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ठाकरे सरकार संकट में : NCP और कांग्रेस के सीनियर नेता नाराज

Image result for उद्धव ठाकरे शरद पवारएल्गार परिषद केस को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस (NCP) के प्रमुख और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार ने महाराष्ट्र सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। बता दें कि इस मामले की जाँच अब केंद्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई है, जिसको लेकर शरद पवार ने उद्धव ठाकरे सरकार की आलोचना की है। शरद पवार का कहना है कि कानून व्यवस्था का मामला राज्य का है और राज्य सरकार को केंद्र के ऐसे निर्णय का समर्थन नहीं करना चाहिए।
महाराष्ट्र के कोल्हापुर में शरद पवार ने इस मसले पर खुलकर बात की। उन्होंने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर जाँच को राज्य से वापस अपने हाथ में लेने का आरोप लगाया। शरद पवार का कहना है कि भीमा कोरेगाँव मामले में महाराष्ट्र सरकार कुछ एक्शन लेने वाली थी, इसलिए केंद्र ने एल्गार परिषद के मामले को अपने हाथ में ले लिया।
एनसीपी चीफ शरद पवार ने कहा, “मामले की जाँच NIA को सौंपकर केंद्र सरकार ने ठीक नहीं किया और इससे भी ज्यादा गलत बात यह हुई कि राज्य सरकार ने इसका समर्थन किया।” गौरतलब है कि एनसीपी, शिवसेना के नेतृत्व वाले महा विकास आघाड़ी सरकार की सहयोगी है और इसके नेता अनिल देशमुख राज्य के गृहमंत्री हैं।
शरद पवार इस मामले की स्वतंत्र जाँच की माँग उठा चुके थे। शिवसेना के साथ सरकार बनने के बाद इसकी संभावना भी दिखने लगी थी, मगर अचानक से महाराष्ट्र सरकार ने इस मामले में यू टर्न ले लिया और पुणे की कोर्ट ने मामला NIA कोर्ट के सुपुर्द कर दिया। इस कदम के बाद अब गृह मंत्री अनिल देशमुख कह रहे हैं कि इस पर आखिरी फैसला मुख्यमंत्री का ही होता है। जिस कारण एनसीपी प्रमुख इसको लेकर काफी खफा हो गए हैं।

वहीं कांग्रेस पार्टी के नेता भी एल्गार परिषद केस की जाँच को लेकर अपने आलाकमान पर निशाना साध रहे हैं। कांग्रेस नेता संजय निरुपम पहले NPR को लेकर ट्वीट करते हुए पार्टी में कनफ्यूज बताया था और फिर उसके बाद उन्होंने एल्गार परिषद केस को लेकर भी इसी तरह की कनफ्यूजन की बात कही है। उन्होंने कहा कि इस को एनसीपी SIT से जाँच करवाना चाहती है। केंद्र सरकार ने इसे NIA को सौंप दी है और महाराष्ट्र के सीएम (शिवसेना) भी बीजेपी के लाइन पर चलते हुए इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई। क्या दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व को इसकी जानकारी है?
संजय निरुपम की बातों से साफ मतलब निकलता है कि अगर उन्हें इसकी जानकारी नहीं है तो क्यों नहीं है? क्या वे सत्ता में नहीं हैं? या फिर उनका इस गठबंधन में कोई अस्तित्व ही नहीं है कि वो इन्हें कुछ बताना या फिर इस पर सलाह-मशविरा करना जरूरी नहीं समझते? और यदि कांग्रेस को इस बात की जानकारी है फिर वो गठबंधन में क्या कर रहे हैं? एक तरफ वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम NPR का विरोध करने की बात कह रहे हैं और महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार ने एक मई से 15 जून के बीच NPR कराने का ऐलान किया है। या तो पार्टी टोटल कनफ्यूज है या फिर अब इनकी प्रासंगिकता ही इतनी रह गई है।

क्या राज ठाकरे के लिए संजीवनी साबित होगा उद्धव का ये राजनीतिक कदम?

शिवसेना, बालासाहेब ठाकरे, उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे, शिवाजी पार्क, Shiv Sena, Balasaheb Thackeray, Uddhav Thackeray, Raj Thackeray, Shivaji Park,1993 में हुए मुंबई दंगों (1993 Mumbai Blast) के बाद शिवसेना का नाम देशभर में पहचाना जाने लगा था। बाल ठाकरे के तीखे बयानों से समाचार में दिलचस्पी रखने वाले लोगों का ध्यान बरबस शिवसेना की तरफ चला जा रहा था। लेकिन साल 2000 के बाद शिवसेना से एक और चेहरा लोगों का ध्यान खींचने लगा था। लोगों के बीच आम धारणा बनने लगी थी कि यही लड़का बाल ठाकरे की गद्दी संभाल सकता है। वो बाल ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे थे। राज ठाकरे के बोलने के अंदाज और भाव-भंगिमाओं से भी बाल ठाकरे की झलक आती थी/आती है। लेकिन लोगों की ये धारणा साल 2006 में टूट गई। जब काफी गर्मागर्मी के बाद बाल ठाकरे ने अपनी अलग पार्टी बनाई जिसका नाम रखा महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना
राज ठाकरे ने आरोप लगाकर छोड़ी थी शिवसेना
राज ठाकरे ने जब परिवार से अलग हटकर नई पार्टी बनाई थी तब उन्होंने आरोप लगाया था कि शिवसेना को 'क्लर्क चला रहे हैं।' उन्होंने कहा था कि पार्टी अपनी पुरानी चमक खो चुकी है। हालांकि नई पार्टी के गठन और पारिवारिक विवाद पर कभी-कोई बात खुले रूप में सामने नहीं आई। लेकिन ऐसा माना जाता है कि राज ठाकरे को लगने लगा था कि पार्टी की जिम्मेदारी उद्धव को ही दी जाएगी। राज ठाकरे लोगों के बीच अपनी लोकप्रियता से भी वाकिफ थे। हालांकि सारे विवाद के बावजूद कभी राज ठाकरे ने बाल ठाकरे के खिलाफ एक भी शब्द नहीं कहा। यहां तक कि जब 9 मार्च 2006 को जब राज ठाकरे ने पार्टी की स्थापना की तब भी उन्होंने बाल ठाकरे के बारे में कहा था कि वो मेरे आदर्श थे, हैं और रहेंगे

राज ठाकरे की पार्टी और शिवसेना में विवाद
एमएनएस बनने के कुछ महीने बाद ही अक्टूबर 2006 में शिवसेना और एमएनएस कार्यकर्ताओं में झड़प हुई थी। शिवसेना कार्यकर्ताओं का आरोप था कि एमएनएस कार्यकर्ताओं ने पार्टी के पोस्टर फाड़ दिए जिनमें बाल ठाकरे की तस्वीरें लगी हुई थीं। वहीं एमएनएस कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाए कि शिवसेना कार्यकर्ताओं ने राज ठाकरे की होर्डिंग्स नीचे गिरा दीं। जैसे ही इन घटनाओं की खबर फैली तो पार्टियों के कार्यकर्ता शिवसेना भवन के पास इकट्ठे हुए और एक-दूसरे पर पत्थरबाजी की। बाद में उद्धव और राज ठाकरे के पहुंचने के बाद मामला शांत हुआ। मामले में FIR हुई। लेकिन दोनों पक्षों में से कोई अपनी गलती मानने को तैयार नहीं था। इसके बाद भी शिवसेना और एमएनस कार्यकर्ताओं में झड़प की खबरें आईं
बाल ठाकरे ने कहा-राज ने पीठ में छूरा घोंपा
उसी दौरान उत्तर भारतीयों के खिलाफ दिए गए बाल ठाकरे के बयानों को लेकर एक संसदीय कमेटी बनाई गई थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए राज ठाकरे ने कहा था कि अगर कमेटी ने बाल ठाकरे को समन भेजा तो वो उत्तर प्रदेश और बिहार से एक भी नेता को मुंबई में घुसने नहीं देंगे। लेकिन बाल ठाकरे ने इस पर राज को तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि राज ने पीठ में छुरा भोंका है अब आंसू बहाने की जरूरत नहीं
2009 में जीती 13 सीटें
राजनीति की शुरुआत राज ठाकरे ने बेहद उग्र तरीके से की थी। पार्टी बनने के साथ ही अगले कुछ सालों तक मराठी मानुष का मुद्दा हर कुछ समय बाद छाया रहता था। कई बार उत्तर भारतीयों के साथ हिंसा की घटनाएं घटीं जिनमें पार्टी के कार्यकर्ता गिरफ्तार हुए। इस सब घटनाओं से मराठी वोटरों की दिलचस्पी राज ठाकरे और उनकी पार्टी में जगी और 2009 के विधानसभा चुनाव में एमएनएस 13 सीटें जीतने में कामयाब रही। तब राज ठाकरे के उभार को लेकर मीडिया में काफी सुर्खियां मिलीं
वन टाइम वंडर
2009 के चुनाव की सफलता दोहराने में राज ठाकरे नाकामयाब रहे। 2014 और 2019 के विधानसभा चुनावों में उनकी पार्टी हालत बेहद पतली हो गई। आज तक पार्टी एक भी बार अपना सांसद नहीं जितवा सकी है। यानी अब लोकसभा में पार्टी का एक भी सांसद नहीं पहुंचा है। कह सकते हैं राज ठाकरे ने जिन उद्देश्यों के साथ पार्टी खड़ी की थी वो अभी तो पूरे होते नहीं दिख रहे हैं

क्या अब है मौका?
2019 के विधानसभा चुनाव के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक दिलचस्प गठबंधन बना है। लंबे समय तक एक दूसरे के खिलाफ खड़े शिवसेना और कांग्रेस-एनसीपी अब एक हो गए हैं। इन सबके मुखिया बने हैं उद्धव ठाकरे। उद्धव अब राज्य के मुख्यमंत्री बनेंगे. संवैधानिक मर्यादाओं से बंधने के कारण उद्धव अब निश्चित तौर पर पहले जैसे आक्रामक नहीं हो पाएंगे। खुद शिवसेना को भी अपने कदम संभाल कर रखने होंगे क्योंकि एनसीपी और कांग्रेस का भी दबाव काम करेगा। शिवसेना का एजेंडा कांग्रेस-एनसीपी से बिल्कुल अलग है। ऐसे में अगर उद्धव को अपनी सरकार चलानी है तो संभल कर चलना होगा।

लेकिन क्या ऐसी परिस्थितियां राज ठाकरे के लिए नई राहें खोलेंगी? शिवसेना के सरकार में होने के कारण अब राज ठाकरे के पास शिवसेना की राजनीति का खाली स्पेस भरने का मौका भी बन सकता है। संभव है कि निकट भविष्य में महाराष्ट्र में मराठी मानुष या उत्तर भारतीयों के खिलाफ राजनीति देखने को मिल सकती है

अजित ने मॉंगा 2.5 साल मुख्यमन्त्री पद

उद्धव ठाकरे, शरद पवार
महाराष्ट्र में आख़िरकार बनती दिख रही सरकार के आसार फिर खटाई में पड़ गए हैं। मीडिया सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि उद्धव ठाकरे पूरे 5 साल महाराष्ट्र पर राज नहीं कर पाएँगे, क्योंकि सहयोगी एनसीपी ने भी ढाई साल अपने लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी माँग ली है। गौरतलब है कि शिवसेना (56) और एनसीपी (54) की सीटों में केवल 2 विधायकों का अंतर है।
गौरतलब है कि कल तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और पाला बदल कर उनके साथ पहुँचे शरद पवार के भतीजे अजित पवार के इस्तीफ़े के बाद शिवसेना-कॉन्ग्रेस-एनसीपी ने महा विकास अघाड़ी गठबंधन के अंतर्गत सरकार बनाने की घोषणा की थी। यह भी दावा किया था कि विधानसभा चुनाव तक न लड़ने वाले शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे इस गठबंधन के सीएम होंगे।
इस बीच यह भी खबर आई थी कि भाजपा को गच्चा देने के बाद अजित पवार अपनी पार्टी में लौट भी गए हैं और ससम्मान स्वीकार भी हो गए हैं। मौजूदा खबरों में भी उनके डिप्टी सीएम बनाए जाने की बात सामने आ रही है। बहुत सम्भव है कि एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार 2.5 साल सीएम पद की माँग में भी उन्हीं का नाम आगे बढ़ा दें।
सत्ता पर अपनी जकड़ सबसे मजबूत करने का एनसीपी का व्यूह शुरू से था। जब 13 मंत्रियों और एक डिप्टी सीएम के बदले स्पीकर पद से कॉन्ग्रेस के दावा छोड़ने की बात सामने आई थी तो उसी समय यह साफ़ था कि शक्ति-संतुलन के नाम पर एनसीपी यह पद शिवसेना से छीन कर अपने पास रखेगी। इसके अलावा एक डिप्टी सीएम उसका होना ही था। ऐसे में अगर मुख्यमंत्री की कुर्सी भी उसने आधे समय के लिए छीन ही ली, तो उद्धव ठाकरे के लिए शिवसैनिकों को यह जवाब देना मुश्किल हो जाएगा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से ‘वादाखिलाफी’ करने वालों के साथ किसी तरह का समझौता न करने के नाम पर बाहर होने वाली पार्टी को यूपीए में इतने समझौते करने के बाद हासिल क्या हुआ। गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री फडणवीस ने कल अपनी प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा था कि भाजपा 2.5 साल सीएम के अलावा शिव सेना की हर शर्त पर 30 साल पुराने गठबंधन को बचाने के लिए राज़ी थी।
स्तम्भकार आनंद रंगनाथन ने इस खबर पर चुटकी लेते हुए इस प्रकरण के पहले शरद पवार की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई बैठक की याद दिलाई।
स्पीकर पद से दावा छोड़ा
कांग्रेस को स्पीकर पद नहीं उद्धव कैबिनेट में चाहिए अपने 13 मंत्री
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के तौर पर उद्धव ठाकरे के शपथ लेने से पहले कांग्रेस पार्टी ने विधानसभा के स्पीकर पद पर दावेदारी से अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस उद्धव कैबिनेट में 13 पद के लिए स्पीकर पद पर दावेदारी छोड़ने के लिए तैयार हो गई है।
शुरुआत में कांग्रेस स्पीकर पद के लिए अड़ी थी। न्यूज़18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को कैबिनेट मंत्री बनाया जाएगा। इनमें विजय नामदेवराव,यशोम्मती ठाकुर, नाना पटोले, वर्षा गायकवाड़, अमीन पटेल, अशोक चव्हाण, अमित देशमुख, विश्वजीत कदम, बंटी पाटिल और केसी पडवी आदि नेताओं के नाम शामिल हैं। वहीं चार अन्य कांग्रेस नेता राज्य मंत्री बनाए जाएँगे।
शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन सरकार में स्पीकर पद एनसीपी के पास रहेगी। एनसीपी को कैबिनेट में भी उचित हिस्सेदारी मिलेगी। महाराष्ट्र में 43 से ज्यादा मंत्री नहीं बनाए जा सकते हैं। 2003 में हुए 91वें संवैधानिक संशोधन के अनुसार राज्य कैबिनेट में विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के 15 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकते।
महाराष्ट्र के सियासी ड्रामे में एक नया मोड़ उस वक़्त आया जब अजित पवार के समर्थन से सरकार बनाने वाले देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था। बता दें कि 288 विधानसभा सीटों वाली महाराष्ट्र विधानसभा में भाजपा के पास 105 सीटें है।
फडणवीस के इस्तीफे के बाद उद्धव ठाकरे शिवसेना, एनसीपी और कॉन्ग्रेस के नेता चुने गए। तीनों दलों के इस गठबंधन को महाविकास अघाड़ी नाम दिया गया है। उद्धव गुरुवार(नवम्बर 28) को मुंबई के शिवाजी पार्क में मुख्यमंत्री के पद की शपथ लेंगे। उनके साथ छह अन्य लोगों के भी शपथ लेने की संभावना है।

महाराष्ट्र : कांग्रेस से गठबंधन की स्थिति में शिवसेना में विद्रोह

Image result for शिवसेना में विद्रोहमहाराष्ट्र में जारी राजनीतिक अस्थिरता के बीच कांग्रेस और शिवसेना ने अपने-अपने विधायकों को रिजॉर्ट में रखा हुआ है। इस बीच खबर आ रही है कि शिवसेना ने जिस रीट्रीट रिजॉर्ट में अपने विधायकों को रखा है वहां वो आपस में उलझ पड़े हैं।  शिवसेना विधायकों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे उस एनसीपी से गठबंधन की गुहार लगा रहे हैं जिसके खिलाफ उन्होंने चुनाव लड़ा था।
विधायकों ने मुख्यमंत्री पद को लेकर उद्धव ठाकरे के फैसले पर सवाल खड़े करते हुए पूछा है कि मुख्यमंत्री का पद केवल परिवार के लिए ही क्यों है। विधायकों के बीच गर्म होते माहौल के बीच आदित्य ठाकरे को रिजॉर्ट में जाना पड़ा। दरअसल विधायकों को शरद पवार के साथ गठबंधन करने का फैसला सहीं नहीं लग रहा है। उद्धव ने रिजॉर्ट पहुंचकर विधायकों को समझाने की भी कोशिश की है।
एक विधायक ने तो  उद्भव को चेतावनी दी कि पवार उन्हें कभी भी सरकार पर नियंत्रण नहीं करने देंगे और सभी मलाईदार कैबिनेट पोस्ट को छीन लेंगे। विधायकों ने इस बहस के दौरान ठाकरे से पूछा कि वे अपने वोटरों को कैसे समझाएंगे कि वे उनके साथ जा रहे हैं जिनके खिलाफ उन्होंने चुनाव लड़ा था। विधायक इस बात से भी नाराज बताए जा रहे हैं कि उन्हें अपने विधानसभा क्षेत्रों से दूर रखा जा रहा है। कुछ विधायकों को यह  भी चिंता है कि कहीं राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद दोबारा चुनाव ना हो जाएं।
महाराष्ट्र में 21 अक्टूबर को हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा को 105 सीटों पर जीत मिली थी जबकि सहयोगी शिवसेना 56 सीटें मिली थी। वहीं एनसीपी को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें मिली थी। भाजपा की अपनी सहयोगी शिवसेना के साथ मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान के चलते सरकार नहीं बना सकी जिसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया है। इस बीच शिवसेना नई सरकार के गठन के लिए कांग्रेस और एनसीपी से लगातार संपर्क बनाए हुए है।

बॉलीवुड प्रोड्यूसर अशोक पंडित ने लगाया बीजेपी और शिवसेना पर धोखा देने का आरोप, ट्वीट कर कहा- वोटर्स को ठग रहे हैं

बॉलीवुड प्रोड्यूसर ने लगाया बीजेपी और शिवसेना पर धोखा देने का आरोप, ट्वीट कर कहा- वोटर्स को ठग रहे हैं...भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना गठबंधन को महाराष्ट्र में भले ही स्पष्ट बहुमत मिला है, लेकिन सरकार बनाने को लेकर अभी भी पेंच फंसा हुआ है। शिवसेना अब इस बात पर अड़ी हुई है कि सरकार का गठन 2.5-2.5 साल के फॉर्मूले पर होना चाहिए, यानी कि 2.5 साल बीजेपी का मुख्यमंत्री और 2.5 साल शिवसेना का मुख्यमंत्री। हालांकि बीजेपी की तरफ से इस पर अभी तक कोई स्थित स्पष्ट नहीं है।
महाराष्ट्र और हरियाणा में 21 अक्टूबर को हुए विधानसभा चुनावों के बाद देश में अब इस बात को लेकर काफी चर्चा है कि दोनों ही प्रदेशों में किसकी सरकार बनेगी जहां एक तरफ हरियाणा में कांग्रेस ने बीजेपी को कड़ी टक्कर दी है, तो वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना के गठबंधन को 288 सीटों में से 161 सीटें मिली है हालांकि इस जीत के बाद भी दोनों ही पार्टियों में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर काफी मतभेद हो रहा है अब इसको लेकर अब बॉलीवुड प्रोड्यूसर अशोक पंडित का रिएक्शन आया है
अशोक पंडित ने महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के बीच चल रही इस मतभेद को लेकर एक ट्वीट किया है उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल से महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना पर गुस्सा जाहिर करते हुए कहा, 'हमने बीजेपी और शिवसेना के गठबंधन को ये सोचकर अपना वोट दिया था कि ये दोनों एक-साथ काम करेंगी लेकिन ये आपस में ही लड़कर वोटर्स को ठग रहे हैं
अशोक पंडित ने आगे लिखा, 'अगर यही मामला है तो इनमें व्यक्तिगत रूप से चुनाव लड़ने के लिए हिम्मत होनी चाहिए थी आम आदमी को इनके मामले में कोई दिलचस्पी नहीं है' बता दें, प्रोड्यूसर अशोक पंडित लगभग हर समसामयिक मुद्दे पर अपनी राय रखते नजर आते हैं उन्होंने बॉलीवुड में 'द एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर (The Accidental Prime Minister)' फिल्म प्रोड्यूस की है
Aditya Thackerayमहाराष्ट्र में फंसा पेंच: 50-50 फॉर्मूले पर अड़ी शिवसेना, कांग्रेस देखने लगी संभावनाएं
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ विधायकों की बैठक के बाद प्रताप सारनिक ने कहा, 'हमारी बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जैसे अमित शाह जी ने लोकसभा चुनावों से पहले 50-50 फॉर्मूले का वादा किया था, उसी तरह दोनों सहयोगी दलों को 2.5-2.5 साल तक सरकार चलाने का मौका मिलना चाहिए, इसलिए शिवसेना का भी सीएम बनना चाहिए। उद्धव जी को यह आश्वासन भाजपा से लिखिन में मिलना चाहिए।'


सारनिक ने कहा, 'उद्धव जी चाहते हैं कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व चाहे अमित शाह हों या देवेंद्र फडणवीस यह लिखित में दें कि भाजपा 50:50 के फॉर्मूले पर टिकेगी और दोनों दलों के बीच सीएम की सीट समान रूप से साझा की जाएगी।' उन्होंने कहा, 'हम कुछ कारणों से चुनावों में सीटों का बंटवारे 50:50 के फार्मूले से नहीं कर सके। लेकिन अब समय आ गया है कि बीजेपी चुनाव पूर्व वादे को पूरा करे। सरकार तभी बनेगी जब बीजेपी इसे लिखित में देगी कि सीएम की कुर्सी को समान रूप से बांटा जाएगा। शिवसेना के नवनिर्वाचित विधायकों ने यह भी मांग की कि अगली सरकार में आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाया जाए। सारनिक ने कहा, 'हम अगले मुख्यमंत्री के रूप में आदित्य ठाकरे को देखना चाहते हैं। लेकिन अंतिम निर्णय उद्धव जी लेंगे।'
इस बीच मुंबई में मातोश्री (ठाकरे निवास) के बाहर 'महाराष्ट्र सीएम आदित्य ठाकरे' का पोस्टर लग गया है। ऐसे में कहा जा सकता है कि शिवसेना मुख्यमंत्री पद के लिए बीजेपी के सामने शर्त रख सकती है।
वहीं बीजेपी को दिए गए शिवसेना के इस प्रस्ताव पर कांग्रेस के विजय वडेट्टीवार ने कहा, 'गेंद भाजपा पाले में है, यह शिवसेना को तय करना है कि वे 5 साल का सीएम चाहते हैं या 2.5 साल की मांग पर भाजपा की प्रतिक्रिया का इंतजार करते हैं। यदि शिवसेना का प्रस्ताव हमारे पास आता है, तो हम हाईकमान से चर्चा करेंगे।' 
इससे पहले उन्होंने कहा, 'हमें विपक्ष की भूमिका दी गई है और हम उस भूमिका को निभाएंगे लेकिन अगर किसी विकल्प पर चर्चा की जानी है तो शिवसेना को हमारे पास आना चाहिए, उन्होंने अभी तक हमसे संपर्क नहीं किया है।'
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार हरियाणा में पूर्ण बहुमत वाली बीजेपी सरकार आज लंगड़ी सरकार बनाकर भी खुश हो रही है। क्या ...

इसके अलावा एनसीपी के प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि हम विपक्ष में रहेंगे और एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाएंगे। हम सरकार बनाने में कोई भूमिका नहीं चाहते हैं, भाजपा-शिवसेना को जनादेश मिला है, इसलिए उन्हें शुभकामनाएं।
ऐसे में पूरी स्थिति को देखते हुए कहा जा सकता है कि शिवसेना अपनी मांग पूरी करवाने के लिए बीजेपी के सामने अड़ सकती है। अगर बीजेपी इस प्रस्ताव को नहीं मानती है तो शिवसेना एनसीपी और कांग्रेस से समर्थन लेकर सरकार बना सकती है। सत्ता से बीजेपी को दूर रखने के लिए कांग्रेस और एनसीपी शिवसेना का समर्थन कर सकती हैं।

‘राम मंदिर निर्माण की शुरू की जाएं तैयारियां’--योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इशारों ही इशारों में राम मंदिर निर्माण को लेकर तैयारियां शुरू करने की बात कही है. गोरखपुर में स्थित गोरखनाथ मन्दिर से भव्य विजय शोभायात्रा शुरू निकाली गई. विजय शोभायात्रा के दौरान सीएम योगी ने मंच से लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि रामलीलाओं की भव्यता के साथ-साथ समाज के इस भव्य मंदिर को भी उसी रूप में बनाने की तैयारी हमें करनी चाहिए जिस प्रकार से भव्य मंदिर के रूप में रामलीलाओं का आयोजन हम करते हैं. 
छुपे शब्दों में योगी ने जाहिर कर दी मंशा
विजय शोभायात्रा के दौरान एक मंच से बोलते हुए सीएम योगी ने इशारों ही इशारों में भव्य राम मंदिर निर्माण को लेकर अपनी मंशा जाहिर कर दी. उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की लीलाओं को देखकर हम उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारें. रामलीलाओं की भव्यता के साथ-साथ समाज के इस भव्य मंदिर को भी उसी रूप में बनाने की तैयारी हमें करनी चाहिए जिस प्रकार से भव्य मंदिर के रूप में रामलीलाओं का आयोजन हम करते हैं. उन्होंने कहा कि हमें राम मंदिर निर्माण की तैयारियां शुरू करनी चाहिए.
आरएसएस प्रमुख भागवत ने भी उठाया था राम मंदिर मुद्दा
बता दें कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने गुरूवार (18 अक्टूबर) ने सरकार से अपील की थी कि वह कानून बनाकर अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ करे. संघ द्वारा आयोजित वार्षिक विजयदशमी पर्व में बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा था कि राम जन्‍मभूमि के लिए स्‍थान का आवंटन अभी बाकी है, जबकि साक्ष्‍यों से यह स्‍पष्‍ट है कि उस जगह पर मंदिर था. यदि राजनीतिक हस्‍तक्षेप नहीं होता तो वहां पर मंदिर काफी पहले ही बन गया होता. हम चाहते हैं कि सरकार कानून बनाकर निर्माण के मार्ग को प्रशस्‍त करे. 
”राष्ट्र के ‘स्व’ के गौरव के लिए जरूरी है राम मंदिर निर्माण- भागवत
मोहन भागवत ने कहा था, ”राष्ट्र के ‘स्व’ के गौरव के संदर्भ में अपने करोड़ों देशवासियों के साथ श्रीराम जन्मभूमि पर राष्ट्र के प्राणस्वरूप धर्ममर्यादा के विग्रहरूप श्रीरामचन्द्र का भव्य राममंदिर बनाने के प्रयास में संघ सहयोगी है. राम मंदिर का बनना स्वगौरव की दृष्टि से आवश्यक है, मंदिर बनने से देश में सद्भावना व एकात्मता का वातावरण बनेगा.” उन्होंने कहा कि कुछ तत्व नई-नई चीजें पेश कर न्यायिक प्रक्रिया में दखल दे रहे हैं और फैसले में रोड़े अटका रहे हैं. उन्होंने कहा कि बिना वजह समाज के धैर्य की परीक्षा लेना किसी के हित में नहीं है. आरएसएस प्रमुख ने कहा, ‘‘राष्ट्रहित के इस मामले में स्वार्थ के लिए सांप्रदायिक राजनीति करने वाली कुछ कट्टरपंथी ताकतें रोड़े अटका रही हैं. राजनीति के कारण राम मंदिर निर्माण में देरी हो रही है.’’
जिन्हें लगता है हिन्दुत्व मर गया, जान लें हम जिंदा हैं--अयोध्या कूच करने पर उद्धव ठाकरे 
Shiv Sena Chief Uddhav Thackeray says I will visit Ayodhya on 25th November in Mumbaiउधर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अक्टूबर 18 को शिवसेना की वार्षिक दशहरा रैली के दौरान ऐलान किया कि वे 25 नवंबर को वह अयोध्या जाएंगे। उद्धव ठाकरे ने राम मंदिर के बहाने केंद्र की राजग सरकार के साथ-साथ प्रधानमंत्री को भी खूब खरी-खोटी सुनाई और उन पर तीखे हमले किए। रैली के दौरान उन्होंने मोदी सरकार पर राम मंदिर, पेट्रोल-डीजल, रुपए की गिरती कीमत जैसे कई मुद्दों को लेकर सरकार पर निशाना साधा।
शिवाजी पार्क में शिवसेना की परंपरागत दशहरा रैली को संबोधित करते हुए ठाकरे ने सवाल किया कि साढ़े चार साल सत्ता में रहते हुए प्रधानमंत्री एक बार भी अयोध्या क्यों नहीं गए? उन्होंने कहा कि, हम उन लोगों को चेतावनी दे रहे हैं, जिन्हें लगता है कि हिन्दुत्व मर गया है। हम अभी भी जिंदा हैं। हमें दुख है कि अभी तक राम मंदिर नहीं बनाया गया है। मैं 25 नवंबर को अयोध्या जा रहा हूं।
उद्धव ने कहा कि शिवसेना 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा से अलग होकर चुनाव लड़ेगी। मैं 25 नवंबर को अयोध्या जाऊंगा और राम मंदिर कब बनेगा, इसका सरकार से जवाब मांगूंगा।" उन्होंने राम मंदिर निर्माण पर भाजपा को अपनी भूमिका बताने को कहा। उन्होंने पूछा कि राम मंदिर भी कहीं सरकार का एक और जुमला तो नहीं?
प्रधानमंत्री के अयोध्या न जाने के मुद्दे को उनके विदेश दौरों से जोड़ते हुए उद्धव ने कहा कि आप चीन जाते हैं, जापान जाते हैं, उन देशों में भी जाते हैं, जिनका नाम तक हमने भूगोल की किताब में नहीं पढ़ा। आप इन देशों में जरूर जाइए। देश का नाम रोशन कीजिए। लेकिन जहां से चुनकर आए, उसके पड़ोस में स्थित अयोध्या को कैसे भूल जाते हैं ?
उद्धव ठाकरे ने रैली को संबोधित करते हुए कहा, कई लोगों ने शिवसेना को खत्म करने की कोशिश की। मैं उन सभी लोगों को चुनौती देता हूं। आओ आमने-सामने देखते हैं कौन किसको खत्म करता है। धनुष्य बाण हमारा है, धनुष्य बाण के लिए छाती कितनी बड़ी है ये नहीं देखा जाता।
R.k. Sahu shared a post to Kumud Kanta Rai's timeline.
15 hrs
क्या देश के रहने वाले कुछ कट्टरपंथी मुसलमान, ईसाई इत्यादि हिंदुओं को किसी भी तरह नीचे रखने व् दिखाने का प्रयास कर रहे हैं, वैसे तो उनका यह एजेंडा, लक्ष्य उद्देशय बहुत पुराने समय से ही चल रहा है, जिसमे वह अधिकतर सफल भी रहे है, क्योकि हिन्दू बहुत ही ज्यादा टुकड़ो में बटा हुआ है, जिसका लाभ कांग्रेस ने उठा कर सदैव हिन्दुओ के विभाजन को अंग्रेजो की तर्ज़ पर अपने वोट बैंक के लिए इस्तेमाल कर धर्म विशेष का तुष्टिकरण किया जबकि पहले ही मज़हब के नाम पर देश का बॅटवारा हो चूका था, परंतु अभी यह दुष्ट घटनाएं अधिक ही स्पष्ट हो रही है कि कुछ कट्टरपंथी मुसलमान हमारे आराध्य भगवान श्री राम का मंदिर उन्ही की प्रमाणित जन्म भूमि पर ही ही नहीं बनना देना चाह रहे है और यदि मंदिर नहीं बन पाता या सुप्रीम कोर्ट का निर्णय हिंदुओं के विरुद्ध आता है तो यह कट्टरपंथी मुस्लिम अभी से खुशी मनाने की जैसे तैयारी कर रहे हो।
इसके अतिरिक्त सबरीमाला मंदिर पर जो भी महिलाओं के अधिकारों के हित के लिए याचिका दायर की गई वह हिन्दू धर्म को मानने वाली, पूजा करने वाली या मंदिर जाने वाली महिलाये नहीं है, वह सब गैर धर्मी, मुस्लिमों की कॉन्ट्रैक्ट मैरिज, तीन तलाक, हलाला व् समलैंगिक “LGTB” समुदाय की समर्थक है परंतु दुखद स्थिति यह है कि न्यायपालिका इस धार्मिक विषय में हिंदुओं के विरुद्ध निर्णय देकर बिना हित के केवल मनोरंजन के लिए याचिका दायर करने वाली चरित्रहीन महिलाओ का पूर्ण समर्थन कर रही है, बलात्कार के आरोपी पादरी को हमारे न्यायिक सिस्टम में सम्मानित किया जाता है,
मैंने 3 साल पहले कहा था जो आरएसएस प्रमुख ने अभी कहा है कि यदि राम मंदिर का निर्माण अभी नहीं हुआ तो जनता 2019 में उन्हें ही चुनेगी जो राम मंदिर कभी नहीं बनाएंगे लेकिन मंदिर बनाने का सपना दिखने वालो को देश की जनता पूर्णतया धूल धसरित कर देगी, राम मंदिर फिर बने या न बने लेकिन भाजपा अगले 30 सालों तक दुबारा सत्ता में नहीं आएगी, वाजपेयी सरकार किन कारणों से इंडिया शाइनिंग में भी 10 सालो के लिए गयी, यह सभी बुद्धिजीविओं को पता है, क्या वर्तमान सरकार उसी मार्ग पर अग्रसर है तो यह देश का भी दुर्भाग्य होगा क्योकि अभी समय नहीं बचा है जैसे 20 ओवर्स मैच का आखरी ओवर हो इसी में जो कुछ करना है कर लो वरना देश के विभाजन का एक नया अध्याय निश्चित ही है। Post by:-RK Sahu
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Chakradhar Jha
रेहाना फातिमा,
मेरी स्वीटी
और सैम डेनियल ....
गैरहिन्दू महिलाओं का पवित्र हिन्दू मंदिर में क्या काम?
इनको दंगा एक्ट और राज्य में अफरा तफरी फैलाने के जुर्म में गिरफ्तार करना चाहिए सरकार को ....
अरे हाँ...
मैं तो भूल ही गया कि
सबरीमाला मंदिर मे प्रवेश के लिए
PIL डालनेवाला भी तो गैरहिन्दू ही था
जिसपर वामी जजों ने फैसला सुनाया था...।
हर कोई हिन्दुओं के आस्थाओं पीछे ही क्यों पडा है भाई ?
(एजेंसी इनपुट)