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मोदी सरकार के बाद जावेद अख्तर ने घर में घुस पाकिस्तान को मारा

गीतकार जावेद अख्तर के पाकिस्तान जाने पर भारत में हो रहे विरोध को पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर घर में घुसकर अपनी  शायर-जीकल स्ट्राइक से मात देकर उसकी हैसियत दिखाकर विरोधियों को शांत कर दिया।   
पाकिस्तान में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे गीतकार जावेद अख्तर ने इस्लामी मुल्क के खिलाफ कुछ ऐसा कहा, जिससे वो सोशल मीडिया में खासे चर्चा में बने हुए हैं। कार्यक्रम के दौरान उनसे पूछे गए एक सवाल का उन्होंने जवाब दिया, जो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। जावेद अख्तर के जवाब की तारीफ कंगना रनौत भी करते नहीं थक रही हैं।

लाहौर में आयोजित फैज फेस्टिवल में शिरकत करने पहुँचे जावेद अख्तर सवालों का जवाब दे रहे थे। ऐसे में एक शख्स के सवाल का जवाब देते हुए जावेद ने कहा, “हमने तो हिंदुस्तान में नुसरत (नुसरत फतह अली खान) के बड़े-बड़े फंक्शन किए, मेहंदी हसन के बड़े-बड़े प्रोग्राम किए लेकिन आपके मुल्क में लता मंगेशकर का एक भी फंक्शन नहीं हुआ।” उन्होंने आगे कहा कि हम एक दूसरे को इल्जाम न दें। अहम बात यह है कि फिजा इतनी गरम है वो कम होनी चाहिए।

जावेद अख्तर ने आगे कहा, “हम बंबई (मुंबई) के लोग हैं। हमने देखा हमारे शहर पर कैसे हमला हुआ था। हमलावर नॉर्वे या इजिप्ट से नहीं आए थे। हमलावर आपके मुल्क में अभी भी घूम रहे हैं। यह शिकायत अगर हिंदुस्तानी के दिल में है तो आपको बुरा नहीं मानना चाहिए।”

अभिनेत्री कंगना रनौत ने जावेद अख्तर के इस बयान पर उनकी तारीफ की है। जावेद अख्तर के बयान वाले वीडियो को शेयर करते हुए कंगना रनौत ने ट्विटर पर लिखा, “जब मैं जावेद साहब की कविताएँ सुनती हूँ तो लगता है माँ सरस्वती की इन पर कैसी कृपा है लेकिन देखो कुछ तो सच्चाई होती है इंसान में, तभी तो खुदाई होती है उनके साथ में। जय हिंद जावेद साहब, घर में घुसकर मारा।”

कंगना रनौत और जावेद अख्तर के बीच मनमुटाव की स्थिति रहती है। जावेद अख्तर ने कंगना के खिलाफ मानहानि का केस भी किया हुआ है। कंगना भी कई मौकों पर जावेद अख्तर के खिलाफ बोलती सुनी गई हैं। पाकिस्तान में दिया गया जावेद अख्तर का बयान कंगना को इतना पसंद आया कि वे उनकी तारीफ किए बिना नहीं रह सकीं।

‘राइट विंग लड़ कर लेने को तैयार था, फिर कांग्रेस के भीख के कटोरे में क्यों मिली आज़ादी?’ कंगना ने कहा – जवाब दे दो, लौटा दूँगी पद्मश्री

कंगना रनौत ने हाल ही में कहा था कि 1947 में भारत को भीख में आज़ादी मिली और असली आज़ादी 2014 में मिली। तमाम विपक्षी दलों के नेता उनके इस बयान का विरोध करते हुए उनका पद्मश्री सम्मान वापस लेने की बातें कर रहे हैं। कंगना रनौत ने कहा कहा कि उन्होंने उसी इंटरव्यू में स्पष्ट कर दिया था कि 1857 में भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम हुआ था और उन्होंने महारानी लक्ष्मीबाई, सुभाष चंद्र बोस और वीर सावरकर के बलिदानों को भी याद किया। ये कैसा विरोधाभास है कि जिस वीर सावरकर की ये लोग आलोचना कर रहे हैं, जबकि उन्हीं की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी सावरकर जी की प्रशंसा करती थी। 

कंगना रनौत ने आज़ादी को भीख में मिलने वाली बताकर कुर्सी के भूखे तुष्टिकरण पुजारियों की दुखती नव्ज पर हाथ रखा तो चीखना लाजमी है। अपनी वाह-वाही के चक्कर में भारत के असली इतिहास को ही गड्डे में डाल मुग़ल आतताइयों का गुणगान कर देश को भ्रमित करते रहे हैं। कंगना को कुछ कहने से पहले ट्रिब्यून, फरवरी 12, 2006(संलग्न) देख लेना चाहिए। नाथूराम गोडसे को महात्मा गाँधी का हत्यारा कहने वालों देश को बताओं कि किस कारण गाँधी ने ब्रिटिश सरकार से नेताजी सुभाषचन्द्र बोस के विरुद्ध अनुबंध पर हस्ताक्षर किये थे? नेताजी बोस देश की आज़ादी के लिए लड़ रहे थे, फिर उनके विरुद्ध इतनी बड़ी साज़िश क्यों की गाँधी ने? किस हैसियत से गाँधी ने उस अनुबंध पर हस्ताक्षर किये थे? देश की आज़ादी के लिए अपनी हर साँस खतरे में डालने वाले को आज़ादी के बाद भी गुमनामी ज़िंदगी जीनी पड़ी। शर्म आनी चाहिए। फिर कहते हैं गाँधी ने बिना खड़क के आज़ादी दिलवाई। 
हमें आज़ादी जवाहर लाल या गाँधी के कारण नहीं, बल्कि नेताजी बोस, चंद्रशेखर आज़ाद, भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, एवं हज़ारों गुमनामी में खोये क्रांतिकारियों के बलिदान से मिली है। चरखा या ये कहने से "कोई तुम्हारे एक गाल पर थप्पड़ मारे दूसरा गाल आगे कर दो" से नहीं मिली। गाँधी भक्तों को अच्छी तरह से इस बात को समझ लेना चाहिए। जब 1947 में आज़ादी मिल गयी थी, फिर JNU में कौन-सी आज़ादी के नारों का समर्थन किया जा रहा था? 
 ’70 वर्षों से रो रही थीं भारत माता, 2014 से शुरू किया मुस्कुराना’: गोविंद देवगिरि ने पूछा – राम को काल्पनिक बताने का पाप किसने किया?
राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य गोविंद देवगिरी
अयोध्या राम मंदिर के कोषाध्यक्ष और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य गोविंद देवगिरी महाराज का बयान इन दिनों सुर्खियों में है। उन्होंने पुणे में शुक्रवार (12 नवंबर 2021) को कहा, “भारत माता 70 साल से खुश नहीं थी, लेकिन 2014 के बाद उसने थोड़ा-थोड़ा मुस्कुराना शुरू किया है।”  
गोविंद देवगिरी महाराज ने समग्र वंदे मातरम ग्रंथ प्रकाशन समारोह में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि जिस इतिहास में मुगल को महान बताया जाए, छत्रपति शिवाजी महाराज के लिए महज 5 पंक्तियां लिखी जाएँ और महाराणा प्रताप को दूर फेंक दिया जाए, तो क्या वो इतिहास हमारा इतिहास है? गोविंद देवगिरी ने साम्यवाद पर निशाना साधते हुए कहा कि यही इतिहास हमको आज तक पढ़ाया गया, क्योंकि दिल्ली के तख्त के नीचे जो सारे साम्यवादी बैठे थे। उन्होंने शिक्षा का पूरा नियंत्रण अपने हाथ में लेकर रखा था।
इसके अलावा उन्होंने परंपराओं और इतिहास झुठलाने वालों को भी करारा जवाब देते हुए कहा, ”हमारी परंपराओं को झुठलाकर, हमारे इतिहास-भूगोल को झुठलाकर, हमारे तीर्थों को झुठलाकर, भगवान राम को काल्पनिक कहकर, राम सेतु किसी के द्वारा बनाया ही नहीं गया ये कहकर और इसका एफिडेविट देकर हमारी सरकारों ने जो पाप किया वो पाप आपके माथे पर भी लगा हुआ है।”  

कंगना रनौत ने कहा कि 1857 का तो उन्हें पता है, लेकिन अगर कोई उनके सामने ये सिद्ध कर देगा कि 1947 में कौन सा युद्ध हुआ था, तो वो अपना पद्मश्री वापस करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि उस स्थिति में वो माफ़ी भी माँग लेंगी। कंगना रनौत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा कि उन्होंने बलिदानी लक्ष्मीबाई की फिल्म में काम किया है, ऐसे में उन्होंने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम को लेकर काफी रिसर्च किया है। उनका मानना है कि उस दौरान राष्ट्रीयता और दक्षिणपंथ, दोनों ऊँचा उठ रहा था।

कंगना रनौत का पूछना है कि लेकिन ये सब अचानक से ख़त्म कैसे हो गया? उन्होंने पूछा कि महात्मा गाँधी ने भगत सिंह को क्यों मरने दिया? साथ ही सवाल दागा कि क्यों नेताजी सुभाष चंद्र बोस को मार डाला गया और उन्हें कभी महात्मा गाँधी का समर्थन नहीं मिला? उन्होंने ये भी सवाल पूछा कि विभाजन की रेखा आखिर एक गोरे व्यक्ति ने क्यों खींची? कंगना रनौत का ये प्रश्न भी है कि आज़ादी का युद्ध लड़ने की बजाए भारतीय क्यों एक-दूसरे को मारने लगे? उन्होंने कहा कि इन सवालों के जवाब वो खोज रही हैं, इसमें उनकी कोई सहायता करे।

कंगना रनौत ने लिखा, “इतिहास वही है जो आज स्पष्ट दिख रहा है। अंग्रेजों ने भारत को तब तक लूटा, जब तक उन्हें संतुष्टि नहीं हुई। चरम गरीबी, सूखा और शत्रुता के बाद भी वो भारत में रह रहे थे, वो भी तब जब उन पर दूसरे विश्व युद्ध का दबाव था। उन्हें पता था कि वो वो सदियों के अत्याचार की कीमत चुकाए बिना यहाँ से नहीं जा सकते। इसीलिए, उन्हें भारतीयों के मदद की ज़रूरत थी। INA (आज़ाद हिन्द फ़ौज) का एक छोटा युद्ध भी हमें आज़ादी दिला देता। तब सुभाष चंद्र बोस भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बनते।”

कंगना रनौत ने पूछा कि जब दक्षिणपंथ इसे लड़ तक लेने के लिए तैयार था, तब आज़ादी कॉन्ग्रेस के भीख के कटोरे में क्यों डाली गई? उन्होंने कहा कि कोई उन्हें ये बात समझा दे। उन्होंने कहा कि कोई उन्हें इन सवालों के जवाब खोज कर दे देता है तो वो ख़ुशी से अपना पद्मश्री वापस कर देंगी। उन्होंने कहा कि अगर कोई साबित कर देता है कि ‘टाइम्स नाउ’ के इंटरव्यू में उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान किया है, तब भी वो अपना पद्मश्री सम्मान वापस कर देंगी।

उन्होंने कहा कि सीधे गाली बकने या बड़ी चालाकी से एडिट किए गए इंटरव्यू के किसी क्लिप को शेयर करने से कुछ नहीं होगा। उन्होंने कहा कि उनका कहा पूरा वाक्य सुना जाए और तथ्यों पर बात की जाए, तब वो कोई भी परिणाम भुगतने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि हमारे पास ज़रूर भौतिक आज़ादी थी, लेकिन 2014 में हमारी चेतना को आज़ादी मिली। उन्होंने कहा कि तब एक मृत सभ्यता उठ खड़ी हुई और उसने अपने पंख लहराए। उन्होंने कहा कि आज के सभ्यता दहाड़ मार रही है और ऊँचाई को प्राप्त कर रही है।

कंगना रनौत ने लिखा, “आज शायद पहली बार है जब अंग्रेजी न बोलने, छोटे शहरो से आने या स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग करने के लिए कोई हमें शर्मिंदगी महसूस नहीं करा सकता। उस इंटरव्यू में मैंने सब स्पष्टता से रखा है। लेकिन जो चोर हैं, उनकी तो जलेगी। कोई बुझा नहीं सकता है।” कंगना रनौत ने ‘ट्रांसफर ऑफ पॉवर’ का एक पुराना पत्र शेयर करते हुए लिखा कि ये वो ‘फ्रीडम फाइट’ है, जिसका उन्होंने अपमा किया था, जो ‘डोमिनियन ऑफ इंडिया’ को पॉवर का ट्रांसफर था।

क्या अपने स्टाफ 'रिजवान' के साथ अभिनेत्री कंगना रनौत की तस्वीरों का किया जा रहा गलत इस्तेमाल ?

बॉलीवुड में कई काम केवल चर्चा में बने रहने के लिए किये जाते हैं, इसमें दो राय नहीं। कलाकारों को केवल अपनी आगामी फिल्म के प्रदर्शन तक जनता पर छाए रहने की नीति पर चलना पड़ता है। कंगना रनौत की जिन फोटोज पर कंगना विरोधी हंगामा कर रहे हैं, वह भी अच्छी तरह जानते हैं कि ये फोटो किसी ने चोरी से नहीं खींची हैं, बल्कि सुर्ख़ियों में बने रहने के लिए फोटो खिंचवाई गयी है। ब्रा भी शायद पारदर्शी है। कंगना विरोधी जो कर रहे हैं, कंगना का उद्देश्य भी पूरा हो रहा है। 
अधिवक्ता रिजवान सिद्दीकी ने अभिनेत्री कंगना रनौत के साथ उनके स्टाफ ‘रिजवान’ की शेयर की जा रहीं तस्वीरों का सोशल मीडिया में गलत इस्तेमाल करने वालों को चेताया है। रिजवान सिद्दीकी ने कहा, “जिन लोगों ने भी मेरे क्लाइंट की इन तस्वीरों का बुरी नीयत से और शरारतपूर्ण तरीके से इस्तेमाल किया है, इनका इस्तेमाल कर अफवाह और झूठ फैलाया है, उन्हें पता होना चाहिए कि अगर ऐसे पोस्ट्स को नहीं हटाया गया तो ऐसा करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के खिलाफ मैं कानूनी कार्रवाई करूँगा।”

साथ ही उन्होंने आशा जताई कि इन तस्वीरों को गलत नीयत से पोस्ट करने वाले अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय देंगे और इन्हें हटाएँगे। बता दें कि सोशल मीडिया में कई हैंडल्स ने इन तस्वीरों को शेयर कर के ‘कंगना रनौत द्वारा रिजवान को किस करने’ की बात कही थी और दोनों को बदनाम करने की कोशिश की थी। कंगना रनौत विरोधी इन सोशल मीडिया हैंडल्स ने उनके फैंस को नाराज़ करने के लिए जानबूझ कर ऐसा किया था।

कंगना रनौत के साथ जिस रिजवान की तस्वीर है और जो अधिवक्ता रिजवान सिद्दीकी हैं, ये दोनों अलग-अलग लोग हैं। हाल ही में कंगना ने अपने स्टाफ रिजवान को 29वीं जन्मदिन की बधाई दी थी और तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा था, “तुमने अपने जीवन का हर एक मिनट मेरे पैशन को दे दिया है। कितना भी कठिन लोकेशन हो या कितने घंटे भी काम करते हो, तुम हमेशा डटे रहे। मैं आशा करती हूँ तुम इसी तरह आगे बढ़ते रहो और तुम्हारी शादी भी हो जाए।”

‘रोफ़ल स्वरा 2.0’ नाम के ट्विटर हैंडल ने इन तस्वीरों को शेयर करते हुए लिखा था, “भक्तो तुम्हारी दीदी के बाजू में जो लड़का है उसका नाम “रिज़वान” है।”

वहीं निदा फातिमा नाम के ट्विटर हैंडल ने लिखा, “कंगना रनौत और रिज़वान भाई के लिए एक शब्द।”

जुनैद अहमद खान ने भी इन तस्वीरों को शेयर करते हुए लिखा था, “हिंदू मुस्लिम एकता की ज़बरदस्त मिसाल कायम करती कंगना और रिज़वान। जब जब मुल्ले चाटे जाएँगे, अंधभक्त जीजा-जीजा चिल्लाएँगे।”

दाऊद नदाफ नाम के ट्विटर यूजर ने लिखा था, “बरनोल मोमेंट्स फ़ॉर गोब्बरभक्त, कंगना विथ रिज़वान ख़ान।” साथ ही उसने भी इन तस्वीरों को शेयर किया था।

रविंद्र सिंह आनंद नाम के ट्विटर हैंडल ने लिखा, “रिज़वान के खिलाफ़ धर्म और संस्कृति बचाने के लिए कड़ा संघर्ष करती हुई कट्टर हिन्दू संस्कृति की रक्षक कंगना रनौत!”

कंगना रनौत आजकल लगातार चर्चा में हैं। हाल ही में उन्होंने ‘धाकड़’ की शूटिंग ख़त्म की है, जिसके बाद एक पार्टी की कई तस्वीरें उन्होंने पोस्ट की थीं। कुछ दिनों पहले गीतकार जावेद अख्तर ने आरोप लगाया था कि बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने जानबूझकर अपने पासपोर्ट के नवीनीकरण की अनुरोध वाली याचिका में अदालत से कुछ तथ्य छिपाए हैं। लेकिन, बॉम्बे हाईकोर्ट ने उनकी हस्तक्षेप याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था।

कांग्रेस दलित नेता उदित राज : ‘खून की प्यासी’ होती हैं तलाकशुदा महिलाएँ’

देश में किसी भी मुद्दे पर बहस चल रही तो और उसमें घुस कर पूर्व-सांसद उदित राज दलित-सवर्ण न खेलें तो फिर वो बहस ही अधूरी रह जाती है। भाजपा में टिकट न मिलने से कांग्रेस में आए उदित राज ने अब अनुराग कश्यप पर लगे यौन शोषण के आरोपों पर कमेंट्री करते हुए उन्हें सज्जन व्यक्ति करार दिया है और इस खबर की चर्चा की है कि कैसे उनकी दोनों पूर्व-पत्नियाँ कल्कि कोचलिन और आरती बजाज उनका समर्थन कर रही हैं नहीं तो तलाकशुदा महिलाएँ ‘खून की प्यासी’ होती हैं।

कभी अपने-आप को ‘सबसे बड़ा दलित नेता’ घोषित कर चुके उदित राज ने ट्विटर पर लिखा, “अनुराग कश्यप सज्जन व्यक्ति लगते हैं। तलाक़ की गई दोनो पत्नियाँ उनके पक्ष में खड़ी हैं, वर्ना खून की प्यासी होती हैं। कंगना रनौत और पायल घोष को जेल में बंद कर देना चाहिए जो सामाजिक भ्रष्टाचार फैला रही हैं।” उन्होंने दो महिलाओं को बिना मतलब जेल भेजने की बात की और सारी तलाकशुदा महिलाओं को ‘खून की प्यासी’ करार दिया।

यानी, उदित राज का मानना है कि जिन महिलाओं का तलाक हो जाता है, वो अपने पूर्व-पति के लिए ऐसी दुर्भावना रखती हैं कि उनका खून पीना चाहती हैं। वैसे, फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप को देख कर लगता नहीं कि उनके शरीर में खून की कमी है। महिला हितों की बात करने वाले उदित राज जैसे लोग जहाँ एक तरफ खुद को आधुनिक सोच वाला दिखाते हैं, वहीं महिलाओं के लिए इस तरह के तुच्छ विचार रखते हैं।

अगर सारी तलाकशुदा महिलाएँ ‘खून की प्यासी’ हैं फिर तो जितने भी तलाकशुदा पति हैं, वो ज़िंदा ही नहीं बचने चाहिए थे? या फिर उनमें से अधिकतर आज अस्पताल में खून की बोतलें चढ़ाते रहते। अरबाज खान और ऋतिक रौशन के बारे में ‘सबसे बड़े दलित नेता’ के क्या विचार हैं, ये अभी तक साफ़ नहीं हो सका है। लेकिन हाँ, महिलाओं को लेकर उनकी सोच पहले भी कई बार सामने आ चुकी है।

साथ ही उन्होंने बलात्कार के प्रयास की पीड़िता को सामाजिक भ्रष्टाचार फैलाने का आरोपित करार दिया। उदित राज की मानें तो बलात्कार का प्रयास करने वाले की तलाकशुदा पत्नियाँ उनके पक्ष में खड़ी हैं, तो पीड़िता को ही जेल भेज देना चाहिए और इसे सामाजिक भ्रष्टाचार का नाम दिया जाना चाहिए। वैसे 1996 में एक ‘खून की प्यासी’ नामक फिल्म आई थी लेकिन उसमें किसी तलाकशुदा महिला को नहीं दिखाया गया था।

इसी तरह उन्होंने कहा था कि कांग्रेस ने सूई से लेकर परमाणु बम तक बनाया लेकिन फिर भी उसे देशद्रोही कहा जाता है लेकिन भाजपा हवाई जहाज तक बेच कर भी देशभक्त है। भले ही कांग्रेस पार्टी ने सारी सरकारी कंपनियों को खटारा बना दिया और मोदी सरकार प्राइवेट प्लेयर्स को मौका देकर उन्हें उबारने की कोशिश में लगी हों, लेकिन उदित राज को इन सब से क्या मतलब, क्यों ही समझें इन चीजों तो… दलित घुसा दिया, नेहरू-गाँधी का याद किया, काफी है।

वैसे कल को उदित राज ये भी ना कह दें कि जवाहरलाल नेहरू ने खुद बैठ कर कुम्हार की तरह मिट्टी गूँथ कर हवाई जहाजों का निर्माण किया। कांग्रेस के लोगों ने हवाई जहाज का अविष्कार किया, राइट ब्रदर्स को इस तकनीक के बारे में बताया और फिर भारत में उसे उड़ाने लगे – शायद उदित राज कल को ये भी लिख सकते हैं। उनकी सोच है कि शायद मोदी सरकार ने ‘हवाई जहाज’ वैसे ही बेच दिया है, जैसे कोई खिलौना हो।

वहीं उदित राज का आरोप है कि उनसे Y+ सिक्योरिटी इसलिए छीन ली गई, क्योंकि वो आरक्षण का समर्थन करते हैं और कंगना रनौत आरक्षण का विरोध करती हैं, इसीलिए उन्हें सरकारी सिक्योरिटी दी गई है। वैसे आरक्षण का समर्थन और विरोध ही इसकी एकमात्र योग्यता है तो सोनिया गाँधी और मनमोहन सिंह को क्यों सुरक्षा मिली हुई है, ये उन्हें बताना चाहिए। क्या ये दोनों नेता भी आरक्षण के विरोधी हैं।

वहीं उन्होंने आरोप लगाया कि कंगना रनौत ने कहा था कि फिल्म में रोल पाने के लिए हीरो के साथ सोना पड़ता था तो क्या उन्होंने भी ये ‘अपराध’ किया है। उनकी सोच देखिए। एक महिला से वो सीधे पूछ रहे हैं कि क्या वो अभिनेताओं के साथ सोती थीं? ऐसी सोच वाले लोगों के लिए बलात्कार के खिलाफ आवाज़ उठाने वाली महिलाओं के लिए भी मन में ऐसे ही आपत्तिजनक और घृणित सवाल होते हैं, आश्चर्य है!

साथ ही उन्होंने ये भी बताया है कि राहुल गाँधी को कॉन्ग्रेस अध्यक्ष क्यों बनना चाहिए। क्योंकि उन्होंने ये सारी भविष्यवाणियाँ कीं- कोरोना आएगा, बेरोजगारी बढ़ेगी, अचानक लॉकडाउन से कुछ नहीं होगा। टेस्टिंग बढ़नी चाहिए और चीन परेशानी पैदा करेगा, आर्थिक स्थति बिगड़ेगी। इनमें से आधी बातें ऐसी हैं, जो सभी को पता हैं और आधी ऐसी हैं, जिनका कॉन्ग्रेस ने ही नैरेटिव बनाया है। और, अगर सारी सही हैं तो फिर राहुल गाँधी को कॉन्ग्रेस अध्यक्ष नहीं, ‘राष्ट्रीय भविष्यवेत्ता’ घोषित किया जाना चाहिए।

असल में गाँवों में आजकल भी कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिनका काम होता है लोगों की गतिविधियों पर नजर रखते हुए बिना माँगे राय देना। बाद में कहीं कोई गड़बड़ होती है तो वो कहते हैं कि देखो, मैंने कहा था ऐसा मत करो। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष बनने की अगर यही योग्यता है तो फिर इन्हीं लोगों की एक टीम बना कर उनमें से किसी एक को चुन लेना चाहिए। या फिर बहुत लोग तो आकाश देख कर बता देते हैं कि आज बारिश होगी।

उदित राज दलितों को हिन्दू नहीं मानते। उनका कहना है कि मुसलमानों को डराने के लिए ही दलितों को हिन्दू बताया जाता है। वो कहते हैं कि अगर गाँधी-नेहरू नहीं होते तो आज का भारत ब्रिटिश युग से भी बदतर होता। वो यूएन की रिपोर्ट का हवाला देकर कहते हैं कि दलित महिलाओं की औसत उम्र कम है, जिसके लिए सवर्ण जिम्मेदार हैं। वो सवर्णों को बलात्कारी कहने से भी नहीं हिचकते।

उदित राज ने लिखा था कि दलित महिलाओं का बलात्कार अधिकतर सवर्ण ही करते हैं। आजकल की वेब सीरीज में भी ऐसा ही दिखाया जाता है। वो उत्तर प्रदेश में प्रियंका गाँधी को दलितों की आवाज़ करार देते हैं। जब सचिन पायलट ने कांग्रेस से बगावत की थी तो उन्होंने कहा था कि पायलट इतनी कम उम्र में ही प्रदेश अध्यक्ष और उप-मुख्यमंत्री बन गए थे, जबकि कई लोग ज़िंदगी भर मेहनत कर के भी प्रधान तक नहीं बन पाते।

जब तक कोई भाजपा विरोधी वीर सावरकर को गाली नहीं दे तब तक उसका विरोध पूरा नहीं होता। उदित राज भी इस मामले में अपवाद नहीं हैं। उन्होंने तो आरोप लगाया था कि सावरकर ने 6 बार अंग्रेजों से माफ़ी माँगी थी और ब्रिटिश फ़ौज की मदद की थी। साथ ही ये भी कहा कि जिन्ना ने उनकी बात मान कर ही भारत का विभाजन करवाया। उन्होंने इसे भाजपा-संघ से जोड़ दिया। सावरकर को गाली देकर सभी कांग्रेस समर्थक खुद को ‘कूल’ मानते हैं।

इसी तरह उदित राज ने भाजपा पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति पद का अपमान किया था। नॉर्थ वेस्ट दिल्ली से 2014 में बीजेपी के टिकट पर जीते और 2019 में टिकट न मिलने पर भाग खड़े हुए उदित राज ने ट्वीट कर ख़ुद को ‘बोलने वाला’ दलित नेता बताया था और कहा कि भाजपा को दलितों से नफ़रत है और वो ‘बोलने वाले’ दलित की जगह सीट हारना पसंद करेंगे। वो संवैधानिक पदों को भी दलित-सवर्ण के दौरे में बाँधते रहे हैं।

#DemolishPriyankaHimachalHome यूजर्स की मांग ‘एक धक्का और दो इस घर को तोड़ दो’

हिमाचल में प्रियंका का बंगला 
अंग्रेजी में एक कहावत है "You show me the man, I will show you the rule", यह बात पता नहीं कितनी चरितार्थ हो चुकी है और हो भी रही है। कानून का डंडा चलता है आम नागरिकों पर, लेकिन सियासतखोरों के पास कानून फटकता तक नहीं। कार्यवाही केवल राजनीतिक बदले में ही होती है, अन्यथा कानून इन्हें छू भी नहीं पाता। उदाहरणार्थ गाँधी परिवार और मायावती आदि पर कितने घोटालों के आरोप हैं, यदि यही आरोप किसी आम नागरिक पर होते, क्या वह इस तरह खुला घूम रहा होता? इसमें कोई दो राय नहीं कि सुशांत की हत्या का मुख्य कारण उजागर हो या न हो, लेकिन राजनीतिक संरक्षण में बॉलीवुड में चल रहे कांडों से पूर्णरूप से पर्दा हटेगा, इस बात पर भी शक है।
   
सुशांत मामले में मुखर अभिनेत्री कंगना रनौत के मुंबई दफ्तर पर बीएमसी की कार्रवाई के बाद हर सोशल मीडिया पर लोग शिमला में प्रियंका गांधी की अवैध संपत्ति को ध्वस्त करने की मांग कर रहे हैं। बीएमसी की कार्रवाई के बाद ट्विटर पर #DemolishPriyankaHimachalHome ट्रेंड हो रहा है। लोगों का कहना है कि एक गैर हिमाचली व्यक्ति राज्य में घर नहीं खरीद सकता, इसलिए प्रियंका का शिमला के छराबड़ा स्थित घर अवैध है। इसे हटाया जाए या फिर हर भारतीय को अधिकार दे दिया जाए कि वह हिमाचल में संपत्ति खरीद सकते हैं। इसके साथ ही यूजर्स यह भी कह रहे हैं कि कानून सबके लिए एक जैसा होना चाहिए। अगर कंगना की संपत्ति को अवैध कहकर तोड़ा गया तो अवैध संपत्ति तो तोड़ी ही जा सकती है।
आज प्रियंका की संपत्ति पर जो भी लोग ऊँगली उठा रहे हैं, अब से पहले कहां थे? क्यों नहीं पहले आवाज़ उठी? अब इसे सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक बदला ही कहा जाएगा। प्रियंका ने हिमाचल में क्या आज संपत्ति बनाई है, जो उस पर ऊँगली उठाई जा रही है? यानि प्रियंका ने जो भी संपत्ति बनाई राजनीतिक संरक्षण में बनाई और राजनीतिक संरक्षण मिलता भी रहेगा, जनता चाहे जितना सिर पटक ले। 


मुंबई में अभिनेत्री कंगना रनौत के कार्यालय पर बीएमसी की कार्रवाई के बाद हर जगह महाराष्ट्र सरकार की आलोचना हो रही है। कॉन्ग्रेस, एनसीपी और शिवसेना के गठबंधन वाली महाविकास अघाड़ी सरकार पर द्वेषपूर्ण राजनीति करने के आरोप लग रहे हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर भी कंगना के समर्थकों ने एक नई माँग उठा दी है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश की सरकार से गुहार लगाई है कि शिमला में प्रियंका गाँधी की अवैध संपत्ति को फौरन ध्वस्त कर दिया जाए, या उस पर कार्रवाई हो।
कंगना के मुंबई स्थित ऑफिस पर बीएमसी की कार्रवाई के बाद ट्विटर पर #DemolishPriyankaHimachalHome ट्रेंड हो रहा है। खबर लिखने तक इस हैशटैग के अंतर्गत 15 हजार से ज्यादा ट्वीट हो चुके थे। इन ट्विट्स में यूजर्स प्रियंका गाँधी की उस प्रॉपर्टी को गिराने की माँग हिमाचल सरकार से उठा रहे हैं, जिसके लिए 3 साल पहले भी हाईकोर्ट ने उन्हें नोटिस भेजा था।




जानकारी के मुताबिक, कोर्ट ने यह नोटिस प्रियंका गाँधी को आशी भट्टाचार्या की याचिका पर जारी किया था। इस याचिका में आरटीआई कार्यकर्ता ने प्रियंका की जमीन का विवरण और हिमाचल प्रदेश किराएदारी और भूमि सुधार अधिनियम के तहत राज्य सरकार से मिलने वाली अनुमति की जानकारी माँगी थी।

लोगों का कहना है कि एक गैर हिमाचली, प्रदेश में घर नहीं खरीद सकता है, इसलिए यह घर अवैध है। इसे जल्द से हटाया जाए या फिर हर भारतीय को अधिकार दे दिया जाए कि वह हिमाचल में संपत्ति खरीद सकते हैं।
एक यूजर लिखते हैं, “शिवसेना और कॉन्ग्रेस की तरह भाजपा राजनीतिक प्रतिशोध के लिए नहीं जानी जाती है। इसलिए यही बढ़िया है कि प्रियंका गाँधी के घर को छोड़ दिया जाए। क्योंकि हमें कॉन्ग्रेस का साल 2024 में पूरा सफाया चाहिए। ऐसे में गाँधी परिवार को आराम करने के लिए घर की जरूरत पड़ेगी।”

कंगना की संपत्ति पर इस तरह का हमला देखने के बाद लोगों का कहना है कि कानून सबके लिए एक जैसा होना चाहिए। अगर कंगना की संपत्ति को अवैध कहकर तोड़ा गया तो अवैध संपत्ति तो तोड़ी ही जा सकती है। कुछ लोग इस हैशटैग पर प्रियंका के बंगले की तस्वीर शेयर करके लिख हिमाचल सरकार को टैग करके लिख रहे हैं, “एक धक्का और दो, इस घर को तोड़ दो।”
प्रियंका गाँधी के पास शिमला के छराबड़ा में एक घर है। यह घर शिमला के वीवीआईपी इलाके में बनाया गया है। हिमाचल प्रदेश किराएदारी और भूमि सुधार अधिनियम की धारा 118 का हवाला देकर इस संपत्ति पर अक्सर सवाल उठते रहते हैं। इस धारा के अंतर्गत प्रावधान है कोई भी बाहरी प्रदेश में हिमाचल प्रदेश में जमीन नहीं ले सकता है।
यदि कोई इच्छुक भी हो, तो उसे भूअधिनियम की धारा 118 के तहत अनुमति लेनी होती है। इसकी परमिशन राज्य सरकार कैबिनेट में देती है। हालाँकि, कहा जाता है कि प्रियंका ने इस प्रक्रिया का पालन किया है। पर, फिर भी कार्यकर्ताओं और याचिकाकर्ताओं की माँग ये है कि इस जमीन से जुड़े दस्तावेज ऑन रिकॉर्ड लेकर आए जाएँ
#DemolishPriyankaHimachalHome के अलावा इस समय कुछ लोग अवैध रूप से बनाए गए मस्जिद-मजार तोड़ने की माँग भी उठाने लगे हैं जिन्हें हाईवे और सड़क के बीच में खड़ा करके देश की प्रगति को रोका गया। लोगों का कहना है कि कानून तो सबके लिए समान होना चाहिए।
लोगों की माँग है कि महाराष्ट्र सरकार की करनी का जवाब हिमाचल सरकार ऐसे अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करके दे। वहीं कुछ लोग हैं जो कंगना रनौत के मामले में पीएमओ से दखल करने की अपील कर रहे हैं। साथ ही इस पूरे फैसले को कंगना रनौत और महाराष्ट्र सरकार के बीच चल रही तनातनी बता रहे हैं। इसके अलावा कुछ लोग मीम्स शेयर करके ये बताना चाह रहे हैं कि अवैध प्रॉपर्टी पर बीएमसी की कार्रवाई सुन कर कॉन्ग्रेस अपनी कई संपत्तियों को लेकर सोच में हैं।

‘बेशर्म(कंगना रनौत), तू इस्लाम की बात करती है?’ 'बदतमीज महिला' : सपा प्रदेश अध्यक्ष अबू आजमी

अबू आजमी, कंगना रनौत
80 के दशक में प्रदर्शित जीतेन्द्र और सुलक्षणा पंडित अभिनीत फिल्म "अपनापन" का एक गीत "आदमी मुसाफिर है आता और जाता है ...." सुशांत राजपूत केस में चरितार्थ हो रहा है, सुशांत दुनियां में आया और गया, लेकिन अपनी हत्या से बॉलीवुड के घिनौने चेहरे को उजागर कर गया। ड्रग्स के बहाने अभी तो परदे को मात्र हाथ लगाया है, परदे के पीछे और परदे के पीछे और बिछी चादर उठनी बाकी है और जब पूरा पर्दा हटेगा, तब क्या हालत होगी, बॉलीवुड से लेकर सियासत तक जो खलबली मच रही है, स्पष्ट संकेत दिखने शुरू हो गए हैं। इस चकाचौंध दुनियां कितनी गंदगी से भरी पड़ी है। अगर गंभीरता से जाँच हुई, पता नहीं कितने धुरंदर नपेंगे, जो छद्दम सेकुलरिज्म का चोला ओढ़े सत्ता के गलियारों में बैठ जनता के धन पर मालपुए खाने के साथ-साथ अपनी तिजोरियां भर रहे हैं। आगे देखो होता क्या है? 
महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अबू आजमी कंगना रनौत से खासे खफा हैं और इसी क्रम में उन्होंने शिवसेना के मुख्य प्रवक्ता संजय राउत का अनुसरण करते हुए कंगना रनौत पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर डाली। कंगना को अबू आजमी ने बेशर्म करार दिया। अबू आजमी ने दावा किया कि कंगना रनौत ने कहा था कि उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में इस्लामी वर्चस्व ख़त्म कर दिया। इसके बाद उन्होंने पूछा, ‘ बेशर्म! इस्लाम के बारे में बात करती है तू?’
अबू आजमी ने महाराष्ट्र विधानसभा की कार्यवाही के दौरान ये बातें कही। उन्होंने मीडिया में बयान देते हुए भी कंगना पर अलग-अलग टिप्पणी की है। इससे पहले उन्होंने कहा कि अगर कंगना रनौत को मुंबई पुलिस पर भरोसा नहीं है तो वो अपने राज्य हिमाचल प्रदेश में रहे और वहीं काम करे। उन्होंने कहा कि मुंबई पुलिस कभी नाकामयाब नहीं रही है। उन्होंने कहा कि वो पहले से ही ड्रग्स को लेकर आवाज़ उठाते रहे हैं लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
लोगों की प्रक्रियाएं 


सपा नेता ने ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न्स’ की अभिनेत्री को ‘बदतमीज महिला’ बताते हुए कहा कि वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भाषा बोल रही हैं। उन्होंने ये भी कहा कि शिवसेना जो भी कर रही है, वो ठीक कर रही है। अबू आजमी वैसे तो शिवसेना के खिलाफ बोलते रहे हैं लेकिन इस बार उन्होंने कंगना रनौत के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है और महाराष्ट्र की सत्ताधारी पार्टी का पक्ष ले रहे हैं। अबू आजमी की टिप्पणियों के बाद लोगों ने उनका विरोध किया।
कुछ ही महीनों पहले सपा प्रदेश अध्यक्ष ने एक महिला पुलिसकर्मी के साथ बदतमीजी की थी। बाद में उलटा महाराष्ट्र सरकार ने अधिकारी का ही ट्रांसफर कर दिया था। आजमी ने शर्मा के सस्पेंड करने की माँग करते हुए कहा था, “ये औरत कहती है कि आप पुलिस पे इल्जाम लगाते हो, मैं बात नहीं करूँगी। तेरे बाप के बाप के बाप को बात करनी पड़ेगी।” शर्मा के तबादले को लेकर बीजेपी के पूर्व सांसद किरीट सौमैया ने उद्धव सरकार को घेरा था।
फराह खान-रिया चक्रवर्ती
फराह खान उतरी रिया के समर्थन में, कभी जिसका शौहर भी जो चूका है ड्रग्स के मामले में गिरफ्तार
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) द्वारा रिया चक्रवर्ती की गिरफ्तारी ने भारतीय फिल्म उद्योग की कई सच्चाइयों को उजागर किया है। अभिनेता ऋतिक रोशन से संबंधित होने के लिए पहचाने जाने वाली ऐसी ही एक तथाकथित बॉलीवुड ’सेलिब्रिटी’ फराह खान ने अभिनेत्री रिया खान के साथ सहानुभूति जताने के लिए ट्विटर का सहारा लिया है।
ड्रग्स खरीदने और उसके इस्तेमाल के लिए रिया चक्रवर्ती को गिरफ्तार किए जाने के तुरंत बाद, फराह खान ने रिया को ‘कठिन समय में मजबूत रहने’ के लिए कहा है। फराह खान ने कहा कि ‘जब तक आपका विवेक साफ है, तब तक आप मजबूत रहेंगे।’
फराह खान ने रिया को नसीहत दी कि ‘ईश्वर में विश्वास रखें और हर दिन प्रार्थना करें’, क्योंकि उन्होंने कहा था कि ‘अगर ईश्वर ने आपको यहाँ पहुँचाया है तो सिर्फ यह ध्यान रखें कि वही आपको इससे बाहर भी निकालेगा।”
फराह खान ने खुद ही स्वीकारा है कि हालाँकि, वह रिया चक्रवर्ती से कभी नहीं मिली हैं, ना ही उन्हें, ना ही उनके परिवार को जानती हैं, फिर भी फराह खान ने रिया को मजबूत रहने की सलाह दी है।
रिया की गिरफ्तारी को लेकर फराह खान की भावनाएँ इतनी गहरी थीं कि उसने ‘टाइम्स नाउ’ की पत्रकार नविका कुमार के खिलाफ भी अपशब्द कहे। दरअसल, नाविका कुमार ने ही रिया की गिरफ्तारी की खबर शेयर करते हुए कहा था कि पहली बार ड्रग्स की कहानी उनके द्वारा ही सामने रखी गई थी।
फराह खान ने वरिष्ठ पत्रकार नविका कुमार को यह कहकर लताड़ लगाई, “एक दिन आप दूसरी तरफ होंगे और फिर वहाँ ऐसे लोग भी होंगे जो आपके लिए उतने ही निर्दयी होंगे जितने कि आप हैं। मेरी बात याद रखना।”
आश्चर्य की बात यह है कि अगर फराह खान कभी रिया से नहीं मिली, उन्हें जानती तक नहीं तो फिर वह रिया चक्रवर्ती के समर्थन में कूदने वाली पहली महिला क्यों थी? संभवतः वह रिया के दर्द को महसूस कर रही होंगी। इन्हे शायद यह भी डर सता रहा होगा कि ड्रग्स मामले में उनके शौहर या फिर उनका नाम भी न आ जाए। 
फराह खान के पति डीजे अकील 2007 में दुबई में ड्रग्स रखने के आरोप में पकड़े गए थे। हालाँकि, डीजे अकील को कुछ दिनों के बाद रिहा कर दिया गया था, जब अधिकारी उस पर किए गए परीक्षणों में ड्रग्स के सबूत खोजने में विफल रहे।
फराह खान के बारे में बहुत लोग कुछ भी नहीं जानते, लेकिन लोग बॉलीवुड अभिनेता ऋतिक रोशन को जानते हैं। यह कम सुनाई देने वाली ’सेलिब्रिटी’ ऋतिक रोशन की पूर्व पत्नी सुज़ैन खान की बहन और संजय खान की बेटी है। वही संजय खान, जो 1990 के दशक की शुरुआत में एक लोकप्रिय टेलीविजन श्रृंखला में टीपू सुल्तान की भूमिका के लिए जाने जाते थे।
वह उन इस्लाम समर्थकों में से एक थीं, जो अभिनेता तुषार कपूर के पीछे सिर्फ इस कारण पड़ गई थी क्योंकि उन्होंने दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों को फ़ेक फेक न्यूज़ फ़ैलाने से बचने की अपील की थी। उन्होंने भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर पर भी दंगे भड़काने का आरोप लगाया था।
फरहा पाकिस्तान आर्मी का भी समर्थन कर चुकी है 
रिया चक्रवर्ती की गिरफ्तारी के बाद उसके समर्थन में सामने आने वाली फराह खान ने एक बार पाकिस्तान के लिए भी अपना समर्थन जताया था। धर्मनिरपेक्ष और सहिष्णु दिखने की अपनी कोशिश में, उसने पूर्व पाकिस्तानी सेना प्रवक्ता द्वारा एक फर्जी प्रोपेगेंडा ट्वीट को री-ट्वीट किया था, जिसमें कश्मीर को ‘इंडिया ऑक्युपाइड जम्मू कश्मीर’ कहा गया था।
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सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में बॉलीवुड में सरेआम इस्तेमाल और सप्लाई किए जा रहे ड्रग्स का एंगल सामने आया है.....
जब उसे इस मूर्खता का आभास कराया गया तो उसने और भी मूर्खता के साथ जवाब देते हुए कहा कि उसने आसिफ गफूर के प्रोपेगेंडा ट्वीट को सिर्फ इस कारण समर्थन के योग्य माना क्योंकि उसके ट्विटर हैंडल में लिखा गया था- ‘पीस फॉर चेंज।’

कंगना की बहन रंगोली द्वारा 'मुल्लों’ की पत्थरबाजी को लेकर ट्वीट करने के आरोप में ट्विटर ने किया सस्पेंड

कंगना रनौत की बहन रंगोली ने किया ...
देश में मजहबी उन्माद फैलाने वाले कट्टरपंथियों और तथाकथित सेकुलरों के कारण बॉलीवुड अदाकारा कंगना रनौत की बहन रंगोली चंदेल का ट्विटर अकॉउंट सस्पेंड कर दिया गया है। रंगोली की गलती सिर्फ़ इतनी थी कि उन्होंने कोरोना वायरस के प्रकोप के बीच डॉक्टरों, नर्सों और पुलिसकर्मियों पर हमला करने वाले कट्टरपंथियों पर अपना आक्रोश व्यक्त किया था।
गौरतलब है कि बीतें दिनों ऐसी कई घटनाएँ हुई जब स्वास्थ्यकर्मियों, पुलिसकर्मियों पर एक खास समुदाय की भीड़ ने मौक़ा मिलते ही हमला किया। इन घटनाओं को देख ऐसा आक्रोश किसी के लिए भी आम बात है। लेकिन सोशल मीडिया पर मौजूद कुछ लोगों को ये प्रतिक्रिया पसंद नहीं आई। उन्होंने रंगोली के ऊपर नफ़रत और हिंसा को उकसाने का आरोप लगा दिया और इस ट्वीट की शिकायत करते हुए पुलिस को टैग कर दिया। इस बीच रंगोली के ख़िलाफ़ सख्त कार्यवाही की माँग हुई और थोड़ी देर में ट्विटर ने भी उनके अकाउंट को सस्पेंड कर दिया।
मुरादाबाद में हुई घटना के बाद रंगोली चंदेल ने ट्वीट किया, “एक जमाती की कोरोना से मौत हो गई, जब पुलिस और डॉक्टर उसके परिवार को चेक करने गए तो उन्होंने उनपर (पुलिस और डॉक्टर) हमला किया और उन्हें मारा। धर्मनिरपेक्ष मीडिया और इन मुल्लाओं को एक पंक्ति में खड़ा करके गोली मार देनी चाहिए। इतिहास में वे हमें नाजी कह सकते हैं, किसे चिंता है, जिदंगी फेक इमेज से ज्यादा जरूरी है।”
अब हालाँकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि रंगोली ने किस घटना को लेकर यह ट्वीट किया था। लेकिन बीते दिनों की घटनाओं को देखें तो अभी कल ही मुरादाबाद में कोरोना की जाँच करने गए सुरक्षाकर्मियों पर एक मुस्लिम भीड़ ने लाठी-डंडे से हमला कर पथराव किया था। स्थिति ऐसी हो गई थी कि जब पुलिस उन्हें बचाने गई, तो उन पर भी बेरहमी से हमला किया गया। बाद में इस मामले में कार्यवाही करते हुए बुधवार को 13 महिलाओं सहित 25 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया।
पिछले महीने दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के मरकज़ में हजारों जमातियों ने मजहबी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। मरकज़ अब कोरोना वायरस का हॉटस्पॉट बन चुका है। आए दिन मरकज़ में मौजूद रहे लोगों की संक्रमित होने की खबर सामने आ रही है। नर्सों के साथ अश्लील हरकतें करने, डॉक्टरो और पुलिसकर्मियों पर थूकने सहित कई शिकायतें संक्रमित जमातियों के खिलाफ आए हैं। 
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पिछले दिनों झारखंड के लोहरदगा में रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुसलमानों के छिपी होने की बात सामने आई थी। इस संबंध मे....
क्‍वारंटाइन सेंटर में शौच करने पर भी इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। जो लोग इनकी करतूतों का समर्थन करते हैं, उन्हें ट्विटर अपने प्लेटफॉर्म पर बने रहने की आजादी देता है। रंगोली जैसे लोग जो इनके ख़िलाफ़ आवाज उठाते हैं उन्हें चुप कराने के लिए अकाउंट सस्पेंड कर दिया जाता है।

पायल रोहतगी को मुंबई पुलिस ने किया ब्लॉक

Image result for पायल रोहतगीआर.बी.एल.निगम, फिल्म समीक्षक 
अपने बिंदास अंदाज और बेबाकी के लिए पहचानी जाने वाली एक्ट्रेस पायल रोहतगी लगभग हर विषय पर अपने विचार सोशल मीडिया पर रखती नजर आती हैं. लेकिन हाल ही में उनके एक ट्वीट ने सोशल मीडिया पर हंगामा मचाया हुआ है. दरअसल, मुंबई पुलिस ने एक्ट्रेस पायल रोहतगी को ट्विटर पर ब्लॉक कर दिया है, जिसके बाद पायल का ट्विटर पर गुस्सा फूट रहा है. सोशल मीडिया पर फैन्स भी पायल के सपोर्ट में दिखाई दे रहे हैं. एक्ट्रेस पायल रोहतगी ने इस बात की जानकारी खुद ट्वीट करके दी. उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल से लिखा, 'मुंबई पुलिस ने मुझे क्यों ब्लॉक किया...'


Why has @MumbaiPolice blocked me 🧐 ? Are U BFF with drug accused jailed minority tag actor 🤨As a I am scared to live in Hindustan if Police has such baised behaviour. Now I understand why my family tells me 2 stop talking 4 Hindus😡 @Sangram_Sanjeet @PMOIndia @HMOIndia
पायल रोहतगी ने आगे कहा, 'हिंदू होने के नाते और पुलिस का ऐसा रवैया देख मुझे अब हिंदुस्तान में रहने से डर लगता है. मुझे अब समझ में आया कि क्यों मेरा परिवार मुझे हिंदुओं के लिए बोलने से मना करता है.' पायल रोहतगी ने अपने इस ट्वीट के साथ मुंबई पुलिस के अकाउंट का स्क्रीनशॉट भी लगाया है. एक्ट्रेस पायल रोहतगी के इस ट्वीट पर फैन्स उनका सपोर्ट करते नजर आ रहे हैं. उनके एक फैन ने ट्वीट को रिट्वीट किया और मुंबई पुलिस पर निशाना साधते हुए लिखा, 'टुकड़े टुकड़े गैंग की पुलिस सुनती है लेकिन राष्ट्रवादी पायल रोहतगी जी को मुंबई पुलिस ब्लॉक करती है क्यो???' इस ट्वीट को पायल ने भी रिट्वीट किया है. 
टुकड़े टुकड़े गैंग की पुलिस सुनती है लेकिन
राष्ट्रवादी @Payal_Rohatgi जी को मुंबई पुलिस ब्लॉक करती है क्यो??? https://twitter.com/Nationfirst0012/status/1149099182772248576 
एक्ट्रेस पायल रोहतगी बिग बॉस के सीजन 8 में बतौर कंटेस्टेंट नजर आईं थीं. इसके अलावा उन्होंने कई फिल्मों में काम भी किया है, जिनमें '36 चाइना टाउन' जैसी फिल्म भी की है. पायल 2015 में 'नच बलिए सीजन 7' में भी नजर आई थीं. एक्ट्रेस पायल रोहतगी ने 2002 में फिल्म 'ये क्या हो रहा है' से बॉलीवुड में डेब्यू किया था.
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चाहती हूं मुझे बैन करो...: कंगना रनौत
बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत और पत्रकार संघ के बीच का विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है, बल्कि इनका झगड़ा समय-समय पर और भी बढ़ रहा है. यह विवाद इस कदर बढ़ गया कि एंटरटेनमेंट गिल्ड ऑफ इंडिया ने कंगना रनौत के गलत व्यवहार और बातचीत के चलते उन्हें बैन कर दिया, जिसे लेकर हाल ही में कंगना रनौत ने अपना एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है. इस वीडियो में कंगना रनौत ने भारतीय मीडिया के बारे में बात करते हुए कुछ पत्रकारों उन्हें न सिर्फ 'देशद्रोही' बल्कि 'दोगली बातें करने वाला' और 'चंद रुपयों में बिकने वाला' बताया है. इसके अलावा कंगना रनौत ने अपने वीडियो में किसी जर्नलिस्ट का नाम न लेते हुए कई आरोप भी लगाए हैं. 

कंगना रनौत ने सोशल मीडिया पर शेयर किए इस वीडियो में पहले मीडिया को उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए धन्यवाद कहा. लेकिन इसके बाद कंगना ने मीडिया के दूसरे हिस्से को दीमक की तरह देश की गरीमा को चोट पहुंचाने वाला बताया. कंगना ने अपने वीडियो में आगे कहा 'ये मीडिया देश के लिए गंदे, भद्दे विचार फैलाते हैं, साथ ही देशद्रोहिता को बढ़ावा देते हुए देश की एकता पर प्रहार करते हैं.' वीडियो में कंगना रनौत ने बताया कि मैंने एक जर्नलिस्ट को अपने काम की, इवेंट और फिल्म की खिल्ली उड़ाते देखा था. इनके पास कोई तर्क-वितर्क या विचार नहीं हैं, बल्कि ये मुफ्त का खाना खाने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहुंचते हैं.' इतना ही नहीं, कंगना रनौत ने अपने वीडियो में उन्हें नालायकों और 50 रुपए में बिकने वाले पत्रकार भी कहा है. 
अपने वीडियो में कंगना रनौत ने मीडिया से खुद को बैन करने का अनुरोध करते हुए कहा 'मैं नहीं चाहती कि मेरी वजह से तुम्हारे घर में चूल्हा जले, इसलिए मुझे बैन करो.' इसके अलावा कंगना ने अपने वीडियो में कहा कि मेरे पास किसी भी देशद्रोही के लिए जरा भी सहनशीलता नहीं है. 
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कंगना रनौत के व्यवहार को और पत्रकार से हुए झगड़े के कारण एंटरटेनमेंट जर्नलिस्ट्स गिल्ड ऑफ इंडिया (ईजेजीआई) ने उन्हें एक पत्र भेजा था. इस पत्र में लिखा था, 'हम एंटरटेनमेंट जर्नलिस्ट्स गिल्ड ऑफ इंडिया के सदस्य, घटना और विशेष रूप से कंगना रनौत के व्यवहार की निंदा करते हुए बालाजी फिल्म्स और रनौत से एक लिखित सार्वजनिक माफी की मांग करते हैं. हम एक गिल्ड के तौर पर रनौत का और उनके किसी भी मीडिया कवरेज का सामूहिक रूप से बहिष्कार करने का निर्णय लेते हैं.' हालांकि एकता कपूर ने इस मामले पर माफी मांग ली थी.