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तेलंगाना : ’15 मिनट के लिए पुलिस हटा दो’ वाले अकबरुद्दीन ओवैसी के सामने नहीं लूँगा शपथ, वो रजाकारों का वंशज: भाजपा विधायक टी राजा सिंह


हाल ही में संपन्न हुए तेलंगाना विधानसभा चुनाव में चुनकर आए विधायकों को शपथ दिलाने के लिए AIMIM के विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी को प्रोटेम स्पीकर बनाने के फैसले पर विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा विधायक टी राजा सिंह ने कहा है कि वह प्रोटेम स्पीकर बनाए गए अकबरुद्दीन ओवैसी के हाथों कभी भी विधायक पद की शपथ नहीं लेंगे।

टी राजा सिंह ने कहा है कि ओवैसी कासिम रिजवी के वंशज हैं, जो हैदराबाद के निजाम की रजाकार सेना के मुखिया थे। इन रजाकारों ने तेलंगाना के लोगों का नरसंहार किया था। ऐसे में वह अकबरुद्दीन के स्पीकर की कुर्सी पर रहते शपथ नहीं ले सकते। गौरतलब है कि नई विधानसभा या नई संसद के चुने जाने पर किसी वरिष्ठ सदस्य को प्रोटेम यानी अस्थाई स्पीकर बनाया जाता है, जो सभी विधायकों या फिर सांसदों को उनके पद की शपथ दिलाता है।

प्रोटेम स्पीकर स्थायी स्पीकर के चुने जाने तक काम करता है। अकबरुद्दीन ओवैसी हैदराबाद की चंद्रायानगुट्टा सीट से विधायक चुनकर आए हैं। जबकि टी राजा सिंह हैदराबाद की ही गोशामहल सीट से पुनः विधायक चुने गए हैं।

टी राजा सिंह ने राज्य के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की अगुवाई वाली नई नवेली कॉन्ग्रेस सरकार पर तुष्टिकरण का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है चुनाव के दौरान कॉन्ग्रेस का कहना था कि भाजपा और भारत राष्ट्र समिति आपस में मिले हुए हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब साफ-साफ दिख रहा है कि कौन किससे मिला हुआ है और कौन नहीं।

टी राजा सिंह तेलंगाना में भाजपा के फायर ब्रांड नेता हैं, जो अक्सर अपने बयानों की वजह से चर्चा में बने रहते हैं। जबकि अकबरुद्दीन ओवैसी सांसद असदुद्दीन ओवैसी के छोटे भाई हैं और उन्हें विवादित बयान देने के चक्कर में जेल की हवा भी खानी पड़ चुकी है।

भाजपा विधायक टी राजा सिंह ने कहा है कि वह इस सामूहिक शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं होंगे और अकबरुद्दीन ओवैसी के सामने कभी भी शपथ नहीं लेंगे। वह अगले दिन स्पीकर के चेंबर में जाकर शपथ ले लेंगे। विधायक टी राजा सिंह का कहना है कि वह ऐसे व्यक्ति के सामने शपथ कैसे ले सकते हैं, जिसने यह कहा था कि यदि 15 मिनट के लिए पुलिस हटा दी जाए तो हिंदुओं का खात्मा कर दिया जाएगा।

वर्ष 2012 में अकबरुद्दीन ओवैसी ने एक विवादित बयान दिया था कि मुसलमान 25 करोड़ हैं और हिंदू 100 करोड़ लेकिन अगर 15 मिनट के लिए देश में पुलिस हटा दी जाए तो बता दिया जाएगा कि कौन कितना ताकतवर है।

राजा सिंह का कहना है कि वह भाजपा के विधायक दल की बैठक में शामिल होंगे और इस पर बात करेंगे कि अन्य नए चुने हुए विधायक उनकी बात से सहमत हैं या नहीं। भाजपा ने हाल ही में संपन्न हुए तेलंगाना विधानसभा चुनाव में आठ सीटें जीती हैं, जो अब तक उसका राज्य में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।

इससे पहले वर्ष 2018 के चुनाव में केवल राजा सिंह ही भाजपा से जीत पाए थे। इससे पहले शुक्रवार (8 दिसम्बर 2023) को तेलंगाना की गवर्नर सौन्दरराजन ने अकबरुद्दीन ओवैसी को प्रोटेम स्पीकर बनाने के लिए नोटिफिकेशन जारी किया था क्योंकि वह तेलंगाना विधानसभा में सबसे वरिष्ठ विधायक हैं।

अकबरुदीन ओवैसी चन्द्रयानगुट्टा से छठी बार विधायक चुने गए हैं। वह शनिवार (09 दिसम्बर 2023) तक के लिए ही स्पीकर रहेंगे और इस दौरान नया स्थायी स्पीकर चुन लिया जाएगा।

तेलंगाना : एससी कम्यूनिटी के बाद अब कपड़ा धोने और सैलून चलाने वाले मुस्लिमों को फ्री बिजली, चुनाव से पहले ओवैसी की डिमांड मुख्यमंत्री KCR ने पूरी की

तेलंगाना में कपड़े धोने वाले और नाई का काम करने वाले मुस्लिमों को हर माह 250 यूनिट बिजली मुफ्त दी जाएगी। तेलंगाना के मुख्यमंत्री और भारत राष्ट्र समिति के मुखिया के. चंद्रशेखर राव (KCR) ने इसको आदेश जारी किया है।

इस तरह की छूट अब तक एससी कम्यूनिटी के लोगों को हासिल थी, लेकिन हैदराबाद के सांसद और एआईएमआईएम के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी के निवेदन पर राज्य सरकार ने मुस्लिमों के लिए भी ये छूट जारी कर दी है।

कांग्रेस ने भी किया है 200 यूनिट बिजली का वादा

केसीआर सरकार ने ये आदेश कांग्रेस के उस चुनावी वादे को देखते हुए जारी किया है, जिसमें कांग्रेस ने तेलंगाना में सरकार बनने की सूरत में 200 यूनिट मुफ्त बिजली की घोषणा की है। कांग्रेस ने इसके लिए गृह ज्योति योजना चलाने का वादा किया है।
हालाँकि, केसीआर सरकार ने अब कपड़ा धोने वाले और नाई का काम करने वालों के लिए इस योजना को लागू कर दिया है। ये लोग चाहे एससी वर्ग के हों या मुस्लिम, इसका लाभ दोनों को मिलेगा।
सरकार की ओर से बताया गया है कि राज्य सरकार की ओर से एससी कम्यूनिटी को दी जा रही सुविधाओं का AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने समर्थन किया है। ओवैसी ने ठीक वैसी ही सुविधाओं की माँग मुस्लिम वर्ग के लोगों के लिए भी की थी, जिसे मुख्यमंत्री केसीआर ने मंजूर कर लिया है।
इस बारे में राज्य सरकार के मुख्य सचिव और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के कमिश्नर ने आदेश जारी किया है। सरकार इस बारे में बाकी जानकारियाँ बाद में साझा करेगी, जिसमें योजना के लाभार्थियों की योग्यता और शर्तों के बारे में जानकारी दी जाएगी।

तेलंगाना में त्रिकोणीय मुकाबला

इस साल के आखिर तक तेलंगाना में विधानसभा चुनाव होने हैं। केसीआर ने राज्य में किसी भी गठबंधन से इनकार कर दिया है। उसका सीधा मुकाबला कांग्रेस और भाजपा से होगा। वहीं, एआईएमआईएम केसीआर की पार्टी के साथ ही पहले की तरह चुनाव लड़ेगी।
राज्य विधानसभा के चुनाव अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए बड़ी भूमिका तैयार करेंगे, क्योंकि साल 2019 के चुनाव में केसीआर की पार्टी लोकसभा चुनाव में 11 से घटकर 9 सीटों पर आ गई थी।

हैदराबाद : बिजली चोरी के गढ़ में ओवैसी की पार्टी के नेता मोहम्मद आजम ने बिजली कर्मचारी को पीटा, साथियों से भी पिटवाया

हैदराबाद में बिजली विभाग के कर्मचारी की AIMIM नेता द्वारा पिटाई का वीडियो वायरल (चित्र साभार- @prashantchiguru)
सोशल मीडिया पर सोमवार (3 जुलाई, 2023) से हैदराबाद का बता कर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ लोगों को एक व्यक्ति को पीटते देखा जा सकता है। मिली जानकारी के मुताबिक, प्रमुख हमलावर का नाम मोहम्मद आज़म है जो ‘ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM)’ का नेता है। बाकी हमलावर मोहम्मद आज़म के साथी हैं जो बिजली चोरी की जाँच करने गए कर्मचारी को पीटते दिखाई दे रहे हैं।

50 सेकेण्ड के इस वीडियो को ‘@prashantchiguru’ हैंडल वाले यूजर ने शेयर किया है। वीडियो में सफेद और काले रंग की चेक शर्ट पहने AIMIM नेता दिन-दहाड़े बीच सड़क पर बिजली विभाग के एक कर्मचारी की पिटाई की शुरुआत करता है। थोड़े ही समय बाद उसके साथी भी पीड़ित को पीटना शुरू कर देते हैं। आस-पास से गुजर रहे लोगों में से किसी ने भी बिजली विभाग के कर्मचारी को बचाने की हिम्मत नहीं की। हालाँकि, मारपीट देख कर लोगों की भारी भीड़ मौके पर जमा हो गई थी।

वीडियो शेयर करने वाले ट्विटर यूजर ‘@prashantchiguru’ ने यह भी बताया कि कैसे पुराने हैदराबाद में 50% बिजली खपत का कोई हिसाब ही नहीं है। इस चोरी के चलते बिजली विभाग को हर दिन 70 लाख रुपए का नुकसान होने की भी जानकारी दी गई है। यूजर ने इसे ओवैसी के संरक्षण में हो रही गुंडागर्दी बताया है। घटनास्थल के तौर पर कारवाँ विधानसभा क्षेत्र की मेहबूब कॉलोनी बताया गया है जहाँ पीड़ित बिजली की चोरी रोकने के लिए गया था। हमलावरों में AIMIM नेता के अन्य पारिवारिक सदस्यों के भी शामिल होने का दावा किया गया है।

वीडियो शेयर करने वाले व्यक्ति ने हैदराबाद पुलिस और तेलंगाना के DGP से आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की माँग भी की है। यूजर ने यह भी दावा किया है कि जिस प्रकार से भारतीय लोग पाकिस्तान की यात्रा करने से डरते हैं वैसे ही सरकारी अधिकारी और कर्मचारी पुराने हैदराबाद में जाने से कतराते हैं।

पुराने हैदराबाद में बिजली चोरी जैसी शिकायतें बड़े स्तर पर आती हैं। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2022 में तेलंगाना स्टेट सदर्न पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (TSSPDCL) के अंतर्गत आने क्षेत्रों में 64,245 मामले दर्ज किए गए। यह संख्या साल 2021 में दर्ज केसों से 3000 ज्यादा थी। ऊर्जा विभाग के अधिकारी भी इसे एक बड़े समस्या बताते हुए कहते हैं कि बिजली कंपनियों को इस चोरी के चलते हर साल राजस्व का लगभग 10 प्रतिशत नुकसान हो रहा है।

तेलंगाना : ऐतिहासिक मंदिर में ‘क्रिश्चियन प्रेयर’, माँसाहारी खाना भी परोसा

पिछले दिनों तेलंगाना के वारंगल स्थित एक ऐतिहासिक हिंदू मंदिर का वीडियो वायरल हुआ था। इसमें कुछ लोग मंदिर में ईसाई प्रार्थना (Christian prayer) करते दिखे थे। अब इस मामले में पादरी गंधम अरुण कुमार और उसके साथियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मंदिर परिसर में माँसाहारी खाना परोसने का भी आरोप है। वीडियो वायरल होने के बाद हिंदू संगठनों ने इसे देवी-देवताओं का अपमान बताते हुए सख्त कार्रवाई की माँग की थी।

एक नॉन प्रॉफिट एक्टिविस्ट ग्रुप ‘लीगल राइट्स प्रोटेक्शन फोरम’ की तरफ से ट्विटर पर इस घटना को लेकर जानकारी साझा की गई है। बताया गया है कि मंदिर में क्रिश्चियन प्रेयर का वीडियो वायरल होने के बाद सब इंस्पेक्टर डी.सांबैया की शिकायत पर पादरी और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। घटना में शामिल पादरी अरुण कुमार और उनके सहयोगियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 295-A, 153A, 153B, 504, 505 r/w 34 के तहत केस दर्ज हुआ है।

जिस मंदिर का वीडियो वायरल हुआ था, वह वारंगल किले में है। काकतीय राजवंश ने इसका निर्माण करवाया था। यह मंदिर पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है। तेलंगाना बंदोबस्ती विभाग (Telangana Endowments Department) इसकी देखरेख करता है। वीडियो वायरल होने के बाद विश्व हिंदू परिषद और बजरंगदल के कार्यकर्ताओं ने पादरी और उसके सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग करते हुए प्रदर्शन किया था। इसे हिंदू देवी-देवताओं का अपमान बताया था।

हिंदू संगठन के लोगों ने डीसीपी श्रीकांत राव और एसीबी रामाला सुनीता से मामले की शिकायत की थी। मीडिया से बात करते हुए संगठन के लोगों ने पूछा कि आखिर दूसरे पंथ के लोगों ने ऐतिहासिक मंदिर परिसर में इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन कैसे किया? संगठन के नेताओं ने जानकारी दी कि मंदिर में भगवान राम के पद चिन्ह (पाद मुद्रा) और शंकु चक्र देखे जा सकते हैं। यहाँ धूम-धाम से शिवरात्रि मनाया जाता है। ऐसे में ईसाई सभा, प्रार्थना और माँसाहारी खाना परोसा जाना धार्मिक अशांति फैलाने वाला कदम है। हिंदू संगठनों की तरफ से चेतावनी दी गई थी कि यदि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो वे सड़कों पर उतरकर बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

तेलंगाना : भाजपा को बड़ी कामयाबी, पहली बार जीती MLC सीट

भारतीय जनता पार्टी को तेलंगाना में बड़ी कामयाबी मिली है। पहली बार एमएलसी चुनाव में पार्टी को जीत मिली है। महबूबनगर रंगारेड्डी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एवीएन रेड्डी ने जीत हासिल की है। इसे लेकर भाजपा कार्यकर्ता उत्साहित हैं। जीत पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह समेत राज्य भाजपा के नेताओं ने खुशी जाहिर की है।

एमएलसी का चुनाव 13 मार्च 2023 को हुआ था। 16 मार्च 2023 को सुबह 8 बजे शुरू हुई वोटों की गिनती देर रात तक जारी रही। चुनाव के दौरान 25,868 वोट यानी 90 प्रतिशत से भी ज्यादा वोट डाले गए थे। जीत के लिए 12,709 वोटों की जरूरत थी। 21 राउंड की मतगणना के बाद भाजपा उम्मीदवार एवीएन रेड्डी को 13,436 वोट मिले। चुनाव में कुल 21 उम्मीदवार मैदान में थे। मुकाबला जी. चेन्ना केशव रेड्डी और एवीएन रेड्डी के बीच था।

भाजपा को मिली इस शानदार जीत पर बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एवीएन रेड्डी और भाजपा कार्यकर्ताओं को बधाई दी है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है, “महबूबनगर रंगारेड्डी एमएलसी टीचर्स सीट पर ऐतिहासिक जीत के लिए एवीएन रेड्डी को बधाई। लोगों ने एक बार फिर से बीआरएस को छोड़कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा के साथ खड़े होने का फैसला किया है।”

तेलंगाना भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बांदी संजय ने ट्विटर पर लिखा है कि यह तेलंगाना के एमएलसी चुनाव में भाजपा की पहली जीत है। इस चुनाव से साबित हो गया है कि राज्य के लोग भारत राष्ट्र समिति (BRS) के खिलाफ हैं। खासकर सरकारी कर्मचारियों और पढ़े-लिखे तबके में सत्ताविरोधी लहर चल रही है। यह सफलता धर्म के पक्ष में खड़े शिक्षकों की है।

बांदी संजय ने केसीआर की सरकार को शिक्षक विरोधी करार दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले विधानसभा चुनाव में भी इसी तरह के नतीजे सामने आने वाले हैं। इस जीत से हमें शिक्षकों की समस्याओं के समाधान की प्रेरणा मिली है।

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष ने भी एवीएन रेड्डी और पार्टी के राज्य नेतृत्व को जीत पर बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह जीत भ्रष्ट, विकास विरोधी, वंशवादी और अभिमानी बीआरएस के खिलाफ जनादेश को दर्शाता है।

विधानसभा चुनाव से पहले एमएसली सीट पर भाजपा की यह जीत बेहद अहम मानी जा रही है। साल के अंत तक होने वाले असेंबली चुनावों के लिए भाजपा पूरी ताकत झोंक रही है। पार्टी के शीर्ष नेता लगातार राज्य के दौरे पर हैं। ऐसे में इस जीत से कार्यककर्ताओं का मनोबल बढ़ा है।

तेलंगाना : ‘अगर अम्बेडकर जिन्दा होते तो मैं गोडसे की तरह उन्हें गोली मार देता’: हमारा प्रसाद, दलित नेता ने उन्हें बताया हिंदू विरोधी

          दलित नेता का डॉ अम्बेडकर के हिन्दू धर्म विरोधी होने का आरोप (चित्र साभार- @RSPraveenSwaero)
तेलंगाना से डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर के खिलाफ आपत्तिजनक बयानबाजी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में एक व्यक्ति कह रहा है कि अगर आज अम्बेडकर जीवित होते तो वो उन्हें मार देता। वीडियो में दिख रहे व्यक्ति का नाम हमारा प्रसाद बताया जा रहा है, जो राष्ट्रीय दलित सेना नाम के समूह का फाउंडर है। वीडियो जारी करने वाले व्यक्ति ने भीमराव अम्बेडकर पर हिन्दू धर्म विरोधी होने का भी आरोप लगाया है। पुलिस ने हमारा प्रसाद को गिरफ्तार कर लिया है।

इस वीडियो को गुरुवार (9 फरवरी 2023) को बहुजन समाज पार्टी (BSP) के नेता आरएस प्रवीण कुमार ने शेयर किया। वायरल वीडियो में दलित नेता हमारा प्रसाद के हाथों में भीमराव अम्बेडकर की तस्वीर दिखाई दे रही है। वीडियो में आरोपित ने बेहद नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर अम्बेडकर जीवित होते तो वह नाथूराम गोडसे की तरह उन्हें गोली मार देता।

दलित नेता के मुताबिक, अम्बेडकर ने अपनी किताब ‘रीड्स इन हिंदुइज्म’ में हिन्दू भावनाओं का अपमान किया है। उन्होंने जो किताब लिखी है, वो गलत है। बसपा नेता प्रवीण ने इस वीडियो पर कार्रवाई की माँग करते हुए मुख्यमंत्री KCR पर तंज भी कसा।

बसपा नेता ने लिखा कि वो सिर्फ वोट लेने के लिए अम्बेडकर के नाम का जाप करते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वीडियो जारी करने वाले हमारा प्रसाद को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन पर IPC की धारा 153- A और 505 (2) के तहत कार्रवाई हुई है।

6 राज्यों में विधानसभा उपचुनावों में यूपी में योगी-योगी, मोकामा में फिर से अनंत सिंह की ‘सरकार’, ओडिशा में BJP ने बढ़ाया दबदबा

बिहार के मोकामा में फिर से 'छोटे सरकार' की ही जीत (फाइल फोटो)
विभिन्न राज्यों में हुए उपचुनावों में जहाँ भाजपा गठबंधन के लिए अच्छी ख़बरें आई हैं, वहीं बिहार के मोकामा में अनंत सिंह ने अपना दबदबा बरकरार रखा है। राजद के टिकट पर यहाँ से उतरीं अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी को 54% वोट मिले। उनके खिलाफ एक अन्य ‘बाहुबली’ ललन सिंह की पत्नी सोनम देवी को भाजपा ने टिकट दिया था और सूरजभान सिंह भी उधर से गोलबंदी करने में लगे हुए थे, लेकिन फिर भी अनंत सिंह जीत में कामयाब रहे।

हालाँकि, बिहार की गोलपगंज की सीट पर हुए विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की जीत हुई है। भाजपा की कुसुम देवी काफी कम अंतर से जीतने में सफल रहीं। हरियाणा से भी भाजपा के लिए अच्छी खबर आई है, जहाँ की आदमपुर सीट पर दिग्गज नेता कुलदीप बिश्नोई के बेटे भव्य बिश्नोई जीत दर्ज करने में कामयाब रहे। कुलदीप बिश्नोई कॉन्ग्रेस छोड़ कर भाजपा में आए थे। महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के लिए अच्छी खबर है। उनकी नई पार्टी ‘शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे)’ के उम्मीदवार ऋतुजा रमेश लटके की जीत हुई।

बात करते हैं ओडिशा की, जहाँ की धामनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ था। यहाँ भाजपा की जीत बड़ी मायने रखती है, क्योंकि राज्य में नवीन पटनायक के नेतृत्व में बीजद की सरकार है। धामनगर में भाजपा के सूर्यवंशी सूरज कम अंतर से ही सही, लेकिन जीत दर्ज करने में सफल रहे। दक्षिण भारत में तेलंगाना के मुनगोडे में भाजपा ने सत्ताधारी TRS को लगभग पानी पिला दिया, लेकिन काफी कम अंतर से वो पीछे चल रहे हैं।

चौथे राउंड के बाद TRS की लीड मात्र 714 वोट थी। उत्तर प्रदेश में जनता ने एक बार फिर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार पर तगड़ा भरोसा जताया है, तभी लखीमपुर खीरी में स्थित गोला गोरखनाथ में अमन गिरी ने एकतरफा जीत दर्ज की। उन्हें सवा एक लाख के आसपास वोट मिले। 56% से अधिक मत पाकर वो जीत दर्ज करने में सफल रहे। उनके प्रतिद्वंद्वी सपा के विनय तिवारी को 40% वोटों से संतोष करना पड़ा। 

तेलंगाना : क्या जूनियर NTR होंगे तेलंगाना के अगले मुख्यमंत्री?

                                                                                                               साभार: अमित शाह का ट्विटर
साउथ के मशहूर एक्टर्स में से एक जूनियर एनटीआर की हाल में हैदराबाद में गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात हुई। इसकी तस्वीरें अमित शाह ने अपने ट्विटर पर शेयर की। उन्होंने बताया कि जूनियर एनटीआर के साथ उनकी मुलाकात बहुत अच्छी रही।

शाह ने ट्वीट में लिखा, “एक बहुत ही प्रतिभाशाली अभिनेता और तेलुगु सिनेमा के रत्न, जूनियर एनटीआर के साथ हैदराबाद में अच्छी बातचीत हुई।”

जूनियर एनटीआर ने इस ट्वीट की प्रतिक्रिया में अमित शाह का धन्यवाद दिया और बताया कि उनको गृह मंत्री से मिलकर बहुत अच्छा लगा।

जूनियर एनटीआर साउथ के मशहूर हीरो में से एक हैं। उन्होंने हाल में आरआरआर जैसी सुपरहिट फिल्म दी है। इसके अलावा वह धार्मिक वेशभूषा के कारण भी चर्चा में रहते हैं। तेलंगाना चुनावों को नजदीक देख लोग अमित शाह के साथ उनकी तस्वीरों पर अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं। वही साझा तस्वीरों को धड़ाधड़ लाइक मिल रहे हैं। खबर लिखने तक शाह द्वारा शेयर तस्वीरों को 65 हजार से ज्यादा लोग लाइक कर चुके थे।

कुछ लोगों एनटीआर की सभ्यता देख उनकी तारीफ कर रहे हैं। उन्हें तेलुगु सिनेमा और भारतीय सिनेमा का सितारा कह रहे हैं। ‘जय NTR- जय NTR’ लिख रहे हैं। तो कुछ लोग इसे राजनीति से जोड़ देख रहे हैं।  यूजर हैरानी से पूछ रहे हैं, “क्या जूनियर एनटीआर के राजनीति में आने के कोई चांस हैं?”

अरुण सिंह कहते हैं, “अगले मुख्यमंत्री जूनियर एनटीआर”

एक यूजर कहता है, “भारतीय राजनीति का नया दौर शुरू होने जा रहा है।” वहीं कुछ इसे कह रहे हैं ‘अन्ना का दौर शुरू होने वाला है।

एक यूजर कहता है, “ये तो बस शुरुआत है। ये आदमी हमारी उम्मीदों से भी ऊँची उड़ान को भरेगा।”

करण लिखते हैं, “एक शेर दूसरे शेर से मिल रहा है।”

जूनियर एनटीआर टीडीपी संस्थापक दिवंगत एनटी रामाराव के पोते हैं। आखिरी बार वह चुनावों के समय 2009 में सक्रिय देखे गए थे। इसके बाद उन्होंने राजनीति से दूरी बना ली। लेकिन अब अमित शाह और उनकी मुलाकात के बाद लोगों को लग रहा है कि आने वाले समय में वह बीजेपी का साथ देंगे।

नए भारत में ओवैसी-औरंगजेब की जगह नहीं, ‘बाबर की तरह ओवैसी का भी नाम और निशान मिट जाएगा’: तेलंगाना में असम मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की ललकार

                            तेलंगाना के वारंगल में जनसभा को सम्बोधित करते असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि भारत को कोई रोकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि जैसे अनुच्छेद-370 ख़त्म हो गया और राम मंदिर के निर्माण का कार्य शुरू हो गया, तेलंगाना में भी निजाम का नाम और निशान मिट जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि ओवैसी का भी नाम और निशान मिट जाएगा। उन्होंने कहा कि वो दिन ज्यादा दूर नहीं है, क्योंकि भारत अब जाग उठा है। असम के सीएम ने कहा कि भारत अब उन नेताओं को मानने के लिए तैयार नहीं है, जो छद्म सेक्युलर राजनीति करते हैं।

हिमंता बिस्वा सरमा ने तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में आयोजित एक रैली में ये बात कही। उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास हमें बताता है कि बाबर, औरंगजेब और निजाम के दिन ज्यादा दिन नहीं चलते। असम सीएम ने कहा कि वो इस बात को लेकर निश्चित हैं कि निजाम की विरासत का अंत होगा और हैदराबाद में भारतीय संस्कृति पर आधारित एक नई सभ्यता का विकास होगा। बता दें कि हाल ही में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी तेलंगाना पहुँचे थे।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस का भी कार्यक्रम हैदराबाद में प्रस्तावित है। वारंगल में सीएम सरमा ने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री केसीआर ने 2 लाख नौकरी का वादा किया था, लेकिन अब वो भूल गए। उन्होंने भाजपा की सरकार बनने पर एक साल में 1 लाख नौकरी का शत-प्रतिशत वादा किया। उन्होंने कहा कि सरकार में वैकेंसी के बावजूद नौकरी नहीं जारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि केसीआर अपने बेटे के लिए समर्पित हैं, जबकि ‘राजा’ का कोई बेटा नहीं होता।

उन्होंने कहा, “लाखों सरकारी कर्मचारी तेलंगाना की TRS सरकार के खिलाफ है। पुलिस आपके समर्थन में है, लेकिन उसे लेकर आपका राज़ नहीं चलेगा। जब भाजपा की सरकार बनेगी तो पुलिस भाजपा के साथ आ जाएगी। आपकी दोस्त जनता है, लेकिन उसके साथ आप गद्दारी कर रहे। बाबर जैसे ख़त्म हो गया, वैसे ही ओवैसी भी ख़त्म हो जाएगा। 2023 में केसीआर की बात सुनने वाला कोई नहीं होगा। हमें एक नए भारत के निर्माण का शपथ लेना है, जहाँ किसी ओवैसी-औरंगजेब की जगह नहीं होगी।”

तेलंगाना : विधायक का बेटा सेक्स के लिए पत्नी ‘माँग’ रहा था; ‘अकेले मरा तो वह मेरी पत्नी-बेटियों को नहीं छोड़ेगा’: परिवार के साथ जिंदा जले रामकृष्ण

परिवार के साथ आत्महत्या करने वाले रामकृष्ण और उनकी पत्नी, TRS विधायक के बेटे राघवेंद्र (दाएँ) (साभार: NewsMeter)
तेलंगाना के भद्रादरी-कोठागुडम जिले के पलोंचा कस्बे में दो जनवरी 2022 की रात एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी और दो जुड़वा बेटियों के साथ आग लगा ली थी। इस मामले में अब एक सेल्फी वीडियो सामने आया है​, जिससे पता चला है कि इस व्यक्ति की पत्नी को लेकर एक विधायक के बेटे ने अपमानजनक टिप्पणी की थी। अप्रत्यक्ष तौर पर उसके साथ सेक्स का दबाव डाला था। ये विधायक हैं, वी वेंकटेश्वर राव (MLA Vanama Venkateswara Rao)। वे सत्ताधारी तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) से जुड़े हैं और इस इलाके में उनका खासा दबदबा बताया जाता है। उनका आरोपित बेटा वनमा राघव राव (राघवेंद्र) फरार बताया जा रहा है।

45 वर्षीय रामकृष्ण ने अपनी 12 वर्षीय दो जुड़वा बेटियों साहित्य और सहिति तथा 40 वर्षीय पत्नी लक्ष्मी के साथ आत्मदाह कर लिया था। इस घटना में दंपती और उनकी एक बेटी की मौत हो गई थी। एक अन्य बेटी की बाद में इलाज के दौरान कोठागुडम सरकारी अस्पताल में मौत हो गई।

जाँच के दौरान पुलिस को मृतक का सुसाइड नोट भी मिला था। लेटर में भी राघवेंद्र का जिक्र था। साथ ही मृतक ने अपनी माँ सूर्यवती और बहन माधवी का भी नाम लिखा था। इसमें कहा गया था कि माँ और बहन ने मृतक को पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी नहीं दी। उस पर 30 लाख रुपए का कर्ज था और उसको किराया भी देना पड़ता था। इस मामले के समाधान के दौरान उसकी बहन ने स्थानीय विधायक के बेटे से उस पर दबाव डलवाया। विधायक के बेटे ने मृतक से ‘समस्या के समाधान के बदले’ कथित तौर पर अपनी पत्नी को पेश करने को कहा था।

वायरल हो रहे वीडियो में मृतक रामकृष्णन को कहते सुना जा सकता है, “MLA के बेटे वनमा राघव (Vanama Raghava) ने कई परिवारों को बर्बाद कर दिया है। ऐसे लोगों से कोई सुरक्षित नहीं है। इन्हे बड़ा न बनने दें और न ही इनके अत्याचारों को सहन करें। वनमा राघव ने जो कुछ भी मेरी पत्नी के लिए कहा उसको कोई भी पति सुन नहीं सकता। वह मेरी पत्नी को मेरे बच्चों के बिना ही हैदराबाद बुला रहा था। अगर मैंने अकेले आत्महत्या की तो वह मेरी पत्नी और बच्चों को नहीं छोड़ने वाला। इसलिए मैंने सबके साथ मरने का फैसला किया है। मेरे बुरे हालातों में मेरी माँ और बहन ने मुझे प्रताड़ित किया। एक साथ मैं सभी से नहीं लड़ सकता।”

इस मामले में शिकायतकर्ता मृतक रामकृष्ण के साले हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि विधायक के बेटे वनमा राघव के समर्थकों ने फोन कर मुकदमा वापस लेने की धमकी दी है। उनको पैसे का भी लालच दिया जा रहा है। इस मामले में वनमा राघव के साथ मृतक की माँ और बहन को भी आरोपित किया गया है। पुलिस के मुताबिक आरोपितों पर धारा 302, 306 & 307 IPC के तहत केस दर्ज किया गया है। आरोपितों की तलाश में पुलिस की 8 टीमें लगाई गई हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वनमा राघव ने खुद को निर्दोष बताया है। उन्होंने बताया कि उनका नाम बीच में क्यों आया उन्हें ये भी पता नहीं। इसी के साथ उन्होंने इस पूरे मामले को अपने राजनैतिक कैरियर के खिलाफ एक साजिश बताया है। वनमा राघव की गिरफ्तारी पर अभी संदेह है। कुछ मीडिया रिपोर्ट में वनमा राघव की गिरफ्तारी की खबर प्रकाशित हुई है। ETV का दावा है कि खुद विधायक ने अपने बेटे को पुलिस के हवाले कर दिया है। साथ ही बेटे को बेगुनाह बताते हुए पुलिस की जाँच में पूरा सहयोग करने की भी बात कही है। इस मामले में विपक्षी दलों ने 7 जनवरी कोठागुडम विधानसभा में बंद का आह्वान किया है।

तेलंगाना : मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव की भाजपा नेताओं को धमकी, कहा- ‘भौंकने वाला कुत्ता’‘, 'हिम्मत है तो छू कर दिखाएँ… जुबान काट लेंगे’

भाजपा विरोध में विरोधी मर्यादा की सारी सीमाएं पार कर रहे हैं। नेता होकर ऐसी अमर्यादित भाषा बोल रहे हैं, जैसे ये नेता नहीं कोई गली का गुंडा है। वास्तव आज राजनीति सफेदपोश गुंडों का अड्डा बन गयी है। जब नेता ही ऐसी अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करेंगे, फिर किस आधार पर देश अथवा राज्य से गुंडागर्दी को समाप्त करेंगे? क्या ऐसी अमर्यादित भाषा इस्तेमाल करने वाले एक भी वोट के हक़दार हैं? जनता को ऐसे नेताओं को आईना दिखाना चाहिए। 
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने 7 नवंबर 2021 को हुजूराबाद में हार का सामना करने के बाद भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश नेताओं को ‘भौंकने वाला कुत्ता’ बताते हुए धमकियाँ दीं। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए केसीआर ने चेतावनी दी, “यदि आप हम पर अनावश्यक टिप्पणी करते हैं तो हम आपकी जुबान काट देंगे।”

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बंदी संजय कुमार को धमकी देते हुए केसीआर ने आगे कहा, “आप अपने बारे में क्या सोचते हैं? आप गटर के लेवल की बातें करते रहे, फिर भी मैं आपको माफ करता रहा हूँ। आप कह रहे हैं कि आप मुझे जेल भेज देंगे। भेज दो। हिम्मत है तो मुझे छूकर दिखाएँ, फिर देखिए कि आपके साथ क्या होगा।”

केसीआर का बयान तब आया जब तेलंगाना में भाजपा नेताओं ने केसीआर की पार्टी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और दावा किया कि जब राज्य में भाजपा सत्ता में आएगी तो तेलंगाना राष्ट्र समिति के प्रमुख चंद्रशेखर राव को जेल भेज दिया जाएगा।

केसीआर ने बीजेपी नेताओं को कहा ‘भौंकने वाला कुत्ता’

प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने भाजपा नेताओं को ‘भौंकने वाला कुत्ता’ बताया। केसीआर ने बीजेपी के खिलाफ अपना हमला जारी रखते हुए कहा, “अब तक मैंने उनकी टिप्पणियों को ज्यादा महत्व नहीं दिया। यह हाथी के गुजरने पर गली में भौंकने वाले कुत्ते की तरह हैं।” उन्होंने आगे कहा कि अगर भाजपा नेताओं ने ‘शालीनता की रेखा पार’ की तो वह कुमार और अन्य के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करेंगे।
केसीआर ने कहा, “हमारी एक पार्टी है, जिसने तेलंगाना आंदोलन का नेतृत्व किया। आखिर आप कौन हैं? हम आपको कुछ ही समय में बाहर निकाल सकते हैं।”। टीआरएस प्रमुख केंद्र द्वारा धान खरीद को लेकर से नाराज थे। केसीआर ने कहा कि TRS किसानों के अधिकारों के लिए केंद्र के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेगी।

तेलंगाना : ‘टीआरएस सरकार रोहिंग्या घुसपैठियों को वोटर कार्ड दे रही’: अरविंद धर्मपुरी, भाजपा सांसद लोकसभा में

2014 से केन्द्र में भाजपा सत्ता में है, जिस कारण समस्त गुप्तचर एजेंसियां भाजपा सरकार के अधीन होने के बावजूद देश से अवैधरूप से रह रहे पाकिस्तानियों, बांग्लादेशियों और रोहिंग्यों की पहचान कर देश से निकालने में असमर्थ हो रही है। विपरीत इसके छद्दम धर्म-निरपेक्ष इन लोगों को भारतीयों को मिलने वाली समस्त सुविधाएं उपलब्ध करवा कर संविधान की ली शपथ को झूठा सिद्ध कर रहे हैं और केंद्र में भाजपा सरकार आंखें मूंदे बैठी है। अपने आप को देशभक्त कहने वाली भाजपा इन घुसपैठियों पर कार्यवाही करने में क्यों संकोच कर रही है? क्यों नहीं इनका समर्थन कर रहे नेताओं पर भी सख्ती से पेश आती? क्या अन्य पार्टियों की तरह भाजपा का भी राष्ट्रप्रेम मात्र एक दिखावा है?  

तेलंगाना की टीआरएस सरकार पर बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को वोटर कार्ड मुहैया कराने का आरोप बीजेपी सांसद अरविंद धर्मपुरी ने लगाया है। धर्मपुरी तेलंगाना के निजामाबाद से सांसद हैं। 22 मार्च को उन्होंने लोकसभा में कहा कि तेलंगाना राष्ट्र स​मिति (TRS) की सरकार अवैध बांग्लादेशी रोहिंग्या प्रवासियों को वोटर कार्ड, पासपोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज दे रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि इन्हीं घुसपैठियों की वजह से राज्य में दंगे हो रहे हैं। लोकसभा में धर्मपुरी ने कहा कि उनका निर्वाचन क्षेत्र निजामाबाद भारत विरोधी गतिविधियों का गढ़ बन गया। उनके अनुसार 72 रोहिंग्या घुसपैठियों ने भारतीय पासपोर्ट हासिल कर लिया है। इनमें से 32 निजामाबाद के बोधन के एक ही पते पर हासिल किए गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार शुरुआती पड़ताल में यह बात भी सामने आई थी कि इन अवैध रोहिंग्या घुसपैठियों के पश्चिम बंगाल में आधार कार्ड भी बने हुए हैं।

फरवरी 2021 में यह पता चला कि पिछले पाँच वर्षों में तेलंगाना में जो 500 पासपोर्ट जारी किए गए, उनमें से 72 फर्जी दस्तावेजों पर हासिल किए गए। शमशाबाद अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे पर जब तीन लोग आव्रजन अधिकारियों के प्रश्नों का उचित उत्तर नहीं दे पाए, तब इस धोखाधड़ी की तरफ अधिकारियों का ध्यान गया। फर्जी पासपोर्ट का उपयोग करके 32 लोग विभिन्न देशों की यात्रा करने में भी सफल रहे। इनमें से 15 तो भारत लौट आए, लेकिन 17 अभी भी खाड़ी देशों, मलेशिया और सिंगापुर जैसी जगहों पर हैं। उसी महीने में 40 पासपोर्ट के आवेदन हैदराबाद के क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय को स्थानांतरित कर दिए गए, क्योंकि वे सभी बोधन कस्बे के 4 पतों पर ही जारी किए गए थे। धर्मपुरी ने पुलिस पर भी रोहिंग्या घुसपैठियों की सहायता का आरोप लगाया है। उन्होनें कहा कि जब पुलिस अधिकारी वेरिफिकेशन के लिए जाते हैं तो अपना काम ईमानदारी से नहीं करते।

हाल ही में जम्मू में 46 रोहिंग्या घुसपैठियों को हिरासत में लिया गया है। पूछताछ के दौरान उन्होनें हैदराबाद में प्रभुत्व रखने वाली एआईएमआईएम के कम से कम तीन नेताओं का नाम लिया। घुसपैठियों से यह जानकारी मिलने के पश्चात तीनों नेता जाँच एजेंसियों की राडार पर हैं।

धर्मपुरी के अनुसार इन्हीं नेताओं ने बांग्लादेश के रास्ते घुसपैठ करने और फिर जम्मू जाने में रोहिंग्या की मदद की। उन्होंने पुलिस पर TRS और एआईएमआईएम के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। बीजेपी सांसद ने कहा कि रोहिंग्या पूरे तेलंगाना में फैल चुके हैं और दंगों के लिए जिम्मेदार भी वही हैं। भैंसा दंगे के लिए भी उन्होंने इन्हें ही जिम्मेदार बताया।

अवलोकन करें:-

असम चुनाव : ‘BDO रहते मैंने बिना जाँच-पड़ताल वोटर लिस्ट में जोड़े थे आप सब के नाम’: सिबमोनी बोरा, कांग

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असम चुनाव : ‘BDO रहते मैंने बिना जाँच-पड़ताल वोटर लिस्ट में जोड़े थे आप सब के नाम’: सिबमोनी बोरा, कांग

उन्होंने कहा, “हाल ही में भैंसा में हुए दंगों में भी रोहिंग्या घुसपैठियों का ही हाथ है। हिंदुओं की हत्या हो रही है, उनके घर और संपत्तियों को जलाया जा रहा है और जेल भी हिन्दू ही भेजे जा रहे हैं।” धर्मपुरी ने केन्द्रीय एजेंसियों से जाँच और रोहिंग्या घुसपैठियों के मददगारों पर कार्रवाई की माँग की।

‘मैंने तुम जैसे कई कुत्ते देखे, पुलिस इन्हें यहाँ से निकालो’: रैली में ‘दलित शक्ति’ पर भड़के तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनकारियों को कहा 'कुत्ता'
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने बुधवार (11 फरवरी, 2021) को एक रैली के दौरान विरोध कर रहे लोगों की तुलना ‘कुत्तों’ से कर विवाद खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री के बयान की आलोचना करते हुए विपक्षी पार्टियों ने उनसे माफी की माँग की है।
हैरानी, इस बात कि है यदि यही बात किसी भाजपा मुख्यमंत्री ने कही होती, समस्त छद्दम दलित प्रेमी भीम आर्मी, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, बहुजन समाजवादी और वामपंथी आदि पार्टियां चीख चिल्लाते आसमान सिर पर उठा लिया होता। लेकिन गैर-भाजपाई मुख्यमंत्री द्वारा दलितों को कुत्ता बोलने पर चुप्पी क्यों? क्या दलित कुत्ते हैं? 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नालगोंडा जिले के नागार्जुन सागर क्षेत्र में एक योजना की आधारशिला रखने के बाद मुख्यमंत्री ने रैली को संबोधित करते हुए यह विवादित टिप्पणी की। यहाँ उपचुनाव भी होने हैं। राव जब रैली को संबोधित कर रहे थे, उसी दौरान ‘दलित शक्ति’ नाम के महिलाओं और युवाओं का ग्रुप उन्हें ज्ञापन देना चाह रहा था। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने रैली में ही विरोध करते हुए नारेबाजी शुरू कर दी और विरोध के तौर पर तख्तियाँ दिखाने लगे।

इससे केसीआर भड़क गए। उन्होंने कहा, “वो पेपर देना चाहते हैं, उनसे ले लो, मुझे शांति से सुनिए। अगर आप सुनना नहीं चाहते हैं तो कृपया यहाँ से चले जाएँ। ये पागलपन यहाँ मत दिखाएँ नहीं तो दंडित किए जाओगे। पुलिसकर्मियों इन्हें यहाँ से निकालो। बाकी लोग इनको नोटिस न करें। मैंने ऐसे बहुत ड्रामे देखे हैं। मैंने तुम जैसे कई कुत्ते देखे हैं। पुलिस इन्हें यहाँ से निकालो।”

सीएम ने प्रदर्शनकारियों को धमकी देते हुए कहा, “आप बस मुट्ठी भर लोग हैं। अगर हमारी तरफ से प्रतिक्रिया हो गई तो कुचलकर धूल में उड़ा दिया जाएगा। आपकी बेवकूफी से कोई बाधा नहीं पड़नी चाहिए। यहाँ से चले जाएँ नहीं तो आपको पीटा जाएगा।”

 इस टिप्पणी के बाद सीएम केसीआर विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं। कॉन्ग्रेस के तेलंगाना इंचार्ज और सांसद मणिकम टैगोर ने ट्वीट कर कहा, “तेलंगाना सीएम ने नागार्जुन सागर जनसभा में महिलाओं को ‘कुत्ता’ कहा, ये मत भूलो कि जो महिलाएँ वहाँ खड़ी थीं उन्हीं की वजह से आप अपनी कुर्सी पर हो। आपके शब्द आपके रवैए को बयान करते हैं। ये मत भूलो कि ये लोकतंत्र हैं। वो (लोग) हमारे बॉस हैं। माफी माँगों चंद्रशेखर।”

बीजेपी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डीके अरुणा ने कहा, “केसीआर की ओर से महिलाओं और युवाओं के लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किए जाना उनके चरित्र को दिखाता है। उनकी माँ तक इसके लिए शर्मसार होंगी।”

बीजेपी प्रवक्ता कृष्णा सागर राव ने इस टिप्पणी को हिंदुओं का अपमान बताया है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, “केसीआर ने दावा किया है कि उन्होंने राकासुलु (राक्षसों) से निपट कर उन्हें मात दी, इसलिए गोगासुलु (गाय चराने वालों) से निपटना उनके लिए कोई बड़ी बात नहीं है। उन्होंने इन शब्दों का इस्तेमाल तब किया जब वो बीजेपी को निशाना बना रहे थे। इससे स्थापित होता है कि वो ये बयान सीधे-सीधे हिन्दुओं और यादवों के संदर्भ में दे रहे थे। बीजेपी ने माँग की कि सीएम केसीआर बिना शर्त हिंदुओं से, खास तौर पर यादवों से माफी माँगे।”

तेलंगाना : काली मंदिर की जमीन पर कब्जा: AIMIM के गुंडों के साथ पुलिस की मिलीभगत का आरोप

          भाजपा नेता ने डीसीपी पर महिलाओं से बदसलूकी करने और कब्जा करने वालों का साथ देने का आरोप लगाया है                                                                                                      (चित्र साभार- हिंदी साक्षी)

काली माता मंदिर विवाद के बाद, तेलंगाना भाजपा के अध्यक्ष बंडी संजय पटेल (Bandi Sanjay Kumar Patel ) ने दिसंबर 16, 2020 को माँग की है कि केसीआर सरकार मंदिरों के स्वामित्व वाली भूमि की रक्षा करे। साथ ही, उन्होंने कब्जाधारियों का साथ देने वाले स्थानीय डीसीपी को निलंबित करने की भी माँग की।

भाजपा नेता ने सवाल किया कि सरकारी (धर्मस्व विभाग) जमीन बचाने की कोशिश करने वाले भाजपा कार्यकर्ताओं को पुलिस कैसे गिरफ्तार कर सकती है? हिन्दू महिलाओं से बदसलूकी और पुलिस की कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए बंडी संजय ने कहा कि आज की घटना से स्पष्ट होता है कि पुलिस कब्जा करने वालों के साथ खड़ी है।

तेलंगाना के भाजपा विधायक टी राजा सिंह के साथ एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, तेलंगाना भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बंडी संजय ने कहा कि अगर सरकार ने 24 घंटे के भीतर इस मुद्दे पर जवाब नहीं दिया, तो मुख्यमंत्री केसीआर को ओल्ड सिटी में मंदिर की जमीन पर भाजपा के आंदोलन के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

भाजपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि स्थानीय डीसीपी ने काली माता मंदिर स्थल पर विरोध कर रही महिलाओं के साथ गैरजिम्मेदाराना व्यवहार किया। संजय ने कहा, “पुलिस अधिकारियों ने अतिक्रमणकारियों का साथ देते हुए निचली अदालत के आदेश का समर्थन किया, भले ही अतिक्रमणकारियों के खिलाफ उच्च न्यायालय का आदेश पहले से ही था।”

उन्होंने कहा, “जैसे ही डीसीपी ने मुझे रोका, सैकड़ों एमआईएम के गुंडे इकट्ठा हुए और नारे लगाए। जिस डीसीपी को कानून और व्यवस्था को बनाए रखना था, उसने एमआईएम कार्यकर्ताओं का समर्थन करने की कोशिश की।”

विधायक राजा सिंह ने कहा कि ओल्ड सिटी में सुबह से तमाशा चल रहा था। भू-माफिया काली माता मंदिर से जुड़ी 8 एकड़ और 15 गुंटा जमीन छीनने की कोशिश कर रहे थे, जिसकी कीमत 150 करोड़ रूपए है।

उन्होंने कहा पुलिस अधिकारियों और अतिक्रमणकारियों पर मिलीभगत का भी आरोप लगाया। रजा सिंह ने कहा कि एंडॉवमेंट डिपार्टमेंट ने निचली अदालत में इस मामले में सुनवाई नहीं की, जिससे पता चलता है कि वे अतिक्रमणकारियों के साथ मिले हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने सांप्रदायिक माहौल बनाने की योजना बनाई और इसका दोष भाजपा पर मढ़ने का प्रयास किया, लेकिन वे विफल रहे।

काली मंदिर जमीन पर कब्जे को लेकर हुई थी झड़प

हैदराबाद ओल्ड सिटी के उप्पुगुड़ा कालिका माता मंदिर (Kalika Mata temple, Uppuguda) से जुड़ी करीब 8 एकड़ 13 गुंटा जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, धर्मस्व विभाग की इस जमीन को अपनी बताते हुए एक व्यक्ति के सिटी सिविल कोर्ट से पुलिस प्रोटेक्शन ऑर्डर लेकर आने और घटनास्थल पर पुलिस की मौजूदगी में निर्माण शुरू करने पर भाजपा नेताओं सहित स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य को रोकने की कोशिश की।

इस पर भाजपा नेताओं ने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर निर्माण कार्य को रोकने की कोशिश की, तो पुलिस ने भाजपा नेताओं व महिलाओं को घसीटते हुए ले जाकर वाहनों में चढ़ाया, जिसे लेकर वहाँ तनाव की स्थिति बन गई। पुलिस ने कहा कि अदालत के आदेशों का ही पालन किया जा रहा था, लेकिन भाजपा कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि आठ एकड़ और 13 गुंटा जमीन कालिका मंदिर और एक हिंदू कब्रिस्तान की है।

जिस समय विवादित जमीन के चारों ओर बाड़ बनाई जा रही थी, तभी भाजपा के सैकड़ों कार्यकर्ता और स्थानीय लोग बुधवार को घटनास्थल पर जमा हुए और नारेबाजी शुरू कर दी। लोगों ने वहाँ पर विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और उन्हें दबीरपुरा और फलकनुमा पुलिस थानों में भेज दिया गया।

इस बीच, एआईएमआईएम कार्यकर्ता बालसेट्टी खेत पहुँछे, जहाँ वे भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ भिड़ गए और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बंडी संजय को रोकने की कोशिश की, जो कि दबीरपुरा पुलिस स्टेशन जा रहे थे। हालाँकि, मिर्चचौक एसीपी ने हस्तक्षेप किया और दोनों समूहों को वहाँ से खदेड़ दिया।

विधायक राजा सिंह ने बाद में मीडिया से बात करते हुए कहा कि एक कब्रिस्तान काली माता मंदिर, कंधीगल से सटा हुआ है, जिसमें चंद्ररंगुट्टा निर्वाचन क्षेत्र में 8.23 ​​एकड़ जमीन है। अतीत में, भूमि-अधिग्रहणकर्ताओं और बंदोबस्ती विभाग के अधिकारियों ने तीन बार उस जमीन को अलग करने की कोशिश की थी, जिसे स्थानीय लोगों ने नहीं होने दिया।

राजा सिंह ने कहा कि जब वे इस संपत्ति हथियाने में विफल रहे, तो जमीन हड़पने वालों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और बंदोबस्ती अधिकारियों ने भी मामले में कोई बाधा नहीं डाली। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और एक आदेश प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट के आदेशों को लागू करने के बजाय, जमीन हड़पने वालों ने पुलिस सुरक्षा के तहत निचली अदालत के आदेशों को लागू करने की कोशिश की जिस कारण विवाद हुआ।


तेलंगाना : स्कूली किताब में सोनिया गाँधी पर चैप्टर, पढ़ेंगे बच्चे?

एक समय था, जब दक्षिण भारत में कांग्रेस की तूती बोलती थी, और यह स्थिति भूतपूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव तक लगभग बनी रही, लेकिन जिस तरह सोनिया गाँधी के अध्यक्ष बनने पर उनका उपहास होना शुरू हुआ, वैसे ही दक्षिण भारत में कांग्रेस अस्त होनी शुरू हो गयी। अभी संपन्न हुए तेलंगाना निगम निकाय में जिस पार्टी को केवल दो ही सीटें मिली हों, वह पार्टी तेलंगाना पाठ्य पुस्तकों में सोनिया गाँधी का अध्याय जोड़ने को कहने पर स्मरण होता है कि "गंजे को नाख़ून नहीं दिए।"  
कांग्रेस चाहती है कि सोनिया गाँधी के बारे में देश के बच्चे जानें-पढ़ें। नेहरू-इंदिरा को पढ़ने वाले बच्चे सोनिया गाँधी के बारे में नहीं जानेंगे तो उनका नुकसान होगा।

सोनिया गाँधी की जीवनी को बच्चों की किताब में शामिल करने को लेकर देश की सबसे पुरानी पार्टी बहुत सीरियस है। इतनी सीरियस कि वो तेलंगाना के मुख्यमंत्री से इसके लिए गुजारिश भी कर गए।

ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी (AICC) के प्रवक्ता डॉ श्रवण दसोजू ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव से अनुरोध किया कि वे राज्य के स्कूल सिलेबस में उनकी जीवनी को शामिल करें। डॉ दसोजू ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि उन्होंने राज्य विधानसभा में एक आधिकारिक बयान दिया था, जिसमें कहा था – “सोनिया गाँधी के बिना तेलंगाना नहीं बनता।”

बस फिर क्या था, ट्विटर पर सोनिया के अध्याय में उन बातों को भी सम्मिलित करने का आग्रह किया जा रहा, जिन्हें आज तक जनता को कभी नहीं बताया गया:- 

इसी को याद दिलाते हुए कांग्रेस प्रवक्ता डॉ श्रवण दसोजू ने कहा, “इस महान योगदान और प्रतिबद्धता के लिए सोनिया गाँधी को एक यादगार उपहार देना हम सभी की जिम्मेदारी है। तेलंगाना बनने का सपना सच हो चुका है, लेकिन 6 साल बाद भी राज्य सरकार ने बदले में कुछ नहीं किया।”

कांग्रेस में सोनिया भक्ति 

9 दिसंबर 1946 को पैदा हुईं सोनिया गाँधी अब 74 वर्ष की हो गई हैं। कांग्रेस में उनकी भक्ति का आलम यह है लोग उन्हें देवी का रूप भी मान लेते हैं।

मध्य प्रदेश कांग्रेस कार्यकर्ता डॉक्टर टीके नवरात्रि के दौरान ‘देवी’ के रूप में सोनिया गाँधी की पूजा-अर्चना करते हैं। उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष पर उतना ही विश्वास है, जितना भगवान में। इतना ही नहीं उन्होंने यह तक क़सम खाई हुई है कि सोनिया गाँधी जब तक भारत का प्रधानमंत्री नहीं बन जातीं, तब तक वो अपना सिर मुंडवाए रखेंगे। और कुछ हैं जो सदा मैडम सोनिया जी के चरणों में पड़े रहना चाहते हैं!

सोनिया को पाठ्य पुस्तकों से पहले इन पुस्तकों ने खुलासा कर रखा है 

सोनिया गाँधी आज भारत के नामी नेताओं में से एक मानी जाती हैं। हां, कह सकते हैं कि उनकी पार्टी अभी मुरझाई-मुरझाई सी दिखती है, वो अलग बात है। लेकिन फैक्ट ये भी है कि भारत की मज़बूत महिला नेताओं में सोनिया का नाम हमेशा ही शुमार रहता है। सोनिया को हम में से ज्यादातर लोग उतना ही जानते हैं, जितना उनके बारे में खबरों में आता है। लेकिन असल में वो कैसी हैं, राजनीति से नफरत होने के बाद भी कैसे इसमें आईं, कैसे राजीव गांधी से मिलीं, राजनीतिक सफर में क्या-क्या देखा, किन दिक्कतों का सामना किया, इन सबके बारे में कुछ विद्वानों ने कुछ किताबें लिखी हैं। जिन्हें आपको ज़रूर पढ़ना चाहिए। 

द रेड साड़ी

किसने लिखी- जेवियर मोरो, स्पैनिश राइटर 

पुस्तक साल 2008 में पहली बार प्रकाशित हुई थी, लेकिन भारत में नहीं, स्पेन में, ‘El sari rojo’ टाइटल के साथ। फिर इटेलियन, फ्रेंच, डच और अंग्रेज़ी में भी इसे ट्रांसलेट किया गया। 

सोनिया गांधी के ऊपर ‘द रेड साड़ी’ किताब स्पैनिश राइज़ जेवियर मोरो ने लिखी. (फोटो- एमेज़ॉन/वीडियो स्क्रीनशॉट)

क्या है किताब में- सोनिया गांधी का बचपन इटली में कैसा बीता? वो कैसे 19 बरस की उम्र में कैंब्रिज में राजीव गांधी से मिली। कैसे वो लड़की, जो एक सादा जीवन जीना चाहती थी, उसने राजनीति में एंट्री ली। इन सबके बारे में लिखा है। किताब का टाइटल है ‘द रेड साड़ी’ ये उस साड़ी के संदर्भ में है, जिसे सोनिया ने अपनी शादी में पहना था। जिसे नेहरू ने तब बुना था, जब वो जेल में थे। इस किताब को ‘ए ड्रामेटाइज़्ड बायोग्राफी ऑफ सोनिया गांधी’ कहा जाता है

कांग्रेस ने किया था इस किताब का विरोध

‘द रेड साड़ी’ जब स्पेन और इटली के बुक स्टोर में गई, तो दनादन बिकने भी लगी लेकिन भारत में कांग्रेस को इस बुक से दिक्कत हुई ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की जून 2010 की एक रिपोर्ट है, जिसमें जेवियर से फोन पर बातचीत का जिक्र है जेवियर ने बताया था कि वकील और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने उनके स्पैनिश और इटेलियन पब्लिशर्स को मेल किया था, और कहा था कि स्टोर से इस किताब को हटा दिया जाएकांग्रेस ने जेवियर पर आरोप लगाए थे कि उन्होंने फैक्ट्स के साथ छेड़छाड़ की है और गलत जानकारी दी हैजेवियर मोरो ने तब कहा था कि उनकी किताब बायोग्राफी नहीं है, एक नॉवेल है। लेकिन नॉवेल होने के बाद भी सच्चाई से छेड़छाड़ नहीं की गई। 

PTI की जून 2010 की रिपोर्ट के मुताबिक, सिंघवी ने सोनिया गांधी की तरफ से जेवियर को लीगल नोटिस भी भेजा था, जिसमे कहा था कि राइटर ने पैसे कमाने के लिए निजता का हनन किया है। खैर, इस मुद्दे पर जमकर बवाल मचा था। लेकिन राइटर भी अपनी बात पर अड़े रहे। आखिरकार साल 2015 में ये किताब भारत में रिलीज़ कर दी गयी। 

# द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर

किसने लिखी- संजय बारू, कई अहम पदों पर सरकार के साथ काम कर चुके हैं। 2004 से 2008 तक तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया एडवाइज़र और चीफ स्पोक्सपर्सन रहे थे। 

अप्रैल 2014 में ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ प्रकाशित हुई थी। लोकसभा चुनाव के माहौल के बीच। 

‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ किताब पर फिल्म भी बन चुकी है. किताब संजय बारू ने लिखी है. (फोटो- एमेज़ॉन)

किताब में जो था, उससे जमकर विवाद हुआ था

संजय बारू ने अपनी किताब में मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री बनने, और उनके कार्यकाल में उनके पीएम के तौर पर अधिकारों के बारे में लिखा था। इस किताब में उन्होंने ज़िक्र किया था कि किस तरह मनमोहन सिंह के काम में कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी का दखल होता था। लिखा था कि मनमोहन सिंह के हाथों में असल में देश की सत्ता नहीं थी। 

हालांकि इस किताब में संजय ने मनमोहन सिंह की पॉजिटिव चीजों के बारे में भी बात की थी। संजय की इस किताब के आने के बाद जमकर विवाद हुआ था। विवाद इतना बढ़ा था कि पीएमओ ने ऑफिशियली इसकी निंदा करते हुए इसे फिक्शन बताया था। कांग्रेस ने इस किताब को ‘पीठ में छुरा घोंपना’ भी कहा था। 

विवादों के बीच संजय बारू ने एक इंटरव्यू में कहा था-

मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी और कांग्रेस के बारे में मैं जितना जानता हूं, उसका 50 प्रतिशत ही बताया है मैंने इस किताब में

इस किताब का पूरा नाम है- ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर: द मेकिंग एंड अनमेकिंग ऑफ मनमोहन सिंह’ एक्सीडेंटल नाम इसलिए डाला गया था, क्योंकि पहले सोनिया गांधी पीएम बनने वाली थीं, लेकिन विरोध के चलते आखिर में मनमोहन सिंह को पीएम बनाया गया था। जो कि अनएक्सपेक्टेड था। 

Sonia Gandhi Book (5)

# वन लाइफ इज़ नॉट इनफ

के. नटवर सिंह IFS (इंडियन फॉरेन सर्विस) अधिकारी रह चुके हैं। लेकिन इस्तीफा देकर कांग्रेस में शामिल हो गए थे। 1984 में चुनाव लड़ा, जीत भी गए। उसके बाद राजनीति में सक्रीय रहे। मई 2004 से दिसंबर 2005 के बीच विदेश मामलों के मंत्री रहे। हालांकि अब कांग्रेस में नहीं है। 

‘वन लाइफ इज़ नॉट इनफ’ के राइटर पूर्व मंत्री नटवर सिंह हैं. (फोटो- एमेज़ॉन)

क्या कहानी है और क्यों हुआ विवाद?

जुलाई 2014 में प्रकाशित ‘वन लाइफ इज़ नॉट इनफ’ किताब नटवर सिंह की ऑटोबायोग्राफी है। ये किताब संजय बारू की किताब के रिलीज़ होने के कुछ ही महीनों बाद रिलीज़ हुई, और इसने भी जमकर विवाद खड़ा किया। दरअसल, इस किताब में नटवर ने अपनी लाइफ के हर किस्से के बारे में बताया, कांग्रेस पार्टी में रहने के दौरान क्या-क्या हुआ, वो भी लिखा। 

विवाद इसलिए हुआ, क्योंकि नटवर सिंह ने इसमें सोनिया द्वारा पीएम का पद न लेने के मुद्दे पर लिखा था। ‘लाइव मिंट’ और ‘BBC’ समेत अन्य मीडिया हाउस की रिपोर्ट के मुताबिक, नटवर सिंह ने लिखा था कि 2004 में पार्टी को जीत दिलाने के बाद भी सोनिया गांधी ने पीएम का पद न लेने का फैसला किया था, ऐसा उन्होंने अपने बेटे राहुल गांधी के कहने पर किया था। क्योंकि उन्हें डर था कि सोनिया को उनके पिता राजीव गांधी, दादी इंदिरा गांधी की तरह मार दिया जायेगा। इसके अलावा नटवर सिंह ने अपनी किताब में सोनिया को सत्तावादी, हठी, सीक्रेसिव और संदिग्ध महिला की तौर पर डिस्क्राइब किया था। इसका कांग्रेस और सोनिया गांधी ने विरोध किया था। ‘इकोनमिक टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, सोनिया ने कहा था कि सच्चाई सामने लाने के लिए वो खुद की एक किताब लिखेंगी। 

# ‘द कोएलिशन ईयर्स’ और ‘द टर्बुलेंट ईयर्स’

किसने लिखी हैं- प्रणब मुखर्जी. पूर्व राष्ट्रपति थे। UPA के कार्यकाल में वित्त मंत्री भी रहे, कांग्रेस के बड़े नेता थे। करीब चार दशक तक राजनीति में सक्रीय रहे। कई अहम ज़िम्मेदारियां निभाई। 

‘द टर्बुलेंट ईयर्स: 1980-1996’ प्रकाशित हुई फरवरी 2016 में और ‘द कोएलिशन ईयर्स: 1996-2012’ अक्टूबर 2017 में.

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपनी बायोग्राफी में अपने चार दशक के राजनीतिक सफर को लिखा है, इसमें सोनिया का भी ज़िक्र है. (फोटो- एमेज़ॉन)

ये दोनों ही किताबें पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बायोग्राफी है। ‘द टर्बुलेंट ईयर्स: 1980-1996’ में उन्होंने 1980 से लेकर 1996 के बीच मची राजनीतिक और आर्थिक उथल-पुथल के बारे में लिखा है। शुरुआत की 1980 में अचानक हुई संजय गांधी की मौत की घटना से। फिर राजीव गांधी के प्रधानमंत्री वाले चैप्टर में आये।उसके बाद उनके चुनाव हारने से लेकर 1991 में उनकी हत्या की घटना का ज़िक्र किया। राजीव गांधी के जाने के बाद कांग्रेस का नेतृत्व किसने और कैसे किया, इन सबका खुलकर वर्णन है। इसी दौरान सोनिया गांधी भी राजनीति में दिखाई देने लगी थी। दरअसल, राजीव जब प्रधानमंत्री थे, तब सोनिया उनके साथ कई देशों के राजनीतिक दौरों पर जाती थी। उनकी मौत के बाद सोनिया को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की बात हुई थी, लेकिन उन्होंने ये पद नहीं लिया था। तब कांग्रेस की हालत थोड़ी डांवाडोल रही। इन्हीं हालातों का ज़िक्र प्रणब ने अपनी इस बायोग्राफी में किया है। 

इसके बाद प्रणब ने  1996 से लेकर 2012 की राजनीति के बारे में अपनी किताब ‘द कोएलिशन ईयर्स’ में लिखा। 1998 में सोनिया गांधी कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं, उसके बाद से वो राजनीति में पूरी तरह एक्टिव रही।अपनी पार्टी को मज़बूती दी। पीएम बनने के कगार पर भी पहुंचीं। ये सबकुछ हुआ 1996 से 2012 के बीच।इस दौरान प्रणब मुखर्जी भी पार्टी और सरकार में अहम पदों पर रहे। उन्होंने सोनिया के साथ काम किया।अपना सारा अनुभव उन्होंने अपनी इस किताब में लिखा है। ‘द हिंदू’ में अक्टूबर 2017 में किताब का रिव्यू छपा था। ये रिव्यू स्मिता गुप्ता ने दिया था। जिसके मुताबिक, इस किताब में प्रणब ने इकॉनमिक्स के मुद्दों पर मनमोहन सिंह से अपने मतभेद और राजनीति के मुद्दे पर सोनिया गांधी से अपने मतभेद के बारे में खुलकर लिखा था। ज़ाहिर तौर पर, अगर ये सबकुछ इस किताब में है, तो आपको ये जानने को मिलेगा कि सोनिया राजनीति को लेकर क्या सोचती हैं। 

# 24, अकबर रोड

किसने लिखी- राशिद किदवई. जर्नलिस्ट और राइटर, और पॉलिटिकल एनालिस्ट 

पुस्तक 2011 में प्रकाशित हुई। लेकिन 2013 में इसे रिवाइज़ करके अपडेट किया गया और राहुल गांधी का चैप्टर इसमें जोड़ा गया। 

राशिद किदवई ने अपनी किताब ’24 अकबर रोड’ में कांग्रेस लीडरशिप के बारे में काफी कुछ लिखा है. (फोटो- एमेज़ॉन)

’24 अकबर रोड: ए शॉर्ट हिस्ट्री ऑफ द पीपल बिहाइंड द फॉल एंड राइज़ ऑफ द कांग्रेस’। इसका मतलब ये हुआ कि कांग्रेस पार्टी के पतन और उदय के पीछे जिन लोगों का हाथ है, उनकी कहानी, और इसे ’24 अकबर रोड’ इसलिए नाम दिया गया है, क्योंकि यहीं कांग्रेस पार्टी के हेडक्वार्टर का आधिकारिक पता है

राइटर ने अपनी इस किताब में कांग्रेस के अहम लोगों के रोल के बारे में जानकारी दी है। इसमें इमरजेंसी के बाद से कांग्रेस के इतिहास को कम्पाइल किया गया है। इंदिरा गांधी, संजय गांधी, राजीव गांधी, नरसिम्हा राव, सीताराम केसरी से लेकर सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह और राहुल गांधी का पार्टी में किस तरह का रोल रहा, क्या योगदान रहा। उसे बताया है। यानी अगर कांग्रेस के आधिकारिक कामकाज में सोनिया के रोल के बारे में आपको जानना है, तो इस किताब को पढ़ा जा सकता है।