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मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने मुझे पोर्न दिखाया, गंदे सवाल किए, अंगों को ले कर अश्लील गालियाँ दी: साध्वी प्रज्ञा

2019 चुनाव में अपने प्रचार के दौरान साध्वी प्रज्ञा द्वारा ATS अधिकारी करकरे के विरुद्ध बोलने पर विपक्षी अपनी पोल खुलती देख चुनाव आयुक्त के पास रोना-रोने पहुँच गए थे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी किसी मजबूरी में उनसे अपनी नाराजगी दिखाई, लेकिन प्रताड़ना भोगी की उत्पीड़न किसी  सुनी। अक्सर अपने लेखों में बेगुनाह साध्वी प्रज्ञा, स्वामी असीमानंद और कर्नल पुरोहित को किस तरह कांग्रेस समर्थित तत्कालीन यूपीए सरकार इस्लामिक आतंकियों को बचाने के लिए "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" के झूठे प्रचार को बल देने के लिए इनको पकड़ जेलों में डाल यातनाएं दे रही थी, विपरीत इसके छद्दम देशप्रेम दिखाने के लिए पकडे गए आतंकवादियों को कोरमा, बिरयानी खिलाया जाता था।  
रिपब्लिक टीवी को साक्षात्कार देते हुए भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा ने आज अर्नब गोस्वामी और पूरे देश के सामने लगातार कई चौंकाने वाले खुलासे किए। इस इंटरव्यू में उन्होंने मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह पर गंभीर आरोप लगाए।

उन्होंने कहा है कि 3-4 पुलिसकर्मियों की उपस्थिति में उनको व्यक्तिगत रूप से बहुत ज्यादा प्रताड़ित किया और हिरासत में लेकर उन्हें बेल्ट से इस तरह पीटा गया कि उन्हें वेंटीलेटर तक पर जाना पड़ा। उनकी रीढ़ की हड्डी भी टूट गई।

इतना ही नहीं भगवा आतंक के नाम पर पुलिस बर्बरता झेल चुकी साध्वी प्रज्ञा का कहना है कि जब जब उनकी बेल की बात चली तो न्यायाधीशों तक को धमकी देने का काम हुआ। उन्होंने परमबीर सिंह पर आरोप लगाया है कि उन्हें हिरासत के दौरान पॉर्न वीडियो दिखाई गईं और उनसे भद्दे सवाल किए गए।

साध्वी प्रज्ञा ने यह भी कहा कि उन्हें 7-8 लोगों के सर्कल के बीच में उन्हें मारा गया। उनके पैरों के तलों तक में बेल्ट से पिटाई हुई। साध्वी ने इस इंटरव्यू में कहा है कि वह परमबीर के षड्यंत्र के विरुद्ध कुछ करने वाली हैं, जिन जिन लोगों ने उन्हें प्रताड़ित किया, उन पर भी केस होगा और उन्हें दंड दिलवाया जाएगा।

उन्होंने बताया कि पहले उनको भगवा आतंकी कहा गया कहा गया और फिर भारत को आतंकवादी देश घोषित करवाने का प्रयास हुआ। उनका आरोप है कि ये सारा षड्यंत्र कॉन्ग्रेस का था। 

ट्विटर पर लोगों की प्रक्रिया :-

 

सांसद साध्वी प्रज्ञा को जिस कांग्रेसी MLA ने जिंदा जलाने की दी थी धमकी, कोरोना वायरस से हुई मौत

गोवर्धन डांगी साध्वी प्रज्ञामध्य प्रदेश के कांग्रेस विधायक गोवर्धन डांगी का गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में देहांत हो गया। मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस ने ट्वीट किया कि ब्यावरा के विधायक गोवर्धन डांगी ने कोरोनो वायरस संक्रमण के कारण दम तोड़ दिया।
संस्कृत में कहते हैं "ईश्वरम यत करोति, शोभनम एव करोति", हिन्दी में कहते हैं "भगवान जो करता है, अच्छा ही करता है" और अंग्रेजी में कहते हैं "It's all for the best", कहने का अभिप्राय यह है कि इस्लामिक आतंकवादियों को बचाने बेकसूर साधु-संतों को जेलों में डाल, उनकी सात्विकता भंग करने का परिणाम पहले भी 2019 चुनाव के दौरान आया था और दूसरा अब। चुनाव के दौरान साध्वी ने जब एक प्रेस वार्ता में ATS अधिकारी करकरे की मृत्यु पर उनकी प्रसन्नता का कारण पूछने पर मिले जवाब पर विपक्ष तिलमिला कर चुनाव आयोग के पास भागा और जनता में एक मृतक के लिए प्रसन्नता व्यक्त करने पर साध्वी के विरुद्ध माहौल बनाने का असफल प्रयास किया था। लेकिन तब साध्वी ने बेकसूर होते हुए जो यातनाएं झेली थी, उन सबका जिम्मेदार करकरे ही था। दूसरे, अब जिस साध्वी को कांग्रेस विधायक जिन्दा जलाने को बेचैन थे, कोरोना के कारण वह भी हट गए। विधि के विधान को कोई नहीं बदल सकता।     
मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सैद जाफ़र ने कहा,
“डांगी कुछ दिन पहले कोविड-19 पॉजिटिव पाए गए थे। उन्हें भोपाल के चिरायु मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। तबीयत खराब होने के बाद उन्हें गुरुग्राम के एक अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया था। मंगलवार (15 सितंबर, 2020) सुबह उनका निधन हो गया।”

साध्वी प्रज्ञा को जिन्दा जलाने की दी थी धमकी 
दिवंगत कांग्रेस विधायक गोवर्धन डांगी ने भारतीय जनता पार्टी की सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को जिंदा जलाने की खुलेआम धमकी दी थी। नवंबर 2019 में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी द्वारा भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को ‘आतंकवादी’ कहे जाने के एक दिन बाद, ब्यावरा कांग्रेस के विधायक, गोवर्धन डांगी ने भोपाल के सांसद को धमकी देते हुए कहा था कि वह उन्हें जिंदा जला देंगे।
ब्यावरा के विधायक गोवर्धन डांगी ने तब कहा था:
“अगर वो मध्य प्रदेश की धरती पर कदम रखेंगी तो हम सिर्फ उनका पुतला नहीं जलाएँगे… हम उन्हें भी जिंदा जलाएँगे।”
इस धमकी के बाद, भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा भोपाल में एक पुलिस स्टेशन के बाहर धरने पर बैठी थीं। उनकी माँग थी कि कांग्रेस के विधायक गोवर्धन डांगी के खिलाफ FIR दर्ज की जाए। लेकिन तब राज्य में कमलनाथ की सरकार थी और सांसद की माँग को थाने में अनसुना कर दिया गया था।

ज़िंदा जलाने की धमकी देने वाले कांग्रेस विधायक के ख़िलाफ़ ‘सत्याग्रह’ पर बैठीं साध्वी प्रज्ञा

साध्वी प्रज्ञा
साध्वी प्रज्ञा ने आरोप लगाया कि कमलनाथ सरकार
के दबाव पर पुलिस विधायक दांगी के ख़िलाफ़
एफआईआर दर्ज नहीं कर रही है
कांग्रेस के विधायक ने भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को ज़िंदा जला देने की धमकी दी थी। विधायक गोवर्धन दांगी के ख़िलाफ़ पुलिस में मामला दर्ज कराने पहुँचीं साध्वी प्रज्ञा धरने पर बैठ गई हैं। उनका आरोप है कि पुलिस कांग्रेस विधायक के ख़िलाफ़ मामला नहीं दर्ज कर रही है। विधायक ने कहा था कि वो सिर्फ़ पुतले ही नहीं जलाएँगे बल्कि साध्वी प्रज्ञा अगर राजगढ़ आती हैं तो उन्हें ही ज़िंदा जला देंगे। अब साध्वी प्रज्ञा ने आरोप लगाया है कि पुलिस कांग्रेस सरकार के दबाव के कारण मामला दर्ज नहीं कर रही है।
ऐसे में देश के समस्त नेता समाज से प्रश्न : "यदि यही धमकी किसी आम नागरिक ने दी होती, अब तक न जाने कितनी दफाओं में उस पर केस दर्ज हो गया होता, लेकिन मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार ने धमकी देने वाले विधायक को पार्टी से निकालने के साथ-साथ उसके विरुद्ध क्यों नहीं केस दर्ज किया?" इतना ही नहीं कि किसी भी पार्टी ने उस विधायक की अपराध-प्रवित्ति के खिलाफ आवाज़ नहीं उठाई, क्योकि यह धमकी भाजपा सांसद के विरुद्ध थी। महात्मा गाँधी की हत्या के बाद भारत में सबसे भयंकर चितपावन ब्राह्मणों का नरसंहार भी कांग्रेस के राज में हुआ था, 1984 सिख दंगा से कहीं अधिक भयंकर था। नैना साहनी के टुकड़े कर तंदूर में डालने का जघन्य अपराध भी कांग्रेस के राज एवं पदाधिकारी द्वारा किया गया था।   
संसद में साध्वी प्रज्ञा द्वारा नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताने की ख़बर आई थी, जिसके बाद विधायक दांगी ने आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए धमकी दी थी। साध्वी प्रज्ञा ने दिसम्बर 7 को भी कमला नगर पुलिस स्टेशन के बाहर धरना दिया था। अधिकारियों ने साध्वी प्रज्ञा से लिखित शिकायत की माँग की, लेकिन साध्वी की ज़िद थी कि बिना आवेदन के पहले एफआईआर दर्ज की जाए। इसके बाद पुलिस अधिकारियों के साथ उनकी तीखी नोक-झोंक हुई। हालाँकि, शनिवार (दिसंबर 7, 2019) को महिलाओं के सम्मान की लड़ाई जारी रखने की बात कह साध्वी ने धरना ख़त्म कर दिया था।
आखिर क्या कारण है आतंकवादी को मारे जाने, फांसी दिए जाने या फिर बलात्कारी को किसी एनकाउंटर में मारे जाने पर मानवाधिकार अपनी रोटियां सेंकने निकल आता है, लेकिन किसी को जिन्दा जलाए जाने की धमकी पर चुप्पी साध लेता है, क्या इसीका नाम मानवाधिकार है? क्यों नहीं मानवाधिकार ने जिन्दा जलाए देने की धमकी पर तत्काल कार्यवाही की? या फिर मानवाधिकार को अपना नाम बदलकर दानवअधिकार रख देना ही उचित होगा। 

रविवार को भोपाल की सांसद साध्वी प्रज्ञा फिर से धरने पर बैठीं। कमलनाथ के मंत्री पीसी शर्मा ने साध्वी प्रज्ञा के धरने की तुलना ‘एक तो चोरी ऊपर से सीनाजोरी’ वाले कहावत से की है। उन्होंने आरोप लगाया कि गोडसे को महिमामंडित करने के कारण ही साध्वी प्रज्ञा को रक्षा सम्बन्धी संसदीय समिति में शामिल किया गया था। उन्होंने साध्वी के धरने को ‘नौटंकी’ बताते हुए कहा कि उन्हें भोपाल की जगह दिल्ली में धरने पर बैठना चाहिए। वहीं साध्वी प्रज्ञा ने अपने धरने को ‘सत्याग्रह’ का नाम दिया है।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 21वीं सदी में जहां महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं, तो वहीं उनके स.....

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इससे पहले कांग्रेस मंत्री के ज़िंदा जलाने वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए साध्वी प्रज्ञा ने कहा था कि कांग्रेसियों को ज़िंदा जलाने का पुराना अनुभव है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं ने 1984 में सिखों को जलाया और नैना साहनी को तंदूर में जलाया। साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने उन्हें आतंकी बताया है और उनके विधायक उन्हें ज़िंदा जलाने की धमकी दे रहे हैं।

साध्वी प्रज्ञा का प्रिया दत्त को जवाब : 'देशद्रोही भाई का विरोध भी करो मैडम'

प्रिया दत्त ने की साध्वी प्रज्ञा की निंदा, BJP नेता बोलीं- 'देशद्रोही भाई का विरोध भी करो मैडम'
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
साध्वी प्रज्ञा भारतीय जनता पार्टी के टिकट मिलने के बाद लगातार खबरों में बनी हुई हैं। शहीद हेमंत करकरे पर दिए गए अपने बयान के बाद से कई लोगों ने प्रज्ञा ठाकुर को अपने निशाने पर ले लिया है इसी कड़ी में कांगेस नेता प्रिया दत्त ने ट्विटर पर पोस्ट पर लिखा है कि मैं बीजेपी कैंडिडेंट प्रज्ञा ठाकुर के हेमंत करकरे पर दिए गए बयान का का कड़ा विरोध करती हूं इस तरह के बयान हमारे शहीद जवानों के प्रति बीजेपी की असली भावना को बताते हैं साध्वी प्रज्ञा ने कहा था कि हेमंत करकरे को उन्होंने श्राप दिया था जिसकी वजह से वो 26/11 के हमले में शहीद हुए थे  
प्रिया के ट्विटर पोस्ट के बाद साध्वी ने भी पलटवार करते हुए कहा कि इनके भाई को 1993 में मुंबई में हुए नरसंहार की पूरी जानकारी थी कोर्ट ने भी उन्हें दोषी पाया और जेल में ये सजा भी काटकर आए इनके दाऊद के साथ जो संबंध हैं वो आप यूट्यूब पर भी देख सकते है क्या इन्होंने कभी अपने देशद्रोही भाई का विरोध किया? कभी उसे भी कंडेम कीजिए मैडम साध्वी प्रज्ञा पहले ही बता चुकी हैं कि वो ट्विटर पर नहीं हैं. ये उनके नाम से बना पैरोडी अकाउंट है  
इनके भाई को १९९३ में मुंबई में हुए नरसंहार की पूरी जानकारी थी. कोर्ट ने भी उन्हें दोषी पाया है और जेल में ये सजा भी काटकर आए है. इनके दाऊद के साथ जो संबंध है वो आप यूट्यूब पर भी देख सकते है. क्या इन्होंने कभी अपने देशद्रोही भाई का विरोध किया? कभी उसे भी condemn कीजिए मैडम.
कोर्ट में ये बयान किसने दिया?
साध्वी प्रज्ञा सेलेब्स के निशाने पर बनी हुई हैं। एक्टर संजय खान की बेटी फराह खान ने भी अप्रैल 21 को ट्विटर पोस्ट के जरिए प्रज्ञा ठाकुर को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि तुम्हारी गंदी सोच को लेकर राम का नाम बदनाम ना करे तुम जैसी ने हिन्दु धर्म का नाम बर्बाद किया हैं जैसे ओसामा बिन लादिन्न और हाफ़िज सएड ने इस्लाम का नाम बर्बाद किया धर्म भेद भाव रखना नहीं सिखाता हैं तुम जैसे लोग नफ़रत फैलाते हैं हमारे देश को तुम जैसे तोड़ना चाहते हो 
फराह को साध्वी प्रज्ञा को आरोपित करने से पूर्व रामजन्मभूमि पर विवाद करने वाले हिन्दू-मुस्लिम कांग्रेसी और इसके समर्थक दलों की भूमिका का अवलोकन कर यही बात उन्हें बोलती, आपको जवाब देने भारी पड़ जाते। आप पर 'काफिर' और न जाने कितने आरोप लग गए होते। फराह को कांग्रेस से प्रश्न करना था कि "जब तत्कालीन प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर इस मुद्दे को समाप्त कर रहे थे, फिर किस आधार पर राजीव गाँधी ने चन्द्रशेखर सरकार से समर्थन वापस लेकर, सरकार गिरायी थी? वास्तव में हिन्दू-मुस्लिम में बीच मतभेद और लड़ाई-झगड़ा करवाकर कांग्रेस अब तक राज करती आयी है। अगर फराह को इस बात का ज्ञान नहीं है, निम्न लेख पढ़, यही प्रश्न कांग्रेस से करें:
 अवलोकन करें:-
 साध्वी को जबरदस्ती आतंकवाद का आरोप स्वीकार करवाने के लिए जिस तरह उन्हें और अन्य बेकसूरों को प्रताड़ित किया गया था, काश ऐसी प्रताड़ना किसी मुस्लिम के साथ हुई होती, #metoo#intolerance#not in my name, #mob lynching, #award vapsi आदि आदि जितने भी गैंग हैं, सबके सब सडकों पर आकर हेमंत करकरे के विरुद्ध प्रदर्शन कर उनको ऐसा निर्दयी निर्देश करने वालो को फांसी की माँग कर रहे होते। आधी रात को अदालतें खुलवा दी जाती। परन्तु, अफ़सोस, यह प्रताड़ना किसी मुस्लिम के साथ नहीं बल्कि एक हिन्दू के साथ हुई। आतंकवादियों को खूब बिरयानी खिलाई जाती थी, और बेकसूरों को बेल्टों से पिटाई और भूखा रखा जाता था? 
काश! आज हेमंत जीवित होते, बताते प्रताड़ित करवाने वालों के नाम
हिन्दू धर्म तो मृतात्माओं का सम्मान करने को कहता है। रावण की मृत्यु के बाद भगवान श्री राम ने उन्हें बाकायदा प्रणाम किया था और लक्ष्मण समेत दूसरों को भी उन्हें प्रणाम करने को कहा था, क्योंकि हिन्दू धर्म मृतकों का इसी तरह सम्मान करना सिखाता है। उसके बावजूद एक साध्वी एक मृतक को कलंकित कर रही है, क्यों? बल्कि चुनाव उपरान्त साध्वी प्रज्ञा को हेमंत करकरे की फाइल खुलवाने के लिए केन्द्र और राज्य सरकारों को मजबूर करना चाहिए। करकरे एक अफसर थे और उन्हें आदेशों को पालन करना था, जिस कारण वह बलि का बकरा बन गए और उनको आदेश देने वाले मालपुए खा रहे हैं। काश! आज हेमंत करकरे जीवित होते। राजनीति में भूचाल नहीं बवंडर आ गया होता, जब "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" के नाम पर बेकसूरों को प्रताड़ित करवाने वालों के नाम बोलते। वोट बैंक की राजनीति में देश की संस्कृति से खिलवाड़ किया गया और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी छूट गए।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार क्या कोई देश की जनता को समझा सकता है कि आखिर भारतीय जनता पार्टी द्वारा यह जो राष्ट्रभक...


आर.बी.एल.निगम श्री श्री रविशंकर ने अयोध्‍या विवाद के समाधान की पेशकश के साथ नवम्बर 16 को अयोध्‍या में सभी पक्षकारों से मुलाकात की. श्र..


आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर द्वारा मन्दिर मसला सुलझाने के लिए दर-दर जाना, शायद बाबरी समर्थकों को राहत दे रहा है, क्योकि उन्हें मालूम...
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ज्ञात हो, जब 7 नवम्बर 1966 को गौ-हत्या का विरोध कर रहे निहत्ते साधु-संतों पर गोलियाँ चलवाकर उनकी लाशें बिछने के साथ-साथ पार्लियामेंट स्ट्रीट उनके खून से नहा रही थी, तब कृपालु जी महाराज ने तत्कालीन प्रधानमन्त्री इन्दिरा गाँधी को श्राप दिया था कि "इन्दिरा जिस तरह आज गोपाष्ठमी के दिन निर्दोष और निहत्ते साधु-सन्तों के खून की होली खेली जा रही है, तेरी भी मौत गोपाष्ठमी के ही दिन होगी।" संयोगवश 31 अक्टूबर 1984 को गोपाष्ठमी थी। अपने आराध्य पुरुषोत्तम श्रीराम को काल्पनिक बताने वालों को क्या मालूम श्राप किस स्थिति में और क्यों दिया जाता है? यह निर्दोष साधु-संतों को श्राप एवं हाय का ही परिणाम है कि कांग्रेस निरन्तर पाताललोक की ओर अग्रसर है।
स्मरण हो, बटला हाउस में जब पुलिस अधिकारी महेश शर्मा की आतंकवादियों द्वारा हत्या होने पर यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गाँधी द्वारा दिवंगत महेश शर्मा पर आँसू बहाने की बजाए आतंकवादी के मरने पर आंसू बाहे जाने पर ये सब क्यों सूरदास बन गए थे? विपरीत इसके अपने वोट बैंक को खुश करने खूब प्रचार किया गया था कि सोनिया जी अपने आंसू रोक नहीं पायीं। कुछ तो शर्म करो।

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार मुंबई हमले में शहीद पूर्व ATS चीफ हेमंत करकरे पर बयान देने के बाद सियासी उठा-पटक अभी थमी ....

तुम्हारी गंदी सोच को लेकर राम का नाम बदनाम ना करे । तुम जैसी ने हिन्दु धर्म का नाम बर्बाद किया हैं जैसे ओसामा बिन लादिन्न और हाफ़िज़ सएड ने इस्लाम का नाम बर्बाद किया। धर्म भेद भाव रखना नहीं सिखाता हैं। तुम जैसे लोग नफ़रत फैलाते हैं । हमारे देश को तुम जैसे तोड़ना चाहतें हो ।
मध्य प्रदेश के भोपाल सीट से बीजेपी प्रत्याशी बनाई गईं साध्वी प्रज्ञा ने चुनावी सभा में दावा किया है कि बाबरी विध्वंस में वह भी शामिल थीं उन्होंने कहा, 'हम भव्य मंदिर बनाने जाएंगे राम मंदिर वाले बयान पर मुझे दो नोटिस मिले हैं हम विधिवत जवाब देंगे. मैं धर्म की बात कर रही हूं अपने राम पर बात कर रही हूंमैंने जो कहा अपनी बात पर अडिग हूं'