दिल्ली स्थित जामा मस्जिद की सर्वे कराने की माँग करते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के डायरेक्टर जनरल को चिट्ठी लिखी गई है। इसमें कहा गया है कि मुगल आक्रांता औरंगज़ेब ने जोधपुर और उदयपुर के कृष्ण मंदिर को तोड़कर उसके देव प्रतिमा को दिल्ली की जामा मस्जिद की सीढ़ियों में लगवाए थे। इसके पीछे औरंगजेब पर साकी मुस्तक खान की पुस्तक मसीर-ई-आलमगीरी को आधार बनाया गया है। अभी सिर्फ जामा मस्जिद ही नहीं फतेहपुरी मस्जिद भी लपेटे में आने वाली है।
ASI के डायरेक्टर को चिट्ठी हिंदू सेना के प्रमुख विष्णु गुप्त ने लिखी है। इससे पहले हिंदू सेना प्रमुख ने राजस्थान के अजमेर स्थित मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह को संकटमोचन महादेव मंदिर बताते हुए कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। कोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय, ASI और दरगाह कमिटी को नोटिस देकर 20 दिसंबर तक जवाब माँगा है।
विष्णु गुप्ता ने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि जोधपुर और उदयपुर के सैकड़ों मंदिरों को तोड़कर औरंगजेब ने हिंदुओं को अपमानित करने के लिए उनके अवशेषों को दिल्ली की जामा मस्जिद की सीढ़ियों पर लगवा दिया। जामा मस्जिद ASI के नियंत्रण में है और वह इसके पीछे की सच्चाई पता लगाने के लिए उसका सर्वे कराए। मस्जिदों की सीढ़ियों के नीचे दबे मंदिरों के अवशेषों से हिंदुओं की भावना आहत होती है।
विष्णु गुप्ता ने कहा कि मसीर-ई-आलमगीरी में लिखा है कि 24-25 मई 1689 को रविवार का दिन था। उस दिन खान जहाँ बहादुर जोधपुर से मंदिरों को तबाह करके लौटा। खान जहाँ बहादुर द्वारा मंदिरों को लूटने, प्रतिमाओं को खंडित करने और फिर उन्हें ध्वस्त कर के बाद बैल गाड़ियों से टूटी हुई मूर्तियों के अवशेष को दिल्ली रवाना कर दिया। इससे औरंगजेब बहुत खुश हुआ था।
इस वीडियो में अधूरा सच बताया गया है। जब अंग्रेजों ने जामा मस्जिद ही नहीं फतेहपुरी मस्जिद को भी नामस्जिद घोषित कर अपनी फौज और फौज के घोड़ों को इसमें रखा तब सैकड़ों हिन्दुओं ने इसे अंग्रेजों से मुक्त करवाने धरने और प्रदर्शन पुलिस की लाठियां खाई थी। तब उस समय दो व्यापारियों- सेठ छुन्ना मल और सत्य नारायण गुड़ वाले- मैदान में उतरे और दोनों मस्जिदों की नीलामी कर ख़रीदा था। यही वजह है अडानी अम्बानी को रोने वाले इस व्यापारियों का नाम नहीं लेते। इनके नामों को इन छद्दम धर्म-निरपेक्ष नेताओं और पार्टियों ने मिटटी में दबा दिया। छुन्ना मल ने जामा मस्जिद का मुतवल्ली, जामा मस्जिद के पीछे इंद्रप्रस्थ स्कूल के पास, उनके निवास पर बड़ा सा लोहे का गेट है, क्षेत्रीय निवासी को नियुक्त किया था। 1987 के लगभग इस परिवार का क़ौमी आवाज़, उर्दू दैनिक में पत्र प्रकाशित भी हुआ था कि मस्जिद के प्रबंधन में हमें क्यों नहीं शामिल किया जाता? छुन्ना मल ने हमें इस मस्जिद का मुतवल्ली नियुक्त किया था। इस गंभीर मुद्दे पर अपने युवा जीवन में रामजन्मभूमि विवाद के कई मुस्लिम नेताओं, मौलानाओं से भी प्रश्न किया था, शुरू में तो मुझे फिरकापरस्त आदि कहने लगे लेकिन जब उन्हें उन्ही की भाषा में जवाब देते दोगला और मुस्लिमों का दुश्मन बताते बहुत कुछ कहना शुरू करने पर कबूला कि 'हाँ, जब 1865 के बाद की तवारीख पढ़ते है, तब ऐसा हवाला आता है।'
विष्णु गुप्ता का कहना है कि हिंदू सेना चाहती है कि दिल्ली स्थित जामा मस्जिद का ASI सर्वे कराए और उन मूर्तियों को बाहर निकाल कर फिर से मंदिरों में स्थापित किया जाए। इस सर्वे से मुगल आक्रांता औरंगजेब की क्रूरता और मंदिर तोड़ने की सच्चाई भी दुनिया के सामने आ सकेगी। विष्णु गुप्ता द्वारा ASI को लिखी गई चिट्ठी की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है।
अजमेर के मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह का सर्वे कराने की माँग को लेकर भी उन्होंने एक याचिका दी है। इसके बाद कोर्ट ने अल्पसंख्यक मंत्रालय और ASI से जवाब माँगा है। इस याचिका के बाद विष्णु गुप्ता को जान से मारने की धमकी भी मिली है। तीन दिन पहले उन्हें कनाडा से के एक नंबर से धमकी भरा कॉल आया था।
विष्णु गुप्ता को फोन करने वाले कॉल करने वाले कॉलर ने उन्हें ‘सर तन से जुदा’ करने की धमकी दी थी। विष्णु गुप्ता ने बताया था कि धमकी देने वाले ने कहा था, “तेरा सिर कलम कर दिया जाएगा, गर्दन काट दी जाएगी। तुमने अजमेर दरगाह का केस फाइल करके बहुत बड़ी गलती कर दी है। अब तू नहीं बचेगा।”
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