असम सरकार ने विधानसभा में अब तक चला आ रहा नमाज़ के लिए “break” कल ख़त्म क्या कर दिया, हंगामा कर दिया मुस्लिम दलों और “सेकुलर” कीड़े मकौड़ों ने।
विधान सभा में 2 घंटे का समय नमाज़ के लिए मायने रखता है जबकि नमाज़ तो ज्यादा से ज्यादा 10 मिनट में अदा हो जाती है। कुछ समय पहले झारखंड विधानसभा से भी खबर आई थी कि परिसर में एक कमरा अलग कर दिया गया था नमाज़ अदा करने के लिए। AIUDF ने कहा है उसके विधायक तो नमाज़ के लिए जाएंगे लेकिन उसी समय में उनकी गैर हाजिरी में कोई बिल पास हो जाये तो रोने की जरूरत नहीं है।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
“असम के मुख्यमंत्री सस्ती लोकप्रियता हासिल करने और योगी का चाइनीस वर्सन बनने के प्रयास में मुसलमानों को परेशान करने के कृत्य करते रहते है। देश की आज़ादी में RSS के अलावा सभी धर्मो का हाथ है, हमारे मुसलमान भाइयों ने देश को आज़ादी दिलाने में कुबानियाँ दी हैं और जब तक हम हैं कोई माई का लाल उनका बाल बांका नहीं कर सकता”।
मतलब मुसलमानों ने आज़ादी की कथित लड़ाई लड़ी तो उनकी आने वाली सभी पीढ़ियों को जिंदगी भर उसका “Dividend” मिलता रहेगा। 2 घंटे की छुट्टी नमाज़ के लिए चाहिए, वो तो फिर हर नौकरी पेशे में भी चाहिए। लेकिन जिन हिंदुओं के बाप दादाओं ने आज़ादी की लड़ाई लड़ी, वो तो कभी ऐसी मांग नहीं करते, उन्हें भी हर मंगलवार को 2 घंटे की छुट्टी “सुन्दरकाण्ड का पाठ” करने के लिए मिलनी चाहिए।
तेजस्वी यादव तुम्हारी औकात नहीं है कि तुम RSS पर उंगली उठाने की हिम्मत कर सको, तुम्हे पता भी नहीं है RSS क्या है। और तुम यह याद रखो, मुसलमानों ने अपने लिए अलग मुल्क पाकिस्तान बनाने के लिए लड़ाई लड़ी थी यह कहते हुए कि मुस्लिम हिंदुओं के साथ नहीं रह सकते, इसलिए 95% ने पाकिस्तान बनाने के लिए वोट दिया था लेकिन गए नहीं, फिर कैसे कहते हो उन्होंने भारत की आज़ादी के लिए लड़ाई लड़ी, भारत की आज़ादी में तो उनका कोई योगदान है ही नहीं।
वारिस पठान कह रहा है कि भाजपा और हिमंता बिस्वा शर्मा मुसलमानों के दुश्मन हैं, नमाज़ की छुट्टी ख़त्म करना संविधान की मूल प्रस्तावना के खिलाफ है। मुसलमानों को संविधान में अपने धर्म के अनुसार चलने का अधिकार है। कुछ दिन पहले ओवैसी ने भी कहा था कि वक्फ संशोधन संविधान के “basic structure” का उल्लंघन है।
संविधान की मूल प्रस्तावना में कहीं नहीं लिखा कि मुसलमानों को असम विधानसभा में नमाज़ के लिए 2 घंटे की छुट्टी दी जाएगी और basic structure तो क्या, संविधान में कहीं वक्फ बोर्ड का जिक्र नहीं है। मुसलमानों को अपने धर्म के अनुसार चलने का अधिकार है मगर सरकार के खर्चे और दूसरों को तकलीफ देकर नहीं।
फ़ारूक़ अब्दुल्ला कह रहे हैं सब धर्मो का आदर होना चाहिए और नमाज़ की छुट्टी ख़त्म करने की आलोचना की। मियां अब्दुल्ला, 1990 में कश्मीर से हिंदुओं पर बर्बरता करके आपने उन्हें खदेड़ कर कैसे हिन्दू धर्म का आदर किया था। गाय की पूजा करता है हिंदू लेकिन मुसलमान आज गाय खाने को ही अपना अधिकार मानता है, फिर कैसे हिंदू धर्म का आदर करता है। 2 दिन पहले ओवैसी की पार्टी के लोगों ने हैदराबाद में भूमाता मंदिर को तोड़ दिया, मूर्तियां तोड़ दी, ऐसे आदर होता है हिंदू धर्म का।
असम में सरकार ने फैसला लिया है, वह भी सबकी सलाह से तो उस पर अमल होना चाहिए।


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