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एक और परिवार लोन ऐप और ऑनलाइन जॉब से उजड़ गया : पहले 3 और 9 साल के बेटों को पिलाया जहर, फिर फंदे से झूल गए पति-पत्नी

लोन में डूबे शख्स ने बच्चों को जहर देकर किया सुसाइड
मध्य प्रदेश के भोपाल में ऑनलाइन लोन ऐप और ऑनलाइन जॉब के जाल में फँसे दंपति ने तंग आकर अपने दोनों बेटों को सल्फास देकर मार डाला और खुद फाँसी के फंदे पर लटक गए। पुलिस को मौके से जो 4 पन्नों का सुसाइड नोट बरामद हुआ उसमें शिव विहार कॉलोनी के भूपेंद्र विश्वकर्मा ने सारी कहानी बयां की।

भूपेंद्र ने बताया कि वो एक कोलंबिया बेस्ड कंपनी में काम करते थे। उनके ऊपर काम और लोन का प्रेशर पहले ही था। बाद में उन्हें पता चला कि कंपनी ने उनका लैपटॉप हैक करके उसमें मिले कॉन्टेक्ट पर एडिटेड अश्लील वीडियो डाल दिए थे। अंत में भूपेंद्र ने अपनी पत्नी रितू विश्वकर्मा के साथ मिल पहले बेटे ऋतुरात (3) और ऋषिराज (9) को जहर दिया और उसके बाद सुसाइड कर ली।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, बड़े भाई नरेंद्र विश्वकर्मा ने बताया कि भूपेंद्र ने दोनों बच्चों के साथ मरने से पहले सेल्फी कैप्चर की थी। बाद में कोल्ड ड्रिंक में सल्फास डालकर दोनों बच्चों को पिला दिया। इसके बाद काफी देर वो लोग बच्चों के पास बैठे रहे, जब बच्चों की मौत हो गई तो दोनों ने खुद भी दुपट्टे से फंदा बनाया और फाँसी लगाकर जान दे दी। नरेंद्र के मुताबिक भूपेंद्र के घर से सल्फास के 6 पैकेट मिले।

बताया जा रहा है कि आत्महत्या करने से पहले भूपेंद्र ने अपनी भतीजी रिंकी विश्वकर्मा को वॉट्सएप पर सुसाइड नोट भेजा था। बाद में पत्नी और दोनों बच्चों की फोटो भी भेजी। नीचे लिखा था- यह हमारी आखिरी फोटो है, अब हम कभी नहीं दिखेंगे। जब रिंकी ने इस फोटो को 6 बजे देखा तो उसने परिजनों को सूचित किया। घर जाने पर वाकई पूरा परिवार खत्म हो चुका था।

चचरे भाई पंकज विश्वकर्मा ने बताया कि उनके भैया भूपेंद्र के साथ साइबर क्राइम हुआ था। उन्हें जो मोबाइल और लैपटॉप दिया गया था उसे हैक करके अश्लील वीडियोज कॉन्टैक्ट पर भेजे गए। भैया ने कहा भी था कि ये मैसेज वो नहीं भेज रहे। 2-3 दिन पहले जब बात हुई तो वो काफी परेशान थे। उन्हें ब्लैकमेल करके 17 लाख रुपए माँगे जा रहे थे। लोन ऐप के चक्कर में उनसे पहले ही तीन अकॉउंट खाली हो चुके थे। पूरा पैसा निकाल लिया गया था।

मामले की जाँच 5 सदस्यीय एसआईटी कर रही है। इनमें एडिशनल डीसीपी जोन-1, एसीपी टीटी नगर, टीआई रातीबढ़, टीआई टीटीनगर और सायबर क्राइम टीम के दो पुलिस अफसरों को शामिल किया गया है। DCP जोन 1 साइ कृष्णा थोटा ने इस केस के बारे में बात करते हुए बताया, अभी तक की जाँच में सामने आया है कि परिवार कर्ज में था। इन्होंने ऑनलाइन वर्क के लिए ऑनलाइन ऐप्स डाउनलोड किए। जब आप ऐप डाउनलोड करते हैं, तो परमिशन में आपकी कॉन्टैक्ट लिस्ट, फोटो शेयर हो जाती हैं। इन्हीं फोटो और कॉन्टैक्ट लिस्ट को यूज करते हुए इनको ब्लैकमेल किया गया। इस कारण ऐसा कदम उठाया।

गौरतलब है कि भूपेंद्र विश्वकर्मा ने अपने सुसाइड नोट में बताया है कि कैसे वो ज्यादा पैसा कमाने के लालच में ऑनलाइन लोन ऐप के चक्कर में पड़ गए, उसी ऐप के जरिए उनके साथ फ्रॉड हुआ और उनका लैपटॉफ-फोन कॉन्टैक्ट को अश्लील वीडियो के मैसेज भेजे जाने लगे। उन्होंने नोट के आखिर में लिखा कि वो अपने बच्चों को अपने साथ लेकर जा रहे हैं। भूपेंद्र द्वारा लिखे गया आखिरी नोट में पढ़ सकते हैं।

देश-विदेश में एड देने वाले AAP के पास चुनाव लड़ने के लिए फंड नहीं

केजरीवाल, चंदा माँगा
अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली चुनाव लड़ने के लिए चंदा माँगा (साभार: यूट्यूब वीडियो का स्क्रीनशॉट)
आम आदमी पार्टी के पास दिल्ली में आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए फंड नहीं है। रविवार (24 नवंबर) को बुराड़ी की जनसभा में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने लोगों से चंदा देने की अपील की। 
रैली को संबोधित करते हुए, केजरीवाल ने कहा, “हमने दिल्ली में पिछले पाँच वर्षों में बहुत काम किया है। आगामी चुनाव लड़ने के लिए हमारे पास पैसे नहीं हैं। मैंने पिछले पाँच वर्षों में एक रुपया भी नहीं कमाया है।” 
2019 के आम चुनावों से पहले, आम आदमी पार्टी को भारत के अलावा सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और ओमान में दान विज्ञापन चलाते हुए पकड़ा गया था।
आम आदमी पार्टी के अतीत में दान के साथ एक संदिग्ध संबंध रहा है। मई 2017 में यह आरोप लगाया गया था कि AAP ने हवाला लेनदेन के माध्यम से शेल कंपनियों से करोड़ों का फंड प्राप्त किया। इससे पहले, भ्रष्टाचार विरोधी अन्ना हज़ारे ने AAP प्रमुख को पार्टी द्वारा मिले दान पर सफाई देने के लिए पत्र लिखा था।
यह ​​आरोप भी लगाया गया कि 2014 के आम चुनावों से पहले केजरीवाल को संदिग्ध चैनलों के माध्यम से पैसा मिला था। आप में रह चुके भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने आरोप लगाया था कि केजरीवाल के वाराणसी से 2014 के आम चुनावों के लिए अपना नामांकन दाखिल करने से एक हफ्ते पहले 5 अप्रैल, 2014 को चार शेल कंपनियों ने AAP के खाते में 2 करोड़ रुपए जमा किए थे। इन 4 कंपनियों में से 3 कंपनियों के डायरेक्टर हेम प्रकाश शर्मा थे। दिल्ली में जीके में किए गए प्रदर्शन के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) के छापे के दौरान 13 करोड़ रुपए की करेंसी बरामद हुई थी। इस कंपनी के निदेशकों में से एक हेम प्रकाश शर्मा भी हैं। कपिल मिश्रा ने केजरीवाल और हेम प्रकाश के बीच गहरे रिश्ते को भी उजागर किया था।
ख़बर के अनुसार, ऑपइंडिया ने जब रहस्यमय हेम प्रकाश शर्मा के बारे में पड़ताल की, तो पता चला कि आधिकारिक रिकॉर्ड यह बताते हैं कि जिन चार कंपनियों ने अप्रैल 2014 में AAP को दान दिया था, उनके पास दिखाने के लिए किसी लेन-देन का कोई रिकॉर्ड नहीं था। इन कंपनियों के तीन कॉमन डायरेक्टर हेम प्रकाश शर्मा, धर्मेन्द्र कुमार और मुकेश कुमार थे। रजिस्ट्रार हाउस में जो पता था उसके मुताबिक़ वहाँ एक डाकघर, एक किराने की दुकान जिसका शटर डाउन था और एक छोटा सिलाई कारखाना था। विवरण से, ऐसा पता चला था कि वो शेल कंपनियाँ थी।
इसके अलावा, डीएनए इन निदेशकों में से एक मुकेश कुमार को ट्रैक करने में सक्षम था, जिन्होंने इस बात से इनकार कर दिया था कि उन्होंने AAP को कभी कोई दान दिया था। उन्होंने इन कंपनियों के मालिक होने की बात स्वीकार की, जो केवल कागज पर मौजूद हैं, लेकिन AAP को दान देने से उन्होंने साफ़ इनकार कर दिया। डीएनए के अनुसार, जब उन्होंने आधिकारिक रिकॉर्ड में वर्णित हेम प्रकाश शर्मा के पते का दौरा किया, तो उन्हें वहाँ दो मंज़िला घर मिला। उसमें दीपिका शर्मा नाम की एक महिला अपने परिवार के साथ 60 के दशक से रह रही थी। उस महिला ने हेम प्रकाश शर्मा के बारे में कुछ भी पता होने से इनकार कर दिया।
अब सवाल यह उठता है कि फिर ये रहस्यमय पुरुष आख़िर है कौन? क्या वो काल्पनिक हैं? अगर हाँ, तो इन कार्यों का वित्तपोषण कौन कर रहा है? आख़िर अरविंद केजरीवाल, हमसे ऐसा क्या छिपा रहे हैं?
जब आम आदमी पार्टी भारतीय राजनीतिक परिदृश्य में आई, तो यह भारत में राजनीतिक दलों के काम करने के तरीके को बदलने के वादे के साथ मैदान पर आई। इसने अपने कार्यों में पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता का वादा किया, और अधिकांश लोगों ने उनके इस वादे पर भरोसा भी किया। लेकिन इस पार्टी ने जो एक अभिनव का काम किया, वह यह था कि उसने अपनी वेबसाइट पर मिलने वाले दान की एक सूची प्रकाशित की, जिससे उसकी वित्तीय गतिविधियों की पारदर्शिता सबके सामने रहे।
वर्ष 2016 में, पार्टी ने अपनी वेबसाइट से इस दान सूची को हटा लिया। उस समय, सूची वाला वेबपेज अभी ‘under construction’ है और ‘New Version coming soon..’ जैसा मैसेज दिख रहा था। लेकिन वो New Version… कभी नहीं आया।

दान सूची को हटाने के लिए योगेंद्र यादव और अन्ना हजारे सहित कई लोगों से बातचीत की गई थी। पार्टी के पूर्व सदस्य यादव ने आरोप लगाया था कि पार्टी नकद चंदा इकट्ठा कर रही थी जो कि दर्ज नहीं था।
इसके बाद पार्टी ने अपनी वेबसाइट पर अपने दान पृष्ठ को फिर से जारी किया, लेकिन उसमें एक बदलाव भी शामिल था। उन्होंने पृष्ठ के लिए वेबपेज का पता बदल दिया। पहले पेज का नाम donate.aamaadmiparty.org था, लेकिन बाद में उसे aamaadmiparty.org से बदल दिया। 
पिछले साल नवंबर में, दिल्ली में ज़हरीले प्रदूषण की चपेट में आने के बाद केजरीवाल दुबई की निजी यात्रा पर गए थे। यह भी पता चला था कि दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन भी एक सप्ताह के लिए दुबई गए थे। केजरीवाल इससे पहले भी दुबई की यात्राएँ कर चुके हैं, जिसमें बिजनेस क्लास भी शामिल है।
इस बात का भी पता चला था कि सऊदी अरब स्थित भारतीय समुदाय आम आदमी पार्टी के प्रमुख समर्थकों में से एक है। पता चला था कि फरवरी 2015 में दिल्ली राज्य विधानसभा चुनावों में भाजपा को हराने पर वहाँ उन्होंने जश्न मनाया था। इसके ठीक एक साल बाद, उन्होंने दिल्ली में AAP सरकार के एक साल पूरे होने पर भी वहाँ जश्न मनाया था।