Showing posts with label PTI. Show all posts
Showing posts with label PTI. Show all posts

‘जेलों में PTI की महिला कार्यकर्ताओं से हो रहे बलात्कार’: इमरान खान, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री

पाकिस्तान के पूर्व पीएम और तहरीक ए इंसाफ पार्टी (PTI) के चेयरमैन इमरान खान ने पिछले दिनों आरोप लगाया था कि जेलों में बंद पीटीआई की महिला कार्यकर्ताओं के साथ रेप हो रहा है। शनिवार (27 मई 2023) की देर रात मुल्क के आंतरिक मामलों के मंत्री ( Interior Minister) राणा सनाउल्लाह ने इमरान के आरोपों को बेबुनियाद करार दिया था। उन्होंने इसे पीटीआई कार्यकर्ताओं की साजिश बताया। सनाउल्लाह के इस बयान पर इमरान खान ने पलटवार किया। रविवार (28 मई) को इमरान ने कहा कि सरकार के मंत्री अपने काले कारनामों को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।

इमरान ने जमान पार्क स्थित अपने घर से पीटीआई समर्थकों को संबोधित किया। इमरान खान ने कहा कि राणा सनाउल्लाह की प्रेस कॉन्फ्रेंस (शनिवार) के बाद मुझे अपनी बात पर यकीन हो गया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की फासीवादी सरकार के मंत्री काले कारनामों को छिपाने के लिए कवर-अप करने की कोशिश कर रहे हैं। इमरान खान ने जेल में बंद अपनी पार्टी के महिला कार्यकर्ताओं के प्रति चिंता जताते हुए न्यायपालिका से स्वतः संज्ञान लेने की माँग की।

सनाउल्लाह का दावा

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान के गृहमंत्री सनाउल्लाह ने इमरान और उनके समर्थकों पर सरकार को बदनाम करने के लिए साजिश रचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ख़ुफ़िया एजेंसियों ने एक कॉल इंटरसेप्ट किया है। इस कॉल में पीटीआई के वर्कर्स कथित तौर पर एनकाउंटर और रेप की साजिश रचने की बात करते हुए पाए गए हैं। इसके कुछ ही घंटों के बाद इमरान ने आरोप लगाने शुरू किए।
रिपोर्टों के मुताबिक, राणा सनाउल्लाह ने दावा किया कि इंटरसेप्ट किए गए कॉल में पीटीआई कार्यकर्ता के घर रेड डालने के और गोलीबारी की साजिश की बात सामने आई। कथित तौर पर पीटीआई के लोग यह कह रहे थे कि रेड के बहाने हुई फायरिंग में मौतों को दुनिया में मानवाधिकार उल्लंघन के रूप में दिखाया जा सकता है। ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून‘ के मुताबिक, राणा ने कहा कि इसी तरह पीटीआई महिला कार्यकर्ताओं की रेप की फर्जी कहानियाँ बनाने को लेकर भी बातचीत हुई थी। सनाउल्लाह के अनुसार कुछ ही देर के बाद इमरान खान ने पीटीआई महिला कार्यकर्ताओं से बलात्कार का आरोप लगा दिया।

क्या कहा था इमरान ने?

दरअसल 9 मई 2023 को इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद पूरा पाकिस्तान जल उठा था। पीटीआई कार्यकर्ताओं ने मुल्क भर में प्रदर्शन किया था। पीटीआई कार्यकर्ताओं और इमरान समर्थकों ने देश के सैन्य प्रतिष्ठानों पर भी हमले कर दिए थे। प्रदर्शनकारियों में बड़े पैमाने पर महिलाएँ भी शामिल थीं। हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारियों को जेल में डाला गया। महिलाओं समेत सैकड़ों लोग अब भी हिरासत में है। इमरान ने जेल में बंद इन्हीं महिलाओं के साथ बदसलूकी और बलात्कार का आरोप लगाया था।
इमरान ने कहा था कि जेल में बंद महिला पार्टी वर्कर्स के साथ गलत सलूक किया जा रहा है। रेप की भी खबरें मिल रही हैं।


इमरान खान को रिहा किए जाने पर विरोधियों का पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट पर हमला

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के भीतर घुसते PDM कार्यकर्ता
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को गिरफ्तार किए जाने के बाद उनके समर्थन उग्र हो गए, जिससे देश भर में हिंसा हुई और उन्हें रिहा करना पड़ा। अब सत्ताधारी PDM के कार्यकर्ताओं ने इमरान खान की रिहाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के बाहर PDM के मुखिया मौलाना फैज़लुर रहमान और PML-N की मरयम नवाज शरीफ की बैठक भी हुई है। उधर इमरान खान ने दावा किया है कि उनकी पार्टी PTI के 7000 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है।

साथ ही उन्होंने कई निहत्थे कार्यकर्ताओं की फ़ौज और पुलिस द्वारा हत्या किए जाने की भी बात कही। उन्होंने कहा कि वहीं दूसरी तरफ PDM के गुंडे सुरक्षा एजेंसियों की सह पर उपद्रव कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के बाहर हजारों कार्यकर्ता इमरान खान के विरोध में जुटे हुए हैं। इमरान खान ने आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट को दबाने की कोशिश की जा रही है। इस साल सितंबर में जस्टिस काजी फैज ईसा को पाकिस्तान का मुख्य न्यायाधीश बनाया जाना है, पाकिस्तान सरकार का कहना है कि उन्हें रोकने के लिए जाल बिछाया जा रहा है।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि न्यायपालिका में बैठे इमरान खान के लोगों ने जस्टिस ईसा को अलग-थलग कर दिया है। कई लोग मान रहे हैं कि PDM सुप्रीम कोर्ट को डराने-धमकाने के लिए उसका घेराव कर रहा है। पाकिस्तान के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश, जो इमरान खान के समर्थक हैं, उनमें और पाकिस्तान की सरकार में ठन गई है। उधर अल-कादिर केस में इमरान खान की बीवी बुशरा ने भी लाहौर हाईकोर्ट का रुख किया है।

सुप्रीम कोर्ट पर मजहबी तत्वों द्वारा हमले की बात भी कही जा रही है। इस्लामाबाद के ‘रेड ज़ोन’ में कई प्रदर्शनकारी घुसे हुए हैं, जिससे आतंकी हमलों की आशंका भी बढ़ गई है। इमरान खान के विरोधी इस बात से नाराज़ हैं कि न्यायपालिका ने उन्हें राहत कैसे दे दी। मौलाना फजलुर रहमान प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे हैं। धरना प्रदर्शन कहाँ किया जाना है, इसे लेकर भी विवाद चल रहा है। फ़िलहाल सुप्रीम कोर्ट को घेर कर कई कार्यकर्ता बैठे है


PTI की फर्जी पत्रकारिता : कुल एक्टिव केस और एक्टिव केस के प्रतिशत में अंतर समझ नहीं आता

न्यूज एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया यानि पीटीआई भी लिबरल गैंग का हिस्सा बन गई है और केंद्र सरकार को बदनाम करने के लिए हर हथकंडा अपना रही है। ताजा घटनाक्रम में पीआईटी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बयान को गलत ढंग से रिलीज किया जिससे लोगों में कंफ्यूजन पैदा हो गया। दरअसल, प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोविड-19 की स्थिति पर मुख्यमंत्रियों से बात करते हुए कहा कि Active cases का प्रतिशत कम हुआ है, Recovery rate बढ़ा है, लेकिन पीटीआई ने इसे पीएम मोदी के नाम से कोविड-19 के केसेस में कमी आई लिखकर ट्वीट कर दिया। PTI का ट्वीट यह है, हालांकि पीटीआई द्वारा बाद में इस ट्वीट को डिलिट कर दिया।
सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ PM मोदी की आज मीटिंग हुई। इस मीटिंग में प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना से संबंधित आँकड़ों को लेकर क्या कहा, यह आप नीचे के आधिकारिक ट्वीट में देख सकते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि कोरोना से संबंधित एक्टिव केस का प्रतिशत कम हो रहा है। ऐसा कहीं नहीं कहा गया है कि एक्टिव केस कम हो रहा है। एक्टिव केस का प्रतिशत कम होना और एक्टिव केस का कम होना – दो अलग-अलग बातें हैं। लेकिन शायद PTI को यह गणित नहीं मालूम।
PTI को यह गणित नहीं मालूम, यह आप उसके ट्वीट से समझ सकते हैं। PTI जैसी संस्था सोशल मीडिया पर पड़ती गाली को देख कर अपने ट्वीट डिलीट भी कर सकती है। इसलिए उसका ट्वीट नहीं बल्कि स्क्रीनशॉट ऊपर देखिए।
अब बात करते हैं आँकड़ों की। इसके लिए थोड़ा ग्राफ देखा जाए। समझा जाए कि एक्टिव केस बढ़ रहा है या घट रहा है? या फिर एक्टिव केस का प्रतिशत बढ़ रहा है या घट रहा है?

गणित अच्छा हो तो ऊपर का ग्राफ देख कर समझ सकते हैं कि एक्टिव केस का प्रतिशत हर दिन घट रहा रहा है। लेकिन PTI को इससे क्या मतलब! उसे फेक न्यूज फैलाने से मतलब था, और वो काम उसने बखूबी कर दिया।
देश के सबसे बड़े पत्रकारों के संगठन आईएफडब्लूजे (इण्डियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स) ने पीटीआई में होने वाले भाई-भतीजावाद, गलत वित्तीय प्रबंधन और निहित स्वार्थों का खुलासा करते हुए बताया है कि किस प्रकार पीटीआई हमेशा सत्ताधारी पार्टी, मुख्यतः कॉन्ग्रेस के मुखपत्र के रूप में काम करता आया है।
कुछ दिनों पहले PTI ने नई दिल्ली में चीन के राजदूत सुन वेडोंग का एक इंटरव्यू लिया था, जिसमें उन्होंने भारत के विरोध में बातें कर के चीन के प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाया था। लेकिन PTI ने इस दौरान भारत का पक्ष रखते हुए सवाल तक नहीं किए थे। और तो और, उसने चीन के राजदूत द्वारा किए गए झूठे दावों पर पलट कर कोई सवाल भी नहीं पूछा था। PTI के इस रुख को लेकर सोशल मीडिया में लोगों ने विरोध जताया था।
ऐसा नहीं है कि यह पहली बार है। पीटीआई पहले भी कई बार खबरों को गलत तरीके से रिलीज कर सरकार को बदनाम करती रही है। ये हैं पीटीआई की कुछ करतूतें।
सीबीएसई बोर्ड परीक्षा फीस को लेकर फैलाई भ्रामक खबरें
पिछले साल पीटीई ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्र-छात्राओं के लिए सीबीएसई परीक्षा फीस बढ़ाए जाने की खबर खबर रिलीज की थी, जिसके बाद पूरे देश में भ्रम फैल गया है। न्यूज एजेंसी पीटीआई भाषा की ओर से जारी इस खबर में कहा गया है कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) छात्रों के लिए 10वीं और 12वीं कक्षा के बोर्ड परीक्षा शुल्क में 24 गुना वृद्धि की है। अब इस वर्ग के छात्रों को 50 रुपये के बजाय 1200 रुपये का शुल्क देना होगा। सामान्य वर्ग के छात्रों के शुल्क में भी दो गुनी वृद्धि की गई है और अब उन्हें 750 रुपये के स्थान पर 1500 रुपये देने होंगे। यदि कोई छात्र अतिरिक्त विषय लेता है तो उसे 300 रुपये और चुकाने होंगे।
पीटीआई की खबर से उलट सच्चाई यह थी कि दिल्ली को छोड़कर देशभर को एससी-एसटी छात्रों को पहले 750 रूपये परीक्षा फीस देने होते थे। पांच साल से फीस में कोई वृद्धि नहीं होने के कारण सीबीएसई ने सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए फीस 750 रुपये से बढ़ा कर 1500 रुपये कर दिए, जबकि एससी/एसटी छात्रों के लिए फीस 750 रुपये से बढ़ाकर सिर्फ 1200 रुपये किए हैं।
वित्त मंत्री के बयान को तोड़-मरोड़कर बनाई Fake News
न्यूज एजेंसी  PTI ने इसके पहले वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के राज्यसभा के प्रश्नकाल में दिए गये बयान पर फेक खबर चलाई थी। 2 जुलाई, 2019 को राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों के जवाब में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश की आर्थिक स्थिति के बारे जानकारी देते हुए देश के अच्छे आर्थिक संकेतों का उल्लेख किया। वित्त मंत्री के बयान से जब PTI को कोई चासनी वाली खबर नहीं मिली तो उसने अपनी खबर की टीआरपी बढ़ाने के लिए हेडलाइन में ही चासनी डाल दी। हेडलाइन पर चासनी पड़ते ही, सभी समाचार पत्र और चैनल इस खबर पर चीटियों की तरह चिपक गये। सबसे पहले NDTV ने वित्त मंत्री के बयान की खबर को अपने वेबसाइट पर डाला-

वित्तमंत्री ने खबर को Fake बताया
इस खबर की वही हेडलाइन थी, जो PTI ने दी थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में अपने पूरे बयान के दौरान नोटबंदी पर कोई बात नहीं कही थी, लेकिन फिर भी PTI और NDTV ने खबर से हटकर, खबरों में टीआरपी लाने के लिए नोटबंदी की हेडलाइन दी और लिखा-Demonetization has no effect on Indian Economy-Nirmala Sitharaman, इस खबर के प्रकाशित होने और सोशल मीडिया पर आते ही, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सवाल खड़ कर दिए-

कांग्रेसी अखबार ‘नवजीवन’ ने झूठी हेडलाइन पर पूरी खबर गढ़ दी
NDTV और PTI की खबरों को आधार बनाकर कांग्रेसी समाचार पत्र ‘नवजीवन’ ने हेडलाइन ही नहीं पूरी खबर नोटबंदी पर बना दिया –

नवजीवन ने पीटीआई की केवल हेडलाइन पढ़कर ही पूरी खबर को अपने मन मुताबिक गढ़ दिया। यह ऐसी खबर थी, जिसका कोई आधार नहीं था, जिसके कोई सबूत नहीं थे, फिर भी सरकार के खिलाफ एजेंडा खड़ा करने के लिए हेडलाइन खड़ी कर दी गई।
‘फेक न्यूज’ एजेंसी पीटीआई
उत्तर प्रदेश में भाजपा की योगी सरकार ने 11 जुलाई 2017 को विधानसभा में 2017-18 का बजट पेश किया। इस बजट पर रिपोर्टिंग करते हुए पीटीआई ने समाचार दिया कि “उत्तर प्रदेश की सरकार ने सेकेंडरी और उच्च शिक्षा के लिए पूर्व सरकार की तुलना में बजट में कटौती कर दी है। पूर्व की अखिलेश यादव की सरकार ने 2016-17 में सेकेंडरी शिक्षा के लिए 9,990 करोड़ रुपये दिये थे, जबकि योगी आदित्यनाथ की सरकार ने 9,414 करोड़ रुपये की कटौती करके मात्र 576 करोड़ रुपये दिये हैं। इसी तरह से उच्च शिक्षा के बजट में भी कटौती की गई है। पिछले बजट में उच्च शिक्षा को 2,742 करोड़ रुपये दिये गये थे, जबकि इस साल के बजट में 2469.73 करोड़ रुपये की कटौती करते हुए, मात्र 272.77 करोड़ रुपये ही दिए गये हैं।”

योगी सरकार की ओर से शिक्षा बजट में इतनी भारी कटौती सचमुच एक बड़ी खबर थी। यह सभी समाचार पत्रों और टेलीविजन न्यूज चैनलों के लिए टीआरपी वाली स्टोरी भी थी। पीटीआई की इस खबर को आंख मूंद कर सभी ने अपने-अपने समाचार पत्र और चैनलों में बड़ी खबर बनाया।
इसी फेक न्यूज को आधार बनाकर, कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया-
इसी तरह से पीटीआई की एक फेक न्यूज को सोशल मीडिया पर सही मानकर प्रतिक्रिया दी जाने लगी।

पीटीआई ने कैसे बनायी ‘फेक न्यूज’
अफसोस की बात यह है कि पीटीआई की खबर होने के कारण किसी भी अखबार या न्यूज चैनेल ने इसकी सत्यता परखने की कोशिश नहीं की। जब इसकी सत्यता की परख की गई तो पता चला कि यह एक फेक न्यूज थी। वास्तव में, पीटीआई ने उत्तरप्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा पेश बजट के कुछ अंशों के आधार पर ही यह रिपोर्ट की थी। अगर यह रिपोर्ट बजट अनुमान के कागजों को ठीक ढंग से पढ़कर बनाई गयी होती तो पता चलता कि योगी सरकार ने शिक्षा के लिए बजट में कमी नहीं बल्कि 34 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की है। अखिलेश यादव की सरकार ने 2016-17 में जहां 46,442 करोड़ रुपये शिक्षा के लिए दिये थे वही 2017-18 में योगी आदित्यनाथकी सरकार ने 62, 351 करोड़ रुपये दिए हैं।

जब इस फेक न्यूज पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आधिकारिक बयान दिया और सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी, तो पता चला कि यह फेक खबर पीटीआई ने दी है। इसके बाद सरकार की खिंचाई करने वालों ने पीटीआई के इस फेक न्यूज पर प्रतिक्रिया ना देकर चुप्पी साध ली।
जनता के सामने सच लाने वाले पत्रकार और मीडिया संस्थान जब खबरों को जान- बूझकर तोड़ते मरोड़ते हैं तो Fake Journalism की जड़ें ही मजबूत होती हैं। ये पत्रकार और मीडिया संस्थान, देश और देश की प्रजातंत्रिक व्यवस्थाओं के साथ विश्वासघात करते हैं, जिसकी कीमत देश की जनता और प्रधानमंत्री मोदी की सरकार को चुकानी पड़ती है।