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‘बिना बुर्का के थाने क्यों ले गई पुलिस, उन पर एक्शन लो’: दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की मुस्लिम महिला की याचिका

                                                                                                                             प्रतीकात्मक चित्र
दिल्ली हाईकोर्ट ने मुस्लिम महिला को बिना बुर्का पहनाए थाने ले जाने के मामले में दायर एक याचिका को खारिज कर दिया है। इस याचिका में किसी मुस्लिम महिला को बिना बुर्का के थाने ले जाने की कार्रवाई को संवेदनशील मामला बताते हुए पुलिस पर कार्रवाई के साथ भविष्य के लिए निर्देश देने की माँग की गई थी। याचिकाकर्ता रेशमा ने खुद को पर्दानशीं बताते हुए पुलिस पर खुद को बिना बुर्का के पकड़ कर ले जाने का आरोप लगाया था। मामला की सुनवाई शुक्रवार (1 मार्च 2024) को हुई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला दिल्ली के थानाक्षेत्र चांदनी महल में पड़ने वाले रकाबगंज का है। यहाँ 2 लोगों ने खुद को पीड़ित बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में उन्होंने 3 लोगों पर आरोप लगाया था। याचिकाकर्ता रेशमा इन तीनों आरोपितों की बहन हैं। बताया जा रहा है कि रेशमा ने बालकनी से सारा झगड़ा होते देखा था। दावा यह भी है कि जब रेशमा अपने भाइयों (जो मारपीट के आरोपित हैं) द्वारा 2 लोगों (जो मार खाए, पीड़ित हैं) को पीटते देख रही थीं, तब उन्होंने बुर्का नहीं पहना था।

रेशमा के वकील ने हाईकोर्ट में आरोप लगाया कि सुबह 3 बजे दिल्ली पुलिस उनकी मुवक्किल के घर में घुसी थी। याचिका में इस कार्रवाई के दौरान पुलिस पर अभद्रता करने के साथ रेशमा को घसीट कर थाने ले जाने की भी शिकायत की गई थी।

रेशमा का यह कहना था कि पुलिस पहले से जानती थी कि वह बुर्कानशीं महिला है लेकिन उन्हें पर्दा करने का भी टाइम नहीं दिया गया। याचिका में बुर्का को रेशमा ने अपनी व्यक्तिगत पसंद बताया था और पुलिस पर कार्रवाई की माँग की थी। इस दौरान भविष्य में भी पुलिस को बुर्का वाली महिलाओं के मामलों को संवेदनशील मान कर दिशा-निर्देश देने की माँग उठाई गई थी।

रेशमा के इन तमाम आरोपों पर पुलिस ने भी अपना पक्ष अदालत में रखा। तब पुलिस ने रेशमा द्वारा लगाए गए प्रताड़ना के तमाम आरोपों को गलत बताया था। पुलिस ने यह भी दावा किया था कि खुद रेशमा ने उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए बुलाया था। पुलिस के मुताबिक तब रेशमा को यह डर था कि कहीं वो लोग उन पर हमला न कर दें, जिन्हे रेशमा के 3 भाइयों ने मिल कर पीटा है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और उनके द्वारा पेश किए गए सबूतों पर गौर किया।

याचिका की सुनवाई के बाद दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा ने अपना फैसला सुनाया। जस्टिस शर्मा ने कहा कि पुलिस की जाँच में गोपनीयता जैसी बातों के लिए जगह नहीं हो सकती। अदालत ने सुरक्षा और न्याय को ही सबसे पहली प्राथमिकता बताते हुए कहा कि इन दोनों को सुनिश्चित करने के लिए पहचान आवश्यक होती है। अदालत ने कहा कि धार्मिक या व्यक्तिगत चॉइस के नाम पर प्राइवेसी का अधिकार मिल जाने से इसके दुरूपयोग की आशंका बढ़ेगी और जाँच में रुकावट खड़ी होगी।

अंत में अदालत ने रेशमा की याचिका ख़ारिज कर दी। रेशमा की तरफ से वकील एम सूफियान सिद्दीकी, आलिया, नियाजुद्दीन और राकेश भुंगरा ने बहस की जबकि दिल्ली पुलिस का पक्ष एडिशनल स्टैंडिंग काउंसिल रुपाली बंधोपाध्याय ने रखा था।

चीन की फंडिंग से चलने वाले ‘Newsclick’ के संस्थापक और HR हेड गिरफ्तार

                                          Newsclick के प्रबीर पुरकायस्थ और अमित अमित चक्रवर्ती
दिल्ली पुलिस ने Newsclick के पत्रकारों प्रबीर पुरकायस्थ और अमित चक्रवर्ती को चीन से फंडिंग के मामले में गिरफ्तार कर लिया है। दिन भर चली छापेमारी के बाद ये कार्रवाई की गई। इस दौरान उनसे पूछताछ भी की गई। UAPA के तहत ये मामला चल रहा है। इस मामले में कुल 46 पत्रकारों से पूछताछ की गई, जिनमें से 9 महिलाएँ हैं। साथ ही कई ठिकानों पर छापेमारी की गई। ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ (NYT) की रिपोर्ट में भी खुलासा हुआ था कि इन्हें चीनी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए फंडिंग मिल रही है।

Delhi Police has arrested NewsClick Owner Prabir Purkaystha and Amit Chakarvarty in NewsClick Chinese Funding case under UA(P)A and IPC 153A,120B. @CellDelhi has questioned 46 Journalists including 9 female Journalists in this case. https://t.co/jFgVe6xms3

— Jitender Sharma (@capt_ivane) October 3, 2023

प्रबीर पुरकायस्थ ही ‘न्यूज़क्लिक’ मीडिया संस्थान के संस्थापक हैं। वहीं अमित चक्रवर्ती कंपनी के HR हेड के रूप में काम कर रहे थे। इन दोनों को मंगलवार (3 अक्टूबर, 2023) की शाम को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान कई डिजिटल उपकरण और बड़ी मात्रा में दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं, जिनकी आगे जाँच की जाएगी। फ़िलहाल जाँच चल रही है। दिल्ली NCR ही नहीं, बल्कि मुंबई में भी छापेमारी की गई।

इस मामले में बताया जा रहा है कि ‘न्यूज़क्लिक’ और उससे जुड़े पत्रकारों के परिसरों पर छापेमारी करने से कुछ घंटे पहले स्पेशल सेल के अधिकारियों ने सोमवार की आधी रात 2 बजे के आसपास बैठक की थी। लोधी कॉलोनी में स्पेशल सेल के ऑफिस में हुई इस बैठक में 200 से अधिक पुलिसकर्मियों ने बैठक में भाग लिया। किसी भी तरह की जानकारी लीक होने से रोकने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अन्य पुलिस अधिकारियों के मोबाइल फोन भी जमा कर लिए गए थे।

यह छापेमारी 17 अगस्त को दर्ज यूएपीए और आईपीसी की अन्य धाराओं के तहत दर्ज मामले पर की गई है, साथ ही आईपीसी की 153ए (दो समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और आईपीसी की 120 बी (आपराधिक साजिश) जैसी धाराएँ शामिल है। ये छापेमारी दिल्ली से लेकर मुंबई तक की गई है। मुंबई में दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल और मुंबई पुलिस की टीमों ने तीस्ता सीतलवाड़ के ठिकानों पर छापेमारी की।

दिल्ली मेट्रो में फिर से हस्तमैथुन: रक्षाबंधन पर भीड़ के बीच युवक ने नाबालिग पर गिराया स्पर्म

दिल्ली मेट्रो से एक बार फिर से शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है, जिसमें एक व्यक्ति ने भीड़ होने के बावजूद हस्तमैथुन किया और अपना स्पर्म नाबालिग लड़की पर गिरा दिया। लड़की ने इस घटना की जानकारी अपनी माँ को दी, जिसके बाद लोगों ने आरोपित को मेट्रो में ही पकड़कर खूब धुना और सुरक्षाकर्मियों के हवाले कर दिया था। आरोपित पश्चिम बंगाल का रहने वाला है।

राखी के दिन भीड़ में युवक ने की शर्मनाक हरकत

न्यूज 24 की रिपोर्ट के मुताबिक, ये घटना बुधवार (30 अगस्त 2023) की रात करीब साढ़े आठ बजे ‘रेड लाइन’ की है। रक्षाबंधन होने के कारण मेट्रो कोच में काफी भीड़ थी। नाबालिग की माँ को पता चला कि युवक ने उनकी बेटी पर अपना स्पर्म गिरा दिया है, तो वह बेटी के साथ सीलमपुर स्टेशन पर उतर गई। इस बीच दो लोगों ने आरोपित को मेट्रो में ही पकड़ लिया और उसे शाहदरा स्टेशन पर दिल्ली मेट्रो अधिकारियों के हवाले कर दिया। इस दौरान लोगों ने उसकी पिटाई भी की।
वहीं इस मामले में दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल का बयान भी आया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके कहा, “कुछ लोगों के चलते दिल्ली मेट्रो पूरे देश में बदनाम होती जा रही है। अब एक आदमी छोटी बच्ची को देखके मेट्रो में मास्टरबेशन करते हुए पकड़ा गया है। क्या घटियापन चल रहा है? हमने दिल्ली पुलिस को नोटिस इशू किया है। दिल्ली महिला आयोग मामले में सख़्त कार्यवाही करवाएगा।”
ऐसे लोगों को सख्त सजा मिलनी ही चाहिए! दिल्ली मेट्रो में कपल्स उसको लवर्स स्पॉट में तब्दील न करें ये भी सुनिश्चित करना चाहिए आजकल ये मेट्रो में ऐडल्ट ऐक्टस भी बहुत देखे जा रहे हैं! इन हरकतों से शायद ही कोई मेट्रो बचा हो। लेकिन जब तक कोई हादसा नहीं हो जाता, किसी की नींद नहीं खुलती।

पहले भी सामने आ चुके हैं कई मामले

दिल्ली मेट्रो में ऐसी घटनाएँ पहले भी आ चुकी हैं। बीती 10 अगस्त को मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन पर एक महिला को अश्लील इशारा करने के आरोपित 23 साल के युवक की गिरफ्तारी की गई थी। वहीं, 7 अगस्त को भी पुलिस ने ऐसे ही एक मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था, वो मंडी हाउस स्टेशन के दूसरे प्लेटफॉर्म पर खड़ी महिला को देखकर हस्तमैथुन करने लगा था।

अप्रैल माह में हस्तमैथुन करते युवक का वीडियो हुआ था वायरल

अप्रैल माह में एक युवक का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वो दिल्ली मेट्रो में ही सफर के दौरान पॉर्न देखते हुए हस्तमैथुन कर रहा था। उसके पास में ही एक जोड़ा इसकी वजह से काफी असहज हो रहा था। 27 सेकंड के उस वीडियो के वायरल होने के बाद दिल्ली मेट्रो प्रबंधन की काफी किरकिरी हुई थी।

दिल्ली के मुहर्रम जुलूस में पुलिस पर क्यों हुआ पथराव? 10 पुलिस वाले घायल… पश्चिम बंगाल में मुहर्रम पर दुर्गा मंदिर का रास्ता ही बंद

मुहर्रम से पहले बैरिकेड लगा ब्लॉक किया गया दुर्गा मंदिर, दिल्ली में तो पुलिस पर ही पथराव
पश्चिम बंगाल में मुहर्रम से एक दिन पहले शुक्रवार (28 जुलाई 2023) को बैरिकेड लगाकर एक दुर्गा मंदिर का रास्ता बंद करने का मामला सामने आया। यह मंदिर मालदा जिले के कालियाचक में स्थित है। बंगाल से दूर दिल्ली के नांगलोई में मुहर्रम पर ताजिया निकलने के दौरान कट्टरपंथी मुस्लिमों ने पथराव किया। इसके कारण पुलिस की गाड़ियों को भी नुकसान पहुँचा।

दिल्ली पुलिस ने शांति बनाए रखने के लिए लाठीचार्ज किया। दिल्ली पुलिस के अधिकारी हरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि नांगलोई में ताजिये के जुलूस में 8-10 हजार लोग मौजूद थे। इनमें से 1-2 आयोजनकर्ता ताजिये का जो रूट पहले से तय था, उससे अलग जाना चाह रहे थे। पुलिस ने जब मना किया तो जुलूस में शामिल लोगों ने पुलिस पर पथराव किया। इसमें 10 पुलिस वाले घायल हुए हैं।

नमाज में व्यवधान के नाम पर आतंक, शादी-ब्याह में DJ नहीं बजने देने के नाम पर बवाल काटने वाली कट्टरपंथी मुस्लिम सोच पर अब लोग सवाल उठा रहे। लोग पूछ रहे कि 29 जुलाई 2023 को मुहर्रम के दिन न तो कोई हिंदू त्योहार था, न ही काँवड़ियों की बात थी… फिर सड़कों पर आतंक किसने मचाया, क्यों मचाया?

दिल्ली पुलिस ने आतंक मचा रही कट्टर इस्लामी भीड़ पर जम कर लाठियाँ बरसाई हैं। सवाल यह उठता है कि पत्थरबाजी वाली मानसिकता से ग्रसित भीड़ को जुलूस का परमिशन दिया ही क्यों जाता है? अगर दिया जाता है तो देश के ही दूसरे राज्य बंगाल में हिंदू मंदिरों की बैरिकेडिंग क्यों कर दी जाती है?

हिंदू मंदिर की बैरिकेडिंग वाली घटना को लेकर भाजपा ममता बनर्जी सरकार पर हमलावर है। इसके बाद हालाँकि बैरिकेड हटा दिए गए। पश्चिम बंगाल बीजेपी के कार्यकर्ता अमित ठाकुर ने ट्वीट कर लिखा, “यह चौंकाने वाली तस्वीर पश्चिम बंगाल के मालदा के कालियाचक की है। जहाँ मुहर्रम के जुलूस के लिए दुर्गा मंदिर को ब्लॉक कर दिया गया है। पश्चिम बंगाल में हिंदुओं की यही हालत है। I.N.D.I.A. के सेक्युलर लोग इस बारे में बात क्यों नहीं कर रहे हैं?”

इस ट्वीट के साथ उन्होंने ‘कालियाचक थाना शरबजनिन दुर्गा मंदिर’ नामक मंदिर की तस्वीर भी शेयर की। तस्वीर में देखा जा सकता है कि बाँस की बल्लियाँ लगाकर मंदिर को पूरी तरह से ब्लॉक करने की कोशिश की गई थी।

इस मामले पर भाजपा नेता अमित मालवीय ने ममता बनर्जी के इशारे पर पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा मंदिर में बेरिकेडिंग करने का आरोप लगाया। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, ”पश्चिम बंगाल पुलिस ने मुहर्रम की पूर्व संध्या पर कालियाचक में दुर्गा मंदिर को ब्लॉक करते हुए बैरिकेड लगाए। यह ममता बनर्जी की सेक्युलरिज्म का ब्रांड है। यह हिंदुओं को नीचा दिखाने और बदनाम करने के लिए हो रहा है। ममता बनर्जी सरकार ने हिंदुओं को दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया है।”

मालवीय ने यह भी कहा, “यह कानून व्यवस्था सँभालने में ममता बनर्जी की असफलता को दिखाता है। सीएम का ऐसा पक्षपातपूर्ण दृष्टिकोण सामाजिक एकजुटता को खत्म करता है और खाइयों को बढ़ाता है। उनकी राजनीति इसके बल पर ही फलती-फूलती है।”

पश्चिम बंगाल बीजेपी के विधायक शुभेंदु अधिकारी ने TMC सरकार की आलोचना करते हुए लिखा, “मैं शर्त लगाता हूँ कि उस इलाके की कोई भी मुहर्रम आयोजन समिति इस तरह के कदम की माँग नहीं कर सकती थी, जिससे सनातनियों को ठेस पहुँचे। सीधे तौर पर यह पश्चिम बंगाल पुलिस की ‘अतिसक्रियता’ है। ममता बनर्जी के शब्दकोश में ‘सेक्युलरिज्म’ ‘वोट बैंक की राजनीति’ का दूसरा नाम है। यही कारण है कि सरकार धार्मिक त्योहारों के दौरान ‘अतिसक्रियता की समस्या’ से ग्रस्त है। ममता बनर्जी सरकार में आम तौर पर कुछ ऐसा होता रहा है, जिससे सनातनियों की भावनाएँ आहत होती हैं।”

राज्य के मुख्य सचिव के तत्काल हस्तक्षेप का अनुरोध करते हुए, शुभेंदु अधिकारी ने कहा, “ममता बनर्जी अपनी ओछी राजनीति के लिए जानबूझकर बैरिकेडिंग लगवा रही हैं और दोनों समुदायों के बीच दरार पैदा कर रही हैं। वह कलह पैदा करने और दोनों समुदायों के बीच सद्भाव को बिगाड़ने की कोशिश कर रही हैं।”

हालाँकि बाद में शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि दुर्गा मंदिर के बाहर से बैरिकेड्स हटा दिए गए हैं।

वहीं, कुछ सोशल मीडिया यूजर्स का दावा है कि मुहर्रम के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए हिंदुओं ने ही मंदिर के बाहर बैरिकेड्स लगाए थे।

बहरहाल, यहाँ यह बताना जरूरी है कि ममता बनर्जी ने मुहर्रम जुलूस को रास्ता देने के लिए साल 2016 और 2017 में माँ दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन पर रोक लगा दी थी।


गठबंधन का नाम ‘INDIA’ रखने पर 26 पार्टियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस में दर्ज हुई शिकायत, इस कानून का दिया हवाला

गठबंधन के नए नाम 'INDIA' के हिलाफ दिल्ली पुलिस में शिकायत
किसी भी पार्टी या गठबंधन का नाम INDIA नहीं होना चाहिए। गठबंधन टुटते भी है, पार्टियां हारती भी है, तो न्यूज मीडिया ऐसी ब्रेकिंग नहीं चलाएगी इंडिया टुटा, इंडिया हार गया।
विपक्षी एकता बैठक में गठबंधन का नाम ‘INDIA’ रखे जाने के खिलाफ दिल्ली पुलिस में 26 राजनीतिक पार्टियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है। ये शिकायत बारखम्बा पुलिस थाने में दर्ज कराई गई है। इस शिकायत में कहा गया है कि गठबंधन का नाम ‘INDIA’ रखा जाना ‘THE EMBLEMS AND NAMES (PREVENTION OF IMPROPER USE) ACT, 1950’ का उल्लंघन है। इस शिकायत के बाद इस नाम को लेकर विवाद बढ़ गया है।

इस शिकायत इन सभी 26 दलों के नाम भी लिखे गए हैं जो बेंगलुरु में हुई बैठक का हिस्सा थे। साथ ही उन पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने देश के नाम का गलत इस्तेमाल किया है। गठबंधन का टैगलाइन ‘जीतेगा भारत’ रखा गया है। 26 वर्षीय अवनीश मिश्रा ने ये शिकायत दर्ज कराई है। वो दिल्ली के ही रहने वाले हैं। उन्होंने इस शिकायत में कहा है कि चुनावी राजनीति के लिए देश के नाम का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है।

इस शिकायत में उक्त कानून के पॉइंट संख्या 6 का हवाला दिया गया है, जिसमें लिखा है कि रिपब्लिक या यूनियन ऑफ इंडिया का नाम, चिह्न या सील का इस्तेमाल रजिस्टर नहीं कराया जा सकता है। एक्ट के सेक्शन 5 के तहत इन विपक्षी दलों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की माँग की गई है। बता दें कि अगर इस कानून के तहत विपक्षी दल दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें 500 रुपए जुर्माना लगाया जा सकता है और साथ ही इस नाम का वो इस्तेमाल भी नहीं कर पाएँगे।

महाराष्ट्र भाजपा के सोशल मीडिया हेड और अधिवक्ता आशुतोष दुबे ने भी भारत निर्वाचन आयोग को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने INDIA (इंडिया) नाम को राजनैतिक फायदों के लिए प्रयोग किए जाने का आरोप लगाया है। साथ ही उन्होंने इस पर आपत्ति जताते हुए इसे रोकने की माँग की है। मंगलवार (18 जुलाई, 2023) को लिखे गए इस पत्र में आशुतोष दुबे ने UPA (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) की 2024 लोकसभा चुनाव की तैयारियों के तरीके को आपत्तिजनक बताया।


महिला पहलवानों के गले-कमर-पेट पर हाथ, सेक्स की बातें, टीशर्ट उठाना-पलंग के पास बुलाना… बृजभूषण के खिलाफ चार्जशीट में सब कुछ

                          आरोप पत्र में इस तरह की तस्वीरों का साक्ष्य के तौर पर जिक्र है (साभार: TOI)
महिला पहलवानों द्वारा दायर यौन शोषण के मामले में दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि भारतीय कुश्ती संघ के निवर्तमान अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) के खिलाफ मामला चलाया जा सकता है। इसमें दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण सिंह के साथ पहलवानों द्वारा सार्वजनिक रूप से खींची गईं तस्वीरों को भी शामिल किया है।

दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट में दो तस्वीरों को शामिल किया है और कहा कि इसमें भाजपा सांसद बृजभूषण सिंह पीड़िता के साथ खड़े हैं। ये तस्वीरें बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दिल्ली पुलिस के आरोप पत्र में ‘तकनीकी साक्ष्य’ के रूप में शामिल की गई हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोप पत्र में कहा गया है कि कुश्ती संघ के अधिकारियों ने पुलिस नोटिस का जवाब देते हुए चार तस्वीरें मुहैया कराई हैं, जिनमें बृजभूषण सिंह और शिकायतकर्ता की विदेश (कजाकिस्तान) में मौजूदगी दिखाई दे रही थी। आरोप पत्र में कहा गया है, “दो तस्वीरों में वे शिकायतकर्ता का फायदा उठाते दिख रहे हैं।”

पहलवान 1 का आरोप: “(पदक मिलने के बाद) कोच मुझे बृजभूषण से मिलने के लिए अपने साथ ले गए। वहाँ उन्होंने मुझे जबरन गले लगाने की कोशिश की। मेरे एक हाथ में झंडा था, इसलिए मैंने अपने दूसरे हाथ से उन्हें दूर धकेलने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने।”

साक्ष्य: “दो तस्वीरों में, वे शिकायतकर्ता का फायदा उठाते दिख रहे हैं… विभिन्न घटनाओं की तस्वीरों और वीडियोग्राफ़ के रूप में उपलब्ध तकनीकी साक्ष्य, आरोपित की उपस्थिति को लेकर शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप का स्पष्ट रूप से समर्थन करते हैं।”

पहलवान 2 का आरोप: “मुझे डब्ल्यूएफआई कार्यालय में बुलाया गया था, जहाँ मैं अपने कोच के साथ गई थी… कुर्सी पर बैठे बृजभूषण ने मुझे बैठने के लिए कहा… मैंने उन्हें अपनी चोट के बारे में बताया… उन्होंने मुझे पूरी मदद का आश्वासन दिया, लेकिन इसके लिए उनके साथ शारीरिक संबंध बनाने के बारे में उन्होंने पूछा।”

साक्ष्य: “…कथित घटना के दिन वह (शिकायतकर्ता के कोच) नई दिल्ली जिले के उस क्षेत्र में मौजूद था और उसके मोबाइल टॉवर स्थान अशोक रोड (कार्यालय स्थान) के आसपास नॉर्थ एवेन्यू के क्षेत्र में था।”

पहलवान 3 का आरोप: “मैं (टीम फोटो में) आखिरी पंक्ति में खड़ी थी… आरोपित (बृजभूषण सिंह) आए और मेरे साथ खड़े हो गए। मुझे अचानक अपने नितम्ब पर किसी का हाथ महसूस हुआ। जब मैंने दूर जाने की कोशिश की तो मुझे जबरदस्ती मेरे कंधे से पकड़ लिया गया।”

साक्ष्य: WFI ने कार्यक्रम से संबंधित रंगीन तस्वीरों के चार प्रिंटआउट उपलब्ध कराए और इन तस्वीरों में शिकायतकर्ता अन्य पहलवानों के साथ आगे की पंक्ति में बैठा हुआ दिखाई दे रहा है। इन तस्वीरों में आरोपित बृजभूषण भी दिख रहे हैं, जिसका आकलन आरोपों के आलोक में किया जा सकता है।”

पहलवान 4 का आरोप: “जब मैं मैट पर लेटी हुई थी तो आरोपित मेरे पास आया और मुझे आश्चर्य हुआ। वह मेरी ओर झुक गया और मेरे कोच की अनुपस्थिति में मेरी अनुमति के बिना, मेरी टी-शर्ट खींची मेरी साँस जाँचने के बहाने मेरे स्तन पर हाथ रखा।”

पहलवान ने आगे कहा, “फेडरेशन कार्यालय जाने पर… मुझे आरोपित के कमरे में बुलाया गया… मेरे भाई, जो मेरे साथ था, को स्पष्ट रूप से वहीं रुकने के लिए कहा गया… अन्य व्यक्तियों के जाने के बाद आरोपित ने दरवाज़ा बंद कर दिया… मुझे अपनी ओर खींचा और मेरे साथ ज़बरदस्ती शारीरिक संपर्क बनाने की कोशिश की।”

साक्ष्य: “शिकायतकर्ता को अन्य पहलवानों के साथ बृजभूषण सिंह के संग खड़ा देखा गया, जिससे घटना के स्थान पर आरोपित और शिकायतकर्ता की उपस्थिति स्थापित होती है।”

पहलवान 5 का आरोप: “मेरे साथ तस्वीर खिंचवाने के बहाने उन्होंने मुझे कंधे से पकड़कर अपनी ओर खींचा… खुद को बचाने के लिए मैंने आरोपित से दूर जाने की कोशिश की।”

साक्ष्य: “डब्ल्यूएफआई ने चैंपियनशिप की तस्वीरों के छह रंगीन प्रिंटआउट प्रदान किए हैं, जो कार्यक्रम में पीड़ित और आरोपित की उपस्थिति को दर्शाते हैं।”

पहलवान 6 का आरोप: “उन्होंने मुझे अपने माता-पिता से फोन पर बात कराई, क्योंकि उस समय मेरे पास निजी मोबाइल फोन नहीं था… आरोपित ने मुझे अपने बिस्तर की ओर बुलाया, जहाँ वह बैठा था और फिर अचानक मेरी इजाज़त के मुझे ज़बरदस्ती गले लगा लिया।”

साक्ष्य: “कार्यक्रम के मेजबान डब्ल्यूएफआई को नोटिस भेजकर उनसे फोटोग्राफ, होटल का विवरण, जहाँ पहलवान रुके थे उसका कमरा नंबर प्रदान करने के लिए कहा गया था, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।”

ये चार्जशीट 6 पहलवानों द्वारा दायर यौन उत्पीड़न की शिकायतों में पुलिस द्वारा की गई जाँच पर आधारित है। इसमें कहा गया है कि बृजभूषण सिंह पर धारा 506 (आपराधिक धमकी), 354 (एक महिला की लज्जा को ठेस पहुँचाना), 354A (यौन उत्पीड़न) और 354D (पीछा करना) के तहत यौन उत्पीड़न के अपराधों के लिए मुकदमा चलाया जा सकता है।

केजरीवाल से कम नहीं जंतर-मंतर वाले पहलवान : जिनके भी सुर हुए अलग उनके मेडल खोटे

पीटी उषा, योगेश्वर दत्त, बबीता फोगाट (साभारः स्पोर्ट्स अनटोल्ड/मिड डे/एनडीटीवी)
भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के निवर्तमान अध्यक्ष और भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) के खिलाफ धरना देने वाली विनेश फोगाट ने अब ओलंपियन योगेश्वर दत्त पर हमला बोला है। विनेश आलोचना तो करती हैं, लेकिन शब्दों की मर्यादा भी भूल जाती हैं। भाजपा सांसद के बाद योगेश्वर के मामले में भी यह देखने को मिल रहा है। अगर दूसरे शब्दों में कहें तो ये पहलवान कुश्ती की अरविंद केजरीवाल साबित हो रही हैं।

जंतर मंतर पर अपनी मनमाफिक बात मनवाने के लिए धरना देने वाले पहलवानों ने जाट खाप पंचायतों से लेकर किसानों तक का सहयोग लिया। हालाँकि, उन्होंने पूरे मामले में जिसने भी सही बात की, उनके ऊपर ये लोग कीचड़ उछालने लगे। विनेश फोगाट ने दिल्ली पुलिस, IOA (भारतीय ओलंपिक संघ) के बाद अब योगश्वर दत्त पर भी यही कीचड़ उछालना शुरू कर दिया है।

दरअसल, IOA की एडहॉक कमिटी ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने वाले 6 पहलवानों- विनेश फोगाट, बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक, संगीता फोगाट, सत्यव्रत कादियान और जितेंद्र किन्हा  को ट्रायल में छूट दी है। इन पहलवानों को एशियन और ओलंपिक, दोनों चैंपियनशिप में भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए सिर्फ ट्रायल के विजेताओं को हराने की जरूरत होगी।

इसी को लेकर योगेश्वर दत्त ने सवाल उठाया है। दत्त ने इसे कुश्ती के लिए काला दिन बताते हुए कहा, “सिर्फ यही 6 पहलवानों को ट्रायल में छूट देना मेरी समझ के बाहर है। बिना नियम देखे और बिना क्राइटेरिया बनाए लिया गया यह फैसला गलत है। तो जितने भी पहलवान हैं … लड़कियाँ हैं… अपनी आवाज जरूर उठाइए।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं ये नहीं कहता कि धरना कीजिए, प्रदर्शन कीजिए… लेकिन अपनी आवाज मीडिया के माध्यम से उठाइए, आप प्रधानमंत्री जी को पत्र लिखिए, गृहमंत्री जी को पत्र लिखिए, खेलमंत्री अनुराग ठाकुर जी को पत्र लिखिए, IOA को पत्र लिखिए।”

योगेश्वर दत्त द्वारा सवाल उठाए जाने पर विनेश फोगाट भड़क गईं और ट्विटर पर एक लंबा-चौड़ा पोस्ट लिखा दिया। अपने पोस्ट में उन्होंने योगेश्वर दत्त को ना सिर्फ छवि का हनन करने की कोशिश की है, बल्कि उन्होंने भाषा की मर्यादा को खत्म करते हुए ‘तू-तड़ाक’ भी किया है। उन्होंने दत्त पर कई आरोप लगाए।

विनेश ने लिखा, “योगेश्वर दत्त का वीडियो सुना तो उसकी वह घटिया हँसी दिमाग़ में अटक गई। वह महिला पहलवानों के लिए बनी दोनों कमेटियों का हिस्सा था। जब कमेटी के सामने महिला पहलवान अपनी आपबीती बता रही थीं तो वह बहुत घटिया तरह से हँसने लगता। जब 2 महिला पहलवान पानी पीने के लिए बाहर आयीं तो बाहर आकर उनको कहने लगा कि कुछ ना हो बृजभूषण का। जाके अपनी प्रैक्टिस कर लयो।”

उन्होंने आगे लिखा, “एक दूसरी महिला पहलवान को बड़े भद्दे तरीक़े से बोला कि ये सब तो चलता रहता है। इसको इतना बड़ा इशू मत बनाओ। कुछ चाहिए हो तो मुझे बताओ। कमेटी की बैठक के बाद योगेश्वर ने महिला पहलवानों के नाम बृजभूषण और मीडिया को लीक कर दिए। उसने कई महिला पहलवानों के घर फ़ोन करके यह भी कहा कि अपनी लड़की को समझा लो। वह पहले ही सरेआम महिला पहलवानों के ख़िलाफ़ बयान दे रहा था, उसके बावजूद उसे दोनों कमेटियों में रखा गया।”

योगेश्वर पर व्यक्तिगत आरोप लगाते हुए विनेश ने आगे कहा, “वह पहलवानों और कोचों को महिला पहलवानों के आंदोलन में शामिल होने से लगातार रोकता रहा। सारा कुश्ती जगत समझ गया था कि योगेश्वर बृजभूषण की थाली का झूठा खा रहा है। कुश्ती जगत को आपका बृजभूषण के तलवे चाटना हमेशा याद रहेगा। समाज में कोई भी अन्याय के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाता है तो योगेश्वर ज़रूर उल्टियाँ करता है। पहले किसानों, जवानों, छात्रों, मुसलमानों, सिखों पर घटिया टिप्पणियाँ कीं और अब महिला पहलवानों को बदनाम करने में लगा हुआ है।”

दत्त को गद्दार बताते हुए विनेश ने आगे कहा, “समाज से ग़द्दारी के कारण ही दो बार चुनाव में औंधे मुँह गिरे हो तुम। मैं चैलेंज करती हूँ कि कभी ज़िंदगी में चुनाव नहीं जीतोगे, क्योंकि समाज ज़हरीले नाग से हमेशा सावधान रहता है और उसके कभी पैर नहीं लगने देता। महिला पहलवानों को तोड़ने में इतना ज़ोर मत लगाओ। ध्यान रखना कहीं ज्यादा जोर लगवाने से कमर न टूट जाए। रीढ़ तो पहले ही बृजभूषण के पैरों में रख चुके हो। तुम बहुत संवेदनहीन इंसान हो। ज़ालिम के हक़ में खड़े हो, उसकी चापलूसी कर रहे हो। जब तक कुश्ती में योगेश्वर जैसे जयचंद रहेंगे, यकीनन जालिमों के हौसले बुलंद रहेंगे।”

दरअसल, ये पहलवान उन सबको निशाना बना रही हैं, जो उनसे अलग राय रखता है। ये पहलवान उन्हें बृजभूषण शरण सिंह का आदमी बताकर तुरंत अपराधी घोषित कर देती हैं। ये वही पहलवान हैं, जिन्होंने धरना दिया कि बिना उनके FIR दर्ज कराए बृजभूषण सिंह को कुश्ती संघ के अध्यक्ष पद से हटा दिया जाए। उस वक्त उन लोगों ने साफ कहा था कि वे एशियन या ओलंपिक चैंपियनशिप के लिए ट्रायल नहीं देंगी। यही उनकी प्रमुख माँग थी। इसका वीडियो भी सामने आया था।

दरअसल, बृजभूषण शरण सिंह ने साफ कर दिया था कि विशेषाधिकार किसी को नहीं मिलेगा। सबको ट्रायल में अपनी-अपनी वेट कैटेगरी के पहलवान को हराना होगा। जो जीतेगा वही टीम में शामिल होगा। इसके खिलाफ पहलवान धरने पर बैठ गईं। बाद में उन पर यौन शोषण का आरोप लगाया गया। इनमें एक आरोप एक नाबालिग लड़की के नाम पर था। हालाँकि, बाद में उस नाबालिग ने अपना बयान वापस लेते हुए साफ कर दिया कि उसने साथ बृजभूषण शरण सिंह ने कुछ नहीं किया और इन पहलवानों ने उस पर ऐसा करने के लिए दबाव बनाया।

दरअसल, धरनेबाज पहलवान चाहते थे कि POCSO एक्ट में बृजभूषण सिंह की तुरंत गिरफ्तारी हो जाएगी, उसके बाद कुश्ती संग वो अपने हिसाब से चलाएँगे। उन्होंने यहाँ तक माँग कर डाली थी कि कुश्ती संघ में बृजभूषण सिंह और उनका कोई भी आदमी चुनाव नहीं लड़ना चाहिए और ना ही इसमें मतदान करना चाहिए। धरनेबाज पहलवानों के अनुसार, पिछली बार खेल मंत्री अनुराग ठाकुर के साथ हुई मुलाकात में इस पर सहमति भी बनी है।

इन पहलवानों का साफ मानना है कि उनसे सवाल नहीं पूछा जाना चाहिए। जो उनसे सवाल पूछेगा वो उनका विरोधी है, चाहे वह सरकार हो या खिलाड़ी। इन पहलवानों तो एक बार यहाँ तक आरोप लगा दिया था कि खेल मंत्री अनुराग ठाकुर बृजभूषण शरण सिंह को बचाव कर रहे हैं। इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद जब दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की तो इन पहलवानों ने साफ कह दिया कि उन्हें दिल्ली पुलिस पर विश्वास नहीं है।

विनेश फोगाट ने कहा था, “हमारी माँग है कि उन्हें (बृजभूषण शरण सिंह को) जेल में डाला जाए। उन्हें हर एक पद से हटाया जाए। सांसद पद से भी इस्तीफा दें।” वहीं, प्रदर्शन कर रहे बजरंग पूनिया ने कहा था, “उनको (बृजभूषण सिंह को) तुरंत जेल मे डाला जाना चाहिए। हम पुलिस की FIR का इंतजार कर रहे हैं कि किन धाराओं में केस दर्ज होता है। हमारा फोन केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने नहीं उठाया।”

पहलवान साक्षी मलिक ने यहाँ तक कह दिया था कि जाँच में पहलवान दिल्ली पुलिस को सहयोग नहीं करेंगे और ना ही इस मामले में अपना बयान दर्ज कराएँगे। साक्षी ने कहा था, “हम अपना बयान सुप्रीम कोर्ट में दर्ज कराएँगे। उनको (बृजभूषण शरण सिंह) को जेल में डालने और सभी पदों से हटाने के बाद ही हमारा प्रदर्शन खत्म होगा।” 

पहलवानों की धरने और बयानबाजी को लेकर भारतीय ओलंपिक संघ (IOC) ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी थी। ओलंपिक संघ ने कहा था कि पहलवान धरना देकर भारत की छवि को धूमिल कर रहे हैं। IOC ने पहलवानों को एथलीट कमीशन में आने के लिए कहा। IOC की अध्यक्ष पीटी उषा ने पहलवानों के धरने को अनुशासनहीनता बताया था।

इसके बाद पहलवान पीटी उषा पर भड़क गए थे। पहलवान साक्षी मलिक ने पीटी उषा पर ही सवाल दाग दिया। साक्षी मलिक ने गुरुवार (27 अप्रैल 2023) को कहा, “मैं पीटी उषा का सम्मान करती हूँ। उन्होंने हमें प्रेरित किया है, लेकिन मैं मैम से पूछना चाहती हूँ कि महिला पहलवानों ने आगे आकर उत्पीड़न का मुद्दा उठाया है। क्या अब हम विरोध भी नहीं कर सकते।”

इतना ही नहीं, पीटी उषा जब इन पहलवानों से मिलने के लिए 3 मई 2023 को जंतर मंतर पर गईं तो उनके धक्का-मुक्की, खींचतान और बदतमीजी की गई। इसका एक वीडियो भी सामने आया था। वीडियो में एक महिला थप्पड़ ताने नजर आती है और पीटी उषा बचने की कोशिश करती हुई दिख रही हैं। सुरक्षाबल ने बड़ी मुश्किल से उन्हें वहाँ से निकाला था।

इसी तरह, उनके द्वारा लगाए गए आरोपों के एक-एक गिरने के बाद पहलवान बौखला गए। साक्षी मलिक और उनके पति सत्यव्रत ने सामूहिक रूप से एक वीडियो जारी किया था। इस वीडियो में उन्होंने एक कागज दिखाते हुए आरोप लगाया था कि उनके प्रदर्शन के लिए दिल्ली पुलिस से अनुमति भाजपा नेता बबीता फोगाट ने दिलाई थी। इसमें उन्होंने भाजपा नेता तीरथ राणा का भी नाम लिया था। इस दौरान साक्षी मलिक कॉन्ग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा का बचाव भी करती नजर आईं।

वीडियो सामने आने के बाद बबीता फोगाट ने दोनों के आरोपों को हास्यास्पद बताया था। बबीता ने पहलवानों पर आरोप लगाया कि वो अपने मामले में उन नेताओं का साथ ले रहे हैं जिन पर पहले से बलात्कार के केस चल रहे हैं। नए संसद भवन के उद्घाटन के दिन किए गए हंगामे और गंगा में मेडल बहाने जैसे प्रयासों को बबीता ने शर्मनाक कदम बताते हुए इसे देश की छवि को गिराने वाला काम बताया। उन्होंने पीएम पर भरोसा जताते हुए साक्षी और उनके पति पर कॉन्ग्रेस की कठपुतली बन जाने का भी आरोप लगाया। 

इस तरह, विनेश फोगाट, बजरंग पुनिया, साक्षी मलिक जैसे पहलवानों ने अपने साथी खिलाड़ियों से लेकर IOA की प्रमुख को सिर्फ इसलिए निशाना बनाया कि उन लोगों का बयान इन पहलवानों को पसंद नहीं आया। वहीं, दिल्ली पुलिस और केंद्रीय मंत्री को इसलिए निशाना बनाया कि उन्होंने बृजभूषण सिंह को तुरंत गिरफ्तार करने की माँग की थी, जिस पर बिना आँख मूँदे अमल नहीं हुआ। इन तमाम कहानियों के बाद आखिरकार IOA की एडहॉक द्वारा उनकी वो सारे माँगें मान ली हैं, जिसको लेकर पहलवानों ने आरोप लगाए और अपने साथियों तक को निशाना बनाया। इसलिए सोशल मीडिया पर इन पहलवानों को रंग बदलने में सीएम केजरीवाल से भी दो कदम आगे बताया जा रहा है।


आन्दोलनजीवी पहलवानों का एक और झूठ धराया : ‘दिल्ली पुलिस ने IPL मैच देखने से रोका, टिकटें छीन ली और नहीं जाने दिया अंदर’

राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना दे रहे पहलवान शनिवार (20 मई 2023) को आईपीएल का मैच देखने अरुण जेटली स्टेडियम पहुँचे। पहलवानों ने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस ने उनसे टिकटें ले ली लेकिन अंदर जाने नहीं दिया। उधर दिल्ली पुलिस का कहना है कि किसी भी वैध टिकट या पासधारी को मैच देखने से नहीं रोका गया।

दिल्ली में आईपीएल का 67वाँ मुकाबला दिल्ली कैपिटल्स और चेन्नई सुपर किंग्सके बीच खेला गया। इस मैच को देखने के लिए धरना दे रहे विनेश फोगाट, साक्षी मलिक, बजरंग पुनिया सहित कई पहलवान अरुण जेटली स्टेडियम पहुँचे। पहलवानों का दावा है कि उन्हें अंदर जाने नहीं दिया। कुछ ही देर में घटना से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस वीडियो में विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया के साथ अन्य पहलवान नजर आ रहे हैं। विनेश फोगाट बता रही हैं कि पहलवानों को दिल्ली पुलिस ने मैच देखने नहीं दिया।

मंदीप पुनिया नाम के यूजर ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा है कि पहलवानों को आईपीएल मैच देखने से रोका गया। इस वीडियो में विनेश फोगाट कह रही हैं कि दिल्ली पुलिस ने पहले तो सुरक्षा कारणों से उन्हें स्टेडियम में दाखिल नहीं होने दिया। उसके बाद उनकी टिकटें ले ली गईं। विनेश का कहना है कि दिल्ली पुलिस सुरक्षा कारणों से उन्हें वीआईपी सुविधा देने की पेशकश कर रहे थे। विनेश फोगाट और बाकी के पहलवान इसके लिए तैयार नहीं थे।

पहलवानों का कहना था कि उन्हें कोई सुविधा नहीं चाहिए। आरोप के अनुसार, बहस के बाद पहलवान लौटने लगे तो दिल्ली पुलिस के जवानों ने उन्हें अंदर जाने के लिए कहा। वीडियो में विनेश कह रही हैं कि हमें न स्टेडियम में जाने दिया जा रहा है न लौटने दिया जा रहा है। जबकि उसी वीडियो में वे कह चुकी हैं कि बहस के बाद जब वे लौटने लगीं तो पुलिस के लोगों ने उन्हें अंदर आने के लिए कहा।

इसी वीडियो को शेयर करते हुए रामनिवास भाम्भू नाम के यूजर ने लिखा, “दिल्ली जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे पहलवान आईपीएल मैच देखने के लिए गये थे लेकिन दिल्ली पुलिस ने स्टेडियम के बाहर ही उन्हें रोक लिया व टिकटें छीन लीं और वापिस भेज दिया यह देश में चल क्या रहा है।क्या आपातकाल लग गया है?

प्रेम सिंह सियाग नाम के यूजर ने भी पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए पहलवानों का वीडियो शेयर किया। यूजर ने भी दावा किया कि पहलवानों को आईपीएल मैच देखने से रोक दिया गया।

इसके अलावा पहलवानों के लिए किए गए झूठे ट्वीट एख दूसरे के कॉपी पेस्ट किए हुए थे।

दिल्ली पुलिस ने बताई सच्चाई

पहलवानों के इस वीडियो को कई सोसल मीडिया हैंडल्स द्वारा शेयर किया जा रहा है और दिल्ली पुलिस पर पहलवानों को मैच देखने से रोकने के इल्ज़ाम लगाए जा रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने पहलवानों के आरोपों का खंडन किया है। दिल्ली पुलिस ने इसे लेकर ट्वीट किया है।
दिल्ली पुलिस की तरफ से लिखा गया है, “कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स पहलवानों को आईपीएल मैच देखने से रोके जाने संबंधित भ्रामक खबर प्रसारित कर रहे है। किसी भी वैध टिकट या पासधारी को नहीं रोका गया है, सभी को उनके नियत गेटों से प्रवेश दिया गया है।” दिल्ली पुलिस की तरफ से सच्चाई बताए जाने के बाद भी सोशल मीडिया पर इस झूठ को प्रसारित किया जा रहा है।

‘FIR हो गई, सुरक्षा मिल गई’: सुप्रीम कोर्ट ने बंद की जंतर-मंतर वाले पहलवानों की फाइल, बजरंग पुनिया बोले- मेडल/अवॉर्ड लौटा देंगे; दिल्ली की सीमाओं पर अलर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (4 मई, 2023) को 3 महिला पहलवानों द्वारा दायर की गई याचिका को ये नोट करने के बाद बंद कर दिया कि दिल्ली पुलिस ने ‘भारतीय कुश्ती संघ (WFI)’ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। भारत के मुख्य न्यायाधीश DY चंद्रचूड़, जस्टिस PS नरसिम्हा और जस्टिस JB पार्डीवाला की पीठ ने कहा कि FIR दर्ज करने के लिए याचिका दायर की गई थी और अब जब ये हो गया है, प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।

आगे किसी भी प्रकार की शिकायत या माँग के लिए सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारी पहलवानों को स्थानीय मजिस्ट्रेट के समक्ष जाने की सलाह भी दी है। पहलवानों की तरफ से पेश वकील नरेंद्र हुड्डा ने पूरी जाँच प्रक्रिया की निगरानी करने का अनुरोध सुप्रीम कोर्ट से किया, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने इसे नकारते हुए कहा कि अन्य मुद्दों के लिए दिल्ली हाईकोर्ट या मजिस्ट्रेट के समक्ष जाइए। दिल्ली पुलिस ने न सिर्फ पीड़िताओं का बयान दर्ज किया है, बल्कि उन्हें सुरक्षा भी प्रदान की है।

एक वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारी के नेतृत्व में जाँच आगे बढ़ रही है। उधर दिल्ली की सीमाओं पर फिर से अलर्ट जारी कर दिया गया है। सभी सीमावर्ती जिलों के DCP को निर्देश दिया गया है कि वो विष सतर्कता बरतें। सेन्ट्रल दिल्ली की तरफ जाने वाली सड़कों पर सख्त निगरानी रखने को कहा गया है। कई जगहों पर बैरिकेड्स लगाए गए हैं। सूत्रों से खबर मिली है कि बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर पहलवानों का समर्थन करने पहुँच सकते हैं।

उधर प्रदर्शनकारी पहलवानों ने अब अपने मेडल्स लौटाने की भी घोषणा कर दी है। बजरंग पूनिया ने कहा कि अगर पहलवानों के साथ ऐसा ही व्यवहार होता रहा तो फिर हमे इन मेडल्स का क्या करेंगे? उन्होंने कहा कि इससे अच्छा है कि हम इन मेडल्स को लौटा कर एक सामान्य ज़िन्दगी जिएँ। उन्होंने सारे मेडल्स और अवॉर्ड्स भारत सरकार को लौटाने की घोषणा कर डाली। पहलवानों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उन्हें बुलाने की माँग की और कहा कि ये राजनीतिक मुद्दा नहीं है। उन्होंने IT सेल पर उन्हें बदनाम करने का आरोप लगाया।

मीडिया गैंग ने अमित शाह के नाम फेक लेटर को कर दिया वायरल, क्यों? पहलवान बोले- यह फर्जी, हमने लिखा ही नहीं; ‘जंतर-मंतर पर हमें पलंग, गद्दे, मैट चाहिए’

सोशल मीडिया पर एक पत्र वायरल हुआ, जिसके बारे में का गया कि विरोध प्रदर्शन कर रहे पहलवानों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखा है हालाँकि, खुद प्रदर्शनकारी पहलवानों ने ही कहा है कि ये चिट्ठी फर्जी है और उन्होंने ऐसा कुछ नहीं लिखा है। रणविजय सिंह समेत लिबरल गिरोह के कई पत्रकारों ने भी इस पत्र को शेयर किया। पहलवान बजरंग पूनिया और विनेश फोगट ने भी ट्विटर पर स्पष्ट किया है कि उन्होंने ऐसा कोई पत्र नहीं लिखा है।

वायरल हो रहे पत्र में पहलवानों की माँगों का तत्काल समाधान करने की माँग करते हुए लिखा गया है कि पिछले 11 दिनों से मेडल जीतने वाले पहलवान शांतिपूर्ण तरीके से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं और रात्रि विश्राम के दौरान बुधवार (3 मई, 2023) की रात दिल्ली पुलिस के 100 पुलिसकर्मियों ने उन पर हमला कर दिया। पत्र में दुष्यंत फोगट और राहुल यादव नाम के दो पहलवानों का सर फोड़े जाने का आरोप भी लगाया गया है।

साथ ही साक्षी मलिक और संगीता फोगट को भी पुरुष अधिकारियों द्वारा धक्के मारने का आरोप लगाया गया है। इसमें लिखा है कि अंतरराष्ट्रीय पहलवानों पर इस तरह से हमला करना और उन्हें अपमानित करना उनके मनोबल को तोड़ने वाला है। इसे देश की छवि को खराब करने वाला भी बताया गया है। जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की माँग की गई है। पत्र में लिखा है कि अलग-अलग स्थानों से इनके जो साथी हिरासत में लिए गए हैं, उन्हें रिहा किया जाए।

 वायरल हो रहे इस पत्र में माँग की गई है कि वॉटरप्रूफ टेंट, मजबूत स्टेज, पलंग, साउंड सिस्टम, गद्दे और प्रैक्टिस के लिए कुश्ती मैट के अलावा जिम के सामानों की भी माँग की गई है। साथ ही सरकार के उच्चाधिकारियों से भी तुरंत वार्ता कराए जाने की माँग रखी गई है। हालाँकि, अब जब पहलवानों ने ही साफ़ कर दिया है कि ये पत्र उनका नहीं है, इससे स्पष्ट है कि ये फर्जी है और किसी ने जानबूझ कर लिख कर इसे फैलाया है।


दिल्ली : रात के अंधेरे में रामनवमी पर लगे भगवा झंडों को नोंचा, जेहादी ने पैरों से कुचला… वीडियो वायरल

आखिर छद्दम धर्म-निरपेक्ष और गंगा-जमुनी तहजीब से गुमराह करने वाले हिन्दू भावनाओं से कब तक खिलवाड़ करते या करवाते रहेंगे? हिन्दू संयम की अग्नि-परीक्षा मत लो। जिस दिन हिन्दू संयम की सीमा टूटी कोई इनका आका बाहर नहीं आएगा। मोदी सरकार को ऐसे दंगाइयों से हर तरह की सरकारी सुविधा जैसे आधार कार्ड, राशन कार्ड आदि छीन लेनी चाहिए और दोषी पाए जाने पर जेल में केवल एक समय का नाश्ता और खाना देने का कानून बनाना चाहिए। जब तक इस तरह के सख्त कानून नहीं बनेंगे, दंगाई बाज नहीं आएंगे। हर हिन्दू और शांतिप्रिय लोगों को सरकार से ऐसे सख्त कानून बनाने के लिए मजबूर करना होगा, उससे पहले हिन्दू-मुसलमान का झगड़ा ख़त्म नहीं होगा। 
दिल्ली में रामनवमी के मौके पर लगाए गए भगवा झंडों को पैरों से कुचलने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। करीब 28 सेकेंड के इस वीडियो में दिख रहे शख्स की पहचान अजीम के तौर पर हुई है। पुलिस ने अजीम पर FIR दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने अजीम पर IPC की धारा 153 A और 295 A के तहत एक्शन लिया है। यह मामला दिल्ली के शास्त्री पार्क थाना क्षेत्र का है। यहाँ के गली नंबर 8 में रहने वाले सागर ने अजीम के खिलाफ हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई थी। उसने अजीम की करतूत का वीडियो भी पुलिस को सौंपा था।

सोशल मीडिया वायरल वीडियो में देख सकते हैं कि रात के अँधेरे में कुर्ता-पायजामा पहना एक व्यक्ति पहले गली में टाँगे गए भगवा झंडों को नोंचता है और फिर पैरों से उसे कुचलने लगता है। 28 सेकेंड के इस वीडियो के अंत में आरोपित अपने घर में चला जाता है। पुलिस जाँच में यह हरकत करने वाला आरोपित अजीम निकला, जिसे गिरफ्तार कर लिया गया है।

इस साल रामनवमी पर देश के अलग-अलग हिस्सों में कट्टरपंथियों द्वारा हिंसा की गई। इस हिंसा से खास तौर पर बिहार, बंगाल, झारखंड, गुजरात और महाराष्ट्र प्रभावित हुए हैं। दिल्ली के जहाँगीरपुरी में पिछले साल रामनवमी पर हुई हिंसा के बाद प्रशासन इस बार की शोभायात्रा की अनुमति देने में आनाकानी कर रहा था। हालाँकि बाद में हिन्दू संगठनों ने भव्य शोभायात्रा निकाली थी।

जहाँ हनुमान जयंती जुलूस पर हमला, दिल्ली के उसी जहाँगीरपुरी में रामनवमी का जुलूस


देश भर में रामनवमी धूमधाम से मनाई जा रही है। इस बीच मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति भी जारी है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री मुस्लिम इलाकों से जुलूस निकालने पर अंजाम भुगतने की धमकी दे रही हैं। वहीं, दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार ने भी दिल्ली के सीमित इलाकों में ही भगवान राम का जुलूस निकालने की इजाजत दी है।

पिछले साल दिल्ली के जहाँगीरपुरी में हनुमान जयंती के जुलूस पर हमला कर दिया गया था। बाद मे बड़े पैमाने पर हिंदुओं को भी निशाना बनाया गया था। जहाँगीरपुरी इलाके के कई हिंदू डर से इलाका छोड़ दिए थे। रामनवमी के शोभा यात्रा के साथ भी यही हुआ था। अब रामनवमी पर जुलूस निकालने से हिंदुओं को रोक दिया गया है।

इस बार भी रामनवमी लोग उमंग और उत्साह से मनाए जा रहे हैं। पिछले साल के हनुमान जयंती की तरह इस बार भी हिंदुओं पर किसी तरह का हमला ना हो, इसके लिए दिल्ली पुलिस ने कड़े इंतजाम किए हैं। इलाके की निगरानी ड्रोन कैमरों से की जा रही हैं। हालाँकि, जहाँगीरपुरी के जिस इलाके में पिछले साल हिंदुओं पर हमले किए गए थे, उस तरफ जुलूस की इजाजत नहीं दी गई है।

हालाँकि, प्रशासन ने जहाँगीरपुरी के एक सीमित इलाके में ही रामनवमी का जुलूस निकालने की अनुमति दे दी है। इसके लिए पुलिस ने जहाँगीरपुरी के रामलीला मैदान के 200 मीटर के दायरे में बैरिकेडिंग की है। इस बैरिकेडिंग के बाहर कोई जुलूस आदि नहीं निकल सकता। हर आयोजक यह सीमा मानने के लिए बाध्य है। हालाँकि, हिंदू शांतिपूर्ण तरीके से भगवान राम का जन्मोत्सव मना रहे हैैं।

शोभा यात्रा को लेकर दिल्ली नॉर्थ-वेस्ट जिले के डीसीपी जीतेंद्र मीणा ने कहा, “पूरे ज़िले में पुलिस तैनात है। जहाँगीरपुरी में एहतियाती व्यवस्था की गई है। जुलूस या शोभा यात्रा की अनुमति नहीं है, लोग पार्क में शांतिपूर्वक रामनवमी मना सकते हैं।” इस दौरान भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।

हालाँकि, सायमा जैसी कट्टरपंथी सोच रखने वाले लोग जहाँगीरपुरी में सीमित दायरे में भी राम नवमी मनाए जाने को भी बर्दाश्त नहीं कर पा रही हैं। सायमा ने रामनवमी मना रहे लोगों की तस्वीरें रिट्वीट करते हुए लिखा, “ये क्या है?”

शहजाद खान नाम के एक कथित पत्रकार ने लिखा, “जहाँगीरपुरी में रामनवमी जुलूस और रमज़ान प्रेयर दोनों की परमिशन पुलिस ने नहीं दी, लेकिन रामनवमी का जुलूस निकाला गया।”

उमर नाम के एक मुस्लिम यूजर ने लिखा, “देखिए कि रैली करने की अनुमति देने से पुलिस द्वारा इनकार करने के बाद भी वे अपना रास्ता बनाया?”

पिछले साल 16 अप्रैल को दिल्ली के जहाँगीरपुरी इलाके में हनुमान जयंती के जुलूस पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया था। जुलूस शांतिपूर्वक चल रहा था। इसी दौरान इलाके के जामा मस्जिद के पास अंसार शेख और उसके साथी ने जुलूस को रोक दिया। इस दौरान उन्होंने बहस करना शुरू कर दिया। बाद में जुलूस पर पथराव कर दिया गया।

प्राथमिकी के अनुसार, पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया, लेकिन इस्लामवादियों ने आदेशों की अवहेलना की और वाहनों में आग लगा दी। उन्होंने हिंदू श्रद्धालुओं पर पत्थर और कांच की बोतलें भी फेंकी। बाद में सोनू चिकना नाम के एक मुस्लिम व्यक्ति द्वारा जुलूस पर गोलियाँ चलाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

जहाँगीरपुरी में नहीं निकलेगी ‘रामनवमी’ पर शोभा यात्रा’: दिल्ली पुलिस ने अनुमति देने से इनकार किया

सांकेतिक तस्वीर साभार- एपी
रामनवमी का त्योहार इस साल गुरुवार (30 मार्च 2023) को मनाया जाएगा। देश के कई हिस्सों में इस अवसर पर रैली निकाली जाती है। हालाँकि, दिल्ली के जहाँगीरपुरी में रामनवमी के अवसर पर श्री राम भगवान प्रतिमा यात्रा को मंजूरी नहीं दी गई है। इसी इलाके में 16 अप्रैल 2022 को हनुमान जयंती के अवसर पर निकाली गई रैली को कट्टरपंथियों ने निशाना बनाया था। रैली पर पत्थरबाजी की गई थी जिसमें 8 पुलिसकर्मी समेत एक नागरिक घायल हो गया था।

दिल्ली पुलिस ने पिछले साल की घटना को ध्यान में रखते हुए जहाँगीरपुरी में रामनवमी शोभा यात्रा निकालने की इजाजत नहीं दी। दिल्ली पुलिस की तरफ से बयान जारी कर कहा गया है कि दंगा प्रभावित जहाँगीरपुरी इलाके में भगवान श्रीराम की प्रतिमा यात्रा यानी रामनवमी रैली निकालने की इजाजत नहीं होगी। पुलिस की तरफ से कहा गया है कि पिछले साल यहाँ भारी लॉ एंड ऑर्डर की समस्या उत्पन्न हो गई थी। इसलिए इस बार शोभायात्रा की इजाजत नहीं दी गई है।

अब यह चर्चा होने लगी है कि अगर किसी वजह से किसी अन्य मजहब के त्यौहार पर दंगा होने पर क्या उनके त्यौहार मनाने की इजाजत होगी? यह वह ज्वलन्त प्रश्न है, जिसका उत्तर केवल दिल्ली पुलिस नहीं, बल्कि दिल्ली सरकार से लेकर केंद्र सरकार को देना होगा कि क्या केवल हिन्दुओं को ही अपमानित किया जाता रहेगा?

दिल्ली पुलिस ने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए यात्रा की इजाजत नहीं दी। आदेश में कहा गया है कि पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार इस विशेष कार्यक्रम के लिए समूह को पहले कोई अनुमति नहीं दी गई। अर्थात यात्रा पारंपरिक नहीं है। केवल जहाँगीरपुरी इलाके के लिए इस यात्रा की अनुमति से इनकार किया गया है। यात्रा की इजाजत न मिलने से सोशल मीडिया पर लोगों ने नाराजगी जताई है।

इसी इलाके में स्थित नेताजी सुभाष प्लेस के एक पार्क में नमाज पढ़ने के लिए पहली बार मुस्लिमों के एक ग्रुप ने दिल्ली पुलिस से इजाजत माँगी थी। दिल्ली पुलिस ने इसे भी अस्वीकार कर लिया। पुलिस ने नमाजियों को पहले की तरह मस्जिद या अपने घरों में नमाज पढ़ने की सलाह दी। पुलिस ने कहा कि यहाँ पहले कभी खुले में नमाज नहीं पढ़ा गया इसलिए इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती।

साल 2022 की हनुमान जयंती के अवसर पर निकाली गई शोभा यात्रा के दौरान मुस्लिमों के एक समूह ने यात्रा पर हमला कर दिया था। यात्रा की सुरक्षा में तैनात 8 पुलिसकर्मी इस हमले में घायल हो गए थे। पत्थरबाजी के दौरान तीन राउंड फायरिंग की भी जानकारी सामने आई थी। फायरिंग में एक पुलिसकर्मी जख्मी हो गए थे।


दिल्ली : मोदी विरोधी बेनामी पोस्टर, AAP दफ्तर से निकले वैन में मिले 10 हजार पोस्टर, 50 हजार के दिए गए थे ऑर्डर

दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध में आपत्तिजनक पोस्टर लगाने के मामले में पुलिस ने करीब 100 एफआईआर दर्ज किए हैं। अब तक 6 की गिरफ्तारी हुई है। ‘मोदी हटाओ, देश बचाओ लिखे’ ये पोस्टर 19 मार्च 2023 से लेकर सोमवार की सुबह तक दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में लगाए गए थे। इन पर इसे मुद्रित करने वाले का नाम तक नहीं था। आम आदमी पार्टी (AAP) के दफ्तर से निकले एक वैन को पकड़ा गया है, जिसमें इस तरह के करीब 10 हजार पोस्टर मिलने की बात कही जा रही है। यह बात भी सामने आई है कि करीब 50 हजार पोस्टर प्रिंट करने के ऑर्डर दिए गए थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रविवार की रात दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में ‘मोदी हटाओ, देश बचाओ’ लिखे पोस्टर लगाए गए थे। इन पोस्टरों को न सिर्फ सार्वजानिक स्थानों और सरकारी भवनों पर चिपकाया गया था, बल्कि कई प्राइवेट प्रॉपर्टी पर भी लगाया गया था। पोस्टरों में प्रिंटिंग प्रेस का नाम भी नहीं था। इसकी जानकारी मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने लगभग 2 हजार पोस्टरों को अलग-अलग हिस्सों से हटावाया। प्रिंटिंग प्रेस अधिनियम के साथ पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट के तहत 100 FIR दर्ज कर दिल्ली पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

जाँच के दौरान पोस्टर छापने वाले एक प्रिंटिंग प्रेस का पता दिल्ली के नारायणा में मिला। पुलिस ने प्रिंटिंग प्रेस के मालिक को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने बताया कि उसे ऐसे 50 हजार पोस्टर छापने का ऑर्डर दिया गया था। पुलिस ने प्रिंटिंग प्रेस में मिले कुछ पोस्टरों को जब्त कर लिया है। इसी दौरान आम आदमी पार्टी ऑफिस के पास एक वाहन को पुलिस ने रोका। यह गाड़ी आम आदमी पार्टी ऑफिस से निकलकर डीडीयू मार्ग की तरफ बढ़ रही थी। तलाशी के दौरान इसमें लगभग 10 हजार पोस्टर मिले, जिन्हें जब्त कर लिया गया है। गाड़ी मालिक विष्णु और ड्राइवर पप्पू को गिरफ्तार कर लिया गया है।

जानकारी के मुताबिक पोस्टरों को छापने और चिपकाने के लिए 2 अलग-अलग प्रिंटिंग प्रेस को ठेका दिया गया था। पुलिस ने दूसरे प्रिंटिंग प्रेस के मालिक को भी गिरफ्तार किया है। पुलिस इस पूरे मामले की पड़ताल कर रही है। पुलिस यह भी जानने का प्रयास कर रही है कि पोस्टरों को किसके इशारे पर छापा और चिपकाया जा रहा था। गौरतलब है कि नियमानुसार पोस्टर पर प्रिंट करने वाले प्रेस की जानकारी देना अनिवार्य होता है। साथ ही बिना अनुमति पब्लिक या सरकारी सम्पत्ति पर पोस्टर चिपकाना भी कानूनन जुर्म है।

‘वोट देना गुनाह, मुस्लिम न दें’ : जामिया मस्जिद के इमाम अब्दुल अजीज के अफगानिस्तान के ISIS से संपर्क

                                      महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के ISIS नेटवर्क पर NIA का छापा
राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के 5 अलग-अलग हिस्सों में छापेमारी की है। यह छापेमारी अंतर्राष्ट्रीय आतंकी समूह ISIS से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ की गई है। बताया जा रहा है कि NIA को मौलाना अब्दुल अज़ीज़ सलाफी और उसकी गैंग की तलाश है जो यूट्यूब पर भड़काऊ वीडियो से युवाओं को कट्टरपंथ सिखा रहा है। शनिवार (11 मार्च 2023) को हुई इस छापेमारी के दौरान कई ऐसे दस्तावेज मिले हैं जिस से मौलाना की गैंग के भारत विरोधी होने के सबूत मिले हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 40 वर्षीय मौलाना अब्दुल सलाफी और उसके गुर्गे अफगानिस्तान में सक्रिय ISIS के खुरासान नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। सलाफी मध्य प्रदेश के शिवनी जिले की जामिया मस्जिद का इमाम है। वहीं इस नेटवर्क के दूसरे बड़े नाम के तौर पर 26 वर्षीय शोएब का नाम आ रहा है। शोएब की ऑटो पार्ट्स दुकान है। इन दोनों पर आरोप है कि ये भारत के लोकतंत्र से नफरत करते हैं और बाकी लोगों को भी मतदान में हिस्सा न लेने के लिए भड़काते हैं।

बताया जा रहा है कि मौलाना सलाफी और शोएब मुस्लिम युवाओं को यूट्यूब के भड़काऊ वीडियो दिखाते हैं। ये दोनों आरोपित मतदान में मुस्लिमों के हिस्सा लेने को गुनाह मानते हैं। NIA ने शुरुआती जाँच में पाया है कि मौलाना सलाफी का नेटवर्क अफगानिस्तान में चल रही ISIS की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखता है। इसी के साथ यह गैंग अन्य मुस्लिम युवकों में भी ज्यादा से ज्यादा अपनी मानसिकता डालने की फिराक में है। NIA की तलाशी में इस बावत कुछ दस्तावेज और अन्य सबूत मिलने का भी दावा किया गया है।

इस नेटवर्क से जुड़े पाए गए पुणे के तल्हा खान और सिवनी में अकरम खान के ठिकानों की तलाशी हुई है। इसके अलावा मौलाना अब्दुल अजीज सलाफी व शोएब खान के घर और दुकानों को भी खँगाला गया है। दावा किया जा रहा है कि NIA ने मौलाना अब्दुल अजीज सलाफ़ी और शोएब को हिरासत में ले कर पूछताछ भी की। यह पूछताछ जबलपुर में हुई थी जहाँ से उन्हें छोड़ दिया गया। उसके बाद उन्हें नोटिस भेजकर बेंगलुरु बुलाया गया।

जाँच एजेंसी को इस नेटवर्क की जानकारी दिल्ली पुलिस द्वारा ओखला से पकड़े गए कश्मीरी दम्पति जेब शामी और हिना बशीर से हुई पूछताछ के बाद हुई। इस कश्मीरी दम्पति का इस्लामिक स्टेट से कनेक्शन पाया गया था। इस गैंग से जुड़े एक अन्य आरोपित अब्दुल्ला बासिथ का भी नाम सामने आया है। अब्दुल्ला पहले से ही एक अन्य मामले में तिहाड़ जेल में बंद है।