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‘J&K को वापस आतंक के काल में ले जाना चाहता है गुपकार गैंग, सोनिया-राहुल साफ करें स्टैंड’: अमित शाह

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के रहते वहां किस स्तर पर महिला अधिकारों का हनन किया जा रहा था, किसी से छुपा नहीं, यानि वहां की महिला का राज्य से बाहर किसी पुरुष से विवाह होने पर पिता की संपत्ति आदि से बेदखल हो जाती थी, लेकिन अनुच्छेद 370 समाप्त होने से राज्य से बाहर विवाहित महिलाओं को खोया अधिकार मिलने से वहां जनहित के नाम से गुमराह कर रही स्थानीय पार्टियां पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी और नेशनल कांफ्रेंस की नींद होने से इतने हताश हो गए हैं कि आज जनहित की बजाए अपने हित की खातिर एकजुट हो रहे हैं। 

सोशल मीडिया पर यूजर्स पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) को फटकार लगा रहे हैं। यूजर्स का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में पिछली बार बीडीओ चुनावों में अलगाव और शर्मिंदगी का सामना करने बाद पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस को डीडीसी चुनाव लड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है। वे अपने समर्थन आधार और विशेषाधिकार को खोना नहीं चाहते हैं इसलिए हताशा में बहिष्कार ना कर चुनाव लड़ने जा रहे हैं।

इसके पहले पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती की अगुवाई में बने जम्मू-कश्मीर के गुपकार गुट को लेकर गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को बड़ा हमला बोला। अमित शाह ने गुपकार गुट को ‘गुपकार गैंग’ करार देते हुए ट्वीट कर कहा कि गुपकार गैंग ग्लोबल हो रहा है। वे चाहते हैं कि विदेशी ताकतें जम्मू-कश्मीर में दखल करें। गुपकार गैंग भारत के तिरंगे का अपमान करता है। क्या सोनिया जी और राहुल जी गुपकार गैंग के ऐसे कदमों का समर्थन करते हैं? उन्हें देश की जनता के सामने अपना स्‍टैंड साफ करना चाहिए। अमित शाह के ट्वीट पर उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वे इस बार चुनाव का बहिष्कार करने नहीं जा रहे हैं। फिर क्या था सोशल मीडिया पर यूजर्स उन्हें निशाना बनाने लगे।

जम्मू कश्मीर में स्थानीय पार्टियों ने साथ मिल कर ‘गुपकार गठबंधन’ बनाया है और कॉन्ग्रेस भी उसके साथ जुड़ी है। अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस गठबंधन पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर हमेशा से भारत का अभिन्न हिस्सा रहा है, जो अभी भी है और भविष्य में भी रहेगा। अमित शाह ने इसे गैंग बताते हुए कहा कि जनता इस ‘अपवित्र गठबंधन’ को बर्दाश्त नहीं करेगी, जो देश के हितों के खिलाफ काम करने में लगा हुआ है।

अमित शाह ने ट्विटर पर 3 ट्वीट्स कर के इस गठबंधन को आड़े हाथों लिया। उन्होंने लिखा कि या तो ‘गुपकार गैंग’ देश के मूड के हिसाब से चले, या फिर जनता इसकी नैया डुबो देगी। उन्होंने कॉन्ग्रेस और गुपकार गठबंधन पर आरोप लगाया कि वो जम्मू कश्मीर को उस काल में वापस लेकर जाना चाहते हैं, जब वहाँ सिर्फ आतंक और उथल-पुथल का साम्राज्य हुआ करता था। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निरस्त कर दलितों, महिलाओं और आदिवासियों को अधिकार दिए हैं, उन्हें ये वापस छीनना चाहते हैं।

अमित शाह ने कहा कि यही कारण है, जिससे गुपकार गठबंधन और कॉन्ग्रेस को देश में हर जगह जनता द्वारा नकारा जा रहा है। उन्होंने लिखा कि अब ‘गुपकार गैंग’ वैश्विक हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग चाहते हैं कि विदेशी ताकतें भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करें। उन्होंने ‘गुपकार गैंग’ पर भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के अपमान का भी आरोप लगाया। शाह ने कॉन्ग्रेस की सोनिया गाँधी और उनके बेटे राहुल गाँधी से पूछा कि क्या वो इन चीजों का समर्थन करते हैं?

उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस की वर्तमान अध्यक्ष सोनिया गाँधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को अब इस मामले में अपना स्टैंड साफ़ कर देना चाहिए। एक अन्य केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी सोनिया-राहुल से पूछा था कि वो अनुच्छेद-370 पर फ़ारूक़ अब्दुल्लाह के साथ हैं या विरोध में? जम्मू कश्मीर में होने वाले पंचायती चुनाव में कॉन्ग्रेस द्वारा गुपकार के साथ हाथ मिलाने पर उन्होंने कहा कि ये लोग चीन से समर्थन माँग रहे हैं, क्या कॉन्ग्रेस इसके पक्ष में है?

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि जो लोग ये चाहते हैं कि अनुच्छेद-370 वापस आ जाए, वो यहाँ भ्रष्टाचार को जारी रहते देखना चाहते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे पहले जम्मू कश्मीर की कोई ‘मुस्लिम बेटी’ राज्य से बाहर शादी करती थी तो उसे संपत्ति के अधिकार से बाहर कर दिया जाता था, जिसे मोदी सरकार ने बदला। उन्होंने आरोप लगाया कि अब फिर से जम्मू कश्मीर को संकीर्ण मानसिकता की तरफ ढकेलने का प्रयास हो रहा है।

इससे पहले भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने के फैसले के बारे में पूछा था कि ये निर्णय किसका है? साथ ही जवाब देते हुए कहा था कि ये पूरे देश का निर्णय है, क्योंकि भारत का कोई भी कानून लोकतंत्र के सर्वोच्च मंदिर संसद भवन में विचार-विमर्श के बाद ही बनता है। उन्होंने कहा था, ‘मै राहुल गाँधी और सोनिया जी से पूछता हूँ कि इस गठबंधन की एक पार्टी चीन के साथ अनुच्छेद 370 को वापस लाने की बात कहती है, वहीं महबूबा मुफ्ती तिरंगा नहीं उठाना चाहतीं।

जम्मू काश्मीर में "रोशनी विधेयक" रद्द!


खेल देखिये, हिन्दुओं, कैसे अब्दुल  ने पड़ोसी हिन्दू को मार-भगाकर उसकी जमीन, मकान पर कब्जा जमा लिया १९९० में!


फिर कब्जाई जमीन उस कथित शांतिदूतों के नाम करने का षड्यंत्र रचा गया!


बिजली कनेक्शन देने की आड़ लेकर, एक "रोशनी एक्ट" बनाया फारुख अब्दुल्ला सरकार ने!


कब्जाई हिन्दूभूमि को मुस्लिम के नाम करने की फीस रखी गई मात्र १०१ रुपए!


१०१ रुपये जमा करने मात्र से राशि जमा करने वाले के नाम वो जमीन का मालिकाना हक "रोशनी एक्ट" के अंतरगत पट्टा जारी कर दिया जाता, और फिर उस पर बिजली कनेक्शन देकर उस हिन्दूभूमि को सदा के लिए मुसलमान के नाम कर दिया गया!


खेल बहुत गहरा खेला गया फारुख अब्दुल्ला द्वारा!


१९९० की कत्ल वाली रात के पस्चात, जो जमीन जिसके कब्जे में थी, उसे "रोशनी एक्ट" द्वारा उसका मालिक बनाने का कानून फारुख अब्दुल्ला ने बनाया!


१९९० के बाद से मुसलमानों के नाम की गई हिन्दूभूमि के कागजात, जो कि "रोशनी एक्ट" द्वारा जारी किए गए थे, उन्हें रद्द किया जाएगा, और उसके असली स्वामी हिन्दू को ढूंढा जाएगा!


जम्मू-काश्मीर में हिन्दुओ के अच्छे दिनों को आरंभ करता हिन्दू प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी!


इंच इंच हिन्दूभूमि पुनः काश्मीरी हिन्दुओं को दिलाने के लिए संघर्ष करता हिन्दूराज


हिन्दू पंडितों को मार-भगाकर काश्मीर में मुस्लिमों द्वारा कब्जा की गई हिन्दूभूमि को मात्र ₹१०१ में मुसलमानों के नाम करने के लिए फारुख अब्दुल्ला के द्वारा बनाये गए "रोशनी एक्ट" को हिन्दू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रद्द कर दिया है!


साथ ही २००१ में काश्मीर में मुस्लिम नेताओं व उनके रिश्तेदारों के नाम बंदरबांट द्वारा "रोशनी एक्ट" द्वारा कब्जाई हिन्दूभूमि के सारे रिकॉर्ड को भी खंगालने के आदेश जारी किए गए हैं!


भागते हिन्दुओं के बंगले, कोठियां, कारखाने, उद्योग, बाग बगीचे, केशर के बागान मुसलमानों ने कब्जा कर लिए थे!


उन हिन्दूभूमि को आतंकी मुस्लिमों व उनके रिश्तेदारों के नाम करने के लिए "रोशनी एक्ट", जो कि क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति के लिए तैयार किया गया था, उसकी आड़ में बिजली कनेक्शन देने के लिए केवल ₹१०१ में कब्जा जमीनों व बागानों, बंगलों, अन्य हिन्दूभूमि को मुस्लिमों के नाम पर पट्टा जारी कर दिया गया!


काश्मीर को हिन्दुविहीन करने के षड्यंत्र में फारुख अब्दुल्ला व महबूबा मुफ्ती दोनों के पिता की मुख्य भूमिकायें थी!


इन्होंने भी अकूत हिन्दूभूमि अपने व अपने रिश्तेदारों के नाम "रोशनी एक्ट" द्वारा पट्टा जारी करते हुए कब्जाई!


अब हिन्दू  प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के आदेशों से "रोशनी एक्ट" रद्द कर दिया गया है, और १९९० के बाद में जो भी सम्पति मुसलमानों के नाम की गई थी, सब की जांच आऱभ करने का मार्ग खोल दिया है!


हिन्दू   प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसालमिक आतंकवाद की असली जड़ पर चोट कर दिए हैं!


इसी काश्मीर से "संविधान" की आड़ लेकर, हिन्दुओं के विरुद्ध आधुनिक "गजवा-ए-हिन्द" का षड्यंत्र फारुख अब्दुल्ला और मुफ्ती मोहम्मद सैयद के द्वारा आरंभ किया गया था! जिसको "रोशनी एक्ट" बनाकर, काश्मीर में से हिन्दुविहीन करने का सफल षड्यंत्र रचा! राजनीतिक आतंकवादियों के बूरे दिन आरंभ हुए हैं!


हिन्दुओं, शीघ्रपतन के शिकार हो कर, नरेन्द्र मोदी को मत कोसो!


वो अखण्ड भारत के लक्ष्य को लेकर, चाणक्य नीति के आधार पर, राजधर्म निभा रहे हैं!


मगर कुछ मूर्खों को तो स्वयं के जागरूक नागरिक होने का सार्वजनिक प्रमाण पत्र लेने की इतनी हड़बड़ाहट लगी रहती है, कि देश में कहीं पर भी किसी सेकुलर हिन्दू के साथ कुछ घटना घटित हुई नहीं, कि लग गए मोदी को गालियां देने!


तरह तरह के सुझावों की झड़ी लगा देते हैं, कि मोदी तो विश्वास जीतने में लग गया है, मोदी ने तो हिन्दुओं के लिए क्या किया है?


ऐसे शीघ्रपतन के शिकार अत्यंत बुद्धिजीवी वर्ग के तथाकथित जागरूक हिन्दुओं को कहना चाहता हूँ कि ७२ वर्षों में जितना षड्यंत्र हिन्दुओं के विरुद्ध कांग्रेस के ईसाई व मुस्लिम नेतृत्व ने किया है, उसकी सटीक जानकारी आपको नहीं है!


आप केवल बरसाती मेंढकों की तरह टर्र टर्र करके मोदी-विरोधी गद्दारों के लिए वातावरण बनाने का अनसमझा पाप ही कर रहे हो!


अगर आपको ये लगता है कि मोदी के अच्छे निर्णयों पर कुछ लिखने मात्र से आपके पाप क्षीण हो गए हैं, तो  ये आपकी मूर्खता ही है!


बुद्धिमान व्यक्ति के तमगे लगाए आप लोग असल में जागते हिन्दुओं को पथभ्रष्ट करने का अनदेखा पाप कर रहे हो!


राजनीतिक धर्म युद्ध में कोई निष्पक्ष नहीं होता!


करोड़ों ग़द्दार मोदी के विरोध में हैं, और करोड़ों हिन्दू मोदी के पक्ष में!


अब आप ही तय करिए कि आप किस पक्ष के साथ हो!


आपके व्यवहार से किसे अधिक लाभ होता है? मोदी को या विपक्ष को?


स्वयं आंकलन करिए व अपनी कलम की दिशा धर्मरक्षार्थ गुप्त व दृश्यतामक निर्णय लेने वाले नरेंद्र मोदी के पक्ष में शाब्दिक करे मोदी-विरोधी पृष्ठभूमि के भंवरजाल में फंसे हिन्दुओं को बाहर निकल आने में साक्षी बनें

लोगों से मिलकर लौटे NC के 2 सांसद, कांग्रेस के ‘लोकतंत्र की हत्या’ वाले आरोप की निकली हवा

अकबर लोने, हसनैन मसूदी
मोहम्मद अकबर लोन और जस्टिस (रिटायर्ड) हसनैन मसूदी ख़िलाफ़ काफ़ी मुखर रहे हैं
जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने और राज्य के पुनर्गठन का निर्णय लिए जाने के बाद विपक्षी दलों ने जम कर राजनीति की। कांग्रेस ने तो इसे अंतरराष्ट्रीय मसला तक बता दिया। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद के साथ कई विपक्षी नेतागण श्रीनगर पहुँचे लेकिन उन्हें एयरपोर्ट से ही वापस दिल्ली भेज दिया गया। राज्यपाल सत्यपाल मलिक का कहना है कि ये नेता राजनीति करने यहाँ आए थे और इससे माहौल बिगड़ सकता था।
इसके बाद विपक्षी दलों ने यह कहना शुरू कर दिया कि जम्मू कश्मीर में सबकुछ ठीक नहीं है। हालाँकि, बसपा सुप्रीमो मायावती ने इन नेताओं को फटकार लगाते हुए केंद्र सरकार को समय देने की बात कही। नवीन पटनायक की बीजद, चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी और जगन रेड्डी की वाईएसआरसीपी सही कई विपक्षी दलों ने अनुच्छेद 370 पर संसद में सरकार का साथ भी दिया था। लेकिन, क्या आपको पता है कि जम्मू कश्मीर में कुछ विपक्षी नेता न सिर्फ़ घूम रहे हैं बल्कि लोगों से मिल भी रहे हैं।

ये नेतागण केंद्र सरकार और भाजपा के ख़िलाफ़ बयान भी दे रहे हैं लेकिन उन्हें पुलिस ने गिरफ़्तार नहीं किया। इससे विपक्षी पार्टियों के आरोपों की पोल भी खुल जाती है। मोदी सरकार पहले से ही कहती आ रही है कि जम्मू कश्मीर को 2 परिवारों के चंगुल से मुक्त कराना है।
अब्दुल्ला परिवार की पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस के 2 सांसदों ने जम्मू कश्मीर का दौरा किया और अब वे दिल्ली लौट आए हैं। दोनों नेताओं ने पूरी सक्रियता से घाटी में लोगों से मुलाक़ातें की। एनसी के वरिष्ठ नेताओं मोहम्मद अकबर लोन और जस्टिस (रिटायर्ड) हसनैन मसूदी ने कश्मीर का दौरा किया।
दोनों नेताओं ने एनसी के श्रीनगर स्थित मुख्यालय में बैठकें की और सिविल सोसाइटी से संवाद किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, केंद्र सरकार कुछ स्थानीय नेताओं के माध्यम से जनता से संवाद कर हालात को सामान्य बनाए रखने की जुगत में लगी है। इसके लिए स्थानीय नेताओं की मदद ली जा रही है। हालाँकि, यह भी याद होना चाहिए कि अकबर लोन कभी पाकिस्तान का समर्थन कर चुके हैं और विधानसभा में भारत-विरोधी नारेबाजी भी कर चुके हैं।

धारा 370: ऐतिहासिक गलती सुधारी गई : जनार्दन द्विवेदी, कांग्रेस वरिष्ठ नेता

रहस्य-रोमांच से भरपूर फिल्म जैसा रहा अनुच्छेद 370 को हटाने का घटनाक्रम
अमित शाह की पीठ थप-थपाते मोदी 
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
मोदी सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाए जाने का घटनाक्रम रहस्य-रोमांच से भरी किसी फिल्म जैसा रहा जिसमें हर कोई अंदाज लगाता रहा और पता तब चला जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को संसद में घोषणा की. किसी धमाकेदार फिल्म की तरह सुरक्षबलों की तैनाती हुई, आतंकी खतरे के मद्देनजर परामर्श जारी हुआ, कश्मीर घाटी के राजनीतिक नेताओं को नजरबंद किया गया, इंटरनेट सहित अन्य संचार सेवाएं रोक दी गईं और बीती आधी रात अत्यंत गहमागहमी रही. यह सब जुलाई के अंतिम सप्ताह में तब शुरू हुआ जब केंद्र ने आतंकवाद रोधी अभियानों की मजबूती और कानून व्यवस्था की स्थिति के आधार पर घाटी में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की 100 कंपनियों (करीब दस हजार केंद्रीय सुरक्षाकर्मियों) की तैनाती का आदेश दिया. 
हालांकि, राज्य के राजनीतिक दलों और विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार के 'इरादों' पर चिंता जाहिर की और दावा किया कि केंद्र 'कुछ बड़ा करने' की योजना बना रहा है. कश्मीर घाटी में चिंता का माहौल उत्पन्न हो गया जहां श्रीनगर के संवेदनशील इलाकों और कश्मीर के अन्य हिस्सों में अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई. इनमें से ज्यादातर सुरक्षाकर्मी केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) से थे. यह तैनाती 100 कंपनियों के अतिरिक्त थी. स्थिति शुक्रवार को तब चरम पर पहुंच गई जब सेना ने कहा कि पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी अमरनाथ तीर्थयात्रियों को निशाना बनाने की साजिश रच रहे हैं. इसके साथ ही जम्मू कश्मीर प्रशासन ने परामर्श जारी कर तीर्थयात्रियों और पर्यटकों से तत्काल घाटी छोड़ने को कहा. कयास लगाए जाने लगे कि कश्मीर में हो रहे घटनाक्रम आतंकी खतरे से जुड़े हैं. वहीं, अनेक लोग अनुच्छेद 35-ए और अनुच्छेद 370 पर कोई बड़ी घोषणा होने की अटकलें लगाने लगे. अमरनाथ तीर्थयात्रियों और पर्यटकों ने सरकार के परामर्श के बाद शनिवार को घाटी को छोड़ना शुरू कर दिया. 
अटकलें तब और बढ़ गईं जब सरकार ने एअरलाइनों से कहा कि वे जम्मू कश्मीर से बाहर जाने वाली उड़ानों के किराए पर नियंत्रण रखें. वहीं, रेलवे ने घोषणा की कि वह कश्मीर से बाहर जा रहे यात्रियों से टिकट रद्द कराने का कोई शुल्क वसूल नहीं करेगा. इस बीच, राज्य के राज्यपाल ने जम्मू कश्मीर के राजनीतिक दलों से कहा कि वे अपने समर्थकों से शांत रहने और घाटी में 'उड़ रहीं अफवाहों' पर विश्वास न करने को कहें. अनुच्छेद 35-ए तथा अनुच्छेद 370 को लेकर बढ़ती अटकलों के बीच जम्मू कश्मीर में क्षेत्रीय दलों ने रविवार को सर्वसम्मत संकल्प लिया कि वे राज्य को विशेष दर्जा देने वाले प्रावधानों को खत्म करने या राज्य को तीन हिस्सों में बांटने के किसी भी प्रयास के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे. 
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कांग्रेस में अनुच्छेद 370 पर मतभेद; अधिकतर नेता सरकार के समर्थन में  
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का प्रस्ताव जब राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने पेश किया तो समर्थन और विरोध में लोग खुलकर सामने आने लगे. सरकार को इस कदम पर उम्मीद से बेहतर समर्थन मिला. इस मसले पर कांग्रेस सदन के अंदर ज्यादा मजबूत नजर नहीं आई. शाम होते-होते पार्टी इस मसले पर बंटी हुई नजर आई. कांग्रेस के कई नेताओं ने कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने का समर्थन किया. इस लिस्ट में हरियाणा के दीपेंद्र हुड्डा, महाराष्ट्र के मिलिंद देवड़ा से लेकर सीनियर कांग्रेसी जनार्दन द्विवेदी शामिल हैं. दीपेंद्र हुड्डा ने तो इस अनुच्छेद को लेकर ट्वीट किया कि 21वीं सदी में इसकी कोई जगह ही नहीं है. हालांकि कुछ देर बाद उन्होंने अपना यह ट्वीट हटा लिया. अपने इस ट्वीट के साथ उन्होंने एक अखबार की पुरानी खबर भी ट्वीट की थी, जिसमें उनके हवाले से 370 हटाने की वकालत की गई थी. 
मिलिंद देवड़ा ने ट्वीट कर कहा कि दुर्भाग्य से आर्टिकल 370 के मसले को लिबरल और कट्टर की बहस में उलझाया जा रहा है. पार्टियों को अपने वैचारिक मतभेदों को किनारे कर भारत की संप्रभुता, कश्मीर शांति, युवाओं को रोजगार और कश्मीरी पंडितों के लिए न्याय के लिहाज से सोचना चाहिए. 
Very unfortunate that Article 370 is being converted into a liberal vs conservative debate.

Parties should put aside ideological fixations & debate what’s best for India’s sovereignty & federalism, peace in J&K, jobs for Kashmiri youth & justice for Kashmiri Pandits.
उनके अलावा जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि राम मनोहर लोहिया भी इसके समर्थन थे. द्विवेदी ने कहा कि मेरे राजनीतिक गुरु राम मनोहर लोहिया शुरू से ही अनुच्छेद 370 का विरोध करते थे. हम लोग छात्र आंदोलन में इसका विरोध किया करते थे. जहां तक मेरा व्यक्तिगत विचार है तो उसके हिसाब से यह एक राष्ट्रीय संतोष की बात है. 
धारा 370: कांग्रेस के इस दिग्गज नेता ने मोदी सरकार के कदम का किया स्वागत, कहा- ऐतिहासिक गलती सुधारी गईधारा 370: ऐतिहासिक गलती सुधारी गई
कांग्रेस के सीनियर नेता जनार्दन द्विवेदी ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने और राज्य को दो केंद्रशासित क्षेत्रों में बांटने के केंद्र सरकार के कदम का समर्थन किया और अपनी पार्टी के रुख के विपरीत राय रखते हुए कहा कि सरकार ने एक 'ऐतिहासिक गलती' सुधारी है. द्विवेदी ने कहा कि यह राष्ट्रीय संतोष की बात है कि स्वतंत्रता के समय की गई गलती को सुधारा गया है. उन्होंने कहा कि यह बहुत पुराना मुद्दा है. स्वतंत्रता के बाद कई स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नहीं चाहते थे कि अनुच्छेद 370 रहे. मेरे राजनीतिक गुरु राम मनोहर लोहिया शुरू से ही अनुच्छेद 370 का विरोध करते थे. मेरे व्यक्तिगत विचार से तो यह एक राष्ट्रीय संतोष की बात है. 
सरकार ने जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्रदान करने संबंधी अनुच्छेद 370 समाप्त करने और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों.... जम्मू कश्मीर और लद्दाख में विभाजित करने का फैसला किया है. इससे संबंधित दो संकल्पों एवं एक विधेयक को सोमवार को राज्यसभा की मंजूरी मिल गयी. धेयक के पक्ष में 125 वोट और विपक्ष में 61 वोट पड़े. वहीं एक सदस्य गैर हाजिर रहा.
धारा 370 हटाए जाने के फैसले पर क्या कहते हैं कश्मीरी पंडित?
अटकलों और अफवाहों का गर्म होता बाजार 
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने बैठक में स्वीकार किया गया प्रस्ताव पढ़ते हुए कहा कि दलों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के पास प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया है जो संविधान के अनुच्छेद 35-ए तथा अनुच्छेद 370 को हटाने या निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन या राज्य को तीन हिस्सों में बांटने के किसी भी प्रयास के दुष्परिणामों के बारे में अवगत कराएंगे. बैठक के तुरंत बाद घाटी में तेजी से होते घटनाक्रमों से रहस्य गहरा गया क्योंकि अधिकारियों ने रविवार की रात महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों और संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा बढ़ा दी, मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दीं तथा कई नेताओं को या तो 'गिरफ्तार' कर लिया या 'हिरासत' में ले लिया गया. 
दो पूर्व मुख्यमंत्रियों महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उन्हें नजरबंद कर दिया गया है. वहीं, कांग्रेस नेता उस्मान माजिद और माकपा नेता एमवाई तारिगामी ने दावा किया कि उन्हें आधी रात के करीब गिरफ्तार कर लिया गया. रात में गहराए रहस्य के बाद सोमवार की सुबह केंद्रीय कैबिनेट की बैठक हुई. 
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार सेवा निर्वित उपरान्त एक हिन्दी पाक्षिक को सम्पादित करते सितम्बर 2014 में आमुख लेख शीर्.....

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लोकसभा चुनाव 2019 के संकल्प पत्र (घोषणा पत्र) में भारतीय जनता पार्टी ने कश्मीर में धारा 370 हटाने की बात कही है। इस पर जम्...

हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में क्या चर्चा हुई, इसके ब्योरे का खुलासा नहीं किया गया. बैठक के तत्काल बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने संदेश दिया कि गृह मंत्री अमित शाह संसद में बयान देंगे. इससे कश्मीर के बारे में किसी बड़ी घोषणा की खबरें हवा में तेजी से तैरने लगीं. राज्यसभा की बैठक शुरू होते ही शाह ने अनुच्छेद 370 को खत्म करने की घोषणा की, और इस तरह कई दिनों से चली आ रही अटकलों, चिंता और रहस्य-रोमांच पर विराम लग गया. (एजेंसीज इनपुट्स)

जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को समाप्त करने के समर्थन में AAP तो विरोध में कांग्रेस

Image may contain: 2 people, people standingImage may contain: 2 peopleआज का दिन सचमुच ऐतिहासिक है ।आज भावनाएं इतनी अधिक अपने आप को आनंदित अनुभव कर रही हैं कि अपने आनंद का वर्णन करने के लिए शब्द नहीं है । एक शब्दातीत और वर्णनातीत ऐतिहासिक निर्णय को पारित होते हुए आज हमने देखा है। एक बहुत गौरवमयी इतिहास के हम साक्षी बने हैं । आज हमारे उन लाखों बलिदानियों का बलिदान सार्थक हुआ है जिनके कारण हम को आजादी मिली थी । आज हमारे उन लाखों कश्मीरी बहन भाइयों को आजादी मिली है , जो इस देश के भीतर रहकर ही शरणार्थी का जीवन जी रहे थे । आज इस देश से वास्तव में उस मुगलिया सत्ता का अंतिम दाग हटा है जो पिछले 72 वर्ष से देश की इस रियासत का खून चूस रही थी आज हर राष्ट्रवादी खुश है, जबकि हर राष्ट्र विरोधी, आतंकवादी और जयचंदी भूमिका में रहने वाला हर सेकुलर दुखी है । देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए लिए गए इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए मोदी सरकार की जितनी प्रशंसा की जाए उतना कम है।
सचमुच मोदी जी ने आज अपना 56 इंची सीना दिखा दिया है और दुनिया के लोगों को यह बता दिया है कि भारत अपने निर्णय अपने आप लेना जानता है। उसे किसी ट्रंप की आवश्यकता नहीं है, उसे किसी चीन जैसे साम्राज्यवादी देश की गीदड़ धमकियों से डरने की आवश्यकता नहीं है ,और उसे बर्बाद होते पाकिस्तान जैसे आतंकी राष्ट्र की आतंकवादी धमकियों की कोई परवाह नहीं है । वह शान से आगे बढ़ना जानता है और शान से अपने निर्णय अपने आप लेना जानता है।
स्वाबलंबी और गौरवबोध से भरे हुए देश को आज हम बनते हुए देख रहे हैं । जब शासक की ऐसी नीतियों से देश का जनमानस अपने आप में हर्ष और आनंद की अनुभूति करने लगे तब समझो कि सचमुच शासन राज धर्म का निर्वाह कर रहा है।

म्‍मू-कश्‍मीर से धारा 370 को समाप्‍त किए जाने को लेकर राज्‍यसभा में कांग्रेस के नेता और सांसद गुलाम नबी आजाद ने कहा कि सत्‍ताधारी दल सत्‍ता के नशे में चूर हैं. ​​सांस्कृतिक, भौगोलिक, ऐतिहासिक और राजनीतिक रूप से अलग एक सीमावर्ती राज्य, अनुच्छेद 370 द्वारा हमारे साथ बंधे हुए थे. सत्ता पाने के लिए नशे में, बीजेपी सरकार ने इन 3-4 चीजों को बिखेर दिया हैं. राजनीतिक दल जम्‍मू-कश्‍मीर के साथ खड़े होंगे. गुलाम नबी आजाद संसद से बाहर निकल कर इस मुद्दे पर पत्रकारों से बातचीत में कहा है कि सरकार के यह फैसला असंवैधानिक है और हम इसका विरोध करते हैं. गुलाम नबी आजाद के साथ टीएमसी के सांसद भी थें.
इससे पहले जम्‍मू-कश्‍मीर से धारा 370 समाप्‍त किए जाने का फैसला लिया गया है. राज्‍यसभा में भारत के गृह मंत्री अमित शाह ने इसकी घोषणा की. भारत के राष्‍ट्रपति राम नाथ कोविंद ने एक संवैधानिक आदेश में जम्‍मू-कश्‍मीर से धारा 370 हटाए जाने का आदेश दिया था. जम्‍मू-कश्‍मीर से अनुच्‍छेद 370 के खंड एक को छोड़कर सभी प्रावधानों को खत्‍म कर दिया गया है. इसकी जानकारी गृह मंत्री ने सदन को दी. इसके साथ ही लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश के रूप में जम्‍मू-कश्‍मीर से अलग किया जा रहा है. गृह मंत्री के इस बयान के बाद राज्‍यसभा में जमकर हंगामा हुआ. राज्‍यसभा में विपक्षी पार्टी कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि यह असंवैधानिक है और हम इसका विरोध करते हैं. गृह मंत्री के इस घोषणा के बाद देश के कुछ दल सरकार के इस फैसले का समर्थन किया तो कुछ दलों ने इसका विरोध किया. सरकार के इस कदम का विरोध करने वालों में कांग्रेस के अलावा टीएमसी, जेडीयू, एनसी, पीडीपी आदि शामिल हैं.
GN Azad,Congress: A border state, which is culturally, geographically, historically&politically different was bound together by Article 370. Drunk in power&to get votes, BJP govt scrapped 3-4 things. They've cut off head of the country. Political parties will fight&stand with J&K






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गृह मंत्री की घोषणा के बाद पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के सांसद नजीर अहमद लवाय और मीर मोहम्मद फैयाज ने सदन में संविधान की प्रतियां फाड़कर अपना विरोध दर्ज कराया. इन सांसदों को राज्‍यसभा के सभापति ने सदन से जाने का आदेश दिया.
PDP's RS MPs Nazir Ahmad Laway&MM Fayaz protest in Parliament premises after resolution revoking Article 370 from J&K moved by HM in Rajya Sabha; The 2 PDP MPs were asked to go out of the House after they attempted to tear the constitution. MM Fayaz also tore his kurta in protest






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जम्‍मू-कश्‍मीर की पूर्व मुख्‍यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने राज्‍य से धारा 370 खत्‍म किए जाने का विरोध किया और कहा, ''आज का दिन भारतीय लोकतंत्र का स्याह दिन है. अनुच्छेद 370 निरस्त करने का भारत सरकार का एकतरफा फैसला गैर कानूनी, असंवैधानिक है. जम्मू-कश्मीर में भारत संचालन बल बन जाएगा. अनुच्छेद 370 पर उठाया गया कदम उपमहाद्वीप के लिए विनाशकारी परिणाम लेकर आएगा, वे जम्मू-कश्मीर के लोगों को आतंकित कर इस क्षेत्र पर अधिकार चाहते हैं. भारत कश्मीर के साथ किये गए वादों को पूरा करने में नाकाम रहा है.''
उधर जम्‍मू-कश्‍मीर के पूर्व मुख्‍यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने राज्‍य से अनुच्छेद 370 हटाए जाने पर कहा सरकार ने एकतरफा फैसला किया है. यह भरोसे पर पूरी तरह धोखा है.
बिहार में एनडीए के सहयोगी जेडीयू ने सरकार के इस कदम का विरोध किया है. पार्टी नेता के सी त्‍यागी ने कहा कि हमारी अलग सोच है. हमारे नेता नीतीश कुमार जेपी नारायण, राम मनोहर लोहिया और जॉर्ज फर्नांडिस के विचारों को मानती है. और मेरा मानना है कि धारा 370 नहीं हटाए जाने चाहिए.
KC Tyagi, JD(U): Our chief Nitish Kumar is carrying forward the tradition of JP Narayan, Ram Manohar Lohia & George Fernandes. So our party is not supporting the Bill moved in the Rajya Sabha today. We have different thinking. We want that Article 370 should not be revoked.






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