दिल्ली चुनाव 2025 एक ऐतिहासिक चुनाव होने जा रहा है जो कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के लिए अभिशाप बनने जा रहा है। इन दोनों पार्टियों की स्क्रिप्ट लिखने वाला ही इन पार्टियों को धरातल पर पटकने के लिए प्रयासरत है।
इतिहास साक्षी है जबसे कांग्रेस ने खुलकर सनातन का विरोध किया है तभी से कांग्रेस बराबर पतन की ओर जा रही है। यह सिलसिला शुरू जो 7 नवंबर 1966 से शुरू हुआ आज तक थमने का नाम नहीं ले रहा और रुकेगा भी नहीं। आने वाले चुनावों में देश की सबसे पुरानी पार्टी एक क्षेत्रीय पार्टी बनने वाली है। यह बताना जरुरी है कि आखिर 7 नवंबर 1966 से कांग्रेस का क्यों पतन हो रहा है। इस दिन पार्लियामेंट स्ट्रीट पर जब निहत्ते साधु-संत गौ-हत्या के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे तब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने गोलियां चलवाकर पार्लियामेंट स्ट्रीट को साधु समाज के खून की होली खेल पार्लियामेंट स्ट्रीट को लाल कर दिया था तब कालपात्री जी महाराज ने इंदिरा को श्राप दिया था कि "इंदिरा जिस तरह गोपाष्टमी के दिन हम निहत्ते साधुओं की लाशें बिछाई है तेरी भी मौत गोपाष्टमी को ही होगी(31 अक्टूबर 1984 को गोपाष्टमी ही थी), देख कांग्रेस को बर्बाद करने हिमालय से मॉडर्न ड्रैस में एक तपस्वी आएगा।" तभी से बराबर कांग्रेस की राज्यों और केंद्र में सीटें कम होनी शुरू हो गयी।
अमित शाह ने जब 17 दिसंबर को राज्यसभा में कहा कि “इतना अंबेडकर अंबेडकर अंबेडकर करने के बजाय भगवान का नाम लिया होता तो स्वर्ग मिल जाता”, इस पर कांग्रेस के खड़गे ने कहा था कि “आप लोग बस मनुस्मृति की बाते करते हो, उसी में स्वर्ग और मोक्ष की बातें होती हैं”।
खड़गे का मतलब साफ़ था कि स्वर्ग और मोक्ष कुछ होता ही नहीं और इस तरह जब मनमोहन सिंह का देहांत हुआ तो खड़गे की वजह से ही उनके स्वर्ग के द्वार बंद हो गए और क्योंकि मनमोहन सिंह मुसलमानों पर सब कुछ न्योछावर करने वाले नेता थे तो उन्हें तो अल्लाह ने जिहादियों के साथ 72 हूरों के पास भेजा होगा।
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लेखक चर्चित YouTuber |
खड़गे ने आगे कहा कि “में किसी की आस्था को ठेस नहीं पहुंचाना चाहता, अगर किसी की आस्था को चोट पहुंची हो तो माफ़ी चाहता हूं, धर्म और भगवान पर हम सभी को आस्था है”।
आज मोदी और अमित शाह के स्वर्ग का क्यों ख्याल आ रहा है, क्या मनुस्मृति सही लगने लगी क्योंकि आपने ही कहा था कि मनुस्मृति में ही स्वर्ग और मोक्ष की बातें हैं। खड़गे का मतलब है कांग्रेस का कोई नेता स्वर्ग नहीं जाता क्योंकि कुंभ स्नान तो पाखंड है। खड़गे अभी से घोषणा कर दे कि उसके मरने के बाद उसकी अस्थियां गंगा में परवाहित न की जाएं।
खड़गे तो मालूम नहीं इस कुंभ में 2 लाख करोड़ का व्यापार होगा और न जाने कितने लोगों को रोजगार मिला हुआ है। कांग्रेस ने तो कुंभ में या गंगा में डुबकी नहीं लगाईं तो फिर क्या गरीबी दूर हुई, क्या लोगों को खाना मिला और क्या युवाओं को रोजगार मिला?
खड़गे को देखकर लगता है पागल से हो गए हैं। क्या खड़गे मुसलमानों से सवाल कर सकते हैं कि हज पर जाने से क्या लोगों की गरीबी दूर होती है, क्या भारत के लोगों को खाना मिल जाता है, क्या भारत के युवाओं को रोजगार मिल जाता है और इफ्तार पार्टियां देने से गरीबी दूर होती है और कितनो को रोजगार मिलता है? वक़्फ़ बोर्ड द्वारा जमीने हड़पने से अगर सब कुछ अच्छा होता है तो फिर आज मुसलमानों को गरीब क्यों बताया जाता है जो कोई टैक्स नहीं देते और दंगे मनमर्जी से करके सरकारी संपत्ति फूँक देते हैं?
उधर राहुल गांधी बेसुरा राग अलापता रहता है। कल फिर कहा उसने कि संविधान ख़त्म करना चाहती है भाजपा और RSS और अंबेडकर का अपमान करते हैं जबकि 50 किस्से बताए जा चुके है कि कांग्रेस ने अंबेडकर का अपमान किया, “मीडिया के लोग कैमरा लेकर जो घूम रहे हैं , वो आपके नहीं हैं, वो अंबानी अडानी के हैं, आप लोग भूखे मर जाओ, बच्चे भूखे मर जाएं, किसान मर जाएं, आत्महत्या कर लें, इन्हे फर्क नहीं पड़ता, ये अडानी अंबानी की शादी दिखाएंगे, किसान मजदूर, बेरोजगारी की बात नहीं करेंगे”।
अब अंबानी अडानी के कार्यालय राहुल गांधी पर बेवजह आरोप लगाने के लिए मानहानि के मुक़दमे दायर करें जो इसे चुप कर सकता है। एक बयान में तो राहुल गांधी ने यहां तक कहा लोगों से कि आपकी जेब से पैसा कटता है और सीधा अडानी के खाते में जाता है। इस पर केस दायर हो सकता है। वीर सावरकर के पोते ने जब राहुल गांधी पर मुकदमा दायर किया तब से इसने वीर सावरकर पर बोलना बंद कर दिया।
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