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मोहम्मद मेहताब ने अपनी ही बीवी का बेडरूम सेक्स वीडियो किया वायरल, ससुर-साले को भी भेजा शारीरिक संबंध वाला क्लिप

                                                                             प्रतीकात्मक चित्र साभार: Bing AI
मध्य प्रदेश के खंडवा में एक व्यक्ति ने अपनी ही बीवी का अश्लील वीडियो बनाकर वायरल कर दिया। आरोपित की पहचान मोहम्मद मेहताब के रूप में हुई। बीवी का अश्लील वीडियो बनाने के लिए उसने बेडरूम में CCTV कैमरे लगवाए। इसके बाद वीडियो अपने ससुर, साले समेत महिला के अन्य परिजनों को भेज दिया। जो वीडियो उसने वायरल किया है, उसमें वो अपनी बीवी से शारीरिक संबंध बनाते हुए दिख रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला खंडवा जिले के मांधाता थाना क्षेत्र के इनपुन गाँव का है। यहाँ एक महिला ने अपने शौहर मोहम्मद मेहताब के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। महिला का आरोप है कि उसके शौहर ने उसके अश्लील वीडियो बनाकर उसके परिजनों को भेजे हैं। कहा जा रहा है कि महिला और शौहर के बीच विवाद हुआ था। उसने शौहर के खिलाफ दहेज एक्ट के तहत मुकदमा भी दर्ज कराया था।

इसके बाद वह शौहर से अलग रह रही थी। लेकिन, फिर दोनों में समझौता हो गया और वह शौहर के साथ वापस आकर रहने लगी। इस बीच मोहम्मद मेहताब ने अपने घर में सीसीटीवी भी लगा लिया। इसमें उसका बेडरूम भी शामिल था। जब बीवी उसके साथ रह रही थी तब उसने उसके अश्लील वीडियो बना लिए। लेकिन फिर दोनों के बीच विवाद हो गया। इससे बीवी अपने मायके जाकर रहने लगी। बीवी से गुस्साए मोहम्मद मेहताब ने 9 अगस्त को अश्लील वीडियो महिला के पिता और भाई सहित परिवार के अन्य लोगों को भेज दिए। 

इस मामले में खंडवा एसपी सत्येंद्र कुमार शुक्ल का कहना है कि शौहर और बीवी के बीच स्थितियाँ सामान्य थीं तब उसने वीडियो बनाए थे। इसके शौहर-बीवी के बीच विवाद हुआ। इसके चलते शौहर ने बीवी के कुछ वीडियो मायके पक्ष के लोगों को भेज दिए। यह महिला की निजता के हनन का मामला है। शिकायत के आधार पर आईटी एक्ट (IT Act) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। आगे की जाँच कर कार्रवाई की जा रही है।

दिल्ली : अमेजन का डिलीवरी बॉय उस्मान निकला प्रगति मैदान टनल लूटकांड का मास्टरमाइंड, भाई इरफ़ान भी दबोचा गया: 5 लाख रूपए, पिस्टल, बाइक, कारतूस बरामद

दिल्ली पुलिस ने प्रगति मैदान सुरंग सुरंग लूट की गुत्थी सुलझा ली है। इस लूटकांड का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस मामले में 7 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है, जिनके पास से लूट की 4.98 लाख रुपए की रकम बरामद की गई है। 2 बाइक, 1 पिस्तौल और 2 कारतूस भी बरामद हुए हैं। 5 आरोपितों को जहाँ दिल्ली पुलिस की 2 टीमों ने दबोचा, वहीं उत्तरी जिला और नई दिल्ली जिले की संयुक्त टीमों ने 2 अन्य को दबोचने में कामयाबी पाई।

दिल्ली पुलिस ने इस मामले की CCTV फुटेज की भी जाँच की थी, जिसमें पता चला था कि मोटरसाइकिल सवार 4 लोगों ने कार को रोका और चाँदनी चौक स्थित ओमिया एंटरप्राइजेज के डिलीवरी एजेंट और उसका सहयोगी से लूटपाट की घटना को अंजाम दिया। गिरफ्तार आरोपितों में उस्मान, उसका चचेरा भाई इरफ़ान, अनुज मिश्रा, कुलदीप, सुमित, प्रदीप और बाला शामिल है। दिल्ली पुलिस ने मामले के सामने आते ही अलग-अलग टीमों को काम पर लगाया।

उस्मान अली उर्फ़ कल्लू ने ही इस काण्ड की साजिश रची थी। वो बुराड़ी स्थित कौशिक एन्क्लेव का रहने वाला है। 25 वर्षीय उस्मान ही सूचना देता था कि किस गाड़ी में पैसा है और किसमें नहीं। उस्मान ने 7 साल अमेजन कंपनी में बतौर डिलीवरी बॉय काम किया है। कुरियर का काम करने के कारण उसे मालूम होता था कि इस इलाके में कैश आता-जाता है। कई IPL सट्टा हार चुके उस्मान पर बैंक का भी कर्ज था।

वहीं उसका चचेरा भाई इरफ़ान नाई की दुकान पर काम करता था। इन दोनों ने ही लूटपाट की साजिश रच कर लोनी और बागपत के कुछ लड़कों को अपने साथ जोड़ा। इन लोगों ने चोरी की बाइक की व्यवस्था की और कई दिनों तक रेकी के लिए उसका इस्तेमाल किया। इन्होंने लूटकांड से 1 दिन पहले टनल में रेकी की थी। लूट में इस्तेमाल की गई चोरी की बाइक भी जब्त कर ली गई है।

वीडियो में देखा जा सकता था कि इन्होंने सबसे पहले गाड़ी रुकवा कर उसका शीशा खुलवाया, उसके बाद फिर पिस्टल दिखा कर रुपयों से भरे बैग को लूट लिया और फरार हो गए। 3 दिन की रेकी के बाद इस घटना को अंजाम दिया गया। दिल्ली पुलिस ने कहा कि इस मामले को सुलझाने के लिए कई माध्यम से एनालिसिस और प्रयास किया गया। फ़िलहाल सभी आरोपितों से पूछताछ भी कर ली गई है।

दिल्ली से कपड़ा बेचने छत्तीसगढ़ गया हसन खान, आधी रात गाय से बलात्कार करते CCTV में हुआ कैद

               गाय से बलात्कार करने वाले हसन खान की गिरफ्तारी को लेकर प्रदर्शन (फोटो साभार: दैनिक भास्कर)
छत्तीसगढ़ के दुर्ग के भिलाई में गाय से दुष्कर्म के आरोपित की गिरफ्तारी को लेकर भाजयुमो और हिंदुवादी संगठनों ने जामुल थाने का घेराव किया। आरोपित की पहचान हसन खान के तौर पर हुई है। वह फरार है। घटना 24 मई 2023 की है। लेकिन इसका खुलासा घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद हुआ है। पुलिस आरोपित के पहचान वालों से पूछताछ कर रही है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना भिलाई के हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी की है। यहाँ फिरोज खान और उसके परिवार के लोग दो-तीन मकान लेकर पिछले तीन-चार सालों से रह रहे हैं। इन लोगों के यहाँ हसन खान नाम का एक युवक दिल्ली से कपड़े बेचने के लिए आया था। उसने 24 मई को रात के 12 बजे के बाद गाय के साथ गलत हरकत की। उसकी गंदी हरकत सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। स्थानीय लोगों ने सीसीटीवी फुटेज में हसन खान को ये सब करते हुए देखा तो उन्होंने सोमवार (29 मई 2023) को भाजपा नेताओं को इसकी जानकारी दी। इसके बाद भाजपा, भाजयुमो और बजरंग दल के लोगों ने एकजुट होकर जामुल थाने का घेराव किया और आरोपित की गिरफ्तारी की माँग की।

बजरंग दल के कार्यकर्ता दीपक यादव ने बताया, “हमें जानकारी मिली कि 24 मई को एक शख्स ने गौ माता के साथ दुष्कर्म किया। ये पूरी घटना सीसीटीवी फुटेज में रिकॉर्ड हुई है। हमने जामुल थाने में घटना के संबंध में ज्ञापन सौंपा है। इसके बाद पुलिस-प्रशासन के साथ हमारे सभी गौसेवक बंधु और हिंदू भाई एकजुट होकर आरोपित जहाँ रहता था, वहाँ पहुँचे। वहाँ पहुँचने के बाद घर के मालिक ने हमसे कहा कि हम उसे (आरोपित को) नहीं जानते हैं। बाद में उन्होंने कहा कि वह हमारे यहाँ फेरी का काम करता है।”

उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि ऐसे आरोपितों के खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई हो। इन्हें बिल्कुल भी बख्शा नहीं जाए। नहीं तो ​पूरा हिंदू समाज और बजरंग दल उग्र आंदोलन करेगा।” एक महिला ने बताया कि ये हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में तीसरी घटना है, जब गौवंश के सा​थ ऐसा किया गया। लेकिन हर बार 2 घंटे की पूछताछ के बाद आरोपित को छोड़ दिया जाता है। वहाँ मौजूद अन्य लोगों ने बताया कि ऐसा जानबूझकर किया जाता है।

पिछले साल जुलाई में छत्तीसगढ़ के रायपुर से भी ऐसा ही मामला सामने आया था। शहरे आलम नाम के एक व्यक्ति पर गाय के साथ रेप करने का आरोप लगा था। आरोपित एक कमरे में गाय के चारों पैर बाँध कर उसके साथ दुष्कर्म कर रहा था। इस दौरान लोगों ने शहरे आलम को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया था। 

बिहार : क्या होटल के बाहर सरकारी बदमाशों ने फाड़ डाले बागेश्वर बाबा के पोस्टर? क्या मुस्लिम अधिवेशन के पोस्टर फाड़ने पर फुटेज के बावजूद पुलिस खाली हाथ रहती?

पटना में फिर फाड़े गए बाबा बागेश्वर के पोस्टर 
बागेश्वर धाम के महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बिहार की राजधानी पटना के करीब नौबतपुर में हनुमंत कथा सुना रहे हैं। इस बीच एक बार फिर उनका पोस्टर फाड़ने की घटना सामने आई। धीरेंद्र शास्त्री जिस होटल में रुके हुए हैं, उसके पास में ही यह पोस्टर लगा हुआ था। इस घटना पर आयोजकों ने अज्ञात लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

दरअसल, बागेश्वर धाम सरकार के नाम से मशहूर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की पटना के पनाश होटल में रुके हुए हैं। इस होटल के पास लगे एक पोस्टर को अज्ञात लोगों द्वारा फाड़ दिया गया। हालाँकि इसके बाद पोस्टर की मरम्मत कर उसे सही कर दिया गया। लेकिन इस घटना से आयोजकों और बाबा बागेश्वर के भक्तों के बीच आक्रोश व्याप्त हो गया है। वे आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। इस मामले में आयोजकों ने पुलिस से शिकायत भी की है। हालाँकि अब तक कोई कार्रवाई सामने नहीं आई।

पोस्टर फाडे जाने से हिन्दुओं के मन में सरकार के विरुद्ध हिन्दू विरोधी छवि मुखरित होनी शुरू हो गयी है। उनका मानना है कि अगर किसी मुस्लिम अधिवेशन के पोस्टर फाड़े जाने पर cctv फुटेज होने के बाद भी उत्पादितों को नहीं पकड़ती? इसे सरकार की विफलता कही जाए या हिन्दू विरोध? 

धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के पटना पहुँचने से पहले भी कई जगहों पर उनके पोस्टर फाड़े गए थे। रात के अंधेरे में पोस्टर फाड़ने वालों की हरकत सीसीटीवी में कैद हो गई थी। हालाँकि, फुटेज हाथ लगने के बाद भी पुलिस अब तक आरोपितों तक नहीं पहुँच पाई है।

बिहार सरकार के मंत्रियों ने किया था बाबा की कथा का विरोध

धीरेंद्र शास्त्री की कथा की जानकारी सामने आने के बाद राजद नेताओं ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। नीतीश सरकार में मंत्री तेज प्रताप यादव ने एयरपोर्ट पर ही धीरेंद्र शास्त्री का घेराव करने की धमकी दी थी। यही नहीं, उन्होंने अपने धर्म निरपेक्ष सेवक संघ (DSS) के सदस्यों की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर शेयर की थी। इन तस्वीरों को भी बागेश्वर सरकार के विरोध में तैयारियों के रूप में देखा जा रहा था।
यही नहीं, बिहार के शिक्षा मंत्री चन्द्रशेखर यादव ने तो उन्हें जेल में डालने की बात कह दी थी। उन्होंने कहा था, “बाबा बागेश्वर अगर गंदे काम करने आएँगे तो बिहार इजाजत नहीं देगा, अगर नफरत फैलाने आए हो तो आडवाणी भी जेल गए थे, और लोग भी जाएँगे। बागेश्वर बाबा हो या कोई बाबा हों, उनके पास कोई तिलस्म या चमत्कार नहीं है।”
धीरेंद्र शास्त्री 13 मई 2023 से 17 मई 2023 तक 5 दिवसीय हनुमंत चरित्र सुनाएँगे। 5 दिवसीय कार्यक्रम में हर दिन शाम को 4 बजे से लेकर 7 बजे तक कथा का आयोजन होगा। 15 मई को धीरेंद्र शास्त्री दिव्य दरबार लगाएँगे। इसमें बिना टोकन और नंबर के भक्तों की अर्जी सुनी जाएगी।

केजरीवाल सरकार: CCTV पर 1100 करोड़ रूपए लेकर खर्च किया एक-चौथाई से भी कम

हर समय अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को आरोपी करार देने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की कार्यशैली का RTI के माध्यम से पर्दाफाश होता है। कोरोना हो या प्रदुषण आदि मदों के लिए मिली राशि का इन पर खर्च करने की बजाए अपने विज्ञापनों पर अधिक खर्च किया गया, और अब एक और नया खुलासा सामने आया है।  
2015 के दिल्ली विधानसभा चुनावों से पहले, आम आदमी पार्टी ये वादा कर के सत्ता में आई थी कि अगर वो सत्ता में आती है, तो दिल्ली में 15 लाख CCTV कैमरे लगाएगी। लेकिन 15 लाख CCTV कैमरा लगाने की बात कहकर सत्ता में आई अरविन्द केजरीवाल सरकार इन CCTV कैमरा के इन्स्टाइलेशन के प्रति कितनी तत्पर है, इसकी जानकारी RTI कार्यकर्ता विवेक पांडेय को मिले जवाब बता रहे हैं।

दिल्ली की अरविन्द केजरीवाल सरकार द्वारा CCTV कैमरा लगाने पर किए गए व्यय और कार्य की प्रगति के सम्बन्ध में एक RTI में खुलासा हुआ है कि अपने वादों की तुलना में केजरीवाल सरकार अभी धरातल पर आधा भी लक्ष्य पूरा कर पाने में नाकामयाब रही है। यही नहीं, CCTV कैमरा लगाने के लिए उन्हें जो फंड मिला, वो अब तक उसका इस्तेमाल कर पाने में भी असमर्थ रहे हैं।

रीवा, मध्य प्रदेश के RTI कार्यकर्ता विवेक पांडेय ने दिल्ली सरकार से सूचना के अधिकार (RTI) के तहत CCTV कैमरा के सम्बन्ध में कुछ सवाल किए थे। नवंबर 05, 2020 को दायर की गई इस RTI में विवेक ने कुल 6 सवालों की जानकारी माँगी।

2015 से लेकर 2020 तक CCTV पर व्यय

इनमें सबसे पहले सवाल में वर्ष 2015 से लेकर 2020 तक दिल्ली सरकार द्वारा पूरी दिल्ली में CCTV कैमरा लगाने के लिए जारी किए गए धन की जानकारी माँगी गई थी। इसके जवाब में बताया गया है कि 571.40 करोड़ रूपए का फंड सम्बंधित विभाग द्वारा CCTV लगाने के पहले चरण के लिए प्राप्त कर लिए गए, जो कि 5 साल तक बिजली कैमरा लगाने और इसमें खर्च होने वाली बिजली के भुगतान में इस्तेमाल किया जाना है। इसके अलावा, 613.53 करोड़ रूपए का फंड फेज-2 के लिए सम्बंधित विभाग द्वारा जारी किया गया है।

RTI कार्यकर्ता ने अपने दूसरे सवाल में 2015 से लेकर 2020 तक CCTV कैमरा लगाने में खर्च किए गए धन की जानकारी माँगी है। इसके जवाब में विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, CCTV कैमरा लगाने में अब तक (जनवरी 28, 2021) मात्र 264.37 करोड़ ही खर्च हो सके हैं।

RTI कार्यकर्ता विवेक पांडेय के तीसरे प्रश्न के जवाब में बताया गया है कि 2015 से 2020 तक लगभग 1 लाख 32 हजार CCTV कैमरा ही लगाए जा सके हैं। जबकि अरविन्द केजरीवाल सरकार ने 2015 में 15 लाख CCTV कैमरा लगाने की बात को अपना चुनावी अजेंडा बनाया था।

सिर्फ 7000 वाइ-फाइ हॉटस्पॉट

इसी RTI से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में केजरीवाल सरकार वर्ष 2015 से लेकर 2020 के बीच लगाए गए मुफ्त वाइ-फ़ाइ हॉटस्पॉट की संख्या 7000 है। और इसमें दिल्ली सरकार ने 99.50 करोड़ रूपए खर्च किए हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले, दिसंबर, 2019 में फिर घोषणा की थी कि पहले फेज में दिल्ली में कुल 11 हजार वाइ-फाइ हॉट स्पॉट लगाए जाएँगे।

                                               दिल्ली सरकार की ओर से RTI में दिए गए जवाब
सार्वजनिक स्थानों पर मुफ्त वाइ-फाइ 2015 में आम आदमी पार्टी के चुनावी वादों में से एक था। पार्टी 70 में से 67 सीटों के साथ सत्ता में आई थी, लेकिन इन वादों की वास्तविकता RTI में मिले जवाब बयाँ कर रहे हैं। RTI में केजरीवाल सरकार ने बताया है कि 2015 से लेकर 2020 तक इन वाइ-फ़ाइ के इन्स्टाइलेशन में वो अब तक 99.50 करोड़ रूपए में से मात्र 28.70 करोड़ रूपए ही खर्च कर पाए हैं।

हालाँकि, पिछले वर्ष सम्पन्न हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले, अरविंद केजरीवाल सीसीटीवी कैमरों और फ्री वाइ-फाइ में देरी के लिए उपराज्‍यपाल और केंद्र सरकार को दोषी ठहराते रहे। केजरीवाल से कई बार यह सवाल पूछा गया तो उन्‍होंने कहा था कि उपराज्‍यपाल ने सीसीटीवी और मुफ्त वाइ-फाइ की फाइलों को अपनी स्‍वीकृति देने में काफी समय लगाया। जबकि RTI में यह स्पष्ट है कि दिल्ली सरकार के पार इसके लिए भरपूर फंड मौजूद है और वो इसे खर्च तक नहीं कर पा रही।

इससे पहले एक अन्य RTI में यह भी खुलासा हुआ था कि कोरोना वायरस से लड़ने के नाम पर दिल्ली सरकार के एलजी/सीएम रिलीफ फंड में 3469.99 लाख (34 करोड़ 69 लाख 99 हजार) रुपए आए। इसमें से दिल्ली सरकार ने मात्र 1702.44 लाख (17 करोड़ 2 लाख 44 हजार) रुपए ही खर्च किए। आश्चर्यजनक तौर पर कोरोना संक्रमण को रोकने पर इसमें से एक भी पैसा खर्च नहीं किया गया।

RTI एक्टिविस्ट विवेक द्वारा ही दायर की गई एक और RTI से खुलासा हुआ था कि दिल्ली सरकार ने 2012-13 से अब तक विज्ञापनों पर 659.02 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है। इसका 77% वर्ष 2015 से केजरीवाल के कार्यकाल के दौरान खर्च किया गया।

महिलाओं के सोने के स्थान पर केजरीवाल ने सीसीटीवी कैमरे लगावाए




दिल्ली में आप सरकार के बारे में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। दिल्ली के विवादास्पद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर आरोप लगा है कि उन्होंने महिलाओं के सोने के स्थान पर सीसीटीवी कैमरे लगावाए है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने इसे गंभीर मामला मानते हुए मंगलवार, 15 दिसंबर को दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल से जवाब मांगा है।

इसके पहले सोमवार को दिल्ली बीजेपी महिला मोर्चा की अध्यक्ष योगिता सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा से मुलाकात कर केजरीवाल के खिलाफ निजता के अधिकार का उल्लंघन करने के आरोप में कार्रवाई करने का आग्रह किया। योगिता सिंह ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने निगम की महिला नेताओं पर नजर बनाए रखने लिए जिस हथकंडे का इस्तेमाल किया, वह सरासर अशोभनीय और अनैतिक है। अगर मुख्यमंत्री में थोड़ी-सी भी नैतिकता बाकी है, तो उन्हें धरने पर बैठी निगम की महिला नेताओं से माफी मांगनी चाहिए।

दिल्ली में नगर निगम के नेता मुख्यमंत्री आवास के बाहर निगम के नेता फंड जारी करने की मांग को लेकर पिछले एक हफ्ते से प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शन को खत्म कराने के लिए केजरीवाल महिला पार्षदों के बैठने और सोने के स्थान पर कैमरे लगवा दिए हैं, जिससे धरने पर बैठी महिला नेता असहज महसूस कर रही हैं।

AAP के चायनीज CCTV रखते हैं दिल्ली पर नजर

AAP चायनीज CCTV
चीन रख रहा दिल्ली की गलियों पर नज़र 
AAP सरकार द्वारा लगाए गए लगभग 1.4 लाख चीनी CCTV कैमरों पर राजधानी में विवाद छिड़ गया है। यह विवाद हाल ही में गलवान घाटी में जारी गतिरोध के बीच सामने आया है।
इस गतिरोध के बाद केंद्र सरकार ने चीनी परियोजनाओं और संसाधनों के प्रयोग को भारतीय परियोजनाओं से दूर रखने के लिए कई अहम फैसले लिए हैं। सोमवार (जून 29, 2020) को, भारत ने 59, ज्यादातर चीनी, मोबाइल एप्स पर प्रतिबंध लगा दिया, जिसमें टिकटॉक और वी-चैट भी शामिल है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए गए हैं, जो चीनी कंपनी हिकविजन (Hikvision) द्वारा बनाए गए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस कम्पनी के मोबाइल एप्लिकेशन को हजारों लोगों ने अपने फोन पर डाउनलोड किया है और इससे उनकी निजता और सुरक्षा को बड़ा खतरा है। बीजेपी ने इस मुद्दे पर AAP सरकार पर निशाना साधा और तत्काल इसे सुधारने की बात की है।
अमेरिका में ट्रम्प प्रशासन ने भी हाल ही में कहा है कि चीनी कंपनियों, जिसमें टेलीकॉम उपकरण दिग्गज हुवाई टेक्नोलॉजिज और CCTV कंपनी हिकविजन शामिल हैं, चीनी सेना के नियंत्रण और स्वामित्व में है। वॉशिंगटन ने हुवाई और हिकविजन को राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से पिछले साल ही ब्लैकलिस्ट में रखा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ अनुज अग्रवाल ने कहा कि अकेले सीसीटीवी कैमरों से कोई खतरा नहीं है, लेकिन जब लोग अपने मोबाइल फोन पर लाइव फीड देखने के लिए हिकविजन के iVMS-4500 ऐप को डाउनलोड करते हैं, तो यह एक खतरा बन जाता है।
अग्रवाल ने कहा – “ऐप को किसी भी कंपनी के अधिकारी या सरकार या चीन में सेना द्वारा आसानी से एक्सेस किया जा सकता है। वर्तमान में चल रहे तनाव की स्थिति में, वे यह भी देख सकते हैं कि दिल्ली की सड़कों पर क्या हो रहा है। इन कैमरों में ऐसे सेंध को रोकने के लिए कोई सुरक्षा फीचर नहीं हैं। वे काफी कमजोर हैं।”
विशेषज्ञों का कहना है कि हिकविजन के सीसीटीवी कैमरे विभिन्न सरकारी और सरकारी परिसरों में लगाए गए हैं। ऐसे में एक ओर जहाँ लोग यह देखकर खुश हैं कि वे अपने मोबाइल फोन पर ही लाइव फ़ीड प्राप्त कर रहे हैं तो दूसरी ओर वास्तविकता यह है कि अब चिंता का एक कारण यह लाइव फ़ीड ही हैं, जो कि तकनीकी खामियों की वजह से चीन तक पहुँच जाता है।
दरअसल चुनावों से पहले दिल्ली सरकार ने दिल्ली में सुरक्षा को लेकर शुरुआती चरण में 1 लाख 40 हजार सीसीटीवी कैमरे दिल्ली में लगवाने का ठेका दिया था। दूसरे चरण में भी 1 लाख 40 हजार कैमरे लगाने का ठेका दिया गया था।
दिल्ली सरकार ने बीईएल कंपनी को 320 करोड़ रुपये में दिल्ली में 1 लाख 40 हजार सीसीटीवी कैमरे लगाने का ठेका दिया था, जिसमें कैमरे की मेंटेनेंस भी शामिल थी।
पिछले साल जुलाई में, AAP ने लोक निर्माण विभाग (PWD) को निर्देश दिया कि वह अपना चुनावी वादा निभाने के लिए दिल्ली और आसपास के आवासीय और व्यावसायिक परिसरों में स्थापना के लिए 1.5 लाख सीसीटीवी कैमरे शीघ्रता से खरीदें। यह 1.4 लाख ‘Eyes in the sky’ के अलावा था जिसे दिल्ली सरकार ने राजधानी में स्थापित किया था।
571 करोड़ रुपये की इस परियोजना का लक्ष्य दिल्ली के 70 विधानसभा क्षेत्रों में से प्रत्येक में कम से कम 4,000 कैमरे हैं। इसके अतिरिक्त, दिल्ली के 1,000 सरकारी स्कूलों में ऐसे कैमरे लगाने पर 400 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इससे पहले, दिल्ली पुलिस द्वारा निगरानी किए गए 4,388 सीसीटीवी कैमरे पुलिस थानों, कोर्ट परिसर, बाजारों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में लगाए गए थे।
हिकविजन (Hikvision) ने दिल्ली सरकार से 2018 में 1.5 लाख सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए एक टेंडर जीता। इसे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) द्वारा एक वेंडर (विक्रेता) के रूप में भी लिस्टेड किया गया है, जो भारत सरकार के लिए अत्यधिक संवेदनशील और वर्गीकृत रक्षा परियोजनाओं पर काम करता है।

जामिया मिलिया प्रशासन CCTV फुटेज क्यों नहीं दे रहा?

दिल्ली पुलिस, जामिया मिल्लिया इस्लामिया
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
नागरिकता कानून का विरुद्ध करने वाले जामिया मिलिया के छात्रों द्वारा पुलिस पर पत्थराओ करने पर कार्यवाही करने पर, सारे तुष्टिकरण पुजारी एकजुट होकर मजलूम, असहाय, निर्दोष और गरीब छात्रों पर पुलिस द्वारा कैंपस में घुसकर की जाने वाली कार्यवाही पर दिल्ली से लेकर पूरे भारत में उपद्रव मचा दिया। लेकिन जब पुलिस दूध का दूध और पानी का पानी करने कैंपस में लगे CCTV के फुटेज लेने गयी, क्यों नहीं दिए? क्या उनसे छेड़छाड़ कर पुलिस को दिए जाएंगे? क्या कारण है फुटेज लेने से पुलिस को रोका गया? जो इस बात को प्रमाणित करता है कि कैंपस के अन्दर से पुलिस पर पत्थराओ किया गया था, और मुस्लिम तुष्टिकरण पुजारी अपने वोटबैंक की खातिर देश की कानून व्यवस्था को धूमिल करने में व्यस्त रहे। जामिया प्रशासन और वोट के भूखे नेता अन्य जगहों पर दंगाइयों पर होती सख्त कार्यवाही से इतने अधिक भयभीत हो गए हैं कि जामिया के दोषी दंगाइयों को बचाने किसी भी सीमा तक जा सकते हैं। 
अब सीसीटीवी फुटेज को लेकर जामिया मिलिया इस्लामिया प्रशासन और दिल्ली पुलिस के बीच ठन गई है। जहाँ एक तरफ़ यूनिवर्सिटी ने आरोप लगाया था कि दिल्ली पुलिस ने कैम्पस में बिना अनुमति घुस कर तोड़फोड़ मचाई, वहीं पुलिस ने कहा था कि नियंत्रण से बाहर होने पर पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। सीएए विरोध प्रदर्शन के नाम पर हिंसा, आगजनी और दंगे करने वाले जामिया के छात्रों ने पुलिस पर पत्थरबाजी भी की थी। जाँच में सीसीटीवी फुटेज का अहम रोल होगा, लेकिन अभी तक दिल्ली पुलिस को सीसीटीवी फुटेज नहीं मिला है। ये घटना दिसंबर 15 को हुई थी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज लेने के लिए जामिया नगर के एसएचओ को यूनिवर्सिटी प्रशासन के पास भेजा गया था। जब पुलिस वहाँ पर पहुँचीं, तब भारी संख्या में जामिया के छात्र जमा हो गए और उन्होंने पुलिस का विरोध किया। छात्रों ने सीसीटीवी फुटेज देने से इनकार कर दिया। हालाँकि, अभी तक ये नहीं पता चल सका है कि छात्र सीसीटीवी फुटेज पुलिस के पास क्यों नहीं पहुँचने देना चाहते हैं? सवाल ये है कि क्या वो कुछ छिपा रहे हैं? मजबूरन एसएचओ को खाली हाथ वापस लौटना पड़ा।
हालाँकि, जामिया मिलिया इस्लामिया प्रशासन ने पुलिस के साथ बैठक के दौरान लिखित में वादा किया था कि सीसीटीवी रिकॉर्डिंग्स को पुलिस को सौंपा जाएगा, ताकि घटना की सही तरीके से जाँच हो सके। अब यूनिवर्सिटी प्रशासन अपने वादे से पलटता दिख रहा है। अगर उन रिकॉर्डिंग्स के साथ कुछ भी होता है तो पुलिस इसे ‘सबूतों के साथ छेड़छाड़’ मान कर आगे की कार्रवाई करेगी, ऐसा वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है। जामिया के चीफ प्रॉक्टर वसीम अहमद ने यूनिवर्सिटी का पक्ष रखते हुए कहा:
“15 दिसंबर को दिल्ली पुलिस ने जामिया के कई छात्रों को हिरासत में लिया था। उसी समय पुलिस ने हमसे उस दस्तावेज पर हस्ताक्षर करा लिए थे, जिसमें कहा गया था कि हमें जाँच के लिए सीसीटीवी फुटेज पुलिस को सौंपनी पड़ेगी। उन्होंने फुटेज की माँग की है और हम इस पर अभी सोच-विचार कर रहे हैं। एक पुलिस अधिकारी इसके लिए आया था लेकिन जैसे ही छात्र आए, वो यहाँ से चला गया।”

जामिया मिलिया इस्लामिया ने मानव संसाधन मंत्रालय से माँग की है कि इस पूरे मामले की न्यायिक जाँच कराई जाए। इसीलिए, वो सीसीटीवी फुटेज पुलिस को नहीं सौंपना चाह रहे। जामिया प्रशासन ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से भी इस मामले की शिकायत की है।

15 अगस्त : मदरसे में कपड़े बदलते लड़कियों को CCTV में देख रहा था टीचर सुलेमान

मदरसा, क्राइम
                                                                                                                                                            प्रतीकात्मक चित्र 
खुदा-न-खास्ता यदि किसी हिन्दू का किसी मुस्लिम से कोई विवाद हो जाए,-- ताजा मिसाल दिल्ली के लाल कुआँ की है, वैसे तो मामला शान्त हो गया, परन्तु पीछे एक बहुत बड़ी साज़िश का पर्दाफाश कर गया, कि एक फोन पर हज़ारों मुसलमानों को जमा कर अपनी बदमाशी से हिन्दुओं पर दबाव बनाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं-- आम मुसलमान से लेकर समस्त छद्दम धर्म-निरपेक्ष चीख-पुकार करने लगते हैं और उसको हमारा मीडिया अपनी TRP बढ़ाने के लालच में खूब प्रसारित करती है। लेकिन जब वही घटना मुस्लिम समाज में होती है, सब मुंह में दही जमा कर बैठ जाते हैं, छद्दम धर्म-निरपेक्षों की तरह मीडिया भी मुस्लिम समाज को अपना वोट बैंक समझ बैठता है। क्या मुसलमान इंसान नहीं? क्या उनका कोई अस्तित्व नहीं?
मदरसों में होती अमानवीय घटनाओं पर क्यों नहीं आवाज़ उठाई जाती? क्या मदरसों में जाने वाली बच्चियों अथवा बच्चों का कोई सम्मान नहीं? या फिर यह समझा जाए कि मदरसे होते ही इसी काम के लिए हैं, यदि नहीं फिर क्या कारण है कि मदरसों में होने वाली अमानवीय घटनाओं को प्रकाश में लाकर दोषी को दण्डित करवाने के लिए प्रदर्शन होते? 
मीडिया का भी दोगलापन देखो, इस तरह की घटना किसी हिन्दू संस्थान में होती, कितना उछाला जाता, लेकिन मदरसों में घटने वाली उन्ही समस्याओं पर ख़ामोशी छायी रहती है।   
मदरसों के अंदर बड़े पैमाने पर बाल शोषण के कई मामले सामने आए हैं। ऐसी ही एक शर्मसार कर देने वाली घटना उत्तर प्रदेश के कुशीनगर की है। यहाँ मदरसे के एक शिक्षक ने छात्राओं को कपड़े बदलते हुए देखने के लिए मदरसे में लगे CCTV कैमरों का इस्तेमाल किया। 
ख़बर के अनुसार, बरवन छतर दास गाँव के मुस्तफा दारुल उलूम मदरसा में हुए इस घृर्णित कृत्य की रिपोर्ट हाटा थाना क्षेत्र के अंतर्गत की गई है। दरअसल, मदरसे में बीते 15 अगस्त को सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। मदरसे में पढ़ने वाली छात्राओं ने इन कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। सुरजीत सिंह, पवन सिंह, सुबोध गौड़, किशन सिंह आदि द्वारा पुलिस को दी गई तहरीर के मुताबिक़, सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेने वाली छात्राएँ मदरसे के जिस कमरे में कपड़े बदल रही थीं, उस कमरे का सीसीटीवी कैमरा अध्यापक सुलेमान अंसारी ने चालू कर दिया।
ग्रामीणों के अनुसार, सुलेमान अंसारी काफ़ी देर तक कैमरा चालू करके छात्राओं को कपड़े बदलते देखता रहा। उसकी इस हरक़त पर जब एक बच्चे की नज़र पड़ी तो उसने इसकी सूचना छात्राओं को दे दी। इसके वाद वो सभी छात्राएँ सुलेमान अंसारी के पास पहुँची और विरोध जताया। इस पर अंसारी ने उन्हें डराया-धमकाया कि अगर उन्होंने इस बात पर विरोध प्रकट किया तो वो मदरसे से उनका नाम काट देगा और उन्हें मदरसे से बाहर निकाल देगा। 
इस बात की ख़बर जब छात्राओं के परिजनों और आसपास के ग्रामीणों को लगी तो उन्होंने सुलेमान अंसारी के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया और उन्होंने उससे अपने किए की माफ़ी माँगने को कहा। बजाए अपनी ग़लती मानने के सुलेमान अंसारी झगड़े पर उतारू हो गया। इसके बाद ग्रामीणों ने उसके ख़िलाफ़ मामला दर्ज करवाया। इस मामले में स्थानीय पुलिस ने सुलेमान अंसारी और मदरसे के प्रबंधन के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा-354 ग के तहत मुक़दमा दर्ज किया है।
मदरसे में बच्चेरेप के अड्डे बनते मदरसे; मुँह खोलने पर 19 वर्षीय नुसरत को जलाकर मार डाला  
इसी साल जून में केरल के कोट्टायम जिले के एक मदरसे में पढ़ाने वाला 63 साल का मौलाना गिरफ्तार किया गया। 19 से ज्यादा बच्चों के यौन शोषण के आरोप में। गिरफ्तारी के बाद उसने कबूला कि वह 25 साल की उम्र से ही बच्चों को हवस का शिकार बना रहा था। कल्पना कीजिए बीते 38 साल में कितने बच्चे उस ​दरिंदे का शिकार बने होंगे। यदि 19 बच्चों के परिजनों ने हिम्मत न दिखाई होती तो उसका यह चेहरा कभी दुनिया के सामने आ ही नहीं पाता। इतना ही नहीं इस मौलाना की माने तो वह ऐसा इसलिए कर रहा था, क्योंकि बचपन में उसका यौन शोषण भी उसे पढ़ाने वाले मौलाना ने किया था।
अब दक्षिण से उत्तर भारत आइए। उत्तर प्रदेश के मेरठ के खेरी कलाँ गाँव से मदरसे का हाफिज 12 साल की नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार किया जाता है। इसी प्रदेश के कानपुर के एक मदरसे में 16 साल की लड़की के साथ मौलवी रेप करता है। यूपी के ही हापुड़ में भी एक मदरसे में नाबालिग बच्ची से रेप होता है। मौलाना तब पकड़ा जाता है जब बच्ची के गर्भवती होने की बात सामने आती है।
दुष्कर्म के मामलों में मौलवियों की गिरफ्तारी की देश की हालिया चुनिंदा घटनाओं की याद केवल इसलिए दिलाई, क्योंकि पड़ोसी बांग्लादेश मदरसों के यौन शोषण के अड्डे में बदलने से उबल रहा है। वो तो बांग्लादेश के मदरसों से पढ़े कुछ छात्रों की हिम्मत की दाद दीजिए कि वे अपनी आपबीती सोशल मीडिया के जरिए दुनिया को सुना रहे हैं और मदरसों का छिपा चेहरा सामने आ रहा है। वरना भारत हो या बांग्लादेश या फिर पाकिस्तान हर मुल्क के मदरसों की हकीकत करीब-करीब एक जैसी ही है। बच्चों के यौन शोषण का अड्डा बनने की। और मुल्लों का खौफ ऐसा है कि कुछ ही मामले सामने आ पाते हैं। ज्यादातर दबा दिए जाते हैं।
ऐसा हम नहीं कह रहे। पाकिस्तान के मानवाधिकार मामलों के वकील सैफ उल मुल्क की बातों पर गौर फरमाइए। उनके मुताबिक- मुल्लों से आज हर कोई डरता है। उन पर यौन दुर्व्यवहार का आरोप लगाने का मतलब है कि न्याय दुर्लभ बन जाएगा। पुलिस भी पीड़ितों की नहीं मुल्लाओं की ही मदद करती है।
खौफ कैसा है? दबाव कितना भयानक होता है? जानना है तो बांग्लादेश ही चलते हैं, क्योंकि अभी वहीं के मदरसे सुर्खियाँ बटोर रहे हैं। ढाका मेडिकल कॉलेज में 6 अप्रैल को 80 फीसदी जल चुकी नुसरत जहाँ राफी लाई जाती है। 10 अप्रैल को वह मर जाती है। 19 साल की राफी ने 27 मार्च को पुलिस से शिकायत की थी कि मदरसे के प्रिंसिपल ने ऑफिस में बुला उसे गलत तरीके से छुआ। उसने मदरसे के प्रिंसिपल पर बार-बार यौन शोषण का आरोप लगाया। मदरसे के अन्य शिक्षकों ने भी राफी को ही मुँह बंद रखने को कहा। उस पर शिकायत वापस लेने का दबाव डाला जाता है। 6 अप्रैल की रात नुसरत को मदरसे की छत पर बुलाया जाता है। शिकायत वापस लेने को कहा जाता है। वह इनकार कर देती है। हमलावर मिट्टी का तेल उड़ेल उसे आग लगा देते हैं।
नुसरत की हत्या के तीन आरोपी उसके साथ पढ़ते थे। पुलिस के मुताबिक मौलवी ने कहा था कि शिकायत वापस लेने का दबाव डालो, नहीं माने तो मार डालो। योजना तो उसकी हत्या को आत्महत्या की तरह दिखाने की थी। लेकिन ऐसा हो नहीं पाया, क्योंकि नुसरत के हाथ-पैर को जिस स्कार्फ से बाँधा गया था वह जल गया और वह सीढ़ियों से नीचे उतरने में कामयाब रही।
नुसरत मर गई। पर जाते-जाते बांग्लादेश के लोगों की गैरत को जगा गई। सड़कों पर प्रदर्शन का सिलसिला शुरू हो गया। प्रधानमंत्री शेख हसीना को कार्रवाई का वादा करना पड़ा। नुसरत की मौत से जली मशाल ने कुछ पूर्व छात्रों को अपनी आपबीती लेकर दुनिया के सामने आने को प्रेरित किया, जिसके कारण मदरसों में होने वाली यौन ज्यादतियों की आज चर्चा हो रही है।
यौन शोषण की ​हिला देने वाली जो दास्तानें सोशल मीडिया के जरिए सामने आ रही हैं, सबमें एक चीज कॉमन है। दरिंदगी तब हुई जब पीड़ित या पीड़िता मदरसे में पढ़ रहे थे। ज्यादातर मामले में हवस के भेड़िए वहाँ पढ़ाने वाले मौलवी ही हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक बांग्लादेश में केवल जुलाई में कम से कम पाँच मौलवी लड़के और लड़कियों के यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार किए गए हैं। रिपोर्ट यह भी बताते हैं कि ज्यादातर पीड़ित गरीब हैं और उनकी इसी मजबूरी का मौलवियों ने फायदा उठाया। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की मानें तो मदरसों में यौन शोषण की घटनाएँ आम हैं और हालिया शिकायतें बस नमूने भर।
चाइल्ड राइट ग्रुप ‘बांग्लादेश शिशु अधिकार फोरम’ के अब्दुस शाहिद के अनुसार यह सिलसिला काफी पुराना है। उनके मुताबिक पीड़ितों के परिजन बदनामी और धार्मिक कारणों से ज्यादातर मामलों में चुप्पी साध लेते हैं।
राजधानी ढाका के तीन मदरसों में पढ़ चुके 23 साल के होजेफा अल ममदूह ने ऐसी घटनाओं को लेकर जुलाई में फेसबुक पर कई पोस्ट लिखे हैं। इनमें विस्तार से आपबीती और अन्य छात्रों के साथ हुई ज्यादतियों को बयाँ किया है। ममदूह फिलहाल ढाका यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म की पढ़ाई कर रहे हैं। उनकी मानें तो मदरसों में ऐसी घटनाएँ इतनी आम हैं कि वहाँ पढ़ने वाला हर बच्चा इससे वाकिफ होता है। उनका कहना है कि कई मौलवी बच्चों के साथ संभोग को अविवाहित महिला के साथ संबंध बनाने से कम नापाक मानते हैं।
उनके पोस्ट ने देश में नई बहस छेड़ दी है। इसके लिए उन्हें धमकी भी मिल रही। कोई यहूदियों और ईसाइयों का एजेंट बता रहा तो कोई मदरसों की पाक छवि को धूमिल करने का गुनहगार। एक ने तो सोशल मीडिया में उन्हें 2015 में कट्टरपंथियों द्वारा की गई उदारवादी बांग्लादेशी ब्लॉगर और लेखक अविजीत रॉय की हत्या की याद दिलाते हुए धमकी भी दे डाली।
इसके बावजूद उनके पोस्ट गवाह हैं कि कैसे बांग्लादेश में मदरसों में होने वाले यौन शोषण को लेकर लोगों की चुप्पी टूट रही है। यही कारण है कि 12 साल के एक यतीम के साथ कुकर्म कर उसका गला रेतने के जुर्म में कुछ सीनियर स्टूडेंट गिरफ्तार किए गए हैं, तो ढाका के दो मौलवी 12 से 19 साल के एक दर्जन लड़कों के यौन शोषण के आरोप में।
ममदूह की देखादेखी कई और भी अपनी आपबीती सुनाने सामने आ रहे हैं। एक फेमिनिस्ट वेबसाइट पर 25 साल के मोस्ताकिमबिल्लाह मासूम ने पोस्ट कर बताया है कि उसके साथ पहली बार रेप तब किया गया जब वह महज सात साल का था। बाद में एक मौलवी ने बेहोश कर उसके साथ कुकर्म किया। इस घटना से वह आज भी खौफ खाता है। उसने बताया- मैं मदरसे के दर्जनों छात्रों को जानता हूँ जो पीड़ित हैं या अपने सहपाठियों के साथ हुए रेप के चश्मदीद हैं।
हालाँकि एक मदरसा जहाँ से ममदूह पढ़ चुका है के प्रिंसिपल महफुजुल हक का कहना है कि देश में 20 हजार मदरसे हैं। ऐसी एकाध घटनाओं से मदरसों को लेकर छवि नहीं बनाई जा सकती। उनके अनुसार जो लोग मदरसे में पढ़ना पसंद नहीं करते इस तरह की घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं।
पारंपरिक मुस्लिम बहुल देश में जहाँ ज्यादातर कट्टरपंथी ही हावी रहे हों, मदरसों में यौन ज्यादतियों के खिलाफ आवाजें उठना सुखद है। लेकिन, इसका भी ख्याल रखा जाना चाहिए कि ऐसी आवाजें आखिर में क्षणिक आवेग न साबित हों। पाकिस्तान में भी 2017 में मदरसों के खिलाफ इसी तरह आवाजें उठी थी। तब कौसर परवीन का 9 साल का बेटा खून में लथपथ होकर मदरसे से घर लौटा था।
रिपोर्टों के मुताबिक अप्रैल की एक रात मदरसे में रहने वाले कौसर के बेटे की जब नींद खुली तो मौलवी उसे बगल में लेटा मिला। मौलवी को देख बच्चा डर गया। मौलवी ने फिर उसके साथ कुकर्म किया। 9 साल का वह बच्चा चिल्ला न पाए इसलिए मौलवी ने उसके मुॅंह में उसकी ही कमीज ठूंस दी थी। इस मामले में भी आखिर वही हुआ जो अमूमन ऐसे ज्यादातर मामलों में होता है। मौलवी बच निकला। इस घटना के बाद भी पाकिस्तान के मदरसों में बच्चों का यौन शोषण बदस्तूर जारी है।
यह केवल पाकिस्तान की ही हकीकत नहीं है। कहीं धर्म तो कहीं तुष्टिकरण के नाम पर ऐसे ही आरोपी मौलवियों के कुकर्म धुलते रहते हैं।(एजेंसीज इनपुट्स सहित)