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आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने शहीद हेमंत करकरे को लेकर दिया बड़ा बयान

आज हेमंत करकरे पर जो प्रहार
हो रहे हैं,  2013 से ही एटीएस
निशाने पर थी, लेकिन किसी
मीडिया ने तत्कालीन यूपीए
सरकार के डर से उजागर
करने का
साहस नहीं किया था। 
Image result for इंद्रेश कुमारआर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
मुंबई 26/11 के हमलों में पाकिस्तानी आतंकवादियों की गोलियों का शिकार हुए शहीद हेमंत करकरे को लेकर फिर जबरदस्त बयान दिया गया है। इस बार यह बयान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने दिया है इंद्रेश कुमार ने जुलाई 27 को भोपाल में कहा कि मुंबई आतंकी हमलों में शहीद हुए पुलिस अधिकारी हेमंत करकरे का बतौर शहीद सम्मान तो किया जा सकता है, लेकिन प्रज्ञा सिंह ठाकुर के साथ उन्होंने जो अत्याचार किया, उसे सही नहीं ठहराया जा सकता कुमार ने कहा कि महाराष्ट्र के पूर्व एटीएस चीफ ने जिस तरह की अमानवीयता की, उसके बाद भी प्रज्ञा ठाकुर ने उनको लेकर दिया गया बयान बदल लिया, यह बड़ी बात है
अब सांसद बनने पर साध्वी प्रज्ञा को इस मुद्दे को संसद में उठाकर इस्लामिक आतंकवाद को बचाने की खातिर हिन्दुओं को अपमानित करने वालों को बेनकाब करना चाहिए। उन्हें किस-किस तरह प्रताड़ित किया गया था, संसद को बताना चाहिए। 
आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने शहीद हेमंत करकरे को लेकर दिए गए बयान के जरिए तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर भी निशाना साधाउन्होंने कहा कि तत्कालीन सरकार ने सुरक्षा एजेंसियों का बेजा इस्तेमाल किया शहीद हेमंत करकरे को लेकर दिए अपने बयान में इंद्रेश कुमार ने कहा है, ‘महाराष्ट्र के पूर्व एटीएस प्रमुख आतंकवादियों की गोलियों से मारे गए, इस नाते वह शहीद हैं और उनका सम्मान होना चाहिए। हालांकि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने जिस तरह "भगवा आतंकवाद" और "हिन्दू आतंकवाद" के नाम पर सुरक्षा एजेंसियों का बेजा इस्तेमाल कर एक महिला (भोपाल सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर) को प्रताड़ित किया, यह भी गौर किया जाना चाहिए’ इंद्रेश कुमार ने यह भी आरोप लगाया कि शहीद हेमंत करकरे ने प्रज्ञा सिंह ठाकुर को टॉर्चर किया
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेता ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, ‘हेमंत करकरे ने प्रज्ञा सिंह ठाकुर को टॉर्चर किया उनके साथ अमानवीयता से पेश आए, फिर भी प्रज्ञा ने मानवता दिखाई प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने हेमंत करकरे के खिलाफ बयान दिया, लेकिन बाद में उसमें बदलाव कर लिया यह प्रज्ञा ठाकुर की मानवता को दिखाता है
इस कटु सच्चाई से कोई इंकार नहीं कर सकता कि "भगवा आतंकवाद" और "हिन्दू आतंकवाद" के नाम पर इस्लामिक आतंकवादियों को बचाने के लिए बेकसूर हिन्दू साधु-संत और साध्वियों को जेलों में डालकर अमानवीय रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था, यदि उसका .00000001 प्रतिशत भी कसाब या दूसरे पकडे गए आतंकवादियों के साथ किया होता, सारे मानवाधिकार वाले, #pseudo secularists, #not in my name आदि गैंग सड़क से लेकर संसद और संसद से लेकर यूएनओ तक आसमान को सिर पर उठा लिया होता। लेकिन तत्कालीन यूपीए सरकार मीडिया सहायता से विश्व में "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" के नाम पर हिन्दुओं को अपमानित कर रही थी, और हिन्दू समाज मुँह में दही जमाए चुपचाप बैठ विश्वास कर रहा था। समय चक्र ऐसा घुमा कि सच्चाई सामने आने पर हिन्दू विरोधियों की नींद, रोटी और पानी हराम हो गयी है। 
2012 में सेवानिर्वित होने उपरान्त एक हिन्दी पाक्षिक को सम्पादित करते जो कुछ भी प्रकाशित किया, आज एक-एक शब्द सत्यापित हो रहा है। एक निष्पक्ष कलम के सिपाही का यही उद्देश्य होता है। 80 के दशक से लेकर आज तक अपने लेखन में बदलाव नहीं किया, जिस तरह आज मीडिया ने किया हुआ है, 2014 में मोदी सरकार बनने से पूर्व जो मीडिया अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए, मोदी और हिन्दू संगठनों पर प्रहार कर रही थी, आज वही 80 प्रतिशत मीडिया फूल बरसा रही है।      
Indresh Kumar, RSS: Hemant Karkare acted wrongly by torturing others. Still, Pragya exhibited humanity by amending her statement (on Karkare) after there was uproar over her remarks https://twitter.com/ANI/status/1156712456871456769 
ज्ञात हो, लोकसभा चुनाव के समय भोपाल से भाजपा उम्मीदवार प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने शहीद हेमंत करकरे को लेकर बयान दिया था अब सांसद बन चुकी प्रज्ञा ठाकुर ने दावा किया था कि महाराष्ट्र के पूर्व एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे ने उस समय अत्याचार किया था, जब वह उनकी हिरासत में थीं प्रज्ञा ठाकुर ने यह भी कहा था कि वर्ष 2008 में मुंबई आतंकी हमले के दौरान उनके ‘श्राप’ के कारण उसकी मौत हो गई थीदरअसल, शहीद हेमंत करकरे ने मालेगांव बम धमाकों के मामले में प्रज्ञा सिंह ठाकुर को गिरफ्तार किया था इस मामले को लेकर सांसद प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ अब भी मुकदमा चल रहा है
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मालेगांव बम धमाके में आरोपी रही साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर भोपाल लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार होंगी। इससे पहले स.....

 साध्वी को जबरदस्ती आतंकवाद का आरोप स्वीकार करवाने के लिए जिस तरह उन्हें और अन्य बेकसूरों को प्रताड़ित किया गया था, काश ऐसी प्रताड़ना किसी मुस्लिम के साथ हुई होती, #metoo#intolerance#not in my name, #mob lynching, #award vapsi आदि आदि जितने भी गैंग हैं, सबके सब सडकों पर आकर हेमंत करकरे के विरुद्ध प्रदर्शन कर उनको ऐसा निर्दयी निर्देश करने वालो को फांसी की माँग कर रहे होते। आधी रात को अदालतें खुलवा दी जाती। परन्तु, अफ़सोस, यह प्रताड़ना किसी मुस्लिम के साथ नहीं बल्कि एक हिन्दू के साथ हुई। आतंकवादियों को खूब बिरयानी खिलाई जाती थी, और बेकसूरों को बेल्टों से पिटाई और भूखा रखा जाता था? 
काश! आज हेमंत जीवित होते, बताते प्रताड़ित करवाने वालों के नाम
हिन्दू धर्म तो मृतात्माओं का सम्मान करने को कहता है। रावण की मृत्यु के बाद भगवान श्री राम ने उन्हें बाकायदा प्रणाम किया था और लक्ष्मण समेत दूसरों को भी उन्हें प्रणाम करने को कहा था, क्योंकि हिन्दू धर्म मृतकों का इसी तरह सम्मान करना सिखाता है। उसके बावजूद एक साध्वी एक मृतक को कलंकित कर रही है, क्यों? बल्कि चुनाव उपरान्त साध्वी प्रज्ञा को हेमंत करकरे की फाइल खुलवाने के लिए केन्द्र और राज्य सरकारों को मजबूर करना चाहिए। करकरे एक अफसर थे और उन्हें आदेशों को पालन करना था, जिस कारण वह बलि का बकरा बन गए और उनको आदेश देने वाले मालपुए खा रहे हैं। काश! आज हेमंत करकरे जीवित होते। राजनीति में भूचाल नहीं बवंडर आ गया होता, जब "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" के नाम पर बेकसूरों को प्रताड़ित करवाने वालों के नाम बोलते। वोट बैंक की राजनीति में देश की संस्कृति से खिलवाड़ किया गया और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी छूट गए।

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार क्या कोई देश की जनता को समझा सकता है कि आखिर भारतीय जनता पार्टी द्वारा यह जो राष्ट्रभक...

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार हिन्दू विरोध की भावना कांग्रेस के डीएनए में है। और इस डीएनए के सूत्रधार हैं महात्मा ग....

साध्वी प्रज्ञा ने अब दिग्विजय सिंह को बताया 'महिषासुर' ; 'उनके कुकर्मों का प्रमाण हूं मैं'

साध्वी प्रज्ञा ने अब दिग्विजय सिंह को बताया 'महिषासुर', बोलीं- 'उनके कुकर्मों का प्रमाण हूं मैं'
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
मुंबई हमले में शहीद पूर्व ATS चीफ हेमंत करकरे पर बयान देने के बाद सियासी उठा-पटक अभी थमी भी नहीं थी कि साध्वी प्रज्ञा ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भोपाल लोकसभा सीट पर अपने प्रतिद्वंद्वी दिग्विजय सिंह पर भी बयान दे डाला है। 
अभी तो भोपाल चुनाव की बिसात बिछनी शुरू हुई है। कहते हैं अगर दिल से कोई सोंची जाये, जरूर पूरी होती है। सोंचता रहता था, कांग्रेस और यूपीए में सम्मिलित समस्त दलों को बेनकाब करने के लिए झूठे आरोप में प्रताड़ित साध्वी प्रज्ञा, स्वामी असीमानंद और कर्नल पुरोहित को चुनाव प्रचार में भाजपा क्यों नहीं लेकर आती। चलिए देर आए, दुरुस्त आए। हिन्दू धर्म को "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" कहकर कलंकित करने वालों की केवल एक ही पीड़ित के मैदान में आने पर नींद हराम हुई, अभी तो औरों ने भी आने दो, पता नहीं तब क्या होगा इन छद्दमों का? 
Image result for हिन्दू आतंकवाद कांग्रेस
जहाँ तक हेमंत करकरे को श्राप की बात पर समस्त छद्दम धर्म-निरपेक्षों द्वारा क्यों विधवा-विलाप किया जा रहा है? उन्होंने श्राप करकरे को उनके जीवनकाल में उन्ही के समक्ष दिया था। 
गौ-हत्या का विरोध कर रहे साधु समाज के
खून से पार्लियामेंट स्ट्रीट लाल
हो गयी थी। 
ज्ञात हो, जब 7 नवम्बर 1966 को गौ-हत्या का विरोध कर रहे निहत्ते साधु-संतों पर गोलियाँ चलवाकर उनकी लाशें बिछने के साथ-साथ पार्लियामेंट स्ट्रीट उनके खून से नहा रही थी, तब कृपालु जी महाराज ने तत्कालीन प्रधानमन्त्री इन्दिरा गाँधी को श्राप दिया था कि "इन्दिरा जिस तरह आज गोपाष्ठमी के दिन निर्दोष और निहत्ते साधु-सन्तों के खून की होली खेली जा रही है, तेरी भी मौत गोपाष्ठमी के ही दिन होगी।" संयोगवश 31 अक्टूबर 1984 को गोपाष्ठमी थी। अपने आराध्य पुरुषोत्तम श्रीराम को काल्पनिक बताने वालों को क्या मालूम श्राप किस स्थिति में और क्यों दिया जाता है? यह निर्दोष साधु-संतों के श्राप एवं हाय का ही परिणाम है कि कांग्रेस निरन्तर पाताललोक की ओर अग्रसर है। 
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शहीद महेश चंद शर्मा पर आँसू बहाने की
बजाए आतंकियों के मारे जाने पर
आँसू बहाने वाली सोनिया गाँधी से
माफ़ी मंगवाने का साहस क्यों नहीं हुआ?
जब उनकी मृत्यु पर तो सन्देह किया जा रहा था,
तब क्या उस शहीद का अपमान नहीं था?
Related imageस्मरण हो, बटला हाउस में जब पुलिस अधिकारी महेश शर्मा की आतंकवादियों द्वारा हत्या होने पर यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गाँधी द्वारा दिवंगत महेश शर्मा पर आँसू बहाने की बजाए आतंकवादी के मरने पर आंसू बाहे जाने पर ये सब क्यों सूरदास बन गए थे? विपरीत इसके अपने वोट बैंक को खुश करने खूब प्रचार किया गया था कि सोनिया जी अपने आंसू रोक नहीं पायीं। कुछ तो शर्म करो।  
मुलायम सिंह ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में निहत्ते रामभक्तों पर गोलियाँ चलवा कर उनके खून की होली खेली थी, आज पार्टी धरातल में पहुँच रही है। जो मायावती कहती थी "तिलक, तराजू और तलवार, इनके मारो जूते चार" आज वह पार्टी भी अपना अस्तित्व बनाए रखने के गेस्ट हाउस काण्ड करने वालों की शरण में जा बैठी। वामपंथी जिन्होंने भारत के वास्तविक इतिहास को धूमिल कर आतताइयों यानि मुग़ल शासन को बढ़ाचढ़ा कर रचने वालों की स्थिति भी लगभग शून्य ही है। अन्तर केवल आँख, नाक, कान और मष्तिक को खोलकर देखने की है।       
Image result for हिन्दू आतंकवाद कांग्रेसकरकरे की मृत्यु की जाँच क्यों नहीं हुई?
अप्रैल 19 को रिपब्लिक भारत पर परिचर्चा में रॉ के पूर्व अधिकारी आर.पी.एन.सिंह ने हेमंत करकरे की मृत्यु पर उन्होंने प्रश्न किया "करकरे को किसने मारा? गोली गर्दन से नीचे बॉडी में गयी थी, क्यों नहीं जाँच करवायी गयी?" वैसे सिंह की बात में बहुत दम है, क्योकि तब भी यही बात चर्चा में थी, परन्तु इस गम्भीर मुद्दे को ठंठे बस्ते में डाल दिया गया, क्यों? 
अपने हालिया बयान में साध्वी प्रज्ञा ने दिग्विजय सिंह को महिषासुर और खुद को महिषासुर मर्दिनी बताया है। जिसके बाद फिर बयानों का दौर शुरू हो गया है वहीं दिग्विजय सिंह को महिषासुर बताने पर साध्वी प्रज्ञा का कहना है कि 'जब-जब धरती पर अत्याचार बढ़े हैं, तब-तब देवियों ने रूप लिए हैं ये शास्त्र में लिखा है ना हम किसी का नाम लेकर बोल रहे हैं और ना ही खुद को देवी बता रहे हैं निश्चित रूप से ऐसे लोग कालनेमि है जो समय-समय पर अपना रूप बदलते रहते हैं'
भोपाल के बैरसिया में बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए साध्वी प्रज्ञा ने दिग्विजय सिंह पर निशाना साधते हुए कहा था कि 'भारतीय राजनीति में कोई भी इतना बड़ा त्याग नहीं कर सकता (आलोक संजर को संबोधित करते हुए) कि अपनी सीट किसी और को दे दे भोपाल लोकसभा सीट से हमारे जीते हुए सांसद ने कहा कि दीदी आप की आवश्यकता है आपकी जय हो आप आइये इस महिषासुर का मर्दन करिए जब देश में कोई भ्रमित और अनाचारी हो जाता है, तब उसका विनाश करने स्वयं महिषासुर मर्दिनी को आना ही पड़ता है भोपाल में महिषासुर मर्दनी आई है, भगवा वेश धारण कर इनको इनके ही शब्दों में जबाव देने
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आज भारतीय जनता पार्टी द्वारा कथित "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" की शिकार बेकसूर साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को भोपाल ....

वहीं हेमंत करकरे के बारे में बयान देने पर एक महिला रिपोर्टर ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर से पूछा कि क्या उन्होंने सोच-समझकर यह बयान दिया है तो साध्वी प्रज्ञा सिंह महिला रिपोर्टर से ही सवाल करने लगीं, और पूछा कि 'आप लड़की हो, क्या आपको कभी 15-20 पुरूषों ने बेल्ट से मारा है? नंगा करके उल्टा लटकाया है? ये कौन से कानून में आता है आपको अपने उत्तर मिल जाएंगे. आतंकवादी की गोली से जो मारा जाता है उसे शहीद का दर्जा मिलता है इसलिए मैने माफी मांग ली, लेकिन क्या अब आप उन लोगों से माफी मंगवा सकते हैं जिन्होंने नौ साल तक मुझे पीड़ित किया 
वहीं साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने मुख्यमंत्री कमलनाथ पर निशाना साधते हुए कहा कि ''1984 दंगों के आरोपी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बनकर बैठे हैं जो सत्य होता है वही उजागर होता है 1984 का हत्याकांड था और उस हत्याकांड के दोषी यहां मुख्यमंत्री बने हैं वह किस नैतिकता के आधार पर साध्वी के बारे में कह रहे हैं साध्वी के अंत की बात ना करें'' वहीं अंदेशा जताते हुए साध्वी ने कहा कि 'हो सकता है कि मुझे जेल भेज दिया जाए जिस तरह से एनआईए कोर्ट में याचिका लगाई जा रही हैं, ये षड्यंत्र किया जा रहा है'

कांग्रेस के नारे पर भाजपा का वार "अब होगा न्याय"

Sadhvi Pragya
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
भोपाल सीट से साध्वी प्रज्ञा को भाजपा उम्मीदवार बनाए जाने पर विपक्षी पार्टियां जहां भगवा पार्टी पर हमलावर हैं। वहीं, दिल्ली के भाजपा नेता एवं प्रवक्ता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने कांग्रेस की 'न्याय' स्कीम के जरिए उस पर ही निशाना साधा है। दिल्ली की सड़कों पर पोस्टर्स लगे हैं। पोस्टर में साध्वी प्रज्ञा की तस्वीर हैं और इस पर लिखा है 'अब होगा न्याय'। तस्वीर के नीचे निवेदक के रूप में बग्गा का नाम है। इस तस्वीर में साध्वी प्रज्ञा काफी कमजोर नजर आ रही हैं। भाजपा ने प्रज्ञा को भोपाल सीट पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजिय सिंह के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारा है। बग्गा पहले भी अपने पोस्टरों के जरिए कांग्रेस पर हमला बोल चुके हैं। उनके पोस्टरों पर पहले विवाद भी खड़ा हो चुका है। 
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कांग्रेस ने वादा किया है कि यदि वह सत्ता में आई तो वह देश के 20 प्रतिशत गरीबों को उनके बैंक खाते में सलाना 72 हजार रुपए ट्रांसफर करेगी। उसने अपनी इस न्यूनतम आय गारंटी योजना को 'न्याय' नाम दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी रैलियों में अपनी इस योजना का बार-बार उल्लेख कर रहे हैं। कांग्रेस को लग रहा है कि यह योजना उनके लिए गेम चेंजर साबित होगी। कांग्रेस ने इस स्कीम को गरीबी पर 'सर्जिकल स्ट्राइक' बताया है। वहीं, भाजपा का कहना है कि कांग्रेस की यह स्कीम महज एक नारा है। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस ने गरीबी और गरीबों के नाम केवल लोगों को ठगा है।
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Image result for हिन्दू आतंकवाद कांग्रेससाध्वी प्रज्ञा भोपाल सीट से भाजपा की उम्मीदवार हैं। वह इस सीट पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह को चुनौती देंगी। दिग्विजय सिंह और साध्वी में पुरानी रंजिश बताई जाती है। साल 2008 के मालेगांव विस्फोट में साध्वी आरोपी हैं और वह जमानत पर हैं। उनके चुनाव लड़ने को अदालत में चुनौती भी दी गई है। भाजपा भोपाल सीट पर दिग्विजय सिंह को कड़ी टक्कर देने के लिए एक कट्टर हिन्दुवादी चेहरे को उतारना चाहती थी। अप्रैल 18 को साध्वी प्रज्ञा ने भोपाल में प्रेस को संबोधित किया और इस दौरान उन्होंने जेल में बिताए गए दिनों को याद कर रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि जेल में उन्हें तरह-तरह की यातनाएं दी गईं।
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भाजपा ने दिग्विजय के खिलाफ साध्वी प्रज्ञा को मैदान में उतारकर एक बड़ा दांव चला है। साध्वी प्रज्ञा की छवि कट्टर हिंदूवादी है। साध्वी अपने साथ हुए नाइंसाफी के लिए दिग्विजय सिंह और पी चिदंबरम को जिम्मेदारी ठहराती रही हैं। ऐसे में यह देखना बड़ा दिलचस्प होगा कि भोपाल में किस तरह के आरोप-प्रत्यारोप लगाए जाते हैं और उसका मतदाताओं पर कितना असर होता है। 
साध्वी प्रज्ञा 23 अक्टूबर 2008 को मालेगांव में हुए बम विस्फोट मामले में आरोपी हैं। इस हमले के बाद उनकी कथित संलिप्तता के लिए उन्हें गिरफ्तार किया गया और वह नौ वर्षों तक जेल में रहीं। उनकी पहचान हिंदुत्व के एक कट्टर चेहरे की रही है। वह गांव-गांव जाकर हिंदुत्व का प्रचार करती थीं। उनके भाषण की कला लोगों को प्रभावित करती रही है। 
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सच्चाई से घबराती कांग्रेस और यूपीए समर्थक पार्टियाँ 
लोकसभा चुनाव 2019 में भोपाल लोकसभा सीट से बीजेपी प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर पर चुनाव आयोग कोई रोक नहीं लगाएगा। मालेगांव ब्लास्ट की आरोपी प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ कांग्रेस समर्थक तहसीन पूनावाल ने चुनाव आयोग पहुंचे थे। तहसीन ने चुनाव आयोग से मांग की थी कि प्रज्ञा सिंह ठाकुर के खिलाफ गंभीर अपराधों के तहत मामला विचाराधीन है। इसलिए उनके चुनाव लड़ने पर रोक लगनी चाहिए। कानून के तहत साध्वी प्रज्ञा पर नहीं लग सकता चुनाव लड़ने पर रोक
बताया जा रहा है कि साध्वी प्रज्ञा किसी भी मामले में दोषी नहीं, दोष सिद्ध होने पर चुनाव न लड़ने का प्रावधान है न की आरोपी होने पर। गौरतलब है कि प्रज्ञा ठाकुर ने गुरुवार को बताया था कि जेल में उन्हें किस तरह से प्रताड़ित किया गया था
देखिए छद्दम धर्म-निरपेक्ष नेता दशहरा त्यौहार
पर रामलीला मंचन स्थल पर अपनी
आस्था दिखाने वाले कोर्ट
में क्या बयान देते हैं!
ऐसे तुष्टिकरण के पुजारी
छद्दम धर्म-निरपेक्ष नेताओं
ने "हिन्दू आतंकवाद" और
"भगवा आतंकवाद" का
शिगूफा छोड़ा था। 
राजनीतिक कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला ने अप्रैल 18 को चुनाव आयोग से अनुरोध किया कि मध्य प्रदेश की भोपाल संसदीय सीट से बीजेपी प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा को चुनाव लड़ने से रोका जाए क्योंकि उन पर आतंकवाद संबंधी आरोप हैं। आयोग को लिखे एक पत्र में उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के आतंकवाद विरोधी दस्ते(एटीएस) ने पाया कि साल 2008 में हुए मालेगांव बम धमाके में ठाकुर ‘‘मुख्य षड्यंत्रकर्ता’’ हैं। इस घटना में छह लोगों की मौत हो गई थी।  
Related imageउन्होंने कहा कि अजमेर दरगाह बम धमाके में उनका नाम सामने आया है। उन्होंने इस खत में लिखा, ‘‘मैं भारत के चुनाव आयोग से विनम्रतापूर्वक अनुरोध करूंगा कि वह आदर्श आचार संहिता 2019 को लागू करने के लिए आवश्यक कदम उठाये और साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के खिलाफ कार्रवाई करते हुये उनके चुनाव लड़ने पर रोक लगाये।’’ 
प्रज्ञा ठाकुर नौ साल जेल में रही हैं और 2017 में उन्हें खराब सेहत के चलते जमानत पर रिहा किया गया। उन पर गैर कानूनी गतिविधिया (निरोधक) कानून के तहत आरोप लगाये गये हैं
Related imageतहसीन पूनावाला को कांग्रेस के नजदीक माना जाता है। हालांकि, कानून के अनुसार, 25 साल की आयु से अधिक का कोई व्यक्ति चुनाव लड़ने का अधिकार रखता है बशर्ते उसे किसी ऐसे अपराध में दोषी न ठहराया गया हो जिसमें सजा की अवधि दो साल से अधिक की हो।
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Related imageमुंबई आतंकवादी हमले के शहीद हेमंत करकरे पर साध्वी प्रज्ञा का बयान

मध्य प्रदेश के भोपाल संसदीय सीट से भाजपा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को टिकट मिलने से जहां हर तरफ विरोध के स्वर तेज हो रहे हैं तो वहीं खुद प्रज्ञा सिंह ठाकुर के मुंबई हमले में शहीद हेमंत करकरे द्वारा किए गए अत्याचारों को जगजाहिर करने से कोई गुरेज नहीं कर रहीं। साध्वी ने 26/11 हमले में शहीद ATC चीफ हेमंत करकरे के बारे में कहा है कि 'उन्हें उनके कर्मों की सजा मिली है। उन्होंने मुझे गलत तरीके से फंसाया था। हेमंत करकरे मुझे किसी भी तरह से आतंकवादी घोषित करना चाहते थे'
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उन्होंने आगे कहा कि 'एक राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के सदस्य को उन्होंने भेजा, हेमंत करकरे को उन्होंने मुंबई बुलाया, मैं मुंबई जेल में थी तब। 
हेमंत करकरे को राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के सदस्य ने कहा कि जब तुम्हारे पास सबूत नहीं है तो साध्वी को छोड़ दो। सबूत नहीं है तो इनको रखना गलत है, यह गैरकानूनी है उसने कहा, मैं कहीं से भी सबूत लेकर आऊंगा, लेकिन इस साध्वी को नहीं छोड़ूंगा। यह उसकी कुटिलता थी। यह देशद्रोह था। वह मुझसे हर तरह के सवाल करता था, ये कैसे हुआ, वह कैसे हुआ। मैंने कहा, मुझे नहीं पता, भगवान जाने। तो उसने कहा क्या मुझे यह जानने के लिए भगवान के पास जाना होगा। तो मैंने कहा, जरूर अगर आपको आवश्यकता है तो आप जरूर जाइए'
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साध्वी प्रज्ञा ने आगे कहा कि ''आपको विश्वास करने में थोड़ी तकलीफ होगी, देर लगेगी, लेकिन मैंने उससे कहा था कि उसका सर्वनाश होगा। उसने मुझे कई यातनाएं दीं, कई गंदी गालियां दीं। वह मेरे लिए ही नहीं, किसी के लिए भी असहनीय होंगी। ठीक सवा महीने में सूतक लगता है। जिस दिन मैं गई थी, उस दिन इसके सूतक लग गए थे। और ठीक सवा महीने में जिस दिन आतंकवादियों ने उसको मारा, उस दिन उसका अंत हुआ।' वैसे तो करकरे तो मात्र एक मोहरा था, जो सरकार के आदेशों का पालन कर रहा था। यूपीए सरकार में सम्मिलित कांग्रेस तो क्या किसी भी पार्टी ने इस्लामिक आतंकियों को बचाने के लिए पकडे जाने निर्दोष साधु, संतों और साध्वियों के पक्ष में बोलने का साहस नहीं किया। 
दूसरे, करकरे पर आरोप लगने पर विधवा-विलाप करने आतंकियों के लिए आँसू बहा सकते हैं, आधी रात को सुप्रीम खुलवा सकते हैं, लेकिन जब वह एक निर्दोष को प्रताड़ित कर रहे थे, किसी छद्दम धर्म-निरपेक्ष के मुँह से एक शब्द नहीं निकला।  
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कांग्रेस ने 20 साल किया पीछे

साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि कांग्रेस के कारण ही आज में वर्तमान समय से 20 साल पीछे चल रही हूं। उन्होंने कहा कि मुझे सोशल मीडिया के बारे में किसी भी तरह की जानकारी नही हैं। साध्वी ने कहा कि मुझे कुछ दिनों पहले ही इस बात की जानकारी हुई कि मेरे नाम से कोई ट्विटर हैंडल और फेसबुक पेज चलाया जा रहा है
यूपीए और इसके समर्थक पार्टियों को बेनकाब करने में भाजपा साध्वी प्रज्ञा को बहुत देर से लेकर आई है। टिकट चाहे कहीं से देते, प्रचार में शुरू से ही इस्तेमाल करना था। मैं राजनीतिज्ञ विश्लेषक तो नहीं, लेकिन इतना जरूर कह सकता हूँ कि चुनाव घोषित होने के पूर्व से ही कांग्रेस सहित जितने भी छद्दम धर्म-निरपेक्ष और समाजवादियों में तूफान आ चूका होता, और इन सबको और अधिक बेनकाब करने के लिए स्वामी असीमानन्द और कर्नल पुरोहित को भी जितनी जल्दी हो चुनावी मैदान में लेकर आना चाहिए। 
ओवैसी के बयान पर पलटवार करते हुए साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि कांग्रेस का इतिहास उठाकर देख लीजिए कि उनकी पार्टी के कितने लोग ज़मानत पर है। सवाल उठाते हुए कहा कि क्या जनता का धन लुटना, भ्रष्टाचार करना सही है क्या? उन्होंने कहा कि विपक्ष को डर इस बात का ही दोबारा सत्ता में चौकीदार आ जाएगा तो उनकी सारी चोरियों को पकड़ लेगा
1. हिन्दू आतंकवाद शब्द गढ़ना जिससे दुनिया को लगे कि हिन्दू संस्कृति खराब है और हिन्दू ही आतंकवादी होते हैं ।
Image result for हिन्दू आतंकवाद कांग्रेस2. साधु संतों को मीडिया द्वारा बदनाम करवाकर उनकी छवि धूमिल करना, जिससे जनता उनसे नफरत करने लगे जिसे ईसाई मिशनरियों को धर्मांतरण करने में आसानी रहे ।
कांग्रेस द्वारा हिन्दू आतंकवाद साबित करने के लिए कई हिंदुत्वनिष्ठों को निशाना बनाया गया 
साध्वी प्रज्ञा ठाकुर
स्वामी असीमानंद
शंकराचार्य अमृतानंद
कर्नल पुरोहित
डीजी बंजारा
दूसरे प्रकार के षड्यंत्र के तहत फंसाये गये हिंदुत्वनिष्ठ-
शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती –
सत्य साई बाबा
स्वामी नित्यानंद
श्री कृपालु महाराज
संत आसाराम बापू
वर्तमान सरकार ने इन सभी देश भक्त लोगों को बारी-बारी से न्याय दिलवाया।
इनमें से अब केवल संत आसाराम बापू ही जेल में हैं, बाकि सभी निर्दोष बरी हो चुके हैं ।
कांग्रेस को बापू आसारामजी को बदनाम करवाने में बहुत पसीना आया, सबसे पहले 2008 में बापू आसारामजी के आश्रम में दो बच्चो की मौत का इल्जाम लगाया, मगर वहाँ से उनको क्लीनचिट मिल गई जिसके कारण वे सफल नही हो पाए।
फिर कांग्रेस ने POCSO कानून बनाया और इस कानून का पहला शिकार बापू आसारामजी का किया गया ,क्योकि POCSO में जमानत होना भी मुश्किल होता है।
आप भी जानिए कांग्रेस द्वारा संत आसाराम बापू को साइड करना क्यों जरूरी था –
 – सबसे पहले ,राहुल गांधी को पप्पू बापू  आसारामजी ने ही कहा था।
– बापू आसारामजी ने ही पहली बार कहा था ,सोनिया मैडम भारत छोड़ो।
– झारखंड राज्य में बापू आसारामजी ने एक साल में लाखों आदिवासियों को दोबारा हिन्दू बनाया जो ईसाई बन चुके थे।
-गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान जहाँ भारी मात्रा में ईसाई मिशनरियां धर्मान्तरण करवा रही थी वहाँ जाकर गरीबों को मकान बनवा कर दिया, जीवनुपयोगी  वस्तुएं दी और हिन्दू धर्म की महिमा बताई जिससे ईसाई मिशनरियों का मिशन फ्लॉप हो गया।
– बापू आसारामजी हिन्दू धर्म को विश्व पटल के चरम पर पहुँचा रहे थे और भारत में धर्मान्तरण नही होने दे रहे थे जिसके कारण वेटिकन सिटी बापू आसारामजी के खिलाफ हो गया ।
– बापू आसारामजी के देशभर में 40 से भी अधिक वैदिक गुरुकुल महंगी फीस ऎंठने वाले कान्वेंट स्कूलों पर भारी पड़ रहे हैं।
– 2006 से बापू आसारामजी ने शुरू किया 14 फरवरी को मातृ-पितृ पूजन दिवस, जिसका बढ़ता प्रभाव देखकर वैलेंटाइन की दुकाने बंद होने लगी जिससे विदेशी कंपनियों को भारी नुकसान झेलना पड़ा ।
– 2017 के गुजरात चुनाव में एक प्रमुख पादरी ने ईसाईयों से BJP को हराने को कहा। बापू आसारामजी ने अगले ही दिन मीडिया द्वारा राष्ट्रवादियों को जिताने का सन्देश भेज दिया।
-हाल ही में DK त्रिवेदी कमीशन ने बापू आसारामजी को 2008 केस में क्लीन चिट दी तो कांग्रेस ने गुजरात विधानसभा में हंगामा शुरू कर दिया और BJP विधायक के ऊपर माइक से हमला कर दिया।
– 2013 के झूठे रेप केस में भी जल्द ही फैसला आने की संभावना है। संत आसाराम बापू के बाहर आने के रस्ते खुलते नजर आ रहे हैं तो कइयों के राजनीतिक चूल्हे हिल जाएंगे इसलिए वे लोग अभी भी उनको अंदर रखना चाहते हैं पर सत्य को कबतक झूठ की परतों से ढका जा सकता है !!