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त्रिपुरा : क्या 1972 से लेफ्ट की रही प्रतिष्ठित सीट को छीनने वाली प्रतिमा भौमिक बनेंगी मुख्यमंत्री ?

                                           प्रतिमा भौमिक ने लेफ्ट के गढ़ में खिलाया कमल
त्रिपुरा में भाजपा लगातार दूसरी बार सरकार बनाने जा रही है। 60 सदस्यीय विधानसभा में पार्टी को 32 सीटें मिली है। वैसे तो इस लाल गढ़ को बीजेपी ने 2018 में ही भेद दिया था। लेकिन धनपुर वह सीट थी जो पिछली बार भगवा लहर में भी लेफ्ट के साथ रही। 2023 के विधानसभा चुनावों में लेफ्ट का यह गढ़ भी ढह गया है। बीजेपी की प्रतिमा भौमिक ने इस सीट पर कमल खिलाया है।

प्रतिमा की जीत कितनी महत्वपूर्ण है इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि नतीजों के बाद से उनके त्रिपुरा की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने की अटकलें लगाई जा रही है। वैसे चुनावों से पहले बीजेपी ने माणिक साहा को ही सीएम चेहरे के तौर पर मैदान में उतारा था। लेकिन अब मीडिया रिर्पोटों में कहा जा रहा है कि प्रतिमा उनकी जगह ले सकती हैं।

                                 त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के नतीजे (साभार: eci.gov.in)

प्रतिमा भौमिक (BJP leader Pratima Bhoumik) अभी केंद्र की मोदी सरकार में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री हैं। उन्होंने CPM के गढ़ में भगवा फहराकर सभी को हैरान कर दिया है। प्रतिमा भौमिक ने जिस धनपुर सीट से सीपीएम उम्मीदवार कौशिक चंदा को हराया है, उस सीट से त्रिपुरा के गठन के बाद से कभी लेफ्ट हारा नहीं था। त्रिपुरा राज्य 1972 में अस्तित्व में आया था। उसके बाद से धनपुर का प्रतिनिधित्व कम्युनिस्ट दिग्गज समर चौधरी और माणिक सरकार करते रहे।

त्रिपुरा को राज्य का दर्जा मिलने के बाद समर चौधरी ने पहले विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी। वह लगातार 1993 तक इस सीट पर काबिज रहे। 1998 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में धनपुर विधानसभा सीट से माणिक सरकार चुनाव जीते और राज्य के मुख्यमंत्री बने। 2018 के भाजपा लह​र में भी माणिक सरकार यह लाल गढ़ बचाने में कामयाब रहे। उन्होंने पिछले चुनाव में प्रतिमा भौमिक को करीब 5400 वोटों से हराया था।

इस बार के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद से 53 वर्षीय प्रतिमा भौमिक को त्रिपुरा में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार भी माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि त्रिपुरा को इस बार प्रतिमा के रूप में एक महिला मुख्यमंत्री मिल सकती है। भौमिक के सीएम बनाए जाने की अटकलों के बारे में पूछे जाने पर एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “इससे ​इनकार नहीं किया जा सकता। अगर उन्हें सीएम बनाया जाता है, तो माणिक साहा को केंद्र सरकार में जगह दी जा सकती है।”

                                  धनपुर में सीपीएम के कौशिक चंदा को प्रतिमा भौमिक ने हराया (साभार: eci.gov.in)

कृषक परिवार से आती हैं प्रतिमा भौमिक

प्रतिमा भौमिक धनपुर गाँव के कृषक परिवार से आती हैं। उनका गाँव भारत-बांग्लादेश सीमा के करीब है। उन्होंने अगरतला के महिला कॉलेज से जीवन विज्ञान में स्नातक की है। प्रतिमा अपने पिता की मदद करना चाहती थीं, इसलिए पढ़ाई करने के बाद वह गाँव आईं। यहाँ वह खेती और छोटे व्यवसाय में अपने पिता का हाथ बँटाती थीं। इसके अलावा गाँव में वह समाज सेवा करती थीं। वह आरएसएस में काम करने के दौरान बीजेपी से जुड़ गई थीं।

समर्थकों के लिए प्रतिमा दी

प्रतिमा भौमिक ‘प्रतिमा दी’ के नाम से भी लोकप्रिय हैं। वह पिछले लोकसभा चुनावों में पश्चिम त्रिपुरा लोकसभा क्षेत्र से निर्वाचित हुई थीं। इससे पहले वह भाजपा की त्रिपुरा इकाई की महासचिव भी रह चुकी हैं। वह केंद्रीय मंत्री बनने वाली त्रिपुरा की पहली महिला हैं। इससे पहले सिर्फ दो बार केंद्रीय मंत्रिमंडल में त्रिपुरा का प्रतिनिधित्व हुआ है। 1967 और 1968 में राज्यसभा के लिए मनोनीत जादवपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ त्रिगुण सेन केंद्रीय शिक्षा मंत्री थे। बाद में, असम की बराक घाटी से कॉन्ग्रेस के संतोष मोहन देब, 1989 और 1991 में त्रिपुरा से दो बार चुने गए और 1996 तक केंद्रीय इस्पात राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रहे।

एग्जिट पोल्स : त्रिपुरा और नागालैंड में सत्ता बचा लेगी भाजपा, मेघालय में कड़ी टक्कर

मेघालय, नागालैंड और त्रिपुरा में चुनाव संपन्न हो चुके हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि किस राज्य में किस पार्टी को कितनी सीटें मिलती हुई दिख रही हैं। ऐसे में बात करते हैं ‘जन की बात’ एग्जिट पोल्स की, जिसमें हर राज्य में सीटों को लेकर सर्वे किया गया है। इस सर्वे की मानें तो मेघालय में भाजपा पिछड़ती हुई दिख रही है। राज्य में उसे मात्र 3-7 सीटें मिलती हुई दिख रही हैं, वहीं तृणमूल कांग्रेस 9-14 सीटें जीत कर बड़ी ताकत बन कर उभर सकती है। लेकिन कांग्रेस इन राज्यों में भी सत्ता के निकट तक नहीं दिख रही। राहुल गाँधी की 'भारत जोड़ो यात्रा' का भी गुजरात की तरह इन चुनावों पर कोई असर नहीं दिखा। 

वहीं मेघालय में भी UDP को 10-14 सीटें मिलती हुई दिख रही हैं। प्रदीप भंडारी की ‘जन की बात’ एग्जिट पोल के अनुसार, मेघालय में NPP 11-16 सीटें जीत कर सबसे बड़ी ताकत के रूप में उभरने वाली है। वहीं त्रिपुरा चुनाव की बात करें तो वहाँ भाजपा 29-40 सीटें जीत कर अपनी सत्ता बचाती हुई दिख रही है। वामपंथी दल यहाँ 9-16 पर सिमट जाएँगे। नई पार्टी TIPRA भी 10-14 सीटें जीत कर एक बड़ी ताकत के रूप में उभरेगी।

अब आते हैं नागालैंड विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल पर। यहाँ भी भाजपा अपनी सत्ता बचाती हुई दिख रही है। भाजपा को 35-45 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। वहीं NPF मात्र 1-16 सीटों पर सिमट जाएगी। यहाँ अन्य दलों को भी 9-16 सीटें मिलने का अनुमान है। ‘टाइम्स’ के एग्जिट पोल की मानें तो नागालैंड में भाजपा को 39-45, ‘Zee News’ के हिसाब से 35-45 और ‘इंडिया टुडे’ की मानें तो 38-48 सीटें मिल सकती हैं।

अन्य एग्जिट पोल्स की बात करें तो मेघालय में ‘टाइम्स’ ने भाजपा को 3-6 सीटें, ‘Zee News’ ने 6-11 सीटें और ‘इंडिया टुडे’ ने 4-8 सीटें दी हैं। ‘टाइम्स नाउ’ ने नागालैंड में राजग को 44 सीटें आने का अनुमान लगाया है। ‘एक्सिस माय इंडिया’ ने राज्य में भाजपा को 43 सीटें मिलने का अनुमान लगाया है। त्रिपुरा में ‘Zee News’ ने भाजपा को 29-36 सीटें दी हैं। इस तरह भाजपा उत्तर-पूर्व के दो राज्यों में अपनी सत्ता बचाती हुई दिख रही है, जबकि एक में कड़ी टक्कर है।

त्रिपुरा टूलकिट ने ऐसे जलाया गया महाराष्ट्र : 7 तस्वीरें, दावा: कुरान जलाई-मस्जिदों में आग लगा दी

आखिर जिस फेक पोस्ट के कारण रज़ा अकाडेमी ने महाराष्ट्र को साम्प्रदायिकता की आग में झोंका, सरकार को ऐसे लोगों के विरुद्ध ऐसी सख्त कार्यवाही करनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी फेक न्यूज़ फ़ैलाने वाले ऐसा साहस न कर पाएं। इन लोगों का काम ही अपने आकाओं के इशारे पर देश में अराजकता फैलाना है। सरकार को इन आकाओं पर नकेल कसनी चाहिए। ताकि कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा से देश का माहौल ख़राब होने पाए। रज़ा अकाडेमी से पूछना चाहिए कि क्या बंध का आव्हान करने से पहले समाचार की सत्यता जानने का प्रयास किया गया था? यदि  नहीं तो क्यों नहीं सत्यता जानने की कोशिश की? दंगे में जितना भी नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई दंगाइयों से की जाए।   

त्रिपुरा के नाम पर महाराष्ट्र में पिछले दिनों मुस्लिम दंगाइयों ने जमकर उत्पात मचाया। सैंकड़ों की भीड़ ने सड़कों पर उतरकर तोड़फोड़ की, पुलिस पर पथराव किया। अब इसी घटना को लेकर टाइम्स नाऊ ने अपनी एक्सक्लूसिव रिपोर्ट प्रकाशित की है। मीडिया चैनल के अनुसार, हिंदुओं और हिंदू संगठनों के ख़िलाफ़ ये हिंसा त्रिपुरा के बारे में फर्जी पोस्ट कर करके फैलाई गई। कहीं इसमें कहा गया कि मुस्लिमों पर हमला हुआ तो कहीं बोला गया कि मस्जिद को जलाया गया।

रिपोर्ट में 7 तस्वीरों का जिक्र है और इन्हीं के बल पर दावा किया गया है कि हिंदुओं के विरुद्ध पूरा अभियान फर्जी तस्वीरों (वीडियो में मौजूद) से चलाया गया। एक फोटो में दो लोग हाथ में जली हुई किताब लेकर दिख रहे हैं। इस तस्वीर को कैप्शन दिया गया कि हिंदू गुंडों ने कुरान की प्रतियाँ जलाई हैं जबकि वास्तविकता में ये तस्वीर जून में दिल्ली के एक रिफ्यूजी कैंप से ली गई थी।

दूसरी तस्वीर में एक इस्लामी उलेमा, इमारतों में लगी आग को ये कहकर फैलाता पाया गया कि त्रिपुरा में 16 मस्जिदों में आग लगा दी गई है जबकि तस्वीर त्रिपुरा के अगरतला की है जिसमें सीपीएम ऑफिस को निशाना बनाया गया था न कि मस्जिदों को।

इसी तरह एक अन्य तस्वीर जिसमें बीजेपी का झंडा देख लोगों की भीड़ वाली तस्वीर पर लिखा गया, ‘भगवा आतंकी आपे से बाहर हो रहे हैं।’ अब ये तस्वीर दरअसल कोलकाता में विहिप द्वारा रामनवमी पर निकाले गए जुलूस की है जिसका त्रिपुरा से लेना-देना नहीं है।

अगले पोस्ट में एक फिरोज खान ने कहा कि दंगाइयों को त्रिपुरा पुलिस संरक्षण प्रदान कर रही है। वहीं राज्य पुलिस की साइबर क्राइम ने इसे फेक तस्वीर कहा। ऐसी ही अगली तस्वीर का जिक्र भी रिपोर्ट में है जो असलियत में पाकिस्तान के निजामाबाद की है। वो भी तब की जब एक धमाके में 4 लोग मारे गए थे।

इसके बाद अगली तस्वीर में कहा गया कि त्रिपुरा में मुस्लिमों की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया जा रहा है। लेकिन यदि सच का पता लगाएँ तो दावे वाली तस्वीर जौनपुर की है जहाँ 22 अक्टूबर 3 मंजिला बिल्डिंग गिर गई थी। 

महाराष्ट्र में भड़की हिंसा को देखते हुए गृह मंत्रालय पहले ही बयान जारी कर चुका है कि त्रिपुरा में मस्जिद को नुकसान पहुँचाने की खबरें झूठी हैं और तथ्यों को जोड़-तोड़ कर बनाई गई हैं। त्रिपुरा के गोमती जिले के ककराबन इलाके में ऐसी कोई घटना घटित नहीं हुई, जैसी फैलाई जा रही है कि वहाँ मस्जिदों पर हमला हुआ और तोड़फोड़ हुई।

12 नवंबर को महाराष्ट्र के नांदेड़, अमरावती और मालेगाँव समेत कई शहरों में मुस्लिम संगठनों ने त्रिपुरा हिंसा के नाम पर इकट्ठा होकर उपद्रव मचाया था। भीड़ के डर से बाजार में दुकानें बंद हो गईं थी और पुलिस पर भी पथराव किया गया था। इलाके शांत होने के बाद पता चला था कि इस तरह सड़कों पर उतरने से पहले सोशल मीडिया पर जमकर तस्वीरें शेयर हुई थी। कहीं बांग्लादेश के रोहिंग्याओं को त्रिपुरा के मुस्लिम कहा गया था तो कहीं दूसरे राज्यों की तस्वीरें शेयर हुई थी।

त्रिपुरा में मस्जिद तो जली नहीं, शांतिप्रिय और मजलूम गरीबियों ने महाराष्ट्र जला दिया

                            महाराष्ट्र में त्रिपुरा की घटना को लेकर लगातार बवाल हो रहा है। (साभार: ट्विटर)
महाराष्ट्र का अमरावती जिला 12 नवंबर (शुक्रवार) से जल रहा है। वहाँ पथराव और सार्वजनिक एवं निजी संपत्तियों को नुकसान पहुँचाने की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त संदीप पाटिल ने हालात को सँभालने के लिए सीआरपीसी की धारा 144(1), (2), (3) के तहत शहर में चार दिन का कर्फ्यू लगा दिया है। आदेश के अनुसार, सिर्फ मेडिकल इमरजेंसी वाले लोग ही घर से बाहर निकल सकते हैं। साथ ही एक जगह पर पाँच से ज्यादा लोग नहीं इकट्ठा हो सकते हैं।
महाराष्ट्र सरकार को दंगा प्रभावित क्षेत्र आर्मी के सुपुर्द कर देना चाहिए। इनके घरों और मस्जिदों की तलाशी करवाकर हथियार एवं अन्य हथियारों को जब्त कर कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जाए ताकि उनकी आने वाली पुश्तों की दंगा करने से पहले रूह कांपने लगे। तभी देश में दंगाइयों का सफाया होगा। इतने हथियार और पत्थर कहाँ से आए? दंगे में मरने वाला बेगुनाह ही होता है। 

त्रिपुरा में एक मस्जिद को जलाने की कथित घटना के विरोध में मुस्लिम संगठनों द्वारा शुक्रवार को आयोजित की गई रैलियों के दौरान इन घटनाओं का सिलसिला शुरू हुआ। अमरावती के अलावा नांदेड़, मालेगाँव, वाशिम और यावतमाल में रैलियाँ आयोजित की गई थीं। इन रैलियों के लिए पुलिस की इजाजत भी नहीं ली गई थी। इस बीच अब त्रिपुरा पुलिस ने भी स्पष्ट किया है कि जिस कथित घटना को लेकर महाराष्ट्र में हिंसा हो रही है वो घटना हुई ही नहीं है।

गृह मंत्रालय ने की शांति बनाए रखने की अपील

इस घटना का संज्ञान लेते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने लोगों से त्रिपुरा की फर्जी रिपोर्ट से गुमराह नहीं होने और हर हाल में शांति बनाए रखने की अपील की है। इस घटना को लेकर शनिवार को जारी एक प्रेस रिलीज कहा गया, “ऐसी खबरें फैलाई जा रही हैं कि त्रिपुरा में गोमती जिले के काकराबन इलाके की एक मस्जिद में तोड़-फोड़ की गई है। ये खबरें फर्जी हैं और तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया गया है। काकराबन के दरगाबाजार इलाके की मस्जिद को कोई नुकसान नहीं हुआ है। गोमती जिले में शांति बनाए रखने के लिए त्रिपुरा पुलिस काम कर रही है।”
इसमें आगे कहा गया है, “त्रिपुरा में हाल के दिनों में किसी भी मस्जिद या अन्य ढाँचों पर हमले नहीं किए गए हैं। इन घटनाओं में किसी व्यक्ति को चोट लगने, किसी के साथ बलात्कार होने या किसी की मृत्यु होने की कोई खबर नहीं है, जैसा कि सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है। इसलिए लोगों को शांति बनाए रखते हुए झूठी खबरों से गुमराह नहीं होना चाहिए। जैसा कि महाराष्ट्र में हो रहा है। वहाँ से हिंसा की खबरें आ रही हैं और लोगों द्वारा आपत्तिजनक बयान दिए जा रहे हैं। यह बहुत ही चिंताजनक है।”
त्रिपुरा में पिछले महीने हुई घटना को लेकर शुक्रवार को महाराष्ट्र के अमरावती, नांदेड़, मालेगाँव, वाशिम और यवतमाल में कट्टरपंथी मुस्लिमों संगठनों ने रैली निकाली और हिंदुओं को टार्गेट कर पथराव किया। शुक्रवार को हुई उस वारदात के मामले में पुलिस ने दंगा भड़काने समेत विभिन्न आरोपों के तहत 20 केस दर्ज करते हुए 20 लोगों को गिरफ्तार किया है और 4 लोगों को हिरासत में लिया है।

क्या हुआ अमरावती में?

शुक्रवार को 8,000 मुस्लिमों की भीड़ अमरावती के जिलाधिकारी कार्यालय में ज्ञापन सौंपने के लिए निकली थी। यह भीड़ त्रिपुरा में मुस्लिमों के खिलाफ कथित अत्याचारों के खिलाफ कार्रवाई की माँग कर रही थी। लौटने के दौरान भीड़ ने कॉटन मार्केट और चित्रा चौक के बीच कई जगहों पर हिंसा को अंजाम दिया।
इस दौरान एक विचलित करने वाला वीडियो भी सामने आया, जिसमें एक मुस्लिम बच्चा भी इस प्रोपेगेंडा में शामिल दिखा। ट्विटर यूजर MVAgovt ने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि इस्लामी टोपी पहना एक छोटा बच्चा हाथ में एक पोस्टर लिए हुए था और दुकानदार से दुकान बंद करने के बारे में पूछ रहा था। पोस्टर में लिखा था, “क्या आप रसूलल्लाह की इज्जत के लिए अपनी दुकान और कारोबार 12 नवंबर को बंद रख सकते हैं?”
इतना ही नहीं, सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो भरे पड़े हैं, जिसमें स्पष्ट दिख रहा है कि कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ हिंदुओं को टार्गेट कर उनकी दुकानों में तोड़फोड़ और पथराव कर रही है। इसी तरह के एक वीडियो में एक हिंदू के मथुरा भोजनालय के बाहर मुस्लिमों की भीड़ ‘अल्लाह हू अकबर’ चिल्ला रही है।
पहले पार्ट में भीड़ नारेबाजी करती नजर आ रही है। दूसरे भाग में एक किराना की दुकान दिख रही है, जिसका मालिक यह कह रहा है कि उसकी दुकान में 20 दंगाई जबरदस्ती घुस गए थे। वहीं एक अन्य व्यक्ति ने उन्मादी भीड़ पर बच्चों को पीटने का आरोप लगाया। साझा किए गए एक अन्य वीडियो में दिख रहा है कि सैकड़ों मुस्लिमों की भीड़ बाजार में घूम-घूमकर हिंदुओं की दुकानों में तोड़फोड़ करते हुए उसे बंद करा रही है। वीडियो में बैकग्राउंड से आ रही आवाज में सुना जा सकता है कि जिस दुकान पर हमला हुआ, वह गुप्ता नाम के एक व्यक्ति की थी। खास बात यह है कि इस दौरान पुलिस नदारद रही।
कुछ तस्वीरें भी शेयर की जा रही हैं, जिसमें देखा जा सकता है कि उन्मादी भीड़ गाड़ियों में तोड़फोड़ कर रही है। हिंदू भी घायल दिख रहे हैं।
एक अन्य यूजर ने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें दिख रहा है कि कुछ लोग हाथों में तलवार लेकर घूम रहे हैं। यूजर ने लिखा, “महाराष्ट्र के अमरावती में मुस्लिम भीड़ हिंदुओं पर हमला करने के लिए जा रही है।”
इसी तरह के दृश्य कई अन्य वीडियो में भी दिख रहे हैं।
बीजेपी नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र में उन्मादी मुस्लिमों की भीड़ द्वारा मचाए गए उत्पात की निंदा करते हुए कहा, “त्रिपुरा में जो घटना ही नहीं घटी, उसको लेकर जिस तरह से महाराष्ट्र में दंगे हो रहे हैं, ये बिल्कुल गलत है। त्रिपुरा में जिस मस्जिद को जलाए जाने की अफवाह उड़ाई गई, वहाँ की पुलिस ने उस मस्जिद की फोटो जारी की है।” उन्होंने राजनीतिक दलों से भी भड़काऊ भाषण से बचने की अपील की है।

त्रिपुरा कांग्रेस अध्यक्ष पर हमले में गिरफ्तार हुआ पार्टी अल्पसंख्यक सेल का प्रमुख जॉयदुल हुसैन

                          कांग्रेस अध्यक्ष पर हमले में पार्टी नेता ही गिरफ्तार (साभार:The Northeast Today)
आज कांग्रेस बहुत कठिन समय से गुजरने के बावजूद भाजपा शासित राज्य एवं केन्द्र सरकारों पर हमला करने में लगी हुई है। सरकार जनहित में चाहे कोई भी कानून बनाने ले, लेकिन विरोध करने का कोई मौका नहीं छोड़ रही। जिस तरह मोदी सरकार का विरोध किया जा रहा है, उतनी ही तेजी से पंचायत स्तर से लेकर अन्य सदनों में होने वाले चुनावों में भाजपा झंडे गाड़ रही है। अगर मोदी सरकार के काम जन-विरोधी होते, क्यों भाजपा विरोधी क्षेत्रों में भाजपा के उम्मीदवार जीत रहे हैं। 

कांग्रेस को चाहिए कि जनता को गुमराह करने के बजाए अपने संगठन को सुनिश्चित करे। आपस में मार-पिट होना कांग्रेस के लिए अच्छे संकेत नहीं है। भारत के कई क्षेत्रों में तो केवल नाम के लिए पार्टी रह गयी है। लेकिन पार्टी के शुभचिंतक पत्रकार अपनी TRP के चक्कर में कांग्रेस में हो रही मार-पिट के लिए भाजपा पर आरोप लगाकर जनता को गुमराह करने का कोई मौका नहीं छोड़ रही।   

त्रिपुरा कांग्रेस के अध्यक्ष पीयूष कांति बिस्वास पर रविवार(जनवरी 17) को सिपाहीजला जिले के बिसालघर में हमला हुआ था। हमले में उन्हें हल्की चोटें आई थी। इस मामले में पुलिस ने राज्य के एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता को गिरफ्तार किया है। इस घटना के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं को दोषी ठहराया जा रहा था।

हमले के विरोध में कांग्रेस ने सोमवार(जनवरी 18) को 12 घंटे के हड़ताल का आह्वान किया था। हालाँकि, मामले की जाँच कर रही पुलिस ने अब पार्टी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रमुख जॉयदुल हुसैन को घटना के संबंध में गिरफ्तार किया है।

बिस्वास पर हुए हमले के बाद मीडिया भाजपा को दोषी ठहराने में इतनी जल्दीबाजी में थी कि उसने किसी प्रकार की रिपोर्ट या जाँच-पड़ताल को भी जरूरी नहीं समझा। मीडिया द्वारा हमले के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहरा दिया गया। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वे इस निष्कर्ष पर कैसे पहुँचे।

                                                   टाइम्स नाउ की रिपोर्ट
टाइम्स नाउ ने 17 जनवरी को भाजपा को दोषी ठहराते हुए हेडलाइन के साथ एक रिपोर्ट प्रकाशित की, “बीजेपी कार्यकर्ताओं ने त्रिपुरा कांग्रेस के प्रमुख पीयूष कांति बिस्वास के वाहन पर कथित तौर पर हमला किया।”

                                                            एनडीटीवी  रिपोर्ट
फिर इस मामले में NDTV कहां पीछे रहने वाला था। NDTV ने भी इस पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की जिसमें कहा गया था कि “त्रिपुरा कांग्रेस प्रमुख पर ‘कथित रूप से’ भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा हमला किया गया।” रिपोर्ट में पीटीआई से इनपुट लिए गए थे।

                                                              इंडिया.कॉम रिपोर्ट
India.com ने इस मामले पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें कहा गया था, “त्रिपुरा के कांग्रेस अध्यक्ष पीयूष कांति बिस्वास के वाहन पर जनवरी 17 की सुबह त्रिपुरा के सिपाहीजला जिले के बिशालगढ़ क्षेत्र में हमला हुआ। जिसमें उन्हें मामूली चोटें आई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा यह हमला किया गया, जिसके विरोध में उन्होंने जनवरी 18 को 12 घंटे के राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया।”

यह बात गौर करने वाली है कि मीडिया आउटलेट्स ने जिस आधार पर यह दावे किए उसका अभी तक कोई अता-पता नहीं है। संभव है कि वे अपने व्यक्तिगत पक्षपात के कारण हमले के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं को दोष मढ़ने के लिए मजबूर थे।

त्रिपुरा में कांग्रेस पार्टी के पूर्व प्रमुख और पूर्ववर्ती शाही परिवार के प्रमुख प्रद्योत माणिक्य (Pradyot Manikya) ने कहा है कि उन्हें इस बात से कोई आश्चर्य नहीं है कि राज्य कांग्रेस प्रमुख पर जॉयदुल हुसैन द्वारा हमला किया गया था।

उन्होंने कहा, “त्रिपुरा कांग्रेस अध्यक्ष पर हुए हमले में शामिल अपराधियों में से एक को गिरफ्तार कर लिया गया है और मुझे किसी प्रकार की हैरानी नहीं हुई है कि आरोपित कांग्रेस पार्टी के राज्य महासचिव/अल्पसंख्यक सेल का अध्यक्ष है। जॉयदुल हुसैन को हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया, जब वह राज्य से भागने की फिराक में था।”

उन्होंने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए और कहा कि हुसैन को पार्टी दिए जाने पर जब उन्होंने आपत्ति जताई तो उनकी बात को खारिज कर दिया गया था। दरअसल हुसैन पर बाल तस्करी का आरोप था।

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झाड़खंड : कांग्रेसियों ने एक-दूसरे को दौड़ा-दौड़ा कर लातों और घूसों से पीटा
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प्रद्योत माणिक्य ने कहा, “जब मैं अध्यक्ष बना तो मैंने उसे पदाधिकारी के पद से हटा दिया। लेकिन मेरे लिस्ट को कभी स्वीकार नहीं किया गया, क्योंकि AICC उसे लिस्ट में देखना चाहती थी।”

बांग्लादेश से भागकर दिल्ली में ठिकाना बना रहे रोहिंग्या, आनंद विहार और उत्तम नगर से धरे गए

सुरक्षा एजेंसियों ने गणतंत्र दिवस को देखते हुए घुसपैठियों के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़ा है। इसके तहत दिल्ली में छुपकर रह रहे रोहिंग्या घुसपैठियों के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है।

आनंद विहार रेलवे स्टेशन के बाहर रविवार (जनवरी 17, 2021) को 6 संदिग्ध रोहिंग्या को हिरासत में लिया गया। दिल्ली पुलिस ने बताया कि उनके खिलाफ पटपड़गंज औद्योगिक क्षेत्र थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। ये ट्रेन से 6 जनवरी को दिल्ली पहुँचे थे। इन सभी को लामपुर डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया है।

दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार को  ट्विटर पर उठायी संभावनाओं पर विचार करते हुए आप विधायक अमानतुल्ला से भी पूछताछ करने के साथ-साथ उत्तम नगर, लक्ष्मी नगर, सीलमपुर, सीमापुरी और विकासपुरी आदि क्षेत्रों में सघन जाँच करनी चाहिए। जहाँ चर्चा है कि हिन्दू नाम से आधार कार्ड बनवाकर बांग्लादेश और रोहिंग्या घरों में काम कर रहे/रही हैं। इसके साथ-साथ जामा मस्जिद क्षेत्र में भिखारियों की भी जाँच अनिवार्य है।  

इन रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस भेजने के लिए FRRO को जानकारी दे दी गई है। पुलिस के मुताबिक, ये सभी ट्रेन के जरिए त्रिपुरा से दिल्ली आए थे। इनके पास भारतीय होने का कोई दस्तावेज नहीं था। विदेश मंत्रालय के जरिए इन्हें वापस भेजा जाएगा।

इससे पहले उत्तम नगर थाना पुलिस ने हस्तसाल इलाके में पिछले करीब ढाई महीने से रह रहे म्यांमार के दो नागरिकों को गिरफ्तार किया। दोनों रोहिंग्या हैं। दोनों आरोपितों की पहचान हामिद हुसैन और नबी हुसैन के रूप में हुई। दाेनों म्यांमार के बुथीडोंग इलाके के रहने वाले हैं। नवंबर महीने में ये बांग्लादेश की सीमा पार करने के बाद भारत में दाखिल हुए और फिर दिल्ली पहुँचे। ये किस मकसद से यहाँ रह रहे थे, पुलिस अभी इसकी तहकीकात कर रही है।

पुलिस को इनके इलाके में होने की सूचना सूत्रों से प्राप्त हुई। इसके बाद पुलिस ने दोनों के बारे में पता किया, जिसके बाद इन्हें पकड़ा। दोनों एक ही कमरे में रह रहे थे। पुलिस ने जब इनसे पूछताछ शुरू की तो ये कुछ स्पष्ट तौर पर नहीं बोल रहे थे। इनसे जब कागजात की माँग की गई तो ये पुलिस के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर पाए। पकड़े गए दोनों लोगों को जेल भेज दिया गया है।

पुलिस के बयान के मुताबिक, “15 जनवरी को फॉरेनर्स एक्ट की धारा 14 के तहत एक केस दर्ज किया गया था, जिसके बाद जाँच शुरू की गई थी। जाँच के दौरान पता चला कि दोनों आरोपी म्यांमार के स्थायी निवासी हैं और एक नवंबर, 2020 को बांग्लादेश बॉर्डर के जरिए अवैध तरीके से भारत में घुस आए थे।”

पिछले दिनों रेलवे पुलिस ने बिहार के किशनगंज से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन पर 10 रोहिंग्या मुस्लिमों को गिरफ्तार किया था। ये सभी बुधवार (13 जनवरी 2021) की दोपहर 02501 अगरतला-नई दिल्ली राजधानी स्पेशल ट्रेन से गिरफ्तार किए गए। इसमें 3 पुरुष, 2 महिला और 5 बच्चे शामिल थे। गिरफ्तार किए गए सारे रोहिंग्या मुस्लिम बांग्लादेश के कॉक्स बाज़ार स्थित कुटूपालंग शिविर से फरार हुए थे।

गोवा, मणिपुर के बाद त्रिपुरा भी कोरोना फ्री

त्रिपुरा, कोरोना

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
एक तरफ सरकार कोरोना को हराने में व्यस्त है, तो दूसरी तरफ साम्प्रदायिक तत्व हिन्दू-मुस्लिम कर जनता को भड़काने में व्यस्त हैं। 2014 और 2019 में अपनी दुर्दशा होने के बावजूद तुष्टिकरण करने वाले बाज़ नहीं आ रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मुस्लिमों से भेदभाव को आधार बनाकर पत्र लिखने वाले राष्ट्र को बताएं कि मोदी ने अब तक जितनी भी जनहित योजनाएं लागू की हैं, उनसे कितने मुसलमान लाभाविंत हो रहे हैं? हिम्मत है तो बताओं उनकी संख्या। ऐसे संकट के समय हिन्दू-मुसलमान करते शर्म नहीं आती। इस कदम से जितने भी हस्ताक्षरी हैं, अपनी योग्यता को मद्देनज़र रख बताएं कि क्या यह समय हिन्दू-मुसलमान का रोना रोने का है? क्यों और किसको पागल बना रहे हो? किस मुसलमान को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा? 
वास्तव में यदि कोरोना बीमारी 2014 में मोदी सरकार बनने से पूर्व आयी होती, निस्संदेह भारत में संक्रमितों की संख्या अमेरिका, स्पेन और इटली से अधिक होती। चीन तो अपना वास्तविक आंकड़ा छुपा रहा है। 
गोवा और मणिपुर के बाद अब त्रिपुरा कोरोना वायरस के संक्रमण से मुक्त हो गया है। गुरुवार (अप्रैल 23, 2020) को राज्य के दूसरे और आखिरी मरीज की रिपोर्ट निगेटिव आई। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है।
मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने ट्वीट कर कहा, “माँ त्रिपुरसुंदरी जी के आशीर्वाद से तथा माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दिखाए मार्ग से प्रेरित होकर, हमारा अपना त्रिपुरा आज कोरोना मुक्त हो गया है। आशा है कि जल्द ही पूरा भारत और फिर पूरा विश्व इस वैश्विक महामारी से मुक्त होगा।”
इसके बावजूद उन्होंने लोगों से सरकारी गाइडलाइन्स और सोशल डिस्टेंसिंग को फॉलो करने की अपील की है। बता दें कि, त्रिपुरा में अब तक सिर्फ दो ही कोरोना मरीज़ मिले थे। दोनों अब संक्रमण से स्वस्थ हो चुके हैं। मुख्यमंत्री ने सभी डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों, अग्रणी पंक्ति के योद्धाओं और जनता को राज्य को कोरोना मुक्त करने में योगदान के लिए आभार जताया।
सीएम देब ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, “त्रिपुरा में कोरोना के दूसरे मरीज की टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आई है। इसके साथ ही हमारा राज्य कोरोना से मुक्त हो गया है। मैं सभी से अनुरोध करता हूँ कि वह सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखें और सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। घर पर रहिए, सुरक्षित रहिए।”


त्रिपुरा में पहली कोरोना मरीज एक महिला थी जो गोमती जिले के उदयपुर शहर की रहने वाली थी। वह लॉकडाउन से ठीक पहले राज्य में वापस लौटी थी। 6 अप्रैल को उसकी टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आई। ठीक होकर 16 अप्रैल को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी।
उन्हें बाद में गोमती जिले के क्वारांटाइन केंद्र में शिफ्ट कर दिया गया था। वहीं दूसरा मरीज त्रिपुरा राज्य राइफल्स का एक जवान था जो 16 अप्रैल को उत्तरी त्रिपुरा के डामचेरा में पॉजिटिव पाया गया था। उसे जीबी पंत अस्पताल में भर्ती कराया गया था। गुरुवार को उसकी टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आई है।
दो राज्य पहले ही कोरोना मुक्त हो चुके हैं 
कोरोना मुक्त होने वाला देश का पहला राज्य गोवा है। दूसरे नंबर पर मणिपुर है। त्रिपुरा तीसरा राज्य है जहाँ कोरोना के एक भी मरीज नहीं हैं। पिछले दिनों गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने ऐलान किया था कि राज्य अब कोरोना से मुक्त हो गया है। उन्होंने इसे राज्य को लिए संतुष्टि और राहत की बात बताते हुए सभी डॉक्टरों, मेडिकल और पैरा मेडिकल कर्मचारियों का आभार जताया था। मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने ट्वीट कर मणिपुर के कोरोना मुक्त होने की जानकारी दी थी।

त्रिपुरा पंचायत चुनाव : मोदी लहर से त्रिपुरा में 25 वर्षीय ढहा ‘लाल’ किला , भाजपा ने मारी बाज़ी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की जीत का सिलसिला जारी है। लोकसभा चुनाव में रिकॉर्ड तोड़ जीत के बाद भाजपा ने अब त्रिपुरा के पंचायत चुनाव में जबर्दस्त जीत हासिल की है। भाजपा ने त्रिपुरा पंचायत चुनाव में 90 फीसदी से अधिक सीटें जीती है। राज्य की 86 फीसदी सीटें ऐसी हैं, जहां भाजपा प्रत्याशी निर्विरोध चुने गए हैं। राज्य में 25 सालों तक शासन करने वाली लेफ्ट पार्टियों का पंचायत चुनाव में खाता तक नहीं खुला है। स्मरण हो, त्रिपुरा में पिछले वर्ष पीएम मोदी की अगुवाई में वाम मोर्चे के 25 साल पुराने शासन का अंत हुआ था और राज्य में भाजपा की सरकार बनी थी।
प्रधानमंत्री मोदी ने त्रिपुरा पंचायत चुनाव में भाजपा की जीत का श्रेय ‘विकास की राजनीति’ को दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया, ‘त्रिपुरा का भाजपा पर भरोसा कायम है! मैं पंचायत चुनाव में पार्टी को आशीर्वाद देने के लिए लोगों का धन्यवाद करता हूं। त्रिपुरा के ग्रामीण इलाकों में परिवर्तनकारी कार्य कई लोगों के जीवन पर सकारात्मक असर डाल रहे हैं।’
प्रधानमंत्री मोदी ने त्रिपुरा में कड़े परिश्रम के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं की भी सराहना की है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘मैं अन्य राज्यों के भाजपा कार्यकर्ताओं से अपील करूंगा कि वे त्रिपुरा के कार्यकर्ताओं से संवाद करें। राज्य में पार्टी की लगातार जीत विकास की राजनीति और लोकतांत्रिक स्वभाव की शक्ति को दर्शाती है।’ प्रधानमंत्री ने भी कहा कि स्थानीय चुनाव में जीत यह भी दिखाती है कि ‘उचित प्रयासों से सब कुछ संभव है’।
त्रिपुरा में पंचायत चुनाव 27 जुलाई को करवाया गया था, उसमें रिकार्ड 76.6 फीसदी वोटिंग हुई थी। भाजपा को त्रिपुरा के 8 जिलों में जिला परिषद की 116 सीटों में 114 सीटों पर जीत मिली है। वहीं 35 ब्लाकों में पंचायत समिति की कुल 419 सीटों में से भाजपा ने 411 सीटों पर जीत दर्ज की है। 591 पंचायतों में ग्राम पंचायत की कुल 6111 सीटों में से भारतीय जनता पार्टी ने 5916 सीटों पर जीत का परचम लहराया है।
2019 लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी की विराट जीत में टूट गए जाति और धर्म के बंधन
नरेन्द्र मोदी देश के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बन गए हैं जिन्होंने लगातार दूसरी बार बहुमत हासिल किया है। 42 साल बाद किसी सरकार ने बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की है। विपक्षी पार्टियों के इरादों को चकनाचूर करते हुए पीएम मोदी के नेतृत्व में बीजेपी न केवल खुद 300 से ज्यादा सीटें जीतने में सफल रही, बल्कि एनडीए का आंकड़ा भी 350 के पार पहुंचाने में कामयाब रही। इस जीत में जाति और धर्म की सभी सीमाएं टूट गई और पीएम मोदी को सभी तबके के मतदाताओं का समर्थन मिला। धर्म के आधार पर देखें तो अल्पसंख्यकों की बहुलता वाले क्षेत्रों में भी सबसे ज्यादा सीटें बीजेपी ने जीती हैं। समाज के अलग-अलग तबकों की बात करें तो एससी-एसटी के लिए आरक्षित सीटों पर भी बीजेपी को 2014 से ज्यादा सीटें मिली हैं।

Tripura’s faith in @BJP4India remains unwavering!

I thank the people of the state for blessing the party in the Panchayat Elections across the state. The transformative work in Tripura’s rural areas is positively impacting many lives.

Kudos to the local unit for the hardwork! https://twitter.com/bjpbiplab/status/1156953768748933121 

  • देश में 20 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम, सिख और ईसाई आबादी वाली 130 सीटें हैं, इनमें से सबसे ज्यादा 53 सीटें बीजेपी को मिली हैं।
  • 20 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम आबादी वाली 96 सीटों में से भी करीब आधी यानी 46 सीटें पीएम मोदी के खाते में गई हैं।
  • अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित 84 सीटों पर बीजेपी को इस बार 2014 की तुलना में 12 फीसदी ज्यादा सीटें मिली हैं।
  • अनुसूचित जनजातियों के लिए देश भर में आरक्षित 47 सीटों पर भी 2014 के मुकाबले 15 फीसदी ज्यादा सीटें मिली हैं।
  • सबसे ज्यादा ओबीसी आबादी वाले 6 राज्यों में बीजेपी को 108 सीटें मिली जबकि कांग्रेस 29 और अन्य के खाते में केवल 86 सीटें गईं।
अल्पसंख्यकों पर भी चला मोदी का जादूदेश में 20 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम, सिख और ईसाई आबादी वाली 130 सीटें हैं, इनमें से सबसे ज्यादा 53 सीटें बीजेपी को मिली हैं। दूसरे नंबर पर पश्चिम बंगाल में मुस्लिम बहुलता वाली 14 सीटों के साथ तृणमूल कांग्रेस है। हालांकि पिछले वर्ष भी उसने यहां 14 सीटें ही जीती थीं। जिन सीटों पर 20 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम हैं, उन 96 सीटों में से भाजपा को इस बार 46 सीटें मिली हैं। जो 2014 के लोकसभा चुनाव से सिर्फ दो कम है। जबकि माना जा रहा था कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की सीटें कम होंगी। इतनी मुस्लिम आबादी वाली सीटों में कांग्रेस ने एक सीट के फायदे के साथ 11 सीटें जीती हैं।
वहीं 40 फीसदी से अधिक मुस्लिम वोटरों वाली 29 सीटों में भाजपा, तृणमूल  कांग्रेस, उत्तर प्रदेश का महागठबंधन और कांग्रेस 5-5 सीटें जीतने में सफल हुई हैं। सबसे ज्यादा मुस्लिम वोटर्स वाले राज्य उत्तर प्रदेश में 20 फीसदी से अधिक मुस्लिम वोटरों वाली 28 सीटें हैं। इनमें भाजपा को 21 सीटें मिली हैं। यह 2014 से 7 कम हैं। जबकि पश्चिम बंगाल में भाजपा को इस बार फायदा मिला है। जहां उसे 2014 में मुस्लिम आबादी वाली सीटों में एक पर भी कामयाबी नहीं मिली थीं वहीं इस बार उसे ऐसी 20 सीटों में से 4 पर जीत मिली है। 
20% से ज्यादा सिख आबादी वाली सीटें : 20 फीसदी से ज्यादा सिख वोटरों वाली कुल 15 सीटें हैं। सबसे ज्यादा 13 सीट पंजाब में हैं। यहां भाजपा और उसकी सहयोगी अकाली दल ने 7 सीटें जीती हैं। 60% सीटों (सिख  बहुल) पर जीत का मार्जिन पिछले चुनाव के मुकाबले बढ़ा है। सिख वोटरों की बात करें तो सर्वाधिक फायदा कांग्रेस को हुआ है। तीन राज्यों में सिख आबादी वाली 15 सीटें हैं। पंजाब की 13 सीटों में से कांग्रेस को 8 सीटें मिली हैं। जबकि भाजपा यहां 4 सीटें जीतने में सफल हुई है। दोनों की ही सीटें बढ़ी हैं। वहीं आम आदमी पार्टी तीन सीटों के नुकसान के साथ एक सीट पर सिमट गई है।
20% से ज्यादा ईसाई आबादी वाली सीटें : देश में 19 सीट ऐसी हैं जहां ईसाई आबादी 20% से ज्यादा हैं। झारखंड की एक सीट को छोड़कर सभी सीटें पूर्वोत्तर और दक्षिणी राज्यों में हैं। 85% से ज्यादा ईसाई आबादी वाली दोनों सीटों।
आरक्षित सीटों पर भी मोदी का जलवापिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले इस बार भाजपा ने अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन किया है। इस बार एससी उम्मीदवारों के लिए 84 सीटें आरक्षित थीं। इनमें से 40 सीटों पर भाजपा के उम्मीदवारों ने बढ़त बनाई। एसटी के उम्मीदवार भी पार्टी के लिए सही साबित हुए। 37 एसटी सीटों में से 31 सीटों पर भाजपा ने बढ़त बनाई। एसटी के उम्मीदवारों ने कर्नाटक के रायचूर और पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम जैसी नई सीटों पर जीत हासिल की। साथ ही छत्तीसगढ़ की सरगुला और रायगढ़ जैसी सीटों पर कब्जा किया। एससी और एसटी की कुल 131 सीटें रिजर्व हैं। इनमें से एससी की 84 और एसटी की 47 सीटें हैं। इससे पहले 2014 में भाजपा ने कुल 67 सीटें जीती थीं। इनमें से 40 एससी की और 27 एसटी की थीं। 1991 के बाद यह पहली बार था, जब किसी अकेली पार्टी ने रिजर्व सीटों पर इतनी बड़ी संख्या में जीत हासिल की थी। इस बार 2014 के मुकाबले भाजपा ने 9 सीटें ज्यादा हासिल की हैं।

मेरा मजाक उड़ाने का ओलंपिक हो रहा है, ‘महामिलावट वाले’ कर रहे हैं प्रतिस्पर्धा: पीएम मोदी

Modi In Agartalaपूर्वोत्तर के दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार(फरवरी 9) को अगरतला में एक रैली को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने  कांग्रेस सहित विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। प्रधानमंत्री ने कहा, 'महामिलावट के सभी साथी जान चुके हैं कि देश के युवा, देश के गरीब, देश के किसान को अपनी आकांक्षाएं मोदी में ही दिखती हैं। महामिलावट के लोगों के पास किसानों, मजदूरों, युवाओं के लिए कोई योजना नहीं है। यह सवाल पूछने पर केवल मोदी को गाली देना इनका काम है।'
विपक्ष पर यह कहते हुए पलटवार करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि ‘महामिलावट वालों’ का मुख्य काम उनका मजाक उड़ाना है और ऐसा लगता है कि सभी उन्हें गालियां देने के ओलंपिक में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। उसके नेता सिर्फ फोटो के लिए दिल्ली और कोलकाता में एक दूसरे के हाथ पकड़ते हैं। त्रिपुरा में, केरल में, बंगाल में एक-दूसरे का चेहरा नहीं देखना चाहते हैं। ये देश को भ्रमित करने के लिए हाथ मिलाकर महामिलावट का अभियान चला रहे हैं। आगामी लोकसभा चुनाव के नतीजे बताएंगे कि लोगों से झूठ बोलने का मतलब क्या होता है।’
प्रधानमंत्री ने वाम मोर्चा का नाम लिए बगैर उसपर हमला किया और कहा कि वे जब राज्य में सत्ता में थे तो उन्होंने क्या किया? क्या उनकी पुरानी सरकार ने असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए कोई योजना क्यों नहीं चलाई? एक चायवाले की सरकार ने इन मजदूरों के लिए प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना चलाई। अब, पहली बार त्रिपुरा में भाजपा सरकार के तहत धान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जा रहा है। इसके अलावा, सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू किया गया है।’


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PM Shri @narendramodi is addressing a public meeting in Agartala, Tripura. Watch at https://www.facebook.com/BJP4India/videos/367856624047694 , dial 9345014501 to listen LIVE.
पीएम मोदी ने कहा कि त्रिपुरा में मैंने सैकड़ों करोड़ की परियोजनाओं का उद्घाटन किया है, यह यहां के युवाओ के नए अवसर से उपलब्ध कराएगा। पीएम ने कहा, 'हमने गोमती नदी को गहरा करके उसमें जहाज चलाने का फैसला किया है। यहां की सरकार ने डिजिटल टेक्नॉलजी के माध्यम से लोगों का जीवन आसान बनाने का काम किया है। इंटरनेट से जनता को सुविधाएं देने का काम तेज गति से चल रहा है।'