Showing posts with label priyanka gandhi. Show all posts
Showing posts with label priyanka gandhi. Show all posts

कांग्रेस पर बृजभूषण के 11 आरोप : मेरे बाबा को मार डाला, घर गिरा दिया, एनकाउंटर की कोशिश

जब से सोनिया गाँधी को परिवार भक्तों ने पार्टी अध्यक्ष बनाया कांग्रेस का ग्राफ निरंतर नीचे गिरता जा रहा है। और इस गिरते ग्राफ को आगे बढ़ा है राहुल गाँधी और प्रियंका वाड्रा(गाँधी), जिसे मंद बुद्धि परिवार भक्त नहीं समझ रहा है। जिस परिवार भक्त इस कटु सच्चाई को समझ परिवार से दूरी बना ले लेंगे, कांग्रेस सत्ता तो नहीं, हाँ एक मजबूत विपक्ष जरूर बनकर उभरेगी, अन्यथा वह दिन भी अब अधिक दूर नहीं, जब कांग्रेस से कहीं अधिक वर्चस्व क्षेत्रीय पार्टियों का होगा और कांग्रेस को उनसे गठबंधन कर अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए चुनाव लड़ना पड़ेगा। 

बृजभूषण पर महिला पहलवान के जिस यौन शोषण को मुद्दा बनाकर उस महिला पहलवान के कंधे बन्दूक चलाई गयी, अब प्राप्त जानकारी के अनुसार कांग्रेस को ही नुकसान देने जा रही है। अब देखना यह है कि बृजभूषण कांग्रेस पर लगाए आरोपों को किस तरह भुनाते है? और जंतर मंतर पर हुए जमावड़े का हिस्सा बने कितने लोग बृजभूषण के पीछे खड़े होकर कांग्रेस पर ही पलटवार करते हैं। कांग्रेस को नहीं मालूम कि यौन शोषण के पुराने मुद्दे को उछाल कर समाज में उस महिला को बेइज्जत किया है। देग में बहुत चावल होते है, लेकिन एक ही चावल को लेकर देखा जाता है कि पका है या नहीं। यानि जब India TV पर परिचर्चा के दौरान एंकर सौरव शर्मा ऐसे प्रश्न करते हैं जैसे वह कोई एंकर न होकर कोई वकील या जज हैं। बेशर्मों की तरह सौरव ऐसे प्रश्न कर रहे थे जो कोर्ट की चार दीवारी में किए जाते हैं, ऐसे खुले में नहीं। क्या उस पीड़ित महिला का कोई सम्मान नहीं? 
कैसरगंज से भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी को खुली चुनौती दी है। बता दें कि दिल्ली पुलिस द्वारा न्यायालय में दायर आरोप-पत्र में WFI अध्यक्ष द्वारा महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न का मामला चलाए जाने की बात कही गई है, जिसके बाद उन्हें समन किया गया। इसके बाद प्रियंका गाँधी ने ट्वीट कर इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर चुप रहने का आरोप लगाया था। अब भाजपा सांसद ने एक नोट के जरिए निशाना साधा है।

उन्होंने प्रियंका गाँधी के ट्वीट को देश को गुमराह करने का षड्यंत्र बताते हुए कहा कि पुलिस की जाँच रिपोर्ट किसी को अपराधी नहीं बनाता, ये अधिकार न्यायालय का है और वहाँ अपनी बात रखने का अधिकार संविधान देता है। उन्होंने कहा कि प्रियंका गाँधी और कांग्रेस पार्टी को न्यायपालिका में भरोसा नहीं है, इसीलिए वो मीडिया ट्रायल चाहती हैं। उन्होंने इतिहास की कई घटनाएँ गिनाते हुए बड़ा आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा उनके और उनके परिवार के खिलाफ साजिश रची है।

महिला पहलवानों द्वारा यौन शोषण के आरोपों से पहले की 10 घटनाएँ उन्होंने उदाहरण के रूप में गिनाई हैं। पहली घटना उन्होंने अपने दादा चंद्रभान सिंह का उदाहरण देते हुए बताया है कि वो कांग्रेस पार्टी के टिकट पर विधायक बने थे, लेकिन रहस्यमयी परिस्थितियों में अस्पताल में उनकी मौत कांग्रेस की साजिश थी। इसी तरह उन्होंने 1974 में कांग्रेस सरकार द्वारा उनका घर गिराए जाने और उनके परिवार वालों को जेल में बंद करने का आरोप भी लगाया।

सांसद ने तीसरी घटना का जिक्र किया है आपातकाल के दौरान का। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस पूर्वांचल में उनके वजूद को अपने लिए चुनौती मानती है, इसीलिए पार्टी नेताओं के दबाव में उन पर गैंगस्टर एक्ट और IPC की धाराओं में 3 दर्जन से अधिक केस इसीलिए कर दिए गए क्योंकि उन्होंने इमरजेंसी का विरोध किया था। उन्होंने 1980 की एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि उन पर ऑटोमैटिक हथियारों से प्राणघातक हमला हुआ था, जिसमें वो तो बच गए लेकिन उनके सहयोगी की मौत हो गई।

उन्होंने याद दिलाया है कि तब केंद्र और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ही सत्ता में थी। उन्होंने दावा किया है कि विश्वनाथ प्रताप सिंह के आदेश के बाद उनका एनकाउंटर करने का प्रयास भी किया गया था, लेकिन भारी जनसमर्थन के कारण ये साजिश विफल हो गई। उन्होंने छठा आरोप लगाया है कि 1989 के विधानसभा चुनाव में वो हारे नहीं थे, बल्कि कांग्रेस ने साजिश कर के 4 वोटों से उन्हें हरवाया था और उनके राजनीतिक सफर को रोकने का प्रयास किया था।

1989 में राम जन्मभूमि आंदोलन में अपनी पहली गिरफ़्तारी का ठीकरा भी उन्होंने कांग्रेस पर ही फोड़ा है। 8वीं घटना का जिक्र उन्होंने 1992 का किया है, जब बाबरी का ढाँचा गिराया गया और उन्हें भी केंद्र सरकार के इशारे पर गिरफ्तार किया गया था। साथ ही 1995 में टाडा लगा कर उन्हें देशद्रोही साबित करने की कोशिश की गई, ये आरोप भी उन्होंने लगाया है। उन्होंने बताया है कि 2004 में एक दुर्घटना को हत्या बता कर उन्हें उसमें फँसाया गया, लेकिन CBI ने उन्हें क्लीन-चिट दी।

झूठ की तारीफ
सच का मज़ाक
कुछ ऐसा है आजकल
कांग्रेस का मिजाज.....
मेरे जीवन का सच.......
May be an image of text
All reactions:
3.2K
664
245
Like
Comment
Share

664 comments

बृजभूषण शरण सिंह ने इन 10 घटनाओं के अलावा 11वें बिंदु के रूप में ताजा प्रकरण की बात की है। उन्होंने पहलवानों वाले प्रकरण में प्रियंका गाँधी और कांग्रेस नेता भूपेंद्र हुड्डा के शामिल होने का आरोप लगाते हुए कहा कि वो देश की कानून व्यवस्था पर यकीन रखते हैं। उन्होंने चुनौती दी है कि प्रियंका गाँधी ट्विटर-ट्विटर खेलना बंद करें और उनके खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ कर दिखाएँ। उन्होंने लिखा कि जीत हमेशा सच्चाई की ही होती है।

चुनावी हिन्दू पूजा के दौरान आसनों पर बैठ गए कमलनाथ-प्रियंका : भगवान से पहले खुद ही लेने लगी थीं आरती

     माँ नर्मदा की पूजा के दौरान प्रियंका गाँधी ने की बड़ी गलतियाँ (फोटो साभार: @NarendraSaluja,@BJP4MP)
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी और कमलनाथ समेत कांग्रेस नेताओं का एक वीडियो वायरल हो रहा है। दरअसल, कांग्रेस नेता मध्य प्रदेश के जबलपुर में माँ नर्मदा की पूजा करने पहुँचे थे। इससे पहले ही ये वहाँ लगे आसनों पर जाकर बैठ गए। हालाँकि, बाद में लोगों के समझाने के बाद प्रियंका गाँधी समेत अन्य नेताओं ने आसन छोड़ दिया।

आज तक गाँधी परिवार से किसी ने प्रश्न नहीं किया कि मुसलमान दादा(फ़िरोज़ जहांगीर) की संतानें कब हिन्दू बन गयीं? क्या किसी मुस्लिम नेता को चुनावों में मंदिर जाते और आरती करते देखा, फिर चुनावों में गाँधी परिवार मंदिर जाकर कब तक हिन्दुओं को मूर्ख बनाता रहेगा? दूसरे, कन्हैया के मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा क़त्ल करने पर राहुल द्वारा उन्हें बेगुनाह करार कर दिया जाता है,(देखिए वीडियो) आखिर इस नौटंकी का कब अंत होगा? 


कर्नाटक, हिमाचल और अब मध्य प्रदेश में हिन्दू कार्ड खेलने वाले केरल चुनावों में न रुद्राक्ष माला धारण करते हैं और न ही हाथ में कलावा, क्या यह ढोंग नहीं? हिन्दू कब इन ढोंगी हिन्दुओं को धूल चटवाएगी? मुसलमान अपने मजहब में हिन्दुओं से कहीं अधिक भेदभाव होने पर के बावजूद इस्लाम के नाम पर एकतरफा वोट कर सकता है, फिर हिन्दू इन ढोंगी चुनावी हिन्दुओं के विरुद्ध कब एकजुट होंगे?  
                हर चुनाव में इन चुनावी हिन्दुओं के ढोंग के जाल में हिन्दू फंस जाता है 

दरअसल, मध्य प्रदेश में 5 महीने बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। इन चुनावों के मद्देनजर कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी सोमवार (12 जून, 2023) को प्रदेश की ‘संस्कारधानी’ जबलपुर पहुँची थी। प्रियंका गाँधी के इस दौरे के कार्यक्रम में माँ नर्मदा की आरती भी शामिल थी। ऐसे में वह पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ व राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा समेत अन्य कॉन्ग्रेस नेताओं समेत जबलपुर के गौरी घाट पहुँची थीं। 


इस दौरान माँ नर्मदा के पूजन से पहले प्रियंका गाँधी समेत अन्य कॉन्ग्रेस नेता वहाँ लगे आसनों पर जाकर बैठ गए। हालाँकि, इसके बाद जब वहाँ मौजूद लोगों ने प्रियंका गाँधी व अन्य नेताओं को आरती से पहले आसन में न बैठने की समझाइश दी। इसके बाद सभी नेता ने आसन छोड़कर जमीन पर बैठ गए।

यह वीडियो मध्य प्रदेश बीजेपी के प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने शेयर किया है। वीडियो शेयर करते हुए उन्होंने कॉन्ग्रेस नेताओं को चुनावी हिंदू करार दिया। सलूजा ने लिखा, “यह है कॉन्ग्रेस के नेताओं की स्थिति। जबलपुर में ग्वारी घाट पर माँ रेवा के पूजन के लिये पहुँचे तो आसनों पर सुशोभित हो गए। तभी किसी ने धार्मिक संस्कार व रीति-रिवाज बताए तो फिर जमीन पर आए। चुनावी हिंदू।” बता दें कि माँ नर्मदा का दूसरा नाम रेवा है।

इससे पहले प्रियंका गाँधी का एक और वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो को लेकर भी भाजपा ने उन पर निशाना साधते हुए चुनावी हिंदू बताया। मध्य प्रदेश भाजपा ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा था, “ढोंग और आस्था में यही फर्क है। प्रियंका गाँधी को इतना नहीं पता कि आरती पहले भगवान को दी जाती है फिर इंसान लेते हैं। इसलिए ही इन्हें चुनावी हिंदू कहा जाता है।”

वीडियो में प्रियंका गाँधी को माँ नर्मदा जी की आरती करते देखा जा सकता है। आरती करने के बाद उन्होंने विवेक तन्खा को पकड़ा दिया। साथ ही हाथों से आरती लेते हुए नजर आईं। सनातन धर्म संस्कृति के नियम के अनुसार, आरती पूरी होने के बाद पहले भगवान को दी जाती है। इसके बाद अन्य लोग उसे ले सकते हैं। लेकिन प्रियंका गाँधी यही गलती कर गईं और बीजेपी को उन पर निशाना साधने का मौका मिल गया

‘बिकनी गर्ल’ अर्चना गौतम को प्रियंका गाँधी के PA की धमकी : ‘दौ कौड़ी की औरत…जेल में डलवा दूँगा’

                                          अर्चना गौतम ने प्रियंका गाँधी के पीए संदीप सिंह पर लगाया आरोप
बिग बॉस 16 से मशहूर हुईं अर्चना गौतम ने प्रियंका गाँधी के करीबी संदीप सिंह के खिलाफ गंभीर इल्जाम लगाए हैं। उन्होंने फेसबुल लाइव आकर कहा कि संदीप ने उन्हें ‘दो कौड़ी की औरत’ का है।

अर्चना ने खुलासा करते हुए बताया कि रायपुर सत्र के दौरान संदीप ने उनको धमकी दी और उन्हें जेल में डालने को भी कहा। वह कहती हैं कि प्रियंका गाँधी के पीए को औरतों से बात करने की तमीज नहीं है।

लाइव में वह बोलीं, “पार्टी ज्वाइन की है मैंने प्रियंका दीदी के लिए की है। तुम जैसे नल्लों के लिए नहीं की है। पूरी पार्टी तुम्हारे खिलाफ है। कोई कुछ बोलता नहीं है क्योंकि किसी में गुदा नहीं है। मैं बोलूँगी। करके दिखाओ तुम मेरा बाल भी बाका। जो तुम कुतर-कुतर कर पार्टी खा गए हो न। ये जो बड़े-बड़े अधिवेशन हो रहे हैं। कोई फायदा नहीं है इनका क्योंकि ये नालायक-नल्ले लोग जब तक पार्टी में रहेंगे तब तक पार्टी नहीं बढ़ सकती। पूरे स्टाफ को निकाला जाए क्योंकि ये लोग SC-ST कम्युनिटी के लोगों को बढ़ावा नहीं देते। इनको एक आशंका है होती है कि कहीं हम लोग ऊपर न चले जाए। ये चाहते हैं हम आज भी जूते तले रहें। अरे भैया हम जूते तले नहीं रहते। हम सीना चौड़ा करके चलते हैं। तुम जैसे आए और गए… जो तुम मुझे कह रहे हो न कि मुझे थाने में करवाओगे। बैठी हूँ मुझे थाने में करवाकर दिखा।”

 बिग बॉस कंटेस्टेंट का आरोप है कि संदीप ने उन्हें दो कौड़ी की और कहा और धमकी दी कि अगर वो ज्यादा बोलीं तो उन्हें जेल के पीछे डाल दिया जाएगा। इसके बाद अर्चना ने संदीप से कहा कि अगर उनमें दम है तो वो अर्चना को जेल में डालकर दिखाएँ।

अर्चना को कॉन्ग्रेस ने हस्तिनापुर से अपना प्रत्याशी उतारा था। हालाँकि बिकिनी गर्ल नाम से फेमस अर्चना को बहुत कम (1519) वोट मिले और उन्हें हार का मुँह देखना पड़ा। इसके अलावा बिग बॉस में भी वो अपने लड़ाकू व्यवहार के कारण ही चर्चा में रही थीं।

‘अशोक गहलोत की खाल उतार कर जूते बनाऊँगा, प्रियंका गाँधी के सिर पर मारूँगा’: नवाब सतपाल तंवर, ‘भीम सेना’ अध्यक्ष

बोया पेड़ बबूल का, आम कहाँ से होय कांग्रेस पर शत-प्रतिशत लागू हो रही है। जिस भीम सेना को मोदी विरोध में पाला, आज वही उसे जूते मारने को तैयार है। 
राजस्‍थान के बाड़मेर से भीम सेना चीफ नवाब सतपाल तंवर (Bhim Sena Chief Nawab Satpal Tanwar) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें वह प्रदेश के मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) और कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी वाड्रा के खिलाफ अपशब्‍द बोल रहा है। सतपाल तंवर ने कहा, “राजस्थान में अशोक गहलोत की खाल उतारकर उसका जूता बनाऊँगा और प्रियंका गाँधी के सिर में मारूँगा।”

यह वीडियो बाड़मेर में हुए एक कार्यक्रम है। ‘Ambedkarite People’s Voice’ नाम के फेसबुक पेज पर सोमवार (20 फरवरी, 2023) को नवाब सतपाल तंवर का पूरा वीडियो शेयर किया गया है। इसमें वह लोगों को सम्‍बोधित करते हुए कहता है, “राजस्‍थान में अगर एक भी दलित भाई-बहन का पसीना भी गिरा, तो राजस्‍थान में खून की नदियाँ बहा दूँगा। हम पूरा देश हिलाना जानते हैं। कॉन्ग्रेस सरकार किसी वहम में ना रहें, वरना सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी को इटली भेज देंगे।”

तंवर आगे कहता है, “भाजपा वालों को पाकिस्तान से बहुत प्यार है, उन्हें सीधा पाकिस्‍तान भेज देंगे। कहने का मतलब साफ है। ये भारत देश हमारा है। ये राजस्‍थान प्रदेश हमारा है। यहाँ पर इटली वाले क्‍यों राज करेंगे? भाजपा और कॉन्ग्रेस दोनों ही आरएसएस (RSS) की पैदाइश है। एक की जगह इटली में और दूसरे की पाकिस्‍तान में है। राजस्‍थान में सिर्फ दलित राज करेगा। मेघवाल राज करेगा। राजस्थान में चमार राज करेगा, वाल्मीकि राज करेगा। हम राजस्‍थान और देश को बँटने नहीं देंगे। हम यहाँ के मूल निवासी हैं। गुलामी की जिंदगी हमें बर्दाश्‍त नहीं है। कान खोलकर सुन ले अशोक गहलोत, राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी। मैं राजस्‍थान में अशोक गहलोत की खाल उतारने आया हूँ। अशोक गहलोत की खाल उतारकर उसका जूता बनाऊँगा और उसे प्रियंका गाँधी के सिर पर मारूँगा।”

भीम सेना चीफ ने अपनी बात को जारी रखते हुए कहा, “अब वो दलित नहीं रहा, जो अत्याचार को सहन करेगा। जो दलितों पर अत्याचार करेगा चूर-चूर हो जाएगा। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। अब दलित कलम भी चलाएगा, अब दलित गाड़ी भी चलाएगा। अब दलित मूँछ भी रखेगा, कोट-पेंट पहनेगा और साफ कपड़े भी पहनेगा। अब किसी मनुवादी में हिम्मत है तो भिड़ के दिखा दे। दलितों का शोषण करने वाले मनुवादियों का अब शोषण होगा।”

इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए अंकित तिवारी नाम के यूजर ने लिखा, “दलित नेता सतपाल तंवर राजस्थान के मुख्यमंत्री को खाल उतारने की धमकी दे रहा है। राजस्थान की पुलिस ऐसे असामाजिक तत्वों पर कठोर कार्रवाई करे, ये अपराध अक्षम्य है।”

‘नूपुर शर्मा को पेश करो, उस नचनिया से मुजरा कराऊँगा’

सतपाल ने 8 जून 2022 को नूपुर शर्मा की जीभ काटकर लाने वाले को एक करोड़ रुपए का इनाम देने की घोषणा की थी। इससे पहले उसने बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता पर ईश​निंदा का आरोप लगाते हुए नूपुर शर्मा से सबके सामने ‘मुजरा करवाने’ का आपत्तिजनक एवं स्त्री-विरोधी बयान दिया था। तंवर ने अपने बयान में कहा था, “नूपुर शर्मा ने नबी की ईशनिंदा की है। उसने देश में रह रहे करोड़ों मुस्लिमों को आहत किया है। वह माफी के लायक नहीं, फाँसी के लायक है। वह उसे उसके सामने मुजरा करवाएगा।”

हिजाब और बिकनी नहीं, माहवारी के बाद निकाह और हलाला से लड़ाई ज़रूरी

चुनावी माहौल में हिजाब विवाद कोई नई बात नहीं। दूसरे, जब केरल में एक मुस्लिम संस्था द्वारा हिजाब बैन किया गया था, तब हिजाब समर्थकों ने क्यों नहीं विरोध किया? यानि हर चुनाव में मोदी-योगी विरोधी गैंग सक्रिय हो जाता है। पिछले चुनावों में #me too, #award vapasi, #mob lynching, #not in my name, #intolerence और टुकड़े-टुकड़े गैंग आदि गैंग चुनाव संपन्न होते ही किस बिल में छुप जाते हैं, फिर नए नाम से निकल आते हैं। 
CAA विरोध में हिन्दुत्व पर अपमानित नारेबाजी की गयी, जिसका इसको समर्थन दे रही किसी भी पार्टी ने विरोध तक नहीं किया, यदि यही नारेबाजी किसी अन्य मजहब के लिए की होती, जितने भी विरोधी थे सभी अपनी जान बचाने पुलिस की संरक्षण की मांग करते किसी गुप्त स्थान पर छुपे बैठे होते। 
केंद्र एवं राज्य सरकारों को हिजाब विवाद शुरू करने वाली लड़कियों एवं उनके घर वालों के बैंक खातों की जाँच जरुरी है। जो कौम अपने आपको गरीब, मज़लूम मासूम आदि कहे जाने वाले अपने काम धंधे छोड़कर सड़क पर आना, प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।     
ज्यादा बड़ी नहीं थी जब पहली बार देखा था कि स्कूल जाने वाली लड़कियाँ सर्दियों के बिना भी सिर ढकने वाला स्कार्फ पहनती हैं। मुझे तब कोई अंदाजा नहीं था कि ये क्या है, क्यों है, किसलिए पहना गया है। मैं चूँकि उस समय धूल से बचने के लिए मुँह पर रुमाल बाँधा करती थी तो पहले सोचा कि ये स्कार्फ भी शायद ऐसा कोई उपाय है। बहुत लंबे तक मन में इस स्कार्फ को लेकर जद्दोजहद चली… फिर धीरे-धीरे इसके बारे में समझ आया कि इसे मुस्लिमों में सिर ढकने के लिए पहना जाता है। बाकी की जानकारी तब हुई जब एक मुस्लिम सहेली बनी और उसने इसके बारे में सब बताया…

कर्नाटक में हुए हिजाब विवाद से पहले वो पुरानी बातें मेरे जहन से गायब थीं, पर पूरे बखेड़े के बाद जब जगह-जगह तर्क पढ़े, हिजाब को संवैधानिक अधिकार बताने के लिए आतुर लोग देखे, कोर्ट में मुस्लिम पक्ष की दलीलें सुनीं, तो वो पुरानी बातें याद आती गईं। मैं, तब हिजाब शब्द से पूरी तरह अंजान थी इसलिए, सवाल किया था कि इसे पहनकर क्यों आते हो और आते हो तो क्लास में क्यों उतार देते हो? माहौल राजनैतिक नहीं था, इसलिए पहले जवाब मिला- “हमारे में ये जरूरी होता है।” और फिर आगे कहा गया- “हम जिस इलाके में रहते हैं वहाँ ज्यादा मुस्लिम ही हैं। इसलिए घर से निकलते वक्त इसे पहनते हैं और घर जाते समय पहनना पड़ता है। क्लास में इसलिए उतारते हैं क्योंकि यहाँ देखो कोई इसे नहीं पहनता।”

हिजाब का मुद्दा स्वेच्छा से जुड़ा?

उस उम्र में जितनी समझ होनी चाहिए मैंने उसी के हिसाब से उस लड़की की बातें अपने मन में बैठाईं और उसी के नजरिए से मैं आज भी इस पूरे मुद्दे को देखती हूँ। घटना चाहे आज की हो या 15 साल पुरानी…एक बात साफ है कि एक लोकतांत्रिक देश में, समानता के अधिकार के साथ, शिक्षा की चाह रखने वाली लड़की के लिए हिजाब का मुद्दा कभी भी ‘स्वेच्छा’ से जुड़ा नहीं हो सकता। हम माने चाहें न मानें लेकिन यदि कोई लड़की स्कूल के बाहर तक हिजाब पहनकर आई और क्लास में घुसने से पहले उसे उतार दिया तो ये दिखाता है कि किस हद्द तक मजहबी ठेकेदारों ने उस लड़की को गुलाम बनाया हुआ था जो क्लास में बैठकर एक समान दिखने के इच्छुक तो थी, लेकिन बाहर निकलते ही उसे डर भी था कि कहीं उसके आस-पास के लोग उसे कुछ न बोल दें।
आज समय बदल गया है जो कभी मजहबी ठेकेदारों का डर था वो कट्टरपंथ में तब्दील हो गया है। थोपी गई चीजें स्वेच्छा से जुड़ी बताई जा रही है। हिजाब पहनकर क्लास लेने की लड़कियों की जिद्द दिखाती है कि किस हद्द तक उन्हें मानसिक तौर पर गुलाम बनाया जा चुका है कि वो एक शैक्षणिक संस्थान के बाहर खड़े होकर ये बातें कह रही हैं कि इस्लाम उनकी प्राथमिकता है और शिक्षा उनके लिए सेकेंड्री चीज है। सोचिए, अभी 6 माह ही हुए हैं जब पूरे विश्व ने अफगानिस्तान में तालिबानी शासन आने के बाद वहाँ की लड़कियों को शून्य में जाते देखा। हर कोई सिर्फ यही बता रहा था कि एक बार फिर कट्टरपंथ के आ जाने से लड़कियों का जीवन अंधकार में चला जाएगा।

माहवारी के बाद निकाह, हलाला पर कब लड़ेंगी मुस्लिम लड़कियाँ?

भारत में लोकतंत्र है, समान अधिकार देने वाला संविधान है- बावजूद इसके अगर पूरी लड़ाई मजहब से जुड़ी ही बना ली जाए तो कोई फरिश्ता भी मानसिक गुलामों को आजाद नहीं करवा पाएगा। जिन लड़कियों को ऐसा लग रहा है कि आखिर हिजाब पहनकर क्लास में बैठने की अनुमति से प्रशासन को क्या परेशानी है, वो बस इस बात की कल्पना करें कि उनकी ही कक्षा में कोई लड़की किसी अन्य रंग के दुपट्टे से सिर ढक कर बैठी है। क्या ये समानता होगी? जिस तरह शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षा का अधिकार सभी के लिए समान है वैसे ही वहाँ नियम भी सभी के लिए समान होने चाहिए। अगर हिजाब को लेकर इतना प्रेम है तो इसके लिए कई मजहबी संस्थानों की ओर रुख करने की आवश्यकता है जहाँ न इन्हें लेकर आपत्ति और न ही इन पर कोई विवाद। 
एक सामान्य कॉलेज या स्कूल, एक ऐसी जगह होते हैं, जहाँ ड्रेस कोड लागू करने का उद्देश्य ही ये होता है कि कोई न किसी से अलग दिखे और न ही किसी से कोई भेदभाव हो, बताइए वहाँ हिजाब की माँग की क्या जरूरत है । क्या इन लड़कियों को अधिकारों की लड़ाई लड़ने के क्रम में तीन तलाक, माहवारी के बाद निकाह, बहुविवाह या फिर हलाला जैसे नारकीय रीतियाँ नहीं दिखतीं? अगर ये मानसिक गुलामी नहीं हैं तो क्या है कि जिनका खुद पर इतना भी अधिकार नहीं है कि वो ये स्टैंड ले सकें कि उन्होंने किस प्रदर्शन में शामिल होना है किसमें नहीं!
आज कट्टरपंथी समूहों द्वारा ब्रेनवॉश होकर और उनका समर्थन पाकर, लोकतांत्रिक देश को संविधान में मिले अधिकारों का हवाला दिया जा रहा है। सोचिए अगर ये मजहबी कट्टरपंथ फैलता रहा और इसी तरह शैक्षणिक संस्थानों पर दबाव बनाता रहा तो कब तक आप खुद को लोकतांत्रिक देश का नागरिक कह पाएँगे और कब तक अधिकारों के नाम पर मजहबी या धार्मिक प्रेम को जगजाहिर कर पाएँगे।

मजहबी दबाव में क्यों आएँ स्कूल-कॉलेज

कर्नाटक में जो बवाल चल रहा है सोचिए उसका क्या केंद्र बिंदु है…..? सिर्फ मजहब, मजहब और मजहब। कहीं से कहीं तक शिक्षा की कोई बात ही नहीं है। लड़कियों को किसी ने भी हिजाब या बुर्का पहनने से मना नहीं किया है उन्हें बस कहा जा रहा है कि जब बच्चे बैठकर क्लास लेंगे वहाँ इसकी अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा लड़कियाँ चाहें तो उसे परिसर में पहनकर घूमें किसी को कोई आपत्ति भी नहीं है। मगर, बावजूद इसके उन लड़कियों को एक ऐसी जगह पर अपना लोहा मनवाना है जहाँ कुछ नियम हैं, कुछ कायदें हैं कानून हैं।
हर जगह अपनी मर्जियाँ नहीं चलतीं। जैसे हर धर्म-मजहब के अपने नियम हैं, उन्हें स्वतंत्रता है, वैसे ही संस्थान भी हैं। खासकर ऐसे संस्थान, जो सबके लिए निर्मित हुए हों। कोर्ट इस मामले में सुनवाई कर रहा है। हो सकता है फैसला लड़कियों के पक्ष में आए या हो सकता है ऐसा न भी हो। मगर, उससे पहले जो हालात अब बन चुके हैं उन पर विचार सबको करना ही पड़ेगा। बाहरी देशों में मजहबी बेड़ियाँ से बाहर निकलने पर लड़कियों को मारा जा रहा है, उनपर अत्याचार हो रहे हैं, प्रताड़नाएँ दी जा रही हैं, उन्हें देश छोड़ना पड़ रहा है और एक हम हैं, जो उस देश में रहकर अपना विकास नहीं कर पा रहे जिसने हमें किसी भी बेड़ी में बँधे बिना मनमुताबिक तौर-तरीकों जीने का पूरा-पूरा हक दिया है।

बिकनी और हिजाब संवैधानिक अधिकार

ये देश की विडंबना ही है कि एक ओर देश को बुर्काधारी लड़कियों को ये समझाना पड़ता है कि कैसे शैक्षणिक केंद्र में एकरूपता और समानता का महत्व हैं और दूसरी ओर पढ़ी लिखी प्रियंका को गाँधी अपने ट्वीट में लिखती हैं चाहे बिकनी हो, घूँघट हो या हिजाब हो, ये महिला का अधिकार है कि वो क्या पहनना चाहती है। इसका अधिकार लड़कियों को संविधान ने दिया है।
अवलोकन करें:-
हिजाब इंडोनेशिया में है ‘बैन’ ; यूनिफॉर्म का हिस्सा बनाने पर स्कूलों को मिलती है सज़ा
NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
हिजाब इंडोनेशिया में है ‘बैन’ ; यूनिफॉर्म का हिस्सा बनाने पर स्कूलों को मिलती है सज़ा
क्या संविधान ये अधिकार देता है कि बिकनी पहनकर क्लास ली जाए? या संविधान ये कहता है कि घूँघट में क्लास रूम में पहुँच जाया जाए या फिर रिप्ड जींस में पढ़ाई हो….अगर नहीं तो हिजाब के मना करने पर इतना बवाल क्यों? जैसे हम देश के नागरिक हैं वैसे ही संस्थान भी लोकतांत्रिक देश से जुड़ा हिस्सा है। ड्रेस कोड का नियम आज से नहीं चल रहा। सालोंसाल से इसे अपनाया गया है। जहाँ हिजाब पर आपत्ति नहीं है वहाँ कभी इसकी मनाही नहीं हुई, मगर यदि किसी संस्थान के नियमों के अनुसार, ड्रेस कोड के अतिरिक्त कुछ भी नियमों का उल्लंघन है तो उसमें मजहबी तौर पर जबरदस्ती करनी क्यों है।