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ज्ञानवापी अकेला नहीं, हर विवादित ढाँचे के नीचे मंदिर… 1800 स्थल जहाँ हिन्दू मंदिरों को ध्वस्त कर बनाई गई मस्जिदें-मजार: राज्यवार सूची

अहमदाबाद का सुल्तान अहमद शाह मस्जिद, पलक्कड़ में टीपू सुल्तान का किला, मांडू में दिलावर खान मस्जिद, अजमेर में ढाई दिन का झोंपड़ा (बाएँ से दाएँ)
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (UP CM Yogi Adityanath) ने साफ कर दिया है कि वाराणसी स्थित ज्ञानवापी को मस्जिद कहना गलत है। उन्होंने कहा कि इसमें त्रिशूल सहित हिंदू धर्म के अन्य निशान हैं। साथ ही कहा है कि इस ‘ऐतिहासिक भूल’ के समाधान के लिए ​मुस्लिम समाज की ओर से प्रस्ताव आना चाहिए।

हालाँकि, देश भर में ऐसे कई निर्माण हैं। वर्ष 1990 में इतिहासकार सीता राम गोयल ने अन्य लेखकों अरुण शौरी, हर्ष नारायण, जय दुबाशी और राम स्वरूप के साथ मिलकर ‘हिंदू टेम्पल: व्हाट हैपन्ड टू देम’ (Hindu Temples: What Happened To Them) नामक दो खंडों की किताब प्रकाशित की थी। उसमें गोयल ने 1800 से अधिक मुस्लिमों द्वारा बनाई गई इमारतों, मस्जिदों और विवादित ढाँचों का पता लगाया था, जो मौजूदा मंदिरों/या नष्ट किए गए मंदिरों की सामग्री का इस्तेमाल करके बनाए गए थे। कुतुब मीनार से लेकर बाबरी मस्जिद, ज्ञानवापी विवादित ढाँचे, पिंजौर गार्डन और अन्य कई का उल्लेख इस किताब में मिलता है।

लेखकों द्वारा उपयोग की जाने वाली पद्धति

पुस्तक के कुछ अध्याय में लेखकों के समाचार पत्रों में पहले प्रकाशित लेखों का भी एक संग्रह है। अध्याय छह में, ‘Historians Versus History’ अर्थात ‘इतिहासकार बनाम इतिहास’ राम स्वरूप ने उल्लेख किया है कि हिंदू मंदिरों को कैसे ध्वस्त किया गया और इससे जुड़ी अन्य जानकारियों के बारे ब्रिटिश और मुस्लिम दोनों इतिहासकारों ने अपने-अपने तरीके से कैसे लिखा है। बात करें ब्रिटिश इतिहासकारों की तो उन्होंने भारत को गुलाम बनाने और यहाँ राज करने को सही ठहराते हुए मुगलों द्वारा की गई क्रूरता और बर्बरता को गलत करार दिया है। इसके विपरीत, मुस्लिम इतिहासकारों ने इस्लाम और उनके तत्कालीन संरक्षकों का महिमामंडन करते हुए विस्तार से बताया कि कैसे मुस्लिम आक्रांताओं ने मंदिरों को तोड़ा और उसके स्थान पर मस्जिद का निर्माण किया।
देश भर में मौजूद मस्जिदों और कई ऐतिहासिक इमारतों में उपलब्ध शिलालेखों में अल्लाह, पैगंबर और कुरान को कोट करके लिखा हुआ है। इन अभिलेखों से पता चलता है कि इन इमारतों का निर्माण किसके द्वारा, कैसे और कब किया गया था। पुस्तक में कहा गया है, “शिलालेखों को विद्वान मुस्लिम एपिग्राफिस्टों द्वारा उनके ऐतिहासिक संदर्भ से जोड़ा गया है। वे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा अपने एपिग्राफिया इंडिका अरबी और फारसी में प्रकाशित किए गए हैं। पहली बार 1907-08 में एपिग्राफिया इंडो-मोस्लेमिका के रूप में प्रकाशित हुआ था।”
5 फरवरी, 1989 को अरुण शौरी (Arun Shourie) का एक लेख प्रकाशित हुआ था। उसमें उन्होंने एक प्रसिद्ध और प्रभावशाली व्यक्ति मौलाना हकीम सैयद अब्दुल हाई (Maulana Hakim Sayid Abdul Hai) का जिक्र किया था। शौरी ने बताया था कि उन्होंने कई किताबें लिखी हैं, जिनमें से एक किताब ‘हिंदुस्तान की मस्जिदें’ है, जिसमें 17 पन्नों का अध्याय था। उस अध्याय के बारे में बात करते हुए शौरी ने कहा था, उसमें मस्जिदों का संक्षिप्त विवरण लिखा गया था, जिसमें हाई ने बताया था कि कैसे मस्जिदों के निर्माण के लिए हिंदू मंदिरों को नष्ट कर दिया गया था।
उदाहरण के लिए बाबरी मस्जिद, जिसके बारे में हमने पढ़ा है, “अयोध्या, जिसे भगवान श्रीराम की जन्मभूमि कहा जाता है। वहाँ पर प्रथम मुगल सम्राट बाबर के आदेश पर बाबरी मस्जिद का निर्माण किया गया था। इस जगह को लेकर एक प्रसिद्ध कहानी है। कहा जाता है कि यहाँ श्रीराम चंद्र भगवान की पत्नी सीता का एक मंदिर था, जिसमें वह रहती थीं और अपने पति के लिए खाना बनाती थीं।” उसी स्थान पर बाबर ने एच. 963 में इस मस्जिद का निर्माण किया था।” यहाँ एच 963 का अर्थ हिजरी कैलेंडर वर्ष 963 से है, जो अंग्रेजी कैलेंडर के वर्ष 1555-1556 के बीच होता है।

इस्लामिक जगहों की राज्यवार सूची

इसके अलावा किताब में विभिन्न राज्यों के 1800 से अधिक स्थानों का उल्लेख है। हिंदू मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए समर्पित संगठन, ‘रिक्लेम टेंपल’ ने सीता राम गोयल द्वारा पुस्तक में दी गई सूचियों पर बखूबी काम किया है।

आंध्र प्रदेश

आंध्र प्रदेश को लेकर सीता राम गोयल और अन्य लेखकों ने इस किताब में उल्लेख किया है कि मंदिरों को ध्वस्त करने के बाद उसकी सामग्री का इस्तेमाल मस्जिदों, दरगाहों, प्रवेश द्वार और किलों के निर्माण में किया गया था। अकेले आंध्र प्रदेश को लेकर लेखकों ने 142 जगहों की पुष्टि की है, जिनमें कदिरी में जामी मस्जिद, पेनुकोंडा में अनंतपुर शेर खान मस्जिद, बाबया दरगाह पेनुकोंडा, जो इवारा मंदिर को तोड़कर बनाया गया था। तदपत्री में ईदगाह, गुंडलाकुंटा में दतगिरी दरगाह, दतगिरी दरगाह को जनलापल्ले में जंगम मंदिर के ऊपर बनाया गया है।
वहीं, हैदराबाद के अलियाबाद में मुमिन चुप की दरगाह है, जिसे 1322 में एक मंदिर की जगह पर बनाया गया था। इसी तरह, राजामुंदरी में जामी मस्जिद का निर्माण 1324 में वेणुगोपालस्वामी मंदिर को नष्ट करके किया गया था। आंध्र प्रदेश में मंदिरों का विनाश सदियों से जारी है। 1729 में बनाई गई गचिनाला मस्जिद (Gachinala Masjid,) को राज्य की सबसे नई मस्जिद के रूप में जाना जाता था। यह भी एक मंदिर की जगह पर बनाई गई है।

असम

किताब में असम के दो मंदिरों का उल्लेख किया गया है, जिन्हें तोड़कर मस्जिद और मजार में परिवर्तित कर दिया गया था। इनके नाम हैं, पोआ मस्जिद (Poa Mosque) और सुल्तान गयासुद्दीन बलबन (Ghiyasuddin Balban) की मजार। ये दोनों कामरूप जिले के हाजो के मंदिरों की जगह पर आज भी मौजदू हैं।

पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल में 102 जगहों पर मस्जिदें, किले और दरगाह हैं, जिन्हें मुस्लिम शासकों ने मंदिर को नष्ट करके बनाया था। उन्होंने मंदिरों को नष्ट करने के बाद इकट्ठा हुए मलबे का इस्तेमाल करके इसे बनाया था। इन संरचनाओं में लोकपुरा की गाजी इस्माइल मजार भी शामिल है, जो वेणुगोपाल मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। बीरभूम सियान (1221) Birbhum Siyan (1221) में मखदूम शाह दरगाह को बनाने के लिए मंदिर की सामग्री का उपयोग किया गया था। सुता में सैय्यद शाह शाहिद महमूद बहमनी दरगाह को बौद्ध मंदिर की सामग्री से बनाया गया था। बनिया पुकुर में 1342 में बनाई गई अलाउद-दीन अलौल हक़ मस्जिद (Alaud-Din Alaul Haqq Masjid) को भी मंदिर की सामग्री का इस्तेमाल करके बनाया गया था।
बारहवीं शताब्दी ईस्वी के अंत में मुस्लिमों ने एक हिंदू राजधानी लक्ष्मण नवती को नष्ट कर उसकी सामग्री उपयोग करके गौर में एक मुस्लिम शहर बनाया था। छोटी सोना मस्जिद, तांतीपारा मस्जिद, लटन मस्जिद, मखदुम अखी सिराज चिश्ती दरगाह, चमकट्टी मस्जिद, चाँदीपुर दरवाजा और अन्य संरचनाओं सहित कई मुस्लिम संरचनाएँ शहर में मंदिर की सामग्री का उपयोग करके दो शताब्दियों के अंदर बनाई गई थीं।

बिहार

बिहार में कुल 77 जगहों पर मंदिर को नष्ट करके या फिर उसकी सामग्री का उपयोग करके मस्जिदों, मुस्लिम संरचनाओं, किलों आदि को बनाया गया था। भागलपुर में, हजरत शाहबाज की दरगाह 1502 में एक मंदिर की जगह पर बनाई गई थी। इसी तरह चंपानगर में जैन मंदिरों को नष्ट कर कई मजारों का निर्माण कराया गया था। मुंगेर जिले के अमोलझोरी में मुस्लिम कब्रिस्तान एक विष्णु मंदिर की जगह पर बनाया गया था। गया के नादरगंज में शाही मस्जिद 1617 में एक मंदिर की जगह पर बनाई गई थी।
नालंदा जिले में और बिहारशरीफ में भी मंदिरों को नष्ट किया गया था। 1380 में मखदुमुल मुल्क शरीफुद्दीन की दरगाह, बड़ा दरगाह, छोटा दरगाह और अन्य शामिल हैं। पटना में शाह जुम्मन मदारिया की दरगाह एक मंदिर की जगह पर बनाई गई थी। शाह मुर मंसूर की दरगाह, शाह अरज़ानी की दरगाह, पीर दमरिया की दरगाह भी बौद्ध स्थलों पर बनाई गई थीं।

दिल्ली

किताब में दिल्ली का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि यहाँ कुल 72 जगहों की पहचान की गई है, जहाँ पर मुस्लिम आक्रमणकारियों ने सात शहरों का निर्माण करने के लिए इंद्रप्रस्थ और ढिलिका को नष्ट कर दिया था। मंदिर की सामग्री का उपयोग कई स्मारकों, मस्जिदों, मजारों और अन्य संरचनाओं में किया गया था, जिनमें कुतुब मीनार, कुव्वतुल इस्लाम मस्जिद (1198), शम्सूद-दीन इल्तुतमिश का मकबरा, जहाज़ महल, अलल दरवाजा, अलल मीनार, मदरसा और अलाउद-दीन खिलजी का मकबरा और माधी मस्जिद शामिल हैं।

गुजरात

किताब में गुजरात की 170 ऐसी जगहों के बारे में बताया गया है, जहाँ मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई गई हैं। असवल, पाटन और चंद्रावती के मंदिरों को नष्ट कर इनकी सामग्री का उपयोग अहमदाबाद को एक मुस्लिम शहर बनाने के लिए किया गया था। अहमदाबाद में मंदिर सामग्री का उपयोग करने वाले जो स्मारक बनाए गए हैं, वह हैं- अहमद शाह की जामी मस्जिद, हैबिट खान की मस्जिद।
ढोलका जिले में बहलोल खान की मस्जिद और बरकत शहीद की मजार भी मंदिरों को ध्वस्त करके बनाई गई थी। इसी तरह, सरखेज में, Shaikh Ahmad Khattu Ganj Baksh की दरगाह 1445 में मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाई गई थी। 1321 में, भरूच में हिंदू और जैन मंदिरों के विध्वंस के बाद जो सामग्री इकट्ठा हुई थी। उसका उपयोग करके जामी मस्जिद का निर्माण किया गया था।
भावनगर में बोटाद में पीर हमीर खान की मजार एक मंदिर की जग​ह पर बनाई गई थी। 1473 में द्वारका में एक मंदिर के स्थल पर मस्जिद का निर्माण किया गया था। भुज में, जामी मस्जिद और बाबा गुरु के गुंबद मंदिर के स्थान पर बनाए गए थे। जैन समुदाय के लोगों को रांदेर से निकाल दिया गया और मंदिरों की जगह मस्जिद बना दी गई थीं। जैसे जामी मस्जिद, नित नौरी मस्जिद, मियां की मस्जिद, खारवा मस्जिद को भी मंदिर के स्थान पर बनाया गया था। इसके अलावा सोमनाथ पाटन में बाजार मस्जिद, चाँदनी मस्जिद और काजी की मस्जिद भी मंदिर के स्थानों पर बनाई गई थी।

दीव

दीव में जो जामी मस्जिद है, उसका निर्माण 1404 में किया गया था। पुस्तक में इसका भी उल्लेख किया गया है। इसे भी एक मंदिर को तोड़कर बनाया गया था।

हरियाणा

इतिहासकारों द्वारा हरियाणा में कुल 77 स्थलों का उल्लेख किया गया है। पिंजौर, अंबाला में मंदिर की सामग्री का उपयोग फिदई खान के बगीचे के निर्माण में किया गया था। फ़िदाई खान गार्डन, जिसे बाद में एक सिख सम्राट ने बदलकर यादवेंद्र गार्डन कर दिया था। इसे पिंजौर गार्डन के नाम से भी जाना जाता है। ये भी मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाया गया था। फरीदाबाद में, जामी मस्जिद 1605 में एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई है। नूंह में, मंदिर की सामग्री का उपयोग करके 1392 में एक मस्जिद का निर्माण किया गया था।
बावल में मस्जिदें और गुरुग्राम जिले के फर्रुखनगर में जामी मस्जिद मंदिर के स्थान पर बनाई गई हैं। कैथल में बल्ख के शेख सलाह-दीन अबुल मुहम्मद (Salahud-Din Abul Muhammad) की दरगाह 1246 में मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाई गई थी। कुरुक्षेत्र में टीले पर मदरसा और झज्जर में काली मस्जिद मंदिर स्थलों पर बनाई गई थी। हिसार का निर्माण फिरोज शाह तुगलक ने अग्रोहा से लाई गई मंदिर सामग्री का उपयोग करके किया था। अग्रोहा शहर का निर्माण भगवान राम के पुत्र कुश के वंशज महाराजा अग्रसेन ने करवाया था। महाराजा अग्रसेन का जन्म भगवान राम के बाद 35वीं पीढ़ी में हुआ था। 1192 में मुहम्मद गौरी ने इस शहर को नष्ट कर दिया था।

हिमाचल प्रदेश

किताब में हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में एक जगह के बारे में बताया गया है, यहाँ मंदिर सामग्री का उपयोग करके जहाँगीरी गेट बनाया गया था।

कर्नाटक

कर्नाटक में कुल 192 स्थान हैं। बेंगलुरु के डोड्डा बल्लापुर में अजोधन की मुहिउद-दीन चिश्ती की दरगाह मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाई गई थी। कुदाची में मखदूम शाह की दरगाह और शेख मुहम्मद सिराजुद-दीन पिरदादी की मजार भी मंदिर की जगह पर बनाई गई थी। हम्पी के विजयनगर में मस्जिद और ईदगाह भी मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाए गए थे। काफी पुराने हिंदू शहर बीदर को बदलकर एक मुस्लिम राजधानी का निर्माण किया गया था। सोला खंबा मस्जिद, जामी मस्जिद, मुख्तार खान की मस्जिद मंदिर के स्थान पर बनाई गई थीं और कुछ में मंदिर की सामग्री का इस्तेमाल भी किया गया था।शहर के मंदिरों को या तो ध्वस्त कर दिया गया या फिर उन्हें मस्जिदों में बदल दिया गया। जामी मस्जिद, महला शाहपुर में मंदिर के स्थान पर आज भी मस्जिद मौजूद हैं। बीजापुर एक प्राचीन हिंदू शहर हुआ करता था, लेकिन इसे एक मुस्लिम राजधानी में तब्दील कर दिया गया था। जामी मस्जिद, करीमुद-दीन की मस्जिद, छोटा मस्जिद, आदि मंदिर स्थलों पर बनाए गए थे या मंदिर सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। टोन्नूर, मैसूर में सैय्यद सालार मसूद की मजार मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाई गई थी।

केरल

केरल की दो जगहों का उल्लेख किया गया है। पहला कोल्लम में जामी मस्जिद और दूसरा पालघाट में टीपू सुल्तान द्वारा बनाए गए किले का, जिसमें मंदिर की सामग्री का उपयोग किया गया था।

लक्षद्वीप

लक्षद्वीप में दो जगहों के बारे में बताया गया है। कल्पेनी में मुहिउद-दीन-पल्ली मस्जिद (Muhiud-Din-Palli Masjid) और कवरती में प्रोट-पल्ली मस्जिद भी मंदिर के स्थान पर बनाई गई है। यह सर्वविदित है कि लक्षद्वीप में अब 100% के आसपास मुस्लिम हैं।

मध्य प्रदेश

किताब में मध्य प्रदेश के 151 स्थलों का उल्लेख है। भोपाल में कुदसिया बेगम (Qudsia Begum) द्वारा जामी मस्जिद का निर्माण किया गया था, जहाँ कभी सभामंडल मंदिर हुआ करता था। दमोह में गाजी मियां की दरगाह भी पहले एक मंदिर ही था। धार राजा भोज परमार की राजधानी हुआ करती थी। इसे भी मुस्लिम राजधानी में बदल दिया गया। कमल मौला मस्जिद, लाट की मस्जिद, अदबुल्लाह शाह चंगल की मजार आदि का निर्माण मंदिर की जगह पर या ​फिर उनकी सामग्री का इस्तेमाल करके बनाया गया है।
मांडू एक प्राचीन हिंदू शहर था। इसे भी मुस्लिम राजधानी में भी बदल दिया गया था। जामी मस्जिद, दिलावर खान की मस्जिद, छोटी जामी मस्जिद आदि का निर्माण मंदिर के स्थानों पर किया गया है। चंदेरी को भी मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाया गया था। मोती मस्जिद, जामी मस्जिद और अन्य संरचनाओं में भी मंदिर की सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। ग्वालियर में, मुहम्मद गौस की दरगाह, जामी मस्जिद और गणेश द्वार के पास मस्जिद मंदिर स्थलों पर बनाई गई थी।

महाराष्ट्र

किताब में महाराष्ट्र के 143 स्थलों के बारे में बात की गई है। अहमदनगर में अम्बा जोगी किले में मंदिर की सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। गॉग (Gogh) में ईदगाह, जिसे 1395 में बनाया गया था, यह भी एक मंदिर के स्थान पर बना है। अकोट (Akot) की जामी मस्जिद 1667 में एक मंदिर के स्थल पर बनाई गई थी। करंज में अस्तान मस्जिद 1659 में एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। रीतपुर में औरंगजेब की जामी मस्जिद मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। हजरत बुरहानुद्दीन-दीन गरीब चिश्ती की दरगाह खुल्दाबाद में एक मंदिर स्थल पर 1339 में बनाई गई थी।
मैना हज्जम की मजार मुंबई में महालक्ष्मी मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। मुंबई में जामी मस्जिद एक मंदिर स्थल पर बनाई गई थी। परंदा में तलाब के पास नमाजगाह का निर्माण मनकेवरा मंदिर को ध्वस्त करके किया गया था। लातूर में, मीनापुरी माता मंदिर को मबसू साहिब की दरगाह में बदल दिया गया था, सोमवारा मंदिर को सैय्यद कादिरी की दरगाह में बदल दिया गया था। वहीं, रामचंद्र मंदिर को पौनार की कादिमी मस्जिद (Qadimi Masjid) में बदल दिया गया था।

ओडिशा

ओडिशा में 12 ऐसी जगह हैं, जहाँ मंदिरों को तोड़कर उसके स्थान पर मस्जिद, दरगाह और मजार बनाई गई है। बालेश्वर में महल्ला सुन्नत में जामी मस्जिद श्री चंडी मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। शाही मस्जिद और कटक में उड़िया बाजार की मस्जिदों के साथ-साथ केंद्रपाड़ा में एक मस्जिद को मंदिर को तोड़कर बनाया गया था।

पंजाब

किताब में पंजाब के 14 जगहों का जिक्र है। इसमें बाबा हाजी रतन की मजार बठिंडा में एक मंदिर को तोड़कर बनाई गई है। जालंधर के सुल्तानपुर की बादशाही सराय बौद्ध विहार के स्थान पर बनी हुई है। लुधियाना में अली सरमस्त की मस्जिद भी एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई है। बहादुरगढ़ में किले अंदर एक मस्जिद बनाई गई है। उसका निर्माण भी मंदिर की जगह पर किया गया है।

राजस्थान

पुस्तक में राजस्थान के 170 स्थलों का उल्लेख है। पहले अजमेर एक हिंदू राजधानी हुआ करती थी, जिसे मुस्लिम शहर में बदल दिया गया था। अढ़ाई-दिन-का-झोंपरा 1199 में बनाया गया था, मुइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह 1236 में बनाई गई थी, और अन्य मस्जिदों का निर्माण मंदिर के स्थान पर किया गया था। तिजारा में भरतारी मजार (Bhartari mazar) एक मंदिर को ध्वस्त करके बनाई गई थी। बयाना में नोहारा मस्जिद का निर्माण उषा मंदिर के स्थान पर किया गया था। भितरी-बहारी (Bhitari-Bahari Mahalla) की मस्जिद में विष्णु भगवान की मंदिर की सामग्री का उपयोग किया गया था।
काम्यकेश्वर मंदिर को कामां में चौरासी खंबा मस्जिद में बदल दिया गया था। पार्वंथा मंदिर (Parvantha) की सामग्री का उपयोग जालोर में तोपखाना मस्जिद में किया गया था, जिसे 1323 में बनाया गया था। शेर शाह सूरी के किले शेरगढ़ में हिंदू, बौद्ध और जैन मंदिरों की सामग्री का उपयोग किया गया था। लोहारपुरा में पीर जहीरुद्दीन की दरगाह मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। 1625 में, सलावतन में मस्जिद एक मंदिर स्थल पर बनाई गई थी। पीर जहीरुद्दीन की मजार और नागौर में बाबा बद्र की दरगाह भी मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी।

तमिलनाडु

किताब में तमिलनाडु के 175 स्थलों का उल्लेख किया गया है। Chingleput के आचरवा में शाह अहमद की मजार भी एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। कोवलम में मलिक बिन दिनार की दरगाह एक मंदिर की जगह पर बनाई गई थी। पंचा पद्यमलाई की पहाड़ी का नाम बदलकर मौला पहाड़ कर दिया गया था। एक प्राचीन गुफा मंदिर के सेट्रल हॉल को मस्जिद में बदल दिया गया था। कोयंबटूर में, टीपू सुल्तान ने अन्नामलाई किले की मरम्मत के लिए मंदिर की सामग्री का इस्तेमाल किया। टीपू सुल्तान की मस्जिद भी एक मंदिर की जगह पर बनाई गई थी। तिरुचिरापल्ली (Tiruchirapalli) में नाथर शाह वाली की दरगाह एक शिव मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। मंदिर के लिंगम का उपयोग लैंप के रूप में किया गया था।

उत्तर प्रदेश

अब आते हैं उत्तर प्रदेश पर। किताब में यूपी के 299 स्थलों का उल्लेख है, जो मंदिर सामग्री और मंदिर के स्थानों पर बनाए गए थे। आगरा की कलां मस्जिद का निर्माण मंदिर की सामग्री से किया गया था। अकबर के किले में नदी के किनारे का हिस्सा जैन मंदिर के स्थान पर बनाया गया था। अकबर का मकबरा भी एक मंदिर के ऊपर खड़ा है। इलाहाबाद में अकबर का किला मंदिर को तोड़कर बनाया गया था। मियां मकबुल और हुसैन खान शाहिद की मजार भी मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। पत्थर महल में मस्जिद का निर्माण लक्ष्मी नारायण मंदिर को ध्वस्त करके किया गया था।
अयोध्या में राम जन्मभूमि के स्थल पर बाबरी मस्जिद का निर्माण किया गया था। हालाँकि उस विवादित ढाँचे को ध्वस्त कर दिया गया है और उस स्थान अब भव्य राम मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा स्वर्गद्वार मंदिर और त्रेता का ठाकुर मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया था और उन जगहों पर औरंगजेब द्वारा मस्जिदों का निर्माण किया गया था।
शाह जुरान गौरी (Shah Juran Ghuri) की मजार एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। सर पैगंबर और अयूब पैगंबर की मजार एक बौद्ध मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी, जहाँ बुद्ध के पदचिन्ह थे। गोरखपुर में इमामबाड़ा एक मंदिर के स्थान पर बनाया गया था। इसी तरह, पावा में कर्बला एक बौद्ध स्तूप के स्थान पर बनाया गया था।
टिलेवाली मस्जिद लखनऊ में एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई है। मेरठ में जामा मस्जिद एक बौद्ध विहार के खंडहर पर स्थित है। एक दरगाह नौचंड़ी देवी के मंदिर को तोड़कर बनाई गई है। वाराणसी में, ज्ञानवापी विवादित ढाँचे को विश्वेश्वर मंदिर सामग्री का उपयोग करके बनाया गया है। हाल ही में अदालत ने विवादित ढाँचे के सर्वेक्षण का आदेश दिया था। सर्वेक्षण करने वाली टीम को वहां एक शिवलिंग भी मिला है। इसके बाद अदालत ने उस जगह को सील कर दिया है।

‘यह केवल एक संक्षिप्त सारांश है’

गोयल ने अपनी किताब में लिखा है कि उनके द्वारा बताई गई सूची अभी अधूरी है, यह सिर्फ एक संक्षिप्त विवरण था। अभी सूची में और कई मस्जिदें व दरगाह हैं, जिनके मंदिर की जगह पर और मंदिर की सामग्री के इस्तेमाल से बनाने के सबूत मौजूद हैं। उन्होंने लिखा, “हमने उल्लेख किए गए स्मारकों के स्थानों, नामों और तारीखों के संबंध में सटीक होने की पूरी कोशिश की है। फिर भी कुछ गलतियाँ और भ्रम रह गए होंगे। हालाँकि, ऐसा कम ही देखने को मिलता है कि विभिन्न स्रोत एक ही स्मारक के लिए अलग-अलग तिथियाँ और नाम का प्रयोग करते हों। कुछ मुस्लिम फकीरों को कई नामों से जाना जाता है, जो उनकी मजारों या दरगाह की पहचान करने में भ्रम पैदा करते हैं। या फिर कुछ जिलों का नाम बदलकर अगर नया नाम रख दिया गया तो ऐसा हो सकता है। खैर, यह केवल एक संक्षिप्त सारांश है।”
(साभार : अनुराग की यह रिपोर्ट मई 2022 में ​पहली बार प्रकाशित हुई थी। आंशिक बदलावों के साथ इसे दोबारा प्रकाशित किया गया है।)
 

दिल्ली के मुहर्रम जुलूस में पुलिस पर क्यों हुआ पथराव? 10 पुलिस वाले घायल… पश्चिम बंगाल में मुहर्रम पर दुर्गा मंदिर का रास्ता ही बंद

मुहर्रम से पहले बैरिकेड लगा ब्लॉक किया गया दुर्गा मंदिर, दिल्ली में तो पुलिस पर ही पथराव
पश्चिम बंगाल में मुहर्रम से एक दिन पहले शुक्रवार (28 जुलाई 2023) को बैरिकेड लगाकर एक दुर्गा मंदिर का रास्ता बंद करने का मामला सामने आया। यह मंदिर मालदा जिले के कालियाचक में स्थित है। बंगाल से दूर दिल्ली के नांगलोई में मुहर्रम पर ताजिया निकलने के दौरान कट्टरपंथी मुस्लिमों ने पथराव किया। इसके कारण पुलिस की गाड़ियों को भी नुकसान पहुँचा।

दिल्ली पुलिस ने शांति बनाए रखने के लिए लाठीचार्ज किया। दिल्ली पुलिस के अधिकारी हरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि नांगलोई में ताजिये के जुलूस में 8-10 हजार लोग मौजूद थे। इनमें से 1-2 आयोजनकर्ता ताजिये का जो रूट पहले से तय था, उससे अलग जाना चाह रहे थे। पुलिस ने जब मना किया तो जुलूस में शामिल लोगों ने पुलिस पर पथराव किया। इसमें 10 पुलिस वाले घायल हुए हैं।

नमाज में व्यवधान के नाम पर आतंक, शादी-ब्याह में DJ नहीं बजने देने के नाम पर बवाल काटने वाली कट्टरपंथी मुस्लिम सोच पर अब लोग सवाल उठा रहे। लोग पूछ रहे कि 29 जुलाई 2023 को मुहर्रम के दिन न तो कोई हिंदू त्योहार था, न ही काँवड़ियों की बात थी… फिर सड़कों पर आतंक किसने मचाया, क्यों मचाया?

दिल्ली पुलिस ने आतंक मचा रही कट्टर इस्लामी भीड़ पर जम कर लाठियाँ बरसाई हैं। सवाल यह उठता है कि पत्थरबाजी वाली मानसिकता से ग्रसित भीड़ को जुलूस का परमिशन दिया ही क्यों जाता है? अगर दिया जाता है तो देश के ही दूसरे राज्य बंगाल में हिंदू मंदिरों की बैरिकेडिंग क्यों कर दी जाती है?

हिंदू मंदिर की बैरिकेडिंग वाली घटना को लेकर भाजपा ममता बनर्जी सरकार पर हमलावर है। इसके बाद हालाँकि बैरिकेड हटा दिए गए। पश्चिम बंगाल बीजेपी के कार्यकर्ता अमित ठाकुर ने ट्वीट कर लिखा, “यह चौंकाने वाली तस्वीर पश्चिम बंगाल के मालदा के कालियाचक की है। जहाँ मुहर्रम के जुलूस के लिए दुर्गा मंदिर को ब्लॉक कर दिया गया है। पश्चिम बंगाल में हिंदुओं की यही हालत है। I.N.D.I.A. के सेक्युलर लोग इस बारे में बात क्यों नहीं कर रहे हैं?”

इस ट्वीट के साथ उन्होंने ‘कालियाचक थाना शरबजनिन दुर्गा मंदिर’ नामक मंदिर की तस्वीर भी शेयर की। तस्वीर में देखा जा सकता है कि बाँस की बल्लियाँ लगाकर मंदिर को पूरी तरह से ब्लॉक करने की कोशिश की गई थी।

इस मामले पर भाजपा नेता अमित मालवीय ने ममता बनर्जी के इशारे पर पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा मंदिर में बेरिकेडिंग करने का आरोप लगाया। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, ”पश्चिम बंगाल पुलिस ने मुहर्रम की पूर्व संध्या पर कालियाचक में दुर्गा मंदिर को ब्लॉक करते हुए बैरिकेड लगाए। यह ममता बनर्जी की सेक्युलरिज्म का ब्रांड है। यह हिंदुओं को नीचा दिखाने और बदनाम करने के लिए हो रहा है। ममता बनर्जी सरकार ने हिंदुओं को दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया है।”

मालवीय ने यह भी कहा, “यह कानून व्यवस्था सँभालने में ममता बनर्जी की असफलता को दिखाता है। सीएम का ऐसा पक्षपातपूर्ण दृष्टिकोण सामाजिक एकजुटता को खत्म करता है और खाइयों को बढ़ाता है। उनकी राजनीति इसके बल पर ही फलती-फूलती है।”

पश्चिम बंगाल बीजेपी के विधायक शुभेंदु अधिकारी ने TMC सरकार की आलोचना करते हुए लिखा, “मैं शर्त लगाता हूँ कि उस इलाके की कोई भी मुहर्रम आयोजन समिति इस तरह के कदम की माँग नहीं कर सकती थी, जिससे सनातनियों को ठेस पहुँचे। सीधे तौर पर यह पश्चिम बंगाल पुलिस की ‘अतिसक्रियता’ है। ममता बनर्जी के शब्दकोश में ‘सेक्युलरिज्म’ ‘वोट बैंक की राजनीति’ का दूसरा नाम है। यही कारण है कि सरकार धार्मिक त्योहारों के दौरान ‘अतिसक्रियता की समस्या’ से ग्रस्त है। ममता बनर्जी सरकार में आम तौर पर कुछ ऐसा होता रहा है, जिससे सनातनियों की भावनाएँ आहत होती हैं।”

राज्य के मुख्य सचिव के तत्काल हस्तक्षेप का अनुरोध करते हुए, शुभेंदु अधिकारी ने कहा, “ममता बनर्जी अपनी ओछी राजनीति के लिए जानबूझकर बैरिकेडिंग लगवा रही हैं और दोनों समुदायों के बीच दरार पैदा कर रही हैं। वह कलह पैदा करने और दोनों समुदायों के बीच सद्भाव को बिगाड़ने की कोशिश कर रही हैं।”

हालाँकि बाद में शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि दुर्गा मंदिर के बाहर से बैरिकेड्स हटा दिए गए हैं।

वहीं, कुछ सोशल मीडिया यूजर्स का दावा है कि मुहर्रम के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए हिंदुओं ने ही मंदिर के बाहर बैरिकेड्स लगाए थे।

बहरहाल, यहाँ यह बताना जरूरी है कि ममता बनर्जी ने मुहर्रम जुलूस को रास्ता देने के लिए साल 2016 और 2017 में माँ दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन पर रोक लगा दी थी।


बिहार : हसीना खातून मत घबराना, तेरे साथ सारा जमाना… औरंगाबाद जिले में 3 मंदिरों में फेंके गए मांस के टुकड़े, पोस्टर में मोदी-शाह और ‘बजरंग दल’ को धमकी

औरंगाबाद में 3 मंदिरों में मांस फेंक कर मोदी विरोधी पोस्टर लगाने के बाद इलाके में तनाव (चित्र साभार- jagranprabhat.com)
बिहार के औरंगाबाद जिले में साम्प्रदायिक तनाव की खबर है। बताया जा रहा है कि शनिवार (1 जुलाई, 2023) को यहाँ के 3 मंदिरों में मांस के टुकड़े फेंके गए हैं। एक दुकान पर भकड़ाऊ पोस्टर चिपकाया गया है जिसमें PM मोदी, अमित शाह और RSS से जुड़े लोगों को धमकी दी गई है। हिन्दू संगठनों ने इस हरकत पर नाराजगी जताई है। हालात को देखते हुए घटनास्थल पर अतिरिक्त पुलिस फ़ोर्स तैनात कर दिया गया है। पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

जब तक ऐसे मुद्दों पर सख्ती से कार्यवाही नहीं होगी, तब तक देश में कट्टरपंथी हिन्दू-मुसलमान कर लोगों में डर का वातावरण बनाते रहेंगे। क्यों नहीं ऐसे उपद्रवियों और इनके परिवारों चाहे वह हिन्दू है या मुसलमान को मिलने वाली हर सरकारी सुविधा से वंचित नहीं किया जाता, ऐसी ओछी हरकते होती रहेंगी। कौन है ये हसीना खातून? 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना औरंगाबाद के अमझर शरीफ इलाके का है। शनिवार को यहाँ हसपुरा बाजार स्थित 3 धर्मस्थलों पर मांस के टुकड़े फेंके गए। इसके अलावा इसी बाजार के व्यापारी कुणाल कुमार की दुकान पर भी मांस का टुकड़ा फेंक कर एक पर्चा चिपका दिया गया। इस पर्चे में पीएम मोदी, अमित शाह, भाजपा के सभी विधायकों के साथ RSS और बजरंग दल वालों को मुर्दाबाद लिखा गया है। कुछ स्थानीय हिन्दू नेताओं के नाम भी चोर बताते हुए लिखे गए हैं। पर्चे में किसी अहले कोरैश नाम का संगठन लिखा हुआ है जिसे अहले कुरैश माना जा रहा है।

भड़काऊ पर्चे के बीच में ‘हसीना खातून मत घबराना, तेरे साथ सारा जमाना’ भी लिखा गया है। रविवार (2 जुलाई) को जब घटना की जानकारी स्थानीय निवासियों को हुई तो वो भड़क गए। मंदिरों में मांस का टुकड़ा मिलने की सूचना से आस-पास के गाँव में भी तनाव फ़ैल गया। नाराज लोगों ने हसपुरा बाजार बंद रखा। घटना की जानकारी होते ही पुलिस मौके पर पहुँची। DM और SP ने नाराज लोगों को समझाने की कोशिश की। भारी फ़ोर्स ने तनावग्रस्त इलाके में फ्लैग मार्च किया। पुलिस ने धर्म स्थल से मांस के टुकड़े भी साफ़ करवाए।

पुलिस ने इस मामले में अज्ञात FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। लोगों को समझा रहे मौके पर मौजूद सीनियर अधिकारियों ने इसे किसी शरारती तत्व की करतूत बताया है। पुलिस के मुताबिक यह घटना इलाके में तनाव फैलाने की करतूत थी जिसे जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा। जाँच के लिए डॉग स्क्वाड, FSL टीमों की मदद ली जा रही है और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भी जुटाया जा रहा है।

‘प्रसाद खाने से लौटी बेटे की आँख की रौशनी’ : रानी बेगम और जुनैद द्वारा इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म अपनाने पर मिल रही कत्ल की धमकियाँ

कानपुर में मंदिर के प्रसाद से बेटे की आँखें ठीक हुई तो मुस्लिम महिला बनी हिन्दू (चित्र साभार- @tusharcrai)
उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक मुस्लिम महिला ने अपने बेटे सहित हिंदू धर्म अपना लिया है। दिव्यांग रानी बेगम नाम की इस महिला का दावा है कि मंदिर का प्रसाद खाने से उनके बेटे जुनैद की आँखों की रौशनी लौटी आई है। जुनैद की आँखें बचपन में ही खराब हो गईं थीं। हिंदू धर्म अपनाने के बाद जुनैद को अब उसकी ससुराल से मौत की धमकियाँ मिल रहीं हैं। शुक्रवार (9 जून 2023) को जुनैद ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। पुलिस ने इन धमकियों का संज्ञान ले कर जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला कानपुर के बाबूपुरवा का है। यहाँ एक किराए के मकान में दिव्यांग महिला रानी बेगम अपने 26 वर्षीय बेटे जुनैद के साथ रहती है। रानी के शौहर खुर्शीद का इंतकाल काफी समय पहले हो गया था। रानी का दावा है कि हिंदू धर्म में उनकी आस्था बचपन से थी। जुनैद के जन्म के समय उनकी आँखों में कुछ दिक्कत थी। थोड़े समय बाद उनके बेटे को पूरी तरह से दिखना बंद हो गया। रानी ने अपने बेटे का कई जगहों पर इलाज करवाया लेकिन उस से कोई फायदा नहीं हुआ।

रानी बेगम कुछ समय तक कानपुर के भाजपा नेता सतीश महाना के घर भी किराए पर रहीं हैं। इस दौरान उनकी एक हिंदू पड़ोसन उन्हें ले कर शोभन सरकार के मंदिर गईं। रानी का दावा है कि यहाँ मिले प्रसाद से उनके बेटे की आँखों की रौशनी लौट आई। इस चमत्कार के बाद रानी और उनके बेटे की हिंदू धर्म में और आस्था बढ़ गई। इस बीच जुनैद की शादी साल 2019 में कानपुर के ही बिंदकी इलाके की रहने वाली एक लड़की से हुई। जब लड़की के घर वालों को जुनैद की हिंदू धर्म में आस्था के बारे में पता चला तो वो काफी नाराज हुए।

हालाँकि जुनैद इस बीच में भगवा वस्त्र पहनने लगे थे और हाथों में अक्सर भगवान गणेश की मूर्ति रखा करते थे। आरोप है कि इन बातों से नाराज हो कर जुनैद की ससुराल वालों ने एक बार रानी बेगम को करेंट से मारने की भी साजिश रची। गले में रुद्राक्ष की माला डाल कर मीडिया से बात करते हुए जुनैद ने कहा, “भगवा वस्त्र हमें सुकून देता है। हिंदुओं ने हमारे साथ हमेशा अच्छा किया है। हम उन्हीं के बीच रहते आए हैं। गणेश जी हमारे लिए बहुत शुभ हैं। वो 5 वर्षों से घर में विराजमान हैं। समस्या सिर्फ ससुराल वालों से है। वो हमारे कत्ल की धमकी दे रहे हैं।”

जुनैद ने इसकी शिकायत स्थानीय पुलिस से की लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आखिरकार 9 जून को जुनैद कानपुर के DCP दक्षिणी शिवजी शुक्ला से मिला और अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई। DCP के निर्देश पर पुलिस ने जुनैद को उनकी ससुराल से मिल रही धमकियों पर जाँच शुरू कर दी।


मध्य प्रदेश : हिंदुओं के मंदिर, हिंदुओं का ही कंट्रोल : शिवराज सरकार का ऐतिहासिक फैसला

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य के हिन्दू मंदिरों को लेकर किए गए अपने वादे को निभाया है। अप्रैल 2023 में उन्होंने ऐलान किया था कि मंदिरों की गतिविधियों पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं रहेगा। मंदिर की जमीनों को नीलाम कलेक्टर नहीं बल्कि पुजारी कर सकेंगे। साथ ही उन्होंने निजी मंदिरों के पुजारियों को भी सम्मानजनक मानदेय देने की बात कही थी। लगभग एक महीने बाद उनकी सरकार ने इन फैसलों पर मुहर लगा दी है।

भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने मध्य प्रदेश की कैबिनेट द्वारा लिए गए फैसले की जानकारी देते हुए बुधवार (17 मई, 2023) को बताया कि ऐसे मंदिर जिनके प्रबंधन का कार्य सरकार देख रही है, वहाँ 10 एकड़ तक की कृषि क्षेत्र वाली जमीन से होने वाली आय पुजारियों की होगी। बाक़ी जमीनों को खेती के लिए नीलम किया जाएगा और उनसे आने वाले रुपए को मंदिर के बैंक खाते में डाला जाएगा। मंदिर की जमीन को अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए भी अभियान शुरू होगा।

हिन्दू मंदिरों के लिए मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार लगातार काम कर रही है। पिछले साल पुजारियों को बढ़ा हुआ मानदेय देने के आदेश जारी किए गए थे। जिन मंदिरों या पुजारियों के पास कृषि योग्य भूमि नहीं है, उन्हें 5000 रुपए का मासिक भत्ता दिया जा रहा है। जिन मंदिरों या पुजारियों के पास 5 एकड़ कृषि भूमि है, उन्हें भी ढाई हजार रुपए हर महीने मिलेंगे। गरीब पुजारियों के जीवन-यापन के लिए राज्य सरकार ने ये निर्णय लिया है।

इसके अलावा मध्य प्रदेश की कैबिनेट ने और भी बड़े फैसले लिए हैं। ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहन योजना’ के तहत राज्य की महिलाओं को हर महीने 1000 रुपए दिए जाने के लिए बजट का आवंटन भी कर दिया गया है। सीएम चौहान ने बताया कि ‘मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना’ के तहत युवक-युवती काम सीखेंगे और साथ में ₹8 हजार से ₹10 हजार तक प्रतिमाह कमाएँगे भी। उन्होंने बेरोजगारी भत्ता की जगह स्किल डेवलपमेंट करने और उसके बदले पैसे देने पर जोर दिया।

काशी-उज्जैन के बाद अब ‘माँ कामाख्या कॉरिडोर’ की बारी

 मोदी ने 'माँ कामाख्या कॉरिडोर' को ऐतिहासिक पहल बताया (फोटो साभार: @himantabiswa)
उत्तर प्रदेश के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और मध्य प्रदेश के महाकाल कॉरिडोर की तर्ज पर असम सरकार ने गुवाहाटी में माँ कामाख्या कॉरिडोर की रूप रेखा तैयार कर ली है। यानी जल्द ही राज्य सरकार ‘माँ कामाख्या कॉरिडोर’ पर कार्य शुरू कर देगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  ने 19 अप्रैल 2023 को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) द्वारा शेयर की गई वीडियो को साझा किया।

इसके साथ उन्होंने लिखा, “मुझे यकीन है कि ‘माँ कामाख्या कॉरिडोर’ एक ऐतिहासिक पहल होगी। जहाँ तक आध्यात्मिक अनुभव का संबंध है, काशी विश्वनाथ धाम और महाकाल महालोक में परिवर्तन हो रहा है। समान रूप से महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलता है और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।” असम के मुख्यमंत्री ने 18 अप्रैल, 2023 को अपने ट्विटर हैंडल पर मंदिर गलियारे का एनीमेटेड वीडियो शेयर किया और भक्तों को यहाँ के भविष्य की एक झलक पेश की थी।

मुख्यमंत्री ने लिखा, ” ‘माँ कामाख्या कॉरिडोर’ भविष्य में कैसा दिखेगा। इसकी एक झलक साझा कर रहा हूँ।”

कामाख्या मंदिर सभी 108 शक्ति पीठों में से एक प्राचीन मंदिरों में से एक है। असम में नीलाचल पहाड़ी की चोटी पर स्थित कामाख्या मंदिर की उत्पत्ति 8वीं शताब्दी में हुई थी। इसे 16वीं शताब्दी में कूचबिहार के राजा नारा नारायण ने फिर से बनवाया था। इसके बाद से इसे कई बार पुनर्निमित किया गया है। इस मंदिर में अन्य मंदिरों की तरह मूर्ति की पूजा नहीं की जाती है, बल्कि यहाँ देवी की योनि की पूजा की जाती है। इसे गुफा के एक कोने में रखा गया है। बताया जाता है कि मंदिर में मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को भी प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाती है।

कामाख्या मंदिर एक वार्षिक आयोजन करता है, जिसे अंबुबासी पूजा के नाम से जाना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दौरान देवी का मासिक धर्म होता है। मंदिर तीन दिनों तक बंद रहने के बाद चौथे दिन उत्सव के साथ फिर से खुल जाता है। मान्यता है कि इस पर्व के दौरान ब्रह्मपुत्र नदी भी लाल हो जाती है। इस खास मौके पर शक्ति प्राप्त करने के लिए साधु गुफाओं में साधना करते हैं।

माँ कामाख्या शक्तिपीठ 

51 शक्तिपीठों में से एक कामाख्या शक्तिपीठ बहुत ही प्रसिद्ध और चमत्कारी है। कामाख्या देवी का मंदिर अघोरियों और तांत्रिकों का गढ़ माना जाता है। असम की राजधानी दिसपुर से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित यह शक्तिपीठ नीलांचल पर्वत से 10 किलोमीटर दूर है। कामाख्या मंदिर सभी शक्तिपीठों का महापीठ माना जाता है। इस मंदिर में देवी दुर्गा या मां अम्बे की कोई मूर्ति या चित्र आपको दिखाई नहीं देगा। वल्कि मंदिर में एक कुंड बना है जो की हमेशा फूलों से ढ़का रहता है। इस कुंड से हमेशा ही जल निकलता रहतै है। चमत्कारों से भरे इस मंदिर में देवी की योनि की पूजा की जाती है और योनी भाग के यहां होने से माता यहां रजस्वला भी होती हैं। मंदिर से कई अन्य रौचक बातें जुड़ी है, आइए जनते हैं ...

मंदिर धर्म पुराणों के अनुसार माना जाता है कि इस शक्तिपीठ का नाम कामाख्या इसलिए पड़ा क्योंकि इस जगह भगवान शिव का मां सती के प्रति मोह भंग करने के लिए विष्णु भगवान ने अपने चक्र से माता सती के 51 भाग किए थे जहां पर यह भाग गिरे वहां पर माता का एक शक्तिपीठ बन गया और इस जगह माता की योनी गिरी थी, जोकी आज बहुत ही शक्तिशाली पीठ है। यहां वैसे तो सालभर ही भक्तों का तांता लगा रहता है लेकिन दुर्गा पूजा, पोहान बिया, दुर्गादेऊल, वसंती पूजा, मदानदेऊल, अम्बुवासी और मनासा पूजा पर इस मंदिर का अलग ही महत्व है जिसके कारण इन दिनों में लाखों की संख्या में भक्त यहां पहुचतें है।

तेलंगाना : ऐतिहासिक मंदिर में ‘क्रिश्चियन प्रेयर’, माँसाहारी खाना भी परोसा

पिछले दिनों तेलंगाना के वारंगल स्थित एक ऐतिहासिक हिंदू मंदिर का वीडियो वायरल हुआ था। इसमें कुछ लोग मंदिर में ईसाई प्रार्थना (Christian prayer) करते दिखे थे। अब इस मामले में पादरी गंधम अरुण कुमार और उसके साथियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मंदिर परिसर में माँसाहारी खाना परोसने का भी आरोप है। वीडियो वायरल होने के बाद हिंदू संगठनों ने इसे देवी-देवताओं का अपमान बताते हुए सख्त कार्रवाई की माँग की थी।

एक नॉन प्रॉफिट एक्टिविस्ट ग्रुप ‘लीगल राइट्स प्रोटेक्शन फोरम’ की तरफ से ट्विटर पर इस घटना को लेकर जानकारी साझा की गई है। बताया गया है कि मंदिर में क्रिश्चियन प्रेयर का वीडियो वायरल होने के बाद सब इंस्पेक्टर डी.सांबैया की शिकायत पर पादरी और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। घटना में शामिल पादरी अरुण कुमार और उनके सहयोगियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 295-A, 153A, 153B, 504, 505 r/w 34 के तहत केस दर्ज हुआ है।

जिस मंदिर का वीडियो वायरल हुआ था, वह वारंगल किले में है। काकतीय राजवंश ने इसका निर्माण करवाया था। यह मंदिर पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है। तेलंगाना बंदोबस्ती विभाग (Telangana Endowments Department) इसकी देखरेख करता है। वीडियो वायरल होने के बाद विश्व हिंदू परिषद और बजरंगदल के कार्यकर्ताओं ने पादरी और उसके सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग करते हुए प्रदर्शन किया था। इसे हिंदू देवी-देवताओं का अपमान बताया था।

हिंदू संगठन के लोगों ने डीसीपी श्रीकांत राव और एसीबी रामाला सुनीता से मामले की शिकायत की थी। मीडिया से बात करते हुए संगठन के लोगों ने पूछा कि आखिर दूसरे पंथ के लोगों ने ऐतिहासिक मंदिर परिसर में इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन कैसे किया? संगठन के नेताओं ने जानकारी दी कि मंदिर में भगवान राम के पद चिन्ह (पाद मुद्रा) और शंकु चक्र देखे जा सकते हैं। यहाँ धूम-धाम से शिवरात्रि मनाया जाता है। ऐसे में ईसाई सभा, प्रार्थना और माँसाहारी खाना परोसा जाना धार्मिक अशांति फैलाने वाला कदम है। हिंदू संगठनों की तरफ से चेतावनी दी गई थी कि यदि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो वे सड़कों पर उतरकर बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

कनाडा : हिंदू मंदिर पर हमला: दीवार पर लिखा- मोदी को आतंकवादी घोषित करो, हिंदुस्तान मुर्दाबाद

  कनाडा में हिंदू मंदिर पर एक बार फिर हमला, दीवारों पर लिखे भारत विरोधी नारे (फोटो साभार: @WindsorPolice)
कनाडा (Canada) में हिंदुओं के खिलाफ घृणित अपराध थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। यहाँ एक बार फिर हिंदू मंदिर को निशाना बनाया गया है। ओंटारियों प्रांत के विंडसर शहर के नॉर्थवे एवेन्यू के 1700 ब्लॉक में स्थित हिंदू मंदिर (Hindu Temple) पर नकाबपोश हमलावरों ने 5 अप्रैल 2023 (स्थानीय समय) को हमला किया।
                                                        फोटो साभार: @WindsorPolice

उन्होंने मंदिर में तोड़फोड़ की और दीवारों पर नफरत भरे नारे भी लिखे। इसके साथ ही मंदिर की दीवार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक नारे भी लिखे। स्थानीय पुलिस ने घटना की जानकारी दी है।

विंडसर पुलिस ने दोनों संदिग्धों का सीसीटीवी फुटेज जारी किया है, जिनमें नकाबपोश बदमाश मंदिर की दीवारों पर भारत विरोधी नारे लिखते हुए दिखाई दे रहे हैं। पुलिस इनकी तलाश में जुट गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुरुआती जाँच में पुलिस को इस घटना का एक वीडियो मिला है, जिसमें दो संदिग्धों को रात 12 बजे के बाद इलाके में देखा गया। वीडियो में, एक संदिग्ध मंदिर की दीवार पर तोड़फोड़ करता हुआ दिखाई देता है, जबकि दूसरा थोड़ी दूर पर खड़ा होकर उसे देख रहा है। पुलिस ने बताया कि घटना के समय, एक संदिग्ध ने काले रंग का स्वेटर, बाएँ पैर पर एक छोटे से सफेद लोगो के साथ काली पैंट और काले व सफेद रंग के हाई-टॉप रनिंग शूज पहने थे। दूसरे संदिग्ध ने काली पैंट, एक स्वेटशर्ट, काले जूते और सफेद मोजे पहने थे। उन बदमाशों ने ‘मोदी को आतंकवादी घोषित करो’ और ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ के नारे मंदिर की दीवारों पर लिखे हैं। स्थानीय पुलिस ने कहा, “विंडसर पुलिस हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की जाँच कर रही है।”

पुलिस ने दोनों संदिग्धों से जुड़ी जानकारी साझा करने के लिए फोन नंबर और वेबसाइट का पता जारी किया है। विंडसर पुलिस ने कहा, “जिस किसी को इनके बारे में कोई भी जानकारी मिलती है, वह मोरेलिटी यूनिट को 519-255-6700 पर कॉल करे या EXT 4362 करें। वे 519-258-8477 (TIPS) पर बिना नाम बताए क्राइम स्टॉपर्स या www.catchcrooks.com पर ऑनलाइन संपर्क कर सकते हैं।”

पहले भी हो चुका है कनाडा के हिंदू मंदिरों पर हमला

कनाडा के हिंदू मंदिरों में पहले भी तोड़फोड़ की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं, लेकिन अभी तक वहाँ की सरकार द्वारा कोई कड़ा कदम नहीं उठाया गया है। विंडसर में भारत विरोधी यह पाँचवीं घटना है। इससे पहले फरवरी 2023 में मिसिसॉगा (Missisauga) के राम मंदिर (Ram Mandir) तोड़फोड़ के साथ हिंदू और भारत विरोधी नारे लिखे गए थे। जनवरी 2023 में कनाडा के ही ब्रैम्पटन के गौरी शंकर मंदिर को निशाना बनाया गया। गौरी-शंकर मंदिर कनाडा के मशहूर हिंदू मंदिरों में से एक है। यह मंदिर वर्षों से हिंदुओं की आस्था और श्रद्धा का प्रतीक रहा है। इसके पीछे खालिस्तानी आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) का हाथ बताया गया था। इसके अलावा खालिस्तानी समर्थकों ने कई बार महात्मा गाँधी की मूर्ति को भी निशाना बनाया है और भारत विरोधी नारे लिखे हैं।

मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री के समक्ष उठाया हिंदू मंदिरों पर हमले का मसला, कम से कम 5 मंदिरों को खालिस्तानी बना चुके हैं निशाना

एंथनी अल्बनीज और पीएम मोदी (साभार: ANI)
पिछले कुछ समय से विदेशों में हिंदुओं की आस्था के केंद्र मंदिरों पर हमले किए जा रहे हैं। इन हमलों के पीछे खालिस्तानी तत्वों का हाथ बताया जा रहा है। इसी तरह के हमले ऑस्ट्रेलिया में भी अंजाम दिए गए हैं। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज (Anthony Albanese) इस समय भारत दौरे पर हैं। पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने अल्बनीज के साथ इस मुद्दे को उठाया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तानी तत्वों द्वारा हिंदू मंदिरों पर हमले का मुद्दा उठाते हुए कहा, “मैंने ऑस्ट्रेलिया में मंदिरों पर हमले की खबरें देखी हैं। मैंने पीएम अल्बनीज को इस बात से अवगत करा दिया है और उन्होंने मुझे आश्वासन दिया है कि ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय की सुरक्षा और भलाई उनके लिए प्राथमिकता है।”

पिछले दो महीने में ऑस्ट्रेलिया में कम-से-कम 5 बार हिंदू मंदिरों को निशाना बनाया गया है। ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तानियों द्वारा जिन हिंदू मंदिरों को निशाना बनाया गया है, वे निम्नलिखित हैं।

ब्रिस्बेन में श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर: 4 मार्च 2023 को ब्रिस्बेन के बरबैंक उपनगर में श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर पर हिंदू विरोधी और भारत विरोधी तस्वीरें बना दी गई थीं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तोड़फोड़ को खालिस्तानी समर्थक समर्थकों ने अंजाम दिया थ। तोड़फोड़ के दौरान बदमाशों ने मंदिर के पास दीवारों पर हिंदू विरोधी, भारत विरोधी और खालिस्तानी समर्थक नारे लिखे थे।

ब्रिस्बेन के प्रसिद्ध गायत्री: 17 फरवरी 2023 को ब्रिस्बेन को गायत्री माता मंदिर के पुजारी को महाशिवरात्रि ना मनाने की चेतावनी दी गई थी। चेतावनी देने वाले शख्स ने खुद को खालिस्तानी बताया था और कहा था कि वह पाकिस्तान के लाहौर से फोन कर रहा है। फोन करने वाले ने कहा था, “यदि तुम 19 फरवरी 2023 को महाशिवरात्रि मनाने की योजना बना रहे हो तो पुजारी से खालिस्तान का समर्थन करने के लिए कहो। तुमको अपने कार्यक्रम के दौरान पाँच बार ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाना है।”

मेलबर्न काली माता मंदिर: 16 फरवरी 2023 को मेलबर्न के काली माता मंदिर में भजन कार्यक्रम आयोजित करने के खिलाफ चेतावनी दी गई थी। ऑस्ट्रेलिया में मेलबर्न के उत्तरी उपनगर में स्थित काली माता मंदिर की एक महिला पुजारी को भारतीय गायक कन्हैया मित्तल का भजन कार्यक्रम आयोजित करने पर धमकी दी गई थी। कहा जाता है कि ये धमकी खालिस्तानी आतंकवादियों ने दी थी।

हरे कृष्ण मंदिर: 23 जनवरी 2023 को खालिस्तान समर्थकों द्वारा ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर के अल्बर्ट पार्क स्थित हरे कृष्ण मंदिर में इसी तरह की घटना को अंजाम दिया गया था। मंदिर मेलबर्न में भक्ति योग आंदोलन के केंद्र के रूप में कार्य करता था और इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ कृष्णा कॉन्शसनेस (इस्कॉन) द्वारा चलाया जाता है। रिपोर्टों के अनुसार, मंदिर की दीवारों को ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ और ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ नारे लिखे गए थे। इतना ही नहीं, बदमाशों ने मारे गए खालिस्तानी आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरावाले को शहीद भी बताया था।

मेलबर्न में शिव विष्णु मंदिर: 17 जनवरी 2023 को खालिस्तान समर्थकों ने मेलबर्न के कैरम डाउन्स स्थित ऐतिहासिक श्री शिव विष्णु मंदिर में तोड़फोड़ की। तोड़फोड़ के दौरान बदमाशों ने मंदिर के पास की दीवारों पर हिंदू विरोधी और भारत विरोधी नारे लिखे। ‘टारगेट मोदी’, ‘मोदी हिटलर’ और ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ के नारे मंदिरों की दीवारों पर लिखे गए थे।

मेलबोर्न में BAPS स्वामीनारायण मंदिर: 12 जनवरी 2023 को मेलबोर्न में रहने वाले हिंदू समुदाय के हिंदू मंदिर पर हमला किया गया था। मेलबोर्न के उत्तरी उपनगर मील पार्क में स्थित BAPS स्वामीनारायण मंदिर में खालिस्तानी हमलावरों ने तोड़फोड़ की थी। मंदिर की दीवारों पर भारत विरोधी और नरेंद्र मोदी विरोधी नारे लिख दिए थे।

पिछले महीने विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर ऑस्ट्रेलिया में चरमपंथी खालिस्तानी समूहों द्वारा भारतीय समुदाय पर किए गए हमले की निंदा की थी। विदेश मंत्रालय ने स्थानीय अधिकारियों से मामले की जांच शुरू करने और अपराधियों को दंडित करने का आग्रह किया था। खालिस्तानी स्वतंत्र खालिस्तान के लिए ऑस्ट्रेलिया में तथाकथित जनमत संग्रह भी करवा रहे हैं।


आंध्र प्रदेश : 3000 मंदिर बनवाएगी सरकार, गरीबों के इलाकों में होगा निर्माण: तिरुपति देवस्थानम से सबको 10 लाख रूपए मिलेंगे

अभी हुए 3 राज्यों में हुए चुनावों के परिणामों ने समस्त भाजपा विरोधियों ने मुस्लिम तुष्टिकरण और सेकुलरिज्म के चोले को उतारकर फेंक, हिन्दुत्व को अपनाने की ओर चलने का प्रयास कर रहे हैं। आंध्र प्रदेश की सरकार जनता की नब्ज पकड़ आने वाले चुनावों में बाज़ी मारने के लिए गोटियां चलनी शुरू कर दी हैं। क्योकि इन राज्यों के परिणामों ने सेकुलरिज्म को किसी अँधेरे कोने में धकेलने के संकेत दे दिए हैं। जिन राज्यों में वामपंथी और ईसाई धर्म का बोलबाला होने के कारण भाजपा को तवोज्जो नहीं दिया जाता था, वहां भाजपा की सरकार बनने ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। शायद यही कारण है कि भाजपा को शिकस्त देने आंध्र सरकार ने हिन्दू वोट जेब में डालने के लिए मंदिरों के निर्माण की घोषणा की है। 
हिंदुओं की आस्था की रक्षा को लेकर आंध्र प्रदेश सरकार ने राज्य में 3000 से अधिक मंदिर बनवाने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि राज्य के प्रत्येक गाँव में मंदिर हो इस लक्ष्य से काम कर रही है। उपमुख्यमंत्री कोट्टु सत्यनारायण ने कहा है कि राज्य में पहले 1330 मंदिरों का निर्माण होना था। अब इसमें 1465 मंदिर और जोड़े जाएँगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंगलवार (28 फरवरी 2023) को मीडिया से बातचीत करते हुए उप-मुख्यमंत्री कोट्टु सत्यनारायण ने कहा है कि सरकार ने हिंदू आस्था का बड़े पैमाने पर प्रचार करने के उद्देश्य से गरीब वर्ग के लोगों के इलाकों में मंदिर बनाने का फैसला किया है। उन्होंने कहा है कि राज्य में पहले 1330 मंदिरों का निर्माण होना था। अब इसमें 1465 मंदिर और जोड़े गए हैं। यही नहीं, विधायकों के अनुरोध पर 200 अन्य मंदिर भी जोड़े जाएँगे।

सत्यनारायण ने यह भी कहा है कि इन हिंदू मंदिरों के निर्माण के लिए तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम का श्री वाणी ट्रस्ट हर मंदिर को 10 लाख रुपए देगा। बंदोबस्ती विभाग द्वारा बनाए जा रहे 978 मंदिरों का निर्माण तेजी से हो रहा है। वहीं 25 मंदिरों के निर्माण का काम एक सहायक इंजीनियर को दिया गया है। इसके अलावा कुछ अन्य सहायक इंजीनियरों को भी नियुक्त किया गया है। वहीं कुछ अन्य मंदिरों का निर्माण एनजीओ द्वारा किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा है कि कुछ मंदिरों के पुनर्निर्माण और मंदिरों में अनुष्ठानों के लिए आवंटित किए गए 270 करोड़ रुपए में से 238 करोड़ रुपए जारी हो जा चुके हैं। इसी तरह, इस वित्तीय वर्ष में प्रति मंदिर 5000 रुपए की दर से अनुष्ठानों (धूप दीप नैवेद्यम) के लिए निर्धारित किए 28 करोड़ रुपए में से 15 करोड़ रुपए मंदिरों को दिए जा चुके हैं। धूप दीप नैवेद्यम योजना के अंतर्गत साल 2019 तक केवल 1561 मंदिर ही रजिस्टर्ड हुए थे। वहीं अब यह संख्या बढ़कर 5000 हो गई है।

 आंध्र प्रदेश में कुल 26 जिले हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य सभी जिलों के प्रत्येक गाँव में मंदिर बनवाने का है। इसके लिए तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम के श्री वाणी ट्रस्ट द्वारा जो 10 लाख रुपए की राशि दी जानी है उसमें से 8 लाख रुपए मंदिर निर्माण में खर्च होगा। वहीं, शेष बची 2 लाख की राशि का उपयोग मूर्तियों के निर्माण या खरीदने में किया जाएगा।

भगवान अयप्पा को रिकॉर्ड चढ़ावा: सबरीमाला मंदिर में सिक्कों का लगा पहाड़, 600 कर्मचारियों का गिनते-गिनते दम फूला


केरल के सबरीमाला (Sabarimala Temple) स्थित भगवान अयप्पा के मंदिर में इस बार रिकॉर्ड चढ़ावा आया है। मंदिर को करीब 351 करोड़ रुपए का चढ़ावा मिला है। सिक्कों की गिनती के लिए मंदिर प्रबंधन ने 600 कर्मचारियों को काम पर लगा रखा है। लेकिन गिनती पूरी नहीं हो पाई है। सिक्के गिनते-गिनते जब कर्मचारियों को थकान होने लगी तो इसे रोककर उन्‍हें कुछ समय के लिए आराम दिया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 60 दिवसीय मंडलम-मकरविलक्कू महोत्‍सव (Mandalam Makaravilakku Festival) नवंबर 2022 से शुरू हुआ। इसमें लाखों की संख्‍या में भक्‍त भगवान अयप्पा के दर्शन करने पहुँचे। बताया जा रहा है कि इस बार भक्‍तों ने दिल खोलकर दान दिया है, जिससे दान के पिछले रिकॉर्ड टूट गए हैं। त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के अध्यक्ष के. अनंत गोपाल का कहना है कि नोट गिनने वाली मशीन से सिक्‍कों की गिनती संभव नहीं है। अय्यप्पा मंदिर को सिक्‍कों के रूप में भी करोड़ों रुपए का दान मिलता है।

कहा जा रहा है कि मं​दिर में चढ़ने वाले सिक्कों को एक बड़े स्टोर रूम में रखा गया है। ये सिक्कों के बड़े पहाड़ के रूप में नजर आ रहे हैं। इसके अलावा मंदिर को प्रसाद की बिक्री से भी काफी आय होती है। उत्सव के समय मंदिर से अरावना और अप्पम प्रसादम के रूप में दिए जाते हैं। अप्पम की हुंडी 100 रुपए में मिलती है। मंदिर में पहुँचने वाले लाखों श्रद्धालु इस प्रसादम को खरीदते हैं, जिससे खूब पैसा एकत्रित होता है।

भगवान अय्यप्‍पा को चढ़ावा अर्पित करने की अलग प्रथा है। यहाँ पैसे सीधे हुंडी या दानपात्र में नहीं डाले जाते। नोट और सिक्‍के को एक थैली में पान के पत्ते के साथ रखा जाता है। यही थैली फिर कनिका के रूप में भेंट की जाती है। मंदिर के गर्भगृह में भक्त जो दान अर्पित करते हैं, उसे कनिका कहा जाता है। अगर इस थैली को ज्‍यादा देर तक न खोला जाए, तो पान के पत्‍ते के गलने से नोट खराब भी हो सकते हैं।

गौरतलब है कि 2020 और 2021 में कोरोना के चलते मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए ​थे। प्रतिबंध हटने के बाद इस बार यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँचे हैं। यही कारण है कि इस बार तीन गुना चढ़ावा चढ़ा है।

मौलाना साजिद रशीदी का ज़हर : ‘सोमनाथ मंदिर में होता था गलत काम, इसीलिए गजनवी ने तोड़ दिया’: राम मंदिर ध्वस्त करने की भी दी थी धमकी

फोटो क्रेडिट-(ABP/News on air)
अखिल भारतीय इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने 22 जनवरी 2023 को एक बार फिर हिंदू धर्म के खिलाफ जहर उगला है। रशीदी ने कहा है कि गुजरात के सोमनाथ मंदिर में गलत काम होता था और इसी वजह से मोहम्मद गजनवी ने मंदिर को तोड़ने का काम किया था। साथ ही उसने कहा कि मुगलों का धर्म से कोई लेना-देना नहीं था।

लेकिन मुग़लों की आतताई की पैरवी करना ये मौलाना कभी नहीं भूलता। इस तरह का जहर जब इसी मौलाना ने करवाचौथ(2022) के दिन News18 पर एंकर अमिश देवगन के शो 'आर पार' में हिन्दुओं की उस धार्मिक ग्रन्थ ऋग्वेद को आधार बनाकर सनातन धर्म पर प्रहार करने का प्रयास किया था, जिसकी इसने पन्नी तक नहीं उतारी, लेकिन इसे नहीं मालूम था कि एक शेरनी भी पैनल में बैठी है, शेरनी जब इस पर दहाड़ रही थी, मानो माँ जगदम्बा साक्षात धरती पर अवतरित हो गयीं हैं। "मैं तेरे को बोल रही हूँ श्लोक पढ़ ...पृष्ठ संख्या बता... ", संक्षेप में इतना ही कह सकता है कि उस शेरनी ने इसे जरुरत से ज्यादा बेइज्जत किया, उस पुरे कार्यकम को कई लेखो में डाल चूका हूँ। 

ये मौलाना झूठे इतिहास का महिमामंडन कर मुग़ल आक्रांताओं का बचाव कर सनातन धर्म पर प्रहार करता रहेगा, लेकिन क्या Quran Petition पर भी बोलने का साहस दिखाएगा? क्या 31 जुलाई 1986 को तीस हज़ारी कोर्ट के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट Z.S. Lohat द्वारा दिए विवादित आयतों पर दिए निर्णय पर भी बोलने का हिम्मत दिखाएगा? इन मुद्दों पर न ही रशीदी जैसा कोई मौलाना बोलेगा और न ही कोई साम्प्रदायिकता के खिलाफ बोलने वाला, ये गैंग तो सनातन के विरुद्ध बोल 'हिन्दू आतंकवाद' और 'भगवा आतंकवाद' चिल्ला-चिल्लाकर हिन्दुओं को भ्रमित करते रहेंगे। परन्तु समस्त हिन्दू स्वयंसेवी संस्थाओं को एकजुट होकर पिछली सरकारों द्वारा मुस्लिम प्रेम को दर्शाते इन मुद्दों को दफ़न कर दिया था, ईंट का जवाब पत्थर से देने के लिए इन मुद्दों को जीवित कर जनमानस को जाग्रत करना होगा। हर मुसलमान जेहादी नहीं है, उन्हें रशीदी जैसे मौलानाओं ने बदनाम कर रखा है। 'सर तन से जुदा' करने और इस काम के लिए प्रेरित करने वालों के विरुद्ध गृह मंत्रालय को कठोरता से पेश आना होगा। 

Court Ruling: Some Ayats in the Quran cause Communal Riots | IndiaFacts
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Court Ruling: Some Ayats in the Quran cause Communal Riots | IndiaFacts

इस जैसे जेहादी मौलानों द्वारा जहर उगलने पर संविधान की बात करने वाले, गंगा-जमुना तहजीब की बात करने वाले, विदेशी चंदे पर सनातन धर्म को अपमानित करने वाले हिन्दुओं आंखे खोलो, होश में आओ, क्यों नहीं इस जैसे मौलानाओ के खिलाफ कब बोलोगे? क्या तुम्हारी अंतरआत्मा मर गयी है? कब तक सनातन धर्म सहन करते रहोगे?       

इसके साथ ही उसने इतिहास की उल्टी गंगा बहाते हुए मुगल आक्रांताओं पर ज्ञान दिया। उसने कहा, ”यह सच है कि मुगल एक काल था। मुगल जितने भी बादशाह हुए हैं, उनका एक दौर था, जमाना था। मुगलों का धर्म से कोई लेना-देना नहीं था। इन 800 सालों में जितने भी मुगल बादशाह हुए हैं या दूसरे और बादशाह रहे हों। आप अगर उनकी हिस्ट्री को पढ़ेंगे तो उनका धर्म से कोई लेना-देना नहीं था।”

रशीदी ने आगे कहा, ”उन्होंने धर्म के नाम पर किसी भी तरह का काम किया भी नहीं। इस तरह के बहुत सारे उदाहरण हैं। जैसे गजनवी के बारे में लोग कहते हैं कि उसने सोमनाथ मंदिर तोड़ा है। जबकि हिस्ट्री ये है कि वहाँ के लोगों ने गजनवी को बताया कि वहाँ आस्था के नाम पर क्या हो रहा है। देवी-देवता के नाम पर क्या हो रहा है। कैसे वहाँ लड़कियों को लापता कर दिया जाता है।”

मौलाना यहीं नहीं रुका, उसने आगे कहा, ”इसके बाद गजनवी ने वहाँ बकायदा मुआयना करवाया। जब पता चला कि वहाँ ऐसा है, तब जाके उसने सोमनाथ के मंदिर पर चढ़ाई की। सोमनाथ मंदिर को उसने तोड़ने का काम नहीं किया, बल्कि वहाँ जो गलत हो रहा था, उसे रोकने का काम किया।”

ऐसा नहीं है कि मौलाना ने हिंदू धर्म के खिलाफ पहली बार जहर उगला है। इससे पहले वह राम मंदिर को तोड़ने की धमकी दे चुका है। उसने कहा था कि 50-100 साल बाद मुस्लिम शासक के आने पर अयोध्या के राम मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई जा सकती है। मुस्लिमों की आने वाली नस्लें इसको लेकर खामोश नहीं रहेंगी।

मौलाना रशीदी ने कहा था , ”आज मुसलमान खामोश है। मेरी आने वाली नस्ल… मेरा बेटा, उसका बेटा, उसका पोता…. 50-100 साल के बाद एक हिस्ट्री उनके सामने आएगी कि हमारी मस्जिद को तोड़कर मंदिर बना दिया गया। उस वक्त हो सकता है कि कोई मुस्लिम शासक हो, कोई मुस्लिम जज हो या मुस्लिम शासन आ जाए… कुछ नहीं कहा जा सकता है कि क्या फेरबदल हो जाए… तो क्या उस हिस्ट्री की बुनियाद पर इस मंदिर को तोड़कर मस्जिद नहीं बनाई जाएगी? बिल्कुल बनाई जाएगी।”