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सोनिया गाँधी के लिए मदर टेरेसा का संत होना भारत के लिए ‘गौरव’: लेकिन पुरुषोत्तम श्रीराम काल्पनिक

                                                                                    साभार: India Today/Quotage Biography
कांग्रेस ने 11 जनवरी 2024 को एक पत्र जारी करके अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में जाने से मना कर दिया। इस समारोह का आयोजन 22 जनवरी 2024 को होना है, जिसमें देश-दुनिया भर से लोग शामिल होंगे। इस समारोह के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस नेता सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी को निमंत्रण पत्र भेजा गया था।

कांग्रेस ने इस निमंत्रण को ठुकरा दिया है और एक पत्र जारी करके प्राण प्रतिष्ठा में ना जाने की वजह बताई है। पत्र में लिखा गया है, “भगवान राम की पूजा-अर्चना करोड़ों भारतीय करते हैं। धर्म मनुष्य का व्यक्तिगत विषय होता आया है, लेकिन बीजेपी और आरएसएस ने वर्षों से अयोध्या में राम मंदिर को एक राजनीतिक परियोजना बना दिया है।”

जहाँ कांग्रेस ने इस पत्र में धर्म को निजी विषय बताया है, वहीं सोशल मीडिया पर साल 2016 में लिखा गया सोनिया गाँधी का एक अन्य पत्र वायरल हो रहा है। यह पत्र सोनिया गाँधी ने वेटिकन के पोप फ्रांसिस को लिखा था, जिसमें भारत में दशकों तक रहीं ईसाई नन मदर टेरेसा के संत घोषित करने की प्रक्रिया से संबंधित था। इस पत्र को कांग्रेस  के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से साझा किया गया था।

इस पत्र में सोनिया गाँधी ने लिखा था कि मदर टेरेसा के संतीकरण से भारत में रहने वाले 2 करोड़ ईसाइयों सहित सभी नागरिक इस बात से बहुत गर्वित और प्रसन्न हैं कि पोप और कैथोलिक चर्च द्वारा मदर टेरेसा की आत्मा की पवित्रता, उद्देश्य की पवित्रता और मानवता की सेवा के माध्यम से ईश्वर की सेवा की।

उन्होंने आगे लिखा कि मदर टेरेसा का संत घोषित किया जाने वाला समारोह सभी भारतीयों के लिए उन्हें धन्यवाद देने का अवसर है, क्योंकि उन्होंने भारत में बिताए गए अपने समय में ‘देश के सबसे गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा’ की। उन्होंने आगे लिखा है कि टेरेसा ने अपना जीवन निस्वार्थ सेवा में बिताया और हर किसी को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए और सीखना चाहिए कि ‘हमारे रोजमर्रा के जीवन में करुणा और प्रेमपूर्वक रहने और दयालुता कैसे दिखाई जाए’।

सोनिया गाँधी ने भी टेरेसा के संतीकरण के इस पवित्र आयोजन के लिए वेटिकन जाने की इच्छा जताई थी। हालाँकि, उन्होंने कहा था वह बीमारी के कारण इस पवित्र आयोजन में नहीं शामिल हो पाएँगी। अपनी जगह उन्होंने कांग्रेस के दो नेताओं- मारग्रेट अल्वा और लुइज़िन्हो फलेइरो को वेटिकन सिटी में आयोजित समारोह में भेजा था।

जो सोनिया गाँधी कल तक पूरे देशवासियों की तरफ से मदर टेरेसा को संत की उपाधि दिए जाने पर ख़ुशी जता रही थीं और ईसाइयों के सबसे बड़े पद पोप को पत्र लिख रहीं थीं, वहीं अब उनकी पार्टी हिन्दुओं के आराध्य के मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को निजी मामला बताकर जाने से मना कर रही हैं।

कांग्रेस ने इस पूरे आयोजन को भाजपा और आरएसएस का कार्यक्रम बताया है। अब यह भी प्रश्न उठ रहा है कि यदि सोनिया गाँधी को धार्मिक मामले में राजनीतिक संगठनों का जुड़ा होना पसंद नहीं है तो वह एक ईसाई नन के संतीकरण के आयोजन पर इतना ख़ुशी क्यों थीं और अपनी पार्टी की तरफ से पत्र क्यों लिख रही थीं?

अवलोकन करें:-

मदर टेरेसा की वास्तविकता

मदर टेरेसा को लेकर भी भारतीय जनमानस में कई प्रश्न उठते रहे हैं। मदर टेरेसा पर आरोप है कि वह गरीबों को ईसाइयत में धर्मान्तरित करने का चक्र चलाती थीं। इसके साथ ही वह इलाज के ऐसे तरीकों को बढ़ावा देती थीं, जो कि सही नहीं थे। दरअसल, मदर टेरेसा एक धार्मिक मिशन पर भारत में थीं और उनके काम को कैथोलिक ईसाइयों द्वारा समर्थन मिलता था।

झाड़खंड : नाम – जेम्स स्कूल, काम – ईसाई प्रेयर के नाम पर धर्मांतरण : छोटे-छोटे बच्चों का भी किया जाता था ब्रेनवॉश

             प्रार्थना के नाम पर धर्मांतरण का खेल? कॉन्वेंट स्कूल में जुटे थे 400+लोग (फोटो साभारः AajTak, TV9)
झारखंड के कोडरमा जिले में कॉन्वेंट स्कूल में धर्मांतरण का मामला सामने आया। आरोप है कि स्कूल में 400-500 लोगों को इकट्ठा कर ईसाई मजहब की प्रार्थना कराई जा रही थी। जानकारी मिलने पर स्थानीय लोगों ने हंगामा करते हुए पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 14 लोगों को हिरासत में लेकर मामले की जाँच शुरू कर दी है। घटना शनिवार (8 जुलाई 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला कोडरमा जिले के तिलैया थाना क्षेत्र के जेम्स इंग्लिश स्कूल का है। जहाँ कोडरमा और आसपास के इलाकों के अलावा बिहार के गया और नवादा से भी बड़ी संख्या में लोग स्कूल में जुटे थे। इस कारण स्कूल के बाहर वाहनों की लंबी कतार लगी हुई थी। इससे स्थानीय ग्रामीणों को स्कूल में धर्मांतरण कार्यक्रम होने का संदेह हुआ।

इसके बाद लोगों ने स्कूल के बाहर हँगामा करते हुए मामले की जानकारी पुलिस को दी। इस पर पुलिस ने स्कूल से 11 पुरुषों और 3 महिलाओं समेत कुल 14 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इससे पहले भी स्कूल में इस तरह की प्रार्थना सभाएँ होती थीं। पुलिस प्रशासन ने स्कूल प्रबंधन को इस प्रकार की किसी भी गतिविधि में शामिल न होने के लिए कहा था। हालाँकि, इसके बाद भी यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इसके अलावा ग्रामीणों ने स्कूल प्रबंधन पर धर्मांतरण के लिए छोटे बच्चों का ब्रेनवॉश करने का आरोप लगाया। इस प्रार्थना सभा में शामिल होने आई एक नाबालिग लड़की का कहना है कि वह बीते 4-5 महीने से प्रार्थना सभा में आ रही है। यहाँ आने से उसे बहुत फायदा मिल रहा है। उसने दावा किया कि स्कूल में धर्म परिवर्तन नहीं जीवन परिवर्तन होता है।

वहीं इस पूरे मामले में कोडरमा एसपी प्रवीण पुष्कर का कहना है कि जेम्स स्कूल में धर्मांतरण की सूचना मिली थी। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर 14 लोगों को हिरासत में लिया है। सभी से पूछताछ की जा रही है। लोग प्रार्थना सभा में शामिल होने के लिए आए थे। हालाँकि, अब तक धर्मांतरण की पुष्टि नहीं हो पाई है। पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई होगा। तिलैया थाना प्रभारी भी शुरुआती जाँच के आधार पर धर्मांतरण न होने की बात कर रहे हैं। स्कूल के प्रिंसिपल मानवील ने कहा है कि स्कूल के 50 साल पूरे होने पर प्रार्थना सभा आयोजित की गई थी। धर्मांतरण नहीं हो रहा था। बल्कि लोग अपनी इच्छा से यहाँ आए थे। 

स्वीडन में कुरान जलाने के विरोध में जुमे पर पूरे पाकिस्तान में प्रदर्शन, PM का ऐलान: आतंकी संगठन बदला लेगा : चर्चों पर हमले की धमकी, ईसाइयों के लिए जहन्नुम बना देंगे

पाकिस्तान चाहे कितना भी कहे कि वह कट्टरवाद से पीड़ित है, लेकिन वहाँ सरकार ही इसे बढ़ावा देती है, जिसका परिणाम वहाँ के हिंदू जैस अल्पसंख्यकों को भुगतना पड़ता है। आम देशों से उलट, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shahbaz Sharif) ने राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन की अपील की है। यह अपील स्वीडन में जलाए गए कुरान को लेकर है।

इसके पहले आतंकी संगठनों ने कहा था कि स्वीडन में कुरान जलाए जाने का ‘बदला’ पाकिस्तान में ईसाइयों से लिया जाएगा। यह ऐलान आतंकी संगठन लश्कर-ए-झांगवी ने किया है। पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई का संरक्षण इस आतंकी संगठन को हासिल है।

प्रधानमंत्री शरीफ की अध्यक्षता में हुई बैठक में फैसला लिया गया कि शुक्रवार (7 जुलाई 2023) को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों सहित पूरे देश से रैलियों में शामिल होने का आग्रह किया, ताकि पूरा देश एकजुट होकर ‘उपद्रवियों’ को एक संदेश भेज सके।

पाकिस्तान ने ईद अल-अधा (बकरीद) के जश्न के दौरान स्वीडन में एक मस्जिद के बाहर सार्वजनिक रूप से कुरान जलाने की कड़ी निंदा की है। पाकिस्तान की संघीय सरकार कुरान के अपमान के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करने के लिए शुक्रवार को यौम-ए-तकद्दुस-ए-कुरान (कुरान की पवित्रता की रक्षा करने का दिन) मनाएगी।

इसके पहले पाकिस्तान ने स्वीडन में हुई घटना के दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की माँग की थी। 71 वर्षीय शहबाज शरीफ माँग की थी कि स्वीडिश सरकार अपने देश में मुस्लिम आबादी के खिलाफ इस्लामोफोबिक और हेट स्पीच पर ध्यान दे।

इतना ही नहीं, पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र से इस मसले पर बैठक बुलाने का आग्रह किया था। इस आग्रह के बाद संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने एक आपात बैठक बुलाई है। परिषद के एक प्रवक्ता ने कहा कि इस सप्ताह के अंत में स्वीडन में कुरान जलाने और बढ़ती धार्मिक घृणा बहस होने की संभावना है।

वहीं, 57 इस्लामी मुल्कों के संगठन इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने भी कहा है कि वह इस मुद्दे पर चर्चा के लिए एक ‘आपातकालीन बैठक’ आयोजित की जाएगी। यह बैठक सऊदी अरब में लाल सागर के किनारे स्थित शहर जेद्दा में रविवार (9 जुलाई 2023) को होगी।

कुरान के अपमान को लेकर पाकिस्तान और आतंकी संगठनों में होड़ लग गई है। शरीफ सरकार की घोषणा से पहले लश्कर-ए-झांगवी ने ईसाइयों और चर्चों पर हमला करने की धमकी दी है। इसके बाद से पाकिस्तानी ईसाई वहाँ की सरकार से सुरक्षा की माँग कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लश्कर-ए-झांगवी के आतंकी नसीर रायसानी ने एक बयान जारी कर कहा है कि पाकिस्तान में कोई भी चर्च और ईसाई सुरक्षित नहीं रहेगा। स्वीडन में कुरान जलाने की घटना का बदला लेने के लिए ईसाइयों को निशाना बनाकर आत्मघाती बम धमाके किए जाएँगे।

आतंकी संगठन ने कहा है, “स्वीडन में कुरान का अपमान कर ईसाइयों ने मुस्लिमों को चुनौती दी है। अगर कोई ईसाई दूसरे देश में कुरान का अपमान करता है तो जिहाद के रास्ते पर चलने वाला झांगवी पाकिस्तान को ईसाइयों के लिए जहन्नुम बना देगा।”

इस धमकी पर अब तक पाकिस्तान की शहबाज शरीफ की खबर लिखे जाने तक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इससे अलग, खुद देशवासियों से प्रदर्शन का विरोध करने की अपील करके उन पर हमले को एक तरह से मुहर लगा दी है।

यूरोपीय देश स्वीडन में कोर्ट से आदेश मिलने के बाद बकरीद के दिन यानी बुधवार (28 जून 2023) को स्टॉकहोम शहर की सबसे बड़ी मस्जिद के सामने कुरान को फाड़ा और जलाया गया था। इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत अंजाम दिया गया था। इसका वीडियो भी सामने आया था।

इस वीडियो में स्टॉकहोम की एक मस्जिद के सामने दो लोग कुरान को फुटबॉल की तरह पैरों से मारते, उसे जमीन पर फेंकते और पैरों से कुचलते दिखे थे। फिर इराकी प्रदर्शनकारी ने कुरान को फाड़कर आग के हवाले कर दिया था। इस घटना से नाराज 57 इस्लामी मुल्कों ने पिछले दिनों सऊदी अरब में बैठक भी की थी। इराक में स्वीडन के दूतावास पर हमला भी हुआ था।

ईसाई मिशनरी ने धर्मांतरण का बदला तरीका, अब नाम हिंदू ही रहता है और घरों से भगवान की मूर्ति हटाकर जीसस की प्रेयर कर बना रहे ईसाई

भारत में बढ़ती अशांति के लिए धर्मांतरण सबसे अधिक जिम्मेदार है। सनातन विरोधी हिन्दुओं को जातियों में विभाजित कर जो विष फैला रहे हैं, लेकिन इन धर्मों में कितनी अधिक कट्टरता है कि एक जाति दूसरी जाति के चर्च, मस्जिद मे नहीं जा सकता, एक-दूसरे के कब्रिस्तान में अपना मुर्दे को दफ़न नहीं कर सकते, जिसको उजागर करने हिन्दू संगठनों को सक्रिय होना पड़ेगा। जब तक हिन्दू संगठन ईसाई और मुस्लिम में जातिवाद पर शोर नहीं मचाएंगे, धर्म परिवर्तन और हिन्दू विभाजन करने का खेल नहीं रुकेगा। गंगा-जमुनी तहजीब, संविधान और राष्ट्रीय एकता आदि जैसे नारों की बजाए इन धर्मों में सदियों से चल रहे जातिवाद को उजागर करना होगा। इन मजहबों के जातिवाद से वर्तमान पीढ़ी अज्ञान है। 
देश के सिर्फ पांच राज्यों में ही धर्म परिवर्तन कराना कानूनन अपराध होने के कारण इसकी विष-बेल लगातार फल-फूल रही ही है। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक कई राज्यों में जबरन या डरा-धमकाकर, प्रलोभन या लालच देकर धर्मांतरण का खेल मिशनियां और मुस्लिम बेखौफ चला रहे है। ईसाई मिशनरियों की बदमाशी दरअसल गैर भाजपाई राज्यों में ज्यादा चल रही है। इन राज्यों में सरकार द्वारा धर्मांतरण पर अंकुश लगाने के बजाए इस ओर के आंखे मूंदकर इन्हें समर्थन ही दिया जा रहा है। दूसरी ओर नेपाल बॉर्डर पर धर्मांतरण कराने का नया तरीका ही सामने आया है। ईसाई मिशनरियां पोल खुलने के डर से यहां दलित और गरीब हिंदुओं का धर्मांतरण तो कर रही हैं, लेकिन उनके नाम नहीं बदल रही हैं। ताकि पुलिस को कार्रवाई करने में मुश्किल आए। यहां लोगों के घरों के उनके इष्टदेव भगवान की मूर्तियों को हटा दी गईं हैं। इसके स्थान पर जन्म से हिंदुओं से भी जीसस की प्रेयर कराई जा रही है। मिशनरियों ने धर्मांतरण का ये नया तरीका निकाला है।

सनातन धर्म के प्रति नफरत के एजेंडे को आगे बढ़ाने में जुटी मिशनरी
सनातन धर्म से कांग्रेस और आम आदमी पार्टी किस कदर नफरत करती है यह कोई अनजानी बात नहीं है। कांग्रेस पार्टी ने देश पर 70 सालों तक शासन के दौरान सनातन धर्म को हर स्तर से नुकसान पहुंचाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। वहीं आम आदमी के पार्टी के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने तो 10 हजार लोगों को एक साथ हिंदू धर्म के खिलाफ शपथ दिलवाकर रिकार्ड ही बना डाला। छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार हो या राजस्थान की गहलोत सरकार, पंजाब में भगवंत मान सरकार हो या दूसरे कुछ राज्यों की सरकारों द्वारा पूरी तरह आंखें पूरी तरह से बंद कर लिए जाने के कारण धर्मांतरण का खेल ईसाई मिशनरियां खुलेआम खेल रही हैं। मिशनरियों की मंडलियां भोले-भाले आदिवासियों को कई तरह के प्रलोभन देकर, तो कभी बीमारी ठीक करने और शराब छुड़ाने के नाम पर धर्म परिवर्तन करा रही हैं। धर्मांतरण की करतूतों के खिलाफ कोई कार्रवाई न होने का ही दुष्परिणाम है कि मिशनरियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में तो ईसाई मिशनरी और आदिवासियों के बीच नौबत टकराव तक जा पहुंची है। सनातन धर्म के प्रति नफरत के अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने में मिशनरी जुटी हुई हैं और कांग्रेस व आप सरकार इनकी मदद कर रही हैं। यही वजह है कि कांग्रेस शासित राजस्थान में धर्मांतरण की कई घटनाएं हो चुकी हैं।

देवी-देवताओं की पूजा के बजाए अब यहां लोग यीशू की प्रेयर करने लगे
अब ईसाई मिशनरियों ने अपने धर्मांतरण के मिशन का तरीका बदल लिया है। इनकी मंडलियों गरीब हिंदुओं को प्रलोभन देकर उनका धर्म परिवर्तन कराती हैं। पहले धर्म परिवर्तन के समय हिंदू व्यक्ति का नाम परिवर्तित कर क्रिश्चियन नाम दिया जाता था, लेकिन इससे धर्मांतरण की पोल खुलने और पकड़े जाने के डर से मिशनरियों ने पैटर्न बदल लिया है। वे धर्मांतरण तो उसी तरह कराती हैं। हिंदुओं के दिलों में उनके देवी-देवताओं के प्रति अनादर का भाव उत्पन्न करती हैं। यीशू की प्रार्थनाओं पर जोर देती हैं, लेकिन कुछ जगह धर्मांतरण के बाद उनके नाम नहीं बदलती हैं। नेपाल बॉर्डर पर धर्मांतरण के कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें जन्म से हिंदुओं के घरों से भगवान की मूर्तियां हटा दी गईं। देवी-देवताओं की पूजा के बजाए अब यहां लोग यीशू की प्रेयर करने लगे हैं। इनका ऐसा ब्रेनवाश किया है कि ये लोग दावा करते हैं कि यीशू की प्रेयर करने से ही इनकी शराब-सिगरेट की लत छूट गई है और रोजगार मिल रहा है।

हिंदू के घर में ही बनाया चर्च, इसमें 300 लोगों के प्रेयर करने की जगह
नेपाल बॉर्डर से सटे लखीमपुर जिले के निघासन कस्बे में धर्मांतरण के इस नए पैटर्न का खुलासा दैनिक भास्कर की पड़ताल में हुआ है। नेपाल से सटे यूपी के कई जिलों में धर्मांतरण और क्रिश्चियन-मुस्लिम आबादी बढ़ने की खबरें अक्सर सामने आती हैं। इस दौरान पता चला था कि लखीमपुर के 30 गांवों में ईसाई मिशनरी एक्टिव हैं। ये गांव थारू जनजाति के हैं और चंदन चौकी से गौरीफंटा बॉर्डर के करीब बसे हैं। ये एरिया पलिया तहसील में आता है। यहां की 15 ग्राम पंचायतों में 50 हजार से ज्यादा थारू आबादी रहती है। यहां पास के नझौटा गांव में एक चर्च है, जो दूर से दिखता है। यह चर्च घर में ही है और रमाकांत कश्यप इसका पादरी भी हैं। यहां आसपास के 300 से 400 लोग प्रेयर के लिए आते हैं। पिछले साल ही लखीमपुर के तिकुनिया बॉर्डर से 25 किमी दूर निघासन में धर्मांतरण का मामला सामने आया था। इसमें कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी।

धर्म तो दंगे और अपराध करवाता है, हम तो यीशू को फॉलो करते हैं
यहां के अंबेडकरनगर में बने चर्च में रमाकांत कश्यप प्रेयर कर रहे हैं। उम्र 35 से 37 साल के बीच होगी। जन्म से हिंदू हैं, पर अब यीशू को मानने लगे हैं। रमाकांत की पत्नी भी यीशू को मानती हैं। वे कहते हैं कुछ साल पहले एक मलयाली पास्टर गिरीश सही रास्ते पर लेकर आए। मेरी हर गलत आदत खत्म हो गई। इसके बाद से ही यीशू को फॉलो करने लगा हूं। रमाकांत से कहा कि उसका नाम तो हिंदुओं की तरह है। जाहिर है आपने धर्म बदला है, लेकिन कैसे और क्यों? जवाब में रमाकांत ने अजब तर्क गढ़ा, ‘मैंने धर्म नहीं बदला। यीशू धर्म बदलने को नहीं कहते हैं। धर्म तो दंगा करवाता है, अपराध करवाता है। हम यीशू को फॉलो करता हूं।’ रमाकांत की शादी 2016 में हुई थी। रमाकांत की पत्नी लीना रायबरेली की हैं और यीशू को फॉलो करती हैं। वो बताती है पिता की तबीयत खराब रहती थी। तभी एक पास्टर के संपर्क में आई। उनकी चंगाई सभा में जाने लगी, इसके बाद पिता की तबीयत सुधरने लगी। उनके ठीक होते ही यीशू को फॉलो करने लगी।’

यीशू को फॉलो करने वालों में दलित ज्यादा, चंगाई सभा सक्रिय
चर्च में फास्ट प्रेयर करने आए जयराम निघासन के ही रहने वाले हैं। वे दलित समुदाय से हैं। मजदूरी करते हैं। 2017 में उनकी तबीयत खराब हुई, फिर बिस्तर नहीं छोड़ पाए। जयराम बताते हैं, ‘मुझे कुष्ठ रोग भी हो गया। मेरी बुआ को किसी ने निघासन में चल रहे इस चर्च के बारे में बताया था। वे मुझे यहां लाईं। इसके बाद मैं भी चर्च में आकर प्रार्थना करने लगा।’ यहीं हमारी मुलाकात शांति से हुई। शांति भी दलित हैं। वे बताती हैं कि परिवार में बहुत कलह होती थी। आए दिन पति से झगड़ा होता था। मेरी आंख में कोई दिक्कत थी। कई डॉक्टरों को दिखाया। सभी ने आंख निकालने की बात कही थी। इसी बीच मेरे पति की तबीयत भी खराब हो गई। वे भी ठीक नहीं हो रहे थे।’ ‘किसी के बताने पर मैं 2018 में यहां आई। चंगाई सभा में आने पर फायदा होने लगा। इसके बाद मैंने दवाइयां वगैरह छोड़ दीं। यहीं प्रार्थना करती रही। हमारी तबीयत में सुधार होता रहा।’

दो मंजिला मकान में चल रहा बगैर रजिस्ट्रेशन का चर्च, पुलिस को पता नहीं
रमाकांत ने दावा किया कि ‘यहां आने वाले अनुयायी जो दान-दक्षिणा चढ़ाते हैं, उसी से घर चल रहा है।’ लेकिन उनका घर देखकर ऐसा नहीं लगता। उसका दो मंजिला मकान बना हुआ है। ग्राउंड फ्लोर पर परिवार रहता है। अंदर बरामदा है, जिसमें सीढ़ियां बनी हैं। बरामदे से अंदर जाने के लिए गैलरी थी। गैलरी के दोनों तरफ कमरे थे। अंदर एक लॉबी है, जिसमें एक तरफ CCTV फुटेज देखने के लिए मॉनिटर लगा है। बीच में कालीन के ऊपर सोफा रखा है। कालीन के नीचे बेसमेंट है, रमाकांत ने उसे दिखाने से इनकार कर दिया। रमाकांत भले घर को चर्च बताएं, लेकिन चर्च का रजिस्ट्रेशन उनके पास नहीं है। यूपी सरकार ने नवंबर, 2020 को अवैध धर्मांतरण रोकने के लिए कानून बनाया था। रमाकांत से पूछा कि धर्मांतरण कानून आने के बाद क्या आप लोगों को रोका नहीं गया। उन्होंने तर्क दिया कि हम धर्मांतरण नहीं कराते। देखिए सारे नाम हिंदू ही हैं। जो लोग यीशू में विश्वास करते हैं, हम बस उन्हें यीशू को याद करने का तरीका बताते हैं। इसलिए पुलिस हमें परेशान नहीं करती।

संदिग्ध गांवों में कमेटियां बनाईं, ऑपरेशन कवच से क्राइम रोक रहे
बॉर्डर किनारे बसे थारू जनजाति के लोगों का धर्मांतरण कराया जा रहा है। रमाकांत ने बताया, ‘हम निघासन में हैं। ये नेपाल बॉर्डर से थोड़ा दूर है। हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।’ निघासन थाना क्षेत्र के बम्हनपुर में 18 सितंबर 2022 को 2 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। उन पर पैसे और नौकरी का लालच देकर 18 दलितों का धर्म परिवर्तन कराने का आरोप था। विश्व हिंदू परिषद के सह संयोजक सुमित जायसवाल और संयोजक आशीष की शिकायत पर पुलिस पहुंची थी। मौके से सुशील कुमार और राजकुमार को गिरफ्तार किया गया। दोनों अभी जमानत पर हैं। सीओ राजेश कुमार के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद नेपाल बॉर्डर पर ऑपरेशन कवच के तहत निगरानी की जा रही है। निघासन से सटे बॉर्डर पर हम लोग ऑपरेशन कवच चला रहे हैं। इसके तहत जिस गांव को हम संदिग्ध मानते हैं, वहां 10 लोगों की कमेटी बनाई हुई है। ये लोग हमें गांव में होने वाली संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी देते हैं।

जयपुर में नाबालिग को किडनैप करके जबरन धर्म परिवर्तन कराया
एक ओर नेपाल बॉर्डर पर खुलेआम धर्मांतरण का खेल चल रहा है, दूसरी ओर राजस्थान भी इससे अछूता नहीं है। दलित हिंदुओं को ईसाई बनाने का मामला यहां सुर्खियों में रहा है। ताजा मामला राजधानी जयपुर का ही है, जहां एक नाबालिग हिंदू लड़की को किडनैप करके धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश की गई। किसी तरह अपहर्ताओं के चंगुल से छूटकर घर वापस आई नाबालिग पागलों जैसी हरकत करने लगी। अपना बदला हुआ नाम बताकर खुद को मुस्लिम बताने लगी। मानसरोवर थाने में पीड़िता के पिता ने रिपोर्ट दर्ज करवाई है। पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक मानसरोवर निवासी एक व्यक्ति ने बताया कि उसकी 15 साल की बेटी पिंकी (बदला हुआ नाम) को किडनैप कर धर्म परिवर्तन करवाने की कोशिश की जा रही है।

जबरन या लालच देकर धर्मांतरण को रोकने के लिए किस राज्य में क्या है कानून?
1.ओडिशाः पहला राज्य है जहां जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए कानून आया था। यहां 1967 से इसे लेकर कानून है. जबरन धर्मांतरण पर एक साल की कैद और 5 हजार रुपये की सजा हो सकती है। वहीं, एससी-एसटी के मामले में 2 साल तक की कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है।
2.मध्य प्रदेशः यहां 1968 में कानून लाया गया था. 2021 में इसमें संशोधन किया गया। इसके बाद लालच देकर, धमकाकर, धोखे से या जबरन धर्मांतरण कराया जाता है तो 1 से 10 साल तक की कैद और 1 लाख तक के जुर्माने की सजा का प्रावधान है।
3.अरुणाचल प्रदेशः ओडिशा और एमपी की तर्ज पर यहां 1978 में कानून लाया गया था कानून के तहत जबरन धर्मांतरण कराने पर 2 साल तक की कैद और 10 हजार रुपये तक के जुर्माने की सजा हो सकती है।
4.छत्तीसगढ़ः 2000 में मध्य प्रदेश से अलग होने के बाद यहां 1968 वाला कानून लागू हुआ. बाद में इसमें संशोधन किया गया। जबरन धर्मांतरण कराने पर 3 साल की कैद और 20 हजार रुपये जुर्माना, जबकि नाबालिग या एससी-एसटी के मामले में 4 साल की कैद और 40 हजार रुपये जुर्माने की सजा का प्रावधान है।
5.गुजरातः यहां 2003 से कानून है। 2021 में इसमें संशोधन किया गया था. बहला-फुसलाकर या धमकाकर जबरन धर्मांतरण कराने पर 5 साल की कैद और 2 लाख रुपये जुर्माना, जबकि एससी-एसटी और नाबालिग के मामले में 7 साल की कैद और 3 लाख रुपये के जुर्माने की सजा है।

याचिकाकर्ता की कोर्ट से अपील, धर्म परिवर्तन रोकने के लिए अलग से बने कानून
अब बात करते हैं सुप्रीम कोर्ट में धर्मांतरण को रोकने के लिए दायर याचिका की। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने 23 सितंबर को याचिका दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमआर शाह और हिमा कोहली की बेंच ने जबरन धर्मांतरण के खिलाफ याचिका की सुनवाई करते हुए मौखिक टिप्पणी में इसे गंभीर मामला बताया। कोर्ट ने कहा कि जबरन धर्मांतरण न सिर्फ धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के खिलाफ बल्कि देश की सुरक्षा के लिए भी खतरा हो सकता है। याचिका में धर्म परिवर्तनों के ऐसे मामलों को रोकने के लिए अलग से कानून बनाए जाने की मांग की गई है। या फिर इस अपराध को भारतीय दंड संहिता (IPC) में शामिल करने की अपील की गई है। 

याचिकाकर्ता ने केंद्र के साथ-साथ तमाम राज्यों को भी प्रतिवादी बनाया
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता ने अर्जी दाखिल कर केंद्र और तमाम राज्यों को प्रतिवादी बनाया है। तामिलनाडु में 17 साल की लड़की की मौत के मामले में छानबीन की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने अपनी अर्जी में कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 14, 21 एवं 25 के तहत धोखाधड़ी, धमकी या डराकर धर्म परिवर्तन कराया जाना अपराध घोषित किया जाए। याचिका में नैशनल इन्वेस्टिंग एजेंसी (NIA), सीबीआई (CBI) और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को 17 साल की लड़की की मौत के मामले में कारण बताओ नोटिस जारी करने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अर्जी में कहा गया है कि दबाव बनाकर कराए जाने वाले अवैध धर्म परिवर्तन को संविधान के तहत अपराध घोषित किया जाए।

धर्म परिवर्तन गंभीर विषय है और इससे देश की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है
सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान कहा कि जो मुद्दे उठाए गए हैं और जबरन धर्म परिवर्तन के जो आरोप लगाए गए हैं, अगर वो सही हैं और उनमें सच्चाई है तो फिर यह गंभीर विषय है और इससे आखिरकार देश की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इससे देश की जनता के ‘धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार’ प्रभावित होते हैं। ऐसे में केंद्र सरकार को इस मामले में स्टैंड क्लियर करना चाहिए। इसलिए केंद्र सरकार हलफनामा देकर बताए कि वह कथित जबरन धर्म परिवर्तन रोकने के लिए क्या कदम उठा रहा है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह इस मामले की अगली सुनवाई 28 नवंबर को करेगा। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि कई राज्य सरकारों ने इसे रोकने के लिए कानून बनाए हैं। उन्होने यह भी कहा कि कई उदाहरण हैं जहां चावल और गेंहू देकर धर्म परिवर्तन कराए जा रहे हैं। तब बेंच ने कहा कि आप बताएं कि आप क्या कदम उठा रहे है?

कोर्ट ने याचिका की दलीलों से जताई सहमति, सरकार जल्द उठाए कदम
सुप्रीम कोर्ट ने भी याचिका में दी गई दलीलों से सहमत होकर जबरन धर्मपरिवर्तन को गंभीर विषय माना और केंद्र सरकार से कहा है कि अगर यह सच है तो वह इसे रोकने के लिए गंभीरता से कदम उठाए। उच्चतम न्यायालय ने सरकार को चेतावनी भी दी कि यह एक कठिन स्थिति है जिस पर काबू नहीं पाया गया तो देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा होगा और नागरिकों के ‘धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार’ प्रभावित होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि इस पर एहतियाती कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जल्द कदम उठाना होगा, ताकि इसे रोका जा सके। अगर ऐसा नहीं किया गया तो कठिन समय आ जाएगा। 

आप की दिल्ली: मदर टेरेसा और ईसाई मिशनरी के रास्ते पर चल रहे शिष्य केजरीवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ईसाई संत मदर टेरेसा के शिष्य रहे हैं। इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि वो किस विचारधारा से प्रेरित है। आम तौर पर माना जाता है कि शिष्य पर गुरु के उपदेशों का असर होता है। केजरीवाल पर भी उनके गुरु के उपदेश का असर दिखाई दे रहा हैे। वो उन्हीं के बताये रास्ते पर चल रहे हैं। जिस तरह मदर टेरेसा ने गरीबों की मुफ्त सेवा के बहाने दलितों और आदिवासियो के बीच पैठ बनाई। उसके बाद ईसाई मिशनरियों ने चमत्कारिक मुफ्त इलाज, मुफ्त शिक्षा और पैसे का लालच देकर और ऊंच-नीच, जात-पात का एहसास दिलाकर गरीब दलितों और आदिवासियों का धर्मांतरण कराया। उसी तरह केजरीवाल भी मुफ्त रेवड़ी कल्चर के जरिए गरीब दलितों, आदिवासियों, सिखों में पैठ बनाकर उनके बौद्ध और ईसाई धर्म में धर्मांतरण को बढ़ावा दे रहे हैं। 

उत्तर प्रदेश: जिहाद की हिंसात्मक विचारधारा अलकायदा से प्रभावित और पोषित

उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में अवैध धर्मांतरण गिरोह चलाने वालों के तार पाकिस्तानी आतंकी संगठन अलकायदा से जुड़ रहे हैं। ये गिरोह पैसे का लालच देकर मूक-बधिर और मामूली दिव्यांग लोगों को अपना पहला टारगेट बनाता था। इस गिरोह के सदस्य प्रतिबंधित संगठन सिमी (Student’s Islamic movement of India) से तो पहले से ही जुड़े हुए थे। अब यूपी एटीएस के हत्थे चढ़े अवैध धर्मांतरण में संलिप्त आरोपियों के पास के ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिससे इनका कनेक्शन अलकायदा से भी जुड़ रहा है।यूपी में एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने दावा किया है कि इस मामले में पूर्व में महाराष्ट्र से गिरफ्तार एडम और कौसर आलम के पास से जो साक्ष्य मिले हैं, उससे पता चला है कि दोनों जिहाद की हिंसात्मक विचारधारा अलकायदा से प्रभावित और पोषित हैं।

राजस्थान:  जानकारी के बावजूद चुप्पी साधकर बैठे रहे अधिकारी
प्रदेश में धर्मांतरण को लेकर हिंदू जागरण मंच आक्रोशित है। मंच का आरोप है कि मिशनरी के संपर्क में आकर ईसाई धर्म के प्रचारक बने पास्टर धर्मपाल बैरवा व उनकी टीम ने क्षेत्र में धर्म के प्रचार के लिए वर्किंग कर रही है। अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में जयपुर के सांगानेर में धर्मांतरण को लेकर एक बड़ा आयोजन था। धार्मिक सभा के आयोजन के नाम पर इसके पोस्टर पर भी लगाए गए थे। धर्म जागरण मंच के संजय सिंह शेखावत ने जांच स्थानीय नेता अमित शर्मा से कराई। मामला खुलता चला गया। फिर हिंदू संगठनों की आपत्ति के बाद यह कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया। सांगानेर सदर के थानेदार बृजमोहन कविया खोखली दलील देते हैं कि आयोजकों ने कार्यक्रम की इजाजत ली थी। कार्यक्रम से दो-तीन दिन पहले आकर उन्होंने बताया कि अब कार्यक्रम नहीं कराना है। ईसाई धर्म के प्रचार के नाम पर ये लोग एससी या गरीब व्यक्ति को आर्थिक मदद या काम-धंधे का लालच देते हैं। 

अलवर: ईसाई धर्म अपनाने के लिए दवाब, हिंदू देवी-देवताओं के पोस्टर्स फाड़े
कांग्रेस सरकार जब राजधानी में ही धर्मांतरण को नहीं रोक पा रही है, तो जिलों में ऐसे मामलों में उससे कार्रवाई की क्या ही उम्मीद करें। जयपुर और बारां की तरह अलवर में भी धर्मांतरण का मामला पिछले माह ही आ चुका है। राजस्थान के अलवर जिले में माता-पिता पर अपने बेटे-बहू का धर्मांतरण कराने का आरोप लगा है। पीड़ित दंपति सोनू और उनकी पत्नी रजनी ने पिछले माह 19 अक्टूबर को इस मामले में शिकायत दर्ज कराई। इन दोनों ने शिकायत देते हुए पुलिस से कहा है कि सोनू के माता-पिता ने घर में रखी मूर्तियों को तोड़ दिया और हिंदू देवी-देवताओं के पोस्टर्स को फाड़ दिया है। वे लोग, इन पर ईसाई धर्म अपनाने के लिए लगातार दवाब बना रहे हैं। 

बारां: बैथली नदी में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां और तस्वीरें प्रवाहित कर दीं
राजधानी से पहले राजस्थान के बारां जिले में धर्म परिवर्तन का एक बड़ा मामला सामने आया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गाँव में मां दुर्गा आरती का आयोजन कराने वाले दलित युवकों से मारपीट की गई। पूरे घटनाक्रम से गुस्साए दलितों ने सामूहिक रूप से धर्म परिवर्तन कर लिया। बताया जा रहा है कि 250 दलितों ने बौद्ध धर्म अपनाने से सनसनी फैल गई। वहीं, पुलिस अधिकारी पूजा नागर ने बताया कि बारां जिले के बापचा थाना क्षेत्र के भुलोन गांव बौद्ध धर्म ग्रहण किया गया है। हालाँकि पुलिस ने धर्म परिवर्तन करने वालों की संख्या काफी कम बताई है। गाँव में दलितों ने जुलूस निकालते हुए धर्मांतरण की शपथ ली और गांव की बैथली नदी में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां और तस्वीरें प्रवाहित कर दीं।

ओडिशा में कनाडा का ‘मोहन’, महिलाओं ने बंद कर दी भगवान जगन्नाथ की पूजा: ईसाई धर्मांतरण की साजिशों पर ऑपइंडिया की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

              कनाडा के नागरिक पर ओडिशा के जनजातीय लोगों का ईसाई धर्मांतरण करने की कोशिश का आरोप
कनाडा की नागरिकता रखने वाले एक व्यक्ति पर ओडिशा पुलिस ने 24 जून 2023 को मामला दर्ज किया था। इस व्यक्ति का नाम एपेन मोहन किडंगलील (Eapen Mohan Kidangalil) है। उस पर प्रार्थना सभा के नाम पर अनुसूचित जनजाति (ST) समाज के गरीब लोगों को लुभाने और उन्हें ईसाई बनाने की कोशिश का आरोप है। कलिंगा राइट्स फोरम के मुताबिक एपेन मोहन पर्यटक वीजा पर भारत आया हुआ है। लेकिन उसने नियमों के विपरीत 22 जून को प्रार्थना सभा का आयोजन किया। इसके बाद उसे पकड़कर विश्व हिंदू परिषद (VHP) के कार्यकर्ताओं ने पुलिस को सौंप दिया।

ऑपइंडिया के पास इस मेल में दर्ज FIR की कॉपी मौजूद है। FIR के मुताबिक आरोपित पर ओडिशा धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1967 की धारा 4 के तहत कार्रवाई की गई है। मामला जगतसिंहपुर क्षेत्र का कटेसिंहपुर गाँव का है। यहाँ 22 जून को विश्व हिंदू परिषद के एक सदस्य को धर्मान्तरण के कार्यक्रम की जानकारी मिली। हिन्दू संगठन के कार्यकर्ता जब मौके पर पहुँचे तो पाया कि कनाडा की नागरिकता रखने वाला एपेन मोहन करीब 33 स्थानीय निवासियों को ईसाई बनने के लिए उकसा रहा था। इनमें महिलाओं सहित 11 नाबालिग भी थे।

                                                                   FIR Copy

VHP कार्यकर्ता सूर्यकांत नंदा का आरोप है कि आरोपित के पास से कैश, कागजात, बाइबिल, टूरिस्ट वीजा और कुछ दवाएँ बरामद हुई। एपेन मोहन की मदद स्थानीय स्तर पर क्षेत्र में सक्रिय ईसाई मिशनरी के 2 अन्य सदस्य कर रहे थे। प्रार्थना सभा में ये सभी लोग बिना नंबर प्लेट वाले वाहन से आए थे। बताया जा रहा है कि प्रार्थना सभा को रोकने का प्रयास करने वाले हिन्दू संगठन के सदस्यों से न सिर्फ दुर्व्यवहार किया गया, बल्कि उन पर हमला भी हुआ।

मामले का संज्ञान स्थानीय कानूनी कार्यकर्ता समूह कलिंगा राइट्स फोरम ने लिया है। कनाडाई नागरिक पर पर्यटक वीजा के कानूनों का उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कलिंगा राइट्स फोरम ने विश्व हिंदू परिषद के सदस्यों पर मिशनरी सदस्यों द्वारा किए गए हमले की निंदा की है।

मिशनरियों की तरफ से हिन्दू संगठनों पर जवाबी FIR

इस घटना के बाद ईसाई मिशनरियों की तरफ से हिन्दू संगठन के कुछ लोगों पर जवाबी FIR दर्ज करवाई गई है। FIR में मिशनरियों ने VHP कार्यकर्ताओं पर अपने ‘व्यक्तिगत कार्यक्रम’ में बाधा डालने का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता के तौर पर लक्ष्मीप्रिया मल्लिक का नाम सामने आया है। लक्ष्मीप्रिया की शिकायत पर IPC की धारा 448, 294, 323, 506 और 34 के तहत हिन्दू संगठन से जुड़े सदस्यों पर केस दर्ज किया गया है। शिकायत में महिला ने बताया है कि नाबालिग बच्चे उसके बेटे के जन्मदिन में आए थे। उसने आरोप लगाया है कि सुबह लगभग 11 बजे उनका परिवार पूजा कर रहा था। इसी दौरान कुछ लोगों ने उनके घर में घुस कर दुर्व्यवहार किया। हालाँकि पुलिस ने मौके पर पहुँच कर दोनों पक्षों को शांत करवाया।
                                                                 हिन्दू संगठनों पर दर्ज FIR

महिलाओं ने भगवान जगन्नाथ भगवान की पूजा बंद की

ऑपइंडिया से बात करते हुए VHP सदस्य सूर्यकांत नंदा ने बताया कि बजरंग दल के सदस्यों को बेरहमी से पीटा गया था, क्योंकि उन्होंने प्रार्थना के नाम हो रहे धर्मान्तरण को रोकने का प्रयास किया। उन्होंने आगे बताया कि घटना के दिन बिना नंबर की सफेद बोलेरो गाड़ी देखकर जब पड़ताल की गई तो उसमें किसी कनाडा के नागरिक के आने की जानकारी मिली। नंदा ने आगे बताया कि थोड़ी देर बाद एक घर की तरफ जनजातीय समाज के करीब 40-50 गरीब हिन्दुओं को जाते देखा गया।
नंदा ने आगे बताया कि इस जमावड़े की बजरंग दल सदस्यों ने जाकर पड़ताल की तो उन्हें वहाँ प्रार्थना के नाम पर धर्म परिवर्तन का प्रयास होता दिखा। हिन्दू संगठन के सदस्यों को देख कर लक्ष्मीप्रिया नाम की महिला ने इस कार्यक्रम में हुए जमावड़े को घर में जन्मदिन पर हुआ जुटान बताया। बजरंग दल के सदस्यों ने प्रार्थना में बैठी कुछ महिलाओं से बातचीत की। VHP नेता नंदा का दावा है कि इस बातचीत में महिलाओं ने बताया कि उन्होंने भगवान जगन्नाथ की पूजा करना बंद कर दी है, क्योंकि उनका धर्म परिवर्तित हो गया है।
ऑपइंडिया से बातचीत के दौरान VHP नेता सूर्यकांत नंदा ने स्थानीय पुलिस पर भी एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले तो पुलिस ने सब कुछ जानते हुए भी कनाडा के नागरिक को छोड़ दिया और अब हिन्दू संगठनों से भी पूछताछ करने जा रही है।

नाबालिग बच्चों के मामले का NCPCR ने लिया संज्ञान

कनाडा के आरोपित द्वारा नाबालिग बच्चों के धर्मान्तरण की साजिश की शिकायत कलिंगा राइट्स फोरम ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) को पत्र लिख कर की है। पत्र का संज्ञान NCPCR ने लिया है। मामले की गहनता से जाँच का भरोसा दिया है।

कनाडा के नागरिक को छोड़ने पर SHO की सफाई

ऑपइंडिया ने इस घटना पर SHO शुभ्रांशु परिदा से बात की। SHO ने बताया कि कनाडाई व्यक्ति एपेन मोहन के पास OCI (ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया) कार्ड पाया गया। उन्होंने एपेन मोहन को मूल रूप से केरल का निवासी और जन्मजात ईसाई बताया। बकौल SHO एपेन मोहन को भारत में अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है, क्योंकि वो पर्यटक वीजा पर नहीं है। पुलिस के मुताबिक एपेन मोहन ने नियमों को नहीं तोड़ा है, इसलिए उसे धारा 41 का नोटिस जारी कर के रिहा किया गया है। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी संज्ञेय अपराध पाए जाने पर ही की जाती है।

पुलिस की कार्रवाई संतोषजनक नहीं

ऑपइंडिया ने SHO से यह जानना चाहा कि OCI कार्ड धारक को क्या मिशनरी गतिविधि में शामिल होने का अधिकार है? इस सवाल के जवाब पर SHO ने कहा कि पुलिस को मौके से ऐसा कोई भी सबूत नहीं मिला जिससे यह कहा जा सके कि घटनास्थल पर धर्मान्तरण जैसा कुछ चल रहा था। थाना प्रभारी शुभ्रांशु के मुताबिक मामले में आगे की जाँच चल रही है।
                                                                        OCI के कानून
हालाँकि कलिंगा राइट फोरम पुलिस की दलीलों से संतुष्ट नहीं है। फोरम ने पुलिस पर आरोपितों को बचाने का आरोप लगाते हुए ऑपइंडिया से बताया कि वो पूरी साजिश का पर्दाफाश करेंगे। (साभार)

‘अल्लाह आपको इस्लाम कबूलने की हिदायत दे’ : Pak यूट्यूबर नादिर अली ने कैमरे पर ईसाई एक्ट्रेस को किया परेशान

पाकिस्तानी यूट्यूबर नादिर अली ने हाल में एक ईसाई एक्ट्रेस का इंटरव्यू लिया था। इस इंटरव्यू में वो एक्ट्रेस के सामने इस्लाम की पैरवी करते और धर्मांतरण के लिए उन्हें उकसाते नजर आया था। अब सोशल मीडिया पर यह वीडियो क्लिप वायरल है।

अपने इंटरव्यू में नादिर अली ईसाई मानने वाली पाकिस्तानी अभिनेत्री सुनीता मार्शल को धर्म परिवर्तन के सवालों से परेशान करता दिख रहा है। एक जगह तो नादिर ने अल्लाह से सुनीता को इस्लाम कबूलने की हिदायत देने देने की दुआ भी की है।

सुनीता मार्शल का मुस्लिम शौहर हसन अहमद पाकिस्तान का मॉडल है। इंटरव्यू के पहले सवाल ने नादिर अली ने सुनीता से उनके बच्चों के धर्म के बारे में पूछा। सुनीता ने बताया कि उनके बच्चे इस्लाम को मानते हैं।

इस जवाब पर नादिर ने तपाक से कहा, “तो भविष्य में आपका क्या प्लान है?” हालाँकि थोड़ा असहज हो कर सुनीता ने इसका जवाब ‘न’ में देते हुए अपनी ऐसी कोई योजना न होना बताया।

सुनीता के मुताबिक उन पर उनके शौहर की तरफ से धर्म को ले कर कोई दबाव नहीं है। पाकिस्तानी अभिनेत्री ने यह भी बताया कि उनसे ऐसे सवाल इंस्टाग्रम पर भी पूछे जाते हैं लेकिन उस से कोई फर्क नहीं पड़ता।

हालाँकि सुनीता द्वारा पहले ही जवाब में सब साफ कर देने के बावजूद नादिर अली ने अपनी हरकतों को जारी रखा। अली ने आगे सुनीता से पूछा कि क्या उनकी ससुराल वाले उन्हें धर्मपरिवर्तन के लिए नहीं कहते?

इस सवाल पर भी सुनीता ने ‘न’ में जवाब दिया। हालाँकि इस जवाब के बाद भी नादिर ने सुनीता के लिए फिर से कहा, “अल्लाह उसे इस्लाम कबूलने की राह दिखाए।” नादिर अली द्वारा बार-बार पूछे जाने पर आखिरकार सुनीता ने कहा कि अगर कोई दिल से इस्लाम कबूल करना चाहे तभी उसे करना चाहिए वरना हरगिज नहीं। इस पूरे इंटरव्यू में सुनीता मार्शल नादिर के इस्लाम और धर्मान्तरण जैसे सवालों पर काफी असहज दिखीं।

सोशल मीडिया पर नादिर अली के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया

नादिर अली की के इंटरव्यू को धर्मान्तरण वाली सोच बता कर सोशल मीडिया पर तमाम लोगों ने उस पर निशाना साधा है। एक दर्शक ने लिखा, “आस्था एक व्यक्तिगत विषय है। आप किसी को किसी का धर्म स्वीकार करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। एक मुस्लिम होने के नाते मैं सुनीता को अपने धर्म की रक्षा करते हुए और अपने शौहर व ससुराल वालों के धर्म का सम्मान करते हुए देखकर बहुत खुश हूँ।” इस इंटरव्यू पर ट्विटर पर भी लोगों में नाराजगी दिख रही है।
इसी साल मार्च के महीने में नादिर अली ने एक और विवादित वीडियो शेयर किया था। इस वीडियो में उन्होंने पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न की बातों को गलत बताया था।
इसी वीडियो में नादिर ने आगे कहा था कि पाकिस्तान में हिंदू आबादी घटने की वजह यह है कि “अल्लाह उन्हें इस्लाम की राह दिखा रहा है।”
पाकिस्तान में हिंदू, सिख और ईसाई लड़कियों के अपहरण, बलात्कार, धर्मांतरण और जबरन निकाह के मामले आए दिन सामने आते हैं। इसमें से कई लड़कियों की उम्र तो महज 9 साल ही थी। पाकिस्तानी कानून भी ऐसी घटनाओं के आरोपितों के लिए लचीला होता है और वो अक्सर आराम से रिहा हो जाते हैं।

नग्न ननों और हिन्दू महिलाओं के साथ पादरियों की तस्वीरें-वीडियो: कन्वेंट स्कूलों में छात्राएँ भी निशाना

कैथोलिक पादरियों की आपत्तिजनक तस्वीरें वायरल, ननों के साथ दिखे
एक बार फिर से भारत में पादरियों के सेक्स स्कैंडल का खुलासा हुआ है। कैथोलिक पादरियों की ननों और हिन्दू महिलाओं के साथ आपत्तिजनक अवस्था में तस्वीरें सामने आई हैं। ये तस्वीरें भारत में पोप के प्रतिनिधि और बॉम्बे के कार्डिनल-आर्कबिशप ओसवाल्ड ग्रेसियस को भी दिखाई गई हैं। ‘एसोसिएशन ऑफ कन्सर्न्ड कैथोलिक्स (AOCC)’ ने चेताया है कि इन पॉर्नोग्राफिक तस्वीरों को अंतरराष्ट्रीय मीडिया को दे दिया जाएगा, अगर पोप ने कार्रवाई नहीं की तो।

इन तस्वीरों में कई नन भी नंगी दिख रही हैं। 14 अप्रैल, 2023 को AOCC ने ग्रेसियस के सामने ये तस्वीरें रखी थीं और 29 अप्रैल को फॉलोअप मेल भेजा था। 9 मई को भेजे गए ईमेल में AOCC ने कहा कि उनके पास हिन्दू लड़कियों को निशाना बनाए जाने के सबूत भी हैं। हिन्दू लड़कियों की नग्न तस्वीरें भी हैं, जो इन पादिरयों ने ली थीं। उन्होंने कहा कि वो इन तस्वीरों को जाँच के लिए ‘राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW)’ को सौंपेंगे।

साथ ही संगठन ने कहा कि पादरियों के साथ हिन्दू लड़कियों की नग्न तस्वीरें-वीडियोज के अलावा कई अश्लील चैट्स भी उसके पास हैं, जिन्हें ‘बजरंग दल’ को सौंप दिया जाएगा। अधिकतर तस्वीरों में ननों और चर्च में काम करने वाली महिलाओं के साथ पादरियों के अश्लील रिश्ते सामने आए हैं। एक पादरी तो ननों को लेकर कश्मीर में हनीमून मनाने भी गया। नागपुर के ऑर्डर्स स्कूल में ट्रांसफर कर दिए गए पादरी अरुण बेबी जॉन पर भी औरंगाबाद के MSFS स्कूल के प्रधानाध्यापक रहते शिक्षिकाओं और ननों से यौन संबंध बनाने के आरोप हैं।

 इसी तरह दिल्ली के फ्रांसिस डिसेल्स स्कूल के एंथोनी अमलडॉस पर छात्रों तक से यौन संबंध बनाने के आरोप हैं। इसी तरह कई मिशनरी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों पर ऐसे आरोप लगे हैं। इनमें ब्लैकमेल से लेकर कवर-अप तक के आरोप हैं। 1987 से अब तक भारत में 24 ननों की आत्महत्या की खबरें सामने आई हैं, लेकिन वेटिकन इनकी जाँच नहीं कराता। ननों को बहला-फुसला कर भी उनके साथ सेक्स की खबरें सामने आती रहती हैं।


झारखंड : मुफ्त शिक्षा के नाम पर बच्चों को ईसाइयत का पाठ, येशु वाला क्विज: 3 महिलाओं समेत 4 मिशनरी हिरासत में, धर्मांतरण गिरोह का पर्दाफाश

चक्रधरपुर में बच्चों की फ्री शिक्षा के नाम पर ईसाई धर्मांतरण की साजिश (चित्र साभार- @sohansingh05)
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम ज़िले में शिक्षा की आड़ में ईसाई धर्मांतरण के रैकेट का खुलासा हुआ है। यहाँ बच्चों को मज़हबी सहित बाँटने के आरोप में पुलिस ने 4 लोगों को हिरासत में लिया है। गिरफ्तार आरोपितों में 3 महिलाएँ शामिल हैं। धर्म-परिवर्तन की साजिश रचने के ये आरोपित गाँव में बच्चों को फ्री शिक्षा के बहाने पढ़ा रहे थे। मामले की जानकारी होने पर ग्रामीणों ने विरोध दर्ज करवाया है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। घटना बुधवार (7 जून 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला चक्रधरपुर के देवगाँव का है। यहाँ के पोनसाई टोले में 3-4 दिन पहले 3 महिलाओं और 1 युवक ने बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देने के लिए पाठशाल लगाई थी। इन सभी ने बच्चों को फ्री में किताबें और पेंसिलें बाँट कर उनके माता-पिता को विश्वास में लिया। ग्रामीणों का आरोप है कि पढ़ाई के नाम पर यहाँ बच्चों को ईसाई मत की किताबें बाँटी जा रहीं थीं। इन किताबों में ईसा मसीह की फोटो के साथ ‘यीशु ने कहा मैं जगत की ज्योति हूँ’ जैसे शब्द लिखे गए थे। आरोपितों द्वारा इन चित्रों और शब्दों में बच्चों को रंग भरने का टारगेट दिया जा रहा था। ये लाइनें पाठ-3 की थीं।

वहीं पाठ 2 में भी ईसा मसीह के बारे में लिखा गया था। इस चैप्टर में ‘प्रभु यीशु ने कहा जीवन का जल मैं हूँ जो कोई यह जल पिएगा वो अनंत काल तक प्यासा न रहेगा’ की लाइन लिखी हुई थी। बच्चों से इसे रेखांकित करने के लिए कहा गया था। बाईं तरफ एक व्यक्ति की ईसाई मसीह से मुलाकात का चित्र छापा गया है। वहीं अन्य अध्यायों में क्विज के तौर पर ईसा मसीह तक पहुँचने का रास्ता खोजने और ईसाईयत से जुड़े लोगों के नाम आदि सोच कर लिखने के सवाल दिए गए थे।

इस किताब के एक हिस्से में बच्चों को परमेश्वर की संतान बताते हुए लोगों के आगे प्रस्तुत होने का तरीका बताया गया है। इन तरीकों में ‘दूसरों को यीशु के बारे में बताते हुए’ जैसे कॉलम लिखे हुए हैं। एक दिन जब यह क्लास चल रही थी तब पास से कुछ ग्रामीण गुजरे। उन्हें इस पढ़ाई पर शक हुआ तो जा कर किताबों को चेक किया। आखिरकार सच्चाई सामने आ गई। जब बच्चों के माता-पिता को इन किताबों के बारे में पता चला तो उन्होंने हंगामा कर दिया।

ग्रामीणों ने शिक्षा के नाम पर ईसाईयत का प्रचार कर रहे आरोपितों से पूछताछ का वीडियो भी बनाया। वीडियो में आरोपित ईसा मसीह के बारे में बच्चों को पढ़ाना स्वीकार कर रहे हैं।

आखिरकार मामले की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने गाँव में पहुँच कर 3 महिला व 1 पुरुष को हिरासत में ले लिया। चक्रधरपुर थाना प्रभारी चंद्रशेखर कुमार ने मीडिया को बताया कि पकड़े गए लोगों से पूछताछ की जा रही है।

पंजाब : डंडे-तलवारों के साथ चर्च पर हमला, दावा- निहंगों ने की बाइबिल की बेअदबी भी: ईसाई पक्ष ने भी चलाए ईंट-पत्थर

पंजाब के अमृतसर स्थित चर्च पर ईसाइयों की प्रार्थना के दौरान निहंगों का हमला (साभार- @paramaulakh02)
पंजाब के अमृतसर में रविवार (21 मई, 2023) को लोगों द्वारा चर्च पर हमला किया गया। हमलावरों को निहंग सिख बताया जा रहा है। यह हमला चल रही ईसाई प्रार्थना के दौरान किया गया। इस वजह से दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और हालात तनावपूर्ण हो गए। घटनास्थल पर नारेबाजी और पत्थरबाजी भी हुई। मौके पर पहुँची पुलिस ने स्थिति को काबू किया। ईसाइयों ने निहंगों पर बाइबिल की बेअदबी का आरोप लगा कर कार्रवाई की माँग की है।

वहीं हमलावरों ने सिखों की वेशभूषा में ईसाईयत के प्रचार पर एतराज जताया है। पुलिस की मानें तो अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हमलावर निहंग ही थे या कोई और। पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। घटना रविवार (21 मई, 2023) की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला अमृतसर के गाँव राजेवाल का है। यहाँ के सिखपाल राणा मिनिस्ट्रीज चर्च में 21 मई को दोपहर के समय प्रार्थना चल रही थी। प्रार्थना के ही दौरान निहंगों के वेश में लगभग 25 हमलावर अपने चेहरों को ढँक के आ धमके।

उनके हाथों में डंडे और तलवारें थीं। आरोप है कि हमलावरों ने आते ही चर्च में मौजूद लोगों से मारपीट शुरू कर दी। बाहर खड़ी गाड़ियों में भी तोड़फोड़ की गई और चर्च में रखी बाइबिल की भी बेअदबी हुई। इस अचानक हुए हमले से पहले तो अफरातफरी मची गई और बाद में दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। इस से हालात तनावपूर्ण हो गए।

बताया जा रहा है कि निहंगों के हमले के जवाब में ईसाई पक्ष से भी ईंट-पत्थर चलाए गए। इस दौरान दोनों तरफ से धार्मिक नारेबाजी भी की गई। हमलावरों का आरोप था कि चर्च के अंदर सिखों के वेश में प्रार्थना करवाई जाती है जिस पर उन्हें एतराज है। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पुलिस पहुँची। पुलिस ने दोनों पक्षों को अलग-अलग किया और समझाया। अमृतसर ग्रामीण के एसएसपी सतिंदर सिंह के मुताबिक अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर के जाँच की जा रही है।

‘लाइव हिंदुस्तान’ की रिपोर्ट के अनुसार निहंग समूहों ने इस घटना में अपनी संलिप्तता से इनकार किया है। साथ ही उन्होंने ऐसे हमलों के लिए निहंगों की पोशाक पहनने पर भी आपत्ति जताई है। अमृतसर ग्रामीण सतिंदर सिंह के मुताबिक, केस दर्ज कर के जाँच की जा रही है। हमलावरों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक, पुलिस की जांच हमले का मकसद पता करना भी शामिल है।

इस हमले का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में दौड़ रहे निहंगों के हाथों में हथियार और डंडे देखे जा सकते हैं। कुछ लोग खुले मैदान और कुछ सड़क की तरफ भाग रहे हैं। ईसाई पक्ष खुद को पीड़ित बताते हुए अपने टूटे वाहन दिखा रहा है। पादरी जॉन का कहना था कि वो लोग चुपचाप प्रार्थना कर रहे थे कि अचानक ही हमला कर दिया गया। उन्होंने निहंगों पर सख्त कार्रवाई न होने पर पूरे पंजाब में चक्का जाम करने और उसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होने का एलान किया।

घटना के बाद ईसाई समुदाय के लोगों ने ण्डली ने जंडियाला गुरु-तरनतारन मार्ग पर दो घंटे तक विरोध प्रदर्शन किया और ट्रैफिक जाम किया। पंजाब अल्पसंख्यक आयोग सुभाष थोबा ने भी घटनास्थल का जायजा लिया। ईसाई समूहों का कहना है कि वो इस मामले को मुख्यमंत्री भगवंत मान के आगे उठाएँगे।

गौरतलब है साल 2021 में, SGPC ने पंजाब में हो रहे धर्मांतरण को रोकने के लिए डोर-टू-डोर अभियान की शुरुआत की थी। इसी के साथ पंजाब में चर्चों पर हमलों में भी वृद्धि हुई है। अगस्त 2022 में अमृतसर के ददुआना गाँव में एक ऐसी ही घटना में निहंगों ने जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप में ईसाइयों के एक कार्यक्रम को बाधित कर दिया था।