना से दूर रहने का फैसला कर लिया।”
11 लाख रुपए भी वसूले गए
दीपक के खिलाफ प्रताड़ना यहीं नहीं रूका। उससे लगातार वसूली की जाती रही। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा, “सना और उसकी माँ मेरे घर आए और पैसे की माँग करते हुए धमकी दी कि हम दीपक का वीडियो वायरल करेंगे। दीपक के खिलाफ गंभीर मामला दर्ज करेंगे और उसकी जिंदगी बर्बाद कर देंगे। मैंने उसे समय-समय पर 7 लाख रुपए नकद और 4 लाख रुपए ऑनलाइन दिए। मैंने कुल 11 लाख रुपए भेजे, लेकिन उन्होंने मुझसे 25 लाख रुपए की माँग की। इसके बाद मैंने उन्हें मना कर दिया, क्योंकि उस समय मेरे पास पैसे नहीं थे।”
उन्होंने आगे कहा, “तब सना ने मेरे खिलाफ 29-09-2021 को एमआईडीसी सिडको थाने में शिकायत दर्ज कराई। IPC की धारा 354 के तहत मामला दर्ज कराया है। मामला दर्ज करने के बाद सना ने मुझे फोन किया और कहा कि मैंने तुमसे कहा था। तुमने मेरी बात नहीं मानी। मेरे अम्मी-अब्बू तुम्हारे खिलाफ मामला दर्ज कराया है, लेकिन मैं सँभाल लूँगी। उसके बाद 19-12-2021 को मैं सना और उसके माता-पिता से जिला सत्र न्यायालय में मिला और उस समय उन्होंने कहा कि 25 लाख दो या इस्लाम स्वीकार करो, फिर हम केस वापस ले लेंगे।”
जाकिर नाइक का वीडियो दिखाया, जातिसूचक गालियाँ दीं
दीपक सोनवणे ने अपनी शिकायत में आगे कहा, “12-08-2022 को सना शाहमीर शेख और ख्वाजा सैय्यद ने मुझे क्लाउड कैंपस में आने के लिए मजबूर किया। वहाँ उन्होंने मुझे एक प्रोजेक्टर पर मुस्लिम धर्मगुरु जाकिर नाइक के वीडियो दिखाए और मुझे नमाज अदा करने के लिए मजबूर किया।”
दीपक ने कहा, “अगर मैं उनका विरोध करता तो वे मुझे पीटते और जातिसूचक गालियाँ देते। उन्होंने कहा कि तुम महार जाति के हो। महार जाति नीची जाति है। तुम लोग गंदगी खाने वाले लोग हो। तुम महार नहीं, बल्कि वेश्या समुदाय से हो। वे निचले स्तर पर जाकर मुझे जातिवादी अपमान किया।”
AIMIM सांसद जलील कर रहा मदद
संभाजीनगर मुस्लिम बहुल सीट है। AIMIM नेता इम्तियाज जलील इस सीट से लोकसभा सांसद हैं। मुस्लिम सांसद स्थानीय मुस्लिमों के प्रति नरम रुख अपनाने के लिए जाने जाते हैं। इस मामले में उनका नाम इस्लामवादियों के प्रमुख संरक्षक के तौर पर सामने आया है। दिलचस्प बात यह है कि जलील ने दलित जाति के लोगों के सहारे अपनी सीट जीती है, लेकिन अब उन पर एक दलित व्यक्ति को प्रताड़ित करने वाले इस्लामवादियों को बचाने का आरोप लगाया गया है।
दीपक सोनवणे ने अपनी शिकायत में आगे कहा है, “20-08-2022 को दोपहर 2.00 बजे नामित व्यक्तियों ने मुझे पैठण गेट के पास एक कार में अपने साथ बैठने के लिए मजबूर किया और मुझे सत्यविष्णु अस्पताल रोड पर ‘क्लाउड कैंपस’ के पास ले गए। रोजाबाग इलाके में सांसद इम्तियाज जलील का घर है। वहाँ सांसद इम्तियाज जलील की मौजूदगी में उन्होंने मुझे एक हॉल में बंद कर दिया।”
दीपक ने बताया, “उसके बाद उनके अंगरक्षकों ने मेरे साथ मारपीट की और नामजद लोगों ने रुपए छीन लिए। मेरी ओर से 1,50,000 नकद, एक लैपटॉप और एक प्लस कंपनी का मोबाइल फोन। मुझे वहां पीटा गया, उन्होंने मुझे जान से मारने की धमकी दी और पैसे की माँग की। इसके साथ ही मुझे जातिवादी गालियाँ दीं। यह सब पिछले दो साल से चल रहा है।”
दीपक ने बताया कि इन सबकी शिकायतें उन्होंने पुलिस से कीं। उन्होंने सीपी कार्यालय को कई शिकायतें भेजी, लेकिन किसी ने उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। दीपक सोनवणे और उनके साथियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “क्या सीपी ऑफिस से ही कोई लिंक है? यह किसके इशारे पर किया गया?”
इन आरोपितों के बारे में आपके पास कोई भी सूचना है, तो असम पुलिस को दें सोशल मीडिया पर उत्तर-पूर्वी भारत की एक महिला के यौन शोषण का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें आरोपितों का चेहरा भी स्पष्ट देखा जा सकता है। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों द्वारा इस आपत्तिजनक वीडियो को राजस्थान के जोधपुर का बताया जा रहा है, जहाँ हाल ही में नागालैंड की एक युवती ने आत्महत्या कर ली थी। केंद्रीय खेल एवं युवा मामलों के मंत्री किरण रिजिजू ने इसका खंडन किया है कि ये वीडियो जोधपुर वाली घटना से जुड़ा हुआ है।
दरअसल, रविवार (मई 23, 2021) को राजस्थान के जोधपुर में नागालैंड की एक 25 वर्षीय महिला ने आत्महत्या कर ली। वो राज्य के दीमापुर जिले के निउलैंड की रहने वाली थी। वो जोधपुर में ‘नवीन जूस रेस्टॉरेंट’ में कार्यरत थी। वो अपने रेंट के कमरे में ही फंदे से झूलती हुई मिली। ‘नेचुरल आत्महत्या’ को उसकी मौत का कारण बताया गया। सुबह-सुबह लोगों ने उसे मृत पाया था। नागा स्टूडेंट्स यूनियन के राजस्थान यूनिट ने बताया कि रेस्टॉरेंट के मालिक ने ही अंतिम संस्कार का खर्च उठाया। जैसे इस ट्वीट में वायरल वीडियो को जोधपुर केस से जोड़ा गया:
A girl name lovi assumi, naga girl... 3 monsters and even a girl brutally assaulted her, raped her and finally she attempted suicide! Nagaland gov should take a quick action! @INCNagalandpic.twitter.com/JtUTkV8TL9
ईसाई समुदाय की महिला का अंतिम संस्कार जोधपुर के ही एक ईसाई सेमिटरी में एक पादरी की मौजूदगी में संपन्न कराया गया। उससे पहले अस्पताल में उसका पोस्टमॉर्टम भी हुआ था। वहीं सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल हो रहा है, उसमें 5 आरोपितों को एक महिला का यौन शोषण करते हुए देखा जा सकता है। अभी तक ये पता नहीं चल सका है कि ये कहाँ का वीडियो है और पीड़िता या आरोपित कौन हैं।
अरुणाचल वेस्ट से सांसद किरण रिजिजू ने बताया, “नॉर्थ-ईस्ट की एक महिला का 4 पुरुषों और एक महिला द्वारा क्रूरता से बलात्कार किए जाने का एक वीडियो वायरल हो रहा है। ये जोधपुर आत्महत्या केस से जुड़ा मामला नहीं है। जोधपुर के पुलिस कमिश्नर से मेरी विस्तृत बातचीत हुई है। लेकिन, दोषियों की गिरफ़्तारी के लिए पुलिस द्वारा सारे प्रयास किए जाएँगे।” इस घटना का कारण क्या है, ये भी स्पष्ट नहीं है।
The viral video of a girl from North-East being brutally raped and tortured by 4 men & 1 women is not related to Jodhpur suicide case. I had detail discussion with the Police Commisioner of Jodhpur. However, there must be all out efforts by all State Police to catch the devils.
इस वीडियो में आरोपितों को अपनी करतूतों को वीडियो कॉल पर अन्य परिचितों को दिखाते हुए भी देखा जा सकता है। वीडियो रिकॉर्ड करते समय आरोपितों ने पीड़िता के प्राइवेट पार्ट में एक शराब की बोतल भी घुसा दी। सबसे ज्यादा पीड़ादायक है कि दरिंदों के इस कृत्य में एक महिला आरोपित भी उनका साथ दे रही थी, जिसने पीड़िता को नीचे भी गिराया। इसमें पीड़िता को ज्यादा से ज्यादा प्रताड़ित किया जा रहा है।
‘NE Now’ की खबर के अनुसार, स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस रोबिन हिबू ने कहा कि पुलिस अपराधियों को चिह्नित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि पुलिस अपने काम पर लग गई है। उन्होंने भी इसकी पुष्टि की कि ये वीडियो जोधपुर में नागालैंड की युवती की आत्महत्या से नहीं जुड़ा हुआ है। मृतका की बहन और पुलिस ने पहचान कर के बताया कि ये वो महिला नहीं है। हिबू ने जोधपुर के DCP से भी फोन पर बात की।
— Saffron lawjarp 🕉🚩🇮🇳 (@Kasumarthyprak2) May 27, 2021
वीडियो में पीड़िता चिल्लाती है, “कृपया मेरे साथ ऐसा मत करो, वीडियो रिकॉर्ड मत करो।” इसके बाद आरोपितों में से एक ने पीड़िता के मुँह मर कपड़ा ठूँस कर इसे बंद कर दिया। असम पुलिस पाँचों आरोपितों की तस्वीरें जारी करते हुए कहा है कि कि इन्होंने एक महिला को क्रूरतापूर्वक प्रताड़ित कर के उसका बलात्कार किया है। असम पुलिस ने कहा कि इस घटना का समय व स्थान अज्ञात है। साथ ही अपील की कि अगर किसी के पास इस घटना को लेकर कोई भी सूचना हो तो वो उससे संपर्क करे।
असम पुलिस ने ऐलान किया है कि इस घटना के सम्बन्ध में कोई भी सूचना देने देने वाले को अच्छा इनाम दिया जाएगा। पुलिस इस घटना के दोषियों का पता लगाने की कोशिश कर रही है। लेकिन, सोशल मीडिया पर जो लोग इस घटना को जोधपुर आत्महत्या केस से जोड़ रहे हैं, वो गलत हैं। जोधपुर वाले मामले में आत्महत्या का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। वहाँ के लोगों ने मृतका के अंतिम संस्कार में सहयोग भी किया।
गैंगरेप और प्रताड़ना के 4 आरोपितों को बेंगलुरु पुलिस ने दबोचा (फोटो साभार: @PratibaRaman) महिला का गैंगरेप कर बनाया था वीडियो, रफीदुल समेत 4 बांग्लादेशी गिरफ्तार
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें कुछ लोग एक महिला को प्रताड़ित करते हुए उसका गैंगरेप करते दिख रहे थे। कहा जा रहा था कि पीड़िता नॉर्थ-ईस्ट की है, लेकिन बेंगलुरु पुलिस ने बताया है कि वो बांग्लादेशी है। उसकी ट्रैफिकिंग (मानव तस्करी) कर के उसे भारत लाया गया था। पुलिस ने इस मामले में 6 आरोपितों को चिह्नित कर के उनमें से 4 को गिरफ्तार करने में सफलता पाई है।
पुलिस पीड़िता को भी खोजने में लगी हुई है, ताकि वो भी जाँच प्रक्रिया का हिस्सा बन सके और अपना बयान दर्ज करा सके। बेंगलुरु सिटी के पुलिस कमिश्नर कमल कांत ने बताया कि शुरुआती जाँच के बाद बलात्कार और प्रताड़ना का मामला दर्ज कर लिया गया है। पीड़िता को खोजने के लिए पुलिस की एक अलग टीम बनाई गई है। अब तक मिली सूचनाओं के अनुसार, सभी आरोपित बांग्लादेशी माने जा रहे हैं और पुलिस ने आशंका जताई है कि ये किसी गैंग का हिस्सा हैं।
पीड़िता की वित्तीय समस्याओं के कारण उसे प्रताड़ित किया गया और और क्रूरता से उसका यौन शोषण किया गया। बेंगलुरु पुलिस ने आश्वासन दिया है कि पूरी तत्परता से वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में जाँच आगे बढ़ाई जा रही है। राममूर्ति पुलिस थाने में इस मामले की FIR दर्ज की गई है। शुक्रवार (मई 28, 2021) को आरोपितों को अदालत में पेश किया जाएगा। पुलिस ने बताया कि 6 आरोपितों में 2 महिलाएँ हैं।
It is only one video..which goes viral nd their inhuman face came out..but what abut those cases where no such videos or nothing is available...how many girls face this ?? We also can't imagine the pain of those girls who trapped wid these kind of monsters
ये घटना बेंगलुरु के ही एक NRI कॉलोनी में हुई है। आरोपितों में से एक रफीदुल इस्लाम TikTok पर भी सक्रिय है और वहाँ उसके अच्छे-खासे फॉलोवर्स हैं। ये घटना लगभग एक सप्ताह पूर्व की है। सभी आरोपित वेश्यावृत्ति के धंधे में लिप्त थे। पीड़िता को इस तरह से प्रताड़ित किए जाने के पीछे व्यक्तिगत दुश्मनी को भी कारण बताया जा रहा है। आरोपितों से पूछताछ के बाद मानव तस्करी के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हो सकता है।
वायरल वीडियो में आरोपितों को अपनी करतूतों को वीडियो कॉल पर अन्य परिचितों को दिखाते हुए भी देखा जा सकता था। वीडियो रिकॉर्ड करते समय आरोपितों ने पीड़िता के प्राइवेट पार्ट में एक शराब की बोतल भी घुसा दी थी। वीडियो में पीड़िता चिल्लाती है, “कृपया मेरे साथ ऐसा मत करो, वीडियो रिकॉर्ड मत करो।” इसके बाद आरोपितों में से एक ने पीड़िता के मुँह मर कपड़ा ठूँस कर इसे बंद कर दिया। असम पुलिस पाँचों आरोपितों की तस्वीरें जारी की थी।
2019 चुनाव में अपने प्रचार के दौरान साध्वी प्रज्ञा द्वारा ATS अधिकारी करकरे के विरुद्ध बोलने पर विपक्षी अपनी पोल खुलती देख चुनाव आयुक्त के पास रोना-रोने पहुँच गए थे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी किसी मजबूरी में उनसे अपनी नाराजगी दिखाई, लेकिन प्रताड़ना भोगी की उत्पीड़न किसी सुनी। अक्सर अपने लेखों में बेगुनाह साध्वी प्रज्ञा, स्वामी असीमानंद और कर्नल पुरोहित को किस तरह कांग्रेस समर्थित तत्कालीन यूपीए सरकार इस्लामिक आतंकियों को बचाने के लिए "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" के झूठे प्रचार को बल देने के लिए इनको पकड़ जेलों में डाल यातनाएं दे रही थी, विपरीत इसके छद्दम देशप्रेम दिखाने के लिए पकडे गए आतंकवादियों को कोरमा, बिरयानी खिलाया जाता था। रिपब्लिक टीवी को साक्षात्कार देते हुए भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा ने आज अर्नब गोस्वामी और पूरे देश के सामने लगातार कई चौंकाने वाले खुलासे किए। इस इंटरव्यू में उन्होंने मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह पर गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने कहा है कि 3-4 पुलिसकर्मियों की उपस्थिति में उनको व्यक्तिगत रूप से बहुत ज्यादा प्रताड़ित किया और हिरासत में लेकर उन्हें बेल्ट से इस तरह पीटा गया कि उन्हें वेंटीलेटर तक पर जाना पड़ा। उनकी रीढ़ की हड्डी भी टूट गई।
इतना ही नहीं भगवा आतंक के नाम पर पुलिस बर्बरता झेल चुकी साध्वी प्रज्ञा का कहना है कि जब जब उनकी बेल की बात चली तो न्यायाधीशों तक को धमकी देने का काम हुआ। उन्होंने परमबीर सिंह पर आरोप लगाया है कि उन्हें हिरासत के दौरान पॉर्न वीडियो दिखाई गईं और उनसे भद्दे सवाल किए गए।
मेरे ऊपर फर्जी केस लगाया गया। महाराष्ट्र ATS ने वर्दी का दुरुपयोग किया। ये देशद्रोही केस था, मुझे मालेगांव मामले में मास्टरमाइंड बनाया गया: साध्वी प्रज्ञा- सांसद, BJP
पहले हमको भगवा आतंकवादी कहलवाया गया। भारत को आतंकवादी देश घोषित करना इनका षड्यंत्र था। ये कांग्रेस का षड्यंत्र था। ऐसे देशघाती लोगों के सामने रुकेंगे नहीं झुकेंगे नहीं: साध्वी प्रज्ञा- सांसद, BJP
परमबीर सिंह अत्याचारी और निम्न स्तर का व्यक्ति है। गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त है। इस व्यक्ति ने मुझे जेल में डाल करके, जिन्हें पिटने का अधिकार नहीं होता है उसने इतनी भयानक यातनाएं दी जो किसी अन्य महिला को नहीं दी गई होगी: साध्वी प्रज्ञा- सांसद, BJPhttps://t.co/G945HvzM0Zpic.twitter.com/ICNHOP7gkh
महाराष्ट्र सरकार एक बार अन्याय कर चुकी है। मालेगांव कांड में हिंदुओं का नाम डाला। इसमें कितने लोग आहत हो रहे हैं इससे उन्हें कोई मतलब नहीं है: साध्वी प्रज्ञा- सांसद, BJP
इनका षड्यंत्र था, हमें सालों साल जेल में रखा जाए। ऐसे अफसर राजनीतिक तौर पर चलते हैं। कांग्रेस परमबीर जैसे लोगों को पालती है: साध्वी प्रज्ञा- सांसद, BJP
परमबीर वहां पर खड़े थे, इंस्पेक्टर अवाड, स्वर्णा शिंदे थी। 7-8 लोगों ने सर्कल करके मुझे पीटा। मुझे पैरों के तलों में बेल्ट से मारा जाता था: साध्वी प्रज्ञा- सांसद, BJP
परमबीर ने इंस्पेक्टर की बेल्ट छीनकर, जितनी ताकत थी उतनी ताकत से मुझे पीटा। परमबीर के सामने मुझे गंदी फिल्में सुनाई गई। परमबीर ने वकालतनामा साइन नहीं करने दिया। परमबीर के रहते महाराष्ट्र पुलिस में न्याय नहीं हो सकता: साध्वी प्रज्ञा- सांसद, BJP pic.twitter.com/Q51UUADCA8
साध्वी प्रज्ञा ने यह भी कहा कि उन्हें 7-8 लोगों के सर्कल के बीच में उन्हें मारा गया। उनके पैरों के तलों तक में बेल्ट से पिटाई हुई। साध्वी ने इस इंटरव्यू में कहा है कि वह परमबीर के षड्यंत्र के विरुद्ध कुछ करने वाली हैं, जिन जिन लोगों ने उन्हें प्रताड़ित किया, उन पर भी केस होगा और उन्हें दंड दिलवाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि पहले उनको भगवा आतंकी कहा गया कहा गया और फिर भारत को आतंकवादी देश घोषित करवाने का प्रयास हुआ। उनका आरोप है कि ये सारा षड्यंत्र कॉन्ग्रेस का था।
ट्विटर पर लोगों की प्रक्रिया :-
जिस दिन हिन्दू भगवा आतंकवादी बन गया तो बाकी धर्म के लोग हिन्दुस्तान छोड़कर भाग जाएगे न कोई कॉग्रेस रहेगी न कम्युनिस्ट न बॅालीवुड रहेगा
नपुंसक परम.. की औकात बताती हुई साध्वी प्रज्ञा, इतना टॉर्चर किया रीड की हड्डी तक तोड़ दी वर्दी के अंदर छिपा दरिंदा, हैवान, वर्दी पर कलंक है यह देशद्रोही, इतने बड़े पद पर ऐसे नीच व्यक्ति को बैठाना देश का अपमान है,संविधान का अपमान है😡#SadhviExposesParamBir pic.twitter.com/AZP9l63BRp
साध्वी प्रज्ञा ठाकुर खुद लवजिहाद के झूठे मामलों को भी टवीटर पर शेयर करतीं हैं ओर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाती है ओर दुसरी बात ये की खुद गोडसे वादी है पहले कानून तोडते है ओर जब कानून अपना काम करता है तो इनको दर्द होता है जैसे नशेड़ी सपांदक अर्नब गोस्वामी को होता है
बहुत ही अच्छा अर्णव जी।मेरे सुझाव को आपने मानकर साध्वी जी को बुलाया बहुत बहुत धन्यवाद।परमवीर को आज देश के सामने साध्वी जी ने नंगा कर दिया ओर उसके काले कारनामों का पर्दाफाश कर दिया।ये देश की जनता को बताना जरूरी था।अब परमवीर को इस्तीफा दे देना चाहिए।