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असम : 450 रोहिंग्या मुस्लिमों को वापस भेजने के बाद 47 दलाल गिरफ्तार: 7 राज्यों में NIA और असम पुलिस की कार्रवाई

रोहिंग्या घुसपैठियों की मदद करने वाले 47 दलाल गिरफ्तार (प्रतीकात्मक चित्र)
असम में त्रिपुरा से ट्रेन के माध्यम से पहुँचे 450 रोहिंग्या मुस्लिमों को वापस भेज दिया गया। असम के स्पेशल DGP (विशेष पुलिस महानिदेशक) हरमीत सिंह ने बताया कि सूचना के आधार पर पुलिस सतर्क थी। अवैध घुसपैठियों को सीमा सुरक्षा बलों की सहायता से वापस भेजा गया। जुलाई में असम के स्पेशल टास्क फ़ोर्स (STF) ने एक ऑपरेशन लॉन्च किया था। इस अवैध घुसपैठ और मानव तस्करी में सक्रिय दलालों की पहचान करने के लिए ये ऑपरेशन चलाया गया था।

SDGP ने बताया कि ऐसे 10 दलालों को त्रिपुरा से दबोचने में कामयाबी मिली। उनसे पूछताछ के आधार पर जाँच की गई तो पता चला कि ये राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है जिसके दुष्प्रभाव कई राज्यों पर पड़े हैं। उन्होंने बताया कि पहले दिन से ही मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा (जो राज्य के गृह मंत्री भी हैं) को इस मामले की जानकारी थी और सरकार ने इस मामले को NIA (राष्ट्रीय जाँच एजेंसी) के पास भेजने का निर्णय लिया। फिर केंद्रीय गृह मंत्रालय से इस संबंध में निवेदन किया गया।

असम के विशेष पुलिस प्रमुख हरमीत सिंह ने जानकारी दी कि NIA ने इस मामले की जाँच अपने हाथों में ली और मिलजुल कर जाँच की गई जिसके बाद देश भर में ऐसे दलालों की सूची तैयार की गई जो घुसपैठियों की मदद करते हैं। बकौल स्पेशल DGP, अब इस मामले में बुधवार (8 नवंबर, 2023) को तड़के सुबह ऑपरेशन लॉन्च किया गया जिसमें 47 ऐसे दलाल पकड़े गए हैं जो एक गिरोह बना कर काम कर रहे थे। इनमें से 25 तो अकेले त्रिपुरा से गिरफ्तार किए गए हैं।

वहीं 9 कर्नाटक से, 5 दलाल असम से, 3 पश्चिम बंगाल से, 3 तमिलनाडु से और एक-एक हरियाणा और तेलंगाना से दबोचे गए हैं। SDGP ने बताया कि NIA और असम पुलिस ने मिल कर परस्पर सहयोग करते हुए ये अभियान चलाया है। इसमें विभिन्न स्थानीय पुलिस ने भी मदद की। असम पुलिस की इस प्रकरण में 17 टीमें ग्राउंड पर हैं। बता दें कि म्यांमार और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी मुल्कों से बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुस्लिम भारत में आकर बसे हुए हैं।

महाराष्ट्र : ISIS के स्लीपर सेल का पर्दाफाश, भारत के खिलाफ जेहाद के लिए युवाओं को बम बनाने और हथियारों की दे रहे थे ट्रेनिंग

महाराष्ट्र में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) के स्लीपर सेल का पर्दाफाश राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने किया है। राज्य के अलग-अलग शहरों में छापेमारी कर चार आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है। भारत के खिलाफ जेहाद के लिए युवाओं को बम बनाने और हथियारों की ट्रेनिंग देने की बात भी सामने आई है।

NIA ने सोमवार (3 जुलाई 2023) को महाराष्ट्र के 5 जगहों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनके नाम ज़ुबैर नूर, ज़ुल्फ़िकार अली, शरजील शेख और मोहम्मद शेख उर्फ़ अबू नुसैबा हैं। इनके पास से आपत्तिजनक दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स बरामद हुए हैं। इनसे पूछताछ की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 28 जून को NIA ने ISIS के महाराष्ट्र मॉड्यूल को लेकर केस दर्ज किया था। इसी सिलसिले में सोमवार को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने ख़ुफ़िया सूचना के आधार पर मुंबई, ठाणे और पुणे के कुल 5 अलग-अलग जगहों पर दबिश दी। इस छापेमारी में दक्षिण मुंबई के नागपाड़ा से ताबिश नासिर सिद्दीकी, पुणे के कोंढवा इलाके से जुबैर नूर मोहम्मद शेख उर्फ अबू नुसैबा के अलावा ठाणे के पडघा से जुल्फिकार अली बड़ौदावाला और शरजील शेख को गिरफ्तार किया गया।

जाँच दल द्वारा इन सभी के घरों की तलाशी भी ली गई। तलाशी के दौरान ISIS से संबंधित भड़काऊ दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट्स मिले हैं। NIA की टीम इन दस्तावेजों को जब्त कर जाँच कर रही है। मीडिया को दिए गए अपने बयान में NIA ने बताया है कि शुरुआती पड़ताल में जब्त दस्तावेज भारत विरोधी और युवाओं को कट्टरपंथी बनाने से संबंधित पाए गए हैं।

जाँच एजेंसी ने इन सभी की हरकतों को भारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा और सम्प्रभुता के लिए खतरा बताया है। इन सभी पर देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश का आरोप है। आरोपित स्लीपर सेल तैयार कर रहे थे। युवाओं को कट्टरता का पाठ पढ़ाने के अलावा विस्फोटक उपकरणों और हथियारों को बनाने की ट्रेनिंग देने का भी आरोप है। बरामद हुए दस्तावेजों में इन चारों द्वारा आईईडी बनाने के साथ छोटे हथियारों और पिस्तौल बनाने के लिए ‘डू इट योरसेल्फ (डीआईवाई)’ किट साझा करने का खुलासा हुआ है।

गिरफ्तार हुए चारों आरोपित विदेश में बैठे किसी आका से निर्देश ले रहे थे। वहीं से मिले आदेश पर इन सभी ने भड़काऊ मीडिया सामग्री तैयार कर ‘वॉयस ऑफ हिंद’ नाम की पत्रिका में प्रकाशित करवाया था।


कर्नाटक : हनीट्रैप में पहले हिंदू युवकों को फँसाती, फिर ISIS में धकेलती: पूर्व कांग्रेस MLA की बहू ‘मरियम’ का पूरा चिट्ठा

पिछले साल जनवरी में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने दीप्ति मरला उर्फ मरियम को कुख्यात आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) से कथित संबंधों के आरोप में गिरफ्तार किया था। कर्नाटक के कोडागु की रहने वाली दीप्ति बीएम बाशा के बेटे अनस अब्दुल रहमान की पत्नी हैं। इनके पिता इदिनब्बा कभी कांग्रेस  के विधायक थे। इदीनाबा की 2009 में मृत्यु हो गई।

NIA के अधिकारियों ने दीप्ति से मरियम बनी युवती के बारे में संदेह के आधार पर जाँच की थी। जाँच के दौरान पता चला कि मरियम इस्लामिक स्टेट (ISIS) नेटवर्क में युवाओं को भर्ती करने के रैकेट में शामिल थी। उसे गिरफ्तार करने के लिए सुरक्षा एजेंसी ने पाँच महीनों तक उसके खिलाफ सबूत जुटाए थे।

उल्लेखनीय है कि NIA ने अगस्त 2021 में उसके घर पर छापा मारा था और अनस अब्दुल रहमान के चचेरे भाई अम्मार को ISIS लिंक के लिए गिरफ्तार किया था। NIA ने उस वक्त मरियम से पूछताछ की थी। हालाँकि, उस वक्त उसे हिरासत में नहीं लिया गया था। सबूत मिलने के बाद उसे जनवरी 2022 में गिरफ्तार कर लिया गया।

पेशे से दंत चिकित्सक दीप्ति मरला, अनस से निकाह करने से पहले हिंदू थीं। जब वह UAE में पढ़ती थी, उस दौरान वह इस्लाम की ओर ‘आकर्षित’ हो गई। बाद में मैंगलोर के डेरलकट्टे के एक कॉलेज में बीडीएस की पढ़ाई के दौरान उसे अनस से प्यार हो गया। उसने इस्लाम धर्म अपना लिया और अपना नाम मरियम रख लिया। इसके बाद उसने अनस से निकाह कर ली।

हिंदुओं को हनीट्रैप में फँसाती थी मरियम

पूछताछ के दौरान दीप्ति मरला उर्फ मरियम ने NIA को बताया कि वह हनीट्रैप के जरिए हिंदुओं को फँसाती थी और इस्लाम में धर्मांतरित करती थी। इसके बाद वह उन्हें ISIS में भर्ती करने की कोशिश करती थी। उसने पूरे कर्नाटक में 10 से अधिक हिंदू युवकों को इस्लाम में धर्मांतरित करने की बात कबूल की।
मरियम ने फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हिंदू और मुस्लिम नामों से 15 से ज्यादा अपनी ID बना रखी थी। वह अपने शौहर के कहने पर ISIS के लिए इंस्टाग्राम पेज क्रॉनिकल फाउंडेशन को हैंडल करती थी।
मरियम अश्लील चैट के जरिए युवाओं को फँसाती थी। जान-पहचान बढ़ाने के बाद मरियम ने हिंदू युवकों को वीडियो कॉल किया। उसकी यौन उत्तेजक बातचीत युवकों को लुभाती थी और उन्हें प्यार के जाल में फँसा लेती थी। फिर वह उनसे शादी करने का वादा करती थी।
एक बार जब हिंदू युवक उसकी जाल में पूरी तरह से फँस जाते थे तो वह उन्हें इस्लाम कबूल करने और फिर आईएसआईएस में शामिल होने के लिए मजबूर करती थी। अगर उसका संभावित निशाना कोई मुस्लिम युवक होता तो वह प्यार का नाटक करती और उन्हें आईएसआईएस में शामिल होने के लिए उकसाती थी।
NIA ने कहा कि मरियम के बहकावे में आकर 2020 और 2021 में चार से पाँच युवक केरल से सीरिया चले गए। गिरफ्तारी से पाँच महीने पहले बेंगलुरू में गिरफ्तार मदेश पेरुमल उर्फ अब्दुल भी मरियम के झाँसे में आ गया था। उसने धर्म परिवर्तन करके इस्लाम अपना लिया था।
मदेश पेरुमल ने कथित तौर पर आतंकवादी संगठन के संचालकों को देश में बम विस्फोट करने का वादा किया था। एजेंसी ने बताया कि मरियम ने मदेश पेरुमल को लुभाने के लिए 10 लाख रुपए खर्च किए हैं। ISIS के साथ संबंध होने के अलावा दीप्ति मरला उर्फ मरियम के जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी संगठनों के साथ भी संबंध थे।
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, NIA ने कहा, “जाँच के दौरान यह पता चला है कि सीरिया/ईराक में ISIS खिलाफत खत्म होने के बाद दीप्ति मरला और मोहम्मद अमीन ने जनवरी और मार्च 2020 में हिजरा (धार्मिक प्रवास) के तहत कश्मीर का दौरा किया था। वह कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने और ISIS की गतिविधियों का समर्थन करने के लिए के लिए वहाँ गए थे।
जाँच के दौरान यह भी पता चला है कि मोहम्मद अमीन के साथ-साथ दीप्ति मरला भी ISIS की साजिश का सरगना थी। मार्च 2021 में दर्ज मामले के संबंध में NIA द्वारा गिरफ्तार किए गए लोगों में मोहम्मद अमीन उर्फ ​​अबू याहया और उसके दो सहयोगी- डॉ. रहीस रशीद और मुसहब अनवर भी शामिल थे।
कुख्यात इस्लामी आतंकी संगठन ISIS के साथ संबंधों को लेकर दीप्ति मरला उर्फ मरियम की गिरफ्तारी होने के बाद उसके माता-पिता ने उससे संबंध तोड़ लिए। कहा जाता है कि इसके लिए उसके माता-पिता ने एक समाचार पत्र में विज्ञापन देकर अपने संबंध खत्म करने की घोषणा की।

पुणे : स्कूल में PFI दे रहा मुस्लिम युवकों को हिंदू नेताओं को मारने की ट्रेनिंग: NIA ने बिल्डिंग का दो फ्लोर किया सील

                           पुणे के एक स्कूल में PFI देता था ट्रेनिंग (चित्र साभार: इंडियन एक्सप्रेस)
महाराष्ट्र के पुणे के एक स्कूल में प्रतिबंधित इस्लामी कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का ट्रेनिंग सेंटर चलता था। इसमें मुस्लिम युवकों को हिंदू नेताओं को मारने की ट्रेनिंग दी जाती थी। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने इस बहुमंजिला स्कूल के उन दो फ्लोर को सील कर दिया है, जिनका इस्तेमाल पीएफआई करता था।

सील करने की कार्रवाई 16 अप्रैल 2023 को की गई। एनआईए ने 17 अप्रैल को ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। एजेंसी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि पुणे के ‘ब्लू बेल स्कूल’ की चौथी और 5वीं मंजिल का इस्तेमाल पीएफआई करता था। इसका इस्तेमाल मुस्लिम युवकों को कट्टरपंथी बनाने और उन्हें एक समुदाय के नेताओं और संगठनों को टारगेट कर हमले को अंजाम देने की ट्रेनिंग देने के लिए किया जाता था। 

बयान के अनुसार पीएफआई मुस्लिम युवकों को संगठन में ‘भर्ती’ कर उन्हें ‘मिशन 2047’ का विरोध करने वालों पर हमला करने और उन्हें खत्म करने का प्रशिक्षण देता था। धारदार हथियार चलाने का प्रशिक्षण भी यहीं दिया जाता है। उल्लेखनीय है कि पीएफआई ने 2047 तक भारत को इस्लामी मुल्क बनाने का लक्ष्य रखा था। इसके लिए वह सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था। इसके बाद सितंबर 2022 में मोदी सरकार ने पीएफआई पर प्रतिबंध लगाते हुए इस ‘गैर कानूनी संगठन’ घोषित कर दिया था।

NIA की ओर से जारी बयान से पता चलता है कि पुणे के ब्लू बेल स्कूल परिसर के दो मंजिल की तलाशी सितंबर 2022 में ली गई थी। इस दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए थे। इनसे पता चला था कि इन फ्लोर का इस्तेमाल पीएफआई से जुड़े लोग अपने कैडर को हथियार चलाने की ट्रेनिंग देने के लिए करते थे। मुस्लिम युवाओं को सरकार और एक समुदाय के खिलाफ भड़काया जाता था। जाँच से यह बात सामने आई है कि प्रमुख हिंदू नेताओं पर हमले और उनकी हत्या करने के लिए चाकू, दरांती जैसे खतरनाक हथियारों के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया गया था।

एनआईए ने ताजा कार्रवाई गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के प्रावधानों के तहत की है। यह कार्रवाई पिछले साल अप्रैल में पीएफआई के खिलाफ दर्ज एक प्राथमिकी से संबंधित है। इस साल मार्च में एनआईए ने दिल्ली की एक अदालत में आरोप पत्र दायर करते हुए 20 को नामजद किया था।

बंगाल में मिला था 81000 डेटोनेटर, 27000 Kg अमोनियम नाइट्रेट… 2750 टन अमोनियम नाइट्रेट से हुआ था बेरुत धमाका

बेरूत में हुए धमाके से दहल गया थी पूरी दुनिया (फोटो साभार: CW)
राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने रविवार (2 अप्रैल 2023) को आतंकी गतिविधियों के दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों की पहचान मेराजुद्दीन अली खान और मीर मोहम्मद नुरुज्जमां के रूप में हुई है। इन लोगों ने इतने अधिक विस्फोटक जमा कर लिए थे कि साल 2020 में हुए बेरूत धमाके की दहशत को ताजा कर दिया था।

पश्चिम बंगाल एसटीएफ (West Bengal STF) ने जून 2022 में कोलकाता से एक टाटा सूमो कार सहित कई जगहों से भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद किया था। इनमें 81,000 इलेक्ट्रिक डेटोनेटर, 27000 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट और 1625 किलोग्राम जिलेटिन छड़ें शामिल थीं।

आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं विस्फोटक की मात्रा बड़ा विषय

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में 81000 इलेक्ट्रिक डेटोनेटर और 27000 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट का जखीरा मिलने का सीधा मतलब यह था कि देश में एक बड़ी आतंकी साजिश को अंजाम देने की योजना बनाई गई थी।
इस विस्फोटक से यदि धमाका होता तो कोलकाता जैसा बड़ा शहर पूरी तरह से दहल जाता। यही नहीं, यदि किसी भीड़-भाड़ वाले इलाके में यह धमाका होता तो कई किलोमीटर तक लाशें बिछ जातीं और तबाही का मंजर लोगों को भूलाए नहीं भूलता।
इस मामले में अब तक कुल 4 संदिग्धों की गिरफ्तारी हुई है। पहली गिरफ्तारी जून 2022 में ही हुई थी। जिस टाटा सूमो कार में डेटोनेटर ले जाया जा रहा था, उसके ड्राइवर को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद सितंबर 2022 में मामला राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को सौंपा गया।
इसके बाद NIA ने इस साल की शुरुआत यानी जनवरी 2023 में रिंटू शेख नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। इसके बाद अब मेराजुद्दीन अली खान और मीर मोहम्मद नुरुज्जमां की गिरफ्तारी हुई है। इन दोनों ने ही रिंटू शेख को विस्फोटक सप्लाई किए थे।

बेरूत की चर्चा क्यों?

4 अगस्त 2020 की तारीख लेबनान के इतिहास में काले दिन के रूप में दर्ज है। इस दिन राजधानी बेरूत के पोर्ट इलाके में हुए धमाके से 10 किलोमीटर के दायरे में तबाही मच गई थी। इस भीषण दुर्घटना का वीडियो भी सामने आया था। वीडियो में एक वेयरहाउस से धुँआ निकलते हुए देखा गया।
इसके बाद अचानक ही भयानक विस्फोट हुआ। इस धमाके की तीव्रता का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि इसकी गूँज करीब 200 किलोमीटर दूर तक सुनी गई थी। इस दुर्घटना में 218 लोग मारे गए थे। वहीं 6,000 से अधिक घायल हुए थे।
इस धमाके को लेकर लेबनान के राष्ट्रपति मिशेल आउन ने कहा था कि बेरूत के पोर्ट इलाके में स्थित एक वेयरहाउस में 2750 टन (27,50,000 किलोग्राम) अमोनियम नाइट्रेट असुरक्षित रूप से रखा हुआ था। इसी अमोनियम नाइट्रेट की वजह से भीषण धमाका हुआ।
इस धमाके को लेकर अमेरिका के जियोलॉजिकल सर्वे के भूगर्भ वैज्ञानिकों ने कहा था कि यह धमाका 3.3 तीव्रता के भूकंप की तरह था। चूँकि यह धमाका पोर्ट इलाके यानी बंदरगाह क्षेत्र में हुआ था। जहाँ आमतौर पर लोगों की संख्या अधिक नहीं होती है, लेकिन यदि यह धमाका शहर के बीच में हुआ होता तो मरने वालों और घायलों की संख्या कहीं अधिक होती।
इसी तरह अमोनियम नाइट्रेट कई बड़े औद्योगिक हादसों से जुड़ा हुआ है। वर्ष 1947 में अमरीका के टेक्सस में 2000 टन रसायन ले जा रहे एक जहाज़ में धमाका हो गया था। इस धमाके के कारण 581 लोग मारे गए थे।

‘वोट देना गुनाह, मुस्लिम न दें’ : जामिया मस्जिद के इमाम अब्दुल अजीज के अफगानिस्तान के ISIS से संपर्क

                                      महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के ISIS नेटवर्क पर NIA का छापा
राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के 5 अलग-अलग हिस्सों में छापेमारी की है। यह छापेमारी अंतर्राष्ट्रीय आतंकी समूह ISIS से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ की गई है। बताया जा रहा है कि NIA को मौलाना अब्दुल अज़ीज़ सलाफी और उसकी गैंग की तलाश है जो यूट्यूब पर भड़काऊ वीडियो से युवाओं को कट्टरपंथ सिखा रहा है। शनिवार (11 मार्च 2023) को हुई इस छापेमारी के दौरान कई ऐसे दस्तावेज मिले हैं जिस से मौलाना की गैंग के भारत विरोधी होने के सबूत मिले हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 40 वर्षीय मौलाना अब्दुल सलाफी और उसके गुर्गे अफगानिस्तान में सक्रिय ISIS के खुरासान नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। सलाफी मध्य प्रदेश के शिवनी जिले की जामिया मस्जिद का इमाम है। वहीं इस नेटवर्क के दूसरे बड़े नाम के तौर पर 26 वर्षीय शोएब का नाम आ रहा है। शोएब की ऑटो पार्ट्स दुकान है। इन दोनों पर आरोप है कि ये भारत के लोकतंत्र से नफरत करते हैं और बाकी लोगों को भी मतदान में हिस्सा न लेने के लिए भड़काते हैं।

बताया जा रहा है कि मौलाना सलाफी और शोएब मुस्लिम युवाओं को यूट्यूब के भड़काऊ वीडियो दिखाते हैं। ये दोनों आरोपित मतदान में मुस्लिमों के हिस्सा लेने को गुनाह मानते हैं। NIA ने शुरुआती जाँच में पाया है कि मौलाना सलाफी का नेटवर्क अफगानिस्तान में चल रही ISIS की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखता है। इसी के साथ यह गैंग अन्य मुस्लिम युवकों में भी ज्यादा से ज्यादा अपनी मानसिकता डालने की फिराक में है। NIA की तलाशी में इस बावत कुछ दस्तावेज और अन्य सबूत मिलने का भी दावा किया गया है।

इस नेटवर्क से जुड़े पाए गए पुणे के तल्हा खान और सिवनी में अकरम खान के ठिकानों की तलाशी हुई है। इसके अलावा मौलाना अब्दुल अजीज सलाफी व शोएब खान के घर और दुकानों को भी खँगाला गया है। दावा किया जा रहा है कि NIA ने मौलाना अब्दुल अजीज सलाफ़ी और शोएब को हिरासत में ले कर पूछताछ भी की। यह पूछताछ जबलपुर में हुई थी जहाँ से उन्हें छोड़ दिया गया। उसके बाद उन्हें नोटिस भेजकर बेंगलुरु बुलाया गया।

जाँच एजेंसी को इस नेटवर्क की जानकारी दिल्ली पुलिस द्वारा ओखला से पकड़े गए कश्मीरी दम्पति जेब शामी और हिना बशीर से हुई पूछताछ के बाद हुई। इस कश्मीरी दम्पति का इस्लामिक स्टेट से कनेक्शन पाया गया था। इस गैंग से जुड़े एक अन्य आरोपित अब्दुल्ला बासिथ का भी नाम सामने आया है। अब्दुल्ला पहले से ही एक अन्य मामले में तिहाड़ जेल में बंद है।

ISI ने रची दरभंगा में बम ब्लास्ट की साजिश, करोड़ों की फंडिंग: जिस कैराना से हुआ था हिन्दुओं का पलायन, वहाँ से 2 आतंकी गिरफ्तार

                       दरभंगा में हुए बम ब्लास्ट के तार पाकिस्तान से जुड़े (फोटो साभार; लाइव हिंदुस्तान)
बिहार के दरभंगा में हुए बम ब्लास्ट के तार पाकिस्तान से जुड़ रहे हैं और इसके पीछे वहाँ की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI की साजिश भी सामने आ रही है। इस मामले में STF ने उत्तर प्रदेश के शामली स्थित कैराना से दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जिनसे पूछताछ जारी है। बिहार में हुए इस बम ब्लास्ट में पश्चिमी यूपी के सलीम और कासिम की भूमिका बताई जा रही है। इस ब्लास्ट के लिए करोड़ों रुपयों की फंडिंग हुई है।

ऐसे प्रश्न यह हो रहा है कि एक तरफ केंद्र सरकार आतंकवादी गतिविधियों पर पैनी नज़र रखने का दावा किया जा रहा है, तो दूसरी तरफ बम धमाकों के तार पाकिस्तान से क्यों जुड़ रहे हैं? कौन हैं इनके संरक्षक? क्यों नहीं उनको दण्डित किया जाता?

तेलंगाना के एक आतंकी को इस बम ब्लास्ट का ठेका दिया गया था। NIA (राष्ट्रीय जाँच एजेंसी) और ATS (आतंकरोधी दस्ता) इस मामले की जाँच कर रही है। कफील के पिता ने मीडिया के सामने आकर कहा है कि उनके बेटे को बेवजह फँसाया जा रहा है। सलीम ने एक पाकिस्तानी युवक की मदद से ISI से संपर्क किया था। ISI एजेंट ने पश्चिमी यूपी में धमाके के लिए उससे बात की। सलीम ने अपने दोस्त कासिम उर्फ़ कफील को इस वारदात में शामिल किया।

फिर दोनों ने तेलंगाना के सिकंदराबाद के कुछ युवकों के साथ मिल कर धमाके की साजिश रची। सुरक्षा एजेंसियाँ दोनों का पुराना रिकॉर्ड खँगाल रही है। ISI की फंडिंग के नेटवर्क की तह तक जाने के लिए कई बैंक खातों के भी डिटेल्स खँगाले जा रहे हैं। ISI की आगे भी ऐसी कोई साजिश हो सकती है। कैराना से हिन्दुओं के पलायन की बात भी सामने आई थी, वहीं अब वहाँ ISI कनेक्शन की खबर मिली है।

पश्चिमी यूपी में धमाके की साजिश दरभंगा कैसे पहुँच गई, इसका भी पता लगाया जा रहा है। जून 17, 2021 को दरभंगा रेलवे जंक्शन पर हुए ब्लास्ट का बम एक कपड़े की गठरी में रखा हुआ था। पार्सल भेजने वाले का नाम-पता ‘सूफियाना, निवासी सिकंदराबाद’ लिखा हुआ था। उस पर लिखा मोबाइल नंबर कैराना के ही एक व्यक्ति का था। NIA की लखनऊ यूनिट ने इस ब्लास्ट को लेकर FIR दर्ज की है।

NIA की 6 सदस्यीय टीम मामले की जाँच के लिए बिहार पहुँची है। कपड़े की गाँठ में ही रह जाने के कारण इस केमिकल बम का उतना बड़ा असर नहीं हुआ था। पार्सल बुक करने वाले नंबर से जिस नंबर की बात हो रही थी, वो भी दरभंगा रेलवे स्टेशन पर सक्रिय था। फ़िलहाल ये नंबर नेपाल से सटे इलाकों में सक्रिय आ रहा है। जल्द ही इस मामले में कई अन्य आतंकियों की गिरफ्तारी हो सकती है, जिससे सारे राज़ खुल सकेंगे।

हिंसा के लिए गिलानी के दामाद को महबूबा मुफ्ती के करीबी पारा ने दिए थे 5 करोड़ रूपए

बुरहान वानी को मार गिराए जाने के बाद कश्मीर घाटी में हिंसा जारी रखने के लिए हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नेता सैयद अली शाह गिलानी के दामाद अल्ताफ अहमद शाह उर्फ अल्ताफ फंटूश को पाँच करोड़ रुपए दिए गए थे। पैसे जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के करीबी और पीडीपी नेता वहीद उर रहमान पारा ने दिए थे। मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने इसका खुलासा विशेष अदालत में हाल ही में दायर की गई चार्जशीट में किया है।

आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन का पोस्टर ब्वाय बुरहान वानी 2016 में मारा गया था। पारा को जनवरी में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने हिजबुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैय्यबा जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के साथ संपर्क रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था। जम्मू-कश्मीर में अलगाववादियों और आतंकवादी समूहों को धन मुहैया कराने के रैकेट में शामिल होने के आरोप में जुलाई 2017 में एनआईए द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद शाह पहले ही न्यायिक हिरासत में है।

चार्जशीट में कहा गया है कि पारा जुलाई 2016 में मुठभेड़ में वानी के मारे जाने के बाद अल्ताफ अहमद शाह के संपर्क में था और उसे यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि कश्मीर घाटी पूरी तरह अशांत रहनी चाहिए। पथराव और हिंसात्मक घटनाएँ व्यापक पैमाने पर होनी चाहिए। 

अपने वकील के माध्यम से पारा इन आरोपों से इनकार कर रहा है और दावा कर रहा है कि उसे राजनीतिक कारणों से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद अदालत ने पूरक चार्जशीट में नाम न होने पर उसे जमानत दे दी थी। इसके बाद कश्मीर में काउंटर इंटेलिजेंस विंग द्वारा उसे फिर गिरफ्तार किया गया था और तब से वह जेल में है। श्रीनगर में एनआईए अदालत ने उनकी जमानत खारिज कर दी थी। पीडीपी ने पहले दावा किया था कि केंद्र सरकार पारा पर एक रणनीति के तहत दबाव बना रही थी कि वह पाला बदल कर भाजपा में शामिल हो जाए।

इससे पहले एनआईए की चार्जशीट से यह बात सामने आई थी कि पारा कश्मीर में पत्थरबाजों का गैंग चलाता था। आतंकियों के लिए हथियारों का भी इंतजाम करता था। वहीद उर रहमान सहित 3 लोगों के खिलाफ दायर एक चार्जशीट में बताया गया है कि पीडीपी नेता ‘पत्थरबाजी’ का रैकेट चलाता था और दक्षिण कश्मीर में हथियार की तस्करी का काम भी करता था।

चार्जशीट के अनुसार, पारा ने दक्षिण कश्मीर में पत्थरबाजी का रैकेट चलाया, जिसे उसने साल 2010-11 में संगठित किया था। उसने पॉलिटिकल माइलेज पाने के लिए पुलवामा में ऐसे 20-25 लड़कों को इकट्ठा किया था जो पत्थरबाजी में शामिल थे। इसके अलावा चार्जशीट में बताया गया है पारा ने पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैय्यबा के आतंकी कमांडर अबू दुजाना को 10 लाख रुपए की फंडिंग उपलब्ध कराई थी। वह नियमित रूप से आतंकियों और अलगाववादियों कि फंडिंग कर रहा था, ताकि घाटी में स्थिति खराब बनी रहे। साथ ही चार्जशीट में PDP द्वारा आतंकियों और अलगगववादियों के तुष्टीकरण की नीति के बारे में भी खुलासा किया गया है।

ये पूरा मामला हिजबुल कमांडर नवीद बाबू के साथ पकड़े गए डीएसपी दविंदर सिंह व अन्य की गिरफ्तारी से जुड़ा है। जाँच में येपाया गया है कि इरफान शफी मीर, दविंदर सिंह और सैयद नवीद मुश्ताक के साथ पारा इस अपराधिक साजिश में शामिल था।

अब्बू ने खोली शेहला रशीद की पोल, देश विरोधी गतिविधि में शामिल होने का किया दावा

भारतीय सेना पर आरोप लगाने वाली और टुकड़े-टुकड़े गैंग की सदस्य शेहला रशीद के अब्बू ने उनकी पोल खोल दी है। शेहला रशीद के खिलाफ उनके पिता अब्दुल शोरा ने शिकायत दर्ज कराई है। अब्दुल शोरा का कहना है कि बेटी शेहला उन्हें जान से मारने की धमकी दे रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि ‘शेहला कुख्यात गतिविधियों में शामिल है।’

ऐसे में चर्चा यह भी है कि इतने समय बाद एक बाप अपनी ही बेटी के विरुद्ध पुलिस को सूचित कर रहा है? क्या शेहला के बाप को बेटी पर जाँच एजेंसीज के हाथ पहुँचने की खबर लग गयी थी, जिससे घबरा कर बाप अपना दामन बचाकर अपनी बेटी शेहला पर सारा दोष डाल अपने आपको बचा रहा है? देश की इतनी चिंता थी, तो जब घर में चांदी के सिक्कों की बारिश हो रही थी, तब क्यों नहीं बेटी से पूछा और पुलिस को सूचना दी?चलो देर आए, दुरुस्त आए। 

जम्मू-कश्मीर के डीजीपी को दी अपनी शिकायत में उन्होंने शेहला की कुख्यात गतिविधियों को उजागर किया है। साथ ही शेहला की बैंक अकाउंट की जांच की मांग की है।

अब इस पर प्रश्न उठने लाजमी हैं, देखो इन प्रश्नों का जवाब देने कौन आगे आता है:-  शिकायत पत्र में अब्दुल रशीद शोरा ने दावा किया कि शेहला ने कश्मीर की राजनीति में शामिल होने के लिए कुख्यात लोगों से तीन करोड़ रुपये लिए हैं। उन्होंने मांग की है कि फिरोज पीरजादा, जहूर वटाली (एनआईए द्वारा गिरफ्तार) और रशीद इंजीनियर के बीच वित्तीय डील की जांच की जाए।

जाहिर है कि पिछले दिनों शेहला रशीद के खिलाफ दिल्‍ली पुलिस की स्‍पेशल सेल ने देशद्रोह के साथ कई अन्‍य धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी। शेहला रशीद पर जम्मू-कश्मीर से धारा-370 हटाए जाने के बाद मौजूदा हालात को लेकर भारतीय सेना के खिलाफ झूठी खबरें फैलाने का आरोप था। शेहला ने भारतीय सेना पर कश्मीर के लोगों को प्रताड़ित करने और दहशत फैलाने जैसे कई आरोप लगाए थे।

‘Kill नरेंद्र मोदी’ : प्रधानमंत्री की हत्या की रची जा रही साजिश

PM Modi to launch direct tax reforms platform, 'Transparent Taxation -  Honouring the Honest'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या को लेकर बड़ी साजिश रची जाने की बात सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस संबंध में राष्ट्रीय जॉंच एजेंसी (NIA) ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर आगाह किया है। गृह मंत्रालय ने इससे एसपीजी को अवगत कराया है जिस पर प्रधानमंत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी है।
एनआईए को धमकी भरे कुछ ई-मेल मिले हैं। इनमें PM मोदी की हत्या की बात कही गई है। इस ई मेल में 3 शब्द लिखे गए हैं- किल नरेंद्र मोदी (Kill Narendra Modi)। फिलहाल ई-मेल के कंटेंट की जाँच की जा रही है।
मोदी को मारने की साज़िश तो तब से रची जा रही है, जिस समय यह गुजरात के मुख्यमंत्री थे। तभी से आतंकवादियों की लिस्ट में सबसे पहला नाम नरेंद्र मोदी ही का है, जिसका खुलासा पकडे गए एक आतंकवादी, शायद अबू जुंदाल, ने ही किया था। जब उसने कहा था कि मोदी को मारने का मतलब बहुत गलत होगा, इंडिया में कितने मुसलमान बचेंगे कहना मुश्किल है। यानि मुख्यमंत्री रहने पर इतना डर था। उसका कारण है, क्योकि मुख्यमंत्री होने से अब प्रधानमंत्री बनने पर मोदी किसी अपराधी को बक्शते नहीं। दूसरे, 2014 चुनाव के दौरान बिहार में हुई रैली में रैली स्थल के निकट कितने धमाके हुए थे, सबने अपने-अपने टीवी पर देखा था।   
टाइम्स नाउ की रिपार्ट के अनुसार, एनआईए ने गृह मंत्रालय एक पत्र लिखकर प्रधानमंत्री मोदी को हत्या वाले ई-मेल की जानकारी दी है। एजेंसी ने अपने पत्र में लिखा, “एनआईए को एक ईमेल आईडी मिली है जिसमें कुछ गणमान्य लोगों की हत्या की बात कही गई है। ई-मेल में मौजूद कंटेंट इसकी तस्दीक करते हैं। इस पत्र के साथ ही ई-मेल की कॉपी भी लगाई गई है। इस मामले में एनआईए ने उचित कार्रवाई करने का अनुरोध भी किया है।
यह मेल 8 अगस्त को जारी किया गया था। जिसमें सभी सुरक्षा एजेंसियों के खतरे के साथ प्रधानमंत्री के जीवन पर भी सीधे खतरे की बात की गई है। ई-मेल का पता लगने के बाद सुरक्षा एजेन्सियाँ चौकन्नी हो गई हैं। खतरे के मद्देनजर प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा कवच को बढ़ा दिया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार एनआईए ने इस मामले में अपनी ओर से किसी भी प्रकार से की जाँच नहीं की है। बता दें इस पूरे मामले से गृह मंत्रालय ने एसपीजी को अवगत कराया है। स्पेशल प्रोटक्शन ग्रुप यानी एसपीजी ही पीएम मोदी की सुरक्षा करता है।
एनआईए कई प्रमुख सुरक्षा एजेंसियों के भी संपर्क में है। इनमें रॉ, खुफिया ब्यूरो (आईबी), डिफेंस इंटेलिजेंस के प्रतिनिधि शामिल हैं। गौरतलब है कि यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब प्रधानमंत्री मोदी के प्रति नफरत की राजनीतिक को बढ़ावा दिया जा रहा है। ई-मेल का खुलासा होने के बाद बाहरी तत्वों पर सख्ती से नजर रखी जा रही है। आतंकी हमलों को लेकर सुरक्षा एजेंसियॉं पहले ही अलर्ट कर चुकी हैं।

NIA का खुलासा : UAE दूतावास की सील-राजकीय चिन्ह से छेड़छाड़ कर आतंक के लिए 10 महीने में 150 किलो सोने की तस्करी

150 किलो सोने की तस्करीराष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने केरल सोना तस्करी मामले में आतंकी गतिविधि की संलिप्तता की आशंका जाहिर की है। NIA ने खुलासा किया है कि पिछले 10 महीनों में केरल में लगभग 150 किलोग्राम सोने की तस्करी की गई थी।
एजेंसी ने अदालत को बताया कि जाँच में यह भी पता चला है कि तस्करी मुख्य रूप से आभूषण बनाने में नहीं बल्कि आतंकी गतिविधियों के लिए किया जाता था, क्योंकि नकदी में लेन-देन करना मुश्किल हो गया था। एनआईए ने अदालत में कहा कि आरोपितों ने सोना तस्करी के लिए यूएई दूतावास की सील और राजकीय चिन्ह से छेड़छाड़ कर अपराध को अंंजाम दिया।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, “कई एजेंसियों द्वारा की गई शुरुआती जाँच से पता चला है कि गिरोह सितंबर 2019 से सोने की तस्करी कर रहा था। उन्होंने अब तक लगभग 150 किलोग्राम सोने की तस्करी की थी। संदिग्धों से पूछताछ से उनके तौर-तरीके और अन्य लोगों पर प्रकाश डाला जा सकता है।”
एनआईए कोर्ट ने सोमवार (13 जुलाई, 2020) को प्रमुख संदिग्धों स्वप्ना सुरेश और संदीप नायर को 21 जुलाई तक एजेंसी की हिरासत में भेज दिया। एनआईए ने मामले में दोनों को हिरासत में लेने की माँग की थी।
एनआईए ने केरल हाईकोर्ट को बताया था कि राजनयिक के सामान के जरिए सोने की तस्करी करने की कोशिश करने वाली महिला स्वप्ना सुरेश के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
हिरासत के आवेदन को आगे बढ़ाते हुए, एजेंसी ने अदालत को बताया कि गृह मंत्रालय ने प्रारंभिक जाँच की थी और पाया था कि तस्करी का सोना आतंकवादी गतिविधियों के लिए उपयोग किया जाता था। एनआईए के अनुसार, एक विस्तृत जाँच की आवश्यकता है क्योंकि इसमें भारत-यूएई द्विपक्षीय संबंध शामिल हैं। यूएई ने भी इस घटना की जाँच शुरू की है।
कोच्चि स्थित एनआईए अदालत को सूचित किया गया कि स्वप्ना सुरेश और सरिथ, जो पहले यूएई वाणिज्य दूतावास के कर्मचारी थे, ने राजनयिक सामान की आवाजाही के बारे में सीखा और सोने की तस्करी करने के लिए इसे मॉडस ऑपरेंडी के रूप में इस्तेमाल किया।
अदालत की कार्यवाही के दौरान, एक अभियुक्त संदीप नायर ने दावा किया कि खेप को यूएई के राजनयिक को संबोधित किया गया था जिसका नाम राशिद अल शिमिली है। उन्होंने सवाल किया कि राजनयिक की भूमिका की जाँच क्यों नहीं की जा रही है।
सोने की तस्करी के मामले में रविवार (12 जुलाई, 2020) को सीमा शुल्क विशेष जाँच दल द्वारा मलप्पुरम स्थित व्यवसायी के टी रमीज की गिरफ्तारी से जाँच में और तेजी आने की उम्मीद है।
केरल में सोने की तस्करी के रैकेट के लिंचपिन माने जाने वाले रमीज को रविवार(12 जुलाई, 2020) की रात में पेरिन्थलम्ना के पास वेटाठूर में उसके निवास से गिरफ्तार किया गया था।
कस्टम अधिकारी के अनुसार, रमीज की गिरफ्तारी सोने की तस्करी मामले की जाँच की तेजी के लिए महत्वपूर्ण थी। इसने राज्य पर आरोप लगाया है कि तस्करी के रैकेट में एक अन्य प्रमुख खिलाड़ी स्वप्ना सुरेश का केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के कार्यालय से घनिष्ठ संबंध है।
रमीज को एक निवेशक और राज्य में सोने की तस्करी का वितरक कहा जाता है और कस्टम अधिकारी उम्मीद कर रहे हैं कि उसकी हिरासत में पूछताछ से सोने की तस्करी रैकेट में निवेशकों का ब्योरा मिल सकता है। इसके साथ ही तस्करी के समन्वय में शामिल प्रमुख कर्मी और स्वप्ना सुरेश एवं संदीप नायर की भागीदारी केे बारे में खुलासा हो सकता है।
स्वप्ना और सरिथ दोनों यूएई वाणिज्य दूतावास के कर्मचारी थे और अज्ञात कारणों के चलते उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। हालाँकि, उन्हें वहाँ काम करने के दौरान राजनयिक सामान की आवाजाही के बारे में पता चल गया था। बाद में, उन्होंने संदीप सहित अन्य संदिग्धों के साथ साजिश रची और 2019 में सोने की तस्करी शुरू कर दी।
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राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने केरल में बड़े पैमाने पर सोना तस्करी को देश की सुरक्षा और आर्थिक स्थायित्व पर खतरा बतात....
जाँच एजेंसी की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया था कि केरल सोना तस्करी मामले में गैर कानूनी गतिविधि (निवारक) अधिनियम, 1967 की धारा 16, 17 और 18 के तहत चार आरोपितों– पीएस सरिथ, स्वप्ना प्रभा सुरेश, फाजिल फरीद और संदीप नायर के खिलाफ त्रिवेंद्रम अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे से पाँच जुलाई को कस्टम (प्रीवेंटिव) कमिश्नरेट, कोचीन द्वारा 14.82 करोड़ रुपए मूल्य के 24 कैरेट के 30 किलोग्राम सोने की बरामदगी के सिलसिले में एक प्राथमिकी दर्ज की गई है।

केरल : क्या आतंकी फंडिंग के लिए लाया गया सोना?

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राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने केरल में बड़े पैमाने पर सोना तस्करी को देश की सुरक्षा और आर्थिक स्थायित्व पर खतरा बताते हुए आतंकी कार्रवाई करार दिया है। गृह मंत्रालय से हरी झंडी मिलने के बाद NIA ने गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (UAPA) की आतंकवाद से जुड़ी धाराओं के तहत FIR दर्ज की है। 
NIA ने प्रमुख संदिग्ध स्वप्‍ना सुरेश सहित चार लोगों के खिलाफ एक FIR दर्ज की। जाँच एजेंसी की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि केरल सोना तस्करी मामले में गैर कानूनी गतिविधि (निवारक) अधिनियम, 1967 की धारा 16, 17 और 18 के तहत चार आरोपितों– पीएस सरित, स्वप्‍ना प्रभा सुरेश, फाजिल फरीद और संदीप नायर के खिलाफ त्रिवेंद्रम अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे से पाँच जुलाई को कस्टम (प्रीवेंटिव) कमिशनरेट, कोचीन द्वारा 14.82 करोड़ रुपए मूल्य के 24 कैरेट के 30 किलोग्राम सोने की बरामदगी के सिलसिले में एक प्राथमिकी दर्ज की गई है।

इसके साथ ही स्वप्ना सुरेश की अग्रिम जमानत याचिका पर केरल उच्च न्यायालय ने मंगलवार तक सुनवाई स्थगित कर दी है। केंद्र सरकार के वकील रवि प्रकाश ने अदालत से NIA एक्ट की धारा 21 का जिक्र करते हुए कहा, “चूँकि इसकी जाँच एनआईए कर रही है, इसलिए उच्च न्यायालय जमानत याचिका पर विचार नहीं कर सकता है और मामले को विशेष अदालत द्वारा निपटाया जाना चाहिए।” वहीं, एनआईए ने भी इस मामले में अग्रिम जमानत याचिका का विरोध किया है।
सीजीसी ने कहा कि जाँच के लिए स्वप्ना सुरेश से हिरासत में पूछताछ आवश्यक थी। वहीं कस्टम्स को सोर्स के जरिए जानकारी प्राप्त हुई कि तीन व्यक्ति, पी आर सरित, संदीप नायर और स्वप्ना सुरेश ने डिप्लोमैटिक अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए सोने की तस्करी में शामिल थे।
तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एयर कार्गो के माध्यम से यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) से आए एक राजनयिक के सामान से 30 किलोग्राम सोना जब्त किया गया था। इसका मूल्य लगभग 15 करोड़ रुपए बताया जा रहा है।
इसके बाद उस व्यक्ति सरित कुमार को कस्टम विभाग ने हिरासत में ले लिया। पूछताछ में सरित ने बताया कि वह लगभग एक साल से हवाई अड्डे से इस तरह का सामान ले जा रहा था। सरित ने बताया कि उनकी एक सहयोगी केरल सरकार के आईटी विभाग की एक कर्मचारी है जिसका नाम स्वप्ना सुरेश है। सुरेश से पूछताछ करने के लिए जब विभाग हरकत में आया तो पता चला कि वो सामान खोले जाने के एक दिन पहले से लापता है।
सीजीसी ने आगे कहा कि सरित और संध्या (संदीप नायर की पत्नी) के बयान, सीमा शुल्क अधिनियम की धारा 108 के तहत दर्ज किए गए हैं। इन बयानों से पता चला कि स्वप्ना सुरेश सामान की डिलीवरी के लिए राजनयिक कागजात की व्यवस्था करने में शामिल थी।
स्वप्ना सुरेश के साथ मुख्यमंत्री के विजयन के नजदीकी को लेकर केरल में राजनीतिक घमासान मचा हुआ है। विपक्ष मुख्यमंत्री के इस्तीफे की माँग कर रहा है। एनआइए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में सोना तस्करी सीधे तौर पर देश की आर्थिक स्थिरता पर हमले की कोशिश है। साथ ही इसका उपयोग आतंकी फंडिंग के लिए किए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। 
मामला खुलने के बाद केरल के प्रमुख सचिव एम शिवशंकर को पद से हटा दिया गया है। स्वप्ना, एम शिवशंकर की करीबी है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री कार्यालय व सरकार के वरिष्ठ अधिकारी पूरे मामले को रफा-दफा करने के लिए कस्टम के अधिकारियों पर दबाव बना रहे थे।
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केरल की कम्युनिस्ट सरकार का नाम एक बार फिर से एक बड़े स्कैंडल में आया है और इस बार सीधे मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन का ...
मामले में सरित को भी गिरफ़्तार कर लिया गया है। केरल भाजपा अध्यक्ष के सुरेंद्रन का कहना है कि मुख्यमंत्री कार्यालय से कस्टम अधिकारियों को फोन कॉल्स किए गए ताकि जाँच रोकी जा सके। उनका कहना है कि ये फोन कॉल मुख्यमंत्री के किसी क़रीबी ने ही किया था। CM विजयन ने इसे एक ‘बेहूदा’ आरोप करार दिया। उन्होंने कहा कि संदिग्ध बैकग्राउंड वाले लोगों को सीएमओ में कोई काम दिया ही नहीं जाता है।

NIA की गिरफ्त में तानिया परवीन: हाफिज सईद को करती थी रिपोर्ट

तानिया परवीन, NIA
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
जब कभी इंडो-पाक युद्ध या पाकिस्तान के विरुद्ध कोई कार्यवाही, भारत में पल रहे पाकिस्तान के स्लीपर सैल्स हरकत में आ जाते हैं। और ये स्लीपर सामान्य जनजीवन से लेकर सियासत तक में फन फैलाए बैठे हैं। "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" के नाम से हिन्दुत्व को बदनाम करने वाले यही स्लीपर सैल्स हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वो किस धर्म अथवा जाति से हैं। 
ज्ञात हो, 1965 इंडो-पाक युद्ध के दौरान भारत सरकार को दो स्तर यानि सीमा और देश के अंदर लड़ाई लड़नी पड़ी थी। घरों से ट्रांसमीटर पकडे गए थे, लेकिन ताशकंत से तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के निधन ने उन सभी देशद्रोही को आज़ाद कर दिया। परन्तु वर्तमान सरकार पाकिस्तान से कोई युद्ध करने से पूर्व ही देशद्रोहियों पर नकेल डाल रही है। सरकार को उस समय की फाइल भी खोलनी होगी, ताकि उन पर भी नकेल डाली जा सके। 
तानिया परवीन को शुक्रवार (जून 12, 2020) को केंद्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने अपनी हिरासत में ले लिया। वह दमदम सेंट्रल जेल में बंद थी। कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने उसे उत्तर 24 परगना जिले के बादुरिया से लश्कर-ए-तैयबा से संबंध रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
NIA की पूछताछ में तानिया से लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ी काफी जानकारी मिल सकती है, जिसका खुलासा उसने अब तक नहीं किया है। उसने बंगाल समेत किन-किन राज्यों में कितने स्लीपर सेल तैयार किए हैं इसका भी पता लगाया जाएगा। इसके साथ ही NIA उससे पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि उसने सेना के कितने कर्मचारियों को हनीट्रैप में फँसाया था एवं उसके इस अभियान में और कौन-कौन शामिल हैं।
तानिया परवीन को 20 मार्च 2020 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उसे 14 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया था। बताया जाता है कि तानिया 10 साल पहले बांग्लादेश से घुसपैठ कर भारत में आई थी। वह लश्कर के लिए युवाओं की भर्तियाँ करती थी। सरकारी सूचनाओं को पाने के लिए वो हनी-ट्रैपिंग का सहारा लेती थी। कई बड़े अधिकारियों व नेताओं तक उसकी पहुँच होने की बात कही जाती है। 
तानिया के पास से कई पाकिस्तानी सिम कार्ड्स मिले थे। उसके पास से जब्त की गई डायरी और दस्तावेजों से पता चला है कि उसने काफ़ी संवेदनशील सूचनाएँ जुटा ली थी।

वह मुंबई के 26/11 हमलों के मास्टरमाइंड और आतंकी सरगना हाफ़िज़ सईद से भी 2 बार बातचीत कर चुकी है। वो पिछले 2 साल से लश्कर के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही थी और उस क्षेत्र में कई बार भड़काऊ भाषण भी दे चुकी है।
पश्चिम बंगाल की सोशल टास्क फोर्स द्वारा पूछताछ में पता चला था कि आतंकी तानिया परवीन के व्हाट्सप्प ग्रुप में हाफ़िज़ सईद के दो करीबियों के नंबर मिले थे। इन्हीं दोनों के माध्यम से मुंबई हमले का मास्टरमंड तानिया को सन्देश भेजा करता था। तानिया को हवाला का जरिए रुपए भी भेजे गए थे। गिरफ़्तारी से पहले वो बांग्लादेश सीमा पर विभिन्न आतंकी संगठनों को एकजुट कर बड़े हमले की साजिश रचने में लगी हुई थी। उसके बैंक खाते में करोड़ों रुपए का लेन-देन हो रहा था, इसके बाद से ही परवीन की गतिविधियों पर संदेह होने लगा था।
तानिया का मुख्य लक्ष्य इस्लामिक राज्य की स्थापना करना था। इसके लिए उसे खूँखार वैश्विक आतंकी संगठन आईएसआईएस से प्रेरणा मिली थी। वो उसी तर्ज पर काम करते हुए एक इस्लामिक स्टेट की स्थापना करना चाहती थी। पाकिस्तान से उसके आकाओं ने उसे कई भड़काऊ पुस्तकें भेजी थीं, जिसे पढ़ कर उसकी सोच और भी कट्टरवादी हो गई थी।
तानिया ने मुर्शिदाबाद में कई आतंकी शिविर भी बना रखे थे, जहाँ वो अपने लोगों को भड़काऊ भाषण देने के लिए प्रशिक्षण देती थी। वहाँ वो लोगों को ‘जिहाद’ सिखाती थी और आतंकी गतिविधियों के संचालन के गुर भी सिखाती थी। वो कुछ दिनों बाद अत्याधुनिक हथियार चलाने की ट्रेनिंग लेने पाकिस्तान जाने वाली थी। वह बांग्लादेश होकर पाकिस्तान जाने वाली थी, जहाँ वो आईएसआई अधिकारियों से मिलने वाली थी। वो आतंकी संगठन के लिए मोटी रकम भी जुटा रही थी।
3 साल से लश्कर से जुडी तानिया को ‘जिहाद’ का प्रशिक्षण इन्हीं किताबों के जरिए मिला। पुलवामा में सीआरपीएफ के जवानों पर हुए हमले के बाद उसकी फोटो शेयर कर के तानिया ने आतंकियों की प्रशंसा भी की थी। तानिया अक्सर मदरसों का दौरा करती थी और वहाँ भड़काऊ भाषण देकर लश्कर के लिए लोग जुटाती थी।
उसका उद्देश्य युवाओं, ख़ासकर छात्र-छात्राओं को कट्टरपंथी बना कर उन्हें आतंकी संगठनों से जोड़ना था। तानिया ने मुर्शिदाबाद में कई आतंकी शिविर भी बना रखे थे, जहाँ वो अपने लोगों को भड़काऊ भाषण देने के लिए प्रशिक्षण देती थी। वहाँ वो लोगों को ‘जिहाद’ सिखाती थी और आतंकी गतिविधियों के संचालन के गुर भी सिखाती थी। वो कुछ दिनों बाद अत्याधुनिक हथियार चलाने की ट्रेनिंग लेने पाकिस्तान जाने वाली थी। वह बांग्लादेश होकर पाकिस्तान जाने वाली थी, जहाँ वो आईएसआई अधिकारियों से मिलने वाली थी। 

बंगाल में छिपा है JMB का सरगना मोहम्मद सलाउद्दीन

ढाका कैफे हमला
ढाका के कैफे पर हुए हमले में मारी गई तारुषि जैन के परिजन। हमले में 18 विदेशियों सहित 22 की मौत हो गई थी
                                                                                                                                         (फाइल फोटो)
आतंकी संगठन जमात उल मुजाहिद्दीन बांग्लादेश (जेएमबी) का सरगना कुख्यात आतंकी मोहम्मद सलाउद्दीन उर्फ सालेहान पश्चिम बंगाल में छिपा हुआ है। मीडिया रिपोर्टों में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) के सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी गई है। सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ महीनों से वह बांग्लादेश सीमा से सटे पश्चिम बंगाल के किसी जिले में छिपा हुआ है। NIA की टीम उत्तर 24 परगना, नदिया, मुर्शिदाबाद, मालदह, उत्तर दिनाजपुर, कूचबिहार जिलों में उसकी तलाश कर रही है।
सलाहुद्दीन को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में 2016 में होली आर्टिसन कैफे में हुए धमाके में मौत की सजा सुनाई गई थी। वह बोधगया और खागड़ागढ़ धमाकों में भी वांछित है। तीन मौकों पर वह एजेसियों को झॉंसा दे चुका है।
NIA के एक अधिकारी ने बताया कि सलाउद्दीन ने तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल में जाकर जेएमबी का प्रचार-प्रसार किया। उन्होंने बताया कि जाँच के दौरान अगस्त 2018 में खागड़ागढ़ में हुए विस्फोट मामले के मुख्य आरोपित जहीदुल इस्लाम को गिरफ्तार किया गया। उससे पूछताछ में सलाउद्दीन के भारत में छिपे होने की बात पता चली थी। उसने बताया कि सलाउद्दीन भारत के दक्षिणी राज्यों में कहीं छुपा हुआ है।
NIA को जाँच के दौरान पता चला कि सलाउद्दीन कूचबिहार, उत्तरी दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद और नादिया गाँवों में छिपा हुआ है, जो कि भारत-बांग्लादेश सीमा क्षेत्र में हैं। जाँच एजेंसी ने बताया कि सलाउद्दीन कूचबिहार के गीतालदाहा गाँव में धर्म प्रचारक के रूप में रह रहा था। मगर पुलिस के छापा मारने के एक दिन पहले ही वह वहाँ से फरार हो गया। इसके बाद उसके मुर्शिदाबाद जिले के मुकीमनगर गाँव में रहने की सूचना मिली, लेकिन इस बार भी वो जाँच एजेंसी को चकमा देने में कामयाब रहा। NIA ने पिछले हफ्ते कूचबिहार के चांगरबंधा गाँव में छापा मारा था, लेकिन संदिग्ध वहाँ भी नहीं मिला। हालाँकि इस दौरान जाँच एजेंसी ने उसके एक सहयोगी को गिरफ्तार कर लिया।
जानकारी के मुताबिक बांग्लादेशी व्यापारी, जो कि अब सऊदी अरब में बस गए हैं, वो जेएमबी को फंडिंग देते हैं। ये बांग्लादेशी व्यापारी ही इस आतंकी संगठन को हथियार और गोला-बारूद खरीदने के लिए पैसा देते हैं और उनके साथ संपर्क स्थापित करने के लिए ये लोग ओनियन ब्राउजर का इस्तेमाल करते हैं।
ढाका के कैफे पर एक जुलाई 2016 को हुए हमले में 22 लोगों की मौत हो गई थी। इनमें एक भारतीय सहित 18 विदेशी थे। कैफे पर करीब 10 घंटे तक आतंकवादियों ने कब्जा जमाए रखा था। इस मामले में पिछले साल ढाका की अदालत ने 7 आतंकियों को मौत की सजा सुनाई थी। सलाउद्दीन और उसके साथियों को जब सजा सुनाई जा रही थी तो उनमें से कुछ ने अदालत में ही अल्लाहु अकबर के नारे लगाए थे।
राज्य के गृह मंत्री का खुलासा (तस्वीर ANI से साभार)
राज्य के गृह मंत्री का खुलासा (तस्वीर ANI से साभार)
बंगलुरु ही नहीं, मैसूर में भी सक्रिय JMB जिहादी सेल: गृहमंत्री कर्नाटक कर्नाटक के गृह मंत्री बासवराज बोम्मई ने दावा किया है कि बंगलुरु और मैसूर शहर जिहादी गतिविधियों के केंद्र बनते जा रहे हैं। उन्होंने इन राज्यों में आतंकियों के स्लीपर सेल सक्रिय होने की बात कही है। उन्होंने जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) संगठन का नाम भी लिया है।
बोम्मई के अनुसार इन जिहादियों की गतिविधियाँ तटीय कर्नाटक के साथ-साथ राज्य के आंतरिक हिस्सों में भी बढ़ गईं हैं। उनके अलावा NIA प्रमुख वाईसी मोदी ने भी हाल ही में JMB की गतिविधियों को लेकर बयान दिया था। उन्होंने संगठन के कर्नाटक के अतिरिक्त झारखंड, महाराष्ट्र, केरल, असम में भी सक्रिय होने की बात कही थी। NIA के महानिरीक्षक ने भी बंगलुरु में इस संगठन के 20-22 ठिकाने होने का दावा किया था

बोम्मई ने कहा, “हमारे पुलिस वाले सभी एहतियात बरत रहे हैं।” बोम्मई के अनुसार JMB की सक्रियता बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के तटों के किनारे बढ़ी है। NIA के खुलासों के बारे में पूछे जाने पर बोम्मई के कहा कि एजेंसी का ज़ोर बांग्लादेशी ultras की गतिविधि और कश्मीर पर है।
“पुलिस चौकन्नी हैं खासकर कि बंगलुरु और मैसूर में। हम लोगों की सार्वजनिक स्थानों पर तलाशी ले रहे हैं, संदेहास्पद लोगों के बारे में सूचना जुटा रहे हैं और उसका विश्लेषण कर रहे हैं।”
इसके अलावा उन्होंने बंगलुरु के लिए उसका खुद का ATS (एंटी टेरर स्क्वाड) बनाने की घोषणा की। गौरतलब है कि कर्नाटक के पास पहले से ही एक एटीएस पूरे प्रदेश के लिए है।
1 नवंबर से चालू हो जाने वाली इस एटीएस का गठन बंगलुरु और उसके आसपास बहुत सारे JMB जिहादियों की गिरफ़्तारी के बाद किया गया था।