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इंजीनियर फिरोज शेख ने प्लेन में गुप्तांग निकाल बगल में बैठी महिला टीचर को दिखाया, हिलाने लगा…

                                                                                                                                 प्रतीकात्मक
अपने पिता के अंतिम संस्कार के लिए पुणे से नागपुर जा रही 40 साल की एक महिला शिक्षक से फ्लाइट में छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। महिला की शिकायत पर नागपुर की सोनेगाँव पुलिस ने 32 साल के फिरोज शेख नूर मोहम्मद शेख को गिरफ्तार किया है। वह पेशे से इंजीनियर है।

रिपोर्ट के अनुसार फिरोज शेख पीड़ित महिला की बगल की सीट पर बैठा और अपने गुप्तांग हिला रहा था। शुरुआत में महिला ने उसकी हरकत को नजरंदाज कर दिया, क्योंकि उन्हें लगा कि वह खुजली कर रहा है। यह घटना 9 अक्टूबर 2023 की है। विमान लैंड करने के बाद एयरपोर्ट से शेख को गिरफ्तार किया गया। फिरोज शेख पुणे के कोंढवा का रहने वाला है और अगले महीने उसकी निकाह होनी है। पुलिस के मुताबिक पीड़ित महिला चंद्रपुर की रहने वाली है और पिता के अंतिम संस्कार के लिए नागपुर आ रही थी।

पुलिस के मुताबिक पीड़ित महिला चंद्रपुर की रहने वाली है और पिता के अंतिम संस्कार के लिए नागपुर आ रही थी। पीड़ित महिला ने पुलिस को बताया कि पहले तो उन्हें लगा कि आरोपित खुजली रहा है। ये सोचकर उन्होंने उसकी हरकत को नजरअंदाज कर दिया। लेकिन जब उसने ऐसा करना जारी रखा और अश्लील तरीके से उन्हें केहुनी मारते हुए इशारा किया तब वह भौंचक रह गईं।

 पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि विमान के नागपुर हवाई अड्डे पर लैंड करने के बाद महिला ने आरोपित की शिकायत की। शेख पर यौन उत्पीड़न समेत IPC की कई धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इनमें आईपीसी की धारा 354 (स्त्री की लज्जा भंग करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग), 354ए (यौन उत्पीड़न) और 509 (आपराधिक इरादे से छूकर महिला की लज्जा भंग करने की कोशिश) शामिल हैं।

अधिकारी ने बताया कि फ्लाइट में सवार केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के एक जवान ने महिला से छेड़खानी के दौरान आरोपित फिरोज शेख को रोका था। पीड़ित महिला केबिन क्रू को बुलाना चाहती थी, लेकिन तब तक फ्लाइट लैंड हो चुकी था। जैसे ही प्लेन के दरवाजे खुले कथित तौर पर शेख ने पीछे के निकास की तरफ से भागने की कोशिश की। कथित तौर पर शेख ने ​एयरपोर्ट पर विमान की लैंडिंग के समय भी अश्लील हरकत की थी।

NCP में क्या खिचड़ी पक रही है?: 24 घंटे में 2 बार मिले पवार चाचा-भतीजा

NCP का बागी गुट लगातार पार्टी के संस्थापक शरद पवार को मनाने में लगा हुआ है। महाराष्ट्र की राजनीति में तब नया मोड़ आ गया था, जब 40 विधायकों का समर्थन लेकर नेता प्रतिपक्ष अजित पवार ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की सरकार में शामिल होने का निर्णय लिया और राज्य के उप-मुख्यमंत्री बने। उनके कोटे से कुल 9 मंत्रियों ने शपथ ली। अब मुंबई स्थित YB चव्हाण सेंटर में लगातार दूसरे दिन अजित पवार अपने चाचा को मनाने के लिए पहुँचे।

उनके साथ राज्यसभा सांसद प्रफुल्ल पटेल और और सुनील तटकरे भी थे। बागी नेताओं ने शरद पवार से अनुरोध किया कि वो NCP को एक रखें। प्रफुल्ल पटेल ने बताया कि शरद पवार ने सबकी बातें सुनी, लेकिन कुछ कहा नहीं। एक दिन पहले भी ये बागी नेता इसी जगह पर शरद पवार से मिलने पहुँचे थे, उस दौरान भी उन्होंने कुछ प्रतिक्रिया नहीं दी थी। अब फिर से लगातार दूसरे दिन भी मुलाकात हुई है। अब तक शरद पवार ने इस पर कोई बयान नहीं दिया है।

ये नेता शरद पवार को इस बात के लिए मनाने के लगे हुए हैं कि वो महाराष्ट्र में भाजपा, शिवसेना (बालासाहेब ठाकरे) और NCP की सरकार को समर्थन दें, लेकिन वो मानने के लिए तैयार नहीं हैं। उधर शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि विश्वासघात करने वालों के लिए पार्टी के दरवाजे नहीं खुलने चाहिए। शरद पवार मंगलवार (18 जुलाई, 2023) को विपक्षी दलों की बैठक में जाएँगे, ऐसा बताया जा रहा है। लेकिन, वो आज के विपक्षी डिनर में शामिल नहीं होंगे।

ये भी सामने आया है कि अजित पवार के साथ 30 विधायक भी थे जिन्होंने शरद पवार से मुलाकात की। प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि शरद पवार ने उनलोगों की बातों को गंभीरता से सुना, लेकिन पता नहीं उनके दिमाग में क्या चल रहा है। असल में बागी विधायक चाहते हैं कि सीनियर पवार का आशीर्वाद उनके ऊपर बना रहे, क्योंकि महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों का एक बड़ा वर्ग शरद पवार का वोट बैंक रहा है। प्रफुल्ल पटेल और अजित पवार मंगलवार (18 जुलाई, 2023) को NDA की बैठक में मौजूद रहेंगे।


दाल में कुछ काला : अचानक शरद पवार से मिलने पहुँचे अजित समेत NCP के बागी नेता

 YB चव्हाण सेंटर में शरद पवार से मिले अजित पवार, प्रफुल्ल पटेल और छगन भुजबल समेत NCP के अन्य बागी नेता (फोटो साभार: ANI/फेसबुक)
महाराष्ट्र की राजनीति लगातार दिलचस्प होती जा रही है। NCP के दो फाड़ होने के बाद अब अजित पवार अपने चाचा शरद राव पवार से मिलने पहुँचे। इतना ही नहीं, उनके साथ वो बागी विधायक भी थे जिन्होंने NCP के 2 फाड़ करने में उनकी मदद की। अजित पवार ने कई विधायकों-सांसदों के साथ NDA सरकार को समर्थन करने का फैसला लिया था, जिसके बाद वो राज्य के उप-मुख्यमंत्री बने। उन्हें वित्त मंत्रालय भी दिया गया। शरद पवार द्वारा अपनी बेटी सुप्रिया सुले को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद ये प्रकरण हुआ।

हाल ही में अजित पवार अपने चाचा के घर पहुँचे थे। बताया गया था कि बीमार चाची को देखने के लिए वो गए हैं। अब महाराष्ट्र के YB चव्हाण सेंटर में उन्होंने वरिष्ठ नेताओं सांसद प्रफुल्ल पटेल और मंत्री छगन भुजबल के साथ शरद पवार से मुलाकात की। प्रफुल्ल पटेल ने इसके बाद कहा कि आज हम सब अपने नेता से मिलने आए हैं और हमने उनसे आशीर्वाद माँगा। उन्होंने कहा कि हमने इच्छा जताई कि ‘राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी’ एकजुट रहे और मिलजुल कर सभी नेता काम करें।

उन्होंने कहा कि हम सब नेताओं ने शरद पवार के समक्ष इच्छा जताई कि NCP मजबूती से काम करे। इन नेताओं ने शरद पवार से आग्रह किया कि वो इस दिशा में विचार करें। प्रफुल्ल पटेल ने बताया कि शरद पवार ने उन सबकी बातों को ध्यान से सुना, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। प्रफुल पटेल ने कहा कि हम सबकी नजर इस पर है कि शरद पवार क्या भूमिका निभाएँगे। विधानसभा के मॉनसून सत्र से पहले अजित पवार गुट के मंत्रियों मंत्रियों की बैठक भी उप-मुख्यमंत्री के आवास पर ही हुई।

प्रफुल्ल पटेल ने बताया कि इसी बैठक के दौरान उन्हें शरद पवार के YB चव्हाण सेंटर में उपस्थित होने की सूचना मिली थी, जिसके बाद वो उन्हें सूचित किए बिना यहाँ पहुँचे और उन्हें प्रणाम कर के आशीर्वाद लिया। उन्होंने शरद पवार को अपना भगवान भी बताया। 5 जुलाई को शरद पवार की बैठक में शामिल न होने वाले विधायकों को नोटिस जारी किया गया है। उस दिन ये सभी नेता अजित पवार की बैठक में मौजूद थे। 1999 में स्थापित NCP के 40 विधायकों ने अजित पवार का समर्थन किया है।

महाराष्ट्र : ISIS के स्लीपर सेल का पर्दाफाश, भारत के खिलाफ जेहाद के लिए युवाओं को बम बनाने और हथियारों की दे रहे थे ट्रेनिंग

महाराष्ट्र में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) के स्लीपर सेल का पर्दाफाश राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने किया है। राज्य के अलग-अलग शहरों में छापेमारी कर चार आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है। भारत के खिलाफ जेहाद के लिए युवाओं को बम बनाने और हथियारों की ट्रेनिंग देने की बात भी सामने आई है।

NIA ने सोमवार (3 जुलाई 2023) को महाराष्ट्र के 5 जगहों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनके नाम ज़ुबैर नूर, ज़ुल्फ़िकार अली, शरजील शेख और मोहम्मद शेख उर्फ़ अबू नुसैबा हैं। इनके पास से आपत्तिजनक दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स बरामद हुए हैं। इनसे पूछताछ की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 28 जून को NIA ने ISIS के महाराष्ट्र मॉड्यूल को लेकर केस दर्ज किया था। इसी सिलसिले में सोमवार को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने ख़ुफ़िया सूचना के आधार पर मुंबई, ठाणे और पुणे के कुल 5 अलग-अलग जगहों पर दबिश दी। इस छापेमारी में दक्षिण मुंबई के नागपाड़ा से ताबिश नासिर सिद्दीकी, पुणे के कोंढवा इलाके से जुबैर नूर मोहम्मद शेख उर्फ अबू नुसैबा के अलावा ठाणे के पडघा से जुल्फिकार अली बड़ौदावाला और शरजील शेख को गिरफ्तार किया गया।

जाँच दल द्वारा इन सभी के घरों की तलाशी भी ली गई। तलाशी के दौरान ISIS से संबंधित भड़काऊ दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट्स मिले हैं। NIA की टीम इन दस्तावेजों को जब्त कर जाँच कर रही है। मीडिया को दिए गए अपने बयान में NIA ने बताया है कि शुरुआती पड़ताल में जब्त दस्तावेज भारत विरोधी और युवाओं को कट्टरपंथी बनाने से संबंधित पाए गए हैं।

जाँच एजेंसी ने इन सभी की हरकतों को भारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा और सम्प्रभुता के लिए खतरा बताया है। इन सभी पर देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश का आरोप है। आरोपित स्लीपर सेल तैयार कर रहे थे। युवाओं को कट्टरता का पाठ पढ़ाने के अलावा विस्फोटक उपकरणों और हथियारों को बनाने की ट्रेनिंग देने का भी आरोप है। बरामद हुए दस्तावेजों में इन चारों द्वारा आईईडी बनाने के साथ छोटे हथियारों और पिस्तौल बनाने के लिए ‘डू इट योरसेल्फ (डीआईवाई)’ किट साझा करने का खुलासा हुआ है।

गिरफ्तार हुए चारों आरोपित विदेश में बैठे किसी आका से निर्देश ले रहे थे। वहीं से मिले आदेश पर इन सभी ने भड़काऊ मीडिया सामग्री तैयार कर ‘वॉयस ऑफ हिंद’ नाम की पत्रिका में प्रकाशित करवाया था।


‘NCP का सिंबल-नाम सब हमारा, सारे विधायक मेरे साथ’: डिप्टी CM बनने के बाद बोले अजित पवार

महाराष्ट्र की राजनीति की तस्वीर ही रविवार (2 जुलाई, 2023) को तब बदल गई, जब नेता प्रतिपक्ष अजित पवार ने कई विधायकों समेत सरकार में शामिल होने का फैसला लिया। उन्होंने उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके साथ-साथ छगन भुजबल और प्रफुल्ल पटेल जैसे पार्टी के वरिष्ठ नेता भी हैं। प्रफुल्ल पटेल तो NCP के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। धनंजय मुंडे और दिलीप वालसे पाटिल जैसे शरद पवार के करीबी नेता भी अब भतीजे अजित के साथ हैं।

महाराष्ट्र में शिवसेना के बाद अब NCP टूट गई है। पार्टी के संस्थापक शरद पवार के भतीजे और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे अजित पवार अब महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री बन गए हैं। इतना ही नहीं, उनके साथ-साथ छगन भुजबल, धनंजय मुंडे, दिलीप वालसे पाटिल और अनिल पाटिल जैसे शरद पवार के करीबी भी मंत्री बनाए गए हैं। यहाँ तक कि प्रफुल्ल पटेल, जिन्हें शरद पवार ने अपनी बेटी सुप्रिया सुले के साथ पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया था – वो भी उनका साथ छोड़ कर इस शपथग्रहण समारोह में मौजूद रहे।

माना NCP के टूटते ही विपक्ष गठबंधन को झटका जरूर लगा, लेकिन प्रश्न गर्मा है कि 'क्या अजित पवार, छगन भुजबल प्रफुल्ल पटेल आदि जो भ्रष्टाचार में लिप्त हैं, क्या भ्रष्टाचार-मुक्त हो गए हैं या कानूनी कार्यवाही होगी? दूसरे, अजित आदि के सत्ता में आने से संभावनाएं व्यक्त की जा रही है कि सबूतों को प्रभावित कर पवित्र सिद्ध हो सकते हैं। 

दूसरी ओर यह अटकलें जोरों पर है कि महाराष्ट्र में बीजेपी को कमजोर करने का भी षड्यंत्र हो सकता है, क्योकि चुनावों में NCP के साथ आने पर बीजेपी को शिव सेना के साथ-साथ इस पार्टी के लिए भी सीटें छोड़ने को मजबूर होना पड़ेगा। 

NCP के वरिष्ठ नेताओं छगन भुजबल और प्रफुल्ल पटेल के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अजित पवार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले 9 वर्षों से विकास के लिए कार्य कर रहे हैं, और विकास को महत्व देना बहुत ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि इस विकास यात्रा में भागीदारी की इच्छा के कारण ही वो राजग का हिस्सा बनना चाहते थे। उन्होंने कहा कि 1984 के बाद कोई ऐसा नेता नहीं हुआ जिसके नेतृत्व में देश आगे गया। उन्होंने इसका भी जिक्र किया कि विदेश में पीएम मोदी का कैसे सम्मान हो रहा है।

साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि विपक्ष में उन्हें ऐसा कोई नेतृत्व नहीं दिखता है। उन्होंने विपक्षी एकता के प्रयासों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष बिखरा हुआ है और ये लोग आपस में ही लड़ रहे हैं। अजित पवार ने NCP के नाम और सिंबल पर भी दावा कर दिया है। उन्होंने कहा कि लगभग सभी विधायक उनके पास पहुँच रहे हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि नागालैंड के भी 7 NCP विधायक ने भाजपा के साथ जाने का निर्णय लिया था। छगन भुजबल ने भी साफ़ किया कि उनलोगों ने कोई नई पार्टी नहीं बनाई है, वो NCP ही हैं।

नए-नवेले मंत्री भुजबल ने कहा कि शरद पवार खुद कह चुके हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीसरी बार सत्ता में लौट रहे हैं और उन लोगों ने उनके इच्छानुरूप ही काम किया है। उधर शरद पवार ने बागियों पर कार्रवाई की बात करते हुए कहा कि वो फिर से पार्टी खड़ा कर के दिखाएँगे। उन्होंने जितेंद्र अव्हाड को नेता प्रतिपक्ष नियुक्त करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि पार्टी का प्रमुख चेहरा अब भी वही हैं। उन्होंने कहा कि ये कोई नई बार नहीं है। साथ ही ED के डर से लोगों के भाजपा के साथ जाने की बात भी कही।

जिसे ‘चाणक्य’ बता कर ढोल पीट रही थी मीडिया, उसका उद्धव ठाकरे से भी बुरा हाल

थोड़ा सा पीछे चलते हैं। मई 2023 की शुरुआत में शरद पवार ने जब राष्ट्रवादी काॅन्ग्रेस (NCP) का अध्यक्ष पद छोड़ने की घोषणा की तो मीडिया ने इसे ‘मास्टरस्ट्रोक’ बताया । जब जून में उन्होंने बेटी सुप्रिया सुले और प्रफुल्ल पटेल को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया तो इसमें भी मीडिया ने उनका ‘राजनीतिक कौशल’ देखा। कहा गया कि उन्होंने एनसीपी का भविष्य तय कर दिया है और भतीजे अजित पवार को भी उनकी राजनीतिक हैसियत समझा दी है। लेकिन, जुलाई की 2 तारीख आते-आते शरद पवार के मास्टर स्ट्रोक की बत्ती बन चुकी है।

राजनीतिक कौशल का पता नहीं, उनके खुद के राजनीतिक भविष्य पर संकट खडे हो गए हैं। महाराष्ट्र में विधानसभा में करीब-करीब एनसीपी साफ हो गई है। 53 विधायकों वाली पार्टी के ज्यादातर विधायक और अधिकतर बड़े नेता अजित पवार के साथ जा चुके हैं। 82 वर्षीय शरद पवार अब उस अवस्था में भी नहीं रहे कि सक्रियता दिखा कर अपने खेमे को गोलबंद करें और अपनी बेटी के नेतृत्व में काम करने के लिए मनाएँ। कुल मिला कर सुप्रिया सुले को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के साथ ही पतन शुरू हो गया था।

यानी, मीडिया और राजनीतिक विश्लेषक जिन फैसलों को ‘मास्टरस्ट्रोक’ बता रहे थे, वही एनसीपी के पतन का कारण बनी। NCP में शरद पवार के बाद अजित ही पार्टी के प्रबंधन से लेकर नेताओं को एकजुट रखने का काम अब तक देखते रहे हैं। ये चौथी बार है, जब अजित पवार राज्य के डिप्टी CM बने हैं। शरद पवार की पार्टी का भी वही हाल हुआ है, जो शिवसेना का हुआ था। आइए, पूरे खेल को समझने के लिए थोड़ा पीछे चलते हैं क्योंकि हमें 2019 विधानसभा चुनाव को समझना पड़ेगा।

2014-19 तक महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में भाजपा-शिवसेना गठबंधन की सरकार चली। तनातनी की खबरें आती रहीं, लेकिन सरकार पर कोई संकट नहीं आया। 2019 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में गठबंधन के तहत भाजपा ने 152 और शिवसेना ने 124 सीटों पर चुनाव लड़ा। भाजपा ने 105 और शिवसेना ने 56 सीटें प्राप्त की। इसके बाद शिवसेना का ड्रामा शुरू हुआ। पार्टी ने देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व को नकारते हुए अपनी पार्टी से CM बनाने की माँग रख दी।

पार्टी मुखपत्र ‘सामना’ के एग्जीक्यूटिव एडिटर और राज्यसभा सांसद संजय राउत जैसे नेताओं ने उलूल-जलूल बयान देने शुरू कर दिए और कहने लगे कि अगला सीएम शिवसेना से होगा। भाजपा ने मनाने की लाख कोशिश की, लेकिन उद्धव ठाकरे टस से मस नहीं हुए। पार्टी ने अपने विधायकों को बांद्रा में समुद्र किनारे स्थित रंग शारदा होटल में रखा, फिर उन्हें दूर मड आइलैंड्स में रखा। बड़ी बात ये है कि उस समय इन सबमें बढ़-चढ़ कर भूमिका निभा रहे एकनाथ शिंदे और रामदास कदम जैसे नेता अब भाजपा गठबंधन के साथ हैं।

खैर, किसी तरह शरद पवार ने डील फाइनल की और कॉन्ग्रेस-शिवसेना को एक साथ लेकर आए और राज्य में NCP के साथ मिल कर इन दोनों दलों ने ‘महा विकास अघाड़ी (MVA)’ की गठबंधन सरकार बनाई। लेकिन, उससे पहले जो हुआ वो चौंकाने वाला था। राष्ट्रपति शासन लग चुका था। अचानक से अजित पवार ने तड़के सुबह भाजपा का साथ देते हुए डिप्टी CM की शपथ ले ली। देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बने, लेखों ये सरकार मात्र 3 दिनों तक चल सकी। अजित पवार वापस चाचा के खेमे में चले गए।

सरकार गिर गई और उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाया गया। अजित पवार इस सरकार में भी उप-मुख्यमंत्री बने। लेकिन, इस दौरान मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों ने शरद पवार का जो महिमामंडन किया, वो देखने लायक था। जिस व्यक्ति ने आज तक कभी मुख्यमंत्री का 5 साल का पूरा कार्यकाल नहीं चलाया, जिसकी पार्टी को कभी राज्य में बहुमत मिला ही नहीं, उसकी तुलना अमित शाह से की जाने लगी। अमित शाह, जो उस समय भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे।

हालाँकि, उद्धव ठाकरे की सरकार ढाई साल चली और जून 2022 में एकनाथ शिंदे सहित कई बड़े नेताओं ने बगावत कर दिया। अंततः एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बने और शिवसेना टूट गई। उद्धव ठाकरे की एक जिद ने 40 विधायकों और 13 सांसदों को उनसे दूर कर दिया। ढाई साल बाद ही सही, शिवसेना टूटी और उद्धव ठाकरे के साथ रह गए प्रियंका चतुर्वेदी और संजय राउत। एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बने। आज उद्धव ठाकरे के साथ जो संख्या है, 2024 लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बाद वो और घट जाएगी।

शिवसेना के टूटने के एक साल बाद अब एनसीपी टूटी है। ये सबक है उन्हें, जो शरद पवार को चाणक्य बताते नहीं थक रहे थे और अमित शाह का मजाक बना रहे थे। मराठी पत्रकार निखिल वागले ने भी शरद पवार को चाणक्य बताया। इसी तरह से तमाम पत्रकारों और भाजपा विरोधी गिरोह ने उन्हें ‘चाणक्य’ बता कर पेश किया। शिवसेना का मुख्यमंत्री तो भाजपा भी चाहती तो बना सकती थी, शरद पवार ने किसी NCP नेता को तो सीएम बनाया नहीं, लेकिन उनकी तारीफों के पुल बाँधे जाने लगे।

बात यही है कि जिस तरह बालासाहब ठाकरे के पुत्रमोह ने शिवसेना को डूबा दिया, ठीक उसी तरह शरद पवार के पुत्रीमोह NCP को खा गया। सुप्रिया सुले अपने पिता के गढ़ बारामती से सांसद हैं, जहाँ से शरद पवार भी 6 बार जीत चुके हैं। 1991 में अजित पवार भी यहाँ से सांसद बन चुके हैं। अजित पवार लंबे समय से राजनीति में सक्रिय हैं और उन्होंने लगातार 7वीं बार बारामती से जीत दर्ज की है। उनके पास अलग-अलग सरकारों में कई मंत्रालयों को सँभालने का अनुभव है और संगठन का भी।

अनुभव हो या राजनीतिक दक्षता, किसी भी क्षेत्र में सुप्रिया सुले अपने बड़े भाई अजित पवार के सामने नहीं टिकतीं। इसके बावजूद शरद पवार ने अपनी बेटी को अपना उत्तराधिकारी बनाया, और मीडिया ने इसे ‘मास्टरस्ट्रोक’ बता दिया। कहा तो ये जाना चाहिए था कि शरद पवार अपने ही परिवार को नहीं सँभाल पा रहे हैं। लेकिन, ‘द इकोनॉमिक टाइम्स’ जैसे मीडिया संस्थानों में अंग्रेजी में लंबा-चौड़ा ओपिनियन लिख कर उन्हें विजेता घोषित कर दिया गया।

शरद पवार की सबसे बड़ी महत्वाकांक्षा तो प्रधानमंत्री और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष बनने की थी, इसके लिए उन्हें हाथ-पाँव भी मारा। लेकिन, 90 के दशक में अपनी सक्रियता के दौरान भी वो इसमें विफल रहे। उन्हें राष्ट्रपति तक बनाए जाने की बातें चलीं, लेकिन वो भी नहीं हो पाया। अब स्थिति ये हो गई है कि मीडिया ने जिसे ‘चाणक्य’ बता कर पेश किया, वो न अपना पार्टी बचा पाया और न परिवार। अगले चुनाव में उनका और उद्धव का पूरी तरह पत्ता साफ़ होता दिख रहा है।

वैसे अब आश्चर्य न हो कि कल को शरद पवार को ‘चाणक्य’ बता कर उनका महिमामंडन करने वाले अब ये कहने लगें कि ED/CBI जैसी केंद्रीय जाँच एजेंसियों के डर से ये सब हो रहा है। अब बोलने के लिए कुछ बचा ही नहीं, तो चुनाव बाद EVM का रोना की तरह इस तरह का नया क्रंदन भी शुरू हो सकता है। शरद पवार की पार्टी और परिवार, दोनों टूट चुके हैं। उनका समर्थन करने वाले अब नया रोना क्या निकालते हैं, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।

गर्म बर्तनों से दागा, पिता का पेशाब पिलायाः अपनी ही माँ पर घोर अत्याचार करता था ‘द वायर’ का स्तंभकार रहा इनायत परदेशी

                                 इनायत और उसकी माँ सरोज कांबले (साभार: महाराष्ट्र टाइम्स)
मार्क्सवादी नेता रंजीत परदेशी की मार्क्सवादी पत्नी सरोज कांबले का 5 जून 2023 को महाराष्ट्र के धुले में उनके आवास पर निधन हो गया था। इस बीच 22 जून 2023 को यह पता चला कि उनके बेटे इनायत रंजीत परदेशी ने कथित तौर पर उन्हें पीट-पीटकर मार डाला था।

इनायत रंजीत परदेशी एक कम्युनिस्ट लेखक हैं, जो ‘द इंडी जर्नल’ और अब बंद हो चुके ‘द वायर मराठी’ सहित विभिन्न वामपंथी प्रचार पोर्टलों के लिए लिखते हैं। इनायत परदेशी द्वारा लिखे गए कुछ लेखों के वेब संग्रह लिंक आप यहाँ देख सकते हैं।

वायर मराठी में इनायत परदेशी के लेख, अर्काइव वर्जन

धुले में रहने वाली सरोज कांबले का 5 जून 2023 को उनके आवास पर निधन हो गया था। वह धुले में 80 फुट रोड के पास काजी प्लॉट इलाके में अपने पति रंजीत परदेशी और अपने बेटे इनायत के साथ रहती थीं। सरोज कांबले पंजाब नेशनल बैंक में कार्यरत थीं।

अगर उनके पति रंजीत प्रदेश की बात करें तो वह एक यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर थे। पति-पत्नी दोनों, पाँच साल पहले ही सेवानिवृत्त हुए थे। दुर्भाग्य से रंजीत परदेशी विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के कारण बिस्तर पर हैं।

इसी दौरान मार्क्सवादी दंपत्ति के बेटे इनायत को पता चला कि उनकी माँ दोबारा शादी करने की योजना बना रही हैं। इनायत परदेशी को अपनी माँ के चरित्र पर संदेह होने लगा। इनायत परदेशी ने यह सोचकर अपनी माँ को परेशान करना शुरू कर दिया कि अगर वह दोबारा शादी करेगी तो शायद उसे पूरी संपत्ति विरासत में नहीं मिलेगी। 5 जून 2023 को इनायत ने कथित तौर पर उन पर हमला कर दिया।

इनायत परदेशी ने कश्मीर फाइल्स फिल्म पर वायर मराठी में लेख लिखा था और इसे फेसबुक पर शेयर किया था (उसका स्क्रीनशॉट)

सरोज कांबले और रंजीत परदेशी के सेवानिवृत्त होने के बाद इनायत परदेशी ने उनकी देखभाल की जिम्मेदारी ली, क्योंकि घर का खर्च मार्क्सवादी दंपति को मिलने वाली पेंशन से चलता था। हालाँकि, इनायत परदेशी तब व्यथित हो गए जब उन्हें एहसास हुआ कि उनके माता-पिता की संपत्ति उन्हें नहीं दी जाएगी। संपत्ति के स्वामित्व की माँग करते हुए उन्होंने अपनी माँ से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने इनायत की माँगों को मानने से इनकार कर दिया।

माँ द्वारा इनकार करने के बाद इनायत परदेशी ने उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया। यह उत्पीड़न तीन महीने तक जारी रहा, जब तक कि सरोज कांबले इससे तंग नहीं आ गईं। अप्रैल में सरोज ने कल्याण में रहने वाली अपनी बहन सुधा काटकर के घर में शरण ली। पीड़ा से बचने के लिए सरोज ने पूरा महीना वहीं बिताया।

इधर, इनायत परदेशी की क्रूरता की कोई सीमा नहीं थी। वह कल्याण गया और अपनी माँ को परेशान करना जारी रखा। परिणामस्वरूप, सरोज कांबले धुले में अपने घर लौट आईं। धुले में भी इनायत अपनी माँ पर अमानवीय अत्याचार करता रहा। वह अक्सर उस पर शारीरिक हमला करता था। उन्हें थप्पड़ मारता था और भयानक चोटें पहुँचाता था।

                          इनायत परदेशी की माँ की चोट वाली फोटो (साभार: newstown.in)
यह पाया गया कि सरोज कांबले की मृत्यु स्वाभाविक नहीं थी और उनके बेटे इनायत रंजीत परदेशी ने उन्हें प्रताड़ित किया था। 17 जून 2023 को धुले शहर की आज़ाद नगर पुलिस ने 12 दिनों के बाद इनायत परदेशी के खिलाफ IPC की धारा 304 के तहत गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया। यह शिकायत सरोज कांबले की बहन सुधा काटकर ने दर्ज कराई थी।
                                       सरोज कांबले की पीठ पर चोट के निशान

आजाद नगर पुलिस स्टेशन में दी गई अपनी शिकायत में सुधा ने कहा कि इनायत जानता था कि सरोज कांबले एक बुजुर्ग महिला हैं और अगर उसे पीटा गया तो उसकी मृत्यु हो सकती है। इसके बावजूद इनायत ने अपनी माँ को बार-बार लात और घूंसों से पीटा। उन्होंने कहा कि सरोज कांबले की मौत के लिए इनायत परदेशी जिम्मेदार है।

इनायत परदेशी ने यह दिखाने की कोशिश की थी कि उसकी माँ की मौत स्वाभाविक है। उसे अपनी माँ के शव का अंतिम संस्कार ख़त्म करने की भी जल्दी थी। हालाँकि, वहाँ मौजूद कुछ कार्यकर्ताओं ने सरोज कांबले की मौत पर संदेह जताया और इसे अप्राकृतिक मौत बताया। इसके बाद इन लोगों ने पुलिस को सूचित किया।

इसके बाद पुलिस सरोज कांबले का शव पोस्टमार्टम के लिए ले जाने लगी। हालाँकि, इनायत परदेशी अपनी माँ के शव के पोस्टमार्टम का विरोध कर रहे थे। ऐसे में पुलिस ने सरोज कांबले के शव को शवगृह से जबरन नीचे उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनायत परदेशी ने रसोई घर में बर्तन को गर्म करता था और उससे अपनी माँ की त्वचा को जला देता था। वह अपने अपाहिज पिता रंजीत परदेशी का मूत्र पीने के लिए भी मजबूर करता था। जब सरोज कांबले की रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हो गई तो धुले के नटराज टॉकीज के सामने काजी प्लॉट स्थित अपने घर में अपने पिता के साथ मौजूद था।

इनायत ने कथित तौर पर सरोज कांबले की मौत से पहले और बाद में अपने मोबाइल फोन पर कई लोगों से संपर्क किया था। इसलिए, इनायत परदेशी का मोबाइल सीडीआर इस समग्र मामले में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है। इस बीच गंभीर बीमारी से ग्रस्त रंजीत परदेशी को 22 जून 2023 को इलाज के लिए नासिक में भर्ती कराया गया है।

इनायत परदेशी ने 14 जून 2023 को अपने पिता रंजीत परदेशी के साथ धुले छोड़ दिया था। उसे आशंका हो गई थी कि उसके खिलाफ किसी भी समय मामला दर्ज किया जा सकता है और उसे गिरफ्तार किया जा सकता है। उसने बिना किसी को बताए मालेगाँव चला गया। बाद में पता चला कि इनायत परदेशी अपने मामा के पास गया था।

मामला दर्ज होने के बाद धुले पुलिस ने इनायत का पता लगाने के लिए दो टीमें बनाईं। इन टीमों को नासिक और मालेगाँव भेजा गया। हालाँकि, इनायत पुलिस की पकड़ से बचने में कामयाब रहा। बुधवार दोपहर (21 जून 2023) को इनायत परदेशी ने धुले के आज़ाद नगर पुलिस स्टेशन में आत्मसमर्पण कर दिया।

आत्मसमर्पण के बाद आजाद नगर थाने की पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने शाम तक उसकी मेडिकल जाँच कराई और अन्य कानूनी प्रक्रियाएँ पूरी कीं। उसके बाद गुरुवार (22 जून 2023) को उसे धुले की एक अदालत में पेश किया गया।

इनायत परदेशी एक कम्युनिस्ट लेखिक है। उसने वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टलों के लिए लिखा है। जब ‘द वायर मराठी’ काम कर रहा था, तब वह इसके लिए लिखता था। द वायर मराठी अक्टूबर 2022 में बंद हो गया। इनायत परदेशी मराठी वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल द इंडी जर्नल के लिए भी लिखता है।

इनायत तथाकथित ब्राह्मणवादी पितृसत्ता के ख़िलाफ़ अपने विचारों के लिए जाना जाता था। उसने अपने फेसबुक अकाउंट पर कई ऐसी तस्वीरें भी पोस्ट की थीं, जिनमें वह अपनी माँ के साथ नजर आ रहा है। उसने एक फोटो के कैप्शन में लिखा- ‘माँ मेरी जन्नत है’।

वीर सावरकर के नाम से जाना जाएगा बांद्रा-वर्सोवा समुद्र सेतु: एकनाथ शिंदे का ऐलान, बोले – स्वातंत्र्य वीर से भयभीत हैं कुछ लोग, बंद हो सकती है उनकी दुकानें

वीर सावरकर की जयंती पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उनके नाम पर पुरस्कार दिए जाने का भी किया ऐलान
स्वातन्त्र्य वीर सावरकर की जयंती पर महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा है कि बांद्रा-वर्सोवा सी लिंक ब्रिज का नाम वीर सावरकर के नाम पर होगा। इसके अलावा उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वालों को वीर सावरकर वीरता पुरस्कार दिए जाने का भी ऐलान किया।

दरअसल, रविवार (28 मई, 2023) को पूरा देश वीर सावरकर की 140वीं जयंती मना रहा था। इस अवसर पर मीडिया से बात करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा, “वीर सावरकर जयंती को सरकार ‘वीर सावरकर गौरव दिवस’ के रूप में मना रही है। सरकार ने बांद्रा-वर्सोवा सी लिंक का नाम बदलकर ‘स्वातंत्र्यवीर सावरकर बांद्रा-वर्सोवा समुद्र सेतु’ करने का फैसला किया है। अलग-अलग क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले लोगों को वीर सावरकर वीरता पुरस्कार देने का भी फैसला किया गया है।”

वहीं, इससे पहले दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए मुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि कुछ लोग सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए जानबूझकर वीर सावरकर का नाम बदनाम कर रहे हैं। ऐसे लोगों को डर सता रहा है यदि सावरकर के विचार समाज में लोकप्रिय हो गए, तो उनकी दुकान बंद हो जाएगी। अंदाजा लगाइए कि ये लोग कितना अधिक भयभीत हैं। सावरकर के निधन के 57 साल बाद भी वे उनका विरोध करते जा रहे हैं।

बांद्रा-वर्सोवा सी लिंक ब्रिज का नाम वीर सावरकर के नाम पर रखे जाने पर महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सीएम शिंदे के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। साथ ही फडणवीस कहा है कि उन्होंने पत्र लिखकर इस बारे में माँग भी की थी।

देवेंद्र फडणवीस ने ट्वीट कर कहा “स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर की जयंती के अवसर पर मुंबई में बांद्रा-वर्सोवा ब्रिज का नामकरण ‘स्वातंत्र्यवीर सावरकर बांद्रा-वर्सोवा समुद्र सेतु’ करने की घोषणा करने के लिए मैं मुख्यमंत्री एकनाथराव शिंदे का हृदय से आभारी हूँ। 16 मार्च 2023 को मैंने पत्र के माध्यम से इस संबंध में माँग की थी।  हमारे महापुरुषों के कार्यों को नई पीढ़ी याद करती रहेगी और आने वाले कल के सशक्त भारत के लिए गौरवशाली पीढ़ियों का निर्माण करेगी।”

The Kerala Story देखने जा रहे दर्शकों को Free में ले जाने वाले साधु मगर ऑटो ड्राइवर को मिल रही सर तन से जुदा और कन्हैयालाल जैसा करने की धमकी

                              'द केरल स्टोरी' देखने वालों को फ्री में ले जाने वाले ऑटो ड्राइवर को धमकियाँ
आखिर सरकार इस 'सर से तन जुदा' करने वाले गैंग और इसको समर्थन देने वालों पर कब सख्ती से पेश आएगी? क्यों नहीं इन्हें परिवार सहित किसी भी सरकारी सुविधा से हमेशा के लिए वंचित किया जाता? आखिर कब तक ये जेहादी देश में डर का आतंक फैलाते रहेंगे? फिर इनके समर्थक कहते हैं कि 'मुसलमान डरा हुआ है' जब डरे होने पर जेहादी हरकत है, भयमुक्त होने पर कितना आतंक मचाएंगे? सरकार को केवल इस गैंग ही नहीं, इनके समर्थकों के साथ भी उसी सख्ती से पेश आना होगा। क्योकि बिना किसी समर्थन के इस तरह की जेहादी हरकत नहीं हो सकती। इन्ही की भाषा कि देश संविधान से चलेगा, इन्हे सख्ती से बताना होगा कि संविधान क्या कहता है। देश को पाकिस्तानी आतंकियों से कम घर में ही पल रहे इन जेहादियों/आतंकियों और इनके समर्थकों से अधिक खतरा है। जनता को इन जेहादियों और इनके समर्थकों पर कार्यवाही करने के लिए निचली अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट, राज्य और केंद्र सरकारों को मजबूर करने के लिए सडकों पर आना होगा, क्योकि जब तक सरकारें सख्त नहीं होंगीं, पुलिस भी लाचार रहेगी। इस खतरनाक साज़िश को बेनकाब करने के लिए पुलिस को कोर्ट और सरकारों का  संरक्षण जरुरी है। 

महाराष्ट्र के पुणे में ‘द केरल स्टोरी’ (The Kerala Story) फिल्म देखने जाने वालों से किराया न लेने का ऐलान करने वाले ऑटो ड्राइवर को मौत की धमकियाँ मिलने लगी हैं। पीड़ित का नाम साधु मगर है, जिनका सिर तन से जुदा करने का ऐलान कट्टरपंथी करने लगे हैं। आरोप है कि मैसेज और कॉलिंग के जरिए साधु का हाल राजस्थान के कन्हैयालाल जैसा करने की भी धमकी दी जा रही है। ये धमकियाँ विदेशी नंबरों से आ रही हैं। पीड़ित ने इसकी शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई है और धमकियों के सबूत भी दिए हैं।

दरअसल पुणे में ऑटो चलाने वाले साधु मगर ने 2 मई 2023 को एक पोस्टर बना कर ‘द केरल स्टोरी’ (The Kerala Story) देखने जाने वाले यात्रियों से पैसे न लेने का एलान किया था। इस पोस्टर के जारी होने के बाद जहाँ उनकी कई लोगों ने तारीफ की तो दूसरी तरफ उन्हें फोन पर जान से मार डालने की धमकियाँ भी दी जाने लगी हैं। आरोप है कि धमकियाँ देश के तमाम हिस्सों सहित विदेशी नम्बरों से भी आ रही हैं। जब पीड़ित ने धमकी वाले नंबरों को ब्लॉक करना शुरू किया तब नंबर बदल-बदल कर कॉल आने लगे।

आखिरकार पीड़ित साधु मगर ने थाने में इसकी शिकायत की। सबूत के तौर पर पीड़ित ने धमकियों की रिकॉर्डिंग भी पुलिस अधिकारी को सुनाई। ऑपइंडिया से बात करते हुए साधु मगर ने बताया कि धमकी देने वालों ने उन्हें उदयपुर के कन्हैयालाल की याद दिलाई और उन्हीं के जैसा हाल करने का एलान किया है।

पुलिस को दी गई लिखित शिकायत में पीड़ित ने 15 अलग-अलग नम्बरों का जिक्र किया है। उन्होंने शिकायत में व्हाट्सएप के कुछ स्क्रीनशॉट भी लगाए हैं। साधु मगर का कहना है कि पुलिस में शिकायत दर्ज करवाने के बाद कुछ स्थानीय हिन्दू संगठन उनके साथ आए हैं।

पुलिस ने साधु की शिकायत पर जाँच करने और कार्रवाई का भरोसा दिया है। साधु मगर मूल रूप से महाराष्ट्र के शोलापुर जिले के रहने वाले हैं। पहले वह एक कम्पनी में काम किया करते थे। 3 साल पहले उन्होंने खुद का ऑटो खरीद कर चलाना शुरू कर दिया था। साधु मगर भारतीय सेना के जवानों से भी भाड़ा नहीं लेते हैं।

‘काफिर के साथ क्यों आई… &^$ फाड़ देंगे’ : अपने ही मजहब की लड़कियों को परेशान कर रहे इस्लामी कट्टरपंथी; मीडिया खामोश क्यों?

     हिंदू लड़के के साथ घूमने पर लड़की को कट्टरपंथियों ने किया परेशान (साभार: वायरल वीडियो का स्क्रीनशॉट)
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजी नगर (पहले औरंगाबाद) में हिजाब पहने लड़की को बीच सड़क पर परेशान करने के आरोप में पुलिस ने तीन कट्टरपंथी लोगों को पकड़ा है। इन कट्टरपंथियों ने काफी दूर तक मुस्लिम लड़की का पीछा किया, फिर उसका मोबाइल छीनने की कोशिश भी की और उसे गालियाँ भी दीं। उन्होंने उसके साथ ऐसा इसलिए किया, क्योंकि वह एक हिंदू लड़के के साथ बीबी का मकबरा देखने के लिए गई थी। यह घटना 24 अप्रैल 2023 को बेगमपुरा इलाके की है। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो खूब वायरल हो रहा। पुलिस ने केस दर्ज मामले की जाँच शुरू कर दी है।
'गंगा-जमुनी तहजीब', 'संविधान', 'freedom of expression' आदि नारों से जनता को गुमराह करने वाला गैंग और मीडिया कहां है? यदि स्थिति विपरीत होती इस गैंग और मीडिया ने  कोहराम मचा दिया होता। क्या कोई मुस्लिम लड़की किसी हिन्दू लड़के के साथ कहीं जा नहीं सकती?  
                                              हिजाब वाली लड़कियों को प्रताड़ित कर रहे कट्टरपंथी

हिंदू लड़कों से दोस्ती करने पर इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा मुस्लिम लड़कियों को प्रताड़ित करने के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इन वीडियोज में इस्लामी कट्टरपंथी बुर्का या हिजाब पहनी लड़कियों को परेशान करते दिखते हैं और उनके साथ सरेआम बदसलूकी भी करते हैं। इन दो वीडियोज को फैक्ट्स (Facts) नाम के ट्विटर यूजर ने अपने अकॉउंट पर शेयर किया है।

वायरल वीडियो में ये कट्टरपंथी कॉलेज की छात्रा को रोकने की कोशिश करते हैं। वे उसका हाथ पकड़ते हैं। उसका बैग छीनने कोशिश करते हैं और हिजाब खींचते हैं। लड़की सड़क पर ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाती है और बार-बार ‘मुझे छोड़ो, मुझे छोड़ो’ कहती है। लेकिन वे उसे छोड़ने की बजाए उसका फोन छीनने लगते हैं। वे उससे पूछते हैं, “वो लड़का कौन है। तुम किसी और धर्म के लड़के के साथ क्यों हो?”

इसके बाद वे उसे परेशान करने लगते हैं। उनमें से एक ने लड़की का हाथ पकड़ लेता है, तब वह उनसे बचने के लिए भागने लगती है। वह चिल्लाते हुए उनसे अपना हाथ छोड़ने को कहती है। इस दौरान सड़क पर आस-पास बहुत सारे लोग मौजूद होते हैं, लेकिन कोई भी लड़की की मदद के लिए आगे नहीं आता।

पहली वीडियो अहमदाबाद के जुहापुर की है। इसमें एक शख्स कैमरा लेकर बुर्काधारी लड़की के पास आकर उससे उसका नाम पूछता है, उसके बाद उसके पापा का नाम पूछता है और फिर उस लड़के के बारे में पूछता है जिसके साथ लड़की खड़ी थी। वीडियो में देख सकते हैं कि लड़की एक ही बार में बता देती है कि जो लड़का उसके साथ खड़ा था वो उसका दोस्त था। इस पर कट्टरपंथी उस पर चिल्लाता है और कहता है, “क्या आप वॉट्सएप नहीं चलाते, आपको नहीं पता कि कैसे इतने घपले होते हैं, आप लोग दूसरों के साथ घूमती हो, उन्हें गले लगाती हो।”

लड़की बताती रहती है कि वो लड़का उसका स्कूल का दोस्त है। इस पर लड़का भीड़ इकट्ठा करके इल्जाम लगाता है कि ये लड़की घपले वाले (गैर मजहबी लड़के) को किस कर रही थी। लड़की सवाल करती है कि वीडियो दिखाओ तो वो कहता है- “मैं तुम्हारी इज्जत कर रहा हूँ, लेकिन तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए, इससे हिजाब भी खराब होता है और लड़कियों पर भी गलत असर पड़ता है।”

एक औरत इस बीच कहती है- “हट जाओ मैं पकड़ के धो देती हूँ इसे।” वहीं स्कूटर पर बैठा आदमी कहता है- “तुम काफिर के साथ क्यों आती हो।” तभी, वो लड़का जो वीडियो बना रहा होता है वो कहता है, “आपा सीधी बात बताता हूँ, यहाँ बहुत सारे मुसलमान है। अखलाख तुम्हारा बहुत खराब है। इतना सारा हमारे को जुनून आ जाता है कि माँ फाड़ डालें उसकी। मैं झूठ नहीं बोलता मैं काट डालता उसको।”

ऐसी ही एक वीडियो कथिततौर पर मेरठ के गाँधी बाग का है। इस वीडियो में एक हिजाब पहनी लड़की के पीछे पीछे कुछ लड़के चलते हैं और फिर कहते हैं- “देख तेरी वीडियो वायरल होगी।” लड़कों को कहते सुना जा सकता है, “देख लो मुसलमान की लड़की हिंदू के साथ घूम रही।” इस वीडियो में लड़की अपने दोस्त के साथ आगे बढ़ती है पर कट्टरपंथी लगातार उसका पीछा करते रहते हैं।

आधी रात का सीसीटीवी फुटेज 22.4.23 बनर्जीबगान, फतेहपुर, मेटियाब्रुज, कोलकाता

 कैसे 60-70 की मुस्लिम भीड़ ने हिंदू क्षेत्र में घुसने और तोड़फोड़ करने की कोशिश की लेकिन स्थानीय हिंदुओं ने उन्हें जमकर जवाब दिया और उन्हें इतना पीटा कि वे इधर-उधर भागने लगे।

(CCTV footage of midnight 22.4.23 Banerjeebagan, fathepur,metiabruz ,Kolkata.)

यही और केवल यही तरीका है, हैवानियत से अपने को बचाने का। यह कौम इसलिए शैतानियां करने में सफल होती है कि हिन्दू, घरों में भयभीत होकर, घरों में दुबक जाते हैं। 

हमने तो "हम दो हमारे दो" के सरकारी नारों को देश हित में अपनाया पर इन्होंने, "गजवा-ए-हिन्द" बनाने के अपने एजेंडे पर, जनसंख्या बढ़ाई। नतीजा हम डरने लगे कि हमारा एक ही लड़का है और उसे कुछ हो गया तो मेरा तो वंश ही खत्म हो जाएगा।

हिन्दुओं को भय त्याग कर, संगठित रहकर, इंट का जबाब पत्थर से देना होगा। हमें अपने बचाव का, सम्पूर्ण अधिकार है। हम हिंसा में विश्वास नहीं करते। हमारे सभी देवी-देवताओं के हाथों में अनेकानेक शस्त्र सजावट के लिए नहीं बल्कि आदेश है कि हथियार रखो, उन्हे पूजो। "अहिंसा परमो धर्म, धर्म रक्षार्थ तथऐव च"।" 

‘शव पर तिरंगा लपेटा जाना चाहिए था’: कांग्रेस नेता राजकुमार उर्फ़ रज्जू भैया ने अतीक अहमद को ‘भारत रत्न’ देने की माँग की

कांग्रेस नेता ने अतीक अहमद को भारत रत्न देने की माँग की (दाएँ), महाराष्ट्र में शहीद बता कर लगे पोस्टर (बाएँ)
आज तुष्टिकरण की घिनौनी सियासत करने वालों को जब इतनी भी समझ नहीं कि ;भारत रत्न' की क्या कीमत है, क्या सम्मान है, क्या ऐसे पाखंडी नेताओं को सत्ता के पास भी नहीं भेजना चाहिए। क्या इनकी अक्लों पर पत्थर पर गए है कि एक माफिया को 'भारत रत्न' देने की मांग कर रहे हैं? क्यों उसके अपराधों पर पर्दा डाल, जनता को गुमराह किया जा रहा है? 

प्रयागराज के सबसे बड़े माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या के बाद से लगातार उसे महान बताने की कोशिश जारी है। जहाँ सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने उसकी हत्या पर सवाल खड़े किए, बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने उसे ‘जी’ कह कर संबोधित किया और AIMIM के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने ‘मुस्लिम कार्ड’ खेला, वहीं अब उसे शहीद बताने से लेकर उसे ‘भारत रत्न’ देने तक की माँग हो रही है।

‘अतीक अहमद को मिले भारत रत्न सम्मान’: प्रयागराज का कांग्रेस नेता

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के एक कांग्रेस नेता ने अतीक अहमद को शहीद बताते हुए माँग की है कि उसे ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया जाए। ये बयान कांग्रेस पार्टी के पार्षद प्रत्याशी राजकुमार उर्फ़ रज्जू भैया ने दिया है। इसका वीडियो भी सामने आया है। उन्होंने दावा किया कि अतीक अहमद ने शहादत पाई है, इसीलिए उसके शव पर तिरंगा रखा जाना चाहिए था। साथ ही उसने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने अतीक अहमद की हत्या करवाई।
उन्होंने समाजवादी पार्टी के संस्थापक, भारत के रक्षा मंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह का नाम लेते हुए कहा कि अगर उन्हें ‘पद्म विभूषण’ मिल सकता है तो फिर अतीक अहमद को ‘भारत रत्न’ क्यों नहीं? शहर में कांग्रेस के पुराने नेता राजकुमार नगर निगम के वार्ड नंबर 43 साउथ मलाका से पार्षद प्रत्याशी हैं। वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें हिरासत में लेकर कोतवाली भी ले जाया गया। वो पहले भी पार्षद का चुनाव लड़ चुके हैं। ताज़ा खबर ये है कि कांग्रेस ने उन्हें 6 वर्षों के लिए पार्टी से निष्काषित कर दिया है।

महाराष्ट्र में अतीक अहमद को शहीद बताते हुए लगाए गए पोस्टर्स

उधर महाराष्ट्र के बीड में अतीक अहमद को शहीद बताते हुए पोस्टर लगाए गए हैं, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया है। इन पोस्टरों में न सिर्फ अतीक अहमद, बल्कि उसके भाई अशरफ को भी शहीद बताया गया है। इस मामले में ‘भारतीय दंड संहिता (IPC)’ की धारा 293, 294 और 153 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इन पोस्टरों में सार्वजनिक रूप से दोनों की हत्या की निंदा की गई। ये बैनर माजलगाँव इलाके में लगाया गया था।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँच गई। इस पोस्टर को भी त्वरित रूप से कार्रवाई करते हुए हटवा दिया गया है। इसे मोहसिन पटेल की ‘मोहसिन भैया मित्र मंडल’ ने लगाया था। पुलिस ने 4 आरोपितों को गिरफ्तार भी कर लिया है। अतीक गिरोह से इन लोगों के रिश्ते की भी जाँच की जा रही है। बता दें कि अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या से पहले अतीक का बेटा असद भी एनकाउंटर में मारा जा चुका था। अतीक की बीवी शाइस्ता परवीन अब तक फरार है।

उत्तर प्रदेश STF ने बमबाज गुड्डू मुस्लिम को भी नासिक से दबोचा

महाराष्ट्र के नासिक से गुड्डू मुस्लिम को गिरफ्तार कर लिया
उत्तर प्रदेश पुलिस की STF ने बमबाज गुड्डू मुस्लिम को गिरफ्तार कर लिया है। उसे महाराष्ट्र के नासिक से दबोचा गया है। बता दें कि उमेश पाल हत्याकांड के बाद सामने आए सीसीटीवी वीडियो में बमबाज गुड्डू मुस्लिम का चेहरा भी दिखा था। ये भी जानने वाली बात है कि जब अतीक अहमद और उसके भाई की हत्या हुई, उससे ठीक पहले उसका भाई अशरफ गुड्डू मुस्लिम का ही नाम ले रहा था। बात पूरी करने से पहले ही दोनों भाइयों की हत्या कर दी गई।

गुड्डू मुस्लिम पर 5 लाख रुपए का इनाम घोषित है। वो इस पूरे मामले को सुलझाने में पुलिस के सामने एक अहम कड़ी शामिल हो सकता है। उधर अब सामने आया है कि शौहर और देवर के जनाजे और उन्हें दफ़न किए जाने के बाद बीवी शाइस्ता परवीन भी पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करेगी। इस मामले में वो भी आरोपित है। फॉरेंसिक टीम ने सैम्पल ले लिए हैं और अतीक-अशरफ के लिए कब्र भी खोद दी गई है। सीएम योगी ने अधिकारियों को हर दो घंटे में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस प्रकरण के अलावा अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं। गुड्डू मुस्लिम के बारे में बता दें कि वो पुराना हिस्ट्रीशीटर है। वो गोली नहीं, बल्कि बम मार कर हत्या करता था। लखनऊ के नाका इलाके में भी उसने बम मार कर एक हत्याकांड को अंजाम दिया था, जिसके बाद वो जेल भी गया था। लखनऊ के पीटर गोम्स हत्याकांड में भी उसका नाम सामने आया था। उत्तर प्रदेश के कई माफियाओं के साथ उसके संबंध रहे हैं।

गुड्डू मुस्लिम की तलाश के लिए यूपी STF की 10 टीमें लगी हुई थीं। बता दें कि लाइव कैमरे के सामने जैसे ही अशरफ ने कहा था, ‘मेन बात ये है कि गुड्डू मुस्लिम…’ तभी उसके बगल में खड़े अतीक अहमद को हमलावरों ने सिर से सटाकर गोली मार दी। फिर अशरफ की भी हत्या हो गई। इलाहाबाद का गुड्डू मुस्लिम लखनऊ में बाहुबलियों अभय सिंह और धनंजय सिंह के संपर्क में आकर बड़ा अपराधी बना था। हालाँकि, इससे पहले से वो अपराध करता रहा था। वो श्रीप्रकाश शुक्ल और ISI के भी संपर्क में रहा है।


मुंबई में समुद्र के बीच बने ‘दरगाह’ पर चला बुलडोजरः राज ठाकरे ने उठाया था सवाल, कहा था- नहीं हटा तो बनेगा गणपति मंदिर

                              मुंबई में अवैध दरगाह पर चला प्रशासन का बुलडोजर (फोटो साभार- एएनआई)
मुंबई के माहिम में समुद्र किनारे बनाए गए अवैध दरगाह को तोड़ दिया गया है। गुरुवार (23 मार्च 2023) को सुबह 8 बजे ही अधिकारी मौके पर पहुँच गए। भारी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती के बीच बुलडोजर चलाकर अवैध दरगाह को तोड़ दिया गया। दरगाह के मलबे को बाहर निकालने के लिए कई ट्रकों को लगाया गया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने बुधवार (22 मार्च) को ही यह मुद्दा उठाया था।

मुंबई के माहिम में भी प्रशासन की तरफ से अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की गई। दरगाह को तोड़ने से पहले भारी पुलिस बल की तैनाती की गई। बुधवार को गुड़ी पड़वा के अवसर पर आयोजित MNS की रैली को संबोधित करते हुए राज ठाकरे ने कहा था कि 2 साल पहले यहाँ कुछ नहीं था। अब अवैध रूप से मजार बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस और बीएमसी के लोग सोए हुए हैं।

अपने भाषण के दौरान राज ठाकरे ने पूछा कि यह किसकी दरगाह है? क्या यह किसी मछली की है? मनसे प्रमुख ने चेतावनी देते हुए कहा कि यह अवैध निर्माण तुरंत नहीं गिराया गया तो इसी स्थान पर गणपति मंदिर की स्थापना की जाएगी। इसके लिए राज ठाकरे ने प्रशासन को एक महीने का समय दिया था।

मनसे के अधिकारिक ट्विटर हैंडल से अवैध दरगाह को लेकर वीडियो शेयर करते हुए लिखा गया कि समुद्र के बीच एक नया हाजी अली तैयार किया जा रहा है। पुलिस और नगरपालिका को इसकी भनक भी नहीं लगी।

पोस्ट किए गए वीडियो में माहिम बीच से कुछ ही दूरी पर समुद्र में एक निर्माणाधीन दरगाह को देखा जा सकता है। कुछ लोग यहाँ पानी से गुजरते और दरगाह पर प्रार्थना करते देखे जा सकते हैं। इस वीडियो को मनसे प्रमुख ने अपने कार्यक्रम के दौरान भी चलवाया था।

रिपोर्टों के मुताबिक इस अवैध दरगाह को तोड़ने के आदेश मुंबई के रेजिडेंट कलेक्टर ने दिए थे। प्रशासन की कार्रवाई के दौरान कलेक्टर और डीसीपी भी मौके पर मौजूद रहे।

‘वोट देना गुनाह, मुस्लिम न दें’ : जामिया मस्जिद के इमाम अब्दुल अजीज के अफगानिस्तान के ISIS से संपर्क

                                      महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के ISIS नेटवर्क पर NIA का छापा
राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के 5 अलग-अलग हिस्सों में छापेमारी की है। यह छापेमारी अंतर्राष्ट्रीय आतंकी समूह ISIS से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ की गई है। बताया जा रहा है कि NIA को मौलाना अब्दुल अज़ीज़ सलाफी और उसकी गैंग की तलाश है जो यूट्यूब पर भड़काऊ वीडियो से युवाओं को कट्टरपंथ सिखा रहा है। शनिवार (11 मार्च 2023) को हुई इस छापेमारी के दौरान कई ऐसे दस्तावेज मिले हैं जिस से मौलाना की गैंग के भारत विरोधी होने के सबूत मिले हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 40 वर्षीय मौलाना अब्दुल सलाफी और उसके गुर्गे अफगानिस्तान में सक्रिय ISIS के खुरासान नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। सलाफी मध्य प्रदेश के शिवनी जिले की जामिया मस्जिद का इमाम है। वहीं इस नेटवर्क के दूसरे बड़े नाम के तौर पर 26 वर्षीय शोएब का नाम आ रहा है। शोएब की ऑटो पार्ट्स दुकान है। इन दोनों पर आरोप है कि ये भारत के लोकतंत्र से नफरत करते हैं और बाकी लोगों को भी मतदान में हिस्सा न लेने के लिए भड़काते हैं।

बताया जा रहा है कि मौलाना सलाफी और शोएब मुस्लिम युवाओं को यूट्यूब के भड़काऊ वीडियो दिखाते हैं। ये दोनों आरोपित मतदान में मुस्लिमों के हिस्सा लेने को गुनाह मानते हैं। NIA ने शुरुआती जाँच में पाया है कि मौलाना सलाफी का नेटवर्क अफगानिस्तान में चल रही ISIS की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखता है। इसी के साथ यह गैंग अन्य मुस्लिम युवकों में भी ज्यादा से ज्यादा अपनी मानसिकता डालने की फिराक में है। NIA की तलाशी में इस बावत कुछ दस्तावेज और अन्य सबूत मिलने का भी दावा किया गया है।

इस नेटवर्क से जुड़े पाए गए पुणे के तल्हा खान और सिवनी में अकरम खान के ठिकानों की तलाशी हुई है। इसके अलावा मौलाना अब्दुल अजीज सलाफी व शोएब खान के घर और दुकानों को भी खँगाला गया है। दावा किया जा रहा है कि NIA ने मौलाना अब्दुल अजीज सलाफ़ी और शोएब को हिरासत में ले कर पूछताछ भी की। यह पूछताछ जबलपुर में हुई थी जहाँ से उन्हें छोड़ दिया गया। उसके बाद उन्हें नोटिस भेजकर बेंगलुरु बुलाया गया।

जाँच एजेंसी को इस नेटवर्क की जानकारी दिल्ली पुलिस द्वारा ओखला से पकड़े गए कश्मीरी दम्पति जेब शामी और हिना बशीर से हुई पूछताछ के बाद हुई। इस कश्मीरी दम्पति का इस्लामिक स्टेट से कनेक्शन पाया गया था। इस गैंग से जुड़े एक अन्य आरोपित अब्दुल्ला बासिथ का भी नाम सामने आया है। अब्दुल्ला पहले से ही एक अन्य मामले में तिहाड़ जेल में बंद है।

विदेशी फंडिंग वाली इन संस्थाओं का विरोध कीजिए, वरना कल को बड़ों के पाँव छूना भी कहलाएगा ‘अंधविश्वास’; देखिए वीडियो

महंत धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री पर विवाद होना कोई नयी बात नहीं, वास्तव में हिन्दुओं को जागृत करने का शंखनाद किया था बाबा रामदेव ने। आधी रात को अनर्थ करने गए लोगों की बुद्धि ऐसी भ्रष्ट हुई कि  टैंटों में जाने में जाने से पहले से बिजली काट घुसने पर क्या हुआ, यह तो वही अपने श्रीमुख से बताएं तो अधिक उचित होगा। खैर, धीरेन्द्र की भांति बाबा का भी खूब विरोध हुआ था, परिणाम 2014 चुनावों में विरोधियों को धूल चाटने के लिए विवश होना पड़ा और आज तक धूल ही चाट रहे हैं। अब धीरेन्द्र का उठ रहा विवाद क्या 2024 में विरोधी मोदी को 350+ पार करवाएगी? आभास ऐसा ही हो रहा है। यह भी संभव हो सकता है 2024 चुनाव देश में हुए  प्रथम चुनाव को दोहराएगा? जिस तरह उस समय कोई मजबूत विपक्ष यानि हिन्दू महासभा नहीं था, वही स्थिति आज है। मोदी विरोधियों का दिलो-दिमाग इतना अधिक भ्रष्ट हो चूका है कि हिन्दुओं की धार्मिक पुस्तकों का अपमान करने से हिन्दुओं में शंका घर करने लगी है कि अगर यही हाल रहा तो विरोधियों की वर्तमान पीढ़ी के अलावा भावी पीढ़ी भी उन्हें पहचानने से इंकार न कर दें। 
याद करिए, बाबा रामदेव के पदापर्ण से पहले विदेशी कंपनियां नमक, हल्दी, तेल और कोयला आदि से मंजन करने के दुष्प्रभावों से डराने के साथ-साथ सरसों के तेल से होने वाले शरीर को नुकसान से जनता को डराया जा रहा था, जिसका इन विदेशी के गुलाम विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) भी समर्थन कर रहा था। आज वही विदेशी कंपनियां हैं जो बाबा रामदेव के पदचिन्हों पर चल टूथ पेस्ट बना रही हैं। कल तक जो डॉक्टर सरसों का तेल इस्तेमाल न करने की सलाह देते थे, आज कहते हैं refind की बजाए सरसों का तेल खाओ। 
दूसरे, महंत धीरेन्द्र द्वारा या कहना कि "तुम मेरा साथ दो, मै हिन्दू राष्ट्र बनाऊंगा", विषय समझ और नसमझ(eye or no eye) का है। यह तो वर्षों पूर्व ही भविष्यवाणी कर दी गयी थी कि 2014 चुनाव के बाद भारत पीछे मुड़कर नहीं देखेगा। भारत विश्वगुरु बन भगवा फहराएगा। हमें तुष्टिकरण की पुजारी सरकारों द्वारा पढ़ाया गया गलत इतिहास ही देश में सांप्रदायिक दंगे होते रहे। मुग़ल आक्रांताओं को महान बताया गया, जो सरासर गलत है। 
मुग़ल आक्रांताओं को महान बताने वालों से पूछिए कि अकबर मीना बाजार क्यों लगाता था? इस अय्याशी के बाजार में किसी भी उम्र के लड़के पर पाबन्दी थी, लेकिन अय्याश अकबर बुर्के में खूबसूरत और हसीन लड़की/औरत को देखते ही बुर्के में साथ चल रहे अपने सिपाहियों को उसे हरम में ले जाने के लिए कहता। इस अय्याशी के इस बाजार को बंद करवाने वाली वह राजपूत महिला किरण देवी कौन है? जब इस महिला ने अकबर को ज़मीन पर पटककर छाती पर पैर रख कटार निकलते अय्याश ने इस राजपूत से अपनी ज़िंदगी की भीख मांगते हुए हरम में कैद सभी महिलाओं को आज़ाद कर, अय्याशी बाजार यानि मीना बाजार लगाना बंद किया था। देखिए वीडियो
 
प्रमाण देखिए, नाथूराम गोडसे पर बनी फिल्म का कट्टरपंथियों द्वारा विरोध किया जा रहा है। क्यों? जानते है क्यों, क्योकि मुस्लिम कट्टरपंथी और तुष्टिकरण पुजारी सच्चाई सामने आने से डर रहे हैं। और जो लोग गोडसे को पहला आतंकवादी कहते हैं, इनसे पूछो कि महात्मा गाँधी की किस साल हुई थी? और स्वामी श्रद्धानन्द की किस वर्ष हुई थी? दूसरे "रंगीला रसूल" के लेखक राजपाल की हत्या किस वर्ष हुई थी? तुष्टिकरण जनक गाँधी दोनों ही बार कातिलों के बचाव में नज़र आये थे। स्मरण हो, स्वामी श्रद्धानन्द और राजपाल की मुसलमानो द्वारा मॉब लिंचिंग में हत्या हुई थी, यानि पहला आतंकवादी कौन हिन्दू या मुसलमान? मॉब लिंचिंग किसकी देन है? आज क्यों उसी मॉब लिंचिंग पर सियापा किया जा रहा है? आइने में असलियत देख क्यों डर लग रहा है? आज victim card खेलने में शर्म क्यों नहीं आती? वैसे बेशर्मों और शैतानों को किस बात की शर्म?  देखिये वीडियो 
इन भड़काऊ नेताओं से यह भी पूछो कि 1. क्या कारण था कि कोर्ट ने गोडसे को माइक से बयान पढ़ने की क्यों दी थी? यह विश्व इतिहास है। 2. गोली लगने के बाद 40 मिनट तक गाँधी जीवित थे, क्यों नहीं उन्हें निकटतम तत्कालीन विलिंग्डन वर्तमान डॉ राम मनोहर लोहिया 
हॉस्पिटल लेकर गए? 5. क्या कारण था कि कोर्ट में दर्ज गोडसे के 150 बयान सार्वजानिक होने पर प्रतिबन्ध लगाया था? 6. 1984 सिख दंगों पर हर पार्टी छाती पीटती नज़र आती है, लेकिन गाँधी द्वारा स्वर्ग सिधारते ही आज़ाद भारत का सबसे भयंकर नरसंहार चितपावन ब्राह्मणों का हुआ था, क्यों नहीं आज तक जाँच करवाई गयी? 7. क्यों नहीं दोषियों को फांसी की मांग हुई? 8. गोडसे के 150 सुनने के बाद क्यों जस्टिस खोसला को कहना पड़ा कि 'अगर कोर्ट में और कोर्ट से बाहर मौजूद सभी लोगों को जज बना दिया जाये, सभी यही कहेंगे गोडसे निर्दोष है', तारीख पर हज़ारों की संख्या में लोग कोर्ट पहुँचते थे। गोडसे से बयानों को  साहित्य सदन, नई सड़क, दिल्ली से खरीद कर पढ़ सच्चाई का बोध करने पर गोडसे को आतंकवादी बताने वालों को जितना अपमानित किया जा सकता है, करिए।  
प्रतिदिन सूर्योदय होना भी चमत्कार है। फिर सूर्य का अस्ताचलगामी हो जाना भी चमत्कार है। बुद्ध ग्रह पर 243 दिनों का तक सूर्य का अस्त न होना भी चमत्कार है और बृहस्पति पर 10 घंटे में ही दिन-रात का बीत जाना भी चमत्कार है। आप कहेंगे कि ये ग्रह तो स्पिन हो रहे हैं अपने ही अक्ष पर, तो मैं कहूँगा कि ये भी चमत्कार है। आप इसके पीछे विश्व ज्यादा इनर्शिया, मोशन और ग्रेविटी समझा देंगे, मैं इसे भी चमत्कार बता दूँगा।

इसीलिए, समस्या ये नहीं है कि कोई चमत्कार करता है, बल्कि मुद्दा ये है कि आपकी नज़र में चमत्कार क्या है। एक अँधे को आँख आ जाने पर उसे जो दुनिया दिखाई देती है, वो चमत्कार ही चमत्कार है। हमने टीवी शोज में कई ऐसे मनोवैज्ञानिक देखे हैं, मन को पढ़ने वाले देखे हैं जो सामने वाले के भावों को तुरंत बता देते हैं। ये एक अध्ययन है, अभ्यास है, कला है। कभी शत-प्रतिशत सही भी हो सकता है तो कभी ऐसा भी हो सकता है कि कोई अनुमान ही न लग पाए।

ऐसे व्यक्ति को सारा सेटअप अपने हिसाब से चाहिए होता है, माहौल अनुकूल चाहिए होता है। जैसे Astrology विज्ञान है, वैसे ही मनोविज्ञान भी है। अगर कोई किसी के मन को पढ़ कर भगवान से उनके लिए प्रार्थना कर रहा है, अब ये चमत्कार है तो है। ये वही ‘महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति’ है, जिसने मदर टेरेसा की तारीफ़ की थी और कहा था कि वो अनाथों, बुजुर्गों और रोगियों की काफी मदद करती हैं। ये वही समिति है, जिसने जल में प्रतिमा विसर्जन के विरुद्ध अभियान चलाया था।

ये वही संस्था है, जिसे विदेश से फंडिंग प्राप्त होती है और इसे छिपाने के लिए उसे केंद्र सरकार से नोटिस भी जारी हुआ था। विदेश से इस संस्था को फंडिंग किसलिए आ रही है, सोचने वाली बात है। आज अगर हमने इनका विरोध नहीं किया तो कल को ऐसी संस्थाएँ बहुतायत में खड़ी हो जाएँगी और कहेंगी कि मंदिरों का अस्तित्व ही अंधविश्वास है और बड़ों के पाँव छूना भी अंधविश्वास है। आप उसके पीछे का विज्ञान साबित करते रह जाएँगे और ये एक कानून पारित करवा कर ऐसी चीजों को प्रतिबंधित भी करवा दें तो कोई आश्चर्य वाली बात नहीं है।

हाँ, पादरियों के सामने पागल बन कर नाच करना और दरगाहों पर चादर चढ़ाना इसकी श्रेणी में नहीं आएगा। असली समस्या ये है कि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के गरीब व जनजातीय इलाकों में ईसाई मिशनरियों के प्रभाव को वहाँ के एकाध लोग कम कर रहे हैं। एक राजपरिवार से है, एक संत है। घर-वापसी के इन अभियानों ने उस खेमे की बेचैनी बढ़ा दी है, जिसे सबसे ज्यादा विदेशी फंडिंग प्राप्त होती है। उनके ‘चमत्कार’ से अवाक होकर जो लोग उधर जाते हैं, उन्हें इधर रोकने के लिए भी थोड़ा ‘चमत्कार’ आवश्यक है।

एक वर्ग के मन में ये भाव रहना चाहिए कि साधु-संतों के सामने ये पादरी कुछ भी नहीं हैं। जिस इलाके से पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री आते हैं और जैसे लोगों को उन्हें सनातन में रोक कर रखना है, ‘चमत्कार’ उनकी मजबूरी भी है और कलाकारी भी। अब समस्या तो यहाँ ये रह भी नहीं गई है कि वो जो करते हैं उसे चमत्कार कहा जाए या नहीं। समस्या ये है कि आप किसकी तरफ हैं – ईसाई मिशनरियों के या फिर बागेश्वर धाम सरकार के? एक 27 वर्ष का युवक इतना बड़ा कार्य कर रहा है तो उसका समर्थन तो बनता है।

कम से कम व्यास पीठ से अली मौला करने वालों और ‘दम-दम अली अली’ पर नाचने वालों से तो वो बेहतर है (हालाँकि, विरोध मैं ऐसे कथावाचकों या संतों का भी नहीं करता, क्योंकि अगर वो कुछ बहुत अच्छा वृहद् स्तर पर कर रहे हैं तो हल्का-फुल्का विरोध कर के इन चीजों को नज़रअंदाज़ किया जा सकता है)। अक्सर जो नास्तिक होते हैं वो ये चुनौती देते हैं कि ईश्वर का अस्तित्व साबित कर के दिखाओ। असली चुनौती उन्हें दी जानी चाहिए कि वो ईश्वर के अस्तित्व को नकारने का सबूत दें, साबित करें।

इससे पूरा मुद्दा ही बदल जाता है। ऐसे ही धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री पर आरोप लगाने वालों को उन्होंने भी चुनौती दी है कि ‘दरबार’ में आएँ और उन्हें गलत साबित करें। जो समर्थन कर रहे हैं उन्हें साबित करने की ज़रूरत ही नहीं है कि वो चमत्कार करते भी हैं नहीं। असल में चमत्कार कुछ नहीं है, ये तो अध्यात्म है या फिर विज्ञान। तुलसीदास के घर रामचरितमानस की चोरी करने गए लोगों को वहाँ तीर-धनुष लिए 2 लोग कुटिया की रक्षा करते दिखे थे।

इसी आसपास के जमाने में एक योगी ऐसे थे जो महीनों तक नदी में तैरते रहते थे। शंकराचार्य से लेकर महावतार बाबाजी तक, चमत्कार और रहस्य तो भरे परे हैं। पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की पीढ़ियाँ वहाँ पर सिद्धि करती आई हैं और छत्तरपुर की उस धरती पर हनुमानजी विराजमान हैं। वहाँ जाकर उनकी बातें सुनना, भगवान का दर्शन करना और पीठाधीश्वर द्वारा अपने लिए प्रार्थना करवाने में गलत कुछ भी नहीं है।ताज़ा घटनाक्रम से उनका फायदा ही हुआ है, न सिर्फ उनके भक्तों/समर्थकों की संख्या बढ़ेगी बल्कि धाम पर पहुँचने वालों की तादाद में भी वृद्धि होगी।

जो उन्हें न मानते हों ये पोंगा-पंडित ही समझते हों, घर-वापसी के अभियान के लिए उनका समर्थन तो कर ही सकते हैं। जो ये भी नहीं कर सकते, वो बागेश्वर बालाजी के दर्शन तो कर ही सकते हैं। जिनकी हनुमानजी में भी आस्था नहीं, अब उनके बारे में क्या ही कहना! तुलसीदास ने भी कहा है – “कलयुग केवल नाम अधारा, सुमिर सुमिर नर उतरहिं पारा।” अर्थात, कलियुग में ईश्वर का नाम लेने भर से काम हो जाएगा, वेद-वेदाङ्ग का अध्ययन करने का समय न तो।

अगर बागेश्वर धाम के महंत के कहने पर कुछ लोग हनुमान और राम का नाम ही ले रहे हैं तो ये बहुत बड़ी बात है। जनजातीय और गरीब वर्ग को ये एहसास दिलाना है कि सनातन ही श्रेष्ठ है। एक तरफ पादरियों का ‘हल्लिलूय्याह’ है, एक तरफ बालाजी का नाम। एक तरफ भक्ति है, एक तरफ लालच। एक तरफ घर-वापसी है, एक तरफ धर्मांतरण। एक तरफ राष्ट्रभक्ति है, एक तरफ विदेशी फंडिंग। एक तरफ एक निर्दोष और सरल साधु है, एक तरफ चालबाज मिशनरी।