Showing posts with label mns. Show all posts
Showing posts with label mns. Show all posts

महाराष्ट्र : माहिम के बाद अब पनवेल वाली दरगाह हटाने की माँग

मुंबई में राज ठाकरे की मनसे ने अब पनवेल की दरगाह को ध्वस्त करने की माँग की (चित्र साभार- @VaibhavVelapur5)
राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने अब मुंबई के पनवेल में अवैध दरगाह हटाने की माँग उठाई है। मनसे का दावा है कि अवैध दरगाह के नाम पर लगभग 15 साल पहले पहाड़ी क्षेत्र पर अतिक्रमण किया गया था। राज ठाकरे के संगठन ने इसे देश की आतंरिक सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए नवी मुंबई में प्रस्तावित हवाई अड्डे के निर्माण में भी बाधक कहा है। शनिवार (24 मार्च 2023) को इस बाबत राज ठाकरे की पार्टी ने सरकार को सम्बोधित करते हुए एक बैनर भी जारी किया।

मनसे कार्यकर्ताओं ने पनवेल की मजार हटाने की माँग के साथ एक वीडियो भी जारी किया है। वीडियो में उनके पीछे मजार का एक बड़ा सा पोस्टर भी दिखाई दे रहा है। पोस्टर में बड़े शब्दों में हरे रंग से ‘लैंड जिहाद’ लिखा हुआ है। इसके ऊपर देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे से माँग की गई है कि नवी मुंबई के विकास के लिए पनवेल की अवैध दरगाह को हटाया जाए।

अंत में लिखा गया है, “तुम रुकोगे या नहीं।” इस बैनर मनसे पदाधिकारी योगेश जनार्दन चिले की तरफ से जारी किया गया है। हरे रंग के ही बैकग्राउंड में बने इस बैनर के बीच में दरगाह की बड़ी सी फोटो भी लगाई गई है।

इस दरगाह को हटाने की माँग करते हुए कुछ मनसे कार्यकर्ता पहले राज ठाकरे की माँग पर हटी माहिम की दरगाह का जिक्र करते दिखाई दे रहे। बाद में उन्होंने प्रदेश में अब हिंदूवादी सरकार होने की बात कहते हुए लगाए गए बैनर में की गई माँग को पूरी करने की माँग की है।

MNS कार्यकर्ताओं ने कहा कि पनवेल की दरगाह से पूरे हवाई अड्डे पर नजर रखी जा सकती है जो सुरक्षा के नजरिए से खतरनाक है। वीडियो के अंत में कहा गया है कि अगर दरगाह के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो पनवेल प्रशासन के खिलाफ महामोर्चा बनाया जाएगा।

इसी सप्ताह राज ठाकरे की माँग पर माहिम में एक अवैध दरगाह को प्रशासन द्वारा गुरुवार (23 मार्च 2023) को  ध्वस्त कर दिया गया था। 24 मार्च (शुक्रवार) को राज ठाकरे ने इस कार्रवाई के लिए मुंबई प्रशासन को धन्यवाद दिया है। अपने ट्वीट में राज ठाकरे ने माहिम दरगाह से पहले और बाद के चित्र को भी शेयर किया है। 

मुंबई में समुद्र के बीच बने ‘दरगाह’ पर चला बुलडोजरः राज ठाकरे ने उठाया था सवाल, कहा था- नहीं हटा तो बनेगा गणपति मंदिर

                              मुंबई में अवैध दरगाह पर चला प्रशासन का बुलडोजर (फोटो साभार- एएनआई)
मुंबई के माहिम में समुद्र किनारे बनाए गए अवैध दरगाह को तोड़ दिया गया है। गुरुवार (23 मार्च 2023) को सुबह 8 बजे ही अधिकारी मौके पर पहुँच गए। भारी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती के बीच बुलडोजर चलाकर अवैध दरगाह को तोड़ दिया गया। दरगाह के मलबे को बाहर निकालने के लिए कई ट्रकों को लगाया गया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने बुधवार (22 मार्च) को ही यह मुद्दा उठाया था।

मुंबई के माहिम में भी प्रशासन की तरफ से अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की गई। दरगाह को तोड़ने से पहले भारी पुलिस बल की तैनाती की गई। बुधवार को गुड़ी पड़वा के अवसर पर आयोजित MNS की रैली को संबोधित करते हुए राज ठाकरे ने कहा था कि 2 साल पहले यहाँ कुछ नहीं था। अब अवैध रूप से मजार बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस और बीएमसी के लोग सोए हुए हैं।

अपने भाषण के दौरान राज ठाकरे ने पूछा कि यह किसकी दरगाह है? क्या यह किसी मछली की है? मनसे प्रमुख ने चेतावनी देते हुए कहा कि यह अवैध निर्माण तुरंत नहीं गिराया गया तो इसी स्थान पर गणपति मंदिर की स्थापना की जाएगी। इसके लिए राज ठाकरे ने प्रशासन को एक महीने का समय दिया था।

मनसे के अधिकारिक ट्विटर हैंडल से अवैध दरगाह को लेकर वीडियो शेयर करते हुए लिखा गया कि समुद्र के बीच एक नया हाजी अली तैयार किया जा रहा है। पुलिस और नगरपालिका को इसकी भनक भी नहीं लगी।

पोस्ट किए गए वीडियो में माहिम बीच से कुछ ही दूरी पर समुद्र में एक निर्माणाधीन दरगाह को देखा जा सकता है। कुछ लोग यहाँ पानी से गुजरते और दरगाह पर प्रार्थना करते देखे जा सकते हैं। इस वीडियो को मनसे प्रमुख ने अपने कार्यक्रम के दौरान भी चलवाया था।

रिपोर्टों के मुताबिक इस अवैध दरगाह को तोड़ने के आदेश मुंबई के रेजिडेंट कलेक्टर ने दिए थे। प्रशासन की कार्रवाई के दौरान कलेक्टर और डीसीपी भी मौके पर मौजूद रहे।

इन्हें भला इलाज की क्या जरूरत, गोली मार देनी चाहिए: राज ठाकरे, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख

ED questions Raj Thackeray - The Hindu BusinessLineमहाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने तबलीगी जमात के लोगों की उद्दंडता पर सख्त कार्यवाही की माँग की है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कोरोना संक्रमण की आशंका के चलते क्वारन्टाइन किए गए लोगों द्वारा नर्सों और दूसरे मेडिकल स्टॉफ के साथ जारी अभद्र व्यवहार पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसे लोगों को गोली मार देनी चाहिए।
राज ठाकरे ने ऐसे लोगों को दिए जा रहे उपचार पर सवाल करते हुए कहा, “इस तरह के लोगों का इलाज करने की जरूरत ही क्या है? इन्हें बुरी तरह पीटते हुए विडियो बना कर उसे वायरल कर देना चाहिए। जिससे लोगों में सरकार के प्रति कुछ भरोसा पैदा हो।”
जिस तरह तबलीगी जमात के लोग परहेजी खाने की बजाए बिरयानी और एग करी की मांग, नर्सों के सामने निर्वस्त्र होने से चहुँ ओर तबलीगी जमात की आलोचना हो रही है। 
प्रधानमंत्री मोदी के 5 अप्रैल को 9 बजे 9 मिनट के लिए घरों की लाइट बंद कर, दीया/मोमबत्ती/मोबाइल फोन टॉर्च जला, कोरोना के खिलाफ देश की संयुक्त पहल दर्शाने की अपील पर राज ठाकरे ने कहा कि बेहतर होता कि प्रधानमंत्री कोरोना के संदर्भ में देश की वर्तमान स्थिति और कोरोना के खिलाफ लड़ाई में देश कहाँ खड़ा है, इस पर कोई बात कहते।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने कहा, “दिल्ली के निजामुद्दीन के मरकज में यह तबलीगी जमात वाली मीटिंग लॉकडाउन के वक्त हुई। जमात के इस जमावड़े से कोरोना से जंग को नुकसान पहुँचा। ऐसे लोगों को तो गोली मारकर खत्म कर देना चाहिए। उन्हें भला इलाज की क्या जरूरत? एक अलग कानून बनाकर उन लोगों का इलाज रोक देना चाहिए। यदि वे सोचते हैं कि उनका धर्म देश से बड़ा है और वे कुछ साजिश कर रहे हैं… वे लोगों पर थूक रहे हैं… वे नर्सों से अभद्रता कर रहे हैं… तो उन्हें सबक सिखाने की जरूरत है।”
राज ठाकरे ने मीडिया से बात करते आगे कहा कि यह समय एक दूसरे पर दोषारोपण का नहीं है। न ही ये समय धर्म की बात करने का है। लेकिन मुस्लिम समुदाय के भीतर मौजूद कुछ सेक्शन जिस तरह की बात कर रहे हैं, वो पिटाई माँगते हैं। ठाकरे ने कहा, “उन्हें याद रखना चाहिए कि लॉकडाउन केवल कुछ दिनों के लिए है और उसके बाद हम उनके पीछे होंगे।” ठाकरे ने उन मौलवियों के भी लापता हो जाने की बात कही जो चुनाव के समय तो अपने लोगों को प्रभावित करने की कोशिश करते खूब दिखते हैं, किन्तु आज अपने लोगों को अनुशासन का पाठ पढ़ाने की जगह गायब हो रखे हैं।
अवलोकन करें:-
About this website
NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार कोरोना वायरस से असम अभी तक काफ़ी हद तक बचा हुआ था लेकिन तबलीगी जमात वालों के कारण अब उत्....
लॉकडाउन बढ़ने की आशंका भी राज ठाकरे ने जताई। उन्होंने कहा कि यदि लोगों ने अनुशासित व्यवहार नहीं किया तो लॉकडाउन बढ़ाया जा सकता है जो आर्थिक संकट को बढ़ाने वाला होगा। साथ ही ठाकरे ने डॉक्टरों, पुलिस और पानी, बिजली, अनाज आदि की व्यवस्था में लगे दूसरे सरकारी विभागों की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि ये सभी अपने जीवन को संकट में डालकर लोगों की सेवा कर रहे हैं।

क्या राज ठाकरे के लिए संजीवनी साबित होगा उद्धव का ये राजनीतिक कदम?

शिवसेना, बालासाहेब ठाकरे, उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे, शिवाजी पार्क, Shiv Sena, Balasaheb Thackeray, Uddhav Thackeray, Raj Thackeray, Shivaji Park,1993 में हुए मुंबई दंगों (1993 Mumbai Blast) के बाद शिवसेना का नाम देशभर में पहचाना जाने लगा था। बाल ठाकरे के तीखे बयानों से समाचार में दिलचस्पी रखने वाले लोगों का ध्यान बरबस शिवसेना की तरफ चला जा रहा था। लेकिन साल 2000 के बाद शिवसेना से एक और चेहरा लोगों का ध्यान खींचने लगा था। लोगों के बीच आम धारणा बनने लगी थी कि यही लड़का बाल ठाकरे की गद्दी संभाल सकता है। वो बाल ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे थे। राज ठाकरे के बोलने के अंदाज और भाव-भंगिमाओं से भी बाल ठाकरे की झलक आती थी/आती है। लेकिन लोगों की ये धारणा साल 2006 में टूट गई। जब काफी गर्मागर्मी के बाद बाल ठाकरे ने अपनी अलग पार्टी बनाई जिसका नाम रखा महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना
राज ठाकरे ने आरोप लगाकर छोड़ी थी शिवसेना
राज ठाकरे ने जब परिवार से अलग हटकर नई पार्टी बनाई थी तब उन्होंने आरोप लगाया था कि शिवसेना को 'क्लर्क चला रहे हैं।' उन्होंने कहा था कि पार्टी अपनी पुरानी चमक खो चुकी है। हालांकि नई पार्टी के गठन और पारिवारिक विवाद पर कभी-कोई बात खुले रूप में सामने नहीं आई। लेकिन ऐसा माना जाता है कि राज ठाकरे को लगने लगा था कि पार्टी की जिम्मेदारी उद्धव को ही दी जाएगी। राज ठाकरे लोगों के बीच अपनी लोकप्रियता से भी वाकिफ थे। हालांकि सारे विवाद के बावजूद कभी राज ठाकरे ने बाल ठाकरे के खिलाफ एक भी शब्द नहीं कहा। यहां तक कि जब 9 मार्च 2006 को जब राज ठाकरे ने पार्टी की स्थापना की तब भी उन्होंने बाल ठाकरे के बारे में कहा था कि वो मेरे आदर्श थे, हैं और रहेंगे

राज ठाकरे की पार्टी और शिवसेना में विवाद
एमएनएस बनने के कुछ महीने बाद ही अक्टूबर 2006 में शिवसेना और एमएनएस कार्यकर्ताओं में झड़प हुई थी। शिवसेना कार्यकर्ताओं का आरोप था कि एमएनएस कार्यकर्ताओं ने पार्टी के पोस्टर फाड़ दिए जिनमें बाल ठाकरे की तस्वीरें लगी हुई थीं। वहीं एमएनएस कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाए कि शिवसेना कार्यकर्ताओं ने राज ठाकरे की होर्डिंग्स नीचे गिरा दीं। जैसे ही इन घटनाओं की खबर फैली तो पार्टियों के कार्यकर्ता शिवसेना भवन के पास इकट्ठे हुए और एक-दूसरे पर पत्थरबाजी की। बाद में उद्धव और राज ठाकरे के पहुंचने के बाद मामला शांत हुआ। मामले में FIR हुई। लेकिन दोनों पक्षों में से कोई अपनी गलती मानने को तैयार नहीं था। इसके बाद भी शिवसेना और एमएनस कार्यकर्ताओं में झड़प की खबरें आईं
बाल ठाकरे ने कहा-राज ने पीठ में छूरा घोंपा
उसी दौरान उत्तर भारतीयों के खिलाफ दिए गए बाल ठाकरे के बयानों को लेकर एक संसदीय कमेटी बनाई गई थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए राज ठाकरे ने कहा था कि अगर कमेटी ने बाल ठाकरे को समन भेजा तो वो उत्तर प्रदेश और बिहार से एक भी नेता को मुंबई में घुसने नहीं देंगे। लेकिन बाल ठाकरे ने इस पर राज को तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि राज ने पीठ में छुरा भोंका है अब आंसू बहाने की जरूरत नहीं
2009 में जीती 13 सीटें
राजनीति की शुरुआत राज ठाकरे ने बेहद उग्र तरीके से की थी। पार्टी बनने के साथ ही अगले कुछ सालों तक मराठी मानुष का मुद्दा हर कुछ समय बाद छाया रहता था। कई बार उत्तर भारतीयों के साथ हिंसा की घटनाएं घटीं जिनमें पार्टी के कार्यकर्ता गिरफ्तार हुए। इस सब घटनाओं से मराठी वोटरों की दिलचस्पी राज ठाकरे और उनकी पार्टी में जगी और 2009 के विधानसभा चुनाव में एमएनएस 13 सीटें जीतने में कामयाब रही। तब राज ठाकरे के उभार को लेकर मीडिया में काफी सुर्खियां मिलीं
वन टाइम वंडर
2009 के चुनाव की सफलता दोहराने में राज ठाकरे नाकामयाब रहे। 2014 और 2019 के विधानसभा चुनावों में उनकी पार्टी हालत बेहद पतली हो गई। आज तक पार्टी एक भी बार अपना सांसद नहीं जितवा सकी है। यानी अब लोकसभा में पार्टी का एक भी सांसद नहीं पहुंचा है। कह सकते हैं राज ठाकरे ने जिन उद्देश्यों के साथ पार्टी खड़ी की थी वो अभी तो पूरे होते नहीं दिख रहे हैं

क्या अब है मौका?
2019 के विधानसभा चुनाव के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक दिलचस्प गठबंधन बना है। लंबे समय तक एक दूसरे के खिलाफ खड़े शिवसेना और कांग्रेस-एनसीपी अब एक हो गए हैं। इन सबके मुखिया बने हैं उद्धव ठाकरे। उद्धव अब राज्य के मुख्यमंत्री बनेंगे. संवैधानिक मर्यादाओं से बंधने के कारण उद्धव अब निश्चित तौर पर पहले जैसे आक्रामक नहीं हो पाएंगे। खुद शिवसेना को भी अपने कदम संभाल कर रखने होंगे क्योंकि एनसीपी और कांग्रेस का भी दबाव काम करेगा। शिवसेना का एजेंडा कांग्रेस-एनसीपी से बिल्कुल अलग है। ऐसे में अगर उद्धव को अपनी सरकार चलानी है तो संभल कर चलना होगा।

लेकिन क्या ऐसी परिस्थितियां राज ठाकरे के लिए नई राहें खोलेंगी? शिवसेना के सरकार में होने के कारण अब राज ठाकरे के पास शिवसेना की राजनीति का खाली स्पेस भरने का मौका भी बन सकता है। संभव है कि निकट भविष्य में महाराष्ट्र में मराठी मानुष या उत्तर भारतीयों के खिलाफ राजनीति देखने को मिल सकती है

Pulwama Attack: टी-सीरीज ने पाकिस्तानी सिंगर्स के खिलाफ उठाया ये बड़ा कदम

एमएनएस चित्रपट सेना के हेड अमेय खोपकर ने कहा, ‘हमने इंडियन म्यूजिक कंपनी जैसे टी-सीरीज, सोनी म्यूजिक, वीनस, टिप्स म्यूजिक आदि कंपनी से बात की थी और उन्हें कहा था कि वो पाकिस्तानी सिंगर्स के साथ काम न करें। इन कंपनियों को उनके साथ काम करना जल्दी बंद करना होगा नहीं तो हम इनके खिलाफ अपने स्टाइल से एक्शन लेंगे।’
पुलवामा में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। पूरा देश इस घटना से गुस्से में है। फरवरी 16 को मुंबई में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की फिल्म विंग ने फरवरी 16को संगीत कंपनियों से पाकिस्तानी गायकों के साथ काम नहीं करने के लिए कहा है।
हाल ही में भूषण कुमार की टी सीरीज कंपनी पाकिस्तानी सिंगर राहत फतेह अली खान और आतिफ असलम के साथ 2 अलग-अलग गानों के लिए जुड़े थे। हालांकि खोपकर ने दावा किया है कि उन्होंने हमारी चेतावनी के बाद गानों को हटा दिया है।
इससे पहले 2016 में उरी हमले के बाद राज ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी ने भारत में काम करने वाले सभी पाकिस्तानी कलाकारों को देश छोड़ने के लिए कहा था।
पुलवामा आतंकी हमले के विरुद्ध छात्र भी सडकों पर 
पुलवामा में हुए आतंकी हमले के विरोध में लोग सड़कों पर उतर आए। वहीं छात्र संगठनों ने भी रोष जाहिर किया। छात्र संगठनों ने अपने-अपने कॉलेजों में इसका विरोध किया। वहीं संगठनों ने कैंडल मार्च भी निकाला। आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए छात्र संगठनों ने हमला करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।  राजकीय पॉलिटेक्निक पित्थुवाला में पुलवामा में आतंकी में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी। कॉलेज प्राचार्य एके सक्सेना ने कहा कि पूरे देश के लिए शोक का विषय है। इसके खिलाफ पूरे देश को एक होना चाहिए। श्रद्धांजलि सभा में समस्त छात्र और शिक्षक मौजूद रहे। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ जवानों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान राज्यसचिव देवेंद्र रावल, जिला सचिव हिमांशु चौहान, नितेश खंतवाल, सुमन, सोनाली, सुप्रिया, आशु, शैलेंद्र , मनीष, मनोज, इंदु  मौजूद रहे। 
अवलोकन करें:-
इस वेबसाइट का परिचय

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
पुलवामा आतंकी हमले के बाद बड़ा कदम उठाते हुए जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने मीरवाइज उमर फारुक समेत पांच अलगाववादी नेताओ.....

वहीं उत्तरांचल विश्वविद्यालय में सीआरपीएफ के जवानों को श्रद्धांजलि दी गई।  विवि के चांसलर जितेंद्र जोशी के नेतृत्व में कैंडल मार्च निकाला गया। लॉ कॉलेज के प्राचार्य डा. राजेश बहुगुणा ने छात्रों से आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार रहने की अपील की। छात्रों ने डीएवी कॉलेज से मार्च निकाला। वहीं एसजीआरआर पीजी कॉलेज छात्रसंघ ने कॉलेज गेट से कारगी चौक तक कैंडल मार्च निकाला। सीएमआई अस्पताल में डाक्टरों, कर्मचारियों एवं सीआईएमएस नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं ने दो मिनट का मौन रख श्रद्धांजलि दी।
अखिल गढ़वाल सभा ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि 
देहरादून। अखिल गढ़वाल सभा की ओर से भी शहीदों को श्रदांजलि दी। सभा के अध्यक्ष रोशन धस्माना, पूर्व सैनिक जगदीश प्रसाद रतूड़ी, कृष्ण मोहन बहुगुणा आदि मौजूद रहे।
राज्यपाल ने किए कार्यक्रम रद
राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने अपने सभी कार्यक्रम और मुलाकातों को रद कर दिया। राजभवन में चार बजे आयोजित शोकसभा में राजभवन अधिकारी और कर्मचारी एकत्र हुए। राज्यपाल ने आतंकी हमले को कायरतापूर्ण बताया।
भाजपा ने दी श्रद्धांजलि, भाजयुमो ने किया प्रदर्शन 
देहरादून। भाजपा युवा मोर्चा ने आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी। साथ ही पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन किया।भाजपा युवा मोर्चा से जुड़े कार्यकर्ता लैंसडौन चौक पर एकत्र हुए। यहां पाकिस्तान का पुतला फूंककर प्रदर्शन किया। उधर, शहीद जवानों को भाजपा प्रदेश कार्यालय में भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। वरिष्ठ उपाध्यक्ष ज्योति प्रसाद गैरोला की अध्यक्षता में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में विधायक हरबंस कपूर, महामंत्री नरेश बंसल डॉ. देवेंद्र भसीन आदि मौजूद रहे।
आराघर के कारोबारियों ने निकाला कैंडल मार्च
देहरादून। पुलवामा में आतंकवादी हमले में शहीद सैनिकों को आराघर व्यापार मंडल और क्षेत्र के लोगों ने शुक्रवार शाम कैंडल मार्च निकालकर श्रद्धांजलि दी। कारोबारियों ने लक्ष्मी नारायण मंदिर से आराघर चौक तक कैंडल मार्च निकाला और वीर शहीदों की आत्मशांति के लिए दो मिनट का मौन रखा। इस मौके पर ऋषि नंदा, सौरभ शर्मा, अंकित वर्मा, महेश कौशल, जगमोहन मल्होत्रा, बलवंत नेगी, हाविंदर नेगी, सतीश कनौजिया, बिशाल नेगी, राकेश कुमार, गोपाल कनौजिया, रीना देवी मौजूद रहे।
पूर्व सैनिक संगठन ने दी शहीदों को श्रद्धाजंलि 
देहरादून। पुलवामा शहीद जवानों को पीबीओआर पूर्व सैनिक कार्यकारिणी ने श्रद्धांजलि दी। इस दौरान शोक सभा में पूर्व सैनिक संगठन के महसचिव कैप्टन आरडी शाही, संगठन मंत्री कैप्टन सुरेन्द्र सिंह बिष्ट, यूडी जोशी, वाईडी शर्मा, मेजर शंकर क्षेत्री, महिला अध्यक्ष राजकुमारी थापा, रमेश रावत, कैलाश चन्द, केबी गुरुंग, मेजर प्रेम सिंह रावत, विनोद बलूनी, महिला सचिव माधुरी राई, बीर बहादुर, जेबी राना, राजेश रावत मौजूद रहे।
पेंशनर्स एसोसिएशन ने जताया दुख
सेवानिवृत राजकीय पेंशनर्स संगठन से जुड़े सदस्यों की ओर से गांधी पार्क में शहीदों के सम्मान में दो मिनट का मौन रख श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान पीडी गुप्ता, गिरीश भट्ट, संतोष कुमार, नारायण सिंह राणा, एमएस गुसाईं, जेपी टुकेजा, वेद किशोर शर्मा, जेएन अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
दून न्यूज पेपर एजेंट एसोसिएशन ने जताया दुख
दून न्यूज पेपर एजेंट एसोसिएशन ने भी पुलवामा घटना पर गहरा दुख व्यक्त कर शहीदों की आत्मा की शांति की कामना की। इसमें राजवीर जागी, हरप्रीत, ललित जोशी, राजकुमार तिवारी, कैलाश,मनीष, विजेंद्र सेमवाल आदि मौजूद रहे। अजबपुर खुर्द में भी शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई।