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उत्तर प्रदेश : हलाल के नाम पर ‘हराम’ की कमाई कर रहे थे मौलाना हबीब यूसुफ और मौलाना मुइदशीर, ताहिर और अनवर के साथ यूपी एसटीएफ ने किया गिरफ्तार

हलाल काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मौलाना हबीब युसूफ पटेल, उपाध्यक्ष मौलाना मुईदशीर सपडीहा, जनरल सेक्रेटरी मुफ़्ती ताहिर जाकिर और कोषाध्यक्ष मोहम्मद अनवर खान को यूपी एसटीएफ ने किया गिरफ्तार (फोटो साभार : यूपी)
उत्तर प्रदेश में हलाल सर्टिफिकेट वाला न कोई सामान बनाया जाएगा और न ही बेचा जाएगा, सिवाय बाहरी देशों में एक्सपोर्ट के लिए तैयार हो रहे माल के। खुद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसका ऐलान किया था। इसके बावजूद कुछ मौलाना एक गिरोह बनाकर उत्तर प्रदेश में हलाल सर्टिफिकेट देने के नाम पर ‘हराम’ की कमाई कर रहे थे। उनके पास न कोई लैब थी, न वो किसी सामान की टेस्टिंग करते थे, बस 10 हजार लिया और दे दिया सर्टिफिकेट। मुंबई में बैठकर पैसे बना रहे ऐसे ही मौलानाओं की चौकड़ी को उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने पहले तो पूछताछ के लिए बुलाया, और जब पूछताछ में उन्हें पूरी तरह से बेनकाब कर दिया, तो फिर उन्हें सलाखों के पीछे भेज दिया।
लेकिन कट्टरपंथी इसे मुस्लिम विरोधी बता देश का माहौल ख़राब करने का प्रयास कर रहे हैं। जबकि इसका मुस्लिम खान-पान से दूर तक कोई सरोकार नहीं। केवल बिना किसी यंत्र-तंत्र के हलाल के नाम पर अपनी कमाई कर सभी धर्मों को पागल बनाया जा रहा था।  

जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने सोमवार (12 फरवरी 2024) को हलाल काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मौलाना हबीब युसूफ पटेल, उपाध्यक्ष मौलाना मुईदशीर सपडीहा, जनरल सेक्रेटरी मुफ़्ती ताहिर जाकिर और कोषाध्यक्ष मोहम्मद अनवर खान को गिरफ्तार किया है। इन पर आरोप है कि वे कंपनियों से हलाल सर्टिफिकेट के नाम पर वसूली करते थे। एसटीएफ को सूचना मिली थी कि हलाल काउंसिल ऑफ इंडिया के कुछ सदस्य कंपनियों से हलाल सर्टिफिकेट के लिए मोटी रकम वसूल रहे हैं। एसटीएफ ने इस मामले की जाँच शुरू की और पाया कि आरोपित कंपनियों को धमकाते थे कि अगर वे पैसे नहीं देंगे तो उन्हें हलाल सर्टिफिकेट नहीं दिया जाएगा।

पुलिस उपाधीक्षक दीपक कुमार सिंह की अगुवाई में एसटीएफ की टीम ने चारों को गिरफ्तार किया। एसटीएफ को उनके पास से 4 आधार कार्ड, 4 पैन कार्ड, 3 मोबाइल फोन, 4 एटीएम कार्ड, 21 हजार 820 रुपये की नकदी, तीन ड्राइविंग लाइसेंस, एक आरसी और 2 वोटर कार्ड भी मिले हैं। जानकारी मिली है कि सिर्फ 10 हजार रुपए लेकर ये किसी भी चीज को ‘हराम’ से ‘हलाल’ बना देते थे। जबकि इन लोगों को ये सर्टिफिकेट जारी करने का अधिकार ही नहीं है। यूपी एसटीएफ इस बात की भी जाँच कर रही है कि इस ‘हराम’ की कमाई को किस ‘हलाल’ काम के लिए इस्तेमाल किया जाता था।

हलाल सर्टिफिकेट क्या है?

हलाल सर्टिफिकेट एक ऐसा प्रमाणपत्र है जो यह दर्शाता है कि कोई उत्पाद या सेवा इस्लामिक कानूनों के अनुसार तैयार किया गया है। यह प्रमाणपत्र मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे केवल हलाल उत्पादों का ही सेवन करते हैं। हलाल का मतलब है “जायज़” यानी इस्लाम में जिसकी अनुमति है। हराम का मतलब है जिसकी अनुमति नहीं है। इसलिए, यह सुनिश्चित करने के लिए कि प्रोडक्ट में इस तरह के किसी पदार्थ की मिलावट नहीं है जो हराम है और उसे बनाने की विधि भी जायज है, इस तरह के सर्टिफिकेट जारी किए जाते हैं। हालाँकि यूपी में ऐसा करना जुर्म है।

उत्तर प्रदेश में पिछले साल बैन किया गया था ये सर्टिफिकेट

पिछले साल योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में हलाल सर्टिफिकेट वाले सामान बेचने पर जेल भेजने का फैसला किया था। दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा है कि हलाल सर्टिफिकेट किसी उत्पाद की गुणवत्ता से संबंधित नहीं है। ऐसे निशान गुणवत्ता को लेकर भ्रम की स्थिति ही पैदा करते हैं। जिन उत्पादों पर इस तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं, उनका उल्लेख राज्य सरकार द्वारा जारी पत्र में साफ तौर पर किया गया है। इस पत्र में बताया गया है कि डेरी उत्पाद, चीनी, बेकरी उत्पाद, पिपरमिंट ऑयल, रेडी टू ईट सेवरीज व खाद्य तेल आदि के लेबल पर हलाल प्रमाणन का उल्लेख किया जा रहा है, जो कि गलत है। उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि इन उत्पादों के लिए एफएसएसएआई (Food Safety and Standards Authority of India) प्रमाण पत्र ही काफी है।

मध्य प्रदेश : कांग्रेस दफ्तर में चले लात-जूते, दिग्विजय सिंह को गाली: कमलनाथ और दिग्गी राजा के समर्थकों में मारपीट, वीडियो वायरल

                                                                                             साभार : X_narendrasaluja
कांग्रेस युवराज राहुल गाँधी जो सियासत की आड़ में मौहब्बत की दुकान खोलकर न्याय यात्रा पर भ्रमण कर रहे हैं, लेकिन उन्हें नहीं मालूम की उनकी अपनी ही पार्टी में नफरत और अन्याय की भरमार है। एक के बाद एक नेता पार्टी छोड़ रहे हैं तो दूसरी तरफ पार्टी के अस्तित्व को बचाने गठबंधन करते फिर रहे हैं, परन्तु अब गठबंधन में सम्मिलित पार्टियां भी अलग होनी शुरू होनी हो चुकी हैं। वास्तव यह गठबंधन मोदी को हराने नहीं बल्कि कांग्रेस अपने वजूद को बनाये रखने के लिए सारी कवायत कर रही है, क्योकि कांग्रेस का भविष्य अति अंधकारमय होने जा रहा है, उसका मूल कारण कोई और नहीं बल्कि परिवार और परिवार भक्ति है। 

मध्य प्रदेश के भोपाल में कांग्रेस कार्यालय में दो गुटों के बीच झड़प हो गई। एक गुट दिग्विजय सिंह का समर्थन करता है, जबकि दूसरा गुट कमलनाथ का समर्थन करता है। दोनों गुटों के नेता और कार्यकर्ता एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे थे। झड़प के दौरान दोनों गुटों के नेताओं ने एक-दूसरे को धक्का-मुक्की की और गालियाँ दीं। कुछ नेताओं ने एक-दूसरे पर कुर्सियाँ भी फेंक दीं। इस झड़प का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

घटना के अनुसार, राज्य कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के समर्थकों के बीच झगड़ा हुआ। झगड़ा इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के नेता एक-दूसरे पर गाली-गलौज करने लगे। झगड़े के दौरान एक नेता ने दूसरे नेता पर कुर्सियाँ फेंकी। जानकारी के मुताबिक, यह घटना सोमवार (29 जनवरी, 2024) को हुई। भोपाल के कांग्रेस कार्यालय में कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता शहरयार खान और अनुसूचित जाति विभाग के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार के बीच झड़प हो गई। दोनों नेताओं ने एक दूसरे के साथ धक्का-मुक्की की और जमकर गलियाँ बकी। इस दौरान वहाँ मौजूद लोगों ने इसका वीडियो भी बना लिया।

इस दौरान मौके पर मौजूद दूसरे नेताओं ने दोनों नेताओं को अलग किया। बताया जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को लेकर विवाद हुआ था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अनुसूचित जाति विभाग अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार को कमलनाथ समर्थक बताया जाता है वहीं कांग्रेस प्रवक्ता शहरयार खान को दिग्विजय समर्थक माना जाता है। दोनों के बीच दिग्विजय सिंह को गाली देने को लेकर हुआ। विवाद इतना बढ़ा कि मामला मारपीट तक पहुँच गया।

बीजेपी नेता नरेंद्र सलूजा ने इस घटना का वीडियो एक्स पर शेयर किया है। उन्होंने लिखा, “कमलनाथ समर्थक द्वारा दिग्विजय सिंह जी को गाली बकने को लेकर PCC में जमकर चले लात-ठूँसे कुर्सियाँ चली, जमकर एक दूसरे को गालियाँ बकी गईं। बीच-बचाव करने आए कमलनाथ समर्थक एक नेता को भी लात-घूसे पड़े।”

ये घटना मध्य प्रदेश कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती है। दिग्विजय सिंह और कमलनाथ दोनों कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और उनके समर्थकों की संख्या भी बड़ी है। ऐसे में इन दोनों नेताओं के बीच मतभेद कांग्रेस के लिए घातक साबित हो सकते हैं। इस घटना के बाद कांग्रेस को अपने नेताओं के बीच मतभेदों को दूर करने के लिए कदम उठाने की जरूरत है। अगर कांग्रेस इस घटना को गंभीरता से नहीं लेती है, तो इससे पार्टी को चुनावों में नुकसान हो सकता है।

दिल्ली : ‘एक रात हमारे साथ सो जाओ तो ड्यूटी बढ़ा देंगे’: महिला कर्मचारियों ने खोली केजरीवाल के अस्पताल की सच्चाई, AAP विधायक का भी लिया नाम

बुराड़ी का अस्पताल और प्रदर्शन करती महिलाएं (चित्र साभार: HT & ScreenGrab form Viral Video)
दिल्ली मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की मुसीबतें खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। रहस्यमयी कोली कांड से लेकर राशन कार्ड कांड, फर्जी डिग्री, घरेलू अत्याचार, भ्रष्टाचार, शराब घोटाला से पीछा छूटा नहीं, दिल्ली हॉस्पिटल्स में नकली दवाइयों और अब हॉस्पिटल में नौकरी के लिए यौन शोषण आदि यानि दूसरे शब्दों के कहा जाए कि केजरीवाल वास्तव में परिवर्तन ला रहे हैं। अपराध का शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र हो जहाँ केजरीवाल पार्टी लिप्त नहीं पायी जा रही हो। 
फर्जी सर्वे कराया है “आप” ने कि क्या जेल से सरकार चलानी चाहिए केजरीवाल को। ED को भी अभी स्वयं नहीं पता कि पूछताछ के बाद केजरीवाल की गिरफ़्तारी का आधार बनेगा या नहीं। लेकिन “आपियों” का propaganda चालू है : “मोदी डरा हुआ है केजरीवाल से, उसके कामों से और उसकी लोकप्रियता से, इसलिए मोदी “आप” को ख़त्म करना चाहता है”।
24 नवंबर, 2012  का केजरीवाल का एक ट्वीट बाजार में चल रहा है जिसमें उसने लिखा था 
“As a patriot Indian, my head hangs in shame when our corrupt leaders do not appear before ED and CBI even after multiple summons by the investigating agencies, when they should have resigned from their posts immediately as soon as the allegations were made”
अब जमाना बदल गया, 2012 में भ्रष्टाचार को मिटा कर साफ़ राजनीति लाने की कसमें खाते थे केजरीवाल लेकिन आज भ्रष्टाचार की दलदल में डुबकी लगाए हुए नई तरह की राजनीति शुरू कर दी है “जनाब” ने। कोई क्षेत्र ऐसा बचा होगा  जिसमें घोटाला न किया हो केजरीवाल और उसके लोगों ने लेकिन फिर भी स्वघोषित “ईमानदार” हैं

दिल्ली के बुराड़ी के एक सरकारी अस्पताल में महिला कर्मचारियों ने काम देने के एवज में शारीरिक शोषण किए जाने का आरोप लगाया है। महिलाओं का कहना है कि उनके शीर्ष अधिकारी उन पर शारीरिक सम्बन्ध बनाने का दबाव बनाते हैं और ऐसा ना करने पर उनको प्रताड़ित किया जाता है। इस मामले का राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने भी संज्ञान लिया है।

बुराड़ी स्थित दिल्ली सरकार के इस अस्पताल के बाहर महिलाएँ लगातार प्रदर्शन कर रही हैं। महिलाओं का कहना है कि उन्हें अस्पताल में ड्यूटी नहीं दी जा रही है। उन्हें पूरी ड्यूटी दिए जाने के एवज में उनके अधिकारी उनसे शारीरिक सम्बन्ध बनाने के लिए कहते हैं और रिश्वत भी माँगते हैं।

महिलाओं ने कहा कि अस्पातल में AAP के स्थानीय विधायक संजीव झा के लोग भी हैं और उनके सहयोग से ये कुकर्म किया जाता है। महिलाओं के कहा कि संजीव झा के लोग पैसे लेकर-लेकर लोगों को नौकरी देते हैं। साथ ही आरोपितों को भी बचाते हैं। महिलाओं ने AAP विधायक और उसके लोगों पर गंभीर आरोप लगाए।

जानकारी के अनुसार, बुराड़ी स्थित दिल्ली सरकार के इस अस्पताल में मेडिकल के अतिरिक्त तमाम स्टाफ को आउटसोर्सिंग से रखा जाता है। इसके तहत एक कम्पनी ग्लोबल वेंचर यह काम करती है। इसका काम इन कर्मचारियों की भर्ती और उनके काम की देखरेख होता है। यह भी सामने आया है कि यहाँ कर्मचारियों को रखने के लिए रिश्वत ली गई।

सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में एक महिला ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में सुपरवाईजर और मैनेजर पद पर काम करने वाले नीरज शर्मा, राजकुमार और आदर्श नाम के शख्स पर ये आरोप लगाए गए हैं। एक महिला कर्मचारी का कहना है कि उसे इन अधिकारियों की करतूतों के बारे में सब पता है। महिलाओं के प्रदर्शन के इस वीडियो में उनके आरोप सुने जा सकते हैं।

महिला ने बताया है कि इस अस्पताल के बेसमेंट में ये अधिकारी महिला कर्मचारियों को बुलाते थे और उनका शारीरिक शोषण करते थे। उसका कहना था कि शारीरिक सम्बन्ध बनाने के लिए तैयार ना होने वाली महिलाओं को अस्पताल में मात्र 15 दिन काम दिया जाता था।

अधिकारी महिलाओं से कहते थे कि उनके साथ एक रात सोने पर वह काम के दिन बढ़ाकर 20-25 कर देंगे। महिला का कहना है कि यदि अस्पताल के बेसमेंट के सीसीटीवी की जाँच करवाई जाए तो सारी सच्चाई बाहर आ जाएगी। प्रदर्शन करने वाली महिलाओं ने इस मामले में स्थानीय AAP विधायक संजीव झा का संबध बताया है।

महिला का कहना है कि नीरज और राजकुमार यहाँ काम करने वाली महिलाओं से एक-एक करके अकेले में मिलने को कहते थे। उन्हें इस विषय में आवाज उठाने से भी रोका जाता था। जिन महिलाओं ने इसके खिलाफ आवाज उठाई, उन्हें नौकरी से भी निकाल दिया गया।

महिलाओं का कहना है कि उन्हें धमकाया भी गया है। इसके अलावा एक महिला से मारपीट की घटना भी सामने आई है। उसके साथ छेड़छाड़ और यौन शोषण किया गया और विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की गई। इस मामले में महिला ने दिल्ली पुलिस के पास मामला भी दर्ज करवाया है।

इस पूरे मामले पर राष्ट्रीय महिला आयोग और दिल्ली महिला आयोग ने भी संज्ञान लिया है। उन्होंने इस मामले में उत्तरी दिल्ली के डीसीपी से रिपोर्ट माँगी है।

दिल्ली पुलिस को की गई शिकायत में महिला ने 17 और 19 दिसम्बर 2023 को मारपीट और छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया है। पुलिस का कहना है कि सभी चार आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इन सभी के खिलाफ IPC की धारा 323, 354, 506, 509 और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है।