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एक दिन पाकिस्तान कबूल करता है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों का दमन हो रहा है और अगले दिन ओवैसी जय फिलिस्तीन का नारा लगाता है; इसकी असली जगह गाज़ा या रफाह है

सुभाष चन्द्र

सोमवार 24 जून, 2024 को पाकिस्तान नेशनल असेंबली में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने माना कि पाकिस्तान में धर्म के नाम पर अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है।  आसिफ ने कहा कि रोज अल्पसंख्यक मारे जा रहे हैं जिसकी वजह से पाकिस्तान को विश्व भर में शर्मिंदा होना पड़ रहा है पाकिस्तान ने यह बात आज़ादी के 75 साल बाद कबूल किया है जबकि पाकिस्तान में हिन्दू 22 प्रतिशत से घट कर 2 प्रतिशत रह गए आज भी यह कबूल करने के पीछे कोई कारण रहा होगा वरना इतना शरीफ मुल्क नहीं है

लेकिन पाकिस्तान के हिंदू ओवैसी को उत्पीड़ित समुदाय नहीं लगते, वह तो मंगलवार 25 जून को सांसदी की शपथ लेते हुए “जय फिलिस्तीन” का नारा लगाता है और कहता है कि फिलिस्तीन  उत्पीड़ित है इसलिए उनके लिए नारा लगाया ओवैसी का यह शब्द संसद की कार्रवाई से बेशक निकाल दिया गया है लेकिन उसने अपनी मंशा साफ़ कर दी है वह फिलिस्तीन और हमास के साथ खड़ा है 

लेखक 
चर्चित YouTuber 
देखा जाए तो ओवैसी की हैदराबाद से बाहर कोई हैसियत नहीं। ये तो मीडिया जिसने इसे सिर पर बैठा रखा है। पूछे कोई ओवैसी से पूरे तेलंगाना में कितने उम्मीदवार खड़े किए थे और कितने जीते? मुसलमानों के अलावा कोई घास नहीं डालता। फिर जिस तरह ओवैसी हिन्दुओं को विभाजित करने दलित कार्ड खेलता है, लेकिन कभी नहीं पूछता कि शिया सुन्नी की और सुन्नी शिया की मस्जिद में नमाज़ क्यों नहीं पढ़ सकता? मुसलमानों में इतनी जातियां हैं कि कोई एक दूसरे की मस्जिद में न नमाज़ पढ़ सकता है और न ही एक दूसरे के कब्रिस्तान में अपना मुर्दा दफ़न नहीं कर सकते, मुस्लिम होते मुस्लिमों में हो रहे उत्पीड़न पर क्यों नहीं बोलता? हाँ, इस्लाम के नाम पर सब एक हैं।   

मियां ओवैसी को कभी उइगर मुसलमानों का उत्पीड़न दिखाई नहीं दिया और न कभी पाकिस्तान के हिंदुओं का उत्पीड़न दिखाई दिया जो पाकिस्तान ने तुम्हारे फिलिस्तीन का नारा लगाने से एक दिन पहले कबूल किया 

अगर फिलिस्तीनी इतने उत्पीड़ित लगते हैं तो यहां संसद में नारा लगाने से क्या काम चलेगा तुम्हे और तुम्हारी अपनी फ़ौज को (जिसमें सभी ऐसे मुसलमान शामिल होने चाहियें जो हमास और फिलिस्तीन के हक़ में नारे लगाते हैं) तुरंत गाज़ा और रफाह जा कर उनकी मदद करनी चाहिए

ओवैसी ने अपने को सही साबित करने के लिए कहा है कि उसने ऐसा नारा लगा कर कुछ गलत नहीं किया, मुझे संविधान का कोई तो प्रावधान बताएं जिसके अनुसार मैंने गलत कहा हो अगर गलत नहीं था तो फिर उसे संसद की कार्रवाई से हटाने का विरोध क्यों नहीं दर्ज कराया speaker से 

ओवैसी को संविधान का आर्टिकल 102 (D)  पढ़ लेना चाहिए जिसमे साफ़ लिखा है कि -

“A person shall be disqualified for being chosen as, and for being, a member of either House of Parliament -

(d) if he is under any acknowledgement of allegiance or adherence to foreign nation;

आज तक ओवैसी ने कभी चीन में उत्पीड़न झेल रहे उइगर मुस्लिमों के बारे में एक शब्द नहीं बोला जैसे 56 इस्लामिक देश भी नहीं बोलते उन देशों को तो लालच है चीन से मदद मिलना कहीं बंद न हो जाए लेकिन ओवैसी और अन्य भारतीय मुस्लिम संगठनों और सेकुलर दलों को उनके लिए बोलने में क्या आपत्ति है, कांग्रेस का तो चीन से MOU है जिसकी वजह से नहीं बोलती लेकिन क्या ओवैसी को चीन से डर लगता है?

आज के परिपेक्ष में हर विरोधी दल जो भी मुंह में आता है वह बोलते हैं चाहे प्रधानमंत्री के खिलाफ हो, देश के खिलाफ या हिंदुओं के खिलाफ हो ऐसे लोगों पर जमकर प्रहार होना चाहिए ओवैसी का अगर निष्कासन हो भी जाता है तो सुप्रीम कोर्ट बैठा है उसके नारे को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता साबित करने के लिए आज सपा सेंगोल के खिलाफ खड़ी हो गई लेकिन सवाल यह है कि अगर तुम्हे पसंद नहीं है सेंगोल तो संसद मत जाइये, किसने कहा है जाना जरूरी है?

भारत माता की जय बोलने से परहेज लेकिन संसद में ‘जय फिलिस्तीन’ बोलने से परहेज नहीं, वाह दोगले ओवैसी


असदुद्दीन ओवैसी द्वारा शपथ लेते समय ‘जय फिलिस्तीन’ बोलने पर अब तक कोई कार्यवाही न होना भारत के लचर कानून हैं, अगर यही काम किसी विदेश में हुआ होता उस सदस्य को शायद तुरंत निलंबित कर दिया होता। यहाँ 'पाकिस्तान जिंदाबाद' नारे लगाने, 'सिर तन से जुदा' और खुलेआम सनातन और रामायण का अपमान करने वालों पर ढुलमुल नीति अपनाने आदि,  लेकिन इस्लाम या ईसाई मजहब के खिलाफ जरा-सा भी बोलने पर कानून एकदम हरकत में आ जाता है, क्या ऐसे कानून को बदलने की जरुरत नहीं? अगर ऐसे कानूनों को बदलने में विपक्ष संसद में हंगामा करता है, उसकी परवाह किए बिना सख्त कानून बनाने चाहिए। 
भारत के जिन नेताओं और पार्टियों को देशभक्त और जनहितैषी बताया जाता है, सबसे बड़े नाकारा है। देश को बताएं कि विश्व में कौन-सा देश रोहिंग्या, घुसपैठियों और फिलिस्तीनों को अपने देश में रखने को तैयार है? लेकिन हमारे कुर्सी के भूखे नेता और उनकी पार्टियां इनको अपना वोट बैंक मान संरक्षण देते हैं। क्या यह संविधान का खुलेआम मजाक नहीं? बात करते फिरते हैं संविधान की। क्या संविधान ऐसे लोगों को संरक्षण   
हैदराबाद से लोकसभा सांसद और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने सांसद के रूप में शपथ लेने के दौरान फिलिस्तीन के समर्थन में नारा लगाया। संसद में ओवैसी के नारे के बाद हंगामा हो गया जिसके बाद इस मुद्दे पर विवाद बढ़ गया है। उनकी संसद सदस्यता रद्द किए जाने की मांग जोर पकड़ रही है। इस बीच वकील हरिशंकर जैन ने संसद सदस्यता खत्म करने को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से शिकायत की है। महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जिस ओवैसी ने कभी कहा था कि चाहे जो कर लो, भारत माता की जय नहीं बोलूंगा। उसी ओवैसी ने भारत की संसद में सांसद की शपथ लेते हुए “जय फिलिस्तीन” का नारा लगाया। भारत माता से परहेज, तो फिलिस्तीन की जय से क्या संदेश देना चाहते हैं ओवैसी? सवाल यह भी उठता है कि क्या ओवैसी गाजा से सांसद हैं? विवाद बढ़ने के बाद ओवैसी ने सफाई दी है। ओवैसी ने कहा कि उन्होंने सदन में कुछ भी गलत नहीं कहा। इससे इनकी मंशा समझी जा सकती है। 

एनडीए सांसदों ने जताया कड़ा विरोध
ओवैसी के नारा लगाते ही एनडीए सांसदों ने कड़ा विरोध जताया, इसके बाद चेयर पर बैठे राधा मोहन सिंह ने उसे रिकॉर्ड से निकालने का आदेश दे दिया। तब जाकर सदन में शांति हुई। बीजेपी ने ओवैसी के बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि मौजूदा नियमों के अनुसार उन्हें संसद से अयोग्य ठहराए जाने का आधार है। बीजेपी ने अनुच्छेद 102 का हवाला देते हुए कहा कि ओवैसी को सदस्यता से अयोग्य ठहराया जा सकता है।

भारत माता की जय नहीं बोलेंगेः ओवैसी
ये वही ओवैसी हैं जिन्हें ‘जय फिलिस्तीन’ कहने में कोई हर्ज नहीं है लेकिन ‘भारत माता की जय’ बोलने में आपत्ति है। असदुद्दीन ओवैसी इससे पहले भी अपने कई बयानों को लेकर विवादों में रहे हैं। कभी उन्होंने भारत माता की जय बोलने से इनकार किया तो कभी भाजपा-आरएसएस को लेकर विवादित बयान दिया। कुछ साल पहले आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि नई पीढ़ी को भारत की शान में नारे लगाने का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए। जिसके जवाब में असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था कि वो कभी ‘भारत माता की जय नहीं बोलेंगे भले भी उनकी गर्दन पर कोई छुरी क्यों न रख दे’। ओवैसी एक बार यह भी कह चुके हैं कि इस्लाम ही सभी लोगों का घर है। अगर दूसरे धर्म के लोग इस्लाम अपनाते हैं तो यह उनके लिए घर वापसी जैसा होगा। हर बच्चा मुस्लिम होकर ही जन्म लेता है।      

ओवैसी जैसे लोग जिस थाली में खाते हैं उसी में छेद करते हैं
ओवैसी ने देश की संसद में फिलिस्तीन का जयकारा लगाकर अपनी वफादारी स्पष्ट कर दी है। ओवैसी, जिस देश का नमक खा रहे हैं, जिस देश की संसद में खड़े हैं, उसके लिए मुंह से एक जयकारा तक नहीं निकल सकता। ये वही लोग हैं जो जिस थाली में खाते हैं उसी में छेद करते हैं। ओवैसी जैसे लोग अपने समाज और देश के नाम पर कलंक समान हैं।

क्या ओवैसी गाजा से सांसद हैं?
क्या ओवैसी गाजा से सांसद हैं? जो “जय हिंद” कहने की बजाय “जय फिलिस्तीन” कहा। राहुल गांधी और अखिलेश यादव क्यों चुप हैं। हमेशा संविधान बचाने का नारा लगाने वाला विपक्ष अब चुप क्यों है। विपक्ष को भी इस पर स्पष्टीकरण देना चाहिए। हमेशा संविधान की किताब लेकर चलने वाले राहुल गांधी को बताना चाहिए कि जय फिलिस्तीन कहना क्या संविधान का अपमान नहीं है।

विदेशी राज्य के प्रति निष्ठा प्रदर्शित करने पर अयोग्य ठहाराया जा सकता है
संसद के मौजूदा नियमों के अनुसार, किसी भी सदन के सदस्य को किसी विदेशी राज्य के प्रति निष्ठा प्रदर्शित करने पर, उसकी लोकसभा या किसी भी सदन की सदस्यता से अयोग्य ठहराया जा सकता है। एक्‍सपर्ट के मुताबिक या तो उन्‍हें फ‍िर शपथ लेने को कहा जा सकता है, या फ‍िर वे अयोग्‍य ठहराए जाएंगे।

संसद में दूसरे देश की तारीफ करना किस मानसिकता का परिचायक
केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा ने कहा, ”संवैधानिक प्रक्रिया के मुताबिक, एक सांसद उतना ही पढ़ेगा, जितना उसे कहा जाएगा। हमने इसका विरोध किया है। अध्यक्ष ने आश्वासन दिया कि केवल शपथ की अवधि को ही रिकॉर्ड में लिया जाएगा, उसके पहले और बाद में कुछ नहीं। अपने देश की संसद में दूसरे देश की तारीफ करना आपकी मानसिकता के बारे में भी बहुत कुछ बताता है।”

ओवैसी के खिलाफ राष्ट्रपति से शिकायत
सुप्रीम कोर्ट के वकील विष्णु शंकर जैन ने ट्वीट कर कहा, ‘हरि शंकर जैन ने भारत के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सामने असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ भारतीय संविधान के अनुच्छेद 102 और 103 के तहत शिकायत दायर की है, जिसमें उन्हें संसद सदस्य के रूप में अयोग्य घोषित करने की मांग की गई है।’

ओवैसी ने सफाई में कहा- सदन में कुछ भी गलत नहीं कहा 
विवाद बढ़ने के बाद हैदराबाद से AIMIM के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने शपथ ग्रहण के बाद संसद के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए अपनी टिप्पणी का बचाव किया। उन्होंने कहा, “अन्य सदस्य भी अलग-अलग बातें कह रहे हैं। मैंने कहा ‘जय भीम, जय मीम, जय तेलंगाना, जय फिलिस्तीन’। यह कैसे गलत है? मुझे संविधान में इसे लेकर कोई प्रावधान हो तो बताएं। आपको यह भी सुनना चाहिए कि दूसरों ने क्या कहा। मुझे जो कहना था मैंने कहा। आप यह भी देखें कि महात्मा गांधी ने फिलिस्तीन के बारे में क्या कहा था।” जब ओवैसी से फ़िलिस्तीन का ज़िक्र करने का कारण पूछा गया, तो उन्होंने बताया, “वे उत्पीड़ित लोग हैं।” ओवैसी ने उर्दू में शपथ ली थी।

भाजपा सांसद बोले- ‘जय फिलिस्तीन’ का नारा बिल्कुल गलत
केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा, “AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने आज संसद में जो ‘जय फिलिस्तीन’ का नारा दिया, वह बिल्कुल गलत है। यह सदन के नियमों के खिलाफ है। वह भारत में रहकर ‘भारत माता की जय’ नहीं कहते…लोगों को समझना चाहिए कि वह देश में रहकर असंवैधानिक काम करते हैं।”
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, “फिलिस्तीन या किसी अन्य देश से हमारी कोई दुश्मनी नहीं है। शपथ लेते समय क्या किसी सदस्य के लिए दूसरे देश की प्रशंसा में नारा लगाना उचित है? हमें नियमों की जांच करनी होगी कि क्या यह सही है।”
भाजपा सांसद बिप्लब कुमार देब ने कहा, “फिलिस्तीन हो या कोई और देश, सबके भारत से अच्छे संबंध हैं। सवाल यह है कि शपथ लेते समय वह फिलिस्तीन जिंदाबाद कह सकते हैं या नहीं, भारत माता जिंदाबाद कहने की बजाय वह दूसरे देश का जिंदाबाद कह रहे हैं। इस पर विपक्ष चुप था, जब मैंने शपथ लेने से पहले नमस्ते कहा तो ओवैसी ने विरोध करना शुरू कर दिया कि यह संविधान विरोधी शब्द है।”

इन कारणों से छिन जाती है संसद सदस्‍यता
♦ अगर कोई संसद के दोनों सदनों यानी लोकसभा और राज्यसभा के लिए चुन लिया जाए तो उसे एक तय समय में किसी एक सदन की सदस्यता छोड़नी होती है। लेकिन अगर वह ऐसा नहीं करता, तो संविधान के अनुच्‍छेद 101 में संसद को अध‍िकार है क‍ि उससे एक सदन या दोनों सदनों की सदस्‍यता छीन ले।
♦ कोई भी संसद और विधानसभा का सदस्‍य एक साथ नहीं रह सकता। उसे एक पद से इस्‍तीफा देना ही होता है। अगर वह एक निश्च‍ित समय के अंदर दोनों में से एक सदस्‍यता नहीं त्‍यागता, तो उसकी संसद सदस्‍यता छीनी जा सकती है।
♦ संसद के क‍िसी भी सदन का सदस्‍य बिना इजाजत अगर संसद की बैठकों-कार्यवाही से 60 द‍िनों तक गैर हाज‍िर रहता है, तो उसकी सीट को खाली घोषित क‍िया जा सकता है। यानी उसकी सदस्‍यता खत्‍म मान ली जाती है। इन 60 दिनों में उन दिनों को नहीं गिना जाएगा, जिस दौरान सत्र चार से अधिक दिनों तक स्थगित हो या सत्रावसन हो गया हो।
♦ संव‍िधान के अनुच्‍छेद 102 के मुताबिक, अगर कोई सदस्‍य सरकार में लाभ के पद पर है, तो उसकी संसद सदस्‍यता चली जाती है। सिर्फ उस पद पर बने रहने पर वह अयोग्‍य घोषित नहीं होगा, जिस पद पर सांसदों का बना रहना क‍िसी कानून के तहत उसे अयोग्‍य नहीं ठहराता। वहां से वेतन, भत्‍ते और दूसरे सरकारी लाभ लेने पर मनाही है।
♦ अगर कोई सांसद किसी अदालत द्वारा मानसिक रूप से अस्वस्थ घोषित कर दिया जाए तो उसकी सदस्यता चली जाएगी। अगर कोई दीवाल‍िया घोषि‍त है, तो उसकी भी संसद सदस्‍यता छीनी जा सकती है।
♦ अगर कोई व्यक्ति भारत का नागरिक न हो, या फिर वह किसी और देश की नागरिकता ग्रहण कर ले तो उसकी सदस्यता रद्द कर दी जाएगी। संव‍िधान के अनुच्छेद 102 के मुताबिक, अगर वह किसी और देश के प्रति निष्ठा जताता है, तो भी उसकी सदस्‍यता जा सकती है। ओवैसी के मामले में यही दावा किया जा रहा है। चूंक‍ि उन्‍होंने फिलिस्तीन के प्रत‍ि निष्‍ठा प्रदर्शित की, इसल‍िए संसदीय कानूनों के मुताबिक, उनकी सदस्‍यता जा सकती है।
♦ इसके अलावा, दल बदलने पर, पार्टी के आदेशों का उल्लंघन करने पर और दो या इससे अधिक साल की सजा होने पर भी संसद की सदस्‍यता चली जाती है। किसी सांसद ने अपने चुनावी हलफनामे में कोई गलत जानकारी दी है या फिर वह लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम का उल्लंघन करता है तो उसकी सदस्यता चली जाती है।

हैदराबाद : हिंदुओं को ’15 मिनट’ की धमकी देने वाले ’15 सेकेंड’ की दहाड़ से बौखलाए, माधवी लता के लिए हैदराबाद आईं नवनीत राणा, कहा- पता नहीं चलेगा ओवैसी कहाँ गए

हैदराबाद की BJP प्रत्याशी माधवी लता के समर्थन में 8 मई 2024 को महाराष्ट्र के अमरावती की सांसद नवनीत राणा ने जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने हिंदुओं को ’15 मिनट’ की धमकी दिए जाने का ऐसा जवाब दिया कि AIMIM बौखला उठी। जिस पार्टी के नेता अकबरुद्दीन ओवैसी ने कभी कहा था कि ’15 मिनट के लिए पुलिस हटा दो’, उस पार्टी के नेता अब नैतिकता की बात करने लग गए हैं।

नवनीत राणा ने कहा, “एक छोटा भाई है, एक बड़ा भाई है…छोटा (अकबरुद्दीन ओवैसी) बोलता है कि पुलिस को 15 मिनट हटा दो तो हम दिखाएंगे की क्या कर सकता है। छोटे को मेरा कहना है कि तेरे को 15 मिनट लगेंगे और हमको सिर्फ 15 सेकेंड लगेंगे। 15 सेकेंड पुलिस को हटाया तो छोटे और बड़े (असदुद्दीन ओवैसी) को पता नहीं लगेगा कि कहाँ से आया और कहाँ से गया। सिर्फ 15 सेकेंड लगेंगे।”

राणा के इस बयान की वीडियो क्लिप जगह-जगह वायरल है। AIMIM के लोग इस बयान से काफी आहत कहे जा रहे हैं। वह इस बयान को लेकर राणा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। इस मामले में पार्टी प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा राणा का यह बयान आयोग के नियमों का उल्लंघन करता है क्योंकि इससे दो समुदायों के बीच तनाव हो सकता है।

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, अगर नवनीत जैसा भाषण वारिस पठान देते तो वो जेल की सलाखों के पीछे होते। अकबरुद्दीन ओवैसी ने 15 मिनट पुलिस हटा दो वाले बयान के बाद खुद सरेंडर किया था। वो 40-42 दिन जेल में रहे थे। दस साल उन्होंने अदालत में लड़ाई लड़ी और बरी हुए। चुनाव आयोग नवनीत राणा पर कब कार्रवाई करेगी और कब उन्हें जेल भेजेगी। आए दिन मुसलमानों के विरोध में बयान दिए जाते हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती।

साल 2013 में अकबरुद्दीन ओवैसी ने ’15 मिनट हटा लो पुलिस को’ वाला विवादित बयान दिया था। अपने भड़काऊ बयान में उन्होंने कहा था, “अगर 15 मिनट के लिए पुलिस हटा दी जाए तो हम (मुसलमान) 100 करोड़ (हिंदुओं) को खत्म कर देंगे।” इस भड़काऊ बयान को सुनने के बाद उनपर आईपीसी की धारा 120 बी और 153ए व अन्य धाराओं के तहत लंबा केस चला था। 2022 में उन्हें इस मामले में जाकर बरी किया गया था। बाद में उन्होंने जेल से निकलकर अपने ऊपर भड़काऊ बयानबाजी करने वाले आरोपों को खारिज करने की कोशिश की थी।

हैदराबाद : वाह श्रीराम जी कल तक हिन्दू देवी-देवताओं के लिए अभद्र बोलने वाले अकबरुद्दीन को बड़े भाई असदुद्दीन ओवैसी के साथ पहली बार मंदिर में माथा टेकने और पीत पटका गले में डालने को कर दिया मजबूर

वाह रे चुनाव तेरी बलिहारी! अपने असद्दुदीन ओवैसी इस बार ऐसे फंसे कि हैदराबाद से बाहर निकलना ही भूल गए। माधवी लता भारी पड़ेगी यह तो तय था। लेकिन इतनी भारी पड़ जाएंगी कि ओवैसी को मंदिर की चौखट पर जाकर माथा टेकना पड़ेगा, पुजारी द्वारा पहनाया गया पीत पटका गले में डालना पड़ेगा, ऐसा किसी ने नहीं सोचा था। हालाँकि ओवैसी ने माधवी द्वारा तमंचा पर तीर चढ़ाकर छोड़ने को नूपुर शर्मा की तरह विवादित बनाने की बहुत कोशिश की, लेकिन जो ड्रामा किया था जनता के सामने। यहाँ भी ओवैसी की बैरिस्टरी फेल हो गयी।

कुछ महीने पहले संपन्न हुए विधान सभा चुनाव में बीजेपी को 7 सीटें ज्यादा मिली तो ओवैसी की पार्टी अपनी उतनी ही सीटें ले पायी। बीजेपी को 13.90% तो ओवैसी की पार्टी को 2.92 %वोट मिले। हैदराबाद संसदीय क्षेत्र में मुस्लिम आबादी है 60% और हिन्दू 40 प्रतिशत।

यह उन सभी सनातनी विरोधियों को आंख खोल कर देखना चाहिए। चुनाव परिणाम चाहे कुछ भी हो, लेकिन जो कल तक हिन्दू देवी-देवताओं को मंचों से अपमानित करता हो, आज मंदिर में जाकर माथा टेके, इसे श्रीराम की महिमा नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे। फिर भी राममंदिर का विरोध। फिर प्राण प्रतिष्ठा के दौरान लिखा था कि प्रभु श्रीराम का मंदिर केवल अयोध्या की नहीं बल्कि समस्त विश्व की दशा और दिशा बदलेगा। मुस्लिम देशों ने भी प्राण प्रतिष्ठा को लाइव दिखाया।


बीजेपी प्रत्याशी माधवी लता संगीत, कला और चिकित्सा जगत में एक बड़ा नाम हैं। मुस्लिम समुदाय में भी उनकी गहरी पैठ है। जाहिर है ओवैसी को वे इतनी जबरदस्त टक्कर दे रही हैं कि ओवैसी को राहुल से संपर्क कर कांग्रेस के मुस्लिम प्रत्याशी को रास्ते से हटाना पड़ेगा। कल तो हद ही हो गई, जब पंद्रह मिनट पुलिस हटा लो वाला विवादित चर्चित बयान देने वाले अपने भाई को साथ लेकर वे जीवन में पहली बार मंदिर जा पहुंचे। इस चुनाव में बहुत कुछ ऐसा हो रहा है जो आश्चर्यचकित करता है। कल कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री और प्रवक्ता राधिका खेड़ा को कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता छोड़नी पड़ी। उनका दोष इतना था कि वे अपने परिवार सहित अयोध्या में राम मंदिर के दर्शन करने पहुंच गईं। लौटी तो छत्तीसगढ़ पार्टी कार्यालय में उनसे मारपीट की गई। राधिका का आरोप है कि उन्हें कमरे में बंद कर प्रताड़ित किया गया। अयोध्या जाने के लिए उनकी क्लास ली गई। तंग आकर राधिका ने पार्टी छोड़ दी। उनसे पहले गौरव वल्लभ और रोहन गुप्ता जैसे प्रवक्ता त्यागपत्र दे चुके हैं। प्रमोद कृष्णम जैसे प्रवक्ता भी इसी कारण गए। अरविंदर सिंह लवली तो अध्यक्ष पद छोड़कर बीजेपी में ही शामिल हो गए। अयोध्या न जाने का फैसला कितने कांग्रेसियों की विदाई करा गया, सबको पता है। यही कांग्रेस समेत सनातन विरोधियों को पतन की ओर धकेल दिया है। विश्व चर्चित चाणक्य ने उचित ही कहा था कि किसी विदेशी और उससे जन्मे बच्चों को सत्ता नहीं देनी चाहिए।
इस चुनाव में अब देखिए न राजनैतिक दलों में भगदड़ मची है। संजय निरुपम शिंदे शिवसेना से जा मिले हैं, राज ठाकरे बीजेपी से। ना ना करते प्यार का एक उदाहरण तो हाल ही में देश ने देखा। ना ना करते राहुल अमेठी के बजाय रायबरेली जा पहुंचे। लड़ सकने वाली न खुद लड़ीं और न ही लड़ने को तैयार पतिदेव को लड़ने दिया। बहुत कुछ नया हुआ है और हो रहा है इस चुनाव में। अब देखिए न राजनैतिक दलों में भगदड़ मची है। संजय निरुपम शिंदे शिवसेना से जा मिले हैं, राज ठाकरे बीजेपी से।
जो भी हो चुनाव पूरी तरह मोदी के इर्द गिर्द घूम रहा है। इसके जिम्मेदार सनातन -चाहे वह किसी भी धर्म/मजहब से हो -विरोधी हैं। जो नेता जनता और समय की गति न समझ पाए वह किसी दुकान पर नौकर के योग्य नहीं। वह तो दांव ओछा पड़ गया वरना कमलनाथ और नकुलनाथ भी बीजेपी की ड्योढ़ी पर पहुंच ही गए थे। बेचारे सचिन पायलट ही गुमनामी के अंधेरे भोग रहे हैं। लकीरें इतनी बड़ी खींची गई हैं कि मिलकर मैदान में उतरने के बावजूद कुछ लकीरें तो दिखाई भी नहीं पड़ रही। कुछ धुंधली लकीरें जरूर हैं जिन से होते हुए विपक्षी राजनीति की गाड़ी आगे बढ़ रही है। इस सब के बावजूद मौजूदा चुनाव बेहद उलझा हुआ है। इतनी गिरहें बंधी हुई हैं कि खोलने में वक्त लग रहा है।

ओवैसी की जुबान बेलगाम क्यों है? मियां याद रखो, मोदी हिटलर होते तो मुसलमानों को फ्री राशन न देते ; ओवैसी यहूदियों से तुलना कर बेगुनाह मुसलमानों को बदनाम मत करो

सुभाष चन्द्र

कैसे लोकतंत्र को भोग रहा है विपक्ष जो जी भर के मोदी को गाली बकता है और फिर भी कहता है मोदी तानाशाह है जिसने हमारी बोलने की आज़ादी छीन ली है। 

अब ओवैसी पगलाया है जो कह गया कि मोदी हिटलर है और आज मुसलमानों की हालत हिटलर राज में यहूदियों जैसी है; ओवैसी और कहता है कि मुसलमान सबसे गरीब है।  

लगता है ओवैसी मियां कुछ पगला गए हैं। अगर मोदी हिटलर हैं और मुसलमानों की हालत यहूदियों जैसी है तो आज तक 10 साल में मोदी ने कितने मुस्लिमों को जहरीले गैस चैंबरों में डाल कर मारा है ऐसी बकवास करना बहुत आसान है ओवैसी मियां मगर इसका क्या मतलब है वह तुम खुद भी नहीं बता सकते 

अगर मुसलमानों की हालत यहूदियों जैसी है इसलिए 'सर तन से जुदा' गैंग हिन्दू कन्हैया लाल तेली का क़त्ल कर देता है। Vote jehad बोल पा रहा है। नवनिर्मित राम मंदिर को तोड़ने की बात बोलता है।  

तुम मुस्लिमों को विक्टिम बता रहे हो तो फिर यह भी बताओ कि मुस्लिम अगर यहूदी जैसे हैं तो यहूदियों के साथ आज हमास, हिज़्बुल्लाह, हुती और ईरान क्या कर रहे हैं, उनका वश चले तो सारे यहूदियों को वो गैस चैंबरों में डाल कर ख़त्म कर दें

ओवैसी देखो इस वीडियो को मुसलमानों की तुलना यहूदियों से कर किसको पागल बना रहे हो? क्यों बेगुनाह मुसलमानों को बलि का बकरा बनाने पर तूले हो? तुम्हारे जैसे फिरकापरस्तों ने बेगुनाह मुसलमानों को बदनाम किया हुआ है। यहूदियों से तुलना करते शर्म नहीं आयी? 

 

लेखक 
चर्चित यूटूबर 
ओवैसी कह रहे हैं कि देश में सबसे गरीब मुसलमान हैं लेकिन इसके लिए जिम्मेदार कौन है और कौम ने उनकी गरीबी को दूर करने के लिए क्या किया गरीबी होते हुए भी बच्चे पैदा करते रहने का क्या मतलब अल्लाह की देन बता कर लेकिन  दंगे करने में वो आगे रहते हैं और सरकारी संपत्ति जलाना अपना फर्ज समझते हैं, आज देश में मस्जिद 3 लाख हो गई जो 1947 में 3000 हजार थी ये “गरीब मुसलमानों” ने कैसे बढ़ा ली  

गरीब और अमीर हर कौम में होते हैं लेकिन अन्य कौमों के “गरीब” देश की संपत्ति को आग लगाना अपनी ड्यूटी नहीं समझते और उनके अमीर देश के खजाने में योगदान देते हैं जिसका लाभ आज मुस्लिम भी उठा रहे हैं

अमीर मुसलमान उन गरीब मुसलमानों को दंगा करने, पत्थरबाजी करने के लिए ट्रेन करते हैं कश्मीर में पत्थरबाजों की यही कहानी थी कि सब बड़े नेताओं के बच्चे विदेशों में पढ़ते हैं और गरीब मुसलमानों को 500 रुपये देकर सेना पर हमला करवाते थे यदि मुसलमान यहूदियों की तरह प्रताड़ित हैं तो रोहिंग्या और बांग्लादेशी भारत में क्यों रहना चाहते हैं

ओवैसी मियां, हिटलर कौन, यह पहचानो हिटलर तुम्हारा भाई है जिसने कहा कि 15 मिनट के लिए पुलिस हटा दो तो हम 100 करोड़ हिंदुओं को खत्म कर सकते हैं कश्मीर में मस्जिदों से ही ऐलान किए गए कि सभी मर्द अपनी औरतें छोड़ कर कश्मीर से चले जाएं जरा बताओ, ओवैसी इसे क्या कहते हैं ये होती है हिटलरशाही?

मुस्लिम लीग पाकिस्तान ले कर पाकिस्तान चली गई लेकिन मुस्लिम लीग फिर भी देश में मौजूद है और उसी एजेंडे पर काम कर रही है याद है न केरल से मुस्लिम लीग ने धमकी दी थी कि हिन्दुओं को मंदिरों के बाहर काट कर लटका देंगे और हनुमान चालीसा भी नहीं पढ़ सकोगे 

ओवैसी कहते हैं कि रजाकार पाकिस्तान चले गए लेकिन सत्य यह है कि जाने वालों से भी बड़े भारत में और पैदा हो गए

आज भी मौका मिले तो अनेक  मुसलमान मोहम्मद बिन कासिम, गौरी, गज़नी, खिलजी, बाबर, औरंगजेब और टीपू सुल्तान बन सकते हैं तभी तो 2047 तक गज़वा ए हिन्द की तैयारी है

मोदी से मुसलमान फ्री राशन लेंगे, फिर भी ओवैसी मोदी को हिटलर कहता है कोई हिटलर ऐसे किसी को फ्री राशन नहीं देता और ओवैसी मियां, मोदी हिटलर होता तो तुम इतना बोलने की हिम्मत करते तो “गैस चैम्बर” में फ़ेंक दिए जाते

इसलिए ही पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के अध्यक्ष रमेश सिंह अरोरा ने महाराजा रणजीत सिंह की बरसी पर भारत से पाकिस्तान जाने वाले श्रद्धालुओं से कहा है कि अपने साथ कम से कम 10 किलो आटा लेकर आएं क्योंकि पाकिस्तान में आटा 800 रुपए किलो है जो मोदी से मुसलमान फ्री में ले रहे हैं

ओवैसी अगर तुझे 6 दिसंबर याद रहेगी, तो सनातनियों को 4000+ तारीखें याद रहेंगी, तुम्हारी हैदराबाद से बाहर पूरे तेलंगाना के 1/10 में भी चुनाव लड़ने की हैसियत नहीं।

सुभाष चन्द्र

श्री राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हो गई, अयोध्या में उस दिन शांति रही लेकिन रामलला के लिए सदा सजग रहना होगा, मंदिर की निरंतर सुरक्षा के प्रबंध करने होंगे क्योंकि देश को आग लगाने वालों की कमी नहीं है। 

एक तरफ कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं ने प्राण प्रतिष्ठा का निमंत्रण ठुकरा दिया लेकिन जिस समय यह कार्यक्रम होना था, ठीक उसी समय राहुल “कालनेमि” असम के नौगांव जिले में वैष्णव संत श्रीमंत शंकरदेव के जन्मस्थान मंदिर में जाने की जिद पकड़े हुए था जिसकी अनुमति हेमंता विश्व शर्मा सरकार ने कानून व्यवस्था की स्तिथि में संभावित अड़चन का हवाला देकर नहीं दी और तब “कालनेमि” पूछता है कि अब क्या मोदी तय करेंगे कि मंदिर कौन जाएगा? अगर राहुल कोट पर जनेऊ पहनकर जाते, शायद कोई नहीं रोकता। असली बात तो यही कि राहुल ने कोट पर जनेऊ नहीं पहन रखा था। 

लेखक 
मोदी तय नहीं करता कौन मंदिर जाएगा मगर राहुल “कालनेमि” तूने तो MK Stalin के साथ मिलकर तमिलनाडु में तय कर दिया कि हिन्दू मंदिर में पूजा नहीं कर सकते जब अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा होनी थी तुम इटली के इतने बड़े तानाशाह “मुसोलिनी” हो गए हमारे देश में रह कर

मोदी ने कब तय किया मंदिर कौन जाएगा मगर इटली के किसी “...” को मंदिर से क्या काम हो सकता है यह तय करने का अधिकार उस गधे को भी तो नहीं दिया जा सकता यह कैसे हो सकता है कि जिस मंदिर में जाने का निमंत्रण तुम्हे दिया जाए वहां तो जाओ न और जाने की अनुमति नहीं है वहां जाकर कलेश करोगे। दूसरे, ईसाई कब से मंदिर जाने लगे। 

उधर ओवैसी भड़काने में लगा है मुसलमानों को और कह रहा है कि हमें 6 दिसंबर हमेशा याद रहेगी ओवैसी मियां, 6 दिसंबर तो 30 साल पुरानी है, हिन्दुओं को 4000+ तारीखें हमेशा याद रहेंगी। खुदाई में मिले मंदिर के अवशेषों को छुपाकर हिन्दुओं के साथ छल कर मुसलमानों को पागल बनाकर अपनी तिजोरियों को भरने वालों को पुरुषोत्तम श्रीराम कभी माफ़ नहीं करेंगे। इस बात को सभी सनातन विरोधी ध्यान रखे। दूसरे, अपने मुस्लिम समुदाय के बीच सिर्फ मुस्लिम हितों की बात करते हो और हिन्दुओं के बीच आकर दलितों की बात करते करने को दोगलापन ही कहा जाएगा। शायद यही कारण है कि तुम और तुम्हारी पार्टी तेलंगाना के किसी कुएं के मेंढक से कम नहीं, यानि हैदराबाद से बाहर पूरे तेलंगाना में चुनाव की लड़ने की हैसियत नहीं। अभी पिछले 3 महीने में जो मस्जिदें इज़रायल ने गाज़ा में ढेर की हैं, पहले उन्हें बनवा कर आओ चीन ने हज़ारों मस्जिदें बर्बाद कर दी, उनके लिए किसी में बोलने की हिम्मत नहीं बल्कि कहा जाए औकात नहीं। 

ओवैसी आग से खेलने की कोशिश कर रहा है, अगर ओवैसी को एक 6 दिसंबर याद रहेगी तो हिन्दुओं को अपने आप 4000 तारीखें याद आ जाएंगी जब 4000 मंदिर तोड़ कर मस्जिदें बनाई गई थी हिन्दुओं को भी 15 अगस्त, 1947 याद रहेगा जब तुम्हारे लोगों ने 20 लाख हिन्दुओं के शवों पर पाकिस्तान बनाया था भारत के टुकड़े करके 

ओवैसी को याद रहे, अब 1947 नहीं है, आग लगाने की कोशिश मत करे ओवैसी कहता है मुस्लिमों को केवल अल्लाह से डरना चाहिए लेकिन किस मुल्क के अल्लाह से डरना चाहिए यह भी बताए क्योंकि हर मुल्क का अल्लाह अलग है, हिन्दुस्थान का अलग है, पाकिस्तान, ईरान, इराक, बांग्लादेश, सऊदी अरब और UAE सभी का अलग है

श्री राममंदिर ने विपक्ष का जातिकार्ड ध्वस्त कर दिया है आज लाखों की संख्या में रामलला के दर्शन को अयोध्या पहुंचे लोग हर जाति के खड़े हैं, हर धर्म और संप्रदाय के हैं और हर कोई मोदी का धन्यवाद कर रामलला को देखने को लालायित है कैसे खड़ी करोगे ऐसे लोगों में जातपात की दीवारें अपने वोट साधने के लिए यह एक ऐसा सागर है जिसमें देश भर की सभी नदियां आकर जैसे मिल रही हों

ममता बनर्जी दूसरी तरफ कल सदभाव यात्रा निकाली जब प्राण प्रतिष्ठा हुई रामलला की जैसे रामलला देश में सदभाव बिगाड़ रहे हों ममता का सदभाव देखिए जो खुले आम धमकी दे रही थी कि “बीजेपी की मदद मत करिए, आप में से कोई भी बीजेपी को समर्थन करेगा। अल्लाह की कसम कोई भी आपको माफ नहीं करेगा मैं आपको माफ नहीं करूंगी। जो काफिर हैं वो डरते हैं, जो लड़ते हैं वो जीतते हैं

ऐसी बातें कह कर ममता सद्भावना पैदा करेगी या आग लगाएगी ऐसा कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि यह भाषा बता रही है कि ममता ने कलमा पढ़ लिया है

ममता. महबूबा, फारूक, ओवैसी, सोनिया, लालू, अखिलेश राहुल और स्टालिन कोई भी हों, देश में शांति होती देख नहीं सकते इनसे सावधान रहना होगा

तेलंगाना : एससी कम्यूनिटी के बाद अब कपड़ा धोने और सैलून चलाने वाले मुस्लिमों को फ्री बिजली, चुनाव से पहले ओवैसी की डिमांड मुख्यमंत्री KCR ने पूरी की

तेलंगाना में कपड़े धोने वाले और नाई का काम करने वाले मुस्लिमों को हर माह 250 यूनिट बिजली मुफ्त दी जाएगी। तेलंगाना के मुख्यमंत्री और भारत राष्ट्र समिति के मुखिया के. चंद्रशेखर राव (KCR) ने इसको आदेश जारी किया है।

इस तरह की छूट अब तक एससी कम्यूनिटी के लोगों को हासिल थी, लेकिन हैदराबाद के सांसद और एआईएमआईएम के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी के निवेदन पर राज्य सरकार ने मुस्लिमों के लिए भी ये छूट जारी कर दी है।

कांग्रेस ने भी किया है 200 यूनिट बिजली का वादा

केसीआर सरकार ने ये आदेश कांग्रेस के उस चुनावी वादे को देखते हुए जारी किया है, जिसमें कांग्रेस ने तेलंगाना में सरकार बनने की सूरत में 200 यूनिट मुफ्त बिजली की घोषणा की है। कांग्रेस ने इसके लिए गृह ज्योति योजना चलाने का वादा किया है।
हालाँकि, केसीआर सरकार ने अब कपड़ा धोने वाले और नाई का काम करने वालों के लिए इस योजना को लागू कर दिया है। ये लोग चाहे एससी वर्ग के हों या मुस्लिम, इसका लाभ दोनों को मिलेगा।
सरकार की ओर से बताया गया है कि राज्य सरकार की ओर से एससी कम्यूनिटी को दी जा रही सुविधाओं का AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने समर्थन किया है। ओवैसी ने ठीक वैसी ही सुविधाओं की माँग मुस्लिम वर्ग के लोगों के लिए भी की थी, जिसे मुख्यमंत्री केसीआर ने मंजूर कर लिया है।
इस बारे में राज्य सरकार के मुख्य सचिव और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के कमिश्नर ने आदेश जारी किया है। सरकार इस बारे में बाकी जानकारियाँ बाद में साझा करेगी, जिसमें योजना के लाभार्थियों की योग्यता और शर्तों के बारे में जानकारी दी जाएगी।

तेलंगाना में त्रिकोणीय मुकाबला

इस साल के आखिर तक तेलंगाना में विधानसभा चुनाव होने हैं। केसीआर ने राज्य में किसी भी गठबंधन से इनकार कर दिया है। उसका सीधा मुकाबला कांग्रेस और भाजपा से होगा। वहीं, एआईएमआईएम केसीआर की पार्टी के साथ ही पहले की तरह चुनाव लड़ेगी।
राज्य विधानसभा के चुनाव अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए बड़ी भूमिका तैयार करेंगे, क्योंकि साल 2019 के चुनाव में केसीआर की पार्टी लोकसभा चुनाव में 11 से घटकर 9 सीटों पर आ गई थी।

‘हैदराबाद में 1.4 करोड़ हिंदुओं की हड्डियाँ मिलेंगी’: रजाकारों की धमकी पर डॉ अंबेडकर ने दलितों को कहा- इस्लाम की ओर नहीं जाना, मुस्लिम लीग के मुस्लिमों पर विश्वास नुकसानदेह

निजाम उस्मान अली और डॉक्टर अंबेडकर (साभार: न्यूज18/एबीपी)
आज 17 सितंबर है यानी ‘हैदराबाद मुक्ति दिवस’। आज ही के दिन 1948 में निजाम के चंगुल से निकालकर हैदराबाद का भारत में विलय किया गया था। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह हैदराबाद में स्थित परेड ग्राउंड में गए और निजाम की सेना और रजाकारों (निजाम के शासन के सशस्त्र समर्थक) के खिलाफ लड़ने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।

15 अगस्त 1947 में देश को आजादी मिलने के बाद भी निजाम हैदराबाद को एक स्वतंत्र मुल्क बनाने की कोशिश में था। आखिरकार हैदराबाद के निजाम हैदराबाद के निजाम मीर उस्मान अली खान ने 3 जून 1947 को फरमान जारी कर हैदराबाद को आजाद मुल्क घोषित कर दिया था।

जब हैदराबाद को भारत में मिलाने की बातचीत चल रही थी, तब हैदराबाद के निजाम मीर उस्मान अली खान ने भारत में विलय के आग्रह को खारिज कर दिया था। उसे रजाकारों के नेता कासिम रिजवी ने भरोसा दिया था कि हैदराबाद को मिलाने के लिए भारत किसी तरह की सैनिक कार्रवाई करता है तो उसके नेतृत्व में रजाकार भारती सेना का मुकाबला करेंगे।

भारतीय नेतृत्व को डराने के लिए कासिम के नेतृत्व में क्रूर रजाकारों और निजाम के सैनिकों ने राज्य के हिंदुओं पर जुल्म ढाना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, कासिम रिजवी ने धमकी दे डाली कि अगर भारत ने उस पर किसी तरह सैनिक कार्रवाई करने की कोशिश की तो उसे 1.40 करोड़ हिंदुओं की हड्डियों एवं राख के अलावा कुछ नहीं मिलेगा। वीपी मेनन ने अपनी किताब ‘द इंटीग्रेशन ऑफ स्टेट्स’ में इसका जिक्र किया है।

रजाकारों के अत्याचारों को देखतेे हुए तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने 13 सितंबर 1948 को ऑपरेशन पोलो शुरू किया और 17 सितंबर को हैदराबाद को भारत में मिला लिया। पाँच दिनों की कार्रवाई में 1373 रजाकार और हैदराबाद रियासत के 807 जवान मारे गए। वहीं, भारतीय सेना के 66 जवान भी वीरगति को प्राप्त हो गए।

अंत में निजाम और कट्टरपंथी मुस्लिमों के संगठन रजाकारों ने सरेंडर कर दिया। इसके बाद रिजवी को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया और मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन पर प्रतिबंध लगा दिया गया। लगभग एक दशक तक जेल में रखने के बाद कासिम रिजवी को इस शर्त पर रिहा कर दिया गया कि वह 48 घंटों में पाकिस्तान चला जाएगा। रिजवी को पाकिस्तान ने अपने शरण दे दी थी।

हैदराबाद मुक्ति आंदोलन को लेकर डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने अपने स्पष्ट विचार रखे थे। उन्होंने कहा था कि निजाम के अत्याचारी शासन में रहने वाले लोगों ने निजाम के खिलाफ के बड़े आंदोलन को शुरू किया। इसमें कई हीरो ने अपने बलिदान दिए। डॉक्टर अंबेडकर के अलावा, शेड्यूल कास्ट फेडरेशन ने भी निजाम का खुलकर विरोध किया था।

उस समय फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष भाऊसाहेब मोरे ने दलित समुदाय को लेकर निजाम के खिलाफ पम्फलेट बाँटा था। उसमें कहा गया था, निजाम को उखाड़ फेंका जाना चाहिए और उसकी जगह एक लोकतांत्रिक सरकार बनाई जानी चाहिए। यह अंबेडकर के हर अनुयायी की नीति होनी चाहिए। दलितों को रजाकारों के साथ भी शामिल नहीं होना चाहिए।” यहाँ तक कि दलित नेता मोरे ने दलितों को मुस्लिम इलाके में भी जाने से मना किया था।

डॉक्टर अंबेडकर ने भी हैदराबाद के दलितों से अपील की थी। उन्होंने कहा था, “मैं एक ही बात कहना चाहता हूँ कि पाकिस्तान, निजाम और मुस्लिम लीग के मुस्लिमों पर विश्वास करना दलित समुदाय को नुकसान पहुँचाएगा। पाकिस्तान या हैदराबाद के दलितों को इस्लाम की ओर नहीं जाना चाहिए। उनका प्राथमिक उद्देश्य अपनी जीवन की सुरक्षा करना होनी चाहिए है।”

डॉक्टर अंबेडकर ने कहा कि हैदराबाद के दलित समुदाय को निजाम को स्वीकार नहीं करना चाहिए। डॉक्टर अंबेडकर ने आगे कहा था, “हमें भारत विरोधियों का साथ देकर अपने समुदाय के मुँह पर कालिख नहीं पोतना चाहिए।” डॉक्टर अंबेडकर के इस बयान का जिक्र धनंजय कीर ने अपनी पुस्तक ‘बायोग्राफी ऑफ डॉक्टर बाबासाहेब अंबेडकर’ में किया है।

निजाम के खिलाफ डॉक्टर अंबेडकर ने पहली रैली 30 दिसंबर 1938 को कन्नड़ जिले के मक्रणपुर में आयोजित की गई थी। औरंगाबाद की इसी रैली में भाऊसाहब मोरे ने डॉक्टर अंबेडकर के पहले ‘जय भीम’ का नारा दिया था। इस रैली ने हैदराबाद मुक्ति आंदोलन में बड़ी भूमिका निभाई थी।

दरअसल, निजाम दलितों पर जुल्म की सीमा पार कर चुका था। निजाम का शासन हिंदुओं के प्रति अत्याचार के कुख्यात हो चुका था और उसके शासन को लेकर लोगों को विद्रोह पनपने लगा था। इसके कारण निजाम ने शेड्यूल कास्ट फेडरेशन के कई नेताओं की हत्या करवा दी। इसके विरोध में दलित नेताओं के समर्थन में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर भी आए।

दलितों पर अत्याचार और उनके धर्मांतरण से बाबा साहेब को ठेस पहुँची। निजाम के शासन के अंतर्गत आने वाले मराठवाड़ा में दलितों की हालत और भी बदतर थी। दलितों के साथ बड़े पैमाने पर भेदभाव होता था और उन्हें शिक्षा से भी वंचित रखा गया था। डॉक्टर अंबेडकर और सरदार पटेल के प्रयास मराठवाड़ा निजाम के चंगुल से मुक्त हो गया। इसके बाद वहाँ बड़े पैमाने पर स्कूल-कॉलेज खुले।

ये वही मराठवड़ा है जिसकी मुक्ति का विरोध असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के नेता करते है। मराठवाड़ा मुक्ति दिवस पर AIMIM के सांसद तिरंगा फहराने के कार्यक्रम से भी अनुपस्थित रहे। यह वही AIMIM है, जो रजाकारों की MIM से संबंधित है और ओवैसी के पूर्वज इससे जुड़े थे। इस तरह दलितों से अंतर्मन से घृणा करने वाले राजनीति के लिए ‘जय भीम जय मीम’ की बात कर रहे हैं।


हैदराबाद : हॉस्टल में छात्र हिमांक बंसल को पीटा, लगवाए ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे: गुप्तांग पर लातें मारी

पीड़ित हिमांक बंसल और उसके कमरे में घुसकर मारपीट करता हुआ आरोपित (फोटो साभार: वायरल वीडियो का स्क्रीनग्रैब)
12 नवंबर, 2022 को सुबह से ही एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में हैदराबाद के ‘ICFAI फाउंडेशन फॉर हायर एजुकेशन (IFHE)’ के एक छात्र हिमांक बंसल को कॉलेज के अन्य छात्रों द्वारा द्वारा पीटते हुए ‘अल्लाहु अकबर’ का नारा लगाने के लिए मजबूर किया जा रहा था।

आज भारत में इस्लामिक कट्टरपंथी शायद अपनी सीमा को पार कर रही है। हैदराबाद में पैंगबर को लेकर निजी चैट सार्वजनिक होने पर हिंदू छात्र को 20 लोगों ने बेरहमी से पीटा। आरोप है कि मुस्लिम लड़कों ने पीटकर लगवाए अल्लाह हू अकबर के नारे। प्राइवेट पार्ट पर लात मारी, वीडियो बनाया और जान से मारने की धमकी दी। कहाँ है #mob lynching, #intolerance, #not in my name,गंगा-जमुनी तहजीब के ढोंगी नारे और संविधान की दुहाई देने वाले आदि गैंग कहाँ है? किसी बीजेपी शासित राज्य किसी मुस्लिम के अप्रिय घटना होने पर पिकनिक मनाने पहुँचने वाले छद्दम धर्म निरपेक्ष किस बिल में घुसे बैठे हैं? क्या इन सबके घरों में कोई मातम है, जो किसी की आवाज़ नहीं निकल रही। क्योकि पिटने वाला हिन्दू है और हैदराबाद भाजपा शासित नहीं।

यह हादसा हिन्दू-मुसलमान चिल्लाने वाले असुदुद्दीन ओवैसी के क्षेत्र की हैं और उनकी आवाज़ तक नहीं आयी, साबित करता है उनका साम्प्रदायिकता चेहरा। टी राजा के विरुद्ध बढ़-बढ़कर चीखने-चिल्लाने वाले ओवैसी क्यों चुप बैठे हैं? क्यों नहीं, इन जेहादियों के खिलाफ बोलते? डर है, कहीं मुस्लिम वोट बैंक हाथ से निकल जाए। भाजपा नेता अब चर्चा है कि जिस कॉलेज में यह घटना हुई है, इसकी मान्यता समाप्त कर ब्लैकलिस्ट किया जाए। ताकि अन्य कॉलेज भी ऐसी किसी भी अन्य दुर्घटना के प्रति सजगता बरते। और जिन उत्पादी छात्रों को कॉलेज से निष्कासित किया गया है, उन्हें ब्लैकलिस्ट किया, ताकि किसी अन्य कॉलेज में जाने पाएं। इतना ही नहीं, जिस लड़की के प्राइवेट मैसेज के कारण यह दुर्घटना हुई है, उस पर सख्त कार्यवाही होनी चाहिए। इन सबके बैंक खातों की जाँच भी जरुरी है।

सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो में छात्रों के एक गुट द्वारा छात्रावास के कमरे के अंदर हिमांक बंसल को पीटते और धमकाते हुए देखा जा सकता है। इस वीडियो में यह साफ दिखाई दे रहा है कि हिमांक कमरे में अकेला है और बाकी लोग मिलकर उसके गालों में चाँटे और शरीर के अन्य हिस्सों में पैरों से मार रहे हैं। मारपीट के दौरान हिमांक जिस बेड में बैठा हुआ दिख रहा है, उससे भी उसे नीचे फेंक दिया जाता है।

हमले के बाद, पीड़ित हिमांक बंसल ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। इस शिकायत में उसने कहा है कि कॉलेज ही एक छात्रा दीपाशा शर्मा ने उसे तीन साल छोटी उम्र की लड़की से दोस्ती करने को लेकर ‘Pedophile (बच्चों के प्रति यौन आकर्षण रखने वाला)’ बताया था। इसके बाद हिमांक ने अपने बचाव में दलीलें देते हुए कहा कि उसने अपने से तीन साल छोटी लड़की से यौन संबंध स्थापित करने के लिए दोस्ती नहीं की है।

                                              Times of India, हैदराबाद, 13.11.2022  

हिमांक बंसल द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत

अपनी बातों की पुष्टि करने के लिए हिमांक ने इस्लामी साहित्य का भी हवाला देकर बताया कि वह गलत नहीं है। इसके बाद दीपाशा ने हिमांक की बातों को कॉलेज के दूसरे छात्रों तक पहुँचा दिया।

हिमांक ने अपनी शिकायत में यह भी कहा है कि छात्रावास के कमरे में 15-20 लोगों ने घुसकर उस पर हमला किया और जबरन ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगवाए। हिमांक का आरोप है कि मारपीट करने आए लड़कों ने उसे निर्वस्त्र करने की भी कोशिश की। यही नहीं, आरोपितों ने उसे और उसके परिवार वालों को भी धमकी दी है। हिमांक ने अपनी शिकायत में अपने साथ हुए हादसे का जिक्र करते हुए सभी आरोपितों के बारे में विस्तार से बताया है।

पीड़ित हिमांक बंसल ने शिकायत के साथ मारपीट के वीडियो और फोटोग्राफिक सबूत भी पुलिस को सौंप दिए हैं। उसकी शिकायत के बाद, साइबराबाद पुलिस ने कहा है कि शंकरपल्ली पुलिस स्टेशन द्वारा 11 नवंबर 2022 को दोषियों के खिलाफ 307, 342, 450, 323, 506, आर/डब्ल्यू 149, आईपीसी और 2011 के रैगिंग निषेध अधिनियम के धारा 4 (I), (II), और (III) के तहत मामला दर्ज किया गया है।पुलिस द्वारा मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है। कॉलेज ने मारपीट में शामिल छात्रों के साथ-साथ हिमांक बंसल के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू कर दी है।

टी राजा सिंह फिर से गिरफ्तार, कहा- यह धर्मयुद्ध है, अब हिंदू पीछे नहीं हटेगा

हैदराबाद के गोशामहल (Goshamahal, Hyderabad) से भाजपा के निलंबित विधायक ठाकुर राजा सिंह को तेलंगाना पुलिस ने उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया है।
चर्चा है कि राजा सिंह नबी के विरुद्ध बयान पर नहीं, पुराने केस में बंद किया गया है। 

तेलंगाना पुलिस ने बताया, “राजा सिंह को पीडी एक्ट (Preventive Detention Act) के तहत हिरासत में लिया गया। रिकॉर्ड बताते हैं कि उसके खिलाफ दर्ज 101 आपराधिक मामलों में से वह 18 सांप्रदायिक अपराधों में शामिल था। मंगलहाट पुलिस ने उस पर पीडी के आदेश को अमल में लाया, उसे सेंट्रल जेल, चेरियापल्ली में बंद किया जा रहा है।”

पीडी एक्ट एक ऐसा कानून है, जिसके तहत पुलिस किसी को आदतन और कुख्यात अपराधी बताकर एक साल तक के लिए जेल में बंद रख सकती है। इस कानून का सबसे विवादास्पद हिस्सा वह है, जिसमें इस ऐक्ट के तहत गिरफ्तार व्यक्ति को संविधान के अनुच्छेद 22 (1) और 22 (2) के तहत मिला संरक्षण उस व्यक्ति को नहीं मिल पाएगा।

इसके पहले राजा सिंह को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उन्हें बेल मिल गई थी, जिसका मुस्लिमों द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध किया जा रहा है। वहीं, राजा सिंह अपनी गिरफ्तारी की आशंका पहले ही जाहिर कर दी थी।

ठाकुर राजा सिंह ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर करते हुए कहा, “मुझे सूचना मिली है कि मेरे पुराने केसों को जोड़कर मुझे परेशान कर सकती है पुलिस। कल मुख्यमंत्री कार्यालय में एक मीटिंग हुई और मुख्यमंत्री जी को भी अब Ego आ गया कि किसी भी हालत में राजा सिंह को जेल में डाला जाए या तड़ीपार किया जाए।”

वीडियो में विधायक सिंह ने आगे कहा, “मैं मुख्यमंत्री जी को बताना चाहूँगा कि ना हम गोली से डरते हैं, ना हम फाँसी से डरते हैं, ना ही हम किसी जेल से डरते हैं। ये धर्मयुद्ध है। कोई हमारे भगवान को गाली दे, ये हमें बर्दाश्त नहीं। जो धर्म को ललकारेगा, जिस भाषा में वो समझेगा उस भाषा में राजा सिंह ही नहीं, भारत का हर हिंदू उस दुश्मन का जवाब देगा।”

कांग्रेस नेता और कट्टरपंथियों का सरकार पर दबाव

उधर इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी में विधायक राजा सिंह को जमानत मिलने के बाद गुरुवार (25 अगस्त 2022) को भी हैदराबाद में मुस्लिमों का विरोध प्रदर्शन जारी रहा। मुस्लिमों के एक समूह ने पुलिस कमिश्नर से मुलाकात कर विधायक को गिरफ्तार करने का दबाव डाला।
इसके पहले मंगलवार को उन्हें जमानत मिलने के बाद शहर के शालीबांदा में तो पुलिस के साथ प्रदर्शनकारियों की हिंसक झड़प हुई। इस दौरान ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाए गए। पुलिस वैन में भी तोड़फोड़ की गई। इसके अलावा बाजारों से दुकानें जबरन बंद कराने की, राजा सिंह के पोस्टर्स पर चप्पल मारने की, उनका पुतला जलाने की घटना भी प्रकाश में आई है।
राजा सिंह के बयान पर तेलंगाना कॉन्ग्रेस के सचिव राशिद खान ने आग लगाने की बात कही थी। उनका एक वीडियो सामने आया था, जिसमें राशिद खान को अल्लाह हू अकबर, नारा-ए-तकबीर, सर तन से जुदा नारे लगाने वाली भीड़ का समर्थन करते गया।

कथित पैगंबर पर राजा सिंह की टिप्पणी

22 अगस्त 2022 को ठाकुर राजा सिंह ने मुनव्वर फारूकी के विरुद्ध एक वीडियो बनाया था। इसमें उन्होंने इस्लाम पर बात करते हुए एक बुजुर्ग पर बात की थी, जिस पर मुस्लिमों ने कहा कि वो पैगंबर पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी है। इसके बाद शहर भर में प्रदर्शन हुए। मंगलवार सुबह पुलिस ने टी राजा को गिरफ्तार कर लिया था।
उधर उसी दिन दोपहर में बीजेपी ने उन्हें पार्टी से सस्पेंड किया। राजा सिंह को जब कोर्ट में पेश किया गया तो कोर्ट ने उन्हें 14 दिन न्यायिक हिरासत में भेजा। हालाँकि, अगले दिन उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद उन्हें जमानत मिल गई थी।

ओवैसी साहब अपने भाई को कब जेल भेजोगे?


राजा सिंह को भीड़तंत्र और जेहादियों के दबाव में PD Act के अंतर्गत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया और अब उनकी जमानत हाई कोर्ट से ही हो सकती है। लेकिन अब प्रश्न तेलंगाना पुलिस पर है कि 'सिर तन से जुदा' नारा लगाने वालों को असदुद्दीन ओवैसी के कहने पर क्यों छोड़ा? ओवैसी अपने भाई को कब जेल भेजोगे, जिसने हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान किया? पब्लिक मीटिंग में देवी-देवताओं के लिए अपमानित शब्द बोलने वाले को ओवैसी जेल भेजो और वही राजा सिंह के विरुद्ध लगाए नारे अपने भाई के विरुद्ध लगवाने की हिम्मत है?

पैगंबर के खिलाफ कथित रूप से विवादित टिप्पणी के मामले में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी तेलंगाना के विधायक टी राजा सिंह की गिरफ्तारी को लेकर अड़े हुए हैं। ओवैसी ने कहा है कि बीजेपी के विधायक ने जो वीडियो जारी करके इस्लाम के खिलाफ अपनी नफरत का इजहार किया, इससे सब लोगों को तकलीफ पहुंची है। इस्लाम में पैगंबर मुहम्मद हमारा दिल है, हम प्रदर्शन करते रहेंगे जब तक बीजेपी को जेल नहीं भेजा जाएगा।

सांसद असदुद्दीन ओवैसी जिस टी राजा सिंह को गिरफ्तार करने का मांग कर रहे हैं, उसे बाकायदा गिरफ्तार किया भी गया था। लेकिन कोर्ट में ये साबित होने की राजा सिंह ने किसी का नाम लेकर कोई बात नहीं कही, तो कोर्ट ने उसे छोड़ने का आदेश दे दिया। इससे मुस्लिम समुदाय के लोग नाराज हैं। साफ है ओवैसी उस नेता को गिरफ्तार करने की मांग कर रहे हैं जिसने पैगंबर के खिलाफ कुछ कहा ही नहीं है। लेकिन खुद अपने भाई अकबरुद्दीन ओवैसी की ओर से हिंदू देवी-देवताओं के बारे में दिए गए विवादित बयानों पर चुप्पी साध लेते हैं। देश के मुसलमानों में ये प्रचलन में है कि हिंदू धर्म में बारे में चाहे कुछ भी बोल दो लेकिन अपने धर्म की बात आए तो सर तन से जुदा का नारा देने लगते हैं। हिंदू धर्म के बारे में बयान देने वालों के खिलाफ ओवैसी की पार्टी के नेता कन्नी काट लेते हैं। ऐसे में सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि आपका भाई कब अंदर जाएगा।