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कांग्रेस का सूरज पूरब में भी बुरी तरह डूबा, देश में कांग्रेस ने 331 एमएलए गंवाए तो बीजेपी 474 विधायक बढ़ाकर और मजबूत हुई

किसी भी पार्टी का समर्थक अथवा विरोधी होना अलग बात है। कई बार अपने लेखों में स्पष्ट कहता रहा हूँ कि कांग्रेस को अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए गाँधी परिवार को दूर कर बिना रिमोट नेताओं को सार्वजनिक मंचो पर लाया जाए, क्योकि जब तक कांग्रेस परिवार भक्ति में लीन होकर काम करती रहेगी, राहुल गाँधी और प्रियंका वाड्रा का जितना अधिक दखल रहेगा, कांग्रेस को डूबने से कोई नहीं बचा सकता। जनता को इंदिरा गाँधी और राजीव की हत्याओं को बलिदान कहकर अधिक समय तक मूर्ख नहीं बना सकते। बलिदान और हत्या में उतना ही अंतर है जितना जमीन और आसमान में। तुष्टिकरण को त्याग हिन्दुत्व पर बात करनी होगी। समय की नब्ज को पढ़ना होगा। तुष्टिकरण के दिन लद चुके हैं। सत्य को अधिक समय तक अब दबाना मुश्किल है। कांग्रेस ही नहीं समस्त विपक्ष को इस सच्चाई को समझना होगा। यदि विपक्ष बदलते समय को समझने में असफल हो रहे हैं, फिर वह राज करने योग्य भी नहीं। 

कांग्रेस नेताओं को मंथन करना होगा कि जब पार्टी ही नहीं रहेगी, तुम्हे कौन पूछेगा? जहां तक भ्रष्टाचार, महंगाई और बेरोजगारी की बात है, अपने युवा दिनों से लेकर आज वरिष्ठ होने तक कोई ऐसा चुनाव नहीं देखा, जिसमें इन मुद्दों पर शोर न हुआ हो, लेकिन यह समस्या आज भी ज्यूं की तोह बनी हुई है। कोई नेता अथवा पार्टी इस कटु सच्चाई से इंकार नहीं कर सकता। आज बेकाबू बढ़ती महंगाई का मुख्य कारण है, नेतागिरी ने नाम पर सरकारी खजाने की लूट जैसे हर माह मिलने वाली पेंशन, सुख-सुविधाएं आदि जिन पर हर महीने करोड़ों खर्च होता है। इन मुद्दों को कोई नहीं उठाएंगे क्योकि इस सरकारी लूट को शुरू करने में विपक्ष का ही हाथ है। आता माल किसी को बुरा नहीं लगता। 
खैर, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कांग्रेस-मुक्त भारत का विजन देश में हर ओर तेजी से साकार हो रहा है। एक ओर पीएम मोदी केंद्र की राजनीति के उदीयमान नक्षत्र बनते जा रहे हैं, दूसरी ओर कांग्रेस जनता के भरोसे और विश्वास के साथ-साथ जनाधार भी खो रही है। 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद से ही कांग्रेस का ग्राफ लगातार पतन की ओर है। पीएम मोदी ने बीजेपी को जीत का वो मंत्र दिया है, जिस पर सवार होकर पार्टी विजयी अभियान पर निकलती है और हर चुनाव में जनता सीटों से उसकी झोली भर देती है। पीएम मोदी ने सबका साथ-सबका विकास, सबका विश्वास-सबका प्रयास के इस मंत्र के साथ ही कल्याणकारी योजनाओं का सैचुरेशन यानी शत-प्रतिशत कवरेज लक्ष्य हासिल करने की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ाए हैं। इससे कांग्रेस की तुष्टिकरण की राजनीति पूरी तरह भरभराकर बिखर गई। एक बार फिर विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का सूरज पूरब में भी उदयी नहीं हो पाया और होली से पहले ही नॉर्थ ईस्ट भगवा रंग में रंग गया। मेघालय में कांग्रेस 21 से 5 पर जा गिरी। नगालैंड में कांग्रेस जीरो के साथ विराजमान है। त्रिपुरा समेत तीनों राज्यों में बीजेपी और बीजेपी गठबंधन की सरकार बनने जा रही है।

 पांच राज्यों में कांग्रेस के जीरो विधायक, 9 राज्यों में हैं 10 से कम एमएलए

मोदी के कुशल नेतृत्व और जन कल्याणकारी नीतियों के चलते लोकसभा से लेकर विधानसभा चुनावों तक में कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ रही है। जनमानस मोदी के कांग्रेस-मुक्त भारत के नारे का मुरीद है और बीजेपी की जीत के साथ कांग्रेस का जनाधार लगातार कम होता जा रहा है। त्रिपुरा, मेघालय और नागालैंड से पहले बीजेपी की उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में शानदार वापसी हुई और कांग्रेक ने तो पंजाब में अपनी सरकार भी गंवा दी। बाकी चार राज्यों में कांग्रेस का वोट प्रतिशत शर्मनाक स्थिति तक पहुंच गया। कांग्रेस को सदमे पर सदमों का दौर 2014 से चल रहा है। गिने-चुने राज्यों को छोड़ दें तो देश की सबसे पुरानी पार्टी कहे जाने वाली कांग्रेस तेजी से सिमट रही है। देश में कुल 4033 विधायक हैं, इनमें कांग्रेस के 658 बचे हैं। पिछले 9 सालों में कांग्रेस विधायकों की संख्या 24% से घटकर 16% ही रह गई है। पांच राज्यों में तो पार्टी का कोई विधायक ही नहीं बचा। वहीं 9 राज्यों में 10 से कम विधायक हैं। 1951 में तमिलनाडु को छोड़कर सभी राज्यों में सरकार बनाने वाली कांग्रेस की अब सिर्फ तीन राज्यों में सरकार बचा है।
2014 से पहले कांग्रेस की 11 राज्यों में सरकार, अब तीन राज्यों में ही बची
पीएम मोदी के केंद्र में आविर्भाव के बाद कांग्रेस की दयनीय दशा और दिशा को आंकड़ों में जानें तो हालात आसानी से समझ में आ जाएंगे। 2014 से पहले कांग्रेस सरकार 11 राज्य में थी। ये राज्य थे-हरियाणा, हिमाचल, कर्नाटक, केरल-गठबंधन, महाराष्ट्र-गठबंधन, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, उत्तराखंड, अरुणाचल और असम। कांग्रेस के छह राज्यों में दस से कम विधायक थे। ये राज्य थे-पुडुचेरी, तमिलनाडु, गोवा, नगालैंड, बिहार और दिल्ली। इतना ही नहीं देश के 14 राज्यों में तब कांग्रेस मजबूत विपक्ष की भूमिका में हुआ करती थी। ये राज्य थे- बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, झारखंड, मध्यप्रदेश, नगालैंड, ओडिशा, पुडुचेटी, पंजाब, राजस्थान तमिलनाडु, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल। एकमात्र सिक्किम ही ऐसा राज्य था, जिसमें कांग्रेस का कोई विधायक नहीं था।
पांच राज्यों में जीरो विधायक और नौ राज्यों में विधायक दो अंकों में भी नहीं
पीएम मोदी नौ साल में ही कांग्रेस-मुक्त भारत के नारे को चरितार्थ करके दिखा दिया है। आज की बात करें तो कांग्रेस देश के सिर्फ तीन राज्यों- राजस्थान, छत्तीसगढ़ और हिमाचल प्रदेश में अपने बूते पर सरकार में है। तीन राज्यों- बिहार, झारखंड और तमिलनाडु में गठबंधन सरकार में कांग्रेस बची है। सत्ता में ही नहीं विपक्ष में भी कांग्रेस की भूमिका सिमट रही है। जहां मोदी-इरा से पहले वह 16 राज्यों में मुख्य विपक्षी दल थी। अब सिर्फ नौ राज्यों में रह गई है। वे राज्य हैं- असम, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र और पंजाब। कांग्रेस के हालात इतने बदतर हो गए हैं कि नौ राज्यों में तो उसके 10 से कम विधायक रह गए हैं। ये राज्य हैं- अरुणाचल, गोवा, मणिपुर, मेघालय, त्रिपुरा, ओडिशा, तेलंगाना, यूपी, पुडुचेरी। इससे ज्यादा शर्मनाक स्थिति क्या होगी कि पांच राज्यों-आंध्र प्रदेश, नागालैंड, सिक्किम, पश्चिम बंगाल और दिल्ली में कांग्रेस का पूरी तरह सूपड़ासाफ हो चुका है। इन राज्यों में उसके जीरो विधायक हैं।
मोदी का जादू: कांग्रेस ने 331 विधायक गंवाए तो बीजेपी ने 474 बढ़ाए
2014 में नरेन्द्र मोदी के पीएम बनने से पहले देश की तीस विधानसभाएं में कुल 4120 विधायक थे। इनमें से कांग्रेस विधायक 989 थे। यानि पार्टी की 24% हिस्सेदारी थी। अब नागालैंड, त्रिपुरा और मेघालय में चुनाव के बाद देश में कुल 4033 विधायक हैं। बता दें कि जम्मू-कश्मीर को बिना विधानसभा के केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने से 2023 में विधायकों की संख्या घटी है। अब कुल विधायकों में से कांग्रेस के पास 658 विधायक हैं। यानि हिस्सेदारी घटकर 16% पर ही आ गई है। दूसरी ओर 2014 में नरेन्द्र मोदी के पीएम बनने से ठीक पहले बीजेपी के 947 विधायक थे। कुल विधायकों में पार्टी की हिस्सेदारी 23% थी। आज की बात करें तो नागालैंड, त्रिपुरा और मेघालय में चुनाव के बाद बीजेपी विधायकों की संख्या तेज गति से बढ़कर 1421 पर पहुंच गई है। कुल विधायकों में बीजेपी की हिस्सेदारी एक तिहाई से ज्यादा यानि 35% हो गई है।
लोकसभा में हालत और पतली, कांग्रेस के 10 फीसदी भी सांसद नहीं बचे
विधानसभाओं में ही नहीं, पीएम मोदी के केंद्र की सत्ता में आने के बाद लोकसभा में भी कांग्रेस की हालत पतली होती जा रही है। कांग्रेस के न सिर्फ सांसद घटे हैं, बल्कि उसे पसंद करने वाले मतदाता भी तेजी से गिरे हैं। जहां 1952 में कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में 45 प्रतिशत वोट मिले थे, वहीं पिछले दो लोकसभा चुनावों में उसका मत प्रतिशत बुरी तरह से घटकर 19 फीसदी के करीब ही रह गया है। यानि पीएम मोदी का कांग्रेस-मुक्त भारत का विजन बहुत तेजी से काम कर रहा है। यही हालात रहे तो अगले साल लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और सिमट जाएगी।
वर्ष     कुल सीट कांग्रेस जीती वोट शेयर लाभ हानि
1952   401     364     45.0%      —
1957   403     371     47.8%    +2.8%
1962   494     361     44.7%    -3.1%
1967   520     283     40.8%    -3.9%
1971   518     362     43.7%    +2.9%
1977   543     154     34.5%    -9.2%
1980   543     353     42.7%    +8.2%
1984   543     415     48.1%    +5.9%
1989   543     197     39.5%     -8.6%
1991   543     244     36.4%     -3.1%
1996   543     140     28.80      -7.6%
1998   543     141     25.8%     -3%
1999   543     114     28.3%     +2.5%
2004   543     145     26.5%     -1.9%
2009   543     206     28.6%     +2.1%
2014   543       44     19.5%     -9.1%
2019   543       52     19.7%     +0.2%
कांग्रेस-मुक्ति की दोतरफा मार: डूबते जहाज को देख कई नेताओं ने दामन छोड़ा
कांग्रेस को दरअसल दो तरफा मार झेलनी पड़ रही है। पीएम मोदी के दूरदृष्टा विजन के चलते वह जनता के बीच अलोकप्रिय तो होती ही जा रही है। इसके साथ ही जैसे जहाज डूबने से पहले चूहे सबसे पहले भागते हैं, वैसे ही कांग्रेस के कई बड़े नेता पार्टी का दयनीय भविष्य देखते हुए लगातार उसे छोड़ते जा रहे हैं। पार्टी में यूं तो असंतोष और बगावत का सिलसिला काफी पुराना है, लेकिन 2014 में केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद से कांग्रेस नेताओं का पार्टी छोड़ने का सिलसिला बहुत तेज हुआ है। इसका कारण कांग्रेस पर गांधी परिवार की पकड़ का कमजोर होना, गांधी परिवार के समझ से परे फैसले और वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी और अनादर करना है। नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद न सिर्फ बीजेपी का विस्तार हुआ है, बल्कि कांग्रेस के कई बड़े नेता हाथ का साथ छोड़कर भाजपा के साथ जुड़ रहे हैं। हालात इतने बदतर हैं कि पिछले नौ साल में आठ पूर्व मुख्यमंत्रियों समेत कई बड़े नेता ही कांग्रेस से किनारा कर चुके हैं।
दरअसल, कांग्रेस आलाकमान तिकड़ी की मनमानी के चलते पूर्व मुख्यमंत्री ही नहीं, कई और कद्दावर नेता भी कांग्रेस को अलविदा कह चुके हैं और यह सिलसिला जारी है। पार्टी का जहाज सियासत के समंदर में हिचकोले खा रहा है। कांग्रेस का कुनबा लगातार बिखरता जा रहा है। सोनिया गांधी और राहुल गांधी की कार्यशैली से नाराज होकर कांग्रेस छोड़ने वाले नेताओं की लंबी कतार है। कांग्रेस से एक के बाद एक कई युवा नेताओं के पार्टी छोड़ने या आलाकमान से नाराजगी से यह सवाल उठना जायज है कि क्या वाकई बिना जनाधार वाले नेता तानाशाही कर रहे हैं।
घुटन-उपेक्षा महसूस कर रहे कई नेताओं ने छोड़ी कांग्रेस
कांग्रेस पार्टी के अंदर युवा नेता घुटन और उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्हें लग रहा है कि पार्टी उनकी योग्यता और क्षमता के मुताबिक भूमिका नहीं दे रही है। हाइकमान की हिटलरशाही और मनमर्जियों से पार्टी में सियासी घमासान मचा हुआ है। इसलिए नेता अब अन्य विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। इसी का नतीजा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया, जितिन प्रसाद कैप्टन अमरिंदर सिंह और आरपीएन सिंह ने पार्टी को अलविदा कह दिया। राहुल गांधी के बेहद करीबियों में शुमार किए जाने वाले पांच युवा नेताओं में से तीन अब बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। जब राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष बने थे तब पांच नेताओं का अक्सर जिक्र होता था। ये पांच नेता हैं ज्योतिरादित्य सिंधिया, जितिन प्रसाद, आरपीएन सिंह, सचिन पायलट और मिलिंद देवड़ा। हालांकि भले ही सचिन पायलट और मिलिंद देवड़ा अभी कांग्रेस के साथ दिख रहे हैं, लेकिन कुछ चीजें बड़े घटनाक्रम की तरफ भी इशारा करती हैं। महाराष्ट्र में मिलिंद देवड़ा बीते कुछ साल से लगातार कांग्रेस की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाते हुए चिंता जाहिर करते रहे हैं और कुछ मौकों पर तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तारीफ भी कर चुके हैं।

प्राइवेट पार्ट में शराब की बोतल, 4 लड़के+1 लड़की ने किया नॉर्थ-ईस्ट की लड़की से रेप ; रफीदुल समेत 4 बांग्लादेशी गिरफ्तार

                             इन आरोपितों के बारे में आपके पास कोई भी सूचना है, तो असम पुलिस को दें
सोशल मीडिया पर उत्तर-पूर्वी भारत की एक महिला के यौन शोषण का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें आरोपितों का चेहरा भी स्पष्ट देखा जा सकता है। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों द्वारा इस आपत्तिजनक वीडियो को राजस्थान के जोधपुर का बताया जा रहा है, जहाँ हाल ही में नागालैंड की एक युवती ने आत्महत्या कर ली थी। केंद्रीय खेल एवं युवा मामलों के मंत्री किरण रिजिजू ने इसका खंडन किया है कि ये वीडियो जोधपुर वाली घटना से जुड़ा हुआ है।

दरअसल, रविवार (मई 23, 2021) को राजस्थान के जोधपुर में नागालैंड की एक 25 वर्षीय महिला ने आत्महत्या कर ली। वो राज्य के दीमापुर जिले के निउलैंड की रहने वाली थी। वो जोधपुर में ‘नवीन जूस रेस्टॉरेंट’ में कार्यरत थी। वो अपने रेंट के कमरे में ही फंदे से झूलती हुई मिली। ‘नेचुरल आत्महत्या’ को उसकी मौत का कारण बताया गया। सुबह-सुबह लोगों ने उसे मृत पाया था। नागा स्टूडेंट्स यूनियन के राजस्थान यूनिट ने बताया कि रेस्टॉरेंट के मालिक ने ही अंतिम संस्कार का खर्च उठाया। जैसे इस ट्वीट में वायरल वीडियो को जोधपुर केस से जोड़ा गया:

ईसाई समुदाय की महिला का अंतिम संस्कार जोधपुर के ही एक ईसाई सेमिटरी में एक पादरी की मौजूदगी में संपन्न कराया गया। उससे पहले अस्पताल में उसका पोस्टमॉर्टम भी हुआ था। वहीं सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल हो रहा है, उसमें 5 आरोपितों को एक महिला का यौन शोषण करते हुए देखा जा सकता है। अभी तक ये पता नहीं चल सका है कि ये कहाँ का वीडियो है और पीड़िता या आरोपित कौन हैं।

अरुणाचल वेस्ट से सांसद किरण रिजिजू ने बताया, “नॉर्थ-ईस्ट की एक महिला का 4 पुरुषों और एक महिला द्वारा क्रूरता से बलात्कार किए जाने का एक वीडियो वायरल हो रहा है। ये जोधपुर आत्महत्या केस से जुड़ा मामला नहीं है। जोधपुर के पुलिस कमिश्नर से मेरी विस्तृत बातचीत हुई है। लेकिन, दोषियों की गिरफ़्तारी के लिए पुलिस द्वारा सारे प्रयास किए जाएँगे।” इस घटना का कारण क्या है, ये भी स्पष्ट नहीं है।

इस वीडियो में आरोपितों को अपनी करतूतों को वीडियो कॉल पर अन्य परिचितों को दिखाते हुए भी देखा जा सकता है। वीडियो रिकॉर्ड करते समय आरोपितों ने पीड़िता के प्राइवेट पार्ट में एक शराब की बोतल भी घुसा दी। सबसे ज्यादा पीड़ादायक है कि दरिंदों के इस कृत्य में एक महिला आरोपित भी उनका साथ दे रही थी, जिसने पीड़िता को नीचे भी गिराया। इसमें पीड़िता को ज्यादा से ज्यादा प्रताड़ित किया जा रहा है।

‘NE Now’ की खबर के अनुसार, स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस रोबिन हिबू ने कहा कि पुलिस अपराधियों को चिह्नित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि पुलिस अपने काम पर लग गई है। उन्होंने भी इसकी पुष्टि की कि ये वीडियो जोधपुर में नागालैंड की युवती की आत्महत्या से नहीं जुड़ा हुआ है। मृतका की बहन और पुलिस ने पहचान कर के बताया कि ये वो महिला नहीं है। हिबू ने जोधपुर के DCP से भी फोन पर बात की।

वीडियो में पीड़िता चिल्लाती है, “कृपया मेरे साथ ऐसा मत करो, वीडियो रिकॉर्ड मत करो।” इसके बाद आरोपितों में से एक ने पीड़िता के मुँह मर कपड़ा ठूँस कर इसे बंद कर दिया। असम पुलिस पाँचों आरोपितों की तस्वीरें जारी करते हुए कहा है कि कि इन्होंने एक महिला को क्रूरतापूर्वक प्रताड़ित कर के उसका बलात्कार किया है। असम पुलिस ने कहा कि इस घटना का समय व स्थान अज्ञात है। साथ ही अपील की कि अगर किसी के पास इस घटना को लेकर कोई भी सूचना हो तो वो उससे संपर्क करे।

असम पुलिस ने ऐलान किया है कि इस घटना के सम्बन्ध में कोई भी सूचना देने देने वाले को अच्छा इनाम दिया जाएगा। पुलिस इस घटना के दोषियों का पता लगाने की कोशिश कर रही है। लेकिन, सोशल मीडिया पर जो लोग इस घटना को जोधपुर आत्महत्या केस से जोड़ रहे हैं, वो गलत हैं। जोधपुर वाले मामले में आत्महत्या का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। वहाँ के लोगों ने मृतका के अंतिम संस्कार में सहयोग भी किया।

         गैंगरेप और प्रताड़ना के 4 आरोपितों को बेंगलुरु पुलिस ने दबोचा (फोटो साभार: @PratibaRaman)
महिला का गैंगरेप कर बनाया था वीडियो, रफीदुल समेत 4 बांग्लादेशी गिरफ्तार

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें कुछ लोग एक महिला को प्रताड़ित करते हुए उसका गैंगरेप करते दिख रहे थे। कहा जा रहा था कि पीड़िता नॉर्थ-ईस्ट की है, लेकिन बेंगलुरु पुलिस ने बताया है कि वो बांग्लादेशी है। उसकी ट्रैफिकिंग (मानव तस्करी) कर के उसे भारत लाया गया था। पुलिस ने इस मामले में 6 आरोपितों को चिह्नित कर के उनमें से 4 को गिरफ्तार करने में सफलता पाई है।

पुलिस पीड़िता को भी खोजने में लगी हुई है, ताकि वो भी जाँच प्रक्रिया का हिस्सा बन सके और अपना बयान दर्ज करा सके। बेंगलुरु सिटी के पुलिस कमिश्नर कमल कांत ने बताया कि शुरुआती जाँच के बाद बलात्कार और प्रताड़ना का मामला दर्ज कर लिया गया है। पीड़िता को खोजने के लिए पुलिस की एक अलग टीम बनाई गई है। अब तक मिली सूचनाओं के अनुसार, सभी आरोपित बांग्लादेशी माने जा रहे हैं और पुलिस ने आशंका जताई है कि ये किसी गैंग का हिस्सा हैं।

पीड़िता की वित्तीय समस्याओं के कारण उसे प्रताड़ित किया गया और और क्रूरता से उसका यौन शोषण किया गया। बेंगलुरु पुलिस ने आश्वासन दिया है कि पूरी तत्परता से वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में जाँच आगे बढ़ाई जा रही है। राममूर्ति पुलिस थाने में इस मामले की FIR दर्ज की गई है। शुक्रवार (मई 28, 2021) को आरोपितों को अदालत में पेश किया जाएगा। पुलिस ने बताया कि 6 आरोपितों में 2 महिलाएँ हैं।

बेंगलुरु सिटी पुलिस ने जारी किया बयान

ये घटना बेंगलुरु के ही एक NRI कॉलोनी में हुई है। आरोपितों में से एक रफीदुल इस्लाम TikTok पर भी सक्रिय है और वहाँ उसके अच्छे-खासे फॉलोवर्स हैं। ये घटना लगभग एक सप्ताह पूर्व की है। सभी आरोपित वेश्यावृत्ति के धंधे में लिप्त थे। पीड़िता को इस तरह से प्रताड़ित किए जाने के पीछे व्यक्तिगत दुश्मनी को भी कारण बताया जा रहा है। आरोपितों से पूछताछ के बाद मानव तस्करी के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हो सकता है।

वायरल वीडियो में आरोपितों को अपनी करतूतों को वीडियो कॉल पर अन्य परिचितों को दिखाते हुए भी देखा जा सकता था। वीडियो रिकॉर्ड करते समय आरोपितों ने पीड़िता के प्राइवेट पार्ट में एक शराब की बोतल भी घुसा दी थी। वीडियो में पीड़िता चिल्लाती है, “कृपया मेरे साथ ऐसा मत करो, वीडियो रिकॉर्ड मत करो।” इसके बाद आरोपितों में से एक ने पीड़िता के मुँह मर कपड़ा ठूँस कर इसे बंद कर दिया। असम पुलिस पाँचों आरोपितों की तस्वीरें जारी की थी।

शरजील इमाम के समर्थन में कूदे इस्लामी कट्टरवादी

शरजील इमाम
शाहीन बाग़ के मुख्य साज़िशकर्ता शरजील इमाम को देश भर से कई कट्टरवादी मुस्लिमों का साथ मिल रहा है। भारत के ‘टुकड़े-टुकड़े’ करने की बात करने वाले शरजील ने उत्तर-पूर्वी भारत और शेष भारत के बीच का संपर्क तोड़ कर असम को देश से अलग-थलग करने की बात की थी। उसने महात्मा गाँधी को सबसे बड़ा फासिस्ट नेता बताया था और कहा था कि ‘राम राज्य’ की बात करने वाला कभी मुस्लिमों के हित की नहीं सोच सकता। शरजील पर यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया है। असम में भी उसके ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया है। इसके बावजूद कट्टरपंथी इस्लामी उसके समर्थन में कूद पड़े हैं।
शरजील इमाम वामपंथियों के प्रोपेगंडा पोर्टल ‘द वायर’ में कॉलम भी लिखता है। एक अन्य प्रोपेगंडा पोर्टल न्यूजलॉन्ड्री के शरजील उस्मानी ने इमाम के उस बयान का समर्थन किया है, जिसमें उसने असम को शेष भारत से काट कर अलग करने की बात कही थी। सिलीगुड़ी कॉरिडोर को ‘चिकेन्स नेक’ भी कहते हैं, जिसे ठप्प करने की बात इमाम कर रहा था। ये शेष भारत को नॉथ-ईस्ट भारत से जोड़ता है। भारतीय सेना, असम राइफल्स, बीएसएफ और बंगाल पुलिस इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए यहाँ पैनी नज़र रखते हैं।
उस्मानी ने इमाम का समर्थन करते हुए फेसबुक पर लिखा कि क्या चक्का-जाम की बात करना राष्ट्रद्रोह के अंतर्गत आता है? उसने लोगों को भड़काते हुए लिखा कि इमाम का साथ देने के लिए सबकुछ किया जाना चाहिए, नहीं तो एक और मुस्लिम युवा जेल में होगा। उस्मानी ने आरोप लगाया कि इन आंदोलन को शुरू करने वाले हज़ारों युवाओं को बदनाम किया जा रहा है और अपराधी बताया जा रहा है लेकिन ये लड़ाई जारी रहेगी। उसने कुछ मुस्लिमों को भी धमकाया और उन्हें ‘सरकारी मुस्लिम’ बताते हुए पूछा कि वो उछल-उछल कर अपनी देशभक्ति साबित करने में क्यों लगे हैं?
जेएनयू छात्र संघ की काउंसलर आफरीन फातिमा ने भी इमाम का समर्थन करते हुए लिखा कि सरकार उससे डर गई है। उसने भारत सरकार पर इस्लाम के प्रति घृणा रखने का आरोप लगाया और कहा कि शरजील इस सरकार को निशाना बना रहे हैं, इसीलिए सरकार बौखला गई है। इसी तरह नाज़िल शफ़ीक़ नामक कथित एक्टिविस्ट ने इमाम का बचाव करते हुए उसके ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई को ‘विच हंटिंग’ करार दिया। उसने आह्वान किया कि मुस्लिमों को इमाम का साथ बनाए रखना चाहिए।

अली सोहराब को हाल ही में हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी की हत्या के बाद घृणा फैलाते हुए गिरफ़्तार किया गया था। उसने भी शरजील इमाम का समर्थन किया है। उसने इमाम को शाहीन बाग़ विरोध प्रदर्शन का योजनाकार और इस आंदोलन के लिए प्रेरणा बताया है। जामिया में मीडिया द्वारा ब्रांडिंग की गई लदीदा फरज़ाना ने भी कहा कि वो इमाम के साथ है।
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शाहीन बाग़ में सीएए विरोध प्रदर्शन के नाम पर चले रहे उपद्रव के मुख्य साज़िशकर्ता शरजील इमाम के ख़िलाफ़ अरुणाचल प्रदेश ...

मेरा मजाक उड़ाने का ओलंपिक हो रहा है, ‘महामिलावट वाले’ कर रहे हैं प्रतिस्पर्धा: पीएम मोदी

Modi In Agartalaपूर्वोत्तर के दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार(फरवरी 9) को अगरतला में एक रैली को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने  कांग्रेस सहित विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। प्रधानमंत्री ने कहा, 'महामिलावट के सभी साथी जान चुके हैं कि देश के युवा, देश के गरीब, देश के किसान को अपनी आकांक्षाएं मोदी में ही दिखती हैं। महामिलावट के लोगों के पास किसानों, मजदूरों, युवाओं के लिए कोई योजना नहीं है। यह सवाल पूछने पर केवल मोदी को गाली देना इनका काम है।'
विपक्ष पर यह कहते हुए पलटवार करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि ‘महामिलावट वालों’ का मुख्य काम उनका मजाक उड़ाना है और ऐसा लगता है कि सभी उन्हें गालियां देने के ओलंपिक में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। उसके नेता सिर्फ फोटो के लिए दिल्ली और कोलकाता में एक दूसरे के हाथ पकड़ते हैं। त्रिपुरा में, केरल में, बंगाल में एक-दूसरे का चेहरा नहीं देखना चाहते हैं। ये देश को भ्रमित करने के लिए हाथ मिलाकर महामिलावट का अभियान चला रहे हैं। आगामी लोकसभा चुनाव के नतीजे बताएंगे कि लोगों से झूठ बोलने का मतलब क्या होता है।’
प्रधानमंत्री ने वाम मोर्चा का नाम लिए बगैर उसपर हमला किया और कहा कि वे जब राज्य में सत्ता में थे तो उन्होंने क्या किया? क्या उनकी पुरानी सरकार ने असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए कोई योजना क्यों नहीं चलाई? एक चायवाले की सरकार ने इन मजदूरों के लिए प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना चलाई। अब, पहली बार त्रिपुरा में भाजपा सरकार के तहत धान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जा रहा है। इसके अलावा, सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू किया गया है।’


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PM Shri @narendramodi is addressing a public meeting in Agartala, Tripura. Watch at https://www.facebook.com/BJP4India/videos/367856624047694 , dial 9345014501 to listen LIVE.
पीएम मोदी ने कहा कि त्रिपुरा में मैंने सैकड़ों करोड़ की परियोजनाओं का उद्घाटन किया है, यह यहां के युवाओ के नए अवसर से उपलब्ध कराएगा। पीएम ने कहा, 'हमने गोमती नदी को गहरा करके उसमें जहाज चलाने का फैसला किया है। यहां की सरकार ने डिजिटल टेक्नॉलजी के माध्यम से लोगों का जीवन आसान बनाने का काम किया है। इंटरनेट से जनता को सुविधाएं देने का काम तेज गति से चल रहा है।'