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‘वे सिर्फ आँख सेंकने जा रहे हैं’: नीतीश कुमार की ‘महिला संवाद यात्रा’ पर लालू यादव के बिगड़े बोल; क्या अपनी आंखें सेकने के लिए ममता की वकालत कर रहे हो लालू जी?

                                                         नीतीश कुमार, ममता बनर्जी और लालू यादव 
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। लालू ने कहा कि नीतीश कुमार ‘महिला संवाद यात्रा’ के नाम पर नयन सुख लेने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार पहले अपनी आँख सेंके, फिर बिहार विधानसभा चुनावों में 225 सीट लेने की बात करेंगे। लालू ने INDI गठबंधन को लेकर कांग्रेस  को भी झटका दिया है।

दरअसल, बिहार की महिलाओं से संवाद स्थापित करने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जल्द ही ‘महिला संवाद यात्रा’ निकालने जा रहे हैं। वे अलग-अलग जिलों में जाकर महिलाओं से बातचीत करेंगे और उनकी समस्याओं एवं सरकारी योजनाओं को लेकर उनके विचार सुनेंगे। इसको लेकर विपक्षी दल राजद के तेजस्वी यादव ने कहा कि नीतीश कुमार यात्रा के नाम पर पैसे की बर्बादी कर रहे हैं।

महिला यात्रा को लेकर जब संवाददाताओं ने लालू यादव से सवाल किए तो उन्होंने कहा, “नीतीश कुमार नयन सेंकने जा रहे हैं।” नीतीश कुमार द्वारा बिहार में NDA को 225 सीटें मिलने के सवाल पर लालू यादव ने कहा, “अरे, पहले वो आँख सेंके ना अपना। जा रहे हैं आँख सेंकने।” लालू यादव के बयान पर जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि लालू की बुद्धि आज भी चरवाहा विद्यालय वाली ही है।

INDI गठबंधन की कमान ममता को दी जाए: लालू

लालू यादव ने बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस दावे का समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने INDI गठबंधन की कमान सँभालने की बात कही थी। लालू ने कहा कि INDI गठबंधन की कमान ममता बनर्जी की दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के विरोध का कोई मतलब नहीं है। ममता को ही नेता बनाया जाना चाहिए।
सवाल यह हो रहा कि पहले क्यों राहुल गाँधी और कांग्रेस को गले लगा रहे थे? जब देख लिया कि कांग्रेस हो या राहुल दोनों ही थके और बेलगाम है। इनको साथ लिए बिना चुनाव लड़ा होता कुछ इज्जत बच जाती, लेकिन हमारे कंधे बैठ 99 सीट लेकर वाह-वाही लूट रही है कांग्रेस।    

इससे पहले लालू यादव के बेटे एवं राजद के नेता तेजस्वी यादव ने कहा था कि ममता बनर्जी समेत इंडिया ब्लॉक के किसी भी वरिष्ठ नेता द्वारा गठबंधन का नेतृत्व करने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा था कि इस निर्णय पर आम सहमति से पहुँचा जाना चाहिए। बता दें कि राजद ने दावा किया था कि INDI गठबंधन के असली आर्किटेक्ट लालू हैं।

दरअसल, महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों में INDI गठबंधन की करारी हार के बाद तृणमूल कॉन्ग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने गठबंधन को संभालने की इच्छा दोहराई थी। उन्होंने कहा था कि वह INDI गठबंधन का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं। हालाँकि, ममता बनर्जी के बयान का कांग्रेस ने विरोध किया था। वहीं, जबकि समाजवादी पार्टी और उद्धव ठाकरे गुट ने समर्थन किया था।

एक इंटरव्यू में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने कहा था कि उन्होंने ने ही INDI गठबंधन को बनाया है। अगर इस गठबंधन का इसका नेतृत्व करने वाले इसे ठीक से नहीं चला सकते तो उन्हें (ममता को) मौका दें। ममता ने कहा था कि वह बंगाल से इस गठबंधन का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं। बता दें कि गठबंधन का नेतृत्व फिलहाल कांग्रेस कर रही है।

‘अगर CM योगी बंगाल आए तो वापस नहीं जाने देंगे’: ज्ञानवापी में पूजा पर TMC मंत्री सिद्दीकुल्लाह

                                                                                                     साभार: : Bharatabharati.com 
वाराणसी के जिला कोर्ट द्वारा हिंदुओं को व्यास तहखाने में पूजा का अधिकार मिला तो कई लोग नाराज हो गए। इस लिस्ट में ममता बनर्जी के मंत्री सिद्दीकुल्लाह चौधरी का भी नाम है। उन्होंने हाल में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धमकी दी है।

धमकी देने से पहले ममता बनर्जी के मंत्री सिद्दीकुल्लाह चौधरी यह भूल गए कि योगी-मोदी-अमित की त्रिमूर्ति खतरों के खिलाडी एवं जख्मी शेर है, जो इन गीदड़ धमकियों से कभी नहीं डरे। मुझे पूर्ण विश्वास है कि 'शेर'योगी बंगाल जरूर जाएगा और उसकी दहाड़ से सिद्दीकुल्लाह की नींद हराम हो जाएगी। जब नरेंद्र मोदी को मुरली मनोहर जोशी के साथ जाकर लाल चौक पर तिरंगा फहराने पर इसी मोदी(तब प्रधानमंत्री थे) को आतंकवादियों ने नहीं आने के लिए धमकाया था, लेकिन मोदी ने कहा था "मैं आ रहा हूँ।' गए और जीवित वापस आये और आज उसी मोदी को भारत का जीवट प्रधानमंत्री बना है। सिद्दीकुल्लाह क्या कभी योगी ने किसी मुसलमान को नमाज या ईद मनाने से रोका? जो तुम एक योगी को अपना धर्म मानने पर धमकी दे रहे हो। 

सिद्दीकुल्लाह वही व्यक्ति हैं जिन्होंने सितंबर 2018 में कुरान को संविधान से ऊपर बताते हुए तीन तलाक पर लगे प्रतिबंध के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त की थी। इसके अलावा वह ममता बनर्जी के उस कमेटी का भी हिस्सा थे जो टीएमसी ने सागरदिघि में करारी हार के बाद बनाई गई थी। इस कमेटी का उद्देश्य यही पता लगाना था कि जब ममता सरकार मुस्लिमों के लिए इतनी स्कीमें चला रही है तो फिर उन्हें वोट क्यों नहीं मिला।

सिद्दीकुल्लाह ने एक रैली में कहा कि अगर सीएम योगी बंगाल आए तो वो लोग उनका घेराव करेंगे और उनको वापस नहीं जाने देंगे। तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता ने यूपी सीएम को धमकी देने के साथ माँग की है कि ज्ञानवापी में हिंदुओं को पूजा न करने दिया जाए।

उन्होंने कहा, “कोर्ट की मदद से ये लोग जबरदस्ती मस्जिद में पूजा कर रहे है। उनको (योगी आदित्यनाथ) अकल है या नहीं? अगर वो बंगाल आए तो हमारा संगठन उन्हें घेरेगा और उन्हें बंगाल से जाने नहीं दिया जाएगा। हमें ज्ञानवापी खाली चाहिए। हम तो किसी मंदिर में नहीं जाते इबादत करने। तो हमारी मस्जिदों में क्यों आ रहे हैं। मस्जिद तो मस्जिद है। ज्ञानवापी मस्जिद को खाली करें तुरंत।”

बंगाल में सिद्दीकुल्लाह ने यह बयान जमीयत उलेमा-ए-हिंद की एक सभा में दिया और कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद वहाँ पर 800 सालों से है वो कैसे उसे ध्वस्त कर सकते है।

ममता बनर्जी के मंत्री सिद्दीकुल्लाह के हिंदूविरोधी बयान

पहली बार ममता बनर्जी के मंत्री ने इस तरह हिंदूविरोधी बयान नहीं दिया। 2021 में इसी मंत्री ने कहा था बंगाल में गायों को कटने से कोई नहीं रोक सकता। टीएमसी मंत्री ने कहा था, “उत्तर प्रदेश सीएम योगी आदित्यनाथ यहाँ आए और कह गए कि अगर उनकी सरकार आई तो गौकशी नहीं होगी।”
इस पर उन्होंने कहा था, “गौकशी बंगाल में 1000-1200 सालों से होती आई है। हर कोई बीफ खाता है। मुस्लिम और अन्य भी। बीफ का वोट से क्या लेना देना। ये हिंदूवादी मानसिकता को बढ़ाने का प्रयास कर सकती है।” उन्होंने राम मंदिर फैसले पर भी कहा था कि इससे पीएम मोदी की छवि खराब होगी।

सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के विवादित बयान “हिंदू कोई धर्म नहीं, केवल धोखा है”,को अखिलेश यादव और I.N.D.I.A गठबंधन का मौन समर्थन

समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य दलित वोटों का ठेकेदार बनने के लिए हिन्दू धर्म और उसकी धर्मिक पुस्तकों के खिलाफ लगातार जहर उगल रहे हैं। पहले उनके समर्थकों ने पवित्र धार्मिक ग्रंथ रामचरितमानस की प्रतियों को जलाने का काम किया। अब स्वामी प्रसाद मौर्य ने हिन्दू धर्म के अस्तित्व पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि हिन्दू नाम का कोई धर्म नहीं नहीं है। हिन्दू धर्म केवल धोखा है। स्वामी प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया में अपना एक वीडियो शेयर कर लिखा है कि ब्राह्मणवाद की जड़े बहुत गहरी है और सारी विषमता का कारण भी ब्राह्मणवाद ही है। हिंदू नाम का कोई धर्म है ही नहीं, हिंदू धर्म केवल धोखा है। सही मायने में जो ब्राह्मण धर्म है, उसी ब्राह्मण धर्म को हिंदू धर्म कहकर के इस देश के दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों को अपने धर्म के मकड़जाल में फंसाने की एक साजिश है।

हिन्दू धर्म/सनातन को अपमानित कर आखिर विपक्ष क्या सिद्ध करना चाहता है? हिन्दू धार्मिक स्थलों को विवादित कर मुस्लिम तुष्टिकरण करने की नीति उनको हाशिए तक तो ले आयी है, देखना यही बाकि है और कितना नीचे हिन्दू विरोधी जाएंगे? पता नहीं, कब तक हिन्दुओं के सहिष्णुता की परीक्षा ली जाएगी? जिस दिन हिन्दुओं की सहिष्णुता का धैर्य टूटा परिणाम बहुत भयंकर होने वाले हैं, जिसके जिम्मेदार कोई और नहीं, हिन्दू धर्म/सनातन को अपमानित करने होंगे।  

अखिलेश यादव के इशारे पर हो रहा हिन्दू धर्म का अपमान 

स्वामी प्रसाद मौर्य के इस विवादित बयान से अब सवाल उठ रहे हैं कि स्वामी प्रसाद मौर्य किसके इशारे पर हिन्दू धर्म के खिलाफ अभियान चला रहे हैं ? क्या अखिलेश यादव स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान से सहमत है ? क्या अखिलेश यादव हिन्दू धर्म में विश्वास नहीं करते हैं ? क्या उनका पूजा-पाठ करना सिर्फ दिखावा है ? क्या अखिलेश यादव दलित वोट के लिए हिन्दू धर्म को विभाजित कर रहे हैं ? अब सोशल मीडिया पर लोग इन सवालों के जवाब मांग रहे हैं। लोगों का कहना है कि अखिलेश यादव अगर हिन्दू धर्म में विश्वास करते हैं, तो उन्हें स्वामी प्रसाद मौर्य को पार्टी से निकालना चाहिए। स्वामी प्रसाद मौर्य लगातार विवादित बयानबाजी के बावजूद समाजवादी पार्टी में बने हुए है तो इसका मतलब उनको अखिलेश यादव का पूरा समर्थन मिल रहा है। अखिलेश यादव की सहमति से ही हिन्दू विरोधी बयान दे रहे हैं।

वोट के लिए हिन्दू धर्म को तोड़ने की बड़ी साजिश

खुद को धर्मनिरपेक्ष कहने वाली पार्टियां मुस्लिमों को खुश करने और उनका वोट हासिल करने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपनाती रही हैं। कभी बीजेपी का डर दिखाकर, तो कभी उनके पिछेड़पन को मुद्दा बनाकर गुमराह करती रही है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साबित कर दिया कि अब मुस्लिम वोट के बिना भी बीजेपी सरकार बन सकती है। इसको देखते हुए हिन्दू विरोधी पार्टियों ने अपनी रणनीति बदल दी है। उन्होंने दलितों और पिछड़े वर्ग का वोट हासिल करने के लिए ब्राह्मणवाद और हिन्दू धर्म ग्रंथों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।  

I.N.D.I.A गठबंधन की रणनीति के तहत विवादित बयान

I.N.D.I.A गठबंधन हिन्दू विरोधी दलों का जमावड़ा है। समाजवादी पार्टी भी इस गठबंधन में शामिल है। कांग्रेस इस गठबंधन का नेतृत्व कर रही है। इसके अघोषित अध्यक्ष राहुल गांधी नफरत के खिलाफ और भाईचारा के लिए अभियान चलाने का दावा रहे हैं। भारत को जोड़ने के लिए पदयात्रा कर रहे हैं। अब देश की जनता जानना चाहती है और सवाल उठा रही है कि I.N.D.I.A गठबंधन में शामिल एक पार्टी का नेता स्वामी प्रसाद मौर्य समाज में नफरत पैदा कर रहा है, तो इसके लिए क्या कांग्रेस पार्टी और यह गठबंधन जिम्मेदार नहीं है ? क्या कांग्रेस पार्टी भी स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान से सहमत है ? क्या वह भी हिन्दू धर्म को धर्म नहीं मानती है ? लेकिन जिस तरह स्वामी प्रसाद मौर्य विवादित बयान दे रहा है, उससे लगता है कि वो I.N.D.I.A गठबंधन की रणनीति के तहत काम कर रहा है। यह सारा खेल I.N.D.I.A गठबंधन खेल रहा है। मोहब्बत की दुकान खोलने वालों की सहमति से हिन्दू धर्म को बांटने की कोशिश की जा रही है।

स्वामी प्रसाद मौर्य समाज और देश के लिए खतरा, FIR दर्ज

स्वामी प्रसाद मौर्य के विवादित बयान के बाद अब लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। लोगों ने स्वामी प्रसाद मौर्य पर समाज में तनाव पैदा करने और लोगों को लड़ाने के लिए बयानबाजी करने का आरोप लगाया है। लोगों का कहना है कि यह व्यक्ति अब समाज और देश के लिए खतरा बन गया है। अगर इस पर जल्दी कार्रवाई नहीं की गई तो 2024 का आम चुनाव आने तक यह जातीय दंगा कराने की भी कोशिश कर सकता है। एक सामजिक कार्यकर्ता और वकील विनीत जिंदल ने स्वामी प्रसाद मौर्य के विवादित बयान के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस से शिकायत की है। उन्होंने स्वामी प्रसाद मौर्य की विधान परिषद की सदस्यता समाप्त करने की मांग की है।

राहुल गाँधी की "मोहब्बत की दुकान" पर बिक रहा जहरीला माल ; अजीज कुरैशी मुसलमानों को भड़का कर हिन्दुओं के धैर्य की परीक्षा मत लो

राकेश कुमार आर्य , मुख्य संपादक उगता भारत, गाज़ियाबाद 

अजीज कुरैशी कांग्रेस के बड़े नेता हैं। कांग्रेस की परंपरागत तुष्टिकरण की नीति के चलते इन जैसे नेताओं को एक वर्ग विशेष के विरुद्ध बोलने का और घृणा का व्यापार करने का पूरा अधिकार प्राप्त रहता है। आजादी से पहले भी कांग्रेस के मंच से नफरत का माहौल बनाने में कांग्रेस के तत्कालीन मुस्लिम नेताओं ने किसी प्रकार की कमी नहीं छोड़ी थी। इसके उपरांत भी सावरकर जी जैसे हिंदूवादी नेताओं को कांग्रेस के कथित हिंदू नेताओं ने भी विभाजन का दोषी बताना आरंभ कर दिया। इनकी ऐसी मानसिकता के पीछे कारण केवल एक ही था कि मुसलमानों का तुष्टिकरण करते हुए उनकी वोट प्राप्त की जाएं।आज जब 1947 को बीते 75 वर्ष से अधिक का समय हो गया है तब भी कांग्रेस ने अपने अतीत से किसी प्रकार की शिक्षा नहीं ली है । इसके मंचों पर आज भी ऐसे लोग बैठे हैं जो नफरत की हवाओं को तेज करने का काम करते रहते हैं। यद्यपि कांग्रेस के राहुल गांधी "मोहब्बत की दुकान" चलाने की बात करते हैं पर अजीज कुरैशी जैसे लोग अपने ही नेता के दावे को फुस्स करने का काम करते रहते हैं।

इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए कांग्रेस के नेता अजीज कुरैशी ने कहा है कि "मुसलमानों ने हाथों में चूड़ियां नहीं पहन रखी हैं, 22 करोड़ में से 1-2 करोड़ मर भी जाएंगे तो कोई बात नहीं।"

कुरैशी यह भूल रहे हैं कि हिन्दुओं ने भी चूड़ी नहीं पहन रखी हैं। दूसरे, मुस्लिम कट्टरपंथियों की तरह हिन्दू कट्टरपंथ बन सड़क पर आ गया, अंजाम क्या होगा, यह उन्हें नहीं भूलना चाहिए। संयम की भी एक सीमा होती है। मुसलमानों को भड़का कर हिन्दुओं के धैर्य की परीक्षा मत लो। समय बहुत तेजी से बदल रहा है। जो समय परिवर्तन की धड़कन नहीं पढ़ सकता, उसे नेता कहना नेता के नाम का अपमान करना है। 

कांग्रेस ने सर सैयद अहमद खान, मोहम्मद अली जिन्ना , सोहरावर्दी जैसे मुस्लिम नेताओं की कट्टरता को न केवल सहन किया बल्कि अपने आचरण से उसे प्रोत्साहित भी किया । उसी का परिणाम रहा कि द्विराष्ट्रवाद के सिद्धांत को मुस्लिम नेता कांग्रेस के मंचों से हवा देते गए और एक दिन देश बंट गया। आज फिर अपने मंचों का दुरुपयोग करा रही कांग्रेस कहीं भारत के एक और विभाजन की इबारत तो नहीं लिख रही है ?

ये वही कुरैशी हैं जिन्हें उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य का राज्यपाल बनाने का काम भी कांग्रेस ने किया था । संवैधानिक पदों पर रहने के उपरांत भी अज़ीज़ कुरैशी जैसे लोगों के भीतर राष्ट्र भाव और सद्भाव पैदा नहीं हुआ। तब इनसे और क्या अपेक्षा की जा सकती है ? अजीज कुरैशी को इस बात पर भी आपत्ति है कि कांग्रेस जैसे धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दल के कार्यालय में मूर्तियां क्यों स्थापित की गई हैं? उनका कहना है कि हिन्दुत्व की बात करना डूब मरने वाली बात है। उनका यह भी कहना है कि गंगा मैया की जय बोलना आपत्तिजनक है।

यदि अजीज कुरैशी के इन शब्दों पर ध्यान दिया जाए तो उनकी धर्मनिरपेक्षता का वास्तविक अर्थ यही है कि भारत में  धर्मनिरपेक्षता के नाम पर वही होना चाहिए जो कुरान कहती हो या इस्लाम की जिसमें आस्था हो। उनके अनुसार धर्मनिरपेक्षता का यह अर्थ नहीं है कि प्रत्येक व्यक्ति की सामाजिक व धार्मिक मान्यताओं का सम्मान किया जाएगा और प्रत्येक को अपनी धार्मिक आस्था को प्रकट करने का पूर्ण अधिकार होगा। निश्चित रूप से उनके कथित धर्मनिरपेक्ष भारत में यदि यह स्थिति किसी मुसलमान को प्राप्त है तो हिंदू को भी अपनी  धार्मिक आस्था का पालन करते हुए जीवन जीने की पूर्ण छूट होनी चाहिए। ऐसी स्थिति में हिंदुत्व की बात भी करना न्याय संगत है। हमारा मानना है कि भारत का हिंदुत्व उस आर्यत्व का ही वर्तमान स्वरूप है जो ऋषियों के वसुधैव कुटुंबकम के पवित्रतम संदेश की अभिव्यक्ति है।

 उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त उत्तराखंड और मिजोरम के भी राज्यपाल रह चुके अजीज कुरैशी ने कहा है कि यदि ऐसा बोलने पर कांग्रेस पार्टी उन्हें बाहर का रास्ता दिखाती है तो वह भी उन्हें स्वीकार है। कुरैशी की यह बंदर घुड़की उनकी उस मानसिकता को स्पष्ट करती है जिसमें वह नैतिक रूप से पराजित हो चुके हैं अर्थात उन्हें पता है कि अब उन्हें जीवन भर कांग्रेस की ओर से कोई पद नहीं मिलेगा। ऐसे में अच्छा रहेगा कि वह कम से कम शांति दूतों के मध्य तो लोकप्रिय बने ही रहें। यही कारण है कि उन्होंने सस्ती लोकप्रियता प्राप्त करने के लिए मुसलमानी जज्बातों से खेलने का काम करते हुए उपरोक्त भड़काऊ और घृणास्पद बयान दिए हैं।

 हमारे देश में जो लोग बात-बात पर गंगा-जमुनी तहजीब की बात करते हैं, हिंदू मुस्लिम भाई-भाई का नारा देते हैं और संविधान की दुहाई देते हुए कहते पाए जाते हैं कि देश संविधान से चलेगा, वे सबके सब अजीज कुरैशी के इस बयान पर अपनी परंपरागत खामोशी के आंचल में समा गए हैं। इनकी आपराधिक मानसिकता और तटस्थता का देश विरोधी भाव कभी सच को सच नहीं कह सकता। कुर्सियों के पीछे शिकार खेलने की उनकी परंपरागत सोच के कारण ही देश का माहौल खराब होता है। ये उन लोगों की जबानों पर ताले लगाने की बात नहीं करते जो देश को तोड़ने की गतिविधियों में लगे रहते हैं। वास्तव में, किसी मुसलमान ने या हिंदू ने चूड़ी पहनी हों या ना पहनी हों पर इन धर्मनिरपेक्ष नेताओं ने जरूर चूड़ियां पहन रखी हैं। आजादी से पहले से ही यह कभी भी सच को सच कहने का साहस नहीं कर पाए। यही कारण है कि मोहब्बत की दुकान के सबसे बड़े बादशाह राहुल गांधी भी अजीज कुरैशी के इस बयान के बाद कुर्सियों के पीछे जा छुपे हैं। यह नूपुर शर्मा को लेकर हंगामा काट सकते हैं और हंगामे की बातों पर इनका हंगामा खामोशी में परिवर्तित हो जाता है।

पूरा देश जानता है कि अजीज कुरैशी ‘मध्य प्रदेश उर्दू एकेडमी’ के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। 1973 में उन्हें मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार में मंत्री भी बनाया गया था। 1984 में उन्हें राज्य के सतना लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुना गया था। उनका परिवार अरब-पठान नस्ल से ताल्लुक रखता है और वो भोपाल से आते हैं। वो अक्सर उर्दू ही बोलते रहे हैं। अपनी मजहबी मान्यताओं को राजनीति में भी लागू करना इनकी प्रकृति में सम्मिलित है। जिस समय यह ऐसा कर रहे होते हैं उस समय भी उनकी मान्यता यही होती है कि ऐसा करना उनका संवैधानिक अधिकार है। कहने का अभिप्राय है कि संविधान का भी इस्लामीकरण हो जाए और उस पर भी हिंदू मौन रहे तो अजीज कुरैशी जैसे लोगों के अनुसार वास्तविक धर्मनिरपेक्षता इसी को कहा जा सकता है।

 लोकतंत्र की खूबसूरती इसी में है कि हम अपने विचारों को लोकतांत्रिक ढंग से मर्यादित आचरण करते हुए प्रकट करें। जो लोग जिम्मेदारी के पदों पर बैठे हैं या बैठ चुके हैं उनसे तो यह अपेक्षा और भी अधिक की जाती है कि वह लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन करते हुए ही अपने शब्दों का चयन करेंगे। भारत के लोकतांत्रिक संविधान की यह विशेषता है कि वह प्रत्येक व्यक्ति को फूलने फलने का पूर्ण अवसर उपलब्ध कराता है। संविधान की इस खूबसूरती का हम सबको सम्मान करना चाहिए और प्रत्येक के अधिकारों का ध्यान रखते हुए भारत निर्माण में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करनी चाहिए। अजीज कुरैशी जैसे लोगों को राजनीति से दूर करने के लिए इस समय राजनीतिक आचार संहिता की नितांत आवश्यकता है। हमारा मानना है कि समान नागरिक संहिता से भी पहले राजनीतिक आचार संहिता देश में लागू की जानी चाहिए । जिससे कि अजीज कुरैशी जैसे लोगों को समाज में किसी भी प्रकार का घृणास्पद परिवेश सृजित करने की अनुमति न हो । लोगों के मध्य सांप्रदायिक आधार पर विभेद करना या सांप्रदायिक आधार पर किसी वर्ग विशेष को मारने काटने की धमकी देना संवैधानिक अपराध ही नहीं है बल्कि इसे देशद्रोह जैसे गंभीर अपराध के साथ जोड़कर देखे जाने की आवश्यकता है। 

(लेखक सुविख्यात इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता हैं।)

स्वतंत्रता दिवस पर UP के मदरसे में मौलाना ने कहा- ‘हमें मज़हबी और कुरान की आजादी चाहिए’: ऐसी आजादी पर हम पहले भी लात मारते थे, अब भी मारते हैं

           मदरसे से मौलाना अब्दुर्रहमान और हरदोई के ASP दुर्गेश सिंह (साभार- स्क्रीनशॉट ऑफ़ वायरल वीडियो)
उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में एक मौलाना ने 15 अगस्त के दिन मस्जिद में माइक से एक विवादित बयान दिया, जो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में मौलाना आजादी को लेकर आपत्तिजनक बातें कहता हुआ दिख रहा है। इसके साथ ही वह मुस्लिमों के लिए मजहबी आजादी की माँग कर रहा है।

मौलाना ने कहा, “ऐसी आजादी पर हम कल भी लात मारते थे, आज भी लात मारते हैं।” मौलाना का नाम अब्दुर्रहमान जामई बताया जा रहा है। वहीं, मौलाना के इस विवादित बयान का वीडियो सामने आने के बाद हिन्दू संगठनों में रोष है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से आरोपित मौलाना के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है।

 

‘हमें मजहबी आजादी चाहिए’

मौलाना अब्दुर्रहमान जामई ने अपने विवादित बयान में कहा, “इस्लाम के जनाजे निकाले जा रहे हैं। कुर्बानी पर पाबंदी लगाई जा रही है। कब्रिस्तान के ऊपर कब्जा किया जा रहा है। लाउडस्पीकर पर अजान पढ़ने पर मुकदमा हो रहा है। कुरान को बदलने का प्रयास किया जा रहा है। यह कैसी जम्हूरियत है, यह कैसी आजादी है।”
मौलाना अब्दुर्रहमान यहीं नहीं रुका। उसने आगे कहा, “यह तो मुसलमानों के मजहबी मामलों में घुसपैठ है। अगर आजादी इसी का नाम है तो हम ऐसी आजादी के तलबगार नहीं हैं। ऐसी आजादी पर हम कल भी लात मारते थे, आज भी लात मारते हैं।”
वायरल वीडियो में अब्दुर्रहमान जामई यह भी कहता दिख रहा है, “हमें मजहबी आजादी चाहिए। हमें कुरान की आजादी चाहिए। हमें इबादत और गाँव की हिफाजत चाहिए। हमें इज्जत और आबरू की हिफाजत चाहिए। हमें इस्लाम की हिफाजत चाहिए। इस जम्हूरी मुल्क में किसी के मामलात में घुसपैठ हो रही है। आज हिंदुस्तान में यही हो रहा है।"
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मौलाना ने यह विवादित तकरीर गोपामऊ की लाल पीर मस्जिद के अंदर स्थित मदरसे में 15 अगस्त को दिया था। वहीं, हिन्दू संगठन वीडियो सामने आने के बाद से भड़के हुए हैं। हिन्दू संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर जिला प्रशासन ने मौलाना के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की तो वे लोग आंदोलन करेंगे। 
हरदोई पुलिस ने वायरल वीडियो का संज्ञान में लेते हुए मामले की जाँच शुरू कर दी है। हरदोई के अपर पुलिस अधीक्षक दुर्गेश सिंह ने कहा कि मौलाना अब्दुर्रहमान जामई का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस पर तथ्यों की जाँच करके कार्रवाई की जा रही है।

‘लड़की चीज ही ऐसी होती है…’: सरवर चिश्ती, अजमेर दरगाह का खादिम

राजस्थान के अजमेर में 90 के दशक में 100 से ज्यादा लड़कियों के साथ रेप हुआ। देश के सबसे बड़े उस रेप कांड में मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह के खादिम तक शामिल थे। उस घटना पर ‘अजमेर 92’ नाम से फिल्म आ रही। अब इस्लामी संगठन दरगाह का हवाला देकर फिल्म का विरोध कर रहे हैं। वहीं, दरगाह के खादिम ने एक बेहद आपत्तिजनक बयान दिया है।

वास्तव में हिन्दुओं की हो रही दुर्गति के लिए हिन्दू ही जिम्मेदार हैं। जिस दिन हिन्दू कब्रों पर जाना छोड़ देगा, हिन्दू महिला का यौन शोषण नहीं होगा। ये कब्रें हिन्दुओं के लिए बनती हैं, इस्लाम में कब्रों को नहीं पुजा जाता। हिन्दुओं के चढ़ाये धन पर ये लोग ऐश करते हैं, जिस दिन से हिन्दू कब्रों पर जाना छोड़ देगा, इनके सारे ऐश-ओ-आराम की अर्थी निकल जाएगी। इतना विश्वास अगर हिन्दू अपने ही देवी-देवताओं पर करे, देखिए कितना सम्मान मिलता है। 

मंदिर में पुजारियों की तरह दरगाहों में खादिम होते हैं। अजमेर शरीफ दरगाह के खादिमों की संस्था अंजुमन सैयद जादगान के सचिव सरवर चिश्ती ने अपने विवादित बयान के जरिए अजमेर रेप कांड को सही ठहराने और इसके लिए पीड़ित लड़कियों पर दोष मढ़ने की कोशिश की है।

चिश्ती ने कहा कि ‘लड़की चीज ही ऐसी होती है… बड़े से बड़ा फिसल जाता है’। इस मामले को हिंदुओं से जोड़ते हुए चिश्ती ने कहा, “आदमी पैसों से करप्ट नहीं हो सकता, मूल्यों से करप्ट नहीं हो सकता। लड़की चीज ही ऐसी है कि बड़े से बड़ा फिसल जाता है। वो थी ना… नाम क्या था… जो पेड़ के नीचे बैठे थे, विश्वामित्र जैसे भटक सकते हैं।”

चिश्ती ने आगे कहा, “अच्छा… जितने भी बाबा लोग जेल में हैं, ये सिर्फ वो हैं जो लड़की के मामले में फँसे हैं। यह ऐसा सब्जेक्ट है कि बड़े से बड़ा फिसल जाता है।” चिश्ती ने इसमें मुस्लिम मौलवियों का नाम ना लेकर एक नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की।

बताते चलें कि इस रेप कांड में लगभग सभी लड़कियाँ हिंदू थीं और उन्हें ब्लैकमेलिंग एवं बलात्कार को अंजाम देने अधिकतर समुदाय विशेष के थे। इस घटना के मुख्य आरोपित थे- फारुक चिश्ती, नफीस चिश्ती और अनवर चिश्ती। तीनों युवक कॉन्ग्रेस में महत्वपूर्ण पदों पर थे और अजमेर दरगाह के खादिम परिवारों से आते थे।

इस फिल्म के विरोध में अजमेर दरगाह कमेटी ने कहा था कि फिल्म के जरिए एक खास समुदाय को निशाना बनाने की कोशिश की गई है। फिल्म से अजमेर दरगाह और मोइनुद्दीन चिश्ती की छवि को नुकसान पहुँचाने की कोशिश हुई तो वे कानूनी कार्रवाई करेंगे। रिलीज से पहले फिल्म दरगाह कमेटी को दिखाने की भी की गई है।

सरवर चिश्ती वही शख्स है, जिसने नूपुर शर्मा मामले में लोगों को भड़काने का काम किया था। उसने कहा था, “इस वक्त मुल्क में जो हालात हैं। नामूस ए रसूल सललल्लाहु अलेही वसल्लम की शान में गुस्ताखी हो रही है। ये हम कभी कबूल नहीं करेंगे। ऐसा आंदोलन करेंगे कि पूरा भारत हिल जाएगा।” चिश्ती ने जिस अंदाज में यह ऐलान किया था, वह उसके इरादों को साफ तौर पर जाहिर कर रहा था।

चिश्ती पर प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से कनेक्शन होने का भी आरोप है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरवर चिश्ती खुद को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का सदस्य बताता है। उसे इस संगठन के सदस्यों के साथ कई बार देखा जा चुका है। वह मंचों से कई बार पीएफआई की तारीफ कर चुका है। 2020 में, उसने यह कहते हुए पीएफआई का बचाव किया था कि संगठन ‘भारत के संविधान को बचा रहा है’। 

पीएफआई के नेताओं के साथ बैठे सरवर का एक वीडियो सामने आया था। इस वीडियो में सरवर चिश्ती कहता है, “हम मुसलमानों के हामी हैं, मददगार हैं, उनके तरफदार हैं और ये तंजीमें- PFI-SDPI मुसलमानों की आवाज उठाती है।” इस दौरान SDPI नेता तस्लीम रहमानी भी सरवर चिश्ती के साथ बैठा था। साथ में PFI का अनीस, SDPI का जनरल सेक्रेटरी मोहम्मद शफी, राजस्थान PFI अध्यक्ष आसिफ भी था। सरवर चिश्ती इनकी तारीफ कर रहा था।

इतना ही नहीं, 10 साल पहले कर्नाटक में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के मंच से भाषण देते हुए सरवर चिश्ती ने नरेंद्र मोदी को लेकर आपत्तिजनक बात कही थी। तब नरेंद्र मोदी को PM उम्मीदवार बनाने की अटकलें लग रही थीं।

उस समय सरवर चिश्ती ने कहा था, “अगर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन गया तो कोई ताज्जुब नहीं होगा कि सभी मुसलमान आतंकवादी बन जाएँ।” चिश्ती के इस बयान के बाद कर्नाटक में उसके खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। हालाँकि, उस मामले का क्या हुआ, किसी को ज्ञात नहीं है।

सरवर का बेटा आदिल चिश्ती हिंदू-देवताओं का मजाक बनाते हुए 23 जून 2022 को कहा था, “333 करोड़ खुदाओं का अस्तित्व कैसे माना जाएगा? यह कैसे तार्किक है? एक खुदा का तो समझ में आता है, लेकिन 333 करोड़ खुदा, थोक में देवता (Wholesale of Gods), उसको कैसे माना जाएगा? मैं सोचता हूँ कि अगर व्यक्ति को हजार साल की जिंदगी मिले तो भी वह सभी 333 करोड़ खुदाओं को राजी नहीं कर सकता है।”

‘जो भी मोदी भक्त होगा, मारा जाएगा’: कांग्रेस नेता उदित राज

अक्सर विवादित बयानों के कारण सुर्ख़ियों में रहने वाले कांग्रेस नेता उदित राज ने एक बार फिर से भड़काऊ बातें की हैं। पार्टी ने उन्हें  ‘अखिल भारतीय असंगठित कामगार और कर्मचारी कांग्रेस’ का अध्यक्ष बनाया था। उदित राज ने ट्विटर पर अपनी एक तस्वीर शेयर की, जिसमें वो भाषण देते हुए दिख रहे हैं। साथ ही कैप्शन में लिखा, “जो भी मोदी भक्त होगा, मारा जाएगा।” लोग उनके इस बयान की आलोचना कर रहे हैं।

2014 में भाजपा के ही टिकट पर नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली से सांसद चुने गए उदित राज का 2019 में टिकट कट गया, जिसके बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ उलूल-जलूल बकने लगे। भाजपा ने उनका टिकट काट कर गायक हंस राज हंस को उम्मीदवार बनाया था, जिन्हें जीत भी मिली। इसके बाद वो उदित राज भाजपा के खिलाफ हर एक विरोध प्रदर्शन का समर्थन करते हैं और भड़काऊ बयान देते हैं।

हालिया बयान उन्होंने मनरेगा मजदूरों के समर्थन में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन में दिया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार पर भी टिप्पणी करते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश न तो दंगा मुक्त हुआ है और न ही गुंडा मुक्त हुआ है। माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या पर उदित राज ने यूपी सरकार को भला-बुरा कहा था। हाल ही में वो हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला पहुँचे थे और वहाँ भी मोदी सरकार के खिलाफ बयान दिया था।

जंतर-मंतर पर आयोजित हालिया प्रदर्शन में उन्होंने ‘मनरेगा मजदूर भूखा है, मोदी का वादा झूठा है’ का नारा भी दिया। बता दें कि सरकार पर मनरेगा बजट में कटौती का आरोप लगाते हुए ये विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। कई कांग्रेस कार्यकर्ता इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। बैनर पर ‘मनरेगा बचाओ, ग्रामीण भारत बचाओ’ लिखा हुआ था। हाल ही में उदित राज में फ़्रांस और इजरायल में दंगों के हवाला देते हुए भारत में भी ऐसा होने का डर दिखाया था।

मौलाना अरशद मदनी जब ॐ और अल्लाह एक, फिर अज़ान और नमाज में ॐ क्यों नहीं?

चलो देर आए दुरुस्त आए, अप्रयत्क्ष रूप में इस्लामिक संगठन जमीयत-उलेमा-ए-हिंद और उसके चीफ मौलाना अरशद महमूद मदनी ने मान गए कि ॐ और अल्लाह एक हैं। अब हिन्दू संगठन यह भी प्रश्न कर रहे है कि जब ॐ और अल्लाह एक है फिर अज़ान और नमाज़ में ॐ का जाप कब? अल्पज्ञानी मदनी को शायद यह नहीं मालूम कि ॐ शब्द में समस्त देवी-देवताओं का समावेश है। कई बार अपने लेखों में 'नमाज', 'अल्लाह' और 786 का हिन्दू धर्म से सम्बन्ध के बारे में लिख चूका हूँ। लेकिन अब मदनी ने तो ॐ और अल्लाह की परिभाषा बता दी। मदनी ने जो जहर उगला है,लोकेश मुनि की तर्ज पर समस्त हिन्दुओं, हिन्दू संगठनों को गंभीरता से लेकर जवाब देना होगा। जमीयत और मदनी के विरुद्ध बिगुल बजाकर स्पष्ट कहा जाए कि "अगर तुम्हारे कहने में सच्चाई है, फिर नमाज और अज़ान की ॐ का उच्चारण करवाओ या जहर फ़ैलाने पर माफ़ी मांगो। महन्त धीरेन्द्र शास्त्री ठीक कहते हैं कि 'हद में रहोगे, ठीक है।'  
मदनी सोशल मीडिया पर ट्रेंड हो रहे इस वीडियो को देख, अपनी अवाम को सच्चाई बताओ :
इस जीती जागती सच्चाई पर ध्यान आज तक किसी का क्यों नही जा पाया। इससे अधिक सनातन होने का प्रमाण क्या चाहिए? यह अत्यन्त ही दुर्लभ जानकारी है। जिसको लुप्त करने का प्रयास करने वाले सेक्युलर लोगों पर इतिहास की इस सच्चाई का बडा तमाचा है।  इस छोटे से विडियो का किसी के पास उत्तर नहीं मिल सकता। विडिओ बनाने वाले शोध करता को नमन करते हैं और निवेदन करते हैं ऐसी और छुपी हुई सच्चाईयों को ढूंढें और सनातन विरोधी तत्वों की जुबान पर ताला लगाएं।

इस्लामिक संगठन जमीयत-उलेमा-ए-हिंद और उसके चीफ मौलाना अरशद महमूद मदनी लगातार चर्चा में बने हुए हैं। पहले भारत को मुस्लिमों की मातृभूमि बताने के बाद अब मौलाना मदनी ने मनु, आदम तथा ॐ और अल्लाह को एक बता दिया है। इसको लेकर जैन आचार्य मुनि लोकेश ने मदनी को लताड़ लेते हुए मंच छोड़ दिया था। हालाँकि अब आचार्य चिदानंद ने मदनी के बयान का समर्थन किया है। वहीं चक्रपाणि महाराज ने मदनी को सनातनी बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानंद ने कहा है, “मदनी के बयान में सहमति और असहमति की बात नहीं है। मैंने अपने विचार अपने ढंग से प्रकट किए। उन्होंने अपने विचार अपने ढंग से प्रकट किए हैं। जिसको सुनना होगा वो सुनेगा। मुझे नहीं मालूम लोकेश मुनि जी के मन में क्या था और उन्होंने क्या समझा है। किस रूप में इसे लिया है।” 

आचार्य चिदानंद ने यह भी कहा है, “मैंने मदनी की बात को इस रूप से लिया है कि मैं सब का सम्मान करता हूँ। मेरे लिए सब समान है और मैं सब का सम्मान करता हूँ। यही हमारे देश का संविधान भी है। हालाँकि यदि कोई इस्लाम धर्म को मानता है और उसकी विशेषता बताता है, तो उसको बताना ही चाहिए। यह स्वाभाविक है। वह उसकी विशेषता बताएँगे ही।”

उन्होंने आगे कहा है कि हिंदू धर्म मानने वाला भी हिंदू धर्म की विशेषता बताएगा। लेकिन अपने अपने धर्म की विशेषता को बताते हुए अपने मूल से, अपने मूल्यों से और अपनी जड़ों से अपनी संस्कृति तथा संस्कारों से जुड़े रहना चाहिए। यही आज का संदेश है।

वहीं मदनी के बयान को लेकर अब इस पर अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चक्रपाणि महाराज ने भी पलटवार किया है। चक्रपाणि महाराज ने कहा है कि मौलाना मदनी ने कहा है वह मनु को मानते हैं तो मनु तो सनातन धर्मी थे। उन्हें भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप धारण कर बचाया था। इसलिए मौलाना मदनी भी सनातनी हिंदू हुए। अब उन्हें राष्ट्रभक्ति दिखाने, वंदे मातरम बोलने और भारत माता की जय बोलने की आवश्यकता है। क्योंकि हिंदू सनातन धर्मी राष्ट्रभक्त होते हैं।

मनु, आदम तथा ॐ और अल्लाह को बताया था एक

दरअसल, मौलाना अरशद मदनी ने कहा, “मैंने धर्म गुरुओं से पूछा कि जब कोई नहीं था। न श्रीराम थे, न ब्रह्मा थे और न शिव थे, जब कोई नहीं था तो मनु पूजते किसको थे। कोई कहता है कि शिव को पूजते थे। बहुत कम लोग ये बताते हैं कि मनु ॐ को पूजते थे। ॐ कौन है? बहुत से लोगों ने कहा कि उनका कोई रूप-रंग नहीं है। वो दुनिया में हर जगह हैं। अरे बाबा इन्हीं को तो हम अल्लाह कहते हैं। इन्हें ही आप ईश्वर कहते हैं।”
मौलाना ने आगे कहा है, “इन्हें ही तो हम अल्लाह, आप ईश्वर, फारसी बोलने वाले खुदा और अंग्रेजी बोलने वाले गॉड कहते हैं। इसका मतलब यह है कि मनु ही आदम थे। वह ॐ यानी अल्लाह को पूजते थे। हजरत आदम जो नबी थे, सबसे पहले उन्हें भारत की धरती के भीतर उतारा। अगर चाहता तो आदम को अफ्रीका, अरब, रूस में उतार देता। वो भी जानते हैं, हम भी जानते हैं कि आदम को दुनिया में उतारने के लिए भारत की धरती को चुना गया।”
यही नहीं मौलाना ने संघ प्रमुख मोहन भागवत की घर वापसी वाले बयान मदनी ने कहा है कि इस्लाम भारत के लिए कोई नया मज़हब नहीं है। बल्कि अल्लाह ने पैगंबर आदम यानी मनु को यहीं उतारा, उनकी पत्नी हव्वा को उतारा, जिन्हें वे (हिंदू) हमवती कहते हैं और वे सारे नबियों, मुसलमानों, हिंदुओं, ईसाइयों के पूर्वज हैं।

मौलाना मदनी को जैनाचार्य लोकेश मुनि ने लगाई लताड़

जैन आचार्य लोकेश मुनि ने मौलाना मदनी को फटकार लगाते हुए कहा है, “मदनी जो कहा है उससे कोई भी सहमत नहीं है। मैं आपसे निवेदन करता हूँ यदि हमें जोड़ने की बात आपको करनी है तो प्यार-मोहब्बत की बात कीजिए। आपने जितनी कहानी सुनाई है ॐ, अल्लाह, मनु, ये वो उससे कहीं अधिक 4 गुना कहानी मैं सुना सकता हूँ। मदनी साहब को मैं शास्त्रार्थ के लिए बुला रहा हूँ। आप दिल्ली आइये या मुझे सहारनुपर बुलाइये।”
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जमीयत के मंच से मौलाना मदनी को लोकेश मुनि ने दिया मुंह तोड़ जवाब ; जमीयत के मंच पर बवाल
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जमीयत के मंच से मौलाना मदनी को लोकेश मुनि ने दिया मुंह तोड़ जवाब ; जमीयत के मंच पर बवाल
उन्होंने मदनी की बातों का खण्डन करते हुए कहा है, “आपने जो बात कही मैं उससे सहमत नहीं हूँ। चारों धर्म के संत या कोई भी अन्य इससे सहमत नहीं है। आप केवल आपस मे मिलजुलकर रहने को लेकर सहमत हैं। ये जो कहानी है ॐ, मनु अल्लाह, उसकी औलाद ये अब फालतू की बातें हैं। आपने सारा पलीता लगा दिया एकता के सद्भावना के सम्मेलन में।”

कांग्रेस नेताओं में हिन्दू धर्म को नीचा दिखाने की लगी होड़, शिवराज पाटिल के बाद उदित राज ने दिया विवादित बयान

हिन्दू धर्म को आरोपित करना समय समय पर यह सिद्ध होता रहा है कि सनातन धर्म को कलंकित करना कांग्रेस के DNA में है। मुस्लिम तुष्टिकरण में इतना अधिक डूब चुकी है कि सच बोलने में संकोच होता है। इस्लामिक आतंकवाद को संरक्षण देने "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" कहकर बदनाम किया गया। कांग्रेस और जितने भी छद्दम धर्म-निरपेक्ष पार्टियां राष्ट्र को बताएं कि अपनी कुर्सी की खातिर क्यों अयोध्या, काशी और मथुरा की सच्चाई छुपाकर विवादित बनाया गया? जिस कारण शिवराज पाटिल तुष्टिकरण करते गीता का सार ही भूल गए। दूसरे, वह समय भी आ रहा है, जब सार्वजानिक रूप नेहरू और इंदिरा गाँधी के DNA पर चर्चा होगी। जिसका संकेत महात्मा गाँधी के प्रपोत्र कुलकर्णी राहुल गाँधी को दे चुके हैं, 'तुम्हारे दादा गाँधी नहीं, फिरोज खान है।' 

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राहुल गाँधी आपके दादा गांधी नही फिरोज खान हैं; आप मुस्लिम/कैथोलिक डीएनए का एक संयोजन मात्र हैं :
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कांग्रेस नेता शिवराज पाटिल के बयान से उठा तूफान अभी शांत भी नहीं हुआ था कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के करीबी उदित राज ने विवादित बयान देकर अपनी और अपनी पार्टी कांग्रेस की फजीहत करा रहे हैं। एक बार फिर उदित राज ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के केदारनाथ दौरे और आरएसएस को लेकर विवादित और झूठा बयान दिया। उन्होंने बिन मांगे आरएसएस को सलाह दी है कि हिंदू धर्म की कुरीतियों को खत्म करने में प्रधानमंत्री मोदी को लगाएं ताकि धर्मांतरण रुके।

कांग्रेस नेता उदित राज ने प्रधानमंत्री मोदी के केदारनाथ दौरे के बाद अपने आफिशियल ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट किया। जिसमें उन्होंने लिखा, ‘प्रयागराज में RSS चिंतित है कि धर्मांतरण हो रहा है। पीएम मोदी आज छठी बार केदारनाथ दर्शन करने पहुंचे। आज कल ज्यादतर समय तीर्थ स्थलों में बिता रहे हैं। RSS मोदी जी को पूरा समय हिंदू धर्म की कुरीतियों को खत्म करने में लगाएं ताकि धर्मांतरण रुके और पीएम किसी और को बनाएं।’

इस ट्वीट के बाद बीजेपी ने उदित राज पर पलटवार किया। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि गुजरात चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच एक प्रतियोगिता चल रही है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘एक और नमूना! शिवराज पाटिल से लेकर उदित राज तक। ये बयान संयोग नहीं हैं। ये वोटबैंक का प्रयोग और उद्योग हैं। गुजरात चुनाव से पहले आप और कांग्रेस के बीच एक प्रतियोगिता है कि कौन अपनी कट्टर हिंदू नफरत से वोटबैंक का ध्रुवीकरण कर सकता है।’

सोशल मीडिया पर भी लोग उदित राज और कांग्रेस की जमकर क्लास लगा रहे हैं। लोग उदित राज को सलाह दे रहे हैं कि हिन्दू धर्म में कुरीति खोजने से ज्यादा ध्यान अपनी और अपनी पार्टी की कुरीतियों को दूर करने पर लगाए। लोगों ने उदित राज के धर्म परिवर्तन की याद दिलाते हुए कहा कि दूसरे धर्म के लोगों को हिन्दू धर्म में दखल देने की कोई जरूरत नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी और आरएसएस हिन्दू धर्म की चिंता कर रहे हैं।



नूपुर शर्मा पर लक्ष्मण रेखा का उल्लंघन करने पर 117 रिटायर्ड जज-नौकरशाहों-सैन्य अधिकारियों का खुला पत्र, CJI को भेजा

नूपुर विवाद शुरू होते ही जिस की शंका को व्यक्त किया जा रहा था हर बीतते दिन शंका सत्यापित होती जा रही है। विवाद इस पर नहीं है कि नूपुर ने पैगम्बर का अपमान किया, बल्कि इस बात का है कि हमारी इस्लामिक किताबों में लिखी जिस बात को परदे में समझ रहे थे, वह हिन्दुओं को भी मालूम है। कट्टरपंथियों को शायद यह भी नहीं मालूम कि हत्याएं करवाकर जितना डर बैठाने के लिए नूपुर विवाद को जिन्दा रखेंगे उतना ही इस्लाम के लिए घातक होगा। हर कट्टरपंथी मौलानाओं को समझ जानी चाहिए। जिसका शंखनाथ चीन से हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट की जिस टिप्पणी को कट्टरपंथी, छद्दम धर्म-निरपेक्ष नेता/पार्टियां और गंगा-जमुनी तहजीब जैसे ढोंगी नारे लगाने वाले सिरमौर समझे बैठे थे, वही टिप्पणी उन जजों के भविष्य को अँधेरे में डालने जा रहा है। 
नूपुर शर्मा पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों जस्टिस सूर्यकान्त और जस्टिस जेबी पारदीवाला की विवादित टिप्पणी पर रार थमता नहीं दिख रहा है। 15 सेवानिवृत्त जजों, 77 रिटायर्ड नौकरशाहों और 25 पूर्व सैन्य अधिकारियों ने खुला पत्र जारी कर के नूपुर शर्मा पर सुप्रीम कोर्ट के दोनों जजों की टिप्पणी को ‘दुर्भाग्यपूर्ण और गलत उदाहरण पेश करने वाला’ करार दिया है। नूपुर शर्मा पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के इन दोनों जजों ने विवादित टिप्पणी की थी।

पत्र में लिखा है कि हम एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते ये विश्वास रखते हैं कि किसी भी देश का लोकतंत्र तभी तक अक्षुण्ण रहेगा, जब तक उसकी सारी संस्थाएँ संविधान के हिसाब से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करती रहेंगी। उन्होंने लिखा कि सुप्रीम कोर्ट के दो जजों द्वारा की गई ताज़ा टिप्पणी ‘लक्ष्मण रेखा’ का उल्लंघन है और हमें इस पर बयान जारी करने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने लिखा कि इन टिप्पणियों से देश-विदेश में लोगो को हैरानी हुई है।

पत्र में लिखा है, “जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबी पारदीवाला द्वारा की गई टिप्पणियाँ, जो कि जजमेंट का हिस्सा नहीं हैं – किसी भी तरह से न्यायिक उपयुक्तता और निष्पक्षता के दायरे में नहीं आती। ऐसे अपमानजनक तरीके से कानून का उल्लंघन न्यायपालिका के इतिहास में आज तक नहीं हुआ। इन बयानों या याचिका से कोई लेनादेना नहीं था। नूपुर शर्मा को न्यायपालिका तक पहुँच से मना कर दिया गया और ये संविधान की भावना के साथ-साथ प्रस्तावना का भी उल्लंघन है।”

पत्र में आगे लिखा है कि जजों का ये बयान कि देश में जो कुछ भी हो रहा है, उसके लिए सिर्फ और सिर्फ नूपुर शर्मा जिम्मेदार हैं – इसका कोई औचित्य नहीं बनता। सेवानिवृत्त जजों, अधिकारियों और सैन्य अधिकारियों ने लिखा कि ये सब कह कर जजों ने एक तरह से उदयपुर में सिर कलम किए जाने की क्रूर घटना के अपराधियों को दोषमुक्त करार दिया है। पत्र में लिखा है कि देश की दूसरी संस्थाओं को नोटिस दिए बिना उन पर टिप्पणी चिंताजनक और सतर्क करने वाला है।

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अजमेर दरगाह के खादिम सलमान चिश्ती ने नूपुर शर्मा की हत्या के लिए उकसाया, कहा- जो लाएगा ​उसकी गर्

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अजमेर दरगाह के खादिम सलमान चिश्ती ने नूपुर शर्मा की हत्या के लिए उकसाया, कहा- जो लाएगा ​उसकी गर्

पत्र में आगे लिखा है कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की न्यायपालिका के इतिहास पर यर टिप्पणियाँ धब्बे की तरह हैं। इस पर आपत्ति जताई गई है कि याचिकाकर्ता को बिना किसी सुनवाई के दोषी ठहरा दिया गे और न्याय देने से इनकार कर दिया गया, जो किसी लोकतांत्रिक समाज की प्रक्रिया नहीं हो सकती। साथ ही याद दिलाया गया है कि एक ही अपराध के लिए कई सज़ा का प्रावधान नहीं है, इसीलिए नूपुर शर्मा FIRs को ट्रांसफर कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुँची थीं।