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राजस्थान :अब धर्मांतरण नहीं होने देंगे, स्कूलों में हिजाब और नमाज पर बैन की तैयारी, शिक्षा मंत्री का ऐलान- प्रदेश के स्कूलों में ड्रेस कोड की पालना नहीं करने पर करेंगे कड़ी कार्रवाई

अगर कांग्रेस देश को आज़ादी देने का श्रेय लेती है, तो देश को विवादों में उलझाए रखने का भी श्रेय लेना चाहिए। केवल मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए कांग्रेस और अब इसके समर्थक दल हिन्दुओं के अधिकारों का हनन कर मुस्लिमों को खुली छूट देते रहे। स्कूलों में हिजाब प्रतिबन्ध करने पर सनातन विरोधी सुहागिन के मंगल सूत्र तक पहुँच रहे हैं। इन अशिक्षित बने शिक्षितों को नहीं मालूम की एक सुहागन के लिए मंगल सूत्र का क्या महत्व है। जनता को उल-जलूल मुद्दों में उलझा कर अपनी गन्दी सियासत खेलने वालों से जनता को सतर्क रहने की जरुरत है। इन छद्दम सेक्युलरिस्टों से पूछा जाना चाहिए कि जब संविधान में Secular शब्द डाला तो Muslim Personal Law Board बनाने की क्या जरुरत थी? वक़्फ़बोर्ड बनाने का क्या औचित्य था? सेकुलरिज्म के नाम आखिर कब तक हिन्दू अधिकारों का हनन होता रहेगा? गुरुकुलों पर पाबन्दी, लेकिन मदरसों पर नहीं, क्यों? 

साल 2021 दिसंबर में कर्नाटक के एक कॉलेज में छात्राओं को हिजाब पहनने से रोका गया था। यहां से शुरू हुआ विवाद उस दौरान देश-दुनिया में चर्चा का विषय रहा। विवाद इतना गहराया कि तत्कालीन राज्य सरकार ने स्कूल-कॉलेजों में हिजाब पहनने पर रोक लगा दी थी। कर्नाटक हाईकोर्ट ने भी सरकार के पक्ष में ही फैसला सुनाया। अब राजस्थान में भी एजुकेशनल संस्थानों में हिजाब पहनने को लेकर बहस छिड़ गई है।  

राजस्थान में पिछली गहलोत सरकार ने धर्मांतरण को खुली छूट दे रखी थी। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि अब किसी भी कीमत पर सरकारी स्कूलों में धर्मांतरण नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि अब राजस्थान के किसी भी स्कूल में हिजाब पहनकर आना स्वीकार्य नहीं होगा। वहीं, किसी भी स्कूल परिसर में नमाज नहीं पढ़ने दी जाएगी। दूसरी ओर कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने सरकारी और प्राइवेट ही नहीं, बल्कि मदरसों तक में हिजाब को प्रतिबंधित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि वे इसके लिए मुख्यमंत्री से मिलकर अनुरोध करेंगे।

भाजपा विधायक बालमुकुंदाचार्य ने स्कूलों में एक ड्रेस कोड की वकालत की
जयपुर के हवामहल से विधायक बालमुकंदाचार्य के एक सरकारी स्कूल में दिए बयान के बाद यह मुद्दा गर्माया है। हिजाब को लेकर सबसे पहले भाजपा विधायक बालमुकुंदाचार्य ने सवाल उठाया था। अपने क्षेत्र के एक स्कूल के कार्यक्रम में पहुंचे बालमुकुंदाचार्य ने सवाल उठाया था कि विद्यालय में दो तरह के ड्रेस कोड हैं क्या? राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर भी छात्राओं ने अलग-अलग ड्रेस क्यों पहन रखी है। उन्होंने स्कूल में ड्रेस कोड की वकालत की। इसके बाद बालमुकुंदाचार्य के खिलाफ छात्राओं ने प्रदर्शन किया था। बाद में सुभाष चौक थाने के घेराव के विरोध में जिन हिंदू छात्राओं ने अपनी आवाज बुलंद की, उन छात्राओं के साथ बदसलूकी करने के आरोप भी सामने आ रहे हैं।

सरकारी-प्राइवेट स्कूलों में ही नहीं, मदरसों में भी लगे रोक- कृषि मंत्री
शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पहनने को लेकर विवाद के बीच दूसरे राज्यों में हिजाब को लेकर स्टेट्स रिपोर्ट मांगी गई है। वहीं, राजस्थान सरकार के सीनियर मंत्री डॉ किरोड़ीलाल मीणा ने हिजाब बैन की वकालत की है। माना जा रहा है कि राज्य सरकार हिजाब बैन को लेकर तैयारी कर रही है। कैबिनेट मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने भी कहा है कि हिजाब और बुर्का पर प्रतिबंध बेहद जरूरी है। कई मुस्लिम देशों में जब हिजाब पर प्रतिबंध है तो यहां क्यों हिजाब रहे। कृषि मंत्री मीणा ने यहां तक कहा कि सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में ही नहीं, बल्कि मदरसों में भी हिजाब पर रोक लगाई जानी चाहिए। इसे लेकर वे जल्द ही मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे।

कांग्रेस मुस्लिमों का तुष्टीकरण करती है, अब धर्मांतरण नहीं होने देंगे
हिजाब के मुद्दे पर कृषि मंत्री किरोड़ी लाल ने कहा कि मुस्लिम समाज में धर्म की कट्टरता है और कांग्रेस इसका तुष्टीकरण करती है, जिसके कारण ये आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। इनमें शिक्षा की कमी है। शिक्षा का प्रसार होना चाहिए और मुस्लिम समाज को अपनी सोच प्रगतिशील रखनी चाहिए। वहीं, CAA को लेकर कैबिनेट मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने कहा है कि मैं भी इसके समर्थन में हूं और इसे जल्द लागू होना चाहिए। सरकार के एजेंडे में शामिल है ये तो होना भी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजस्थान के किसी भी सरकारी या निजी स्कूलों में धर्मांतरण नहीं होने दिया जाएगा, इस सख्ती से दबाया जाएगा।

सभी स्कूल ड्रेस कोड का सख्ती से पालन करें, नहीं तो कार्रवाई- शिक्षा मंत्री
इस बीच राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने इस मामले में विभाग से दूसरे राज्यों में हिजाब बैन के स्टेटस और राजस्थान में इसके प्रभावों को लेकर रिपोर्ट मांगी है। इस रिपोर्ट के बाद हिजाब के ख़िलाफ सरकार एक्शन लेगी। शिक्षा मंत्री दिलावर के मुताबिक प्रदेश में हिजाब को लेकर जल्द ही मुख्यमंत्री विचार-विमर्श किया जाएगा। स्कूलों में ड्रेस कोड ही रहेगा और हिजाब पहनकर आना गलत है। उन्होंने कहा कि स्कूल में जो ड्रेस कोड लागू होता है, उसकी पालना होनी चाहिए। अगर स्कूल में बच्ची हिजाब पहनकर जाएगी तो स्कूल में अनुशासन नहीं रहेगा और वैसे भी हिजाब कई देशों में प्रतिबंधित है। इसलिए स्कूलों में इसकी किसी भी तरह से इजाजत नहीं दी जा सकती है। दिलावर ने कहा कि सरकारी स्कूलों में पहले से ही ड्रेस कोड का नियम बना हुआ है। इसे सख्ती से लागू किया जाएगा।

तुष्टिकरण के लिए कांग्रेस विधायक ने विधानसभा में उठाया मुद्दा
प्रदेश में हिजाब का मुद्दा ऐसा गरमाया कि विधानसभा तक पहुंच गया है। कांग्रेस अपनी तुष्टीकरण की नीति पर बाज नहीं आई और विधानसभा में कांग्रेस विधायक रफीक खान ने हिजाब पर पाबंदी होने और बच्चों को हिजाब पहनकर नहीं आने की बात का जिक्र करते हुए सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राजस्थान में सरकारी स्कूलों में हिजाब पर पाबंदी लगाने की सरकार तैयारी कर रही है। रफीक खान के स्थगन प्रस्ताव से अलावा मुद्दा उठाने पर बीजेपी विधायकों ने कड़ी आपत्ति की थी। इस पर स्पीकर वासुदेव देवनानी ने स्थगन प्रस्ताव के विषय के अलावा बोली गई बातों को सदन की कार्यवाही से निकालने का आदेश दे

अभी सरकारी, प्राइवेट स्कूलों और मदरसों का अलग-अलग ड्रेस कोड..
राजस्थान में अभी सरकारी, प्राइवेट स्कूलों में अलग अलग ड्रेस कोड है। स्टूडेंट को तय यूनिफॉर्म में ही स्कूल आना होता है। सरकारी स्कूलों में प्रदेशभर में एक ही तरह की यूनिफॉर्म है। मदरसों में पढ़ने वाली छात्राएं हिजाब पहनकर जाती हैं। जबकि सिख स्टूडेंट को पगड़ी पहनकर आने की छूट दी जाती है। सूत्रों के अनुसार शिक्षा विभाग में उच्च स्तर पर हिजाब बैन मामले में रिपोर्ट तैयार करके शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को भेजी जाएगी। उच्च स्तर से हरी झंडी मिलने के बाद राजस्थान के स्कूलों में हिजाब पर रोक लगाई जा सकती है।

हिजाब के विरोध में ईरानी एक्ट्रेस ने उतारे शरीर से सारे कपड़े

                   हिजाब के विरोध में एक्ट्रेस एलनाज नोरौजी ने उतारे कपड़े (फोटो साभार: @iamelnaaz)
भारत में हिजाब विवाद अदालतों के चक्कर काट रहा है, तो ईरान में इन दिनों हिजाब विरोधी प्रदर्शन तेज हो गया है। इस विरोध प्रदर्शन की शुरुआत हिजाब नहीं पहनने के कारण महसा अमीनी नाम की लड़की की पुलिस की पिटाई से मौत के बाद हुई थी। इस विरोध प्रदर्शन में अब तक कई लोग मारे जा चुके हैं। इसके बावजूद यह प्रदर्शन रुकने का नाम नहीं ले रहा है।

ईरान में हिजाब को लेकर भड़की आग सोशल मीडिया के जरिए पूरी दुनिया में फैल चुकी है। बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा और मंदाना करीमी के बाद अब हिजाब (Hijab) को लेकर एक और अभिनेत्री का रिएक्शन सामने आया है। नेटफ्लिक्स की हिट सीरीज सेक्रेड गेम्स में काम कर चुकी एलनाज नोरौजी (Elnaaz Norouzi) ने हिजाब का विरोध करते हुए मंगलवार (11 अक्टूबर 2022) को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया है।

इस वीडियो को उन्होंने ‘मॉय बॉडी-मॉय चॉइस’ का नाम दिया है। इसमें वह कैमरे के सामने एक-एक करके अपने सारे कपड़े उतारती हुई नजर आ रही हैं। उनकी वीडियो का काफी लोग सपोर्ट कर रहे हैं। उन्ही में से एक एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला भी हैं। उन्होंने उनकी पोस्ट पर कमेंट भी किया है। 

उर्वशी रौतेला ने लिखा, “हमें आप पर गर्व है क्वीन। हम महिलाओं का समर्थन करते हैं।” वहीं टीवी एक्ट्रेस स्मृति खन्ना ने भी कमेंट में सलाम करने वाला इमोजी बनाया है। इनके अलावा अन्य यूजर्स ने भी नोरौजी के इस वीडियो की सराहना की है।

दरअसल, बॉलीवुड एक्ट्रेस एलनाज नौरोजी मूल रूप से ईरान की रहने वाली हैं। उनका पूरा परिवार भी ईरान में ही रहता है। सितंबर 2022 में भी उन्होंने हिजाब विरोधी प्रदर्शन को लेकर इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया था। इस वीडियो में उन्होंने बताया था कि कैसे ईरान में छोटी-छोटी बातों को लेकर लोगों के साथ बुरी तरह व्यवहार किया जाता है। यदि वजह थोड़ी सी भी बड़ी हुई तो उन्हें बेरहमी से पीटा भी जाता है। वह बॉलीवुड के कई कलाकारों के साथ टीवी एड में भी काम कर चुकी हैं।  

‘हिजाब पहनना इस्लाम में जरूरी मजहबी प्रथा नहीं’: कर्नाटक बुर्का विवाद में HC

हिजाब विवाद को लेकर कर्नाटक हाईकोर्ट में आज (18 फरवरी, 2022) छटवें दिन भी सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता पक्ष के वकीलों ने अपनी दलीलें रखीं। आज भी इस मामले पर फैसले की उम्मीद की जा रही है। आज कोर्ट में बाकी बची 7 याचिकाओं के आधार पर ही सुनवाई हुई। आज की सुनवाई एटॉर्नी जनरल (AG) प्रभुलिंग नवदगी की दलीलों से हुई।

इस दौरान सरकार की तरफ से एडवोकेट जनरल (AG) ने कहा कि हिजाब इस्लाम का जरूरी हिस्सा नहीं है। 14 फरवरी से लगातार चीफ जस्टिस ऋतुराज अवस्‍थी, जस्टिस कृष्‍णा एस दीक्षित, जस्टिस जैबुन्निसा मोहियुद्दीन काजी की बड़ी बेंच इस मामले पर सुनवाई कर रही है। इससे पहले कोर्ट में छात्राओं की तरफ ह‍िजाब के पक्ष में दलीलें दी गईं थीं।

एडवोकेट जनरल द्वारा यह कहना कि 'हिजाब इस्लाम का जरुरी हिस्सा नहीं", स्मरण करवाता है आर्गेनाइजर साप्तहिक के पूर्व संपादक प्रो वेद प्रकाश भाटिया(स्व) ने अपने जीवनकाल में अपने प्रतिष्ठित स्तम्भ Cabbages & Kings, जिसमें कई बार उन्होंने लिखा कि "burqa is not an Islamic culture...there many times boys having attractive and charming face were forced to keep in burqa..." लेकिन किसी ने उनके लेख का खंडन तक नहीं किया। प्रमाण के लिए कोई भी व्यक्ति वर्तमान सम्पादक की आज्ञा से कभी भी Organiser Weekly कार्यालय जाकर उन अंकों को पढ़ सकता है।    

मामले में सरकार की तरफ से पक्ष रखते हुए एडवोकेट जनरल ने कहा, “2018 में वर्दी निर्धारित थी। दिसंबर 2021 तक कोई समस्या नहीं आई। छात्राओं के एक समूह जो याचिकाकर्ता भी हैं, उन्होंने प्रिंसिपल से संपर्क किया और जोर देकर कहा कि वे हिजाब पहनकर कॉलेज में आएँगी। 31 दिसंबर से यह घटना तब हुई जब कुछ लड़कियों ने प्रिंसिपल के पास जाकर कहा कि वे हिजाब पहनकर ही कॉलेज में प्रवेश करेंगी। जब यह जिद हुई तो सीडीसी ने जाँच करना चाहा। सीडीसी की अध्यक्षता विधायक ने 01.01.2022 को की।

वहीं कल की सुनवाई में 5 छात्राओं के वकील एएम डार ने कोर्ट से माँग की कि सरकार के आदेश से उन लोगों पर असर पड़ेगा जो हिजाब पहनते हैं। यह असंवैधानिक है।

आज की सुनवाई की खास बातें

कर्नाटक HC ने शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की
सीनियर एडवोकेट एएम डार ने कोर्ट को बताया कि कोर्ट की आपत्ति को देखते हुए उन्होंने 5 छात्राओं की ओर से नई याचिका दायर की है। याचिका पर 21 फरवरी को सुनवाई करेगी कोर्ट।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रोफेसर रविवर्मा कुमार ने कर्नाटक उच्च न्यायालय से लाइव-स्ट्रीमिंग कार्यवाही को बंद करने और निलंबित करने का आग्रह किया। कुमार का कहना है कि लाइव स्ट्रीमिंग उल्टा हो गया है।
कर्नाटक एचसी का कहना है कि लोगों को सुनने दें कि उत्तरदाताओं का क्या रुख है।
चीफ जस्टिस: आप खुद कह रहे हैं कि हिजाब हटाने के लिए कोई रोकथाम या बल नहीं था, अब कुछ विरोधी तत्व उन्हें हिजाब हटाने के लिए मजबूर कर रहे हैं।
वकील : कॉलेज प्रशासन भी इजाजत नहीं दे रहा है।
सीजे: आपने याचिका में जो उल्लेख किया है वह, वह नहीं है जो आप कह रहे हैं
अहमद : इस न्यायालय का आदेश सभी को स्पष्ट रूप से समझ में नहीं आ रहा है। हर वो संस्था जहाँ पहले हिजाब की अनुमति थी, अब बंद हो रही है।
सीजे: क्या आप सरकारी कॉलेज में पढ़ रहे हैं?
अहमद कहते हैं एक निजी कॉलेज।
सीजे : कॉलेज को पार्टी नहीं बनाया गया है।
जस्टिस दीक्षित : यह कहने का हक कहाँ है कि कॉलेज विरोध कर रहा है। उनका कहना है कि असामाजिक तत्व रोक रहे हैं। उनमें से किसी को भी पार्टी नहीं बनाया गया है। कॉलेज को पार्टी नहीं बनाया गया है।
जस्टिस दीक्षित : एक भी असामाजिक तत्व को पार्टी नहीं बनाया गया है। पार्टी नहीं बनाने के लिए कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। इस याचिका पर कैसे विचार किया जा सकता है?
सीजे : बेहतर होगा कि आप उचित याचिका दायर करें। उचित व्यवस्थाएं करें। कॉलेज को पार्टी नहीं बनाया गया है। यह कैसी याचिका है!
अहमद ने कॉलेज को जोड़ने के लिए याचिका में संशोधन की अनुमति माँगी, जिसे कोर्ट ने उन्हें प्रदान किया।
अधिवक्ता कीर्ति सिंह अब एक महिला संघ और एक मुस्लिम महिला द्वारा दायर जनहित याचिका में दलीलें पेश करती हैं।
सिंह: हमने हाई कोर्ट के नियम के मुताबिक डिक्लेरेशन फाइल नहीं किया था, अब हमने फाइल कर दी है और उसी के मुताबिक हमारी सुनवाई हो सकती है।
अधिवक्ता जी आर मोहन अब कर्नाटक राज्य अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान प्रबंधन संघ के लिए उपस्थित हो रहे हैं।
मोहन : याचिकाकर्ता अल्पसंख्यक संस्थाओं का संघ है जो अनुच्छेद 29 और 30 द्वारा संरक्षित है।
सीजे : क्या याचिकाकर्ता एक पंजीकृत निकाय है?
मोहन : हाँ।
सीजे : सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत?
मोहन : हाँ।
सीजे: फाइलिंग को अधिकृत करने वाला सोसायटी का संकल्प कहाँ है।
मोहन : सभापति स्वयं यह याचिका दाखिल कर रहे हैं।
सीजे : क्या अध्यक्ष अधिकृत है? हमें उपनियम दिखाओ।
मोहन: मैं प्राधिकरण प्रस्तुत करूंगा। हमने पहले भी कई WP दायर किए हैं। यह मुद्दा कभी नहीं आया।
सीजे: यह चौंकाने वाला है, सिर्फ इसलिए कि आपसे पहले नहीं पूछा गया है।
एजी: जैसा कि मैंने समझा है, विवाद तीन व्यापक श्रेणियों में आता है। सबसे पहले, आदेश दिनांक 05.02.2022, मेरा पहला निवेदन यह है कि आदेश शिक्षा अधिनियम के अनुरूप है।
एजी : दूसरा अधिक ठोस तर्क है कि हिजाब एक अनिवार्य हिस्सा है। हमने यह स्टैंड लिया है कि हिजाब पहनना इस्लाम की आवश्यक धार्मिक प्रथा के अंतर्गत नहीं आता है। कर्नाटक के महाधिवक्ता ने कर्नाटक उच्च न्यायालय को बताया।
एजी: तीसरा यह है कि हिजाब पहनने का यह अधिकार अनुच्छेद 19 (1) (ए) से पता लगाया जा सकता है। सबमिशन है कि यह ऐसा नहीं करता है।
एजी: सबरीमाला और शायरा बानो (ट्रिपल तालक) मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा बताए गए के अनुसार हिजाब को संवैधानिक नैतिकता और व्यक्तिगत गरिमा की परीक्षा पास करनी चाहिए। यह सकारात्मक प्रस्ताव है जिस पर हम स्वतंत्र रूप से बहस कर रहे हैं।
AG: यदि कोई सीडीसी हिजाब पहनने की अनुमति देता है तो शिक्षा अधिनियम की धारा 131 के तहत हमारे पास पुनरीक्षण शक्तियाँ हैं और यदि कोई आपत्ति है तो राज्य निर्णय ले सकता है। अभी तक के आदेश में हमने सीडीसी को स्वायत्तता दी है।
जस्टिस दीक्षित: आपने ठीक से यह नहीं बताया कि हिजाब पहनना प्रतिबंधित नहीं है। लेकिन ये आदेश आम लोगों, शिक्षकों, सीडीसी के छात्र सदस्यों के लिए हैं, वे इसकी व्याख्या कैसे करेंगे?
CJ: GO में निर्णयों का उल्लेख करने की क्या आवश्यकता थी?
AG: इस मुद्दे को हमने संस्थानों की पूर्ण स्वायत्तता पर छोड़ दिया है। मैं GO में कही गई बातों से आगे नहीं बढ़ सकता। यदि यह संस्थानों को संकेत देता है, तो निश्चित रूप से यह कुछ ऐसा है जिसे संस्थानों को समझना चाहिए।
CJ: हम इन निर्णयों का उल्लेख करने और आपके निष्कर्ष को रिकॉर्ड करने और फिर GO पास करने की आवश्यकता जानना चाहते थे?
AG: एक बेहतर सलाह पर इनसे बचा जा सकता था। लेकिन वह चरण बीत चुका है।
CJ: ऐसा लगता है कि वे आपकी सलाह नहीं लेते हैं। एजी मुस्कराते हैं।
AG: इस आदेश के बाद, रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जो देखो राज्य ने हमें बताया है इसलिए हम (संस्थान) यह आदेश पारित कर रहे हैं।
AG का कहना है कि जीओ को समझना होगा कि वह आखिरकार क्या निर्देश देता है और याचिकाकर्ताओं की ओर से यह कहना गलत है कि यह सांप्रदायिक है।
AG: सीपीसी में किसी निष्कर्ष के खिलाफ अपील दायर करने का कोई प्रावधान नहीं है। यदि संचालन आदेश किसी के पक्ष में है, तो निष्कर्षों को चुनौती देने की कोई गुंजाइश नहीं है।
AG: मुझे नहीं पता कि उच्च स्तरीय कमेटी को लेकर सरकार का क्या मन है।
CJ: क्या GO समय से पहले था? क्योंकि एक तरफ आप कहते हैं कि एक उच्च स्तरीय समिति मामले की जांच कर रही है और दूसरी तरफ आप ऐसा कहते हैं? क्या यह राज्य के विरोधाभासी रुख के बराबर नहीं होगा?
CJ: आपने यह भी कहा है कि राज्य को अभी ड्रेस के संबंध में निर्णय लेना है?
AG: हाँ।
जस्टिस दीक्षित: कम से कम आपको तो कहना चाहिए था कि हमने एक कमेटी बनाने का फैसला किया है। लेकिन आपने ऐसा नहीं कहा।
जस्टिस दीक्षित सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को संदर्भित करते हैं जो कहता है कि एक आदेश को उसमें कही गई बातों के आधार पर समझा जाना चाहिए और बाद की दलीलों से इसमें सुधार नहीं हो सकता है।
AG: यह अधिनियम आईसीएसई, सीबीएसई संस्थानों को छोड़कर सभी संस्थानों पर लागू होता है। अधिनियम की धारा 2 (14) पढ़ता है।
AG: अधिनियम की धारा 38 सरकारी पीयू कॉलेजों का ख्याल रखती है।
एडवोकेट जनरल अब रवि वर्मा कुमार के तर्क का जवाब दे रहे हैं कि कॉलेज विकास समिति शिक्षा अधिनियम द्वारा मान्यता प्राप्त प्राधिकरण नहीं है। उन्‍होंने शिक्षा अधिनियम की प्रस्तावना पढ़ी- यह अधिनियम छात्र समुदाय की बेहतरी के लिए है।
AG: चूँकि हम कॉलेज विकास समिति के मुद्दे को संबोधित कर रहे हैं, दिलचस्प बात यह है कि एक सरकारी पीयू कॉलेज के लिए प्रबंध समिति की कोई अवधारणा नहीं है।
एडवोकेट जनरल शिक्षा अधिनियम की धारा 133(2) की बात करते हैं जो राज्य को अवशिष्ट शक्तियाँ प्रदान करता है। निजी कॉलेजों में एक प्रबंध समिति होती है। सरकार द्वारा संचालित पीयू कॉलेजों में, कोई प्रबंध समिति नहीं होती है।
CJ: आपने जो सर्कुलर दिखाया है जो सीडीसी का गठन करता है, एक अवर सचिव द्वारा जारी किया गया है। क्या इसे धारा 133 के तहत आदेश माना जा सकता है?
AG: यह 133 का पता लगाना है।
CJ: यह सरकारी आदेश नहीं है, यह अधिसूचना नहीं है। यह अंडर-सिक्योर द्वारा एक सर्कुलर है।
AG: हमने धारा 133 (2) (सीडीसी के गठन के लिए) का प्रयोग किया है। अगर हमने प्रिंसिपल को दिया होता तो रविवर्मा कुमार कहते कि आपने इसे एक कर्मचारी को दिया है। कृपया सीडीसी के संविधान को देखें, इससे अधिक प्रतिनिधि चरित्र नहीं हो सकता।
AG: इस तरह के परिपत्र सरकार के अनुमोदन से जारी किए जाते हैं।
CJ: क्या वहाँ सरकार की मंजूरी थी?
AG: निश्चित रूप से हाँ। मैं रिकॉर्ड रख सकता हूँ। जहाँ एक विधायक को समिति में नियुक्त किया जाता है, वह सरकार की मंजूरी के बिना नहीं होता।
AG: कृपया अनुच्छेद 25(1) पर आएँ।
CJ: मिस्टर युसूफ का एक तर्क था। भले ही इसे हिजाब पहने हुए ईआरपी के रूप में नहीं माना जाता है, फिर भी इसे पहनना बंद करना अनुच्छेद 25 का उल्लंघन होगा क्योंकि यह न केवल धर्म की स्वतंत्रता के बारे में है बल्कि अंतरात्मा की स्वतंत्रता के बारे में है।
AG: नहीं, हिजाब पहनने की अनुमति नहीं देने की शिकायत राज्य में नहीं आया है। एक सामान्य छात्र से एक प्रतिनिधित्व देने की अपेक्षा की जाती। ड्रेस की बात होती तो मिलोर्ड्स आ जाते.. मैं इसे वहीं छोड़ देता हूँ।

शुक्रवार और रमजान में हिजाब पहनने की छूट मिले

फरवरी 17 को हुई सुनवाई में हिजाब को लेकर लगाई गई एक अन्य याचिका में डॉ. कुलकर्णी ने कोर्ट के सामने कहा कि कृपया शुक्रवार और रमजान के दौरान हिजाब पहनने की अनुमति दें। अधिवक्ता विनोद कुलकर्णी ने कर्नाटक हाईकोर्ट से यह भी कहा था कि यह मुद्दा उन्माद पैदा कर रहा है और मुस्लिम लड़कियों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है।
फरवरी 17 को ही 5 छात्राओं का प्रतिनिधित्व करने वाले सीनियर वकील एएम डार ने कर्नाटक हाईकोर्ट के समक्ष कहा कि हिजाब पर सरकार के आदेश से उनके मुवक्किलों पर असर पड़ेगा जो हिजाब पहनते हैं। उन्होंने कहा कि यह आदेश असंवैधानिक है। अदालत ने डार से अपनी वर्तमान याचिका वापस लेने और नई याचिका दायर करने को कहा।
वहीं 5वें दिन की सुनवाई के बीच नई याचिकाएँ आने पर चीफ जस्टिस ने याचिकर्ताओं से कहा कि हम चार याचिकाएँ सुन चुके हैं और 4 बाकी हैं। हमें नहीं पता कि आप इसके लिए और कितना टाइम लेंगे। हम इसके लिए और ज्यादा समय नहीं दे सकते।

बेंच ने ख़ारिज की एक याचिका

बेंच ने एडवोकेट रहमतुल्लाह कोटवाल की याचिका, जनहित याचिका अधिनियम 2018 के तहत न होने के कारण खारिज कर दी। इसके पहले वकील ने बिना पहचान बताए ही दलील शुरू की तो जस्टिस दीक्षित ने उनसे पूछा कि आप इतने महत्वपूर्ण और गंभीर मामले में कोर्ट का समय बर्बाद कर रहे हैं। पहले अपनी पहचान बताओ, तुम हो कौन?

बुधवार को दी गई थीं ये दलीलें

इससे पहले हिजाब मामले पर फरवरी 16 को भी सुनवाई हुई थी। इस दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से जिरह करते हुए अधिवक्ता रवि वर्मा कुमार ने कहा कि अकेले हिजाब का ही जिक्र क्यों है जब दुपट्टा, चूड़ियाँ, पगड़ी, क्रॉस और बिंदी जैसे सैकड़ों धार्मिक प्रतीक चिन्ह लोगों द्वारा रोजाना पहने जाते हैं।
वकील रवि वर्मा ने कहा कि मैं केवल समाज के सभी वर्गों में धार्मिक प्रतीकों की विविधता को उजागर कर रहा हूँ। सरकार अकेले हिजाब को चुनकर भेदभाव क्यों कर रही है? चूड़ियाँ पहनी जाती हैं? क्या वे धार्मिक प्रतीक नहीं है? कुमार ने कहा, यह केवल उनके धर्म के कारण है कि याचिककर्ता को कक्षा से बाहर भेजा जा रहा है। बिंदी लगाने वाली लड़की को बाहर नहीं भेजा जा रहा, चूड़ी पहने वाली लड़की को भी नहीं। क्रॉस पहनने वाली ईसाई लड़कियों को भी नहीं, केवल इन्हें ही क्यों। यह संविधान के आर्टिकल-15 का उल्लंघन है।

 

केरल में मुस्लिम सोसायटी ने ही किया था ‘हिजाब बैन’; ‘बुर्का पहनना होगा या जॉब छोड़ो’: जब बंगाल के कॉलेज में महिला प्रोफेसर पर डाला दवाब

प्रतीकात्मक तस्वीर (साभार: DNA India)
कर्नाटक से शुरू हुआ हिजाब विवाद अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। बात शिक्षा से हटकर मजहब पर इस कद्र आ गई है कि विपक्षी नेता अपनी राजनीति साधने के लिए भी शैक्षणिक संस्थानों में बुर्के का समर्थन कर रहे हैं। वैसे ये पहली बार नहीं है जब शिक्षा के नाम पर कहीं मजहब को प्रमोट किया गया हो और कहीं इसका विरोध हुआ हो। बीते समय में भी ऐसी घटनाएँ हुई हैं जहाँ बुर्के को शैक्षणिक संस्थान पर हावी करने की कोशिश की गई और ये बात मीडिया सुर्खियों में आईं।

महिला टीचर्स पर बनाया गया बुर्का पहनने का दबाव

साल 2010 की एक रिपोर्ट के अनुसार, कोलकाता के आलिया यूनिवर्सिटी में 8 टीचरों पर बुर्का पहनने के लिए दबाव बनाया गया था। इनमें 7 महिला टीचरें थीं जिन्होंने नौकरी के लिए ये शर्त मान ली थी, लेकिन इनमें एक ने इसका विरोध किया था। उसका कहना था कि अगर बुर्का पहनना होगा तो वो मर्जी से पहनेगी जबरदस्ती से नहीं। लेकिन कट्टरपंथी दबाव के चलते इस 1 महिला टीचर को उस कॉलेज परिसर से ही बाहर कर दिया गया।
रिपोर्ट बताती है कि ये घटना उस समय की है जब कोलकाता की आलिया यूनिवर्सिटी में शिरिन निद्या नाम की टीचर ने बंगाली लिटरेचर पढ़ाना शुरू किया था और स्टूडेंट यूनियन इस जिद्द पर अड़ गया कि हर महिला प्रोफेसर को बुर्का पहनना होगा। शिरिन ने अपने साथ घटित घटना पर बताया था, “अप्रैल के मध्य, छात्र संघ ने हम 8 टीचरों को बुलाया और बुर्का पहनने को कहा। छात्र संघ ने कहा कि इस मामले पर प्रशासन के साथ हमने डिस्कस कर लिया है। बस तुम्हें बुर्का पहनना है और अगर ऐसा नहीं किया तो जॉब छोड़ दो।” शिरिन ने इस मामले पर बाद में सरकार से गुहाई लगाई। जिसके बाद सरकार ने कहा था कि ये मामला गंभीर हैं और अगर मामले में कोई दोषी पाया गया तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
                                                   एनडीटीवी में प्रकाशित संबंधित खबर का स्क्रीनशॉट

मुस्लिम सोसायटी ने किया था बुर्का प्रतिबंधित

इसी तरह साल 2019 में एक घटना एक खबर आई थी जब केरल की मुस्लिम एजुकेशन सोसाइटी के अध्यक्ष पी फजल गफूर ने एक नोटिस जारी किया था। इसके अंतर्गत  सभी कॉलेज और स्कूलों में बुर्के पर प्रतिबंध लगाया गया था। यह नोटिस सभी संबंधित संस्था प्रमुख और अधिकारियों को जारी किया गया था। उन्होंने इस  निर्णय को शैक्षणिक वर्ष  2019-20 से इस आदेश से लागू करने के निर्देश दिए थे। अपने निर्णय के दौरान उन्होंने कहा था कि विद्यार्थियों, अध्यापकों और  कर्मचारियों को भी इस आदेश का पालन करना अनिवार्य था। उन्होंने कहा था कि इस्लाम का अनुसरण करना गलत नहीं है, लेकिन मध्यकाल की इस्लाम पद्धतियों का अनुसरण सही नहीं है। पी फजल के फैसले के बाद कट्टरपंथी इतना बिदके कि उन्होंने केरल में मुस्लिम एजुकेशन सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ पीए फजल गफूर को अज्ञात व्यक्ति ने फोन पर जान से मारने की धमकी दी। उन्होंने जानकारी दी थी कि आरोपितों ने उन्हें जुमे वाले दिन अंतरराष्ट्री नंबर से फोन पर गालियाँ देते हुए जान से मारने की धमकी थी।

कर्नाटक :हिजाब के बाद अब स्कूलों में नमाज की जिद

                                                   कर्नाटक के स्कूलों में नमाज (फोटो साभार: TOI/CNN)
जब सडकों पर नमाज़ पढ़ने की जिद हो रही थी, तभी तत्कालीन और वर्तमान सरकार और नेताओं को वोट बैंक राजनीति को छोड़ कट्टरपंथियों के षड़यंत्र को समझने की जरुरत थी। आखिर छद्दम सेकुलरिज्म के नाम पर कब तक जनता को पागल बनाया जाता रहेगा? क्योकि भारत में सेकुलरिज्म one way traffic के समान है, जो केवल हिन्दुओं पर लागु किया जाता है, अन्यों पर नहीं, क्यों? अगर भारत में जयचंदों की कमी नहीं है तो मीर ज़ाफरों की भी नहीं। 
जब CAA के विरोध में जगह-जगह बने शाहीन बागों में हिन्दुत्व के विरुद्ध नारेबाज़ी हो रही थी, तब जयचंदी उनके सुर में सुर मिलाते नज़र आये, सेकुलरिज्म और संविधान का पाठ पढ़ाने वाली पार्टियों और नेताओं ने भी हिन्दुत्व विरोधी नारों को नज़रअंदाज़ करते रहे, क्यों?  

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) की छात्र शाखा कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI) के आह्वान के बाद कर्नाटक के उडुपी में सामने आए हिजाब विवाद के बाद राज्य के कई इलाकों में इस तरह की कट्टरपंथी सोच वाली घटनाओं में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। राज्य के कई इलाकों के स्कूलों में मुस्लिम छात्र-छात्राओं द्वारा नमाज पढ़ने की घटनाएँ सामने आई हैं।

कर्नाटक बगलकोट जिले के एक स्कूल में 6 विद्यार्थी स्कूल में ही नमाज पढ़ने लगे, इसको लेकर बवाल हो गया है। स्कूल में नमाज पढ़ने देने पर स्थानीय लोग भड़क गए। हालाँकि, कहा जा रहा है कि स्कूल द्वारा अनुमति देने से इनकार करने के बावजूद स्कूल में नमाज पढ़ते देखे गए। सीएनएन न्यूज18 के वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि कुछ छात्राएँ स्कूल के बरामदे में ही नमाज पढ़ रही हैं।

वहीं, मंगलुरु के कडबा तालुका के अनकथाडका स्थित गवर्नमेंट हायर प्राइमरी स्कूल में नमाज पढ़ने की घटना सामने आई है। इस स्कूल के क्लासरूम में ही छात्र नमाज पढ़ने लगे। मुस्लिम विद्यार्थियों द्वारा नमाज पढ़ने की घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

यह वीडियो 4 फरवरी की बताई जा रही है। इस वीडियो में नमाज पढ़ते दिखने वाले बच्चे कक्षा पाँच और छह में पढ़ते हैं। मामला तब लोगों की नजर में आया जब इसका वीडियो क्लिप वायरल हुआ है। वीडियो देखने के बाद स्थानीय लोगों ने इस घटना का विरोध करना शुरू कर दिया। मामला तूल पकड़ता देख राज्य के शिक्षा विभाग ने शुक्रवार (11 फरवरी) को स्कूल का दौरा किया।

फरवरी 11 को पढ़े गए नमाज के संबंध में स्कूल के शिक्षकों को जानकारी नहीं थी, लेकिन जैसे ही इस संबंध में उन्हें जानकारी मिली स्कूल प्रशासन ने सभी छात्रों को क्लासरूम के भीतर धार्मिक गतिविधियों ना करने की चेतावनी जारी कर दी।

इतना ही नहीं, इनमें से स्कूल के कुछ मुस्लिमों विद्यार्थियों के परिजनों ने स्कूल प्रशासन से जुमे की नमाज के लिए अनुमति देने की माँग की। उन्होंने कहा कि जुमे की नमाज (शुक्रवार की नमाज) के लिए उनके बच्चों को स्थानीय मस्जिदों में जाने की अनुमति दी जाए।

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कर्नाटक में बढ़ता कट्टरपंथ

ये पहली बार नहीं है कि स्कूलों में नमाज पढ़ने की घटना सामने आई है। राज्य कोलार के एक सरकारी स्कूल के करीब 20 मुस्लिम छात्र स्कूल क्लास में नमाज (Namaz) अता करते देखे गए थे। बताया गया था कि इन छात्रों को शुक्रवार (21 जनवरी 2022) की नमाज के लिए स्कूल की प्रधानाध्यापिका ने इजाजत दी थी। स्कूल की कक्षा में नमाज पढ़ने की भनक लगने के बाद हिंदू संगठनों ने इसका जमकर विरोध किया था।
मुलबगल सोमेस्वरा पलाया बाले चंगप्पा सरकारी कन्नड़ मॉडल हायर प्राइमरी स्कूल (Mulbagal Someswara Palaya Bale Changappa Government Kannada Model Higher Primary School) की इस घटना के बाद प्रधानाध्यापिका उमा देवी को सस्पेंड कर दिया गया था।