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कोरोना वायरस : मोदी सरकार पिता के साए जैसी: इटली से लौटी युवती के पिता

नरेंद्र मोदी
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
कोरोना वायरस का प्रसार रोकने के लिए भारत की तैयारियों और प्रभावित देशों से अपने नागरिकों को लाने की केंद्र सरकार की कोशिशों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना हो रही है। जबकि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी भले इस वैश्विक महामारी को मोदी सरकार पर हमले के मौके की तरह तलाश कर रहे हैं, लेकिन सोशल मीडिया में सरकार की तारीफ करते हुए कुछ लोगों ने जो आपबीती शेयर की है वह बेहद मार्मिक है। इटली से लाई गई एक युवती के पिता ने अपनी भावना साझा करते हुए कहा है कि वो सालों से सरकार की आलोचना कर रहे थे। लेकिन, अब उन्हें एहसास हो रहा है कि मोदी सरकार पिता के साए (fatherly figure) जैसी है। विदेश से लाए गए एक युवक ने कहा है कि ऐसी व्यवस्था तो उसने जर्मनी जैसे यूरोपीय मुल्कों में भी नहीं देखी है।
टाइम्स ऑफ इंडिया के पत्रकार रोहन दुआ ने इटली से लौटी युवती के पिता का पत्र शेयर किया है। इस पत्र में उन्होंने इंडियन एंबेसी, भारत सरकार और विशेषत: नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया है। पिता के मुताबिक उनकी बेटी मास्टर की पढ़ाई करने इटली के मिलान गई थी। वहॉं हालात बिगड़ने पर उसे वापस लौटने को कहा। जब वह लौटने लगी तो उससे भारत वापस जाने का सर्टिफिकेट माँगा गया। उन्होंने खुद इंडियन एंबेसी को संपर्क करने की कोशिश की। मगर मिलान में एंबेसी का कार्यालय बंद होने के कारण ऐसा नहीं हो पाया। उन्होंने इंडियन एंबेसी के अन्य लोगों को मेल के जरिए संपर्क किया और रात के 10:30 बजे उनकी बेटी ने फोन पर बताया कि उसकी बात दूतावास में हो गई है और वह अगली फ्लाइट से भारत लौट रही है।
पिता के मुताबिक, वे सालों से भारतीय सरकार को कोस रहे थे। लेकिन मोदी सरकार में पिता का चेहरा है। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी 15 मार्च को भारत आई और आईटीबीपी अस्पताल में उसकी स्वास्थ्य संबंधी, खान-पान संबंधी सभी जरूरतों का ख्याल रखा गया। गौरतलब है कि इटली उन देशों में शामिल है जो कोरोना संक्रमण से सर्वाधिक प्रभावित हैं।


भारत सरकार इन दिनों लगातार विदेशों से लौटने वाले अपने नागरिकों को स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध करवाने में प्रयासरत है। सोशल मीडिया में वायरल हुए एक विडियो में विदेश से लौटा शख्स मिली सुविधाओं के बारे में बता रहा है। इस विडियो को रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भी शेयर किया था। इसमें व्यक्ति बता रहा है कि सरकार ने करीब 70 किलोमीटर दूर सभी पैसेंजर को कोरोन्टाइन किया है। बिल्डिंग को लगातार सैनेटाइज किया जा रहा है। बड़े-बड़े अधिकारी मौक़े पर तैनात हैं। उन्हें 24 घंटे की देखरेख में रखा है। साथ ही जहाँ उन्हें रखा गया है वहाँ सरकार ने बहुत अच्छी व्यवस्था की है। सबको अलग से रूम मिले हैं। इसमें उन्हें पानी, चप्पल, बेड, खाना, नई तौलिया सब मुहैया कराया जा रहा है। इसलिए वे नरेंद्र मोदी, स्वास्थ्य मंत्री समेत पुलिस प्रशासन और डॉक्टरों का धन्यवाद करते हैं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कोरोना वायरस के संक्रमण से निबटने के लिए सरकार ने 400 बेड का कोरोन्टाइन वार्ड तैयार करवाया है। यहाँ विदेश से लौटने वालों को सीधे दिल्ली एयरपोर्ट से लेकर जाया जाएगा। यहाँ इन सभी लोगों की 14 तक की निगरानी होगी और अगर इनमें कोरोना के लक्षण मिलते हैं तो इन्हें आइसोलेट कर छोड़ा जाएगा। ये कोरोन्टाइन वार्ड नोयडा के सेक्टर 39 में स्थित जिला अस्पताल की नई बिल्डिंग में बना है। यहाँ पर्याप्त संख्या में पैरामेडिकल स्टॉफ तैनात हैं।
नरेंद्र मोदी, जम्मू कश्मीर, कोरोना वायरसमोदी ने वो कर दिखाया, जो हमारे लिए किसी ने नहीं किया : वुहान से लौटी कश्मीरी छात्रा  जम्मू-कश्मीर के कई छात्र चीन में फँसे हुए थे। इन्हें मोदी सरकार सकुशल देश वापस लाने में सफल रही। कोरोना वायरस से प्रभावित इलाक़ों से वापस लौटने के बाद कश्मीरी छात्रों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं है। वे सभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार को धन्यवाद देते नहीं थक रहे। ऐसी ही एक छात्र ने मीडिया से बातचीत के दौरान अपने मन की बात साझा की। कश्मीरी छात्रा ने कहा कि बचपन से लेकर अब तक वो हिंसा की कई वारदातों को देख चुकी थीं, लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है जब भारत सरकार ने उनके लिए इतना बड़ा क़दम उठाया।
चैनल ‘सीएनएन न्यूज़ 18’ से बातचीत करते हुए कश्मीरी छात्रा ने कहा कि चीन में फँसे भारतीय छात्रों को वापस लेकर आना कोई साधारण बात नहीं थी। ये बहुत बड़ी बात है। उसने कहा कि ऐसा पहली बार हुआ है जब बाहर फँसे कश्मीरियों के लिए भारत सरकार ने इतना बड़ा काम किया है। उसने कहा कि मोदी ने वो कर दिखाया है, जो आज तक किसी ने नहीं किया। जम्मू कश्मीर के कुछ अन्य छात्रों ने भी मोदी सरकार की तारीफ़ की, जिन्हें वहाँ से बचा कर लाया गया।

चीन के हुबेई प्रान्त की राजधानी वुहान में कोरोना वायरस का संक्रमण सबसे ज्यादा है। वहाँ कई भारतीय छात्र फँसे हुए थे, जिनमें से कई कश्मीरी भी थे। जनवरी के अंतिम हफ्ते में जम्मू-कश्मीर के पूर्व वित्त मंत्री अल्ताफ बुखारी ने पीएम मोदी से गुहार लगाई थी कि कश्मीरी छात्रों को वहाँ से वापस लाया जाए। इसके बाद मोदी सरकार ने उन्हें वापस लाने में सफलता प्राप्त की। जम्मू-कश्मीर से वापस लाए गए छात्र-छात्रों का दिल्ली एयरपोर्ट पर और फिर कश्मीर में चेक-अप किया गया। उनमें कोई संक्रमण नहीं दिखा।
अवलोकन करें:-
अब तक ईरान से 389 भारतीय नागरिकों को वापस लाया जा चुका है। सोमवार (मार्च 16, 2020) को 53 भारतीय नागरिकों का चौथा जत्था ईरान से भारत पहुँचा। केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ट्वीट कर के इस सम्बन्ध में जानकारी दी। यह समाचार उन सभी नागरिक संशोधन बिल के विरोधियों पर इतने जोर का थप्पड़ है, जिसकी गूंज तक विरोधी सुन नहीं पा रहे कि जिस मोदी सरकार पर मुसलमानों को भारत से निकालने का दुष्प्रचार किया जा रहा है, वही मोदी सरकार अपने भारतीय मुस्लिम नागरिकों को वापस भारत ला रही है। क्या जरुरत है उन्हें वापस लाने की, लेकिन मोदी सरकार आसानी से किसी भी भारतीय को मरने नहीं देना चाहती।

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भारतीय मुसलमानों को विशेष विमान से ईरान से लाया जा रहा है आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार भारत में कुछ कट्टरपंथी कोरो....
जहाँ तक कोरोना वायरस की बात है, अब तक इससे चीन में 1868 लोगों की जान जा चुकी है। यूरोप के फ्रांस में भी कोरोना से पहली मौत की पुष्टि हुई है। स्थिति इतनी भयंकर है कि वुहान में एक हॉस्पिटल के डायरेक्टर की ही इस वायरस से मौत हो गई, जिसके अस्पताल में बड़े पैमाने पर कोरोना से पीड़ित मरीज भर्ती थे। अब तक इस खतरनाक वायरस से 72,436 लोगों के संक्रमित होने की ख़बर है। इस वायरस से प्रभावित हो चुके 12,522 मरीज ठीक भी हो चुके हैं। अब तक 25 देशों में इसके फैलने की रिपोर्ट आई है।