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एक और परिवार लोन ऐप और ऑनलाइन जॉब से उजड़ गया : पहले 3 और 9 साल के बेटों को पिलाया जहर, फिर फंदे से झूल गए पति-पत्नी

लोन में डूबे शख्स ने बच्चों को जहर देकर किया सुसाइड
मध्य प्रदेश के भोपाल में ऑनलाइन लोन ऐप और ऑनलाइन जॉब के जाल में फँसे दंपति ने तंग आकर अपने दोनों बेटों को सल्फास देकर मार डाला और खुद फाँसी के फंदे पर लटक गए। पुलिस को मौके से जो 4 पन्नों का सुसाइड नोट बरामद हुआ उसमें शिव विहार कॉलोनी के भूपेंद्र विश्वकर्मा ने सारी कहानी बयां की।

भूपेंद्र ने बताया कि वो एक कोलंबिया बेस्ड कंपनी में काम करते थे। उनके ऊपर काम और लोन का प्रेशर पहले ही था। बाद में उन्हें पता चला कि कंपनी ने उनका लैपटॉप हैक करके उसमें मिले कॉन्टेक्ट पर एडिटेड अश्लील वीडियो डाल दिए थे। अंत में भूपेंद्र ने अपनी पत्नी रितू विश्वकर्मा के साथ मिल पहले बेटे ऋतुरात (3) और ऋषिराज (9) को जहर दिया और उसके बाद सुसाइड कर ली।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, बड़े भाई नरेंद्र विश्वकर्मा ने बताया कि भूपेंद्र ने दोनों बच्चों के साथ मरने से पहले सेल्फी कैप्चर की थी। बाद में कोल्ड ड्रिंक में सल्फास डालकर दोनों बच्चों को पिला दिया। इसके बाद काफी देर वो लोग बच्चों के पास बैठे रहे, जब बच्चों की मौत हो गई तो दोनों ने खुद भी दुपट्टे से फंदा बनाया और फाँसी लगाकर जान दे दी। नरेंद्र के मुताबिक भूपेंद्र के घर से सल्फास के 6 पैकेट मिले।

बताया जा रहा है कि आत्महत्या करने से पहले भूपेंद्र ने अपनी भतीजी रिंकी विश्वकर्मा को वॉट्सएप पर सुसाइड नोट भेजा था। बाद में पत्नी और दोनों बच्चों की फोटो भी भेजी। नीचे लिखा था- यह हमारी आखिरी फोटो है, अब हम कभी नहीं दिखेंगे। जब रिंकी ने इस फोटो को 6 बजे देखा तो उसने परिजनों को सूचित किया। घर जाने पर वाकई पूरा परिवार खत्म हो चुका था।

चचरे भाई पंकज विश्वकर्मा ने बताया कि उनके भैया भूपेंद्र के साथ साइबर क्राइम हुआ था। उन्हें जो मोबाइल और लैपटॉप दिया गया था उसे हैक करके अश्लील वीडियोज कॉन्टैक्ट पर भेजे गए। भैया ने कहा भी था कि ये मैसेज वो नहीं भेज रहे। 2-3 दिन पहले जब बात हुई तो वो काफी परेशान थे। उन्हें ब्लैकमेल करके 17 लाख रुपए माँगे जा रहे थे। लोन ऐप के चक्कर में उनसे पहले ही तीन अकॉउंट खाली हो चुके थे। पूरा पैसा निकाल लिया गया था।

मामले की जाँच 5 सदस्यीय एसआईटी कर रही है। इनमें एडिशनल डीसीपी जोन-1, एसीपी टीटी नगर, टीआई रातीबढ़, टीआई टीटीनगर और सायबर क्राइम टीम के दो पुलिस अफसरों को शामिल किया गया है। DCP जोन 1 साइ कृष्णा थोटा ने इस केस के बारे में बात करते हुए बताया, अभी तक की जाँच में सामने आया है कि परिवार कर्ज में था। इन्होंने ऑनलाइन वर्क के लिए ऑनलाइन ऐप्स डाउनलोड किए। जब आप ऐप डाउनलोड करते हैं, तो परमिशन में आपकी कॉन्टैक्ट लिस्ट, फोटो शेयर हो जाती हैं। इन्हीं फोटो और कॉन्टैक्ट लिस्ट को यूज करते हुए इनको ब्लैकमेल किया गया। इस कारण ऐसा कदम उठाया।

गौरतलब है कि भूपेंद्र विश्वकर्मा ने अपने सुसाइड नोट में बताया है कि कैसे वो ज्यादा पैसा कमाने के लालच में ऑनलाइन लोन ऐप के चक्कर में पड़ गए, उसी ऐप के जरिए उनके साथ फ्रॉड हुआ और उनका लैपटॉफ-फोन कॉन्टैक्ट को अश्लील वीडियो के मैसेज भेजे जाने लगे। उन्होंने नोट के आखिर में लिखा कि वो अपने बच्चों को अपने साथ लेकर जा रहे हैं। भूपेंद्र द्वारा लिखे गया आखिरी नोट में पढ़ सकते हैं।

मध्य प्रदेश : भोपाल के छोला इलाके में खंडित मिला शिवलिंग: आक्रोशित हिंदू संगठन सड़क पर उतरे

                                     भोपाल के छोला इलाके में खंडित मिला शिवलिंग (तस्वीर-अमर उजाला)
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कुछ अज्ञात लोगों ने शिव मंदिर में शिवलिंग को खंडित कर दिया। घटना हनुमानगंज थाना क्षेत्र के छोला इलाके की है। इस घटना की जानकारी तब हुई जब सुबह शिवभक्त पूजा करने मंदिर पहुँचे तो उन्हें जैसे ही जानकारी हुई बात पूरे इलाके में फैल गई। जहाँ इस घटना के बाद लोगों में नाराजगी है वहीं शिवलिंग तोड़े जाने की सूचना मिलते ही मौके पर पहुँची पुलिस ने केस दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भोपाल के हनुमानगंज थाने के पास छोला रोड पर वीर सावरकर चौक पर पिपलेश्वर महादेव का मंदिर है। इस मंदिर में स्थित शिवलिंग को रात में कुछ उपद्रवियों ने पत्थर मारकर तोड़ दिया। 3 अगस्त, 2022 की सुबह जब लोग पूजा करने शिव मंदिर पहुँचे तो उनके सामने टूटा शिवलिंग था। इसे लेकर क्षेत्र के रहवासियों में आक्रोश है।”

वहीं इंडिया टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में एक प्रत्यक्षदर्शी का कहना है, “जब सुबह जब मैं घूमने जा रहा था, तो शिव मंदिर में शिवलिंग टूटी हुई दिखाई दी। जब मैंने करीब जाकर देखा, तो शिवलिंग टूटी हुई पड़ी थी और बगल में पत्थर पड़ा था। इसकी जानकारी मैंने तुरंत इलाके के लोगों को दी और फिर पुलिस को बताया। लोगों को जैसे ही इस बात का पता चला, तो वे सभी यहाँ पर इकट्ठे हो गए और इलाके में इस घटना के बाद से आक्रोश फैल गया।”

शिव मंदिर में शिवलिंग के खंडित किए जाने की जानकारी जैसे ही हिन्दू संगठनों को हुई तो विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल आदि के पदाधिकारी मंदिर पहुँचकर, मंदिर के सामने बैठकर नारेबाजी की। उन्होंने अज्ञात बदमाशों को गिरफ्तार करने की माँग की। वहीं भड़के लोगों ने कुछ समय के लिए सड़क जाम भी किया।

इस मामले में पुलिस के एक अधिकारी ने बुधवार को बताया कि सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपित की पहचान कर ली गई है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हनुमानगंज पुलिस थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 295 (किसी भी वर्ग के धर्म का अपमान करने के इरादे से पूजा स्थल को चोट पहुँचाना या उसे अपवित्र करना) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

सांसद साध्वी प्रज्ञा को वीडियो कॉल कर नंगी होने लगी लड़की

मध्य प्रदेश के भोपाल से भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर (Pragya Singh Thakur) ने रविवार (6 फरवरी, 2022) को मोबाइल पर अश्लील फोटो भेजने और वीडियो कॉल करने वाले के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है। सांसद प्रज्ञा ने देर रात टीटीनगर पुलिस थाने में यह शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने बताया कि वीडियो कॉल पर एक लड़की ने प्रज्ञा ठाकुर के सामने कपड़े उतारना शुरू कर दिया, जिसके बाद उन्होंने तुरंत कॉल डिस्कनेक्ट कर दी। इसके बाद आरोपितों ने वीडियो रिकॉर्डिंग भेजकर उनसे रुपए माँगे।

यही नहीं, उन आरोपितों ने भाजपा सांसद को जान से मारने की धमकी देते हुए कहा कि अगर रुपए नहीं दिए तो वह इस वीडियो को वायरल कर देंगे। पुलिस ने छेड़छाड़, गाली-गलौज और जान से मारने की धाराओं के तहत FIR दर्ज कर आरोपित की तलाश शुरू कर दी है।

साध्वी प्रज्ञा ने बताया कि रविवार शाम 7 बजे एक लड़की का वाट्सऐप पर वीडियो कॉल आया। वह कॉल पर अपने कपड़े उतारने लगी। लड़की को ऐसा करते देख उन्होंने फोन डिस्कनेक्ट कर दिया। उन्होंने बताया कि मुझे पहले 6371608664 से वीडियो कॉल आई, फिर कुछ देर बाद एक अन्य नंबर 8280774239 से उन्हें उस लड़की ने रिकॉर्डिंग वीडियो भेजा। इसके साथ ही आरोपित ने उन्हें फोन करके धमकी दी कि अगर उन्होंने उसे पैसे नहीं दिए, तो इस अश्लील वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया जाएगा। आरोपित ने सांसद से आपत्तिजनक शब्द भी कहे और जान से मारने की धमकी भी दी।

टीटी नगर टीआई चेन सिंह रघुवंशी ने बताया कि इस मामले से जुड़े सभी आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है। दोनों नंबरों को ट्रेस करने के लिए साइबर सेल की मदद ली जा रही है। जल्द ही आरोपितों को पकड़ लिया जाएगा। 

भोपाल की चैरिटेबल संस्था CFI ने बाइबिल नहीं बाँटने पर 22 लड़कियों को नौकरी से निकाला

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में चैरिटेबल संस्था CFI पर धर्मान्तरण कराने के आरोप लगे हैं। इस संस्था से निकाले गए कर्मचारियों ने पुलिस में शिकायत की है। शिकायत में लोगों ने बाइबिल बाँटने और धर्मान्तरण कराने के आरोप लगाए गए हैं। आरोपित संस्था CFI के प्रमुख डॉक्टर सजि थॉमस हैं। इसका मुख्यालय भोपाल के अयोध्या बाईपास स्थित शंकर गार्डन में है।

दैनिक भास्कर की खबर के अनुसार संस्था ने अपने उन कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है जिन्होंने ईसाई धर्म का प्रचार और बाइबिल बाँटने से इंकार कर दिया।। खुद पर धर्मान्तरण का आरोप लगाने वाले पूर्व कर्मचारी राजेश खन्ना के खिलाफ CFI संस्था ने अभद्र व्यवहार की शिकायत दर्ज करवाई है। पुलिस दोनों मामलों की जाँच कर रही है। CFI संस्था लगभग 20 वर्ष पुरानी बताई जा रही है।

अपनी पहिचान गुप्त रखने की शर्त पर CFI से निकाली गई लड़कियों ने पूरी बात बताई है। उनके अनुसार 22 लड़कियों का समूह गर्भवती महिलाओं के लिए लगभग 3 वर्ष से काम कर रहा। कुछ समय से उनको बाइबिल बाँटने के लिए कहा जाने लगा। जब उन्होने मना किया तो उनको नौकरी से निकाल दिया गया। इसी के साथ मीटिंग के लिए ऑफिस में बुला कर उन्हें अपमानित किया गया।

लड़कियों ने CFI में मदर चाइल्ड हेल्थ विंग प्रभारी डॉक्टर प्रीति नायर पर भी आरोप लगाया है। इस घटनाक्रम का वीडियो भी बनाया गया है। वीडियो में दोनों पक्ष एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप कर रहे हैं। इसी वीडियो में हेल्थ कंसल्टेंट फेवा थॉमस को कहते सुना जा रहा है कि हम पर धर्मान्तरण के आरोपों को साबित करके दिखाओ।

चैरिटेबल ट्रस्ट CFI की संस्था MCI की प्रभारी डॉक्टर प्रीति नायर ने इन आरोपों में किसी भी प्रकार की सच्चाई न होने की बात कही है। उन्होंने बताया कि मैंने किसी भी कर्मचारी को संस्था से नहीं निकाला है। उनके अनुसार आरोप लगाने वाली 22 लड़कियों का उनसे सीधा वास्ता ही नहीं है। वो सभी संस्था के कर्मचारी राजेश खन्ना के अधीनस्थ काम करती हैं।

डॉक्टर प्रीति ने कहा कि उन पर आरोप क्यों लग रहे हैं ये उन्हें भी नहीं समझ में आ रहा। उन सभी की जानकारी अपडेट करने के लिए उन्हें बुधवार को बुलाया गया था। हमने उन्हें कभी भी बाइबिल बाँटने के लिए भी नहीं कहा है। इसी के साथ हम पर लग रहे धर्मांतरण के आरोप भी सही नहीं हैं।

बकौल प्रीति नायर उनकी तरफ से राजेश खन्ना के खिलाफ पुलिस में अभद्र व्यवहार की शिकायत दर्ज करवाई गई है। इस मामले में आरोपित राजेश खन्ना का कहना है कि वो CFI में लगभग 5 वर्ष से नौकरी कर रहे हैं। उन्हें संस्था के मदर चाइल्ड हेल्थ विंग में महिलाओं को जागरूक बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। पिछले कुछ समय से उन्हें बाइबिल बाँटने के साथ ईसाई धर्म का प्रचार करने के लिए कहा जा रहा है।

उनके अधीनस्थ काम करने वाली महिलाओं को भी यही काम करने का दबाव CFI संस्था द्वारा बनाया जा रहा था। लड़कियों ने ऐसा करने से मना किया तो उन्हें निकाल दिया गया। प्रचार करने और बाइबिल बँटवाने का दबाव बनाया जा रहा है।

बुधवार दोपहर संस्था प्रमुख डॉक्टर प्रीति नायर और फेवा ने इसी सिलसिले में सबको बातचीत के लिए बुलाया था। मुझे ऑफिस के बाहर ही रोक दिया गया। सिर्फ लड़कियों को अंदर ले जाया गया। कुछ देर बाद अंदर से चीख सुन कर मैं भी वहाँ पहुँच गया। मेरे पहुँचते ही उन्होंने मुझ पर ही आरोप लगाने शुरू कर दिए। लड़कियों ने बाइबिल बाँटने और ईसाई धर्म का प्रचार करने से मना कर दिया इसलिए उन सभी को नौकरी से निकाल दिया गया।

राजेश खन्ना के अनुसार उन्होंने इसकी लिखित शिकायत स्थानीय थाने छोला मंदिर में की है। साथ ही उन्होंने गुरुवार को नौकरी से इस्तीफा भी दे दिया। उनके अनुसार पुलिस ने अब तक FIR दर्ज नहीं की है।

इस घटनाक्रम पर मीडिया रिपोर्ट के अनुसार छोला मंदिर टीआई अनिल मौर्य ने बताया कि CFI संस्था के खिलाफ राजेश खन्ना ने प्रार्थना पत्र दिया है। दी गई तहरीर में उन्होंने CFI द्वारा धर्मान्तरण करवाने और उनके अधीनस्थ काम करने वाली लड़कियों से बाइबिल बँटवाने का आरोप लगाया है। संस्था ने ही राजेश खन्ना के खिलाफ अभद्रता करने का आरोप लगा कर तहरीर दी है। दोनों मामलों की जाँच करवाई जा रही है। अंत में जो भी दोषी होगा उस पर वैधानिक एक्शन लिया जाएगा।

इस प्रकरण की जानकारी के लिए ऑपइंडिया ने स्थानीय छोला मंदिर थाने में फोन मिलाया। थाने के लैंडलाइन नंबर को रिसीव करने वाले स्टाफ ने कार्रवाई में किसी प्रगति की जानकारी होने से इंकार कर दिया। वहीं जब थाना प्रभारी के सरकारी मोबाइल नंबर पर फोन मिलाया गया तब कोई जवाब नहीं मिला।

एक कांग्रेस नेता दूसरे कांग्रेस नेता की बीवी को लेकर फरार?


सोशल मीडिया पर एक न्यूजपेपर की कटिंग काफी वायरल हो रही है। इस कटिंग में यह खबर है कि एक कांग्रेसी नेता दूसरे कांग्रेसी नेता की पत्नी को लेकर भाग गया।

एक तरफ जहाँ एक बार फिर कांग्रेस के घोटालों की चर्चा आम है वहीं सोशल मीडिया पर यह खबर भी चर्चा का विषय बनी हुई है। सोशल मीडिया यूज़र्स कांग्रेसी नेता के इस कारनामें पर जमकर मजे ले रहे, वहीं कई लोग आश्चर्यचकित होते हुए खबर की सच्चाई को लेकर एक हिंदी अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या सच में एक कांग्रेसी नेता दूसरे कांग्रेसी नेता की पत्नी को लेकर भाग गया?

कहते है ना "जो पकड़ा गया वो चोर, वरना साहूकार", यदि ऐसी घटनाओं की पड़ताल की जाए, एक अच्छा-खासा ग्रन्थ बन जाएगा। क्योंकि दशकों से देश में राजनीति नहीं सियासत हो रही है। और अगर यह कहा जाए कि राजनीति/सियासत की आड़ में अय्याशी हो रही है, तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। बात 70 के दशक की है, जब लाल दरवाज़ा, दिल्ली, में नगर निगम मतदान समाप्त होते ही आज़ाद उम्मीदवार दूसरी आज़ाद उम्मीदवार को लेकर फरार हो गया। ऐसी ही तीन घटनाएं 80 में भी घटित हुई। चुनाव प्रचार में ही रोमांस हुआ, जो मतदान संपन्न होते ही जीवन-बंधन में परिवर्तित हो गया। अब जिनको लैला-मजनुओं के किस्से नहीं पता, उनकी सुई केवल कांग्रेस पर ही अटकी रहती है। इसमें दो राय भी नहीं कि कांग्रेस में यह आम बात है, लेकिन अछूती कोई पार्टी नहीं। फिर भी, करिए याद, कांग्रेस सेवा दल क्यों बना? बरहाल, ट्विटर पर लोग क्या विचार प्रस्तुत कर रहे हैं, देखिए:

पहली नजर में यह खबर देखने पर किसी को भी लगेगा सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर वायरल हो रही यह तस्वीर फर्जी है, और किसी ने शरारत करते हुए यह खबर छाप दी होगी। हालाँकि, बारीकी से निरीक्षण करने पर, यह बात सामने आई कि कॉन्ग्रेस नेता की किसी अन्य कॉन्ग्रेस नेता की पत्नी के साथ भागने की प्रकाशित रिपोर्ट सच है।

घटना मध्य प्रदेश से संबंधित है और इस साल फरवरी की है। मामला इंदौर के भवर कुँआ थाना क्षेत्र का है। मिली जानकारी के अनुसार बता दें इस साल की शुरुआत में एक कॉन्ग्रेसी नेता की पत्नी अपने दो बच्चों के साथ लापता हो गई थी। महिला के पति ने इलाके में लगे सीसीटीवी फुटेज खँगाले तो पता चला कि उसकी पत्नी और बच्चे एक अन्य कॉन्ग्रेस नेता के साथ दोपहिया वाहन से जाते हुए दिखे।

जिसके बाद अपनी लापता पत्नी के लिए पुलिस से संपर्क करने के बजाय कॉन्ग्रेस नेता ने भोपाल के कॉन्ग्रेस कार्यालय का दरवाजा खटखटाना ज्यादा सही समझा। और दूसरे कॉन्ग्रेसी नेता की शिकायत की। जिसके बाद पार्टी कार्यालय से कॉन्ग्रेस नेता को इंदौर वापस भेज दिया गया और उन्हें डीआईजी रूचि वर्धन शर्मा से संपर्क करने को कहा गया।

पुलिस थाने में उन्होंने माँग की थी कि उनकी पत्नी को उनके पास वापस लाया जाए। साथ ही यह आरोप भी लगाया गया था कि जिस कॉन्ग्रेस नेता पर दूसरे नेता की पत्नी को भगाने का आरोप था, वह सेवादल का एक पदाधिकारी था और एक महिला कॉन्ग्रेस नेता के साथ भी जुड़ा था। 

अफ़कार अख़बार के रसिक मालिक प्यारे मियाँ : 14-17 साल की 5 लड़कियों को शराब पिलाई, नचवाया और रेप भी किया

Life Of Mumbai Bar Dancers - जिंदगी बार डांसर कीः ...
                                प्रतीकात्मक 
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
आज अख़बार निकालने की आड़ में पत्रकारिता को किस कदर कलंकित करने में जुटे हैं, शर्म आती है ऐसे लोगों को पत्रकार कहने में। मेरी आयु के वरिष्ठ पत्रकार सरदार दुर्लभ सिंह के नाम से अच्छी तरह परिचित होंगे। जिनकी दिनचर्या सुबह दारू से शुरू होकर रात को सोने पर ही पूर्ण होती थी, नई दिल्ली स्थित कनॉट प्लेस से मासिक पत्रिका निकालते थे, ऑफिस में एक से बढ़कर एक हसीन युवती थी, लेकिन कभी इस तरह की घिनौनी हरकत नहीं सुनी। 
लेकिन हवस के रसिया किसी न किसी रूप में पत्रकारिता की आड़ में इन घिनौने कामों को अंजाम देने में लगे हैं। भोपाल से एक अखबार निकलता है। नाम है – अफ़कार। जो इसे प्रकाशित करता है, वो पत्रकार है और मालिक भी। उसका नाम है – प्यारे मियाँ। प्यारे मियाँ की उम्र 68 साल है। पत्रकार, अखबार छापने वाली कंपनी का मालिक भी और उम्र साठ के ऊपर! मतलब इलाके में रसूख पूरा। भोपाल में प्यारे मियाँ ने इसी का फायदा उठाया और कम उम्र की लड़कियों को अपना शिकार बनाया। लेकिन फँस गया।
हुआ यह कि देर रात गश्त करती पुलिस पार्टी को 5 लड़कियाँ सड़क पर दिखीं। कारण पूछा गया तो जवाब देने के हालत में एक भी लड़की नहीं थी। सब शराब के नशे में थीं। नाबालिग लड़कियों का शराब के नशे में होना पुलिस को खटका। पुलिस ने सभी 5 लड़कियों को चाइल्ड लाइन को सौंप दिया। फिर इनकी काउंसलिंग की गई। जब पूछताछ हुई तो इन्होंने यौन शोषण का खुलासा किया।
घटना वाली रात इन पाँच लड़कियों में से सिर्फ एक लड़की के साथ प्यारे मियाँ ने रेप किया। लेकिन बाकी चार लड़कियों के साथ कभी कुछ नहीं हुआ है, ऐसा नहीं है। ऊपर पुलिस के द्वारा दिए प्रेस नोट को पढ़ेंगे तो पाएँगे कि प्यारे मियाँ अपने असिस्टेंट स्वीटी के साथ मिलकर काफी दिनों से इन लड़कियों का यौन शोषण करता रहा है।
पार्टियों में पैसे के बदले डांस करने और उसके बाद यौन शोषण (संभोग, रेप) के लिए प्यारे मियाँ ने इन नाबालिग लड़कियों को अपने जाल में फँसाया। और इस काम के लिए उसका साथ दिया असिस्टेंट स्वीटी ने। इस मामले में अब तक की जाँच में भोपाल के 5 बड़े नाम सामने आ रहे हैं। लड़कियों ने पुलिस को बताया है कि उन्हें शाहपुरा क्षेत्र में शनिवार की रात एक जन्मदिन की पार्टी में नाचने के लिए ले जाया गया था।
प्यारे मियाँ ने अपनी सहायक स्वीटी विश्वकर्मा की मदद से इन लड़कियों को अपने यहाँ नाचने के लिए बुलाया था। विष्णु हाइट्स स्थित फ्लैट में पार्टी के दौरान प्यारे मियां द्वारा एक नाबालिग का यौन शोषण करने की बात भी सामने आई है। इन पाँचों लड़कियों ने भी प्यारे मियां पर लैंगिक शोषण का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें समय-समय पर उस फ्लैट में ले जाया जाता था। उन्हें इसके लिए धनराशि भी दी जाती थी।
सब कुछ स्वीटी विश्वकर्मा ही मैनेज करती थी और प्यारे मियां की तरफ से उन लड़कियों को धनराशि देने का प्रलोभन दिया करती थी। उन्हें पार्टियों के बहाने बुलाया जाता था और उनके साथ सेक्स किया जाता था। पुलिस 68 वर्षीय आरोपित की तलाश में लगी हुई है और उसकी सहायिका 21 वर्षीय स्वीटी को गिरफ्तार कर चुकी है। प्यारे के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस अब ये पता लगाने में जुटी है कि प्यारे मियाँ ने अब तक कितनी लड़कियों के साथ ज्यादती की है और कितनों की जबरन शादी कराई है। इस मामले में कई रसूखदारों के नाम सामने आने के कारण भी ये बड़ा मुद्दा बन सकता है। क्योकि बिना किसी रसूक के कोई ऐसे काम को अंजाम नहीं दे सकता। यह भी संभव हो सकता है कि अपने किसी काम को अंजाम देने के लिए भी बालाओं का प्रयोग किया जाता हो। इसका तो गंभीर जाँच में खुलासा हो पाएगा। 

शाहिद कबूतर, मजिद मामू और मोहसिन कचौड़ी ने लॉकडाउन में किया पुलिस टीम पर चाकू से हमला

भोपाल पुलिस पर हमला
जब भारत के किसी भी प्रान्त में किसी मुसलमान के साथ कोई हादसा होता है, #mob lynching, #intolerance, #award vapsi, #not in my name आदि गैंग विधवा-विलाप करते नज़र आते हैं, लेकिन तब्लीग़ियों द्वारा की जा रही जाहलियत पर ये सारे गैंगस्टर पता नहीं किस बिल में छुपकर बैठ मातम मना रहे हैं।   
मध्य प्रदेश में इंदौर के बाद अब भोपाल मेंं भी लॉकडाउन के बीच पुलिस पर हमले की खबर आई है। घटना तलैया थाना क्षेत्र में इस्लामपुरा इलाके की है। यहाँ विशेष समुदाय की भीड़ ने पुलिस पर धारधार हथियारों से हमला बोला और हमले में 2 से 3 पुलिसकर्मियों को घायल कर दिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस्लामपुरा में लॉकडाउन के बावजूद लोग एकट्ठा हो रहे थे। इन्हें एक जगह एकत्रित होने से रोकने के लिए पुलिस मौके पर पहुँची और इन लोगों को बाहर घूमने से मना किया। इसके बाद रात के करीब साढ़े दस बजे एक बदमाश ने अपने दर्जन भर साथियों के साथ मिलकर छह पुलिस कर्मियों पर हमला किया और 2 पर चाकू चला दिया। इस हमले में एक पुलिसकर्मी के हाथ में और दूसरे पुलिसकर्मी के कंधे में चोट आई। वारदात के बाद बदमाश मौके से फरार हो गए। जबकि घायल पुलिसकर्मियों को हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया।
 
तलैया थाना टीआई डीपी सिंह के अनुसार शाहिदिया स्कूल के पीछे रात में 15 से 20 लोग समूह में घूम रहे थे। इस दौरान आरक्षक लक्ष्मण यादव और सतीश सिंह ने उनको घर जाने के लिए बोला। जिस पर यह लोग पुलिस से विवाद करने लगे। तभी शाहिद कबूतर, मजिद मामू और मोहसिन कचौड़ी ने मिलकर दोनों पुलिस कर्मियों पर हमला कर दिया। जब तक बाकी पुलिस कर्मी उनके पास मदद करने पहुँचते, आरोपित हमला कर भागने में कामयाब हो गए। पुलिस का कहना है कि तीनों आरोपित बदमाश हैं। उनका पुराना अपराधिक रिकॉर्ड भी है। अब उनके साथ घूम रहे 15 लोगों की तलाश की जा रही है। 
थाना टीआई का कहना है कि जहाँ पुलिस कर्मियों पर हमला किया गया है, वह इलाका कंटेनमेंट एरिया घोषित किया गया है क्योंकि एक जमाती यहाँ कोरोना संक्रमित मिला था। 
इससे पहले लॉकडाउन के बीच इंदौर में भी समुदाय विशेष के हंगामा मचाया था। इस दौरान उन्होंने कोरोना संदिग्ध की जाँच के लिए गई स्वास्थ्य विभाग की टीम पर पथराव किया था। उनसे बदसलूकी की थी। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि स्वास्थ्यकर्मी किसी तरह अपनी जान बचाकर भागे थे। इस दौरान उपद्रवियों ने सुरक्षा लिहाज से लगाए बैरिकेड्स भी तोड़ दिए थे। बाद में सूचना मिलते ही पुलिस ने इनके खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा का केस दर्ज किया था और 13 आरोपितों को गिरफ्तारी हुई थी।
दिल्ली मरकज़, जमातियों की बदसलूकी

जमाती मो. फहद और अदनान जहीर ने कमरे के बाहर किया शौच निजामुद्दीन मरकज़ से निकलकर देश के अनेक राज्यों में पहुँचे जमातियों की हरकतें अब प्रशासन के लिए बर्दाशत से बाहर होती जा रही हैं। स्वास्थ्यकर्मियों पर थूकने से लेकर महिला कर्मचारियों पर फब्तियाँ कसने तक के मामले जगह-जगह से सामने आ रहे हैं। अब ताजा खबर की यदि बात करें तो इन्होंने घिनौनेपन की हर हद पार कर दी है। बताया जा रहा है कि नरेला के क्वारंटाइन सेंटर में जहाँ कई जमातियों को कोरोना संदिग्ध होने पर रखा गया था, उनमें से 2 जमातियों ने अपने कमरे के बाहर ही शौच कर दिया और जब सफाईकर्मी वहाँ पहुँचे तो ये लोग उनसे भी बदसलूकी करने लगे।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जब सफाईकर्मी ने इसकी सूचना अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दी, तो सब हैरान हो गए। इस हरकत की खबर फौरन नरेला इंडस्ट्रियल थाना पुलिस को दी गई और पुलिस ने बाराबंकी निवासी मो. फहद और अदनान जहीर के खिलाफ सरकारी आदेश का उल्लंघन समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया। अब पूरे मामले की छानबीन की जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, शनिवार की रात जमातियों की इस हरकत का खुलासा उस समय हुआ, जब हाउस कीपिंग स्टाफ क्वारंटाइन सेंटर की दूसरी मंजिल स्थित कमरा नंबर-212 के बाहर पहुँचा। वहाँ उनमें से एक कर्मचारी ने देखा कि कमरे के बाहर शौच पड़ी हुई थी। पूछताछ करने पर सभी लोग आना-कानी करने लगे।
मगर, जब इस संबंध में कमरा नंबर-212 में क्वारंटाइन फहद और अदनान से पूछा गया तो वह बदसलूकी करने लगे। अंत में तंग आकर मामले की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों के पुलिस को दी गई। पुलिस ने छानबीन के बाद दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। अब पुलिस दोनों से पूछताछ कर रही है।
पुलिस का कहना है कि 31 मार्च को हजरत निजाामुद्दीन स्थित मरकज से बड़ी संख्या में जमातियों को निकालकर अलग-अलग क्वारंटाइन सेंटर में लाया गया था। इन लोगों को कोरोना का संदिग्ध मानकर क्वारंटाइन रहने के लिए कहा गया है। लेकिन यह लोग लगातार किसी न किसी तरह स्टॉफ को परेशान कर रहे हैं। जिसकी खबर कई नगरों से आ चुकी है।
दिल्ली के नरेला में बनाये गए क्वारंटाइन सेंटर पर तबलीगी जमात के मरकज से निकाले गए 1200 जमातियों को रखा गया है।

मध्य प्रदेश : अतिथि विद्वानों के साथ धोखा, विरोध में डॉ. शाहीन खान ने कराया मुंडन

कांग्रेस शासित मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार की संवेहनहीनता एक बार फिर सामने आई है। सरकार बनने के बाद 10 दिनों के अंदर किसानों का कर्ज माफ करने का वादा करने वाली कमलनाथ सरकार 14 महीने बीत जाने के बाद भी ऋण माफ नहीं की और अब नियमितीकरण की मांग को लेकर अतिथि विद्वान पिछले 73 दिनों से भोपाल के शाहजहांनी पार्क में धरने पर बैठे हैं, लेकिन सरकार के कानों पर जूं तक रेंग नहीं रेंग रही है। 
अतिथि विद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के संयोजक डॉ देवराज सिंह का कहना है कि सरकार के पास आईफा अवार्ड्स कराने और फिल्मों को टैक्स फ्री करने के लिए पैसे हैं लेकिन वचनपत्र में किए गए वादे को पूरा करने के लिए सरकार बार-बार वित्तीय संकट का हवाला दे रही है। 
धरने पर बैठी एक महिला अतिथि विद्वान ने फरवरी 12 को सरकार के विरोध में मुंडन कराया। अतिथि विद्वानों का कहना है कि हमारे लिए अब जीवन और मौत का मामला है, हमें जब तक लिखित आर्डर नहीं मिल जाता, तब तक धरना समाप्त नहीं किया जाएगा। मुंडन कराने वाली महिला का नाम डॉ. शाहीन खान है। वह कटनी के पालू उमरिया शासकीय महाविद्यालय में हिन्दी पढ़ाती हैं।
मीडिया की खबरों के अनुसार लोक सेवा आयोग से चयनित असिस्टेंट प्रोफेसरों के पदभार संभालने के बाद नौकरी जाने से तनाव में आकर उमरिया में पदस्थ अतिथि विद्वान संजय कुमार अपनी जान दे चुके हैं। स्व संजय की पत्नी लालसा देवी भी तीन दिन से अस्थि कलश लेकर धरने पर बैठी हैं। अतिथि विद्वानों का यह आंदोलन छिंदवाड़ा से शुरू होकर भोपाल पहुंच गया है। आंदोलन को दो महीने से ज्यादा समय दिन बीत चुका हैं।

आखिर कब तक मदरसों में दीनी तालीम के नाम पर बाल अपराध और बलात्कार होते रहेंगे?

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
मदरसों में बच्चों का केवल यौन शोषण ही नहीं होता। ज्यादतियों की लिस्ट बेहद खौफनाक है। बर्बरता ऐसी कि इंसानियत शरमा जाए। 
केन्द्र में सत्ता परिवर्तन होने से आज मदरसों में पल रहे बाल अपराध और बलात्कार की खबरें प्रकाश में आने लगी हैं, वरना पिछली सरकारों के चलते कोई भी मदरसों में हो रहे अत्याचारों के बारे में जिक्र करते डरता था। तुष्टिकरण पुजारी इन अपराधों को उजागर ही नहीं होने देते थे। 
वाल्देन अपने बच्चों को तालीमी पढ़ाई के मकसद से मदरसों में भेजते हैं, लेकिन उन्हें नहीं मालूम कि वहां उनके बच्चों के साथ क्या होता है? मालूम होने पर भी अपना मुंह खोलने तक से डरते थे। जिस कारण मदरसों में मुल्लावाद बच्चों के साथ मनमानी करते रहते थे। 
वैसे तो लड़कियों और महिलाओं को बुर्का और हिजाब में रहने के लिए कहती है, लेकिन खुद बच्चियों के साथ क्या कुकर्म करते हैं, यह नहीं बताते, क्योकि ये सब कुकर्म परदे में करते हैं। 
भोपाल के मदरसे में जंजीर से बँधा मिला बच्चा: दीनी तालीम के नाम पर भीख भी मॅंगवा रहे मौलवी  
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रविवार यानी 15 सितंबर को पुलिस ने दो बच्चों को प्रताड़ना से मुक्त कराते हुए एक मदरसे के संचालक और उसके सहायक को गिरफ्तार किया। एक बच्चे की उम्र 10 साल और दूसरे की 7 साल है। 10 साल का बच्चा चेन से बॅंधा था और उसे आजाद कराने के लिए गैस कटर का इस्तेमाल करना पड़ा।
मामले का खुलासा तब हुआ जब दोनों बच्चे रोते हुए बेंच से बॅंधे हुए घसीटते हुए मदरसे से निकले। सड़क पर दोनों को देख लोगों ने पुलिस को खबर की। राज्य मदरसा बोर्ड के साथ तो यह मदरसा पंजीकृत नहीं है, लेकिन एक पंजीकृत शैक्षणिक सोसायटी इसका संचालन करती है। इस मदरसे में करीब 200 बच्चे पढ़ते हैं, जिनमें से 22 वहीं रहते थे।
भोपाल का मामला तो सामने आ गया और बच्चों की जान बच गई। लेकिन, ज्यादातर मामलों में ऐसा नहीं होता। दीनी तालीम के नाम पर चल रहे मदरसे बच्चों को भिखारी तक बना रहे हैं। उन्हें जंजीरों में बॉंध कर रखा जाता है। उनकी पिटाई की जाती है। गुलामों सरीखा सलूक उनके साथ होता है।
ऐसा केवल भारत में ही नहीं होता है। अफ्रीकी देश सेनेगल जहॉं की डेढ़ करोड़ की आबादी में से 90 फीसदी लोग मुसलमान हैं, वहॉं के मदरसों के अमानवीय बर्ताव सुन देह में सिहरन पैदा हो जाती है।
सेनेगल में मदरसों को डारा, उनमें पढ़ने वाले बच्चों को तालिब और पढ़ाने वाले मौलवी को माराबू कहते हैं। डारा में कुरान के अलावा शराफत भी सिखाई जाती है। यूॅं तो शराफत का मतलब विनम्रता होता है, लेकिन डारा शराफत के नाम पर बच्चों को भीख मॉंगने के लिए मजबूर करते हैं।
मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट के मुताबिक सेनेगल में करीब 1 लाख तालिब भीख मॉंग रहे हैं। ऐसे ज्यादातर तालिब की उम्र 12 साल से कम है। कुछ तो 4 साल के ही हैं। इसी संस्था ने 2010 के अपने अध्ययन में अनुमान लगाया था कि सेनेगल के मदरसों में पढ़ने वाले करीब 50 हजार बच्चे भीख मॉंग रहे हैं। यानी 10 से भी कम साल में इनकी संख्या दोगुनी हो चुकी है।
वैसे, इसके खिलाफ कानून सेनेगल करीब 15 साल पहले ही बना चुका है। ह्यूमन राइट्स वॉच और सेनेगल के मानवाधिकार समूहों के संगठन पीपीडीएच की अपील के बाद हाल में राष्ट्रपति मैकी साल ने बच्चों को सड़कों से वापस लाने और उनसे भीख मॅंगवाने वाले मौलवियों की गिरफ्तारी के आदेश भी दिए हैं। लेकिन, इससे हालात बदलने की बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं की जा रही।
इसका कारण मुस्लिम बहुल समाज में मुल्लों का दबदबा है। बताया जाता है कि मदरसों में बच्चों को खाना-पीना मिल जाता है। कुछ मदरसे बीमार होने पर इलाज भी करा देते हैं। इसलिए सब कुछ जान कर भी गरीब परिवार के लोग बच्चों को डारा भेज देते हैं।
असल में, मदरसों में आने वाले ज्यादातर बच्चों की आर्थिक पृष्ठभूमि कमजोर होती है और इसी का फायदा उठाया जाता है। भोपाल के मामले में भी यह नजर आता है। पुलिस के मुताबिक मुक्त कराए गए 10 साल के बच्चा का पिता मजदूर है। वहीं, 7 साल की उम्र का जो बच्चा है उसकी मॉं को पिता तलाक दे चुके हैं। उसकी मॉं घरों में काम कर किसी तरह गुजारा करती है। बच्चों को खाने-पिलाने की चिंता से मुक्ति के लिए लोग मदरसे में भेज देते हैं। साथ ही यह भी उम्मीद रहती है कि मदरसे में पढ़कर उनका बच्चा देर-सबेर इमाम बन जाएगा।
इसलिए, अक्सर बच्चों के साथ होने वाली ज्यादतियों का पता चलने पर भी अम्मी-अब्बू खामोश रह जाते हैं। इसके अलावा धर्म और मौलवियों का खौफ भी चुप्पी का बड़ा कारण है।
मौलवियों के खौफ के बारे में बताते हुए सेनेगल के एक वकील ने ह्यूमन राइट्स वॉच को बताया- एक पीड़ित तालिब को माराबू ने भरी अदालत के सामने मारने की धमकी दी। बाद में पीड़ित पलट गया और मामला खत्म हो गया।
डारा में बच्चे किस हालात में रहते हैं इसके सबूत फोटोग्राफर मारियो क्रूज की फोटो बुक ‘Talibes: Modern Day Slaves‘ में मौजूद हैं। तस्वीरें देख आपकी रूह कॉंप जाएगी। इन तस्वीरों के लिए क्रूज को अपने जान जोखिम में डालने पड़े थे।
हृयूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट बताती है कि बच्चों से भीख मॅंगवाकर कुछ मौलवी साल भर में करीब एक लाख डॉलर कमा लेते हैं। आठ साल के डेम्बा के अनुसार- एक मौलवी ने मुझ से रात भर सड़कों पर भीख मॅंगवाई। सुबह एक नशेड़ी ने सारा पैसा छीन लिया।
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार बच्चे भीख में पर्याप्त पैसा नहीं लाते तो उनकी मौलवी बुरी तरह से पिटाई करते हैं। 10 साल के सुलेमान का कहना है- जब तक मैं कुरान सीख नहीं लेता अपने मॉं-बाप से नहीं मिल सकता। मुझे माराबू को 200 फ्रांक लाकर देने होते हैं, नहीं तो मेरी पिटाई होती है। एक अन्य तालिब मूसा ने बताया- मेरे माता पिता को पता है कि मैं माराबू को पैसा देने के लिए भीख मॉंगता हूॅं। वे इसके खिलाफ कुछ नहीं करते। मुझे भीख मॉंगना पसंद नहीं। लेकिन कोई चारा नहीं है।
प्रताड़ना से तंग आकर बहुत सारे बच्चे डारा से भाग भी जाते हैं। लेकिन, इससे उनकी परेशानियों का अंत नहीं होता, क्योंकि मदरसे भीख मॉंगने के अलावा उन्हें कुछ और सिखाते नहीं। हृयूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट में डकार के एक डारा से 2018 में भागे तालिब के हवाले से कहा गया है- मुझे डारा पसंद नहीं। वहॉं हमेशा पिटाई होती है। कुरान याद न हो तो भी पिटाई। पैसे लेकर नहीं आएँ तब भी पिटाई। मौलवी तब तक मारते हैं जब तक मौत का एहसास न हो।
डॉयचे वेले के अनुसार राहत संगठन मेसन ड दे ला गार के संस्थापक ईसा कूयाते एक बच्चे की कहानी सुनाते हुए रोने लगते हैं। 8 साल के एक बच्चे ने उन्हें अपनी आपबीती बताई। मदरसे से भागे इस बच्चे का सड़क पर रात में बलात्कार किया गया। कूयाते ने संयोग से उसे बचा लिया। 13 साल का न्गोरसेक डारा से भागने के बाद सेंट लुई शहर में कचरे के डब्बे में खाना खोजता राहत संगठनों को मिला था। उसने कहा- मैं डारा से भाग गया, क्योंकि अब बर्दाश्त नहीं होता।
हृयूमन राइट्स वॉच की ताजा रिपोर्ट में 2017-2018 के बीच डारा में पिटाई, यौन शोषण और भीख मॉंगने से हुई 16 बच्चों की मौत का भी जिक्र है। इसके मुताबिक सजा के तौर पर तालिब को जेल की कोठरी जैसे कमरों में हफ्तों या महीनों तक बंद रखा जाता है। बच्चे भागे नहीं इसलिए उन्हें जंजीर से बॉंध दिया जाता है। भोपाल में गिरफ्तार किए गए मदरसे के संचालक ने भी पुलिस को बताया कि 10 साल की उम्र का बच्चा एक बार बगैर बताए मदरसे से निकल गया था। इसके बाद से उसे जंजीर से बॉंधकर रखा जाता है।
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार सेनेगल में जब-जब हल्ला होता है पुलिस बच्चों को सड़क से उठाकर ले जाती है। लेकिन, उनको भीख मॉंगने के लिए मजबूर करने वाले मौलवियों पर कोई कार्रवाई नहीं होती। कभी-कभार कार्रवाई होती भी है तो प्रभावशाली मौलवी उसके विरोध में उठ खड़े होते हैं।
ऐसे में मदरसों के बच्चों की त्रासदी का अंत होता नहीं दिख रहा। जैसा कि ह्यूमन राइट्स वॉच की एसोसिएट डायरेक्टर (अफ्रीका) कोर्नी डुफका कहती हैं- तालिब गलियों में भटक रहे हैं। भयंकर यातना झेल रहे हैं। शोषण से मर रहे हैं।
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नाबालिग को निकाह का झॉंसा दे मौलवी यूसुफ ने मस्जिद के मुसाफिरखाने में कई बार किया दुष्कर्म
राजस्थान में अलवर जिले के कठूमर गाँव के एक मुस्लिम धर्मगुरु पर गाँव की एक नाबालिग लड़की का अपहरण करने और उसे जबरन हैदराबाद ले जाने का आरोप लगा है। यहाँ उसने एक मस्जिद के मुसाफिरखाने में उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया। पीड़ित के परिजनों ने उनकी लड़की की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने एक हफ्ते से इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की थी।
हालाँकि, पुलिस का कहना है कि लगातार दबिश के चलते आरोपित रविवार (सितंबर 15, 2019) को नाबालिग को पास के गाँव में छोड़कर गया है। बता दें कि, आरोपित मौलवी क्षेत्र के खुडियाना गाँव में नाबालिग लड़की को छोड़कर भाग गया। लड़की के गाँव से बरामद होने के बाद मामले की सच्चाई सामने आई। पुलिस अधिकारी राजेश कुमार के अनुसार, लड़की के भाई ने 7 सितंबर को मामला दर्ज कराया था कि उसकी 17 वर्षीय बहन को एक बोलेरो कार में भरतपुर क्षेत्र के दीनू गाँव निवासी यूसुफ द्वारा जबरन उठाकर ले जाया गया था।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, मामला दर्ज होने के बाद, मौलवी और उसके ठिकाने का पता लगाने के लिए पुलिस ने यूसुफ के घर और कई अन्य जगहों पर छापेमारी की, मगर वह नहीं मिला। कथित तौर पर मौलवी ने पुलिस की दबिश और अपने खिलाफ जाँच की कार्रवाई से डरकर पीड़िता को खुडियाना गाँव के पास छोड़कर भाग गया।
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हिन्दी जगत के महान कवि रामधारी सिंह दिनकर की एक कविता है "अभिनव मानव" जिसमें उन्होंने विज्ञानं की प्रगति से होने वा....

सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुँची और पीड़िता को बरामद कर लिया। इसके बाद उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया और फिर घर भेज दिया गया। पीड़िता का आरोप है कि तकरीबन एक सप्ताह पहले युसूफ उसे निकाह के बहाने बहला-फुसला कर हैदराबाद ले गया था। हैदराबाद में, उसे एक मस्जिद के मुसाफिर खाने में रखा गया था, जहाँ युसुफ ने कई बार उसके साथ बलात्कार किया।
आरोपित युसूफ पीड़िता के गाँव के एक मदरसे में मौलवी था। इस दौरान कई बार उसका खराब बर्ताव और हरकतें जाहिर होने पर ग्रामीणों ने उसे मदरसे से भगा दिया था। पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपित को पकड़ने के लिए पुलिस टीम गठित की गई है। जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

दिग्विजय सिंह की जीत की भविष्यवाणी करने वाले बैराग्यानंद लेंगे समाधि

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आर.बी.एल.निगम
लोकसभा चुनाव 2019 में भोपाल  संसदीय सीट से कांग्रेस के उम्‍मीदवार दिग्विजय सिंह को बीजेपी उम्‍मीदवार प्रज्ञा सिंह ठाकुर के हाथों हार का सामना करना पड़ा। दिग्विजय सिंह ने जीत के तमाम जतन किए, चुनाव प्रचार में जोर लगाने के अलावा साधु संतों की शरण में भी गए।निरंजनीय अखाड़े के पूर्व महामंडलेश्वर बैराग्यानंद गिरी ने भी दिग्विजय सिंह के लिए चुनाव प्रचार किया। प्रचार के दौरान वो यहां तक कह गए कि अगर दिग्विजय सिंह चुनाव हार गए तो वो समाधि ले लेंगे। 23 मई को चुनावी नतीजे आए और दिग्विजय सिंह हार गए। अब बैराग्यानंद गिरी ने अपनी भविष्यवाणी गलत साबित होने पर 16 जून को हवन-कुंड में ब्रह्मलीन समाधि लेने की घोषणा की है। इसके लिए उन्होंने जिलाधिकारी को एक आवेदन देकर स्थान निर्धारित करने सहित समाधि लेने की अनुमति मांगी है 
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निरंजनीय अखाड़े के पूर्व महामंडलेश्वर बैराग्यानंद ने अपने अधिवक्ता माजिद अली के माध्यम से जिलाधिकारी को जून 12 को दिए आवेदन में कहा है, "कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह के पक्ष में प्रचार करते हुए उनकी विजय की कामना के लिए एक यज्ञ-हवन किया था। इस दौरान संकल्प लिया था कि अगर इस चुनाव में दिग्विजय सिंह को पराजय मिलती है तो हवन कुंड में ब्रह्मलीन समाधि लूंगा।"
पत्र में आगे कहा गया है, "साधु-संतों से परामर्श के बाद विधि-विधान से 16 जून अपराह्न् दो बजकर 11 मिनट पर ब्रह्मलीन समाधि लेने का निश्चय किया है, ताकि संकल्प पूरा कर सकूं।" बैराग्यानंद ने जिलाधिकारी से समाधि के लिए स्थान निर्धारित करते हुए स्वीकृति प्रदान करने का अनुरोध किया है 
बाबा बैराग्यानंद ने मई माह में लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस उम्मीदवार दिग्विजय सिह को चुनाव जिताने के लिए राजधानी के कोहेफिजा इलाके में मिर्ची यज्ञ किया था। इसी के दौरान उन्होंने घोषणा की थी कि यदि दिग्विजय सिह लोकसभा चुनाव में भोपाल सीट से चुनाव नहीं जीते तो वह (बाबा बैराग्यनंद) हवन-कुंड में समाधि ले लेंगे 
लोकसभा चुनाव में सिंह को भाजपा उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर से हार का सामना करना पड़ा।उसके बाद से बाबा बैराग्यानंद को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही थीं। अब उन्होंने समाधि लेने की घोषणा की है और जिलाधिकारी से स्थान निर्धारित करने और अनुमति देने का अनुरोध किया है (एजेंसीज इनपुट्स सहित)
VIDEO: प्रज्ञा ठाकुर ने 3 लाख 64 हजार वोटों से दिग्विजय सिंह को हराया

साध्वी प्रज्ञा ने अब दिग्विजय सिंह को बताया 'महिषासुर' ; 'उनके कुकर्मों का प्रमाण हूं मैं'

साध्वी प्रज्ञा ने अब दिग्विजय सिंह को बताया 'महिषासुर', बोलीं- 'उनके कुकर्मों का प्रमाण हूं मैं'
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
मुंबई हमले में शहीद पूर्व ATS चीफ हेमंत करकरे पर बयान देने के बाद सियासी उठा-पटक अभी थमी भी नहीं थी कि साध्वी प्रज्ञा ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भोपाल लोकसभा सीट पर अपने प्रतिद्वंद्वी दिग्विजय सिंह पर भी बयान दे डाला है। 
अभी तो भोपाल चुनाव की बिसात बिछनी शुरू हुई है। कहते हैं अगर दिल से कोई सोंची जाये, जरूर पूरी होती है। सोंचता रहता था, कांग्रेस और यूपीए में सम्मिलित समस्त दलों को बेनकाब करने के लिए झूठे आरोप में प्रताड़ित साध्वी प्रज्ञा, स्वामी असीमानंद और कर्नल पुरोहित को चुनाव प्रचार में भाजपा क्यों नहीं लेकर आती। चलिए देर आए, दुरुस्त आए। हिन्दू धर्म को "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" कहकर कलंकित करने वालों की केवल एक ही पीड़ित के मैदान में आने पर नींद हराम हुई, अभी तो औरों ने भी आने दो, पता नहीं तब क्या होगा इन छद्दमों का? 
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जहाँ तक हेमंत करकरे को श्राप की बात पर समस्त छद्दम धर्म-निरपेक्षों द्वारा क्यों विधवा-विलाप किया जा रहा है? उन्होंने श्राप करकरे को उनके जीवनकाल में उन्ही के समक्ष दिया था। 
गौ-हत्या का विरोध कर रहे साधु समाज के
खून से पार्लियामेंट स्ट्रीट लाल
हो गयी थी। 
ज्ञात हो, जब 7 नवम्बर 1966 को गौ-हत्या का विरोध कर रहे निहत्ते साधु-संतों पर गोलियाँ चलवाकर उनकी लाशें बिछने के साथ-साथ पार्लियामेंट स्ट्रीट उनके खून से नहा रही थी, तब कृपालु जी महाराज ने तत्कालीन प्रधानमन्त्री इन्दिरा गाँधी को श्राप दिया था कि "इन्दिरा जिस तरह आज गोपाष्ठमी के दिन निर्दोष और निहत्ते साधु-सन्तों के खून की होली खेली जा रही है, तेरी भी मौत गोपाष्ठमी के ही दिन होगी।" संयोगवश 31 अक्टूबर 1984 को गोपाष्ठमी थी। अपने आराध्य पुरुषोत्तम श्रीराम को काल्पनिक बताने वालों को क्या मालूम श्राप किस स्थिति में और क्यों दिया जाता है? यह निर्दोष साधु-संतों के श्राप एवं हाय का ही परिणाम है कि कांग्रेस निरन्तर पाताललोक की ओर अग्रसर है। 
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शहीद महेश चंद शर्मा पर आँसू बहाने की
बजाए आतंकियों के मारे जाने पर
आँसू बहाने वाली सोनिया गाँधी से
माफ़ी मंगवाने का साहस क्यों नहीं हुआ?
जब उनकी मृत्यु पर तो सन्देह किया जा रहा था,
तब क्या उस शहीद का अपमान नहीं था?
Related imageस्मरण हो, बटला हाउस में जब पुलिस अधिकारी महेश शर्मा की आतंकवादियों द्वारा हत्या होने पर यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गाँधी द्वारा दिवंगत महेश शर्मा पर आँसू बहाने की बजाए आतंकवादी के मरने पर आंसू बाहे जाने पर ये सब क्यों सूरदास बन गए थे? विपरीत इसके अपने वोट बैंक को खुश करने खूब प्रचार किया गया था कि सोनिया जी अपने आंसू रोक नहीं पायीं। कुछ तो शर्म करो।  
मुलायम सिंह ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में निहत्ते रामभक्तों पर गोलियाँ चलवा कर उनके खून की होली खेली थी, आज पार्टी धरातल में पहुँच रही है। जो मायावती कहती थी "तिलक, तराजू और तलवार, इनके मारो जूते चार" आज वह पार्टी भी अपना अस्तित्व बनाए रखने के गेस्ट हाउस काण्ड करने वालों की शरण में जा बैठी। वामपंथी जिन्होंने भारत के वास्तविक इतिहास को धूमिल कर आतताइयों यानि मुग़ल शासन को बढ़ाचढ़ा कर रचने वालों की स्थिति भी लगभग शून्य ही है। अन्तर केवल आँख, नाक, कान और मष्तिक को खोलकर देखने की है।       
Image result for हिन्दू आतंकवाद कांग्रेसकरकरे की मृत्यु की जाँच क्यों नहीं हुई?
अप्रैल 19 को रिपब्लिक भारत पर परिचर्चा में रॉ के पूर्व अधिकारी आर.पी.एन.सिंह ने हेमंत करकरे की मृत्यु पर उन्होंने प्रश्न किया "करकरे को किसने मारा? गोली गर्दन से नीचे बॉडी में गयी थी, क्यों नहीं जाँच करवायी गयी?" वैसे सिंह की बात में बहुत दम है, क्योकि तब भी यही बात चर्चा में थी, परन्तु इस गम्भीर मुद्दे को ठंठे बस्ते में डाल दिया गया, क्यों? 
अपने हालिया बयान में साध्वी प्रज्ञा ने दिग्विजय सिंह को महिषासुर और खुद को महिषासुर मर्दिनी बताया है। जिसके बाद फिर बयानों का दौर शुरू हो गया है वहीं दिग्विजय सिंह को महिषासुर बताने पर साध्वी प्रज्ञा का कहना है कि 'जब-जब धरती पर अत्याचार बढ़े हैं, तब-तब देवियों ने रूप लिए हैं ये शास्त्र में लिखा है ना हम किसी का नाम लेकर बोल रहे हैं और ना ही खुद को देवी बता रहे हैं निश्चित रूप से ऐसे लोग कालनेमि है जो समय-समय पर अपना रूप बदलते रहते हैं'
भोपाल के बैरसिया में बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए साध्वी प्रज्ञा ने दिग्विजय सिंह पर निशाना साधते हुए कहा था कि 'भारतीय राजनीति में कोई भी इतना बड़ा त्याग नहीं कर सकता (आलोक संजर को संबोधित करते हुए) कि अपनी सीट किसी और को दे दे भोपाल लोकसभा सीट से हमारे जीते हुए सांसद ने कहा कि दीदी आप की आवश्यकता है आपकी जय हो आप आइये इस महिषासुर का मर्दन करिए जब देश में कोई भ्रमित और अनाचारी हो जाता है, तब उसका विनाश करने स्वयं महिषासुर मर्दिनी को आना ही पड़ता है भोपाल में महिषासुर मर्दनी आई है, भगवा वेश धारण कर इनको इनके ही शब्दों में जबाव देने
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इस वेबसाइट का परिचय

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आज भारतीय जनता पार्टी द्वारा कथित "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" की शिकार बेकसूर साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को भोपाल ....

वहीं हेमंत करकरे के बारे में बयान देने पर एक महिला रिपोर्टर ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर से पूछा कि क्या उन्होंने सोच-समझकर यह बयान दिया है तो साध्वी प्रज्ञा सिंह महिला रिपोर्टर से ही सवाल करने लगीं, और पूछा कि 'आप लड़की हो, क्या आपको कभी 15-20 पुरूषों ने बेल्ट से मारा है? नंगा करके उल्टा लटकाया है? ये कौन से कानून में आता है आपको अपने उत्तर मिल जाएंगे. आतंकवादी की गोली से जो मारा जाता है उसे शहीद का दर्जा मिलता है इसलिए मैने माफी मांग ली, लेकिन क्या अब आप उन लोगों से माफी मंगवा सकते हैं जिन्होंने नौ साल तक मुझे पीड़ित किया 
वहीं साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने मुख्यमंत्री कमलनाथ पर निशाना साधते हुए कहा कि ''1984 दंगों के आरोपी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बनकर बैठे हैं जो सत्य होता है वही उजागर होता है 1984 का हत्याकांड था और उस हत्याकांड के दोषी यहां मुख्यमंत्री बने हैं वह किस नैतिकता के आधार पर साध्वी के बारे में कह रहे हैं साध्वी के अंत की बात ना करें'' वहीं अंदेशा जताते हुए साध्वी ने कहा कि 'हो सकता है कि मुझे जेल भेज दिया जाए जिस तरह से एनआईए कोर्ट में याचिका लगाई जा रही हैं, ये षड्यंत्र किया जा रहा है'