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भारत नहीं, पाकिस्तान ने कनाडा में कराई आतंकी निज्जर की हत्या, आईएसआई ने एक तीर से दो निशाने साधे

कनाडाई प्रधानमंत्री ट्रूडो के झूठ शीशे की तरह साफ हो गए हैं। इंटेलिजेंस एजेंसी को इसके पुख्ता सुबूत मिले हैं कि खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या असल में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने कराई है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद अमेरिका की ओर से कनाडा को खुफिया जानकारी मुहैया कराई गई थी, लेकिन कनाडा ने जानकारी का कुछ और ही मतलब निकाल लिया। इसके बाद कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो के जरिए भारत पर निज्जर की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा दिया गया। खुफिया एजेंसी की मुताबिक निज्जर की हत्या में कनाडा स्थित आईएसआई के दो एजेंट राहत राव और तारिक कियानी का हाथ है। ये दोनों आतंकी भारत की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल हैं।

ट्रूडो कनाडा के प्रधानमंत्री या खालिस्तानी समर्थकों के प्रवक्ता हैं?
दरअसल, खालिस्तान का विवाद में आग में घी का काम कनाडाई प्रधानमंत्री ट्रूडो के बयान ने किया था। लेकिन यह पीएम नरेन्द्र मोदी का नया भारत है। भारत का अपमान या बदनाम करने वालों को करारा जवाब देकर सबक सिखाने में अब जरा-सी भी देर नहीं होती। यही वजह है कि बारह घंटे के अंदर ही कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को न सिर्फ झुकना पड़ा, बल्कि खालिस्तानी आतंकी पर अपने बयान के लेकर भारत को सफाई भी देनी पड़ी। ट्रूडो को अपनी गलतबयानी पर कहना पड़ा कि उनका मकसद भारत को उकसाने या तनाव बढ़ाने का नहीं, बल्कि निज्जर की हत्या पर भारत से सहयोग मांगना था। ट्रूडो के बयान को लेकर सोशल मीडिया पर लिखा गया कि ट्रूडो कनाडा के प्रधानमंत्री हैं या फिर खालिस्तानी समर्थकों के प्रवक्ता हैं? इस बीच भारत ने खालिस्तानियों के समर्थन पर कनाडा को करारा जवाब देते हुए कनाडाई उच्चायुक्त कैमरून मैके को 5 दिन में ही देश छोड़ने के लिए कह दिया था।

पाकिस्तान ने निज्जर की हत्या कराकर एक तीर से दो निशाने साधे

इंटेलिजेंस एजेंसी के मुताबिक पाकिस्तान ने निज्जर की हत्या करा करके एक तीर से दो निशाने साधे हैं। पहला उसने कनाडा और भारत के बीच दरार पैदा कर दी। दूसरा, उसने ड्रग्स तस्करी की कमाई पर पकड़ और मजबूद कर ली। दरअसल, आतंकी निज्जर इतनी महफूज जगह पर रहता था कि किसी अनजान व्यक्ति का निज्जर के पास पहुंचना नामुमकिन था। लेकिन दोनों हेंडलर उससे मिलते थे। इसी कारण जहां निज्जर के कोई करीब भी नहीं जा सकता, उस जगह उसकी हत्या हो गई। वह आईएसआई के समर्थन से ही खालिस्तानी एजेंडा चलाता था। आईएसआई की मदद से खालिस्तानी आतंकी और गैंगस्टर पंजाब में ड्रग्स तस्करी के गिरोह चला रहे हैं। कमाई का हिस्सा आतंकियों व आईएसआई को भी मिलता है। इस नेटवर्क पर आईएसआई की पकड़ ढीली होने से आतंकी अपनी मर्जी से पैसे का उपयोग करने लगे, इसी कारण निज्जर को रास्ते से हटाना उनके लिए जरूरी हो गया।

 निज्‍जर की हत्‍या आईएसआई की साजिश का नतीजा– अमेरिकी मीडिया

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर निज्‍जर की हत्‍या का आरोप लगाया था। ट्रूडो ने बिना किसी सबूत के भारत को अपने देश की संसद में दोषी बता दिया। लेकिन अमेरिकी अखबार न्यूयार्क टाइम्स (एनवाईटी) में जो जानकारी दी गई, उसके बाद से यह सारा मामला पेचीदा हो गया है। अखबार ने निज्‍जर की हत्‍या के वीडियो के हवाले से कुछ सनसनीखेज दावे किए हैं। वहीं अब यह कहा जा रहा है कि निज्‍जर की हत्‍या पाकिस्‍तान की इंटेलीजेंस एजेंसी आईएसआई की साजिश का नतीजा है। जुलाई 2020 में भारत ने उसे ‘आतंकवादी’ घोषित किया था। इस बात की भी संभावना है कि आईएसआई ने शार्प शूटर्स की मदद से निज्‍जर की हत्‍या करवाई। ऐसे में कनाडा में मौजूद आईएसआई के एजेंट्स को हत्‍या के लिए प्रयोग किया गया। इसके अलावा अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्‍ट की तरफ से भी वीडियो के हवाले से बताया जानकारी दी गई कि आतंकी निज्‍जर पर दो लोगों ने गोलियां बरसाई थीं।
भारत की मोस्ट वांटेड की सूची में शामिल दो आतंकियों पर हत्या का शक
काबिले जिक्र है कि इस साल 18 जून को ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में एक गुरुद्वारे के बाहर निज्‍जर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। निज्जर भारत से अलग एक खालिस्तानी देश की मांग करता आ रहा था। इंटेलिजेंस एजेंसी और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आईएसआई भारत को बैकफुट पर लाने के लिए निज्जर को खत्म करना चाहती होगी। उनके मुताबिक, राहत राव और तारिक कियानी कनाडा में आईएसआई के दो एजेंट्स हैं जो पाकिस्तानी एजेंसी के लिए सबसे ज्यादा काम कर रहे हैं। वे कथित तौर पर उन आतंकवादियों के भी हैंडलर हैं, जो भारत से आ रहे हैं और मोस्ट वांटेड की सूची में हैं। सूत्रों के मुताबिक, संभावित व्यावसायिक कारणों से और नए ड्रग पेडलर्स से अधिक फिरौती पाने के लिए, राव और कियानी निज्जर की हत्या के काम में शामिल हो सकते हैं।
आतंकी निज्जर के पड़ोसी हैं आईएसआई के कई पूर्व अधिकारी
यह भी जानकारी में आया है कि हरदीप सिंह निज्जर के पड़ोस में मेजर जनरल से लेकर हवलदार तक कई पूर्व आईएसआई अधिकारी रहते हैं। निज्जर को खत्म करने की साजिश में इन्हीं लोगों में से कुछ मदद भी ली जा सकती है, ताकि स्थानीय ड्रग कारोबार पर राव और कियानी का सीधा नियंत्रण हो सके। सूत्रों ने कहा कि निज्जर समय के साथ शक्तिशाली होता जा रहा था और स्थानीय कनाडाई समुदाय में भी लोकप्रियता हासिल कर रहा था। दूसरी ओर राहत राव, तारिक कियानी और अलगाववादी नेता गुरचरण पुन्नुन की तिकड़ी ड्रग और इमीग्रेशन बिजनेस को नियंत्रित करना चाहती थी। अपनी आय के प्रमुख स्रोत्र को बरकरार रखने के लिए वे इस ऑपरेशन में शामिल हुए। सूत्रों ने कहा कि वधावा सिंह और रणजीत सिंह नीता जैसे पाकिस्तान स्थित कम्युनिटी लीडर्स के साथ भी हरदीप सिंह निज्जर की निकटता भी आईएसआई के लिए एक समस्या थी।
87 देशों के सिखों तक खालिस्तान की मुहिम फैलाने की साजिश
खालिस्तान को लेकर खतरनाक मंसूबों वाली एक बड़ी बैठक सितंबर के पहले सप्ताह में अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में की गई। इस बैठक में दुनिया के चौदह देशों के 40 खालिस्तानी चरमपंथियों ने शिरकत की। केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में 87 देश में अपनी खतरनाक खालिस्तान मुहिम को बढ़ावा देने के लिए ‘मिशन सिख जॉइंट’ को आगे बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा हुई। बैठक में मौजूद चरमपंथियों ने तय किया कि खालिस्तान की आवाज उठाने और जनमत संग्रह में सिखों को शामिल करने के लिए जो खतरनाक कदम उठाने होंगे वे उठाए जाएंगे।
कनाडा में हिंदू फोरम की मांग, खालिस्तानी पन्नू पर लगे प्रतिबंध
हिंदू फोरम कनाडा ने खालिस्तानी आतंकी गुरुपतवंत सिंह पन्नू की तरफ से अल्पसंख्यक हिंदुओं को कनाडा छोड़ने की धमकी देने के मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग की है। फोरम के वकील पीटर थॉर्निंग ने आव्रजन मंत्री मार्क मिलर से पन्नू के कनाडा में प्रवेश पर पाबंदी लगाने का अनुरोध करते हुए पत्र लिखा है। थॉर्निंग ने मिलर को बताया है कि पन्नू की धमकियों के चलते कनाडाई हिंदू समाज भयभीत है। पन्नू के वीडियो की वजह से खासतौर पर स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले बच्चों पर असर पड़ रहा है। थॉर्निंग ने कहा कि भारत-कनाडा मित्र देश हैं। भारत ने पन्नू को आतंकी घोषित कर रखा है, ऐसे में कनाडा को भी पन्नू पर कार्रवाई करते हुए उसके संगठन सिख फॉर जस्टिस पर रोक लगाना चाहिए।
कनाडा में हो रहे भारत विरोधी और खालिस्तान समर्थक प्रदर्शन
केंद्र की मोदी सरकार शुरू से ही आतंकियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाए हुए है। केंद्र सरकार ने खालिस्तान समर्थक गुरपतवंत सिंह पन्नु को आतंकी घोषित कर रखा है। वो सिक्ख फॉर जस्टिस (एसएफजे) नामक संगठन कनाडा से चलाता है। पन्नु कनाडा में चल रहे भारत विरोधी प्रदर्शनों में कई बार शामिल हो चुका है। वो कई बार सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड कर भारतीयों और भारत सरकार को धमकियां देता है। दो दिन पहले ही पन्नु ने कनाडा में बसे हिन्दुओं को कनाडा छोड़ जाने की धमकी दी है। पन्नु ने ही खालिस्तान नामक देश भारत से अलग करने की मुहिम चलाई हुई है, जिसमें कनाडा में हजारों लोग जुड़े हुए हैं। उन्होंने खालिस्तान देश का अलग ही नक्शा भी जारी किया है। पन्नु को वहां शरण देने के संबंध में भारत सरकार अपनी आपत्ति कनाडा सरकार को दर्ज करवा चुकी है।
खालिस्तान के नक्शे में प्रदेश के इन सरहदी जिलों को किया शामिल
इतनी ही नहीं खालिस्तान का ऐसा एक नक्शा इन दिनों सोशल मीडिया पर फिर से वायरल है। इसमें भारत के कुछ राज्यों के कई जिले शामिल हैं।  इस नक्शे में राजस्थान के भी 10 जिलों को शामिल किया गया है। राजस्थान की बात करें तो नक्शे में पंजाब से सटे श्रीगंगानगर, अनूपगढ़, बीकानेर, जोधपुर, अलवर, खैरथल, भरतपुर, डीग, बूंदी और कोटा को दिखाया गया है। हालांकि हाल ही में बने अनूपगढ़, खैरथल और डीग जिले को अलग से मेंशन नहीं किया गया है। क्योंकि ये नक्शा कुछ पुराना है, तब ये जिले अस्तित्व में ही नहीं आए थे। खास बात ये है कि 2 साल पहले भी ये नक्शा सामने आया था। अब कनाडाई प्रधानमंत्री ट्रूडो के खुलकर खालिस्तानियों के समर्थन में आने के कारण खालिस्तान मूवमेंट बढ़ने के बाद एक बार फिर ये नक्शा चर्चा में है। इस नक्शे में पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली सहित उत्तरप्रदेश और राजस्थान के हिस्सों को दिखाया गया है।
खालिस्तानियों ने किया मंत्री पुत्र का अपहरण, भैरोसिंह सरकार ने बचाया था
पंजाब का पड़ोसी राज्य होने से राजस्थान में खालिस्तानी आतंक का खतरा पहले भी बना रहा है। वर्ष 1995 में इंदिरा गांधी के करीबी रह चुके केंद्रीय मंत्री और राजस्थान के दिग्गज नेता रामनिवास मिर्धा के बेटे राजेंद्र मिर्धा को खालिस्तानी आतंकियों ने फरवरी 1995 में किडनैप कर लिया था। उन्होंने राजेंद्र मिर्धा को छोड़ने के बदले जनवरी, 1995 में पकड़े गए खालिस्तान समर्थक भुल्लर को छोड़ने की मांग की थी। राजेन्द्र मिर्धा के अपहरण के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री भैंरोसिंह शेखावत सरकार ने कई टीमें इस केस के लिए गठित कीं। उनमें से एक इंटेलीजेंस टीम में शामिल रहे अफसर हुकुम सिंह के मुताबिक मिर्धा का अपहरण खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (केएलएफ) और अन्य 27-28 संगठनों से जुड़े लोगों ने किया था। जयपुर में हुए पुलिस एनकाउंटर में एक खालिस्तान समर्थक नवनीत सिंह कादिया मारा गया और राजेंद्र मिर्धा को सुरक्षित बचा लिया गया। एनकाउंटर में तीन खालिस्तानी समर्थक दया सिंह लाहौरिया, हरनेक सिंह भप और सुमन सूद भागने में कामयाब हो गए।
खालिस्तानी नक्शे में पाकिस्तानी पंजाब का जिक्र नहीं
खालिस्तान का जो नक्शा दिखाया गया है, उसमें भारतीय पंजाब से सटे हुए पाकिस्तानी पंजाब का जिक्र तक नहीं है। ये हैरान करने वाला इसलिए है कि क्योंकि पाकिस्तानी पंजाब भारतीय पंजाब से भी करीब 30 प्रतिशत बड़ा है। राजस्थान के जो जिले नक्शे में दिखाए गए हैं, खालिस्तानियों का दावा है कि उनमें खालिस्तान मूवमेंट से सहानुभूति रखने वाले कुछ लोग हैं। राजस्थान के श्रीगंगानगर, अनूपगढ़, बीकानेर, फलोदी, बीकानेर व जोधपुर सरहदी इलाके हैं। इनकी सरहद उत्तर में पंजाब और पश्चिम में पाकिस्तान से सटी हुई है। पाकिस्तान से सटी बार्डर पर अक्सर ड्रग्स व हथियारों की तस्करी के मामले सामने आते रहे हैं। कई बार बीएसएफ ने वहां ड्रोन, प्रशिक्षित कबूतर और बाज जैसे पक्षियों को पकड़ा है जो पाकिस्तान से भारत की तरफ आते हैं।
पहले केवल सरहदी जिले खालिस्तानी नक्शे में थे, अब पांच और शामिल
राजस्थान में पुलिस महानिदेशक रहे बी. एल. सोनी के मुताबिक 1990-92 के बीच पंजाब में खालिस्तानी आतंक चरम पर था। तब तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत ने 15 फरवरी 1992 को एसपी एंटी टेरेरिस्ट ऑपरेशन राजस्थान (कैम्प श्रीगंगानगर) पोस्ट बनाई थी। इसका ऑफिस श्रीगंगानगर में था और इसके पहले एसपी वो खुद थे। उन्होंने भास्कर को बताया कि तब जयपुर से वाहन, संसाधन, फोर्स, हथियार आदि श्रीगंगानगर भेजे गए। बाद में पंजाब में खालिस्तानी आतंक के खात्मे के साथ ही यह पोस्ट और यह कैम्प ऑफिस मर्ज हो गए। इसके बाद राजस्थान में एटीएस (एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाएड) बनाई गई। सोनी का कहना है कि खालिस्तानी आतंकी उस दौर में भी राजस्थान के सरहदी जिलों को अपने नक्शे में दिखाते थे। लेकिन अब तो बूंदी, कोटा, जोधपुर, अलवर व भरतपुर जैसे जिलों को खालिस्तान के नक्शे में दिखाया जा रहा है। इन जिलों को उस दौर के खालिस्तानी नक्शे में नहीं दिखाया गया था।