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भारत नहीं, पाकिस्तान ने कनाडा में कराई आतंकी निज्जर की हत्या, आईएसआई ने एक तीर से दो निशाने साधे

कनाडाई प्रधानमंत्री ट्रूडो के झूठ शीशे की तरह साफ हो गए हैं। इंटेलिजेंस एजेंसी को इसके पुख्ता सुबूत मिले हैं कि खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या असल में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने कराई है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद अमेरिका की ओर से कनाडा को खुफिया जानकारी मुहैया कराई गई थी, लेकिन कनाडा ने जानकारी का कुछ और ही मतलब निकाल लिया। इसके बाद कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो के जरिए भारत पर निज्जर की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा दिया गया। खुफिया एजेंसी की मुताबिक निज्जर की हत्या में कनाडा स्थित आईएसआई के दो एजेंट राहत राव और तारिक कियानी का हाथ है। ये दोनों आतंकी भारत की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल हैं।

ट्रूडो कनाडा के प्रधानमंत्री या खालिस्तानी समर्थकों के प्रवक्ता हैं?
दरअसल, खालिस्तान का विवाद में आग में घी का काम कनाडाई प्रधानमंत्री ट्रूडो के बयान ने किया था। लेकिन यह पीएम नरेन्द्र मोदी का नया भारत है। भारत का अपमान या बदनाम करने वालों को करारा जवाब देकर सबक सिखाने में अब जरा-सी भी देर नहीं होती। यही वजह है कि बारह घंटे के अंदर ही कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को न सिर्फ झुकना पड़ा, बल्कि खालिस्तानी आतंकी पर अपने बयान के लेकर भारत को सफाई भी देनी पड़ी। ट्रूडो को अपनी गलतबयानी पर कहना पड़ा कि उनका मकसद भारत को उकसाने या तनाव बढ़ाने का नहीं, बल्कि निज्जर की हत्या पर भारत से सहयोग मांगना था। ट्रूडो के बयान को लेकर सोशल मीडिया पर लिखा गया कि ट्रूडो कनाडा के प्रधानमंत्री हैं या फिर खालिस्तानी समर्थकों के प्रवक्ता हैं? इस बीच भारत ने खालिस्तानियों के समर्थन पर कनाडा को करारा जवाब देते हुए कनाडाई उच्चायुक्त कैमरून मैके को 5 दिन में ही देश छोड़ने के लिए कह दिया था।

पाकिस्तान ने निज्जर की हत्या कराकर एक तीर से दो निशाने साधे

इंटेलिजेंस एजेंसी के मुताबिक पाकिस्तान ने निज्जर की हत्या करा करके एक तीर से दो निशाने साधे हैं। पहला उसने कनाडा और भारत के बीच दरार पैदा कर दी। दूसरा, उसने ड्रग्स तस्करी की कमाई पर पकड़ और मजबूद कर ली। दरअसल, आतंकी निज्जर इतनी महफूज जगह पर रहता था कि किसी अनजान व्यक्ति का निज्जर के पास पहुंचना नामुमकिन था। लेकिन दोनों हेंडलर उससे मिलते थे। इसी कारण जहां निज्जर के कोई करीब भी नहीं जा सकता, उस जगह उसकी हत्या हो गई। वह आईएसआई के समर्थन से ही खालिस्तानी एजेंडा चलाता था। आईएसआई की मदद से खालिस्तानी आतंकी और गैंगस्टर पंजाब में ड्रग्स तस्करी के गिरोह चला रहे हैं। कमाई का हिस्सा आतंकियों व आईएसआई को भी मिलता है। इस नेटवर्क पर आईएसआई की पकड़ ढीली होने से आतंकी अपनी मर्जी से पैसे का उपयोग करने लगे, इसी कारण निज्जर को रास्ते से हटाना उनके लिए जरूरी हो गया।

 निज्‍जर की हत्‍या आईएसआई की साजिश का नतीजा– अमेरिकी मीडिया

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर निज्‍जर की हत्‍या का आरोप लगाया था। ट्रूडो ने बिना किसी सबूत के भारत को अपने देश की संसद में दोषी बता दिया। लेकिन अमेरिकी अखबार न्यूयार्क टाइम्स (एनवाईटी) में जो जानकारी दी गई, उसके बाद से यह सारा मामला पेचीदा हो गया है। अखबार ने निज्‍जर की हत्‍या के वीडियो के हवाले से कुछ सनसनीखेज दावे किए हैं। वहीं अब यह कहा जा रहा है कि निज्‍जर की हत्‍या पाकिस्‍तान की इंटेलीजेंस एजेंसी आईएसआई की साजिश का नतीजा है। जुलाई 2020 में भारत ने उसे ‘आतंकवादी’ घोषित किया था। इस बात की भी संभावना है कि आईएसआई ने शार्प शूटर्स की मदद से निज्‍जर की हत्‍या करवाई। ऐसे में कनाडा में मौजूद आईएसआई के एजेंट्स को हत्‍या के लिए प्रयोग किया गया। इसके अलावा अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्‍ट की तरफ से भी वीडियो के हवाले से बताया जानकारी दी गई कि आतंकी निज्‍जर पर दो लोगों ने गोलियां बरसाई थीं।
भारत की मोस्ट वांटेड की सूची में शामिल दो आतंकियों पर हत्या का शक
काबिले जिक्र है कि इस साल 18 जून को ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में एक गुरुद्वारे के बाहर निज्‍जर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। निज्जर भारत से अलग एक खालिस्तानी देश की मांग करता आ रहा था। इंटेलिजेंस एजेंसी और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आईएसआई भारत को बैकफुट पर लाने के लिए निज्जर को खत्म करना चाहती होगी। उनके मुताबिक, राहत राव और तारिक कियानी कनाडा में आईएसआई के दो एजेंट्स हैं जो पाकिस्तानी एजेंसी के लिए सबसे ज्यादा काम कर रहे हैं। वे कथित तौर पर उन आतंकवादियों के भी हैंडलर हैं, जो भारत से आ रहे हैं और मोस्ट वांटेड की सूची में हैं। सूत्रों के मुताबिक, संभावित व्यावसायिक कारणों से और नए ड्रग पेडलर्स से अधिक फिरौती पाने के लिए, राव और कियानी निज्जर की हत्या के काम में शामिल हो सकते हैं।
आतंकी निज्जर के पड़ोसी हैं आईएसआई के कई पूर्व अधिकारी
यह भी जानकारी में आया है कि हरदीप सिंह निज्जर के पड़ोस में मेजर जनरल से लेकर हवलदार तक कई पूर्व आईएसआई अधिकारी रहते हैं। निज्जर को खत्म करने की साजिश में इन्हीं लोगों में से कुछ मदद भी ली जा सकती है, ताकि स्थानीय ड्रग कारोबार पर राव और कियानी का सीधा नियंत्रण हो सके। सूत्रों ने कहा कि निज्जर समय के साथ शक्तिशाली होता जा रहा था और स्थानीय कनाडाई समुदाय में भी लोकप्रियता हासिल कर रहा था। दूसरी ओर राहत राव, तारिक कियानी और अलगाववादी नेता गुरचरण पुन्नुन की तिकड़ी ड्रग और इमीग्रेशन बिजनेस को नियंत्रित करना चाहती थी। अपनी आय के प्रमुख स्रोत्र को बरकरार रखने के लिए वे इस ऑपरेशन में शामिल हुए। सूत्रों ने कहा कि वधावा सिंह और रणजीत सिंह नीता जैसे पाकिस्तान स्थित कम्युनिटी लीडर्स के साथ भी हरदीप सिंह निज्जर की निकटता भी आईएसआई के लिए एक समस्या थी।
87 देशों के सिखों तक खालिस्तान की मुहिम फैलाने की साजिश
खालिस्तान को लेकर खतरनाक मंसूबों वाली एक बड़ी बैठक सितंबर के पहले सप्ताह में अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में की गई। इस बैठक में दुनिया के चौदह देशों के 40 खालिस्तानी चरमपंथियों ने शिरकत की। केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में 87 देश में अपनी खतरनाक खालिस्तान मुहिम को बढ़ावा देने के लिए ‘मिशन सिख जॉइंट’ को आगे बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा हुई। बैठक में मौजूद चरमपंथियों ने तय किया कि खालिस्तान की आवाज उठाने और जनमत संग्रह में सिखों को शामिल करने के लिए जो खतरनाक कदम उठाने होंगे वे उठाए जाएंगे।
कनाडा में हिंदू फोरम की मांग, खालिस्तानी पन्नू पर लगे प्रतिबंध
हिंदू फोरम कनाडा ने खालिस्तानी आतंकी गुरुपतवंत सिंह पन्नू की तरफ से अल्पसंख्यक हिंदुओं को कनाडा छोड़ने की धमकी देने के मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग की है। फोरम के वकील पीटर थॉर्निंग ने आव्रजन मंत्री मार्क मिलर से पन्नू के कनाडा में प्रवेश पर पाबंदी लगाने का अनुरोध करते हुए पत्र लिखा है। थॉर्निंग ने मिलर को बताया है कि पन्नू की धमकियों के चलते कनाडाई हिंदू समाज भयभीत है। पन्नू के वीडियो की वजह से खासतौर पर स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले बच्चों पर असर पड़ रहा है। थॉर्निंग ने कहा कि भारत-कनाडा मित्र देश हैं। भारत ने पन्नू को आतंकी घोषित कर रखा है, ऐसे में कनाडा को भी पन्नू पर कार्रवाई करते हुए उसके संगठन सिख फॉर जस्टिस पर रोक लगाना चाहिए।
कनाडा में हो रहे भारत विरोधी और खालिस्तान समर्थक प्रदर्शन
केंद्र की मोदी सरकार शुरू से ही आतंकियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाए हुए है। केंद्र सरकार ने खालिस्तान समर्थक गुरपतवंत सिंह पन्नु को आतंकी घोषित कर रखा है। वो सिक्ख फॉर जस्टिस (एसएफजे) नामक संगठन कनाडा से चलाता है। पन्नु कनाडा में चल रहे भारत विरोधी प्रदर्शनों में कई बार शामिल हो चुका है। वो कई बार सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड कर भारतीयों और भारत सरकार को धमकियां देता है। दो दिन पहले ही पन्नु ने कनाडा में बसे हिन्दुओं को कनाडा छोड़ जाने की धमकी दी है। पन्नु ने ही खालिस्तान नामक देश भारत से अलग करने की मुहिम चलाई हुई है, जिसमें कनाडा में हजारों लोग जुड़े हुए हैं। उन्होंने खालिस्तान देश का अलग ही नक्शा भी जारी किया है। पन्नु को वहां शरण देने के संबंध में भारत सरकार अपनी आपत्ति कनाडा सरकार को दर्ज करवा चुकी है।
खालिस्तान के नक्शे में प्रदेश के इन सरहदी जिलों को किया शामिल
इतनी ही नहीं खालिस्तान का ऐसा एक नक्शा इन दिनों सोशल मीडिया पर फिर से वायरल है। इसमें भारत के कुछ राज्यों के कई जिले शामिल हैं।  इस नक्शे में राजस्थान के भी 10 जिलों को शामिल किया गया है। राजस्थान की बात करें तो नक्शे में पंजाब से सटे श्रीगंगानगर, अनूपगढ़, बीकानेर, जोधपुर, अलवर, खैरथल, भरतपुर, डीग, बूंदी और कोटा को दिखाया गया है। हालांकि हाल ही में बने अनूपगढ़, खैरथल और डीग जिले को अलग से मेंशन नहीं किया गया है। क्योंकि ये नक्शा कुछ पुराना है, तब ये जिले अस्तित्व में ही नहीं आए थे। खास बात ये है कि 2 साल पहले भी ये नक्शा सामने आया था। अब कनाडाई प्रधानमंत्री ट्रूडो के खुलकर खालिस्तानियों के समर्थन में आने के कारण खालिस्तान मूवमेंट बढ़ने के बाद एक बार फिर ये नक्शा चर्चा में है। इस नक्शे में पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली सहित उत्तरप्रदेश और राजस्थान के हिस्सों को दिखाया गया है।
खालिस्तानियों ने किया मंत्री पुत्र का अपहरण, भैरोसिंह सरकार ने बचाया था
पंजाब का पड़ोसी राज्य होने से राजस्थान में खालिस्तानी आतंक का खतरा पहले भी बना रहा है। वर्ष 1995 में इंदिरा गांधी के करीबी रह चुके केंद्रीय मंत्री और राजस्थान के दिग्गज नेता रामनिवास मिर्धा के बेटे राजेंद्र मिर्धा को खालिस्तानी आतंकियों ने फरवरी 1995 में किडनैप कर लिया था। उन्होंने राजेंद्र मिर्धा को छोड़ने के बदले जनवरी, 1995 में पकड़े गए खालिस्तान समर्थक भुल्लर को छोड़ने की मांग की थी। राजेन्द्र मिर्धा के अपहरण के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री भैंरोसिंह शेखावत सरकार ने कई टीमें इस केस के लिए गठित कीं। उनमें से एक इंटेलीजेंस टीम में शामिल रहे अफसर हुकुम सिंह के मुताबिक मिर्धा का अपहरण खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (केएलएफ) और अन्य 27-28 संगठनों से जुड़े लोगों ने किया था। जयपुर में हुए पुलिस एनकाउंटर में एक खालिस्तान समर्थक नवनीत सिंह कादिया मारा गया और राजेंद्र मिर्धा को सुरक्षित बचा लिया गया। एनकाउंटर में तीन खालिस्तानी समर्थक दया सिंह लाहौरिया, हरनेक सिंह भप और सुमन सूद भागने में कामयाब हो गए।
खालिस्तानी नक्शे में पाकिस्तानी पंजाब का जिक्र नहीं
खालिस्तान का जो नक्शा दिखाया गया है, उसमें भारतीय पंजाब से सटे हुए पाकिस्तानी पंजाब का जिक्र तक नहीं है। ये हैरान करने वाला इसलिए है कि क्योंकि पाकिस्तानी पंजाब भारतीय पंजाब से भी करीब 30 प्रतिशत बड़ा है। राजस्थान के जो जिले नक्शे में दिखाए गए हैं, खालिस्तानियों का दावा है कि उनमें खालिस्तान मूवमेंट से सहानुभूति रखने वाले कुछ लोग हैं। राजस्थान के श्रीगंगानगर, अनूपगढ़, बीकानेर, फलोदी, बीकानेर व जोधपुर सरहदी इलाके हैं। इनकी सरहद उत्तर में पंजाब और पश्चिम में पाकिस्तान से सटी हुई है। पाकिस्तान से सटी बार्डर पर अक्सर ड्रग्स व हथियारों की तस्करी के मामले सामने आते रहे हैं। कई बार बीएसएफ ने वहां ड्रोन, प्रशिक्षित कबूतर और बाज जैसे पक्षियों को पकड़ा है जो पाकिस्तान से भारत की तरफ आते हैं।
पहले केवल सरहदी जिले खालिस्तानी नक्शे में थे, अब पांच और शामिल
राजस्थान में पुलिस महानिदेशक रहे बी. एल. सोनी के मुताबिक 1990-92 के बीच पंजाब में खालिस्तानी आतंक चरम पर था। तब तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत ने 15 फरवरी 1992 को एसपी एंटी टेरेरिस्ट ऑपरेशन राजस्थान (कैम्प श्रीगंगानगर) पोस्ट बनाई थी। इसका ऑफिस श्रीगंगानगर में था और इसके पहले एसपी वो खुद थे। उन्होंने भास्कर को बताया कि तब जयपुर से वाहन, संसाधन, फोर्स, हथियार आदि श्रीगंगानगर भेजे गए। बाद में पंजाब में खालिस्तानी आतंक के खात्मे के साथ ही यह पोस्ट और यह कैम्प ऑफिस मर्ज हो गए। इसके बाद राजस्थान में एटीएस (एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाएड) बनाई गई। सोनी का कहना है कि खालिस्तानी आतंकी उस दौर में भी राजस्थान के सरहदी जिलों को अपने नक्शे में दिखाते थे। लेकिन अब तो बूंदी, कोटा, जोधपुर, अलवर व भरतपुर जैसे जिलों को खालिस्तान के नक्शे में दिखाया जा रहा है। इन जिलों को उस दौर के खालिस्तानी नक्शे में नहीं दिखाया गया था।

कनाडा : हिंदू मंदिर पर हमला: दीवार पर लिखा- मोदी को आतंकवादी घोषित करो, हिंदुस्तान मुर्दाबाद

  कनाडा में हिंदू मंदिर पर एक बार फिर हमला, दीवारों पर लिखे भारत विरोधी नारे (फोटो साभार: @WindsorPolice)
कनाडा (Canada) में हिंदुओं के खिलाफ घृणित अपराध थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। यहाँ एक बार फिर हिंदू मंदिर को निशाना बनाया गया है। ओंटारियों प्रांत के विंडसर शहर के नॉर्थवे एवेन्यू के 1700 ब्लॉक में स्थित हिंदू मंदिर (Hindu Temple) पर नकाबपोश हमलावरों ने 5 अप्रैल 2023 (स्थानीय समय) को हमला किया।
                                                        फोटो साभार: @WindsorPolice

उन्होंने मंदिर में तोड़फोड़ की और दीवारों पर नफरत भरे नारे भी लिखे। इसके साथ ही मंदिर की दीवार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक नारे भी लिखे। स्थानीय पुलिस ने घटना की जानकारी दी है।

विंडसर पुलिस ने दोनों संदिग्धों का सीसीटीवी फुटेज जारी किया है, जिनमें नकाबपोश बदमाश मंदिर की दीवारों पर भारत विरोधी नारे लिखते हुए दिखाई दे रहे हैं। पुलिस इनकी तलाश में जुट गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुरुआती जाँच में पुलिस को इस घटना का एक वीडियो मिला है, जिसमें दो संदिग्धों को रात 12 बजे के बाद इलाके में देखा गया। वीडियो में, एक संदिग्ध मंदिर की दीवार पर तोड़फोड़ करता हुआ दिखाई देता है, जबकि दूसरा थोड़ी दूर पर खड़ा होकर उसे देख रहा है। पुलिस ने बताया कि घटना के समय, एक संदिग्ध ने काले रंग का स्वेटर, बाएँ पैर पर एक छोटे से सफेद लोगो के साथ काली पैंट और काले व सफेद रंग के हाई-टॉप रनिंग शूज पहने थे। दूसरे संदिग्ध ने काली पैंट, एक स्वेटशर्ट, काले जूते और सफेद मोजे पहने थे। उन बदमाशों ने ‘मोदी को आतंकवादी घोषित करो’ और ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ के नारे मंदिर की दीवारों पर लिखे हैं। स्थानीय पुलिस ने कहा, “विंडसर पुलिस हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की जाँच कर रही है।”

पुलिस ने दोनों संदिग्धों से जुड़ी जानकारी साझा करने के लिए फोन नंबर और वेबसाइट का पता जारी किया है। विंडसर पुलिस ने कहा, “जिस किसी को इनके बारे में कोई भी जानकारी मिलती है, वह मोरेलिटी यूनिट को 519-255-6700 पर कॉल करे या EXT 4362 करें। वे 519-258-8477 (TIPS) पर बिना नाम बताए क्राइम स्टॉपर्स या www.catchcrooks.com पर ऑनलाइन संपर्क कर सकते हैं।”

पहले भी हो चुका है कनाडा के हिंदू मंदिरों पर हमला

कनाडा के हिंदू मंदिरों में पहले भी तोड़फोड़ की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं, लेकिन अभी तक वहाँ की सरकार द्वारा कोई कड़ा कदम नहीं उठाया गया है। विंडसर में भारत विरोधी यह पाँचवीं घटना है। इससे पहले फरवरी 2023 में मिसिसॉगा (Missisauga) के राम मंदिर (Ram Mandir) तोड़फोड़ के साथ हिंदू और भारत विरोधी नारे लिखे गए थे। जनवरी 2023 में कनाडा के ही ब्रैम्पटन के गौरी शंकर मंदिर को निशाना बनाया गया। गौरी-शंकर मंदिर कनाडा के मशहूर हिंदू मंदिरों में से एक है। यह मंदिर वर्षों से हिंदुओं की आस्था और श्रद्धा का प्रतीक रहा है। इसके पीछे खालिस्तानी आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) का हाथ बताया गया था। इसके अलावा खालिस्तानी समर्थकों ने कई बार महात्मा गाँधी की मूर्ति को भी निशाना बनाया है और भारत विरोधी नारे लिखे हैं।

केजरीवाल स्वतंत्र राष्ट्र खालिस्तान के पहले प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं : कुमार विश्वास

कृषि कानूनों के विरोध में हुए मोदी विरोधियों द्वारा समर्थित तथाकथित किसान आंदोलन में भी खालिस्तान नज़र आया। 26 जनवरी को लाल किला पहुँच उपद्रव करने पर भी मोदी विरोधी पार्टियां इस आंदोलन को अपना समर्थन देती रहीं। यानि भारत में राजनीति नहीं सियासत इतने निचले स्तर पर पहुंची हुई, जहाँ कुर्सी के भूखे नेताओं और इनकी पार्टियों की नज़र सिर्फ सत्ता पर है देश पर नहीं। जिस खालिस्तान ने देश की प्रधानमंत्री की जान ले ली, उसके बावजूद विपक्ष द्वारा सरकार के साथ नहीं खड़ा होना इनका छद्दम देशप्रेम दर्शा रहा है।
पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार आने के बाद से इस सरहदी राज्य में खालिस्तानी शक्तियां फिर से सिर उठा रही हैं। विदेशों में बैठे खालिस्तानी आतंकियों से स्थानीय लोगों के ‘गठजोड़’ की कहानियां कई बार सामने आने के बावजूद मान सरकार बंद आंख से तमाशा देखने में मशगूल है। पंजाब से लेकर दिल्ली तक और आस्ट्रेलिया से लेकर कनाडा और अन्य देशों तक खालिस्तानी समर्थक राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने में लगे हैं। 
पंजाब में AAP की मान सरकार आने के बाद फिर KHALISTAN बनाने की मांग तेज
पंजाब में तो सरकार की नाक के नीचे खालिस्तानी समर्थकों ने खुलेआम जुलूस निकाला था। इसे रोकना तो दूर पंजाब की भगवंत मान सरकार ने इसे बकायदा पुलिस प्रोटेक्शन दिया। आप सरकार के ऐसे ही सहयोगात्मक रवैये का ही दुष्परिणाम हाल ही में दिल्ली और ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तानी समर्थकों की सक्रियता को लेकर सामने आया है। एक ओर केंद्र की पीएम मोदी सरकार की आतंक, आतंकियों और राष्ट्र-विरोधी तत्वों पर प्रहार करने के लिए जीरो टोलरेंस नीति लगातार जारी है। दूसरी ओर आप की दिल्ली और पंजाब की सरकार राष्ट्र विरोधी खालिस्तानी समर्थकों के लिए पलक-पांवड़े बिछा रही है।

मोदी सरकार की आतंकियों और राष्ट्र-विरोधी तत्वों के खिलाफ जीरो टोलरेंस नीति
मोदी सरकार ने जीरो टोलरेंस नीति आतंकवादी समूह द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) सहित कुछ संगठनों को आतंकवादी घोषित कर उनपर प्रतिबंध लगाया था। टीआरएफ पाकिस्तान आधारित प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का मुखौटा समूह है। अब आईएसआई समर्थित खालिस्तान टाइगर फोर्स के सहयोगी अर्शदीप सिंह गिल उर्फ अर्श डल्ला के खिलाफ गृह मंत्रालय ने सख्त कदम उठाया है। गृह मंत्रालय ने पंजाब में आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन देने और जबरन वसूली में शामिल रहे कनाडा में रहने वाले अर्शदीप सिंह गिल को आतंकवादी घोषित कर दिया है। पंजाब में जन्मा और अभी कनाडा में बसा गिल उर्फ अर्श डल्ला बड़े स्तर पर मादक पदार्थों तथा हथियारों की सीमापार तस्करी में शामिल है। वह प्रतिबंधित संगठन खालिस्तान टाइगर फोर्स (केटीएफ) के साथ जुड़ा है और घोषित आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की तरफ से आतंकी मॉड्यूल का संचालन करता है। गिल ऐसे अनेक मामलों में आरोपी है, जिन्हें राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने दर्ज किया है और जिनमें एजेंसी जांच कर रही है।

केजरीवाल स्वतंत्र राष्ट्र खालिस्तान के पहले प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं- विश्वास
आप और खालिस्तानी समर्थकों का गठजोड़ कोई नई बात नहीं है। पंजाब में विधानसभा चुनाव से चार दिन पहले भी पूर्व आप नेता कुमार विश्वास ने सनसनीखेज खुलासा किया था कि आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को खालिस्तानी अलगाववादियों की मदद लेने में भी कोई परहेज नहीं है। विश्वास का आरोप था कि केजरीवाल पंजाब में चुनाव जीतने और आप की सरकार बनाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। क्योंकि अरविंद केजरीवाल पंजाब में अलगाववादियों के समर्थक हैं। कुमार विश्वास ने कहा कि एक बार केजरीवाल ने उनसे कहा था कि वे या तो पंजाब के मुख्यमंत्री बनेंगे या स्वतंत्र राष्ट्र खालिस्तान के पहले प्रधानमंत्री बनकर अपना पीएम बनने का सपना साकार करेंगे। इसीलिए केजरीवाल को अलगाववादियों की मदद लेने में भी कोई परहेज नहीं है। विश्वास ने कहा कि एक ऐसा आदमी जिसे एक समय मैंने ये तक कहा था कि अलगाववादियों का साथ नहीं लीजिए। तो उन्होंने कहा था कि नहीं-नहीं हो जाएगा।

मान के राज में बठिंडा में खालिस्तान के समर्थन में नारे और होशियारपुर में निकाली रैली
कवि कुमार विश्वास की बातों में दम इसलिए नजर आने लगा है, क्योंकि पंजाब में मान सरकार बनने के बाद खालिस्तान समर्थक एक बार फिर सक्रिय नज़र आ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राज्य के बठिंडा में वन विभाग के दफ्तर की दीवार पर खालिस्तान के समर्थन में नारे लिखे पाए गए हैं, तो वहीं होशियारपुर में खालिस्तान समर्थक रैली निकाली गई। और तो और इसमें भारत विरोधी और पंजाब बनेगा खलिस्तान जैसे नारे लगाए गए। इन नारों के पीछे प्रतिबंधित खालिस्तानी आतंकी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ की भूमिका सामने आई। ये दावा खुद इस आतंकी संगठन के चीफ गुरपतवंत सिंह पन्नू ने किया है। हैरानी की बात यह है कि होशियारपुर में खालिस्तान समर्थक रैली राज्य पुलिस की मौजूदगी में ही निकाली गई। अब इस पर फिल्ममेकर अशोक पंडित ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को घेरा था। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा कि यह अरविंद केजरीवाल का खालिस्तानियों के लिए उधार चुकाने का समय है, क्योंकि खालिस्तान वालों ने ही चुनाव के समय केजरीवाल जी का समर्थन किया था।

राजधानी में बड़ी वारदात की साजिश रच रहे दो खालिस्तानी समर्थक गिरफ्तार
आप नेताओं की शह पर खालिस्तान समर्थकों की सक्रियता बनी हुई है। देश की राजधानी से दिल्ली पुलिस ने दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। दोनों खालिस्तानी आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के सदस्य हैं। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने गणतंत्र दिवस से पहले दिल्ली के कई इलाकों में दीवारों पर खालिस्तानी संदेश लिखे थे। वहीं देश की खुफिया एजेंसियों ने खालिस्तानी समर्थकों के एक्टिव होने की सूचना जारी करते हुए बड़ा हमला होने की चेतावनी दी है। इसके बाद से पूरी दिल्ली पुलिस अलर्ट मोड पर है और चप्पे-चप्पे पर निगरानी रखी जा रही है। दोनों आरोपी दिल्ली के रहने वाले हैं। ये विदेश में बैठे खालिस्तानी आतंकी गुरुपतवंत सिंह पन्नू के इशारे पर दिल्ली में खालिस्तानी स्लीपर सेल के साथ कोई बड़ी वारदात को अंजाम देने की साजिश रच रहे थे। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक दोनों को देश-विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए फंडिंग की गई थी।

दिल्ली में कई जगह पंजाब बनेगा खालिस्तान और रेफरेंडम 2020 के लगाए पोस्टर
दिल्ली पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार दोनों आरोपी विक्रम सिंह व बलराम सिंह विदेश में बैठे गुरपंत सिंह पन्नू के इशारों पर काम कर रहे थे। वो खलिस्तानी टेरर नेटवर्क के स्लीपर सेल की मदद से किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे। 12 जनवरी को दिल्ली के जनकपुरी, तिलक नगर, पश्चिम विहार समेत तकरीबन 12 जगहों पर खालिस्तान के समर्थन में लगे पोस्टर एक बड़ी साजिश का हिस्सा थे। इतना ही नहीं रेफरेंडम 2020 लिखकर माहौल खराब करने की कोशिश की गई थी। सूचना मिलते ही पुलिस ने इन पोस्टरों को हटाकर दिवारों पर पेंट किया। इससे पहले खालिस्तानी आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस ने भी वीडियो जारी करके दिल्ली में हमले की धमकी दी थी। लाल किले पर झंडा फहराने वाले को 5 मिलियन डॉलर का इनाम देने की बात भी कही थी। पुलिस सीसीटीवी कैमरों के जरिए इन पोस्टरों को लगाने वालों की पहचान करने में जुटी है। इन समर्थकों ने अंग्रेजी व गुरमुखी में खालिस्तान जिंदाबाद, एसएफजे, 1984, पंजाब बनेगा खालिस्तान और रेफरेंडम 2020 वोट फॉर खालिस्तान जैसे राष्ट्रविरोधी नारे लिखे गए थे।

ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तानी समर्थकों ने तिरंगा लिए भारतीयों पर किया हमला
राजधानी दिल्ली ही नहीं ऑस्ट्रेलिया में भी खालिस्तानी समर्थक अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में कुछ खालिस्तानी समर्थकों ने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को अपने हाथों में लेकर खड़े भारतीयों पर हमला किया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहा है। इस घटना में पांच लोग घायल हो गए जिनको अस्पताल में भर्ती किया गया है। ऑस्ट्रेलिया टुडे ने ट्वीट कर बताया कि मेलबर्न के फेडरेशन स्क्वायर में खालिस्तान समर्थकों के हमलों में पांच लोग घायल हो गए। वीडियो वायरल होने के बाद, भारतीय जनता पार्टी के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तानी समर्थक द्वारा भारत विरोधी गतिविधियों की कड़ी निंदा की है।

ऑस्ट्रेलिया पुलिस ने मेलबर्न में फेडरेशन स्क्वायर पर दो स्क्वायर से दो खालिस्तानी पकड़े
भाजपा नेता सिरसा ने कहा कि असामाजिक तत्व जो इन गतिविधियों से देश की शांति और सद्भाव को बाधित करने की कोशिश कर रहे हैं, उनसे सख्ती से निपटा जाना चाहिए और दोषियों को कानून के कटघरे में लाया जाना चाहिए। वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि कुछ छात्र तिरंगा झंडा लिए हुए खड़े हैं तभी वहां खालिस्तानी समर्थक अचानक आते हैं और तिरंगा झंडा लिए स्टूडेंट और कुछ लोगों को खदेड़ देते हैं और उन पर हमला कर रहे हैं वहीं खालिस्तान समर्थक अपना खुद का झंडा हाथ में लिए हैं। हिंदू ह्यूमन राइट्स ऑस्ट्रेलेशिया की निदेशक सारा एल गेट्स ने खालिस्तान समर्थकों के एक समूह द्वारा भारतीय राष्ट्रीय ध्वज ले जा रहे एक भारतीय युवक को खदेड़ते हुए ट्विटर पर वीडियो साझा किया। 

अवलोकन करें:-

पंजाब में एक नया भिंडरावाला दस्तक दे चुका है, केजरीवाल दिल्ली में चैन की बंसी बजा रहा है; दिल्ली

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पंजाब में एक नया भिंडरावाला दस्तक दे चुका है, केजरीवाल दिल्ली में चैन की बंसी बजा रहा है; दिल्ली
इंदिरा गाँधी ने पहले भिंडरांवाले को मजबूत किया, फिर मारने के ऑर्डर दिए: कुलदीप बराड़, आर्मी जनरल

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इंदिरा गाँधी ने पहले भिंडरांवाले को मजबूत किया, फिर मारने के ऑर्डर दिए: कुलदीप बराड़, आर्मी जनरल

ऑस्ट्रेलिया टुडे ने पहले बताया कि भारतीयों ने विक्टोरिया पुलिस को सूचित किया था कि उन्होंने देश में बढ़ती खालिस्तान समर्थक गतिविधियों के खिलाफ मेलबर्न में फेडरेशन स्क्वायर पर एक विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई थी। इस बीच हमले की निंदा करते हुए विक्टोरिया पुलिस ने बताया कि हिंसक हमले के बाद अब तक दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किए गए दो लोगों की उम्र 30 साल के आसपास है और उन्हें दंगाई व्यवहार के लिए पेनल्टी नोटिस जारी किया गया है।

कनाडा के सांसद चंद्र आर्य ने हिन्दुओं के प्रतीक चिह्न स्वस्तिक को लेकर चल रहे प्रोपेगंडा को किया बेनकाब

कनाडा के सांसद चंद्र आर्य ने वहाँ के पार्लियामेंट में आवाज़ उठाते हुए अपील की है कि नाजियों के निशान ‘हकेनक्रेज’ की तुलना हिन्दू ‘स्वस्तिक’ से नहीं किया जाए। सोमवार (28 फरवरी, 2022) को उन्होंने संसद में स्पीकर को सम्बोधित करते हुए कहा कि कई धर्मों/मजहबों को मानने वाले 10 लाख कनाडा के नागरिकों, खासकर हिन्दू-कनाडियन समुदाय की तरफ से वो ये बात रख रहे हैं। उन्होंने खुद को भी एक हिन्दू-कनाडियन बताया। उन्होंने समझाया कि स्वस्तिक होता क्या है।

कनाडाई सांसद ने कहा, “मैं संसद के सभी सदस्यों से आग्रह करता हूँ कि वो हिन्दुओं के धार्मिक और पवित्र चिह्न स्वस्तिक और नाजियों के घृणा भरे निशान, जिसे जर्मनी में ‘Hakenkreuz (हकेनक्रेज)’ और अंग्रेजी में ‘Hooked Cross’ कहा जाता है – इन दोनों के बीच के अंतर को समझें। प्राचीन भारतीय भाषा संस्कृत में स्वस्तिक का अर्थ होता है – जो अच्छा सौभाग्य लेकर आए और कल्याण करे। ये एक प्राचीन और काफी पवित्र प्रतीक चिह्न है।”

उन्होंने संसद में कहा कि आज भी हिन्दू इसका प्रयोग करते हैं और हमारे हिन्दू मंदिरों, शुभ कार्यक्रमों (धार्मिक एवं सांस्कृतिक), घर में घुसने वाले दरवाजों एवं हमारे दैनिक जीवन में भी ‘स्वस्तिक’ चिह्न का उपयोग किया जाता है। उन्होंने कहा, “कृपया नाजियों के निशान को ‘स्वस्तिक’ कहना बंद कीजिए।” चंद्र आर्य ने स्पष्ट किया कि हम नाजी प्रतीक ‘हकेनक्रेज’/हुक्ड क्रॉस पर प्रतिबंध का स्वागत करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसे ‘स्वस्तिक’ बताने का अर्थ है हिन्दुओं के धार्मिक अधिकारों को छीनना।

उन्होंने कहा कि कनाडा में हिंदुओं को अपने दैनिक जीवन में इसका उपयोग करने से बाध्य किया जाना गलत है। बता दें कि 59 वर्षीय द्रकांत ‘चंद्र’ आर्य ओंटारियो के नेपियन से सांसद (‘हाउस ऑफ़ कॉमन्स’ के मेंबर) हैं। उन्होंने 2015 और 2019 में वहाँ से चुनाव जीता। वो सत्ताधारी ‘लिबरल पार्टी ऑफ कनाडा’ के नेता हैं। प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो भी इसी पार्टी के हैं। चंद्र आर्य ‘स्टैंडिंग कमिटी ऑन इंटरनेशनल ट्रेड (CIIT)’ के सदस्य भी हैं। ओटावा के बेरहवन में उनका निवास स्थान है।

कनाडा में चल रहे ट्रकर्स प्रदर्शन के दौरान वहाँ के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और ‘न्यू डेमोक्रेक पार्टी’ के नेता जगमीत सिंह ने प्रदर्शनकारियों पर ‘स्वस्तिक लहरा कर घृणा फैलाने’ के आरोप लगाए थे। ‘हिंदुपैक्ट’ नाम के संगठन ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि हिन्दू, सिख और बौद्ध सहित कई समुदाय इसका उपयोग करते हैं और ये नाजी चिह्न से अलग है। कनाडा में हाल के दिनों में कई मंदिरों में भी तोड़फोड़ हुई है। ट्रकर्स प्रदर्शन को रोकने के लिए कनाडा सरकार ने कई कड़े कदम उठाए, जबकि भारत में ‘किसान आंदोलन’ का वहाँ के सत्ताधारी नेताओं ने समर्थन किया था।

जनवरी 2022 में YouTube चैनल ‘आज की तजा खबर (AKTK)’ ने एक डॉक्यूमेंट्री के जरिए ‘स्वस्तिक’ चिह्न को लेकर चले आ रहे प्रोपेगंडा की पोल खोली थी। बताया गया है कि हिटलर ने कैसे हिन्दुओं को एक ‘नीची नस्ल’ बताते हुए इसके स्वाधीनता आंदोलन का विरोध किया था। ऐसे में सवाल पूछा गया था कि क्या एक ‘नीची नस्ल’ के प्रतीक चिह्न को हिटलर जैसा दंभी कैसे अपना सकता है? ‘हकेनक्रेज’ एक ‘क्रॉस’ का ही एक प्रकार है, जो पूर्व से ही चर्चों में मिलता रहा है।

जिसे 16 की उम्र में ISIS ने बनाया सेक्स स्लेव, परिवार को मार डाला; उसकी किताब को ‘मुस्लिम विरोधी’ बता कनाडा ने लगाई रोक

कनाडा हाल के दिनों में यूरोप के कई साहित्य पर प्रतिबंध लगा चुका है। कारण दिया गया कि इसमें लिखी चीजें स्थानीय देशज लोगों के लिए ठीक नहीं हैं। राजधानी का ‘टोरंटो डिस्ट्रिक्ट स्कूल बोर्ड (TDSB)’ इस काम में वहाँ सबसे आगे है। बच्चों और साहित्य की लगभग 5000 पुस्तकों को वो आपत्तिजनक बता कर नष्ट कर चुका है। अब एक बुक क्लब कार्यक्रम से उसने अपना समर्थन वापस ले लिया है। इसमें नोबेल पुरस्कार विजेता और यज़ीदी मानवाधिकार कार्यकर्ता नादिया मुराद भी हिस्सा लेने वाली थीं।

इस कार्यक्रम में दो किताबों के लेखकों की मौजूदगी में उनकी पुस्तकों पर चर्चा के लिए आयोजित की जाने वाली थी। इसमें नादिया मुराद की पुस्तक ‘The Last Girl: My Story of Captivity, and My Fight Against the Islamic State‘ (द लास्ट गर्ल: मेरी कैद और इस्लामिक स्टेट के खिलाफ मेरी लड़ाई) भी शामिल है। बोर्ड का कहना है कि नादिया मुराद की पुस्तक मुस्लिमों की भावनाओं को ठेस पहुँचा सकती है और और इस्लामोफोबिया को बढ़ावा दे सकती है।

बोर्ड ने दावा किया कि ये पुस्तक मुस्लिमों के लिए ठीक नहीं है। बता दें कि नादिया मुराद जब  मात्र 16 साल की थीं, तब 2014 में ISIS के आतंकियों ने उनका अपहरण कर के उन्हें ‘सेक्स स्लेव’ बना दिया था। वो उत्तरी इराक के एक गाँव में रहती थीं, जहाँ हमले के बाद आतंकियों ने उन्हें बंदी बना लिया था। TDSB के प्रवक्ता रयान बर्ड ने कहा कि इस मामले में कुछ मिसअंडरस्टैंडिंग हुई है, बुक क्लब के लिए सिर्फ अपने छात्रों को वहाँ बैठने का समर्थन वापस लिया गया है।

‘A Room of Your Own; नामक क्लब को तान्या ली ने 2017 में शुरू किया था। इसमें कई स्कूलों के 13 से 18 वर्ष तक की उम्र की छात्राओं को बुला कर उन्हें किताबें पढ़ने और एक-दूसरे से ऑनलाइन चर्चाएँ करने की सुविधा दी जाती है। ली ने बोर्ड के निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यही इस्लामिक स्टेट का अर्थ होता है, जो एक आतंकी संगठन है। उन्होंने कहा कि सामान्य मुस्लिमों का इससे कुछ लेनादेना नहीं है और टोरंटो स्कूल बोर्ड को इस अंतर की जानकारी होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि पहली बार बोर्ड ने उनके बुक क्लब द्वारा आयोजित किसी कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी है। ये कार्यक्रम फरवरी 2022 में प्रस्तावित है। इस किताब में नादिया मुराद ने बताया है कि किस तरह उनकी आँखों के सामने उनके परिवार को मार डाला गया और उन्हें कैदी बना लिया गया। उनका कई बार आतंकियों द्वारा बारी-बारी से बलात्कार हुआ और प्रताड़ित किया गया। वो किसी तरह वहाँ से भाग कर निकलने में कामयाब रहीं। बोर्ड ने अब कहा है कि उसके कर्मचारी किताबें पढ़ रहे हैं।

सरे के न्यूटन शहर में कई इलाकों में मिले इस्लाम विरोधी पोस्टर्स

कनाडा एक एक शहर में कई जगहों पर ऐसे पोस्टर्स मिले हैं, जिनमें इस्लाम के खिलाफ चीजें लिखी हुई हैं। ये घटना ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के सरे में स्थित न्यूटन शहर की है। इस तरह के पोस्टर्स और दीवारों पर लिखे आपत्तिजनक नारों के मिलने के बाद ‘रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP)’ ने इस घटना की जाँच अपने हाथ में ले ली है। आरोप है कि कई जगहों पर मिले इन पोस्टर्स में मुस्लिमों को निशाना बनाया गया है।

’72 एवेन्यू’ नामक स्थान पर एक मस्जिद के बाहर स्थित एक पोल पर ही इस्लाम को लेकर आपत्तिजनक बातें लिखी हुई मिलीं। 5 जुलाई, 2021 के बाद से ही शहर में इस तरह के कंटेंट्स का सार्वजनिक रूप से मिलना शुरू हो गया था। सरे क्राइम प्रिवेंशन सोसाइटी के स्वयंसेवक जसप्रीत जंडू ने कहा कि हम जिस कठिन समय में रह रहे हैं, इस तरह की घृणा और रेसिज्म के लिए शहर में कोई स्थान नहीं होना चाहिए।

उन्होंने बताया कि उन्हें इस तरह के संदेश चिपके होने के कई कॉल्स मिल रहे हैं, जिसके बाद तुरंत जाकर उन्हें हटाया जाता है। एक जगह जहाँ ये चीजें लिखी हुई मिलीं, वहाँ पास में ही एक किराने की दुकान, डेंटिस्ट क्लिनिक और पशु अस्पताल थे। परिवारिक और रेजिडेंशियल इलाकों में इस तरह के कंटेंट्स के मिलने से सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया है। सरे पुलिस का कहना है कि किसी एक व्यक्ति का चंद लोगों ने समूह ने इस तरह की हरकत की है।

सरे में RCMP के मीडिया रिलेशन्स अधिकारी और कॉन्स्टेबल सरबजीत सिंह संघा का कहना है कि उनकी सुरक्षा और सेफ्टी के लिए ये सब ठीक नहीं है। पुलिस वीडियो सर्विलांस के जरिए दोषियों को ढूँढ रही है, ताकि अगर वो कैमरे में कैद हुए हैं तो उन्हें चिह्नित कर उनकी पहचान की जा सके। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि अगर उनके पास कोई सूचना है तो वो RCMP से संपर्क करें। कुछ जगह स्प्रे पेण्ट से ‘Islam Is Evil’ लिखा हुआ मिला।

कॉन्स्टेबल संघा ने कहा कि हेट क्राइम और घृणा के आधार पर किए जाने वाले अपराध का सरे में कोई स्थान नहीं है। उन्होंने बताया कि अधिकारीगण पूरी जिम्मेदारी के साथ इस घटना के सम्बन्ध में कार्रवाई करने में लगे हुए हैं। ताज़ा घटना में एक डस्टबिन पर लिखा हुआ मिला, ‘इसमें कूड़ा डालना बंद करो पाकिस्तानी।’ साथ ही कई अन्य बोर्ड्स बना कर उन पर भी यही चीजें लिखी गई थीं। फ़िलहाल इन्हें मिटा दिया गया है।

कनाडा : चर्च द्वारा संचालित सबसे बड़े बोर्डिंग स्कूल में 215 आदिवासी बच्चों के मिले अवशेष, 4100+ की मौत का है रिकॉर्ड

                                                 कम्पलूस इंडियन रेजिडेशियल स्कूल (साभार: Reuters)
कनाडा के एक बंद पड़े बोर्डिंग स्कूल के परिसर में 215 आदिवासी बच्चों के अवशेष बरामद हुए हैं। इनमें से कुछ की उम्र तीन साल तक की बताई जा रही है। शुक्रवार (मई 28, 2021) को कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने इस संबंध में जानकारी देते हुए इसे हृदय विदारक बताया।

Tk’emlups te Secwepemc जनजाति ने बताया कि ब्रिटिश कोलंबिया में 1978 से बंद पड़े कमलूप्स इंडियन रेजीडेंशियल स्कूल (KIRS) में बच्चों के अवशेषों की बरामदगी हुई है। इन्हें रडार विशेषज्ञों की मदद से जमीन से निकाला गया। समुदाय के प्रमुख रोसने कासिमिर ने अपना एक बयान जारी कर कहा, “हमें समुदाय के बारे में एक जानकारी थी जिसे हम सत्यापित करने में सक्षम थे।” उन्होंने बताया कि इस समय हमारे पास उत्तर से अधिक प्रश्न हैं।

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने इस संबंध में ट्वीट कर कहा, “Kamloops Indian Residential School से जो खबर मिली, वह हृदय विदारक है। यह हमारे देश के इतिहास के उस काले और शर्मनाक अध्याय की दर्दनाक याद दिलाता है। मैं इस दुखद समाचार से प्रभावित सभी लोगों के बारे में सोच रहा हूँ। हम आपके लिए यहाँ हैं।”

जानकारी के मुताबिक ईसाई चर्चों और कनैडियन सरकार द्वारा संचलित किया जाने वाले कनाडा आवासीय स्कूल तंत्र का KIRS सबसे बड़े बोर्डिंग स्कूलों में से एक था। इस स्कूल के बारे में मौजूद जानकारी बताती है कि यहाँ आदिवासी बच्चों को सभ्य बनाने के नाम पर ईसाइयत का पाठ पढ़ाया जाता था और उनकी भाषा व संस्कृति को नष्ट किया जाता था।

                                      ईसाइयत के उद्देश्य से चलाए जा रहे स्कूल के बारे में जानकारी
रिपोर्ट कहती हैं कि सन् 1883 से 1998 में यहाँ 1.5 लाख आदिवासी बच्चे अपने परिवारों से अलग करके इन स्कूलों में डाले गए। इसके बाद इन स्कूलों में सांस्कृतिक नरसंहार हुआ। ये सारे खुलासे Truth and Reconciliation Commission की 2015 की एक रिपोर्ट में होते हैं।

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि बच्चों को यहाँ शारीरिक शोषण, बलात्कार, कुपोषण व अन्य अत्याचारों से गुजरना होता था। रिपोर्ट कहती है कि इस आवासीय स्कूल में रहने के दौरान 4100 बच्चों की मौत हुई। लेकिन कनाडा के सबसे बड़े आवासीय स्कूल में दफनाए गए इन 215 बच्चों का रिकॉर्ड इस लिस्ट में शामिल नहीं किया गया।

इससे पहले इस आवासीय स्कूल प्रणाली के लिए कनाडा की सरकार ने 2008 में माफी माँगी थी। वहीं इस संबंध में Tk’emlúps te Secwepemc Nation ने कहा कि वह उन लोगों से जुड़े है जिनके बच्चे इस में स्कूल गए थे। जाँच को लेकर उन्हें लग रहा है कि जून के मध्य तक प्रारंभिक निष्कर्ष मिलने की उम्मीद है।

कनाडा : अल्लाह-हू-अकबर चिल्लाती भीड़ का हमला: यहूदी खून से लथपथ, बचाव में उतरी लड़की का यौन शोषण

           कनाडा में यहूदी व्यक्ति पर हमला (बाएँ), न्यूयॉर्क में भी यहूदी व्यक्ति पर फिलिस्तीन समर्थकों का हमला (दाएँ) 

                                                                                    (साभार: ट्विटर/Elikohn3/MrAndyNgo)
इजराइल और फिलिस्तीन के बीच जारी जंग अब विदेशों में भी पहुंचनी शुरू हो गयी है। इस बीच विदेशों में रहने वाले फिलिस्तीनी समर्थक वहाँ रह रहे यहूदियों को निशाना बना रहे हैं। इसी कड़ी में कनाडा में रहने वाले यहूदी लोगों को फिलिस्तीन समर्थक भीड़ के हिंसक हमले का शिकार होना पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक, 15 मई को फिलिस्तीन समर्थक भीड़ ने एक व्यक्ति पर हमला कर दिया जो एक अन्य यहूदी व्यक्ति को बचाने की कोशिश कर रहा था। हिंसक भीड़ अल्लाह-हू-अकबर का नारा लगाते हुए उसे लाठियों से पीटा। उस पर पथराव किए गए।

इस बीच कनाडा के कई स्थानों पर कनाडा की पुलिस भीड़ को भगाने और यहूदी लोगों को हमले से बचाने की कोशिशें करती दिखी।

Pro Palestine protestors beat an elderly Jewish man in Canada. They also sexually assaulted a Jewish girl (whom I just spoke with). This is not normal. pic.twitter.com/aSSdW9NAHN

— Eli 🦁 (@EliKohn3) May 16, 2021

पुरुष को बचाने की कोशिश में यहूदी लड़की से छेड़छाड़

ट्विटर यूजर EliKohn3 ने कहा कि जिन यहूदी लड़कियों पर हमला किया गया था, उन्होंने उनमें से एक से बात की थी। लड़की ने EliKohn3 को बताया कि वीडियो में देखे गए बूढ़े व्यक्ति को बचाने की कोशिश में उसके साथ छेड़छाड़ की गई। लड़की के मुताबिक, “उन्होंने हम पर पत्थर, पानी की बोतलें और काँच की बोतलें फेंकी। पुलिस हमें उस पार्किंग स्थल तक ले जा रही थी, जहाँ हमारी कार थी। पार्किंग में मैंने एक बुजुर्ग यहूदी व्यक्ति को भागते हुए देखा। भीड़ ने उसके बाल खींचे और जैसे ही वह मुड़ा वे उछल पड़े। उन्होंने उसे लाठियों से भी पीटा। जैसे ही मैं उनपर चिल्लाई तो भीड़ में से एक ने मुझे लात मारी और कईयों ने मेरी छाती को पकड़कर मुझे किस करने के बाद चिल्लाते हुए भाग निकले।”

They beat him with sticks. Then I yelled at them and one of them kicked me while another grabbed my breasts and made kissy noises. Then he ran off”

— Eli 🦁 (@EliKohn3) May 16, 2021

टोरंटो यहूदी एडवोकेसी द्वारा शेयर किए गए वीडियो के कमेंट में एक इंस्टाग्राम यूजर ने बताया कि उस व्यक्ति को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया था और वह ठीक था। उसने यह भी बताया कि इसी तरह के हमले कनाडा में पिछले कुछ घंटों के भीतर फिलिस्तीन समर्थक भीड़ और देश में रहने वाले इजरायल समर्थक लोगों द्वारा किए गए मार्च के दौरान हुए हैं। 

न्यू यॉर्क में ‘स्टार ऑफ डेविड’ पहने हुए व्यक्ति पर हुआ था हमला

इससे पहले 12 मई को ऐसी खबरें सामने आई थीं, जिसके मुताबिक “स्टार ऑफ डेविड” पहने हुए एक व्यक्ति एक यहूदी व्यक्ति पर फिलिस्तीन समर्थक भीड़ ने हमला कर दिया था। जब पुलिस उसे बचाने की कोशिश कर रही थी, तब वह खून से सना हुआ था। खून से लथपथ आदमी के पीछे दौड़ती भीड़ फिलिस्तीन समर्थक उस पर चश्मा और पत्थर फेंकते हुए “F**K You,” “Run p**sy,” “f**king p**sy run” चिल्ला रही थी।
इस घटना का वीडियो पत्रकार एंडी एनजीओ ने ट्विटर पर शेयर किया था। यह हमला स्थानीय समायानुसार शाम करीब सात बजे हुआ था। रिपोर्ट्स से पता चला है कि मौखिक विवाद के बाद फिलिस्तीन समर्थक भीड़ में से ही एक व्यक्ति ने यहूदी व्यक्ति पर मेटल की कुर्सी से हमला किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
पहले इजराइल पर हुआ था हमला 
फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास द्वारा यहूदी राष्ट्र पर हवाई हमले के बाद इजरायल और फिलिस्तीन के बीच तनाव बढ़ गया था। मंगलवार (11 मई 2021) को फिलिस्तीनी आतंकवादी संगठन हमास ने इजराइल में सैकड़ों रॉकेट दागे और बड़े पैमाने हवाई हमले किए। हालाँकि, आयरन डोम के नाम से विख्यात इजराइली डिफेंस सिस्टम ने हमास के सभी रॉकेट्स को हवा में ही नष्ट कर दिया।
इसके बाद पलटवार करते हुए इजराइल ने गाजा पट्टी के अंदर फिलीस्तीनी आतंकी संगठन हमास पर अपने हमले तेज कर दिए। इजराइल की डिफेंस फोर्स ने हमास पर एयर स्ट्राइक कर उसके कई ठिकानों को तबाह कर दिया। मई 11 को जवाबी हमले में इजराइल ने हवाई हमले में हमास की गगनचुंबी इमारतों को आवासीय भवनों को निशाना बनाया।
वहीं मई 12 को इजराइल ने हमास की मेट्रो के नाम से जानी जाने वाली अंडर ग्राउंड सुरंग पर हमला कर उसे तबाह कर दिया। इसका उपयोग हमास आतंकवादियों को छुपाने और हथियारों की तस्करी के लिए करता था। गुरुवार को आईडीएफ ने गाजा में मीडिया समूहों के दफ्तरों को भी उड़ा दिया। इसको लेकर इजराइली डिफेंस फोर्स ने कहा कि हमास उन इमारतों का इस्तेमाल हमास उन पर हमले के लिए कर रहा था। तबसे लगातार हमले जारी हैं।

ब्रैंप्टन : तिरंगे पर थूका, कहा- पेशाब पीओ; मोदी के लिए भी आपत्तिजनक बात

             खालिस्तान समर्थक जगमीत सिंह के साथ जोधवीर धालीवाल (घेरे में) और उसकी पत्नी मनजोत धालीवाल 

                                                                                                                 (साभार: REACH)
प्रवासी भारतीयों ने ब्रैम्प्टन (Brampton) में भारत-कनाडाई संबंधों के मद्देनजर सोमवार को तिरंगा और मैपल कार रैली का आयोजन किया। रैली में 100 से ज्यादा कारें भारत और कनाडा के ध्वज के साथ शामिल थीं। यह खुशनुमा माहौल तब बिगड़ गया जब कुछ खालिस्तानी समर्थकों ने रैली में शामिल लोगों से गाली-गलौच की। भारत की वाहवाही देख ट्रैफिक जाम कर रैली में शामिल लोगों को प्रताड़ित किया।

इस घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं। इसमें खालिस्तानी समर्थक भारत के समर्थन में रैली करने वालों को तंग कर रहे हैं, उन्हें परेशान कर रहे हैं और तिरंगे का अपमान करते हुए कह रहे हैं कि जाकर वे पेशाब पिएँ।

एक वीडियो में देख सकते हैं कि खालिस्तानी जोर से भारतीय समर्थक को धक्का देता है और वीडियो बनाने वाला कहता है कि वह जाकर पेशाब (मूत) पिए। धक्का देने के बाद खालिस्तानी समर्थक पूछता है अब तो खुश है? जाकर पेशाब पी, पेशाब तुझे ताकतवर नहीं बनाएगा %^$।

एक अन्य वीडियो में खालिस्तानी गुंडे शांतिपूर्ण रैली में न केवल भारतीयों के लिए अपमानजनक शब्द बोल रहे हैं बल्कि नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ भी आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। इस वीडियो को REACH नाम के अकाउंट ने शेयर किया है, जिसमें दर्शाया कि कैसे हिंदू, कनाडाई सांसद व खालिस्तानी समर्थक जगमीत सिंह के क्षेत्र में रहते हैं। वीडियो में देख सकते हैं कि भारतीयों को गालियाँ, धमकियाँ खुलेआम मिल रही हैं।

इस हमले को लेकर कहा जा रहा है कि इसे एनडीपी नेता व खालिस्तानी समर्थक जगमीत सिंह के करीबियों ने करवाया है। ऐसा क्यों? दरअसल, इस पूरी घटना के पीछे मास्टरमाइंड का नाम जोधवीर धालीवाल है। धालीवाल कोई और नहीं बल्कि जगमीत सिंह का रिश्तेदार है। सिंह की पत्नी की बहन का पति यानी उसका साढू है।

                                                   जरनैल सिंह के टैटू के साथ जोधवीर (साभार: REACH)
REACH के अनुसार, जोधवीर भी खालिस्तानी समर्थक है जो अक्सर जरनैल सिंह भिंडरावाले का महिमामंडन करता रहता है। एक तस्वीर में उसका जरनैल सिंह के प्रति प्रेम देख सकते हैं कि उसने खालिस्तानी आतंकी का टैटू अपने हाथ में बनवाया हुआ है।

रीच के अनुसार, भारतीयों पर हुए हमले के पीछे धालीवाल का सबसे बड़ा हाथ था। जगमीत सिंह के समर्थकों ने उसका पूरा पूरा साथ दिया। एक वीडियो है जिसमें जोधवीर को भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे पर थूकते देखा जा सकता है। वीडियो में उसकी पत्नी मंजोत भी तिरंगे को गाली दे रही है। साथ ही पीएम मोदी को भी उलटा-सीधा कह रही है।

REACH के मुताबिक वीडियो में नजर आया कार नंबर बताता है कि कार धालीवाल की ही थी। इसके अलावा धालीवाल वीडियो में लोगों पर हमला करता भी दिख रहा है। भारतीय समर्थक को धक्का देकर गिराते उसे वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है।

इन सभी सबूतों से ये बात साफ है कि जगमीत सिंह के समर्थकों ने ब्रैम्प्टन में हुई रैली में हिंसा फैलाई। भारतीयों और तिरंगे को अपमानित किया। ये सब तब हुआ जब कई भारतीय मिल कर कनाडा में जगमीत सिंह का विरोध कर रहे हैं, उस पर इल्जाम लगा रहे हैं कि वह कनाडा के लोगों को भड़का रहा है।

जगमीत सिंह ने फैलाई रैली में हिंसा?

पिछले हफ्ते की बात करें तो कई भारतीयों ने जगमीत सिंह के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था। उनका कहना था कि किसान आंदोलन के कारण खालिस्तानी उन्हें निशाना बना रहे हैं। विरोध-प्रदर्शन के दौरान सबके हाथों में कनाडाई झंडा था और वह समुदायों में नफरत फ़ैलाने का विरोध कर रहे थे।
भारत में चल रहे किसान आंदोलन के मद्देनजर कनाडा में सिखों को भड़काने का काम हो रहा है। जगमीत सिंह खुद इस मुद्दे में घुस-घुस कर भारतीय सरकार के ख़िलाफ़ वैश्विक प्रोपेगेंडा चलाने का काम कर रहा है। उस पर न केवल भारत में चल रहे किसान आंदोलन को फंड करने का इल्जाम है, बल्कि उसे लेकर ये भी कहा जा रहा है कि उसी के कारण रिहाना ने भारत विरोधी ट्वीट किया।
अब संभव है कि अपने ख़िलाफ़ उठ रही आवाजों के विरोध में जगमीत सिंह ने ब्रैम्प्टन में हुई रैली पर भारतीयों के ऊपर हमला करवाया हो, क्योंकि कई NRI लंबे समय से उसके कार्यालय के बाहर खड़े होकर उसका विरोध करते रहे हैं।

कौन है जगमीत सिंह?

जगमीत सिंह को जिम्मी धालीवाल के नाम से भी जाना जाता है। भारत से कनाडा में जाकर बसने वाले इस खालिस्तानी समर्थक का जन्म 1979 में हुआ था। वहाँ वकालत के बाद इसने राजनीति शुरू की। साल 2017 में नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़ा। 2019 में इसे वहाँ का सांसद चुना गया। 
जगदीप को उसकी खालिस्तानी विचारधारा के कारण पहचाना जाता है। वह अक्सर भारत के विरोध में और खालिस्तान के समर्थन में आवाज उठाता रहता है। साल 2014 में भारत सरकार ने उसे वीजा देने से मना किया था। भारत सरकार का कहना था कि वह अपने मानवाधिकारों का इस्तेमाल अपना एजेंडा चलाने के लिए करता है। जगदीप सिंह पहला ऐसा पश्चिमी सांसद है, जिसे देश में आने से रोका गया। इसके बाद साल 2015 में एनडीपी सदस्य ने सैन फ्रांसिस्को में खालिस्तान रैली की थी, जिसमें जरनैल सिंह के पोस्टर दिखे थे। साल 2016 में जगमीत सिंह ने खालिस्तानी समर्थन में सेमिनार में भाग लिया था।