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सनातन धर्म का अपमान कांग्रेस को ले डूबा… अपनी ही पार्टी पर बरसे आचार्य प्रमोद कृष्णम, पूर्व क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद बोले – सनातन को गाली देने का नतीजा

विधानसभा चुनाव 2023 में कॉन्ग्रेस पार्टी को आचार्य प्रमोद कृष्णम और पूर्व क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद ने दिखाया आईना
इतिहास साक्षी है कि सनातन विरोधियों का विश्व में कोई नामलेवा नहीं, एक अपवाद भारत को छोड़ कर, वह भी कांग्रेस और वामपंथियों द्वारा मुस्लिम तुष्टिकरण करते गौरवशाली हिन्दू सम्राटों के इतिहास को धूमिल कर आतताई मुगलों को महान बता दिया गया। वही स्थिति इन विधान सभा चुनावों से पूर्व सनातन धर्म पर कितने प्रहार किये सभी ने देखा। 

मानो या न मानो, तेलंगाना में भाजपा द्वारा अपने इकलौते विधायक टी राजा सिंह के विरुद्ध ओवैसी द्वारा बिछाये जाल में फंसने की बजाए राजा के साथ खड़ी होती, तेलंगाना की स्थिति भी कुछ और ही होती। सम्भावना व्यक्त की जा रही है कि भाजपा ओवैसी को ओवैसी के ही गढ़ शिकस्त दे दी होती।  ओवैसी जो अपने ही राज्य में समस्त सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करने में असमर्थ है यानि अपने संसदीय क्षेत्र यानि हैदराबाद क्षेत्र को छोड़ इतने बड़े तेलंगाना में चुनाव लड़ने में पूर्णरूप से असफल हैं। ओवैसी की पार्टी AIMIM को क्षेत्रीय पार्टी भी नहीं कह सकते, ये तो मीडिया ने इसे इतना उठा रखा है। ओवैसी की पार्टी से कहीं सम्मानित समाजवादी, बहुजन समाज, जनता दल और आम आदमी पार्टी आदि पार्टियां हैं, जिनमे अपने राज्य में दबदबा होने के साथ साथ दूसरे राज्यों में जाकर जमकर चुनाव लड़ने की क्षमता रखते हैं, लेकिन ओवैसी अपने राज्य तेलंगाना में नहीं।   

देश के पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव 2023 के नतीजे लगभग आ चुके हैं। रविवार (3 दिसंबर, 2023) को चार राज्यों के चुनाव नतीजों जारी किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के रुझानों की मानें तो तीनों ही राज्यों में भाजपा सत्ता में आ रही है। इन चुनाव परिणामों के साथ ही कांग्रेस पार्टी को याद दिलाई जा रही है कि कैसे पार्टी ने सनातन धर्म का अपमान किया था, सनातन का अपमान करने वालों का जम कर साथ दिया।

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के पिछड़ने पर पार्टी नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा, “सनातन (धर्म) का विरोध करने से पार्टी डूब गई है। यह सनातन (धर्म) का विरोध करने का अभिशाप है।”

उन्होंने कहा, “भारत भावनाओं का देश है और सनातन का विरोध हमें ले डूबा। जातिवादी राजनीति को इस देश ने कभी स्वीकार नहीं किया है। 6 सितंबर, 1990 का राजीव गाँधी जी का भाषण हैं संसद में वो सुन लीजिएगा। देश अगर जातिवादी होता तो विश्वनाथ प्रताप सिंह को गाँव-गाँव पूजा जाता। विश्वनाथ प्रताप सिंह जी जब मंडल लाए थे उनसे बड़ा कोई जातिवाद का कार्ड खेलने वाला नहीं था और न हुआ, लेकिन विश्वनाथ प्रताप सिंह जी की हालत इस देश में क्या हुई ये सबके सामने है। इसीलिए, जातिवादी राजनीति और सनातन का विरोध ये हमें ले डूबे।”

उन्होंने आगे कहा, “मुझे लगता है ये कांग्रेस की हार नहीं है बल्कि वामपंथ की हार है। कुछ दिनों से कांग्रेस में कुछ ऐसे नेता घुस आए थे और घुस आए हैं और उनका बड़ा प्रभुत्व हैं। कांग्रेस के सभी फैसलों में उनकी बड़ी भूमिका है। और वो कुछ नेता कांग्रेस को महात्मा गाँधी के रास्ते से हटाकर वामपंथ के रास्ते पर ले जाना चाहते हैं और ले जा रहे हैं। जो कांग्रेस पार्टी महात्मा गाँधी के रास्ते पर चलकर यहाँ तक आई है।”

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने आगे कहा, “महात्मा गाँधी जी के सभा की शुरुआत रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीताराम से हुई थी। आज उस कांग्रेस को सनातन के विरोधी पार्टी के रूप में देखा जा रहा है। ये दुर्भाग्य है। कांग्रेस पार्टी ने अगर ऐसे नेताओं को नहीं निकाला तो पार्टी की हालत जल्द ही AIMIM जैसी हो जाएगी। कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, “कांग्रेस को महात्मा गाँधी, पंडित नेहरू, इंदिरा गाँधी राजीव गाँधी की कांग्रेस  रहने दिया जाए। पार्टी को महात्मा गाँधी के रास्ते से हटाकर मार्क्स के रास्ते पर ले जाने वाले जो नेता है। इनको बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए।” आचार्य प्रमोद ने राजस्थान और मध्य प्रदेश की हार पर कहा, “इस हार का पूरा विश्लेषण होगा। फिलहाल तो इन राज्यों के पार्टी प्रभारियों को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। अगर उनमें जरा सी भी शर्म हो। तो खुद ऐसा करना चाहिए।”

वहीं पूर्व क्रिकेटर वेंकटेंश प्रसाद ने भी सनातन धर्म का विरोध करने वालों पर कांग्रेस को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर ट्वीट किया, “सनातन धर्म को गालियाँ देने वालों का बुरा नतीजा भुगतना पक्का था। प्रचंड जीत के लिए भाजपा को बहुत-बहुत बधाई। प्रधानमंत्री के अद्भुत नेतृत्व का एक और प्रमाण नरेंद्र मोदी जी और अमित शाह और जमीनी स्तर पर पार्टी कैडर के शानदार काम का नतीजा है ये चुनाव परिणाम।”

राजस्थान : घर में रखे बारूद के धमाके से छत तोड़कर उड़ी जावेद की बीवी: लाश के टुकड़े पड़ोस की छत पर बिखरे

                                                                                       राजस्थान में विस्फोट (साभार: पत्रिका/भास्कर)
राजस्थान के झुंझनूं में विस्फोटक बनाते समय बुधवार (12 जुलाई 2023) को धमाका हो गया। धमाके में विस्फोटक बनाने वाली महिला छत तोड़ते हुए 25 फीट दूर दूसरे मकान की छत पर जाकर गिरी। इस घटना में उसकी मौके पर ही मौत हो गई। उसके शरीर के टुकड़े इधर-उधर बिखर गए।

विस्फोट इतना तेज था कि महिला के शरीर के चिथड़े उड़ गए। महिला के शरीर से उड़े एक हाथ और एक पैर अलग होकर कहीं दूर जा चुके। शरीर से अलग हुए एक हाथ और पैर को पुलिस ने घंटों तक तलाश किया। इनमें से पैर करीब 30 फीट दूरी पर एक बाड़े में मिल गया, जबकि हाथ फिलहाल नहीं मिल पाया है।

घटना झुंझनूं के उदयपुरवाटी का है। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस्लामिया मदरसा के पास सुबह करीब 8 बजे इतना तेज ब्लास्ट हुआ कि पूरे उदयपुरवाटी में इसकी आवाज सुनाई दी। तेज आवाज सुनकर इलाके के लोग घटनास्थल पर जमा हो गए। जिस घर में विस्फोट हुआ, वह मुस्लिम परिवार का है।

यह मुस्लिम परिवार पटाखा बनाने का काम करता है। घटना के वक्त सभी लोग अपने-अपने काम में लगे हुए थे। जावेद की 27 साल की बीवी आफरीन भी पटाखों में केमिकल भरने का काम कर रही थी। इसी दौरान जबरदस्त विस्फोट हो गया और आफरीन उछलकर दूसरे के मकान पर जा गिरी।

जिस घर में पटाखा बनाने का काम होता था, उसी मकान में मुस्लिम के परिवार के सभी 6-7 सदस्य रहते थे। मृतका अफरीन का पति जावेद साँप पकड़ने का काम करता है। परिवार मजदूरी भी करता है और शादी विवाह के मौके पर पटाखों की दुकान भी लगा लेता है। आफरीन के ससुर लाल मोहम्मद के पास पटाखे बनाने का लाइसेंस था। लाल मोहम्मद की साल 2022 में मौत हो गई।

पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया है और मामले की जाँच शुरू कर दी है। एएसआई राम सिंह ने बताया कि मदरसा के नजदीक जावेद के घर में हादसा हुआ है। महिला का क्षत-विक्षत शव पड़ोसी के घर की छत पर मिला है। विस्फोटक सामग्री के ब्लास्ट होने की सूचना है, लेकिन अभी इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता।

जिस घर में यह हादसा हुआ है, उस घर में करीब 20 साल पहले भी भयानक हादसा हुआ था। उस समय दशहरा के मौके पर परिवार को रावण बनाने का ठेका मिला था। रावण बनाने का काम चल रहा था, उसी दौरान विस्फोट हो गया था। विस्फोट में मकान ढह गया और परिवार के 5 सदस्यों की मौत हो गई थी।

उत्तर प्रदेश और राजस्थान के इन मंदिरों में अब शॉर्ट कपड़ों में दर्शन नहीं कर सकेंगे श्रद्धालु, अश्लीलता पर रोक के लिए लागू हुई नई व्यवस्था


सनातन हिंदू जनमानस जाग रहा है। अब देवी-देवताओं के अपने आराध्य स्थलों पर उसे किसी तरह की अश्लीलता बर्दाश्त नहीं है। देश के ज्योतिर्लिंगों से लेकर काशी विश्वनाथ तक कई बड़े मंदिरों में तो पहले ही भगवान के दर्शन करने के लिए ड्रेस कोड अनिवार्य है। अब दूसरे मंदिरों में भी इस पर अमल होने लगा है। ताकि आस्था के इन स्थलों पर सनातन संस्कृति की अनुपालना सभी के लिए बाध्यकारी हो, चाहे वो देशी हो या फिर विदेशी। चाहे वो किसी भी धर्म को मानने वाला हो, मंदिरों में प्रवेश के लिए उसके तय ड्रेस कोड का पालन करना ही होगा। राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुछ मंदिरों में मंदिर कमेटी की ओर से इसके लिए बकायदा बैनर-बोर्ड लगाए हैं। इसमें लिखा है- ”सभी श्रद्धालु मंदिर में मर्यादित वस्त्र पहनकर ही आएं। छोटे वस्त्र, हाफ पैंट, बरमूडा, मिनी स्कर्ट, नाइट सूट, कटी-फटी जींस आदि पहनकर आने पर मंदिर में प्रवेश की इजाजत नहीं होगी।’ मंदिरों में भड़काऊ कपड़े पहनकर आने वाले श्रद्धालुओं को लेकर लगातार शिकायतें आ रही थीं, जिसके बाद मंदिर कमेटी ने यह फैसला किया और ड्रेस कोड का पालन करने वाले श्रद्धालुओं को ही मंदिर में प्रवेश करने का दिशा निर्देश जारी किए हैं।

सभी लोगों को पर्यटन और धार्मिक यात्रा में फर्क समझना होगा
हिंदू सनातन धर्मियों और मंदिरों के पुजारी-महंत का मानना है कि लोगों को पर्यटन और धार्मिक यात्रा में फर्क समझना होगा। पवित्र जगहों की अपनी परंपरा और मर्यादा होती है, उसी के अनुसार मंदिर में मर्यादित आचरण भी करना चाहिए। उसी माहौल के अनुसार आचरण और वेशभूषा भी होनी चाहिए। अगर आप किसी टूरिस्ट प्लेस पर जा रहे हैं, तो वहां के अनुसार कपड़े पहनें और अगर आप मंदिर जैसी धार्मिक जगह पर आ रहे हैं, तो कपड़े मर्यादा में होने चाहिए। मंदिर या किसी धार्मिक जगह पर शालीन कपड़े पहनना ज्यादा शोभा देता है। जैसे महिलाएं साड़ी या सूट और पुरुष पैंट और शर्ट। इसी को देखते हुए उत्तराखंड में हरिद्वार के मंदिरों में ड्रेस कोड लागू कर दिया गया है। यहां के मंदिरों में आप वेस्टर्न कपड़े पहनकर जाने पर रोक भी लगा दी गई है। ऐसे में अब महिलाएं ही नहीं, बल्कि पुरुष और लड़कियां भी छोटे-छोटे कपड़े पहनकर या वेस्टर्न कपडों के साथ मंदिरों में दर्शन नहीं कर सकते। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी के मुताबिक यह पाबंदी इसलिए है कि भारतीय संस्कृति अंग प्रदर्शन को अच्छा नहीं माना गया है।

उदयपुर में विश्व प्रसिद्ध जगदीश मंदिर में शॉर्ट कपड़े पहनने पर रोक
लेकसिटी उदयपुर में स्थित भगवान जगन्नाथ के विश्व प्रसिद्ध जगदीश मंदिर में अब श्रद्धालु शॉर्ट कपड़े पहनकर प्रवेश नहीं कर सकेंगे। मंदिर प्रबंधन ने शॉर्ट कपड़े पहनकर मंदिर में प्रवेश करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। नए नियमों की पालना कराने के लिए मंदिर परिसर में पोस्टर लगाए गए हैं और सूचना भी लिखी गई है। इनमें साफ लिखा गया कि मंदिर में आने वाले श्रद्धालु पुरुष और महिलाएं शॉर्ट कपड़े पहनकर नहीं आएं, अन्यथा उन्हें प्रवेश नहीं दिया जाएगा। यह व्यवस्था मंदिर मंडल की ओर से लागू की गई है। मंदिर में आने वाले भक्तों से इसकी अपील भी की जा रही है। उन्हें सनातन धर्म की संस्कृति के बारे में बताया जा रहा है। मंदिर मंडल की ओर से बाहर से आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों को भी नए नियमों की पालना करने के लिए जागरुक किया जा रहा है।

हापुड़ के खाटू श्याम मंदिर में कटी-फटी जींस, छोटे कपड़े और हाफ पैंट वर्जित

उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में स्थित प्रसिद्ध खाटू श्याम मंदिर कमेटी ने सनातन संस्कृति के लिए श्रद्धालुओं के पहनावे को लेकर नये दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके मुताबिक कटी-फटी जींस, छोटे कपड़े और हाफ पैंट जैसे कपड़े पहनकर दर्शन करने आने वालों को मंदिर में प्रवेश नहीं मिलेगा। मंदिर समिति के मुताबिक अगर यहां दर्शन करने आना है तो श्रद्धालुओं को ड्रेस कोड का पालन करना होगा। इसको लेकर मंदिर कमेटी ने दिशा-निर्देश जारी कर मंदिर परिसर के बाहर एक बैनर भी लगवा दिया है। मंदिर कमेटी के लगे उस बैनर में लिखा है- ”सभी महिलाएं एवं पुरुष मंदिर में मर्यादित वस्त्र पहनकर ही आएं। छोटे वस्त्र, हाफ पैंट, बरमूडा, मिनी स्कर्ट, नाइट सूट, कटी-फटी जींस आदि पहनकर आने पर बाहर से दर्शन करें. कृपया सहयोग करने की कृपा करें।”

हरिद्वार से मैसेज के बाद बोहरा गणेश मंदिर छोटे कपड़ों पर प्रतिबंध
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो उदयपुर से प्रख्यात बोहरा गणेश मंदिर में भड़काऊ कपड़े पहनकर आने वाले श्रद्धालुओं को लेकर लगातार शिकायतें आ रही थीं। इसके बाद मंदिर प्रबंधन ने इस दिशा में कुछ दिन पहले ही कदम उठाया है। मंदिर के पंडित इंद्र जोशी के मुताबिक छोटे वस्त्र पहनकर मंदिर में प्रवेश करने पर पाबंदी लगाई गई है। हरिद्वार में मंदिरों में छोटे कपड़े पहनकर आने पर प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है। वहां से यह मैसेज हमारे मंदिर के ग्रुप में आया था। इसके बाद इस पर एक्शन लेते हुए यहां भी सख्ती से इसे लागू कर दिया है। कोटड़ी चारभुजा मंदिर में भी पिछले माह ड्रेस कोड लागू किया गया है। कमेटी ने मंदिर के सभी मुख्यद्वार पर ऐसे बोर्ड लगा दिए हैं। मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष सुदर्शन गाड़ोदिया के मुताबिक श्रद्धालुओं से मर्यादित कपड़े पहनकर आने की अपील की गई है।

इन मंदिरों में पहले से ही सनातन संस्कृति के अनुरूप है ड्रेस कोड

देश के प्रमुख मंदिरों में प्रवेश या दर्शन के लिए वेशभूषा धारण करना अनिवार्य है। यदि किसी को पारंपरिक कपड़े जैसे धोती, लुंगी या अन्य पोशाक पहनने की आदत नहीं है या असुविधा होती है तो इसके लिए रेडिमेड पारंपरिक वस्त्रों की इंतजाम है। आइए, जानते हैं कि कुछ प्रमुख मंदिरों में क्या है ड्रेस कोड…

महाकाल ज्योतिर्लिंग: देश के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक महाकाल ज्योतिर्लिंग धर्म नगरी उज्जैन में है। इस मंदिर में भस्म-आरती के दर्शन करने, अभिषेक, पूजा आदि करने के लिए पुरुषों को धोती और महिलाओं कोरी साड़ी पहनना अनिवार्य है। मंदिर में भस्मार्ती के समय ज्योतिर्लिंग पर जब भस्म चढ़ाई जाती है, तब महिलाओं को कुछ पलों के लिए घूंघट रखना होता है, क्योकि यह दृश्य देखना उनके लिए वर्जित है।

तिरुपति बालाजी मंदिर: इस विश्व प्रसिद्ध मंदिर में बरमुडा, शॉर्ट्स या टी शर्ट पहनकर श्रद्धालु प्रवेश नहीं कर सकते है। महिलाओं को साड़ी या सलवार सूट पहन कर आने से प्रवेश मिलता है। मन्दिर में होने वाले विशेष अनुष्ठानों में हिस्सा लेने वाले पुरुषों के लिए धोती या पायजामा और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना आवश्यक है।

काशी विश्वनाथ मंदिर: वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में विदेशी पर्यटक अक्सर कम कपड़ों में प्रवेश करते हैं। इसलिए पुरुषों के लिए धोती और विदेशी महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। यदि मंदिर में लोग जींस, पैंट, शर्ट और सूट पहन कर प्रवेश करेंगे तो वे दूर से दर्शन के पात्र होंगे उन्हें स्पर्श दर्शन करने की अनुमति नहीं मिलेगी।

पद्मानाभस्वामी मंदिर: केरल के पद्मानाभस्वामी मंदिर में महिलाओं के लिए सलवार-सूट, जींस या अन्य परिधान पहनकर प्रवेश करना वर्जित है। वे केवल साड़ी पहन कर ही प्रवेश कर सकती है। वही पुरषों के लिए मुंडू या लुंगी पहन कर प्रवेश करना आवश्यक है ।

महाबलेश्वर मंदिर: कर्नाटक स्थित गोकर्ण का महाबलेश्वर मंदिर का शिवलिंग भक्तों में बहुत प्रसिद्ध है। इस मंदिर में पुरषों का जींस, पैंट, पायजामा, हैट, कैप, कोट और बरमूडा शार्ट्स पहनकर आना वर्जित है। पुरुष भक्त केवल धोती में और महिलायें को सलवार-सूट और साड़ी में ही प्रवेश मिलता है। महिलाएं जींस, पैंट या कैप्री पहन कर नहीं आ सकतीं।

मंदिरों का पुनरुद्धार कर सनातन संस्कृति के ध्वजवाहक बने पीएम मोदी
हिंदू जनमानस के जागने का सबसे बड़ा कारण केंद्र में नरेन्द्र मोदी का प्रधानमंत्री पद सुशोभित करना भी है। पिछले नौ साल में पीएम मोदी भारत की सनातन सभ्यता और संस्कृति के ध्वजवाहक के रूप में सामने आए हैं। उनकी सरकार न सिर्फ देश का भौतिक विकास कर रही है, बल्कि सनातन संस्कृति को दुनियाभर में पहचान भी दिला रही है। दरअसल भारत के पवित्र मंदिर सनातन संस्कृति के मूर्त रूप होते हैं। इन मंदिरों ने आस्था और धर्म को बचाए रखने और उसके फिर से उत्थान में बड़ी भूमिका निभायी है। इनको मोदी राज में प्राचीन और आधुनिक शैली के संगम से नये स्वरुप में ढाला जा रहा है। पिछले आठ सालों से प्रधानमंत्री मोदी प्राचीन धार्मिक, सांस्कृतिक विरासत और धरोहर रहे मंदिरों का जीर्णोद्धार कर उन्हें अपनी पुरानी गरिमा वापस दिला रहे हैं।

ईसाई मिशनरी ने धर्मांतरण का बदला तरीका, अब नाम हिंदू ही रहता है और घरों से भगवान की मूर्ति हटाकर जीसस की प्रेयर कर बना रहे ईसाई

भारत में बढ़ती अशांति के लिए धर्मांतरण सबसे अधिक जिम्मेदार है। सनातन विरोधी हिन्दुओं को जातियों में विभाजित कर जो विष फैला रहे हैं, लेकिन इन धर्मों में कितनी अधिक कट्टरता है कि एक जाति दूसरी जाति के चर्च, मस्जिद मे नहीं जा सकता, एक-दूसरे के कब्रिस्तान में अपना मुर्दे को दफ़न नहीं कर सकते, जिसको उजागर करने हिन्दू संगठनों को सक्रिय होना पड़ेगा। जब तक हिन्दू संगठन ईसाई और मुस्लिम में जातिवाद पर शोर नहीं मचाएंगे, धर्म परिवर्तन और हिन्दू विभाजन करने का खेल नहीं रुकेगा। गंगा-जमुनी तहजीब, संविधान और राष्ट्रीय एकता आदि जैसे नारों की बजाए इन धर्मों में सदियों से चल रहे जातिवाद को उजागर करना होगा। इन मजहबों के जातिवाद से वर्तमान पीढ़ी अज्ञान है। 
देश के सिर्फ पांच राज्यों में ही धर्म परिवर्तन कराना कानूनन अपराध होने के कारण इसकी विष-बेल लगातार फल-फूल रही ही है। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक कई राज्यों में जबरन या डरा-धमकाकर, प्रलोभन या लालच देकर धर्मांतरण का खेल मिशनियां और मुस्लिम बेखौफ चला रहे है। ईसाई मिशनरियों की बदमाशी दरअसल गैर भाजपाई राज्यों में ज्यादा चल रही है। इन राज्यों में सरकार द्वारा धर्मांतरण पर अंकुश लगाने के बजाए इस ओर के आंखे मूंदकर इन्हें समर्थन ही दिया जा रहा है। दूसरी ओर नेपाल बॉर्डर पर धर्मांतरण कराने का नया तरीका ही सामने आया है। ईसाई मिशनरियां पोल खुलने के डर से यहां दलित और गरीब हिंदुओं का धर्मांतरण तो कर रही हैं, लेकिन उनके नाम नहीं बदल रही हैं। ताकि पुलिस को कार्रवाई करने में मुश्किल आए। यहां लोगों के घरों के उनके इष्टदेव भगवान की मूर्तियों को हटा दी गईं हैं। इसके स्थान पर जन्म से हिंदुओं से भी जीसस की प्रेयर कराई जा रही है। मिशनरियों ने धर्मांतरण का ये नया तरीका निकाला है।

सनातन धर्म के प्रति नफरत के एजेंडे को आगे बढ़ाने में जुटी मिशनरी
सनातन धर्म से कांग्रेस और आम आदमी पार्टी किस कदर नफरत करती है यह कोई अनजानी बात नहीं है। कांग्रेस पार्टी ने देश पर 70 सालों तक शासन के दौरान सनातन धर्म को हर स्तर से नुकसान पहुंचाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। वहीं आम आदमी के पार्टी के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने तो 10 हजार लोगों को एक साथ हिंदू धर्म के खिलाफ शपथ दिलवाकर रिकार्ड ही बना डाला। छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार हो या राजस्थान की गहलोत सरकार, पंजाब में भगवंत मान सरकार हो या दूसरे कुछ राज्यों की सरकारों द्वारा पूरी तरह आंखें पूरी तरह से बंद कर लिए जाने के कारण धर्मांतरण का खेल ईसाई मिशनरियां खुलेआम खेल रही हैं। मिशनरियों की मंडलियां भोले-भाले आदिवासियों को कई तरह के प्रलोभन देकर, तो कभी बीमारी ठीक करने और शराब छुड़ाने के नाम पर धर्म परिवर्तन करा रही हैं। धर्मांतरण की करतूतों के खिलाफ कोई कार्रवाई न होने का ही दुष्परिणाम है कि मिशनरियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में तो ईसाई मिशनरी और आदिवासियों के बीच नौबत टकराव तक जा पहुंची है। सनातन धर्म के प्रति नफरत के अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने में मिशनरी जुटी हुई हैं और कांग्रेस व आप सरकार इनकी मदद कर रही हैं। यही वजह है कि कांग्रेस शासित राजस्थान में धर्मांतरण की कई घटनाएं हो चुकी हैं।

देवी-देवताओं की पूजा के बजाए अब यहां लोग यीशू की प्रेयर करने लगे
अब ईसाई मिशनरियों ने अपने धर्मांतरण के मिशन का तरीका बदल लिया है। इनकी मंडलियों गरीब हिंदुओं को प्रलोभन देकर उनका धर्म परिवर्तन कराती हैं। पहले धर्म परिवर्तन के समय हिंदू व्यक्ति का नाम परिवर्तित कर क्रिश्चियन नाम दिया जाता था, लेकिन इससे धर्मांतरण की पोल खुलने और पकड़े जाने के डर से मिशनरियों ने पैटर्न बदल लिया है। वे धर्मांतरण तो उसी तरह कराती हैं। हिंदुओं के दिलों में उनके देवी-देवताओं के प्रति अनादर का भाव उत्पन्न करती हैं। यीशू की प्रार्थनाओं पर जोर देती हैं, लेकिन कुछ जगह धर्मांतरण के बाद उनके नाम नहीं बदलती हैं। नेपाल बॉर्डर पर धर्मांतरण के कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें जन्म से हिंदुओं के घरों से भगवान की मूर्तियां हटा दी गईं। देवी-देवताओं की पूजा के बजाए अब यहां लोग यीशू की प्रेयर करने लगे हैं। इनका ऐसा ब्रेनवाश किया है कि ये लोग दावा करते हैं कि यीशू की प्रेयर करने से ही इनकी शराब-सिगरेट की लत छूट गई है और रोजगार मिल रहा है।

हिंदू के घर में ही बनाया चर्च, इसमें 300 लोगों के प्रेयर करने की जगह
नेपाल बॉर्डर से सटे लखीमपुर जिले के निघासन कस्बे में धर्मांतरण के इस नए पैटर्न का खुलासा दैनिक भास्कर की पड़ताल में हुआ है। नेपाल से सटे यूपी के कई जिलों में धर्मांतरण और क्रिश्चियन-मुस्लिम आबादी बढ़ने की खबरें अक्सर सामने आती हैं। इस दौरान पता चला था कि लखीमपुर के 30 गांवों में ईसाई मिशनरी एक्टिव हैं। ये गांव थारू जनजाति के हैं और चंदन चौकी से गौरीफंटा बॉर्डर के करीब बसे हैं। ये एरिया पलिया तहसील में आता है। यहां की 15 ग्राम पंचायतों में 50 हजार से ज्यादा थारू आबादी रहती है। यहां पास के नझौटा गांव में एक चर्च है, जो दूर से दिखता है। यह चर्च घर में ही है और रमाकांत कश्यप इसका पादरी भी हैं। यहां आसपास के 300 से 400 लोग प्रेयर के लिए आते हैं। पिछले साल ही लखीमपुर के तिकुनिया बॉर्डर से 25 किमी दूर निघासन में धर्मांतरण का मामला सामने आया था। इसमें कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी।

धर्म तो दंगे और अपराध करवाता है, हम तो यीशू को फॉलो करते हैं
यहां के अंबेडकरनगर में बने चर्च में रमाकांत कश्यप प्रेयर कर रहे हैं। उम्र 35 से 37 साल के बीच होगी। जन्म से हिंदू हैं, पर अब यीशू को मानने लगे हैं। रमाकांत की पत्नी भी यीशू को मानती हैं। वे कहते हैं कुछ साल पहले एक मलयाली पास्टर गिरीश सही रास्ते पर लेकर आए। मेरी हर गलत आदत खत्म हो गई। इसके बाद से ही यीशू को फॉलो करने लगा हूं। रमाकांत से कहा कि उसका नाम तो हिंदुओं की तरह है। जाहिर है आपने धर्म बदला है, लेकिन कैसे और क्यों? जवाब में रमाकांत ने अजब तर्क गढ़ा, ‘मैंने धर्म नहीं बदला। यीशू धर्म बदलने को नहीं कहते हैं। धर्म तो दंगा करवाता है, अपराध करवाता है। हम यीशू को फॉलो करता हूं।’ रमाकांत की शादी 2016 में हुई थी। रमाकांत की पत्नी लीना रायबरेली की हैं और यीशू को फॉलो करती हैं। वो बताती है पिता की तबीयत खराब रहती थी। तभी एक पास्टर के संपर्क में आई। उनकी चंगाई सभा में जाने लगी, इसके बाद पिता की तबीयत सुधरने लगी। उनके ठीक होते ही यीशू को फॉलो करने लगी।’

यीशू को फॉलो करने वालों में दलित ज्यादा, चंगाई सभा सक्रिय
चर्च में फास्ट प्रेयर करने आए जयराम निघासन के ही रहने वाले हैं। वे दलित समुदाय से हैं। मजदूरी करते हैं। 2017 में उनकी तबीयत खराब हुई, फिर बिस्तर नहीं छोड़ पाए। जयराम बताते हैं, ‘मुझे कुष्ठ रोग भी हो गया। मेरी बुआ को किसी ने निघासन में चल रहे इस चर्च के बारे में बताया था। वे मुझे यहां लाईं। इसके बाद मैं भी चर्च में आकर प्रार्थना करने लगा।’ यहीं हमारी मुलाकात शांति से हुई। शांति भी दलित हैं। वे बताती हैं कि परिवार में बहुत कलह होती थी। आए दिन पति से झगड़ा होता था। मेरी आंख में कोई दिक्कत थी। कई डॉक्टरों को दिखाया। सभी ने आंख निकालने की बात कही थी। इसी बीच मेरे पति की तबीयत भी खराब हो गई। वे भी ठीक नहीं हो रहे थे।’ ‘किसी के बताने पर मैं 2018 में यहां आई। चंगाई सभा में आने पर फायदा होने लगा। इसके बाद मैंने दवाइयां वगैरह छोड़ दीं। यहीं प्रार्थना करती रही। हमारी तबीयत में सुधार होता रहा।’

दो मंजिला मकान में चल रहा बगैर रजिस्ट्रेशन का चर्च, पुलिस को पता नहीं
रमाकांत ने दावा किया कि ‘यहां आने वाले अनुयायी जो दान-दक्षिणा चढ़ाते हैं, उसी से घर चल रहा है।’ लेकिन उनका घर देखकर ऐसा नहीं लगता। उसका दो मंजिला मकान बना हुआ है। ग्राउंड फ्लोर पर परिवार रहता है। अंदर बरामदा है, जिसमें सीढ़ियां बनी हैं। बरामदे से अंदर जाने के लिए गैलरी थी। गैलरी के दोनों तरफ कमरे थे। अंदर एक लॉबी है, जिसमें एक तरफ CCTV फुटेज देखने के लिए मॉनिटर लगा है। बीच में कालीन के ऊपर सोफा रखा है। कालीन के नीचे बेसमेंट है, रमाकांत ने उसे दिखाने से इनकार कर दिया। रमाकांत भले घर को चर्च बताएं, लेकिन चर्च का रजिस्ट्रेशन उनके पास नहीं है। यूपी सरकार ने नवंबर, 2020 को अवैध धर्मांतरण रोकने के लिए कानून बनाया था। रमाकांत से पूछा कि धर्मांतरण कानून आने के बाद क्या आप लोगों को रोका नहीं गया। उन्होंने तर्क दिया कि हम धर्मांतरण नहीं कराते। देखिए सारे नाम हिंदू ही हैं। जो लोग यीशू में विश्वास करते हैं, हम बस उन्हें यीशू को याद करने का तरीका बताते हैं। इसलिए पुलिस हमें परेशान नहीं करती।

संदिग्ध गांवों में कमेटियां बनाईं, ऑपरेशन कवच से क्राइम रोक रहे
बॉर्डर किनारे बसे थारू जनजाति के लोगों का धर्मांतरण कराया जा रहा है। रमाकांत ने बताया, ‘हम निघासन में हैं। ये नेपाल बॉर्डर से थोड़ा दूर है। हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।’ निघासन थाना क्षेत्र के बम्हनपुर में 18 सितंबर 2022 को 2 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। उन पर पैसे और नौकरी का लालच देकर 18 दलितों का धर्म परिवर्तन कराने का आरोप था। विश्व हिंदू परिषद के सह संयोजक सुमित जायसवाल और संयोजक आशीष की शिकायत पर पुलिस पहुंची थी। मौके से सुशील कुमार और राजकुमार को गिरफ्तार किया गया। दोनों अभी जमानत पर हैं। सीओ राजेश कुमार के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद नेपाल बॉर्डर पर ऑपरेशन कवच के तहत निगरानी की जा रही है। निघासन से सटे बॉर्डर पर हम लोग ऑपरेशन कवच चला रहे हैं। इसके तहत जिस गांव को हम संदिग्ध मानते हैं, वहां 10 लोगों की कमेटी बनाई हुई है। ये लोग हमें गांव में होने वाली संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी देते हैं।

जयपुर में नाबालिग को किडनैप करके जबरन धर्म परिवर्तन कराया
एक ओर नेपाल बॉर्डर पर खुलेआम धर्मांतरण का खेल चल रहा है, दूसरी ओर राजस्थान भी इससे अछूता नहीं है। दलित हिंदुओं को ईसाई बनाने का मामला यहां सुर्खियों में रहा है। ताजा मामला राजधानी जयपुर का ही है, जहां एक नाबालिग हिंदू लड़की को किडनैप करके धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश की गई। किसी तरह अपहर्ताओं के चंगुल से छूटकर घर वापस आई नाबालिग पागलों जैसी हरकत करने लगी। अपना बदला हुआ नाम बताकर खुद को मुस्लिम बताने लगी। मानसरोवर थाने में पीड़िता के पिता ने रिपोर्ट दर्ज करवाई है। पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक मानसरोवर निवासी एक व्यक्ति ने बताया कि उसकी 15 साल की बेटी पिंकी (बदला हुआ नाम) को किडनैप कर धर्म परिवर्तन करवाने की कोशिश की जा रही है।

जबरन या लालच देकर धर्मांतरण को रोकने के लिए किस राज्य में क्या है कानून?
1.ओडिशाः पहला राज्य है जहां जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए कानून आया था। यहां 1967 से इसे लेकर कानून है. जबरन धर्मांतरण पर एक साल की कैद और 5 हजार रुपये की सजा हो सकती है। वहीं, एससी-एसटी के मामले में 2 साल तक की कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है।
2.मध्य प्रदेशः यहां 1968 में कानून लाया गया था. 2021 में इसमें संशोधन किया गया। इसके बाद लालच देकर, धमकाकर, धोखे से या जबरन धर्मांतरण कराया जाता है तो 1 से 10 साल तक की कैद और 1 लाख तक के जुर्माने की सजा का प्रावधान है।
3.अरुणाचल प्रदेशः ओडिशा और एमपी की तर्ज पर यहां 1978 में कानून लाया गया था कानून के तहत जबरन धर्मांतरण कराने पर 2 साल तक की कैद और 10 हजार रुपये तक के जुर्माने की सजा हो सकती है।
4.छत्तीसगढ़ः 2000 में मध्य प्रदेश से अलग होने के बाद यहां 1968 वाला कानून लागू हुआ. बाद में इसमें संशोधन किया गया। जबरन धर्मांतरण कराने पर 3 साल की कैद और 20 हजार रुपये जुर्माना, जबकि नाबालिग या एससी-एसटी के मामले में 4 साल की कैद और 40 हजार रुपये जुर्माने की सजा का प्रावधान है।
5.गुजरातः यहां 2003 से कानून है। 2021 में इसमें संशोधन किया गया था. बहला-फुसलाकर या धमकाकर जबरन धर्मांतरण कराने पर 5 साल की कैद और 2 लाख रुपये जुर्माना, जबकि एससी-एसटी और नाबालिग के मामले में 7 साल की कैद और 3 लाख रुपये के जुर्माने की सजा है।

याचिकाकर्ता की कोर्ट से अपील, धर्म परिवर्तन रोकने के लिए अलग से बने कानून
अब बात करते हैं सुप्रीम कोर्ट में धर्मांतरण को रोकने के लिए दायर याचिका की। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने 23 सितंबर को याचिका दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमआर शाह और हिमा कोहली की बेंच ने जबरन धर्मांतरण के खिलाफ याचिका की सुनवाई करते हुए मौखिक टिप्पणी में इसे गंभीर मामला बताया। कोर्ट ने कहा कि जबरन धर्मांतरण न सिर्फ धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के खिलाफ बल्कि देश की सुरक्षा के लिए भी खतरा हो सकता है। याचिका में धर्म परिवर्तनों के ऐसे मामलों को रोकने के लिए अलग से कानून बनाए जाने की मांग की गई है। या फिर इस अपराध को भारतीय दंड संहिता (IPC) में शामिल करने की अपील की गई है। 

याचिकाकर्ता ने केंद्र के साथ-साथ तमाम राज्यों को भी प्रतिवादी बनाया
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता ने अर्जी दाखिल कर केंद्र और तमाम राज्यों को प्रतिवादी बनाया है। तामिलनाडु में 17 साल की लड़की की मौत के मामले में छानबीन की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने अपनी अर्जी में कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 14, 21 एवं 25 के तहत धोखाधड़ी, धमकी या डराकर धर्म परिवर्तन कराया जाना अपराध घोषित किया जाए। याचिका में नैशनल इन्वेस्टिंग एजेंसी (NIA), सीबीआई (CBI) और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को 17 साल की लड़की की मौत के मामले में कारण बताओ नोटिस जारी करने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अर्जी में कहा गया है कि दबाव बनाकर कराए जाने वाले अवैध धर्म परिवर्तन को संविधान के तहत अपराध घोषित किया जाए।

धर्म परिवर्तन गंभीर विषय है और इससे देश की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है
सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान कहा कि जो मुद्दे उठाए गए हैं और जबरन धर्म परिवर्तन के जो आरोप लगाए गए हैं, अगर वो सही हैं और उनमें सच्चाई है तो फिर यह गंभीर विषय है और इससे आखिरकार देश की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इससे देश की जनता के ‘धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार’ प्रभावित होते हैं। ऐसे में केंद्र सरकार को इस मामले में स्टैंड क्लियर करना चाहिए। इसलिए केंद्र सरकार हलफनामा देकर बताए कि वह कथित जबरन धर्म परिवर्तन रोकने के लिए क्या कदम उठा रहा है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह इस मामले की अगली सुनवाई 28 नवंबर को करेगा। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि कई राज्य सरकारों ने इसे रोकने के लिए कानून बनाए हैं। उन्होने यह भी कहा कि कई उदाहरण हैं जहां चावल और गेंहू देकर धर्म परिवर्तन कराए जा रहे हैं। तब बेंच ने कहा कि आप बताएं कि आप क्या कदम उठा रहे है?

कोर्ट ने याचिका की दलीलों से जताई सहमति, सरकार जल्द उठाए कदम
सुप्रीम कोर्ट ने भी याचिका में दी गई दलीलों से सहमत होकर जबरन धर्मपरिवर्तन को गंभीर विषय माना और केंद्र सरकार से कहा है कि अगर यह सच है तो वह इसे रोकने के लिए गंभीरता से कदम उठाए। उच्चतम न्यायालय ने सरकार को चेतावनी भी दी कि यह एक कठिन स्थिति है जिस पर काबू नहीं पाया गया तो देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा होगा और नागरिकों के ‘धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार’ प्रभावित होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि इस पर एहतियाती कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जल्द कदम उठाना होगा, ताकि इसे रोका जा सके। अगर ऐसा नहीं किया गया तो कठिन समय आ जाएगा। 

आप की दिल्ली: मदर टेरेसा और ईसाई मिशनरी के रास्ते पर चल रहे शिष्य केजरीवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ईसाई संत मदर टेरेसा के शिष्य रहे हैं। इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि वो किस विचारधारा से प्रेरित है। आम तौर पर माना जाता है कि शिष्य पर गुरु के उपदेशों का असर होता है। केजरीवाल पर भी उनके गुरु के उपदेश का असर दिखाई दे रहा हैे। वो उन्हीं के बताये रास्ते पर चल रहे हैं। जिस तरह मदर टेरेसा ने गरीबों की मुफ्त सेवा के बहाने दलितों और आदिवासियो के बीच पैठ बनाई। उसके बाद ईसाई मिशनरियों ने चमत्कारिक मुफ्त इलाज, मुफ्त शिक्षा और पैसे का लालच देकर और ऊंच-नीच, जात-पात का एहसास दिलाकर गरीब दलितों और आदिवासियों का धर्मांतरण कराया। उसी तरह केजरीवाल भी मुफ्त रेवड़ी कल्चर के जरिए गरीब दलितों, आदिवासियों, सिखों में पैठ बनाकर उनके बौद्ध और ईसाई धर्म में धर्मांतरण को बढ़ावा दे रहे हैं। 

उत्तर प्रदेश: जिहाद की हिंसात्मक विचारधारा अलकायदा से प्रभावित और पोषित

उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में अवैध धर्मांतरण गिरोह चलाने वालों के तार पाकिस्तानी आतंकी संगठन अलकायदा से जुड़ रहे हैं। ये गिरोह पैसे का लालच देकर मूक-बधिर और मामूली दिव्यांग लोगों को अपना पहला टारगेट बनाता था। इस गिरोह के सदस्य प्रतिबंधित संगठन सिमी (Student’s Islamic movement of India) से तो पहले से ही जुड़े हुए थे। अब यूपी एटीएस के हत्थे चढ़े अवैध धर्मांतरण में संलिप्त आरोपियों के पास के ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिससे इनका कनेक्शन अलकायदा से भी जुड़ रहा है।यूपी में एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने दावा किया है कि इस मामले में पूर्व में महाराष्ट्र से गिरफ्तार एडम और कौसर आलम के पास से जो साक्ष्य मिले हैं, उससे पता चला है कि दोनों जिहाद की हिंसात्मक विचारधारा अलकायदा से प्रभावित और पोषित हैं।

राजस्थान:  जानकारी के बावजूद चुप्पी साधकर बैठे रहे अधिकारी
प्रदेश में धर्मांतरण को लेकर हिंदू जागरण मंच आक्रोशित है। मंच का आरोप है कि मिशनरी के संपर्क में आकर ईसाई धर्म के प्रचारक बने पास्टर धर्मपाल बैरवा व उनकी टीम ने क्षेत्र में धर्म के प्रचार के लिए वर्किंग कर रही है। अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में जयपुर के सांगानेर में धर्मांतरण को लेकर एक बड़ा आयोजन था। धार्मिक सभा के आयोजन के नाम पर इसके पोस्टर पर भी लगाए गए थे। धर्म जागरण मंच के संजय सिंह शेखावत ने जांच स्थानीय नेता अमित शर्मा से कराई। मामला खुलता चला गया। फिर हिंदू संगठनों की आपत्ति के बाद यह कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया। सांगानेर सदर के थानेदार बृजमोहन कविया खोखली दलील देते हैं कि आयोजकों ने कार्यक्रम की इजाजत ली थी। कार्यक्रम से दो-तीन दिन पहले आकर उन्होंने बताया कि अब कार्यक्रम नहीं कराना है। ईसाई धर्म के प्रचार के नाम पर ये लोग एससी या गरीब व्यक्ति को आर्थिक मदद या काम-धंधे का लालच देते हैं। 

अलवर: ईसाई धर्म अपनाने के लिए दवाब, हिंदू देवी-देवताओं के पोस्टर्स फाड़े
कांग्रेस सरकार जब राजधानी में ही धर्मांतरण को नहीं रोक पा रही है, तो जिलों में ऐसे मामलों में उससे कार्रवाई की क्या ही उम्मीद करें। जयपुर और बारां की तरह अलवर में भी धर्मांतरण का मामला पिछले माह ही आ चुका है। राजस्थान के अलवर जिले में माता-पिता पर अपने बेटे-बहू का धर्मांतरण कराने का आरोप लगा है। पीड़ित दंपति सोनू और उनकी पत्नी रजनी ने पिछले माह 19 अक्टूबर को इस मामले में शिकायत दर्ज कराई। इन दोनों ने शिकायत देते हुए पुलिस से कहा है कि सोनू के माता-पिता ने घर में रखी मूर्तियों को तोड़ दिया और हिंदू देवी-देवताओं के पोस्टर्स को फाड़ दिया है। वे लोग, इन पर ईसाई धर्म अपनाने के लिए लगातार दवाब बना रहे हैं। 

बारां: बैथली नदी में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां और तस्वीरें प्रवाहित कर दीं
राजधानी से पहले राजस्थान के बारां जिले में धर्म परिवर्तन का एक बड़ा मामला सामने आया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गाँव में मां दुर्गा आरती का आयोजन कराने वाले दलित युवकों से मारपीट की गई। पूरे घटनाक्रम से गुस्साए दलितों ने सामूहिक रूप से धर्म परिवर्तन कर लिया। बताया जा रहा है कि 250 दलितों ने बौद्ध धर्म अपनाने से सनसनी फैल गई। वहीं, पुलिस अधिकारी पूजा नागर ने बताया कि बारां जिले के बापचा थाना क्षेत्र के भुलोन गांव बौद्ध धर्म ग्रहण किया गया है। हालाँकि पुलिस ने धर्म परिवर्तन करने वालों की संख्या काफी कम बताई है। गाँव में दलितों ने जुलूस निकालते हुए धर्मांतरण की शपथ ली और गांव की बैथली नदी में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां और तस्वीरें प्रवाहित कर दीं।

चिदंबरम ने माना- राहुल मामले में नहीं मिल रहा जनता का समर्थन; समर्थन में जनता तो दूर कांग्रेसी भी नहीं पहुँचे

मोदी सरनेम मामले से पहले तीन बार माफी मांग चुके राहुल गांधी पार्टी के लिए बोझ बन गए हैं। सोनिया गांधी के बेटे राहुल गांधी पर मानहानि के 6 केस दर्ज हैं और वह सात मामलों में जमानत पर हैं। कांग्रेस की निगेटिव राजनीति को लोग नकारने लगे हैं।

राहुल गाँधी की लोकसभा सदस्यता समाप्त होने के बाद कांग्रेस द्वारा आयोजित सत्याग्रह में कई कांग्रेसी भी रुचि नहीं ले रहे हैं। इन सभाओं में भीड़ न जुटने पर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के हाईकमान वाले नेता नाराज हैं। पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को निष्क्रिय बता कर 86 नेताओं के नाम भेजे जाने के दावे किए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि इन नेताओं पर कांग्रेस आला कमान जल्द कार्रवाई कर सकता है। इस कार्रवाई में पार्टी में महत्वहीन पद देना और आने वाले चुनावों में बड़ी जिम्मेदारी से अलग करना भी शामिल हैं।

टीवी परिचर्चाओं में भाजपा द्वारा एक बात बड़ी प्रमुखता से कही जाती है, पार्टी ही राहुल को गंभीरता से नहीं ले रही। जहां तक सदस्यता जाने की बात है, इसके पीछे भी कांग्रेस का ही हाथ होता प्रतीत हो रहा है। मुस्लिम मुद्दों पर कांग्रेस में एक से बढ़कर एक धुरन्दर वकील खड़े हो जाते हैं, लेकिन राहुल के मुद्दे पर सभी के खामोश रहने के पीछे बहुत बड़ा षड्यंत्र जान पड़ता है। किसी ने राहुल को माफ़ी मांगने तक के लिए नहीं कहा।  

मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से खबर दी जा रही है कि पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने धरने-प्रदर्शन से दूर नेताओं को कार्रवाई का इशारा भी कर दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी लाइन पर न चलने वाले नेताओं की कांग्रेस में कोई जरूरत नहीं है। जयपुर के एक सम्मेलन में खुद वह पहले पहुँच गए थे, लेकिन अन्य कार्यकर्ता बाद में आए। इस दौरान उन्होंने यह भी पाया कि पार्टी मुख्यालय की तरफ से भेजे गए पोस्टरों को अनदेखा कर के जयपुर जिला टीम ने अपना खुद का पोस्टर बना डाला था। इस बात से डोटासरा का पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया।

गोविन्द सिंह डोटसरा ने गुस्से में यह तक कह डाला कि पर्दे के पीछे जो भी लोग खेल कर रहे हैं उन पर पार्टी की नजर है। धरने-प्रदर्शन से दूर लोगों गोविन्द सिंह ने 6 महीने का अल्टीमेटम दिया। उन्होंने कहा कि इसके बाद पार्टी लाईन से हट कर चल रहे लोग कांग्रेसी नहीं रह जाएँगे। राहुल गाँधी की लोकसभा सदस्यता खत्म होने का जिक्र करते हुए गोविन्द सिंह ने कहा कि अब भी जिसका खून नहीं खौल रहा है उसके कांग्रेसी होने पर प्रश्नचिन्ह है। अंत में उन्होंने राहुल के साथ नहीं तो कांग्रेसी नहीं भी कहा।

राहुल गाँधी की शान में कसीदे गढ़ते हुए गोविन्द सिंह ने कहा, “लानत है ऐसी राजनीति के ऊपर। ऐसी पार्टी जिसने हमें मान सम्मान दिया। ऐसा नेता जिसने इस देश को अपने और अपने परिवार के खून से सींचा है। अगर उसके ऊपर इस तरह की बात आती है तो मान लो कि देश के हर नागरिक को तैयार रहना चाहिए। जो AC के अंदर बैठे TV पर कौन आया-कौन गया देख रहे हैं ऐसे कांग्रेसियों की हमको जरूरत नहीं है।”

राहुल, प्रियंका और सोनिया के ऊलजलूल बयानों से अब कांग्रेसी भी जरुरत से ज्यादा दुःखी हो चुके हैं। कुछ कांग्रेस समर्थकों का मत है कि जब तक कांग्रेस परिवार की गुलामी में रहेगी, इसका डूबना निश्चित है। ये तीनों बोलने से पहले बिलकुल भी नहीं सोंचते कि जनता का मत क्या है और हमें क्या बोलना चाहिए और क्या नहीं।   

चिदंबरम ने माना- राहुल मामले में नहीं मिल रहा जनता का समर्थन

‘सारे मोदी चोर हैं’ बयान पर सूरत कोर्ट से दोषी ठहराए जाते ही कानून के अनुसार कांग्रेस नेता राहुल गांधी की संसद सदस्यता खत्म हो गई। सूरत कोर्ट से मौका दिए जाने पर भी नाखून कटाकर शहीद होने की कोशिश में राहुल गांधी ने माफी मांगने से इनकार कर दिया। जबकि राहुल गांधी इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में तीन बार माफी मांग चुके हैं। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बेटे राहुल गांधी को ‘पीड़ित दिखाओ और कांग्रेस बचाओ’ अभियान के तहत वकीलों की फौज होते हुए भी पार्टी ने विक्टिम कार्ड खेलने की कोशिश की।

राहुल गांधी को अयोग्य ठहराने जाने पर प्रियंका गांधी वाड्रा सहित पार्टी के तमाम नेताओं ने मोदी सरकार के खिलाफ नैरेटिव बनाने के लिए देश भर में धरना प्रदर्शन और सत्याग्रह किया। दिल्ली सहित अन्य जगहों पर काले कपड़ों में विरोध प्रदर्शन किया गया। लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि राहुल गांधी ने अपने भाषण में जिस तरह से पिछड़ी जाति का अपमान किया है, उससे पार्टी को आम लोगों का समर्थन नहीं मिल रहा है। कांग्रेस के सीनियर लीडर पी चिदंबरम ने यह स्वीकार भी किया है कि राहुल गांधी को लेकर पार्टी को आम लोगों का समर्थन नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने माना कि राहुल के समर्थन में लोग सड़कों पर नहीं उतर रहे हैं।

इंडिया टुडे के राजदीप सरदेसाई के साथ बातचीत में जब चिदंबरम से पूछा गया कि राहुल गांधी के अयोग्य होने के बाद जनता उनके समर्थन में आंदोलन करने क्यों नहीं आ रही है। तो उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से लोग प्रदर्शन करने सड़क पर नहीं उतर रहे हैं। सीएए मामले में भी सिर्फ मुसलमानों ने प्रदर्शन किया। हैरानी है कि दूसरे देशों की तरह लोग यहां प्रदर्शन करने नहीं आ रहे हैं। ये निराशाजनक है कि राहुल मामले में भी लोगों में कोई गुस्सा नहीं दिख रहा है।

सोनिया-राहुल के नेतृत्व में कांग्रेस मुक्त भारत की ओर पार्टी
वर्तमान में भले ही मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस के अध्यक्ष हैं लेकिन ये सभी जानते हैं कि मनमोहन सिंह की तरह उनका भी संचालन रिमोट कंट्रोल से हो रहा है। पार्टी के लिए गांधी परिवार ही सब कुछ है। पार्टी के सभी नेताओं के लिए सर्वेसर्वा सोनिया गांधी और राहुल गांधी ही हैं। जिस राहुल गांधी के लिए पार्टी के नेता फिलहाल धरना-प्रदर्शन में लगे हैं उनके नेतृत्व में पार्टी 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद से ही पतन की ओर है। लोकसभा-विधानसभा से लेकर नगर निकायों के चुनावों तक में पार्टी को लगातार मुंह की खानी पड़ रही है। 2014 के बाद से अब तक 8 साल में 53 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, इनमें से 44 में कांग्रेस को बुरी हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस अब देश के कुछ राज्यों तक में सिमट कर रह गई है। इनमें भी सिर्फ दो राज्य राजस्थान और छत्तीसगढ़ में ही उसकी पूर्ण बहुमत की सरकार और कांग्रेसी मुख्यमंत्री हैं। झारखंड में पार्टी छोटे सहयोगी दल की भूमिका में है। राहुल गांधी के कारण पार्टी के सैकड़ों जनाधार वाले नेता पार्टी छोड़कर बाहर जा चुके हैं।


राजस्थान कांग्रेस प्रभारी रंधावा के विवादित बोल, कहा- पहले मोदी को खत्म करो, मोदी खत्म हो गया तो...

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश के अब तक के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बीजेपी को मिल रही राजनीतिक कामयाबी से कांग्रेसी हताश और परेशान है। कांग्रेसी नेता ये मान चुके हैं कि प्रधानमंत्री मोदी देश आम लोगों के दिलों में इस कदर बस गए है कि उन्हें सियासी मैदान में हराना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है। ऐसे में कांग्रेसियों की सत्ता में वापसी के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा प्रधानमंत्री मोदी है। उनको लगता है कि जब तक प्रधानमंत्री मोदी है, उन्हें केंद्र की सत्ता में वापसी नहीं हो सकती। यही वजह है कि वे प्रधानमंत्री मोदी के जान के प्यासे हो गए हैं। वे प्रधानमंत्री मोदी को अपने रास्ते से हटाने के लिए उनकी हत्या के लिए लगातार साजिश करते रहते हैं और लोगों को भी भड़काते रहते हैं। ताजा मामले में राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने विवादित बयान देते हुए कार्यकर्ताओं से कहा कि अपनी लड़ाई भूल जाओ पहले मोदी को खत्म करो। मोदी खत्म हो गया तो हिंदुस्तान बच जाएगा।

13 मार्च को राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से राजभवन घेराव के दौरान कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए रंधावा ने कहा कि आप अडानी-अडानी कर रहे हो, मोदी-मोदी करो। ये मोदी देश का बेड़ागर्क कर रहा है। मोदी देश को बेच रहा है। रंधावा ने आगे कहा कि अपनी लड़ाई खत्म करो। मोदी को खत्म करने की बात करो। अगर मोदी खत्म हो गया… तो हिंदुस्तान बच जाएगा। अगर मोदी रहा तो भारत खत्म हो जाएगा

इससे पहले, 23 फरवरी को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की गिरफ्तारी के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दिल्ली एयरपोर्ट पर मोदी ‘तेरी कब्र खुदेगी’ जैसे आपत्तिजनक नारे लगाए थे। असम पुलिस की अपील पर दिल्ली पुलिस ने ये कार्रवाई की। कांग्रेस प्रवक्ता खेड़ा ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पिता के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी। अपमानजनक टिप्पणी पर रोके जाने के बाद भी पवन खेड़ा मुस्कुराते हुए तंज कसते रहे। इसे लेकर असम में उनके खिलाफ कई शिकायत दर्ज कराई गई थी। असम पुलिस के अनुरोध पर उन्हें गिरफ्तार किया गया। दिल्ली पुलिस द्वारा पवन खेड़ा को हिरासत में लिए जाने के बाद कांग्रेसी नेताओं ने दिल्ली एयरपोर्ट पर खूब हंगामा किया। नारेबाजी करते हुए कांग्रेसी नेता एयरपोर्ट पर धरने पर बैठ गए और प्रधानमंत्री मोदी के लिए अपशब्द बोलने लगे। कांग्रेसी नेताओं ने कहना शुरू कर दिया कि मोदी तेरी कब्र खुदेगी।

राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा
पहले मोदी को खत्म करो, मोदी खत्म हो गया तो…
13/03/2023
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबी और राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा प्रधानमंत्री मोदी को खत्म करना चाहते हैं। सोमवार, 13 मार्ट को उन्होंने विवादित बयान देते हुए कहा कि पहले मोदी को खत्म करो। मोदी खत्म हो गया तो हिंदुस्तान बच जाएगा। सुखजिंदर सिंह रंधावा ने राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से राजभवन घेराव के दौरान कार्यकर्ताओं से कहा कि आप अडानी-अडानी कर रहे हो, मोदी-मोदी करो। ये मोदी देश का बेड़ागर्क कर रहा है। मोदी देश को बेच रहा है। उन्होंने आगे कहा कि अपनी लड़ाई खत्म करो। मोदी को खत्म करने की बात करो। अगर मोदी खत्म हो गया… तो हिंदुस्तान बच जाएगा। अगर मोदी रहा तो भारत खत्म हो जाएगा।

मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेता और पूर्व मंत्री राजा पटेरिया
संविधान यदि बचाना है तो मोदी की हत्या करने के लिए तत्पर रहो
11/12/2022

मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री राजा पटेरिया प्रधानमंत्री मोदी की हत्या कराना चाहते हैं। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें उन्हें कहते हुए सुना जा सकता है कि ‘मोदी इलेक्शन खत्म कर देगा। मोदी धर्म, जाति, भाषा के आधार पर बांट देगा। दलितों को, आदिवासियों को, अल्पसंख्यकों का जीवन खतरे में है। संविधान यदि बचाना है तो मोदी की हत्या करने के लिए तत्पर रहो।’ राजा पटेरिया रविवार 11 दिसंबर को मध्य प्रदेश के पन्ना में कांग्रेस के एक कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की हत्या के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं को उकसाने का काम किया। मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पटेरिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुबोधकांत सहाय
मोदी हिटलर की मौत मरेगा, याद रखो मोदी
20/06/2022

कांग्रेस पार्टी ने 20 जून 2022 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर सत्याग्रह किया। इस दौरान झारखंड से आने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मनमोहन सिंह सरकार में मंत्री रहे सुबोधकांत सहाय ने मंच से प्रधानमंत्री मोदी की तुलना हिटलर से करते हुए मर्यादा लांघ दी। उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री हिटलर के रास्ते पर चलेंगे तो वह हिटलर की मौत मरेंगे। सहाय ने कहा, “‘मुझे तो लगता है हिटलर का सारा इतिहास इसने पार कर लिया। हुड्डा साहब बड़े गांव की भाषा में समझा रहे थे। हिटल ने भी ऐसी संस्था बनाई थी जिसका नाम था खाकी, सेना के बीच उसने बनाया था। मोदी हिटलर की राह चलेगा तो हिटलर की मौत मरेगा। याद रखो मोदी।” सुबोधकांत सहाय ने अपने संबोधन की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी को मदारी बताया था। आदि आदि, एक लम्बी सूची है।


‘राहुल गाँधी पागल, इटली को अपनी मातृभूमि मानते हैं’ – विश्वेन्द्र सिंह, कांग्रेस मंत्री के बेटे ने किया टारगेट

सचिन पायलट के करीबी हैं अनिरुद्ध (फोटो साभार: अनिरुद्ध की फेसबुक वॉल)
राजस्थान सरकार में मंत्री विश्वेन्द्र सिंह के बेटे अनिरुद्ध सिंह राहुल गाँधी पर हमलावर हैं। विदेशी धरती से भारत का अपमान करने का आरोप लगाते हुए अनिरुद्ध सिंह ने एक के बाद एक ट्वीट कर पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी शायद इटली को ही अपनी मातृभूमि मानते हैं। पिछले दिनों राहुल गाँधी ने ब्रिटिश पार्लियामेंट में बोलते हुए यह आरोप लगाया था कि भारत की संसद में कांग्रेसी नेताओं की ओर से बोलने पर माइक बंद कर दिया जाता है।

7 मार्च, 2023 को टाइम्स नाउ की एक खबर को कोट करते हुए अनिरुद्ध ने लिखा, “राहुल गाँधी पागल हो गए हैं। वो दूसरे देश की संसद में भारत का अपमान कर रहे हैं। या फिर वो (राहुल गाँधी) इटली को अपनी मातृभूमि मानते हैं।” इसी पोस्ट पर अन्य ट्विटर यूजर्स के कमेंट का जवाब देते हुए अनिरुद्ध का राहुल गाँधी पर हमला जारी रहता है। एक यूजर के कमेंट पर अनिरुद्ध लिखते हैं कि इटली के माफिया भारत की जमीनें हड़प रहे हैं।

कांग्रेस पार्टी के ऑफिशियल हैंडल से राहुल गाँधी की एक तस्वीर शेयर की गई थी। इस तस्वीर पर कटाक्ष करते हुए अनिरुद्ध ने लिखा – “हाँ, राहुल मानते हैं कि वे एक इटालियन हैं।”

लंदन में आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में राहुल गाँधी ने कहा था कि बीजेपी हमेशा सत्ता में नहीं रहने वाली। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अनिरुद्ध ने लिखा कि क्या यह सब बकवास भारत में नहीं किया जा सकता था या राहुल गाँधी अनुवांशिक रूप से यूरोपीय मिट्टी को पसंद करते हैं?

अनिरुद्ध सिंह, कांग्रेस और विवाद

यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस नेता और मंत्री विश्वेन्द्र सिंह के बेटे अनिरुद्ध सिंह के ट्वीट से विवाद खड़ा हो गया हो और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसकी आलोचना की हो। इसके पहले भी अनिरुद्ध के ट्वीट ने भरतपुर इलाके में बड़ा विवाद खड़ा किया था। अनिरुद्ध ने दिसंबर 2022 में ब्रिटिश शासन की 1935 में प्रकाशित किताब ‘द इंडियन स्टेट्स’ का उल्लेख करते हुए लिखा था कि भरतपुर रियासत के सिनसिनवार जाट जादौन राजपूतों के वंशज हैं।
अनिरुद्ध सिंह की इस बात को लेकर बहुत हंगामा हुआ। जाट महासभा की बैठक में इस बात को खारिज कर दिया गया था। जाट महासभा ने सिनसिनवार जाटों को श्री कृष्ण का वंशज बताते हुए यदुवंशी जाट क्षत्रिय करार दिया था।
अनिरुद्ध और उनके पिता विश्वेन्द्र सिंह के संबंध भी अच्छे नहीं हैं। मई 2021 में अनिरुद्ध ने अपने पिता पर शराब का सेवन करने और माता के प्रति हिंसक होने का आरोप लगाया था। इस दौरान उन्होंने दावा किया था कि 6 हफ्तों से वे अपने पिता के संपर्क में नहीं हैं। अनिरुद्ध ने खुद को मदद करने वाले अपने दोस्तों के कारोबार को नष्ट करने का आरोप भी अपने पिता पर लगाया था। अनिरुद्ध खुद को सचिन पायलट का समर्थक मानते हैं।