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‘जब गैर मजहबी मरते हैं तो खुशी…’ – इसा पंतामी, नाइजीरिया का मंत्री

                                                    नाइजीरिया के संचार मंत्री इसा पंतामी 
नाइजीरिया के संचार मंत्री इसा अलियू पंतामी (Isa Aliyu Pantami) को लेकर कुछ दिन पहले विदेशी समाचार में खबर चली कि पंतामी के संबंध बोको हरम नाम के आतंकी संगठन से हैं और अमेरिका की खूफिया एजेंसी ने उन्हें अपनी वॉचलिस्ट में रखा हुआ है। 

अब यूएस खूफिया एजेंसी की वॉचलिस्ट सार्वजनिक नहीं है, इसलिए उस रिपोर्ट के दावों को खारिज कर दिया गया। साथ ही कई अन्य वेबसाइट्स ने फैक्ट चेक करके बिंदुवार तरीके से बताया कि कैसे रिपोर्ट में लिखी बातें गलत हैं जबकि पंतामी का असलियत में बोको हरम से कोई लेना-देना नहीं है।

इसी बीच इसा को लेकर एक बहस और उठी। इसमें दावा किया गया कि इसा पंतामी भले ही बोको हरम से कोई संबंध न रखता हो, मगर वह अलकायदा और तालिबान जैसे आतंकी संगठनों का खुलकर समर्थन करता है।

इस नई बहस का आधार इसा पंतामी के कुछ पुराने बयान हैं। इसमें वह जिहाद को लेकर कह रहा है, “यह जिहाद हर एक आस्तिक के लिए एक दायित्व है, विशेष रूप से नाइजीरिया में।” आगे वह दुआ करते हुए कहता है, “या अल्लाह, तालिबान और अलकायदा को जीत दिलाओ।”

जाहिर है कि कोई भी शख्स इस प्रकार जिहाद का महिमामंडन और आतंकी समूहों की जीत की प्रार्थना बिना इस्लामी कट्टरपंथी हुए नहीं करेगा। शायद यही वजह है कि जब बोको हरम पर सफाई देते हुए नाइजीरिया के मंत्री ने दावा किया कि वह आतंकियों के ख़िलाफ पिछले 15 साल से बोल रहे हैं, उस समय लोगों को उनकी पुरानी बातें याद आ गईं।

पीपुल गैजेट की रिपोर्ट में एक 2019 में प्रकाशित एक अकादमिक दस्तावेज ‘डिबेटिंग बोको हरम’ का जिक्र है। इसी का हवाला देकर रिपोर्ट में बताया गया कि एक बार पंतामी ने शांति और समझ के नाम पर अहलुस सुन्ना समुदाय के राजनेताओं और धार्मिक नेताओं को बुलाया, लेकिन बातें जिहाद की हुई और अंत में ये दुआ की गई कि अल्लाह तालीबान और अलकायदा को जीत दिलाए।

केवल एक बार ही ऐसा नहीं हुआ, जब इसा ने इस प्रकार खुल कर अलकायदा के लिए बोला, बल्कि साल 2006 में अलकायदा नेता के मरने पर पंतामी ने खेद व्यक्त किया था। इसके अलावा एक समय वह भी था, जब ओसामा बिन लादेन पर विचार पूछे जाने पर पंतामी ने स्वीकारा था कि जब गैर मजहबी मरते हैं तो उन्हें इसकी खुशी होती है… लेकिन शरीया बिना कारण उन्हें मारने की इजाजत नहीं देता। उन्होंने कहा था, “हमारा उत्साह हमारे पाक मजहब पर हावी नहीं होना चाहिए।”

बोको हरम से संबंधों पर न्यूज छापे जाने से इसा नाराज थे। उन्होंने कहा था कि कई प्रकाशकों को वह उन्हें अपमानित करने के लिए कोर्ट में ले जाएँगे। हालाँकि, मालूम हो कि कई रिपोर्टस के अनुसार, 48 साल के इस नाइजीरिया मंत्री को लेकर कहा जाता है कि नाइजीरिया की राजनीति में कदम रखने से पहले इसा कई संस्थानों में जाकर नफरत भरी स्पीच देता था। मगर, साल 2019 में इसे संचार मंत्री बनाया गया, जिसके बाद इस पर आरोप लगे कि वह अपने पद का इस्तेमाल कट्टरपंथ फैलाने के लिए करता रहा है।

केरल और कर्नाटक में सक्रिय हैं ISIS के 200 आतंकी, भारत में हमले की साजिश रच रहा अलकायदा: UN की रिपोर्ट में खुलासा

केरल, कर्नाटक, ISIS, आतंकीआतंकवाद पर आई संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक रिपोर्ट में चेताया गया है कि भारतीय राज्य केरल और कर्नाटक में अच्छी-खासी संख्या में खूँखार वैश्विक आतंकी संगठन ISIS के आतंकवादी मौजूद हैं। साथ ही खुलासा किया गया है कि ISIL की भारतीय यूनिट ‘हिन्दू विलायाह’ के भी कम से कम 180 से लेकर 200 तक आतंकी सक्रिय हैं। बता दें कि इस आतंकी संगठन के गठन की घोषणा मई 2019 में हुई थी।
ISIS सहित अन्य आतंकी संगठनों पर नजर रखने के लिए गठित की गई यूएन की ‘Analytical Support and Sanctions Monitoring Team’ की 26वीं रिपोर्ट के अनुसार केरल और कर्नाटक में ISIS के कई आतंकी सक्रिय हैं। साथ ही इस रिपोर्ट में चेताया गया है कि अलकायदा की भारतीय उपमहाद्वीपीय यूनिट AQIS भी इस क्षेत्र में हमले की साजिश रच रहा है। ये संगठन तालिबान के बैनर तले सक्रिय है।
इसके सरगना निमरूज़, हेलमंद और कंधार प्रांतों से अपनी गतिविधियों को अंजाम देते हैं। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और म्यांमार में इस आतंकी संगठन के 150-200 आतंकी सक्रिय हैं। ये संगठन अपने पूर्व-सरगना की मौत का बदला लेना चाहता है। फिलहाल ओसामा महमूद AQIS का सबसे बड़ा सरगना है। इससे पहले असीम उमर था, जिसे मार गिराया गया था। उसकी ही मौत का बदला लेने को ये आतंकी संगठन बेचैन है।

पिछले साल 2019 में ISIS ने अपने ‘अमाक न्यूज एजेंसी’ के माध्यम से दावा किया था कि उसने भारत में एक नया प्रांत बनाया है, जिस पर उसका कब्जा है। उसने जम्मू-कश्मीर के भीतर के ही एक क्षेत्र को ‘वालियाह-ए-हिन्द’ या ‘हिन्द प्रांत’ नाम दिया था। जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के साथ मुठभेड़ के बाद ये दावा किया गया था। हालाँकि, ये अपने-आप में इस किस्म का पहला दावा था। सुरक्षा बलों ने इसे नकार दिया था।
इससे पहले जम्मू-कश्मीर में सक्रिय ISIS आतंकियों में से कइयों के नाम खोरासन प्रांत में सक्रिय आतंकी संगठन के ब्रांच से जुड़ा था। इसकी स्थापना 2015 में की गई थी, ताकि ‘अफगानिस्तान और पाकिस्तान के इलाकों को कवर किया जा सके।’ हालाँकि, भारत में भी केरल व कर्नाटक में सक्रिय ISIS आतंकियों के बारे में तब पता चला था, जब NIA ने स्पेशल सब-इन्स्पेक्टर विल्सन की हत्या मामले में फाइल की गई चार्जशीट में इसका खुलासा किया था।
इसमें बताया गया था कि केरल और कर्नाटक में न सिर्फ़ ISIS के आतंकी सक्रिय हैं, बल्कि उनकी संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। तमिलनाडु पुलिस ने ISIS के आतंकियों मोहम्मद हनीफ़ खान, इमरान खान और मोहम्मद जैद को जनवरी 2020 में मार गिराया था। इसके जवाब में खुद को जिहादी कहने वाले आतंकियों ने विल्सन की हत्या कर दी थी। इस मामले में ISIS (इराक व सीरिया) के आतंकी खाजा मोहिदीन का नाम सामने आया था।
जाँच में पता चला था कि उसने ही मई 2019 में अब्दुल शमीम और मोहम्मद तौफीक को आतंक की ‘तालीम’ दी थी। उसने इन दोनों को हथियार मुहैया कराया था। साथ ही हमला करने के लिए प्रशिक्षित किया था।
अफगानिस्तान और इराक सहित अन्य देशों में ISIS ने केरल के आतंकियों को लगाया हुआ है। सबसे ज्यादा कन्नूर के युवक इस आतंकी संगठन में शामिल हुए हैं। पिछले सप्ताह के आँकड़ों के अनुसार, केरल के कुल 98 लोगों ने ISIS की सदस्यता ली थी। इनमें से 38 मारे जा चुके हैं जबकि 60 आतंकी अब भी सक्रिय हैं। जून 2019 तक कन्नूर की 8 महिलाओं के आतंकी संगठन में शामिल होने की ख़बर आई थी।
कन्नूर के अलावा कासरगोड, मल्लपुरम, कोझिकोड, एर्नाकुलम और थिसुर के कई लोगों ने भाग कर आतंकी संगठन ज्वाइन किया था। ये सभी मिडिल-ईस्ट में जाकर ‘जिहाद’ कर रहे हैं। इन सभी को वहाँ विभिन्न इलाक़ों में तैनात किया गया है। कहा गया है कि वैश्विक आतंकी संगठन वहाँ के मुस्लिम युवकों को निशाना बनाता है और उन्हें आतंक के लिए प्रशिक्षित करता है।

ओसामा बिन लादेन का बेटा हमजा मारा गया, US ने उसके सिर पर रखा था 7 करोड़ रुपये का इनाम

ओसामा बिन लादेन का बेटा हमजा मारा गया, US ने उसके सिर पर रखा था 7 करोड़ रुपये का इनाम- रिपोर्ट्स
ओसामा बिन लादेन के 20 बच्चों में से हमजा 15वें नंबर का था.
भारत में प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी विरोधी किसी न किसी मुद्दे पर लाख मोदी की आलोचना करते रहे, वैसे करनी भी चाहिए के विरोधी के नाते, लेकिन इसके विपरीत विश्व मोदी की कूटनीति का कायल है। जिस प्रमुखता से विश्व पटल पर आतंकवाद को उछाला, मोदी से पूर्व कोई भारत का प्रधानमंत्री नहीं उछाल पाया। आतंकवाद के मुद्दे पर विश्व एकजुट हुआ, आतंकियों के साथ-साथ पाकिस्तान भी निशाने पर आ गया। 
अमेरिकी मीडिया ने जुलाई 31 को अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि अल-कायदा का प्रमुख चुने गए ओसामा बिन लादेन के बेटे हमजा को मार दिया गया एनबीसी न्यूज के मुताबिक तीन अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि करते हुए बताया कि उनके पास हमजा बिन लादेन के मारे जाने की जानकारी है, लेकिन उन्होंने जगह और तारीख के बारे में जानकारी देने से मना कर दिया इसी तरह न्यूयार्क टाइम्स ने दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा है कि पिछले दो सालों में वह अमेरिकी सेना के ऑपरेशन में मारा गया एनबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक ओवल ऑफिस में पत्रकारों द्वारा सवाल किए जाने पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न तो इसकी पुष्टि की और न ही इससे इनकार किया उन्होंने कहा, 'मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता'
दोनों रिपोर्ट्स के मुताबिक फरवरी 2019 में यूएस स्टेट डिपार्टमेंट की ओर से उसके सिर पर 10 लाख यूएस डॉलर का इनाम घोषित किए जाने से पहले ही वह मारा दिया गया था उसके सिर पर इनाम का ऐलान करते हुए स्टेट डिपार्टमेंट ने कहा था कि ओसामा बिन लादेन के 20 बच्चों में से 15वां बेटा करीब 30 साल का है इसको लेकर कहा गया था कि वह अल कायदा के नेता के रूप में उभर रहा है वह लादेन की तीसरी बीवी से पैदा हुआ था
विभाग ने साथ ही कहा था कि कई बार उसने ऑडियो और वीडियो जारी करके अमेरिका और अन्य देशों पर हमले करने की बात कही थी वह विशेषकर मई 2011 में अपने पिता लादेन के अमेरिकी सेना द्वारा मार गिराए जाने का बदला लेने की बात भी कहता था
लादेन के घर से जब्त किए गए कागजातों से यह पता चला था कि उसे अलकायदा का नेतृत्व दिए जाने के लिए तैयार किया जा रहा था अमेरिकी सेना को एक वीडियो भी मिला था, जो कि हमजा की एक अन्य अल कायदा के आतंकी की बेटी से शादी का था ऐसा माना जा रहा है कि यह शादी ईरान में हुई थी
ओसामा की वो आखिरी रात...
हमजा बिन लादेन के ठिकाने का कभी भी पता नहीं लग पाया ऐसा माना जाता था कि वह ईरान में नजर बंद रहा, लेकिन रिपोर्ट्स की मानें तो वह अफगानिस्तान, पाकिस्तान और सीरिया में भी रहा है
सऊदी अरब पहले ही हमजा की नागरिकता समाप्त कर चूका है 
सऊदी अरब पहले ही मार्च महीने में ओसामा बिन लादेन के बेटे हमजा बिन लादेन की नागरिकता रद्द कर चूका है। सऊदी अरब के सरकारी गजट में प्रकाशित सूचना में कहा गया है कि सऊदी अरब ने एक शाही आदेश के जरिये नवंबर में उसकी नागरिकता रद्द कर दी थी, हालांकि यह नहीं बताया गया है कि इस आदेश को अब क्यों सार्वजनिक किया गया? सऊदी अरब ने यह ऐलान अमेरिकी सरकार की उस पेशकश के बाद किया है जिसमें अमेरिका ने ओसामा के बारे में जानकारी मुहैया कराने पर 10 लाख अमेरिकी डॉलर (करीब सात करोड़ रुपए) देने का ऐलान किया था अमेरिका के अनुसार ओसामा बिन लादेन का बेटा हमजा बिन लादेन, इन दिनों अमेरिका पर हमले की साजिश रच रहा है हमजा अपने पिता की मौत का बदला अमेरिका से लेना चाहता है सुरक्षा एजेंसियों से मिले इनपुट के बाद अमेरिका ने ये एलान किया है शुक्रवार को अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने इस इनामी राशि का एलान किया. अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारी एमटी इवानोफ ने कहा कि यह कदम अमेरिका केआतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और गंभीरता को दर्शाता है ओसामा को पाकिस्तान में मई 2011 में अमेरिकी सेना ने मार गिराया था  
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अमेरिका ने अल-कायदा सरगना ओसामा बिन-लादेन के बेटे के संबंध में सूचना देने वाले को 10 लाख डॉलर का इनाम देने की घोषणा की...

खुफिया सूत्रों के अनुसार हमजा पिछले कई सालों से छिपा हुआ है और वह पाकिस्तान, अफगानिस्तान, सीरिया या फिर इरान में हो सकता है इरान में उसके नजरबंद होने के आसार जताए जा रहे हैं ऐसा कहा जाता है कि हमजा अब अलकायदा में काफी ऊंचे पद पर पहुंच चुका है और अब वो अपने पिता का बदला भी ले सकता है लिहाजा अमेरिका कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहता है। अमेरिकी सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा कि अमेरिकी लीडर अपने काम के लिए गंभीर हैं अलकायदा काफी समय से शांत हैं लेकिन यह केवल एक रणनीतिक चुप्पी है न कि आत्मसमर्पण. अलकायदा के पास अब भी हमला करने की क्षमता है और वह ऐसा करने का इरादा भी रखता है जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका ने पाकिस्तान के ऐबटाबाद में एक बेहद गुप्त ऑपरेशन के तहत ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था
(इनपुट- एएफपी और भाषा से भी)

पहुंचाओ भारतीय सेना और इकोनॉमी को नुकसान : अल-ज़वाहिरी, अल कायदा (Al-Qaeda) प्रमुख

Al-Zawahiri
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
एक तरफ मोदी सरकार कश्मीर से आतंकवाद का जनाज़ा निकालने के लिए कमर कस, आतंकवादियों को चुन-चुन कर मार रही है, तो दूसरी तरफ अल क़ायदा भारतीय सेना और अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाने के लिए फरमान जारी कर रही है।
ऐसे में प्रश्न खड़ा होता कि क्या भारत में तुष्टिकरण पुजारी अभी भी अपने वोट बैंक की खातिर आतंकवाद और पत्थरबाजों के पक्ष में जनमानस को गुमराह करेंगे? 
कश्मीर पर पहले वीडियो में आतंकवादी संगठन अल कायदा  (Al-Qaeda) प्रमुख एमन अल-ज़वाहिरी ने आतंकवादियों से भारतीय सेना और सरकार पर 'निरंतर हमले' करने और अर्थव्यवस्था और देश को  'नुकसान' पहुंचाने को कहा। ओसामा-बिन लादेन की मौत के बाद अल कायदा की कमान संभालने वाले ज़वाहिरी ने कहा, 'मेरा ख्याल है कि इस दौर में कश्मीर में मुजाहिदीन (सशस्त्र आतंकवादी) अपना सारा ध्यान भारतीय सेना और सरकार पर निरंतर हमले करने के लिए केंद्रित करें ताकि अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचे और भारत को जनशक्ति और उपकरणों में निरंतर नुकसान होता रहे।'
इस वीडियो को 'अस-सहाब' चैनल पर पोस्ट किया गया है जो अल कायदा का इन हाउस प्रोड्क्शन है। इसका इस्तेमाल विश्व को संगठन के विचार बताने के लिए किया जाता है। वीडियो में आतंकवादियों से 'दुनिया भर के अपने मुस्लिम भाइयों से संपर्क के मज़बूत माध्यम बनाने को भी कहा गया है।'अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियों ने वीडियो की जांच की है और उनका मानना है कि यह असंतुष्ट आतंकवादियों को एकजुट रखने की कोशिश है।
जवाहिरी ने यह भी बताया कि किस तरह से पाकिस्‍तान कश्‍मीर में सीमापार आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। जवाहिरी अरबी भाषा में बोला है लेकिन उसने ज़ाकिर मूसा का नाम नहीं लिया जिसे मई में सुरक्षा बलों ने कश्मीर में ढेर कर दिया था। हालांकि जब ज़वाहिरी कश्मीर पर बोल रहा था तो मूसा का फोटो स्क्रीन पर आ रहा था।
पाकिस्तान को अमेरिकी हाथों की कठपुतली बताया
मूसा अल कायदा के भारतीय प्रकोष्ठ 'अंसार गज़वत-उल-हिंद' का संस्थापक था।अल कायदा प्रमुख ने आतंकवादियों को पाकिस्तान के जाल में नहीं फंसने को लेकर चेताया। उसने पाकिस्तान को अमेरिकी हाथों की कठपुतली बताया है।

ज़वाहिरी ने कहा, 'पाकिस्तानी सेना और सरकार की दिलचस्पी खास सियासी मकसदों के लिए मुजाहिदीनों का दोहन करने की है। बाद में वे उन्हें जेल भेज देते हैं या उनपर अत्याचार करते हैं।' उसने कहा कि सीमा को लेकर भारत के साथ पाकिस्तान का टकराव पूरी तरह से 'गैर-धार्मिक' है जिसे अमेरिकी खुफिया एजेंसियां नियंत्रित करती हैं।
ज़वाहिरी ने कहा कि 'कश्मीर में लड़ाई' अलग नहीं है बल्कि मुस्लिम समुदाय की बड़ी ताकतों के खिलाफ वैश्विक 'जिहाद' का हिस्सा है।उसने चेताया कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसिया 'मुजाहीदनों' को ऐसा करने से रोकेंगी ताकि वे राजनीतिक सौदेबाजी के लिए उनके कब्जे में रहे।
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मणिपुर में भारतीय सेना का 'सर्जिकल स्‍ट्राइक'
जम्मू-कश्मीर में जहां भारतीय सेना एक-एक कर आतंकियों को मौत के घाट उतार रही है…
उसने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों को पाकिस्तान में प्राथमिक औजार बताया। गौरतलब है कि ज़वाहिरी मिस्र का रहने वाला है और अमेरिका ने उसके बारे में सुराग देने पर 2.5 करोड़ डॉलर का इनाम रखा हुआ है।