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इमरान खान को रिहा किए जाने पर विरोधियों का पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट पर हमला

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के भीतर घुसते PDM कार्यकर्ता
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को गिरफ्तार किए जाने के बाद उनके समर्थन उग्र हो गए, जिससे देश भर में हिंसा हुई और उन्हें रिहा करना पड़ा। अब सत्ताधारी PDM के कार्यकर्ताओं ने इमरान खान की रिहाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के बाहर PDM के मुखिया मौलाना फैज़लुर रहमान और PML-N की मरयम नवाज शरीफ की बैठक भी हुई है। उधर इमरान खान ने दावा किया है कि उनकी पार्टी PTI के 7000 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है।

साथ ही उन्होंने कई निहत्थे कार्यकर्ताओं की फ़ौज और पुलिस द्वारा हत्या किए जाने की भी बात कही। उन्होंने कहा कि वहीं दूसरी तरफ PDM के गुंडे सुरक्षा एजेंसियों की सह पर उपद्रव कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के बाहर हजारों कार्यकर्ता इमरान खान के विरोध में जुटे हुए हैं। इमरान खान ने आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट को दबाने की कोशिश की जा रही है। इस साल सितंबर में जस्टिस काजी फैज ईसा को पाकिस्तान का मुख्य न्यायाधीश बनाया जाना है, पाकिस्तान सरकार का कहना है कि उन्हें रोकने के लिए जाल बिछाया जा रहा है।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि न्यायपालिका में बैठे इमरान खान के लोगों ने जस्टिस ईसा को अलग-थलग कर दिया है। कई लोग मान रहे हैं कि PDM सुप्रीम कोर्ट को डराने-धमकाने के लिए उसका घेराव कर रहा है। पाकिस्तान के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश, जो इमरान खान के समर्थक हैं, उनमें और पाकिस्तान की सरकार में ठन गई है। उधर अल-कादिर केस में इमरान खान की बीवी बुशरा ने भी लाहौर हाईकोर्ट का रुख किया है।

सुप्रीम कोर्ट पर मजहबी तत्वों द्वारा हमले की बात भी कही जा रही है। इस्लामाबाद के ‘रेड ज़ोन’ में कई प्रदर्शनकारी घुसे हुए हैं, जिससे आतंकी हमलों की आशंका भी बढ़ गई है। इमरान खान के विरोधी इस बात से नाराज़ हैं कि न्यायपालिका ने उन्हें राहत कैसे दे दी। मौलाना फजलुर रहमान प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे हैं। धरना प्रदर्शन कहाँ किया जाना है, इसे लेकर भी विवाद चल रहा है। फ़िलहाल सुप्रीम कोर्ट को घेर कर कई कार्यकर्ता बैठे है


पाकिस्तान : आर्मी चीफ बाजवा का कार्यकाल सुप्रीम कोर्ट ने किया निलंबित

जनरल कमर बाजवापाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश आशिफ सईद खोसा ने पाकिस्तानी फौज के मुखिया जनरल कमर जावेद बाजवा का कार्यकाल बढ़ाने सम्बन्धी आदेश को निलंबित कर दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई बुधवार (नवंबर 27, 2019) को होगी। तब तक बाजवा का एक्टेंशन वाला नोटिफिकेशन सस्पेंडेड रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस सम्बन्ध में संघीय सरकार, रक्षा मंत्रालय और जनरल बाजवा को नोटिस जारी किया है। बाजवा 29 नवंबर को रिटायर होने वाले थे, लेकिन इमरान ख़ान के नेतृत्व वाली पाकिस्तान सरकार ने अगस्त में उनका कार्यकाल 3 साल के लिए बढ़ा दिया था। इसके ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी, जिस पर वहाँ के सीजेआई ने सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान जस्टिस खोसा ने कहा कि जनरल बाजवा का कार्यकाल बढ़ाने का अधिकार सिर्फ़ राष्ट्रपति को है। इसके बाद पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल ने उन्हें बताया कि राष्ट्रपति की अनुमति के बाद ही पाकिस्तान की कैबिनेट ने ये क़दम उठाया है। जस्टिस खोसा ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि 25 कैबिनेट मंत्रियों में से मात्र 11 ने ही जनरल बाजवा का कार्यकाल बढ़ाए जाने वाले आदेश पर हस्ताक्षर किया है। बाकी के 14 मंत्री अनुपस्थित रहे और उन्होंने इस मामले में अपनी राय ज़ाहिर नहीं की है।

अगस्त में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के कार्यालय द्वारा जारी किए गए नोटिफिकेशन में कहा गया था कि जनरल बाजवा का कार्यकाल ख़त्म होने के बाद से अगले तीन सालों तक इसकी अवधि बढ़ाई जाती है। जनरल बाजवा को नवंबर 2016 में पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ ने पाक फौज का जनरल नियुक्त किया था। इससे पहले 2010 में युसूफ रज़ा गिलानी की सरकार ने भी तत्कालीन राष्ट्रपति आशिफ जरदारी की अनुमति से उस समय पाक सेनाध्यक्ष रहे जनरल अशफ़ाक़ परवेज कियानी का कार्यकाल 3 वर्षों के लिए बढ़ाया था।
पाकिस्तान से कई ऐसे खबरें आई है जो सेना और इमरान सरकार के बीच दूरी बढ़ने का संकेत दे रहे हैं। कुछ दिनों पहले जनरल बाजवा से मुलाक़ात के बाद इमरान ख़ान अचानक से छुट्टी पर चले गए थे। मीडिया में कहा जा रहा था कि उन्होंने अपने क़रीबी दोस्तों व रिश्तेदारों के साथ क्रिकेट पर चर्चा करते हुए अपनी छुट्टियाँ मनाई। कहा गया था कि इन्हों छुट्टियों के दौरान उन्होंने पाकिस्तान क्रिकेट में ढाँचागत सुधार की रूपरेखा तय की। इसे जनरल बाजवा और ख़ान के बीच मतभेद के रूप में भी देखा गया। कई मीडिया रिपोर्टों में यह भी दावा किया है कि बाजवा अब इमरान की जगह बेनजीर भुट्टो के बेटे बिलावल को आगे कर रहे हैं।

पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय फिल्मों व टीवी कार्यक्रमों पर लगाई रोक

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आर.बी.एल.निगम, फिल्म समीक्षक 
भारतीय वायुसेना की एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तान पूरी तरह बौखला गया है। इसके बाद पाकिस्तान कैबिनेट ने तत्काल मीटिंग बुलाई और भारत के प्रति एक्शन लेते हुए भारतीय सिनेमा को पाकिस्तान में रिलीज पर बैन लगा दिया है। पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्री चौधरी फवाद हुसैन ने इसका एलान किया। पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्री देश में भारतीय फिल्मों के साथ-साथ 'मेड इन इंडिया' विज्ञापनों के बहिष्कार की घोषणा की। बता दें कि पुलवामा अटैक के बाद भारत ने पाकिस्तानी एक्टर्स और आर्टिस्ट्स को बैन कर दिया और अपनी कई फिल्मों को वहां रिलीज करने पर रोक लगा दी, वहीं अब पाकिस्तान भी बौखलाया हुआ नजर आ रहा है। इसके अलावा पीईएमआरए को 'मेड इन इंडिया' विज्ञापनों के खिलाफ कार्रवाई करने का निदेर्श दिया गया है।

सिनेमा एक्जिबिटर एसोसिएशन ने भारतीय कंटेंट का बहिष्कार किया है।


पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान के सिनेमा एग्जिबीटर्स एसोसिएशन ने भारतीय फिल्मों का बहिष्कार करने का फैसला किया है। चौधरी ने ट्वीट किया, सिनेमा एक्जिबिटर एसोसिएशन ने भारतीय कंटेंट का बहिष्कार किया है। इसके साथ पाकिस्तान में अब कोई भारतीय फिल्म रिलीज नहीं होगी।
पाकिस्तान को होगा नुकसान 
पाकिस्तान में बाॅलीवुड फिल्मों पर बैन होने से राजस्व में कमी आएगी ही, पाकिस्तान की फिल्म इंडस्ट्री पर भी बुरा असर पड़ेगा। पाकिस्तान में बॉलीवुड की फिल्में नहीं दिखाए जाने से पाकिस्तान की फिल्म इंडस्ट्री का बिजनेस 70 फीसदी कम हो जाएगा, क्योंकि पाकिस्तानी फिल्म इं‍डस्ट्री में 70 फीसदी बिजनेस बॉलीवुड और हॉलीवुड से आता है।
पहले भी अक्टूबर 2018 में पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को स्थानीय टीवी चैनलों पर प्रसारित होने वाली भारतीय फिल्मों और टीवी कार्यक्रमों पर रोक लगा दी। स्थानीय अखबार डॉन के मुताबिक शीर्ष अदालत, पाकिस्तानी टीवी चैनलों पर प्रसारित होने वाली विदेशी सामग्री के संबंध में यूनाइटेड प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
सुनवाई के दौरान, मुख्य न्यायाधीश मियां साकीब निसार ने भारतीय विषय सामग्री को बंद करने का आदेश दिया और यह स्पष्ट किया कि प्राधिकारी सिर्फ उचित सामग्री का प्रसारण करें। उन्होंने कहा,वे हमारे बांधों (के निर्माण को बाधित) करने की कोशिश कर रहे हैं और हम क्या उनके चैनलों को प्रतिबंधित भी नहीं कर सकते हैं?

साल 2006 से ही भारतीय धारावाहिक पर आंशिक प्रतिबंध लगा हुआ था लेकिन साल 2016 में कई बड़े भारतीय सीरियल्स पर बैन लगा दिया गया।

ऐसा नहीं है कि पाकिस्तान में इस तरह का प्रतिबन्ध पहली बार लगा है। वरिष्ठ फिल्म समीक्षकों को ज्ञात हो, जब 80 के दशक में अभिनेता-निर्माता शेख मुख्तियार ने फिल्म नूरजहाँ का निर्माण किया था, जो भारत में बुरी तरह से असफल हो गयी थी, और कर्जे में डूबे मुख्तियार को उनके किसी हितैषी ने फिल्म को पाकिस्तान में रिलीज़ करने का परामर्श दिया। उस दौरान भारत में असफल फिल्में किसी भी भारतीय फिल्म निर्माता को हुए नुकसान की भरपाई कर देती थी। पाकिस्तान फिल्म निर्माता संघ ने भारतीय फिल्मों के कारण पाकिस्तान फिल्मों के बॉक्स-ऑफिस पर औंधे मुंह गिरते देख किसी भी रूप में भारतीय फिल्मों के प्रदर्शन पर रोक लगा रखी थी। जिस कारण कर्ज में में डूबे शेख को पाकिस्तान जाकर भी कोई राहत नहीं मिली। उन दिनों पाकिस्तान के राष्ट्रपति थे जिया-उल-हक़। जिया चर्चितअभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा को अपने पुत्र के समान मानते थे। इस बात की जानकारी मिलते ही, शेख ने सिन्हा से सम्पर्क किया और शत्रुघ्न सिन्हा के अथक प्रयास के कारण पाकिस्तान में नूरजहाँ का प्रदर्शन क्या हुआ, उनकी तो डूबती नैया ही पार क्या लगाई, फिल्म को मिली अभूतपूर्व सफलता ने उन्हें शत्रुघ्न का मुरीद बना दिया।   
भारत-पाकिस्तान के आपसी कटु संबंधों के कारण कई ऐसे सीरियल हैं जो पाक में बैन किए गए। पाक की ओर से ये कहा जा चुका है कि उनके यहां भारतीय टीवी कार्यक्रमों के 6 प्रतिशत कन्टेंट्स ही दिखाए जाएंगे। इन 6 प्रतिशत कार्यक्रमों की भी पाक में रोक लगाने की मांग की गई। 2016  में अथॉरिटी ने ये फैसला लिया कि पाकिस्तान के अंदर भारतीय कंटेंट्स को पूरी तरह से बैन कर दिया जाए।
पाकिस्तान ने देश में अवैध भारतीय डीटीएच सेवाओं और ज्यादा विदेशी सामग्री के प्रसारण पर टीवी चैनलों और केबल संचालकों पर कार्रवाई की घोषणा की है। यह कदम भारत सरकार के ऑल इंडिया रेडियो (एआईआर) के बलूची भाषा में कार्यक्रम के प्रसारण की पहल करने के बाद आया है।
गौरलतब है कि पाकिस्तानी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक आयोग ने 2016 में स्थानीय टीवी चैनलों और एफएम रेडियो पर भारतीय सामग्री के प्रसारण पर रोक लगा दी थी। लेकिन लाहौर हाईकोर्ट ने 2017 में रोक को खारिज कर दिया था और इसे अवैध घोषित किया था क्योंकि इस संबंध में पाकिस्तानी सरकार को कोई आपत्ति नहीं थी।
पीईएमआरए के अध्यक्ष अबसार आलम ने कहा, “करीब तीन लाख भारतीय डीटीएच डिकोडर्स देश में बेचे जा रहे हैं। हम सिर्फ इस बिक्री को ही नहीं रोकना चाहते, बल्कि हमने एजेंसियों से पाकिस्तानियों को बेचे जा रहे डिकोडर्स के भारतीय डीलरों को होने वाले भुगतान के तरीके का पता लगाने को भी कहा है।”
उन्होंने कहा कि इसके लिए पर्याप्त समय केबल संचालकों और सैटेलाइट चैनलों को अपने कानून के जरूरत के अनुसार समायोजित करने के लिए दिया गया है। अन्यथा 15 अक्टूबर से दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
भारतीय डीटीएच डीलरों के खिलाफ भी तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की जाएगी। यह फैसला हाल की एक पीईएमआरए (पेमरा) परिषद की बैठक में किया गया।
आलम ने कहा कि पेमरा फेडरल राजस्व बोर्ड, स्टेट बैंक और एजेंसियों और फेडरल जांच एजेंसी को देश में भारतीय डीटीएच की बिक्री में कमी लाने लिए पत्र लिखेगा।
पेमरा नियम के तहत 24 घंटे के प्रसारण में सिर्फ 10 प्रतिशत (दो घंटे और 40 मिनट) विदेशी सामग्री का प्रसारण किया जाना है।
भारत-पाकिस्तान के आपसी कटु संबंधों के कारण कई ऐसे सीरियल हैं जो पाक में बैन किए गए। पाक की ओर से ये कहा जा चुका है कि उनके यहां भारतीय टीवी कार्यक्रमों के 6 प्रतिशत कन्टेंट्स ही दिखाए जाएंगे। इन 6 प्रतिशत कार्यक्रमों की भी पाक में रोक लगाने की मांग की गई। 2016  में अथॉरिटी ने ये फैसला लिया कि पाकिस्तान के अंदर भारतीय कंटेंट्स को पूरी तरह से बैन कर दिया जाए।
जिसके बाद नागिन से लेकर बिग बॉस तक के शो पर रोक लगी थी। हांलाकि अब पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेग्युलेटरी अथॉरिटी (पेमरा) को पाकिस्तान में भारतीय नाटकों पर लगे प्रतिबंध को समाप्त करने का आदेश दिया है। बैन हटने से पहले पाक के टीवी ऑपरेटर्स को चेतावनी दी गई कि जो इस प्रतिबंध का उल्लंघन करने के दोषी होंगे उनके लाइसेंस निलंबित कर दिये जाएंगे। प्रतिबंध पाकिस्तान में केबल पर प्रसारित हो रहे सभी भारतीय कार्यक्रमों पर लागू रहा। इस लिहाज से पाकिस्तानी दर्शक वो सीरियल नहीं देख पाए जो भारत के साथ-साथ पाकिस्तान में भी खासा मशहूर रहे।

बिग बॉस

बिग बॉस के चाहने वाले जितने भारत में हैं उतने ही पाक में भी हैं। पाकिस्तान में इस सीरियल को खासा पसंद किया गया। लेकिन बैन का दर्द इस सीरियल तो भी उठाना पड़ा। पाक में इस पर प्रतिबंध को लेकर कहा गया कि शो में गलत कंटेंट को पेश किया जाता है।

नागिन

भारत में नागिन सीरियल को दर्शकों से खासा प्यार मिला और इसके दो सीजन छोटे पर्दे पर पेश किए गए। लेकिन इस शो को भी पाक में बैन किया। इस शो पर प्रतिबंध लगाने का कारण अफवाह बताया।

"भाबी जी घर पर हैं"

छोटे पर्दे के बेहद लोकप्रिय शो "भाबी जी घर पर हैं" के टेलीकॉस्ट पर भी रोक लगी थी। इस शो के रोके जाने के बाद इसको पाक में प्रसारण के रोक के बाद यूट्यूब पर सबसे ज्यादा देखा गया।

ये हैं मुहाब्बतें

एकता कपूर के शो ये हैं मुहाब्बते को भारत के साथ ही पाक में भी जमकर पसंद किया गया, लेकिन इस शो को जब इस शो को बैन किया गया तो पाक की ओर से ही इसको दिखाए जाने की मांग उठी थी।

ये सीरियल हुए बैन



‘थपकी प्यार की’,‘कबूल है’, 'उड़ान', '24' , जैसे और भी कई सीरियल्स को पाक में रोका गया।  अब जब सीरियल के प्रसार रोक हट गई है तो इनको फिर से पहले की ही तरह से दिखाया जाने लगा है। (agencies इनपुट्स सहित)

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने "फतवों" को गैर-कानूनी" कहा

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
भारत में पनप रहे सैकड़ों मिनी पाकिस्तान और करोड़ों पाकिस्तान समर्थकों को पाकिस्तान से कुछ सीखना चाहिए। दरअसल कमजोर पाकिस्तान की ये ही लोग सबसे बड़ी ताकत भी हैं। पाकिस्तान जाकर नरेन्द्र मोदी को सत्ता से बेदखल करने पाकिस्तान के आगे गिड़गिड़ाते हैं, जो इस बात को भी प्रमाणित करता है कि "गुलाम गुलाम ही रहेगा", जिस तरह नाली के कीड़े को बाहर साफ स्थान पर रख दो, लेकिन उसे नाली पसंद होने के कारण, नाली ही की तरफ जायेगा। ठीक यही स्थिति भारत में पल रहे जयचन्दों यानि पाकिस्तान समर्थकों की है। 
अभी कुछ दिन पूर्व, पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने "फतवों" को गैर-कानूनी कहा -मगर हमारा सुप्रीम कोर्ट "सेक्युलर" है । पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने "फतवों" को गैर कानूनी करार कर दिया- अदालत ने दूसरों को नुकसान पहुंचाने के मकसद से जारी किये जाने वाले फतवों को भी गैर-कानूनी करार दिया और कहा कि ऐसे फतवों को जारी करने वालों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाया जाना चाहिए। एक इस्लामिक देश का सुप्रीम कोर्ट शायद हमारे सेक्युलर देश के सुप्रीम कोर्ट से इस्लामिक कानूनों को ज्यादा ही समझता होगा,और उससे हमारे यहाँ भी सीख लेनी चाहिए --मगर कैसे ली जाये जब हमारे सेक्युलर दल इतना भी नहीं समझते कि ट्रिपल तलाक़ पाकिस्तान जैसे इस्लामिक देश में बैन है लेकिन वो हमारे देश में इसे जारी रखने पर आमादा हैं 
'राफेल घोटाले पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने को लेकर दुविधा में हूं, वहां भी है भ्रष्टाचार'
हमारे यहाँ उत्तराखंड हाई कोर्ट के जस्टिस राजीव शर्मा और जस्टिस शरद कुमार शर्मा की बेंच ने फतवों पर अपने 30 अगस्त,2018 के आदेश में प्रतिबंध लगा दिया। अपने आदेश में हाई कोर्ट ने उत्तराखंड की सभी धार्मिक संस्थाओं, वैधानिक पंचायतों और लोगों के अन्य समूहों को "फतवे" जारी करने से प्रतिबंधित कर दिया क्योंकि इससे लोगों के मौलिक अधिकारों और मान सम्मान को ठेस लगती है। मसला एक जनहित याचिका में उठाया गया जिसमे कहा गया कि रूड़की के लक्सर गाँव की लोकल पंचायत ने एक बलात्कार से पीड़ित लड़की के परिवार को गाँव से निष्काषित करने का फतवा जारी कर दिया कर दिया - 11 अक्टूबर, 2018 को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की खंडपीठ ने के फैसले पर रोक लगा दी।  मगर अभी निर्णय नहीं हुआ है --इस बीच जस्टिस मदन बी लोकुर रिटायर हो गये हैं। जिस परिवार को गांव से निष्काषित किया गया, उसके बारे में कुछ पता नहीं वो गाँव में है या नहीं। जमीअत उलेमा ए हिन्द ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी सुप्रीम कोर्ट साधारणतया ऐसी अपीलों पर राज्य सरकार को ही नोटिस जारी करता है मगर मजे की बात है इस अपील पर हाई कोर्ट को भी पार्टी बना कर नोटिस जारी किया गया। 
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