अदालतें केजरीवाल पर इतनी मेहरबान क्यों हैं? क्या अदालतें Deep State के हाथों बिक गयी हैं? देखिए वीडियो

सुभाष चन्द्र
इसमें अब कोई शक नहीं रह गया है कि न्यायपालिका में बैठे जज केजरीवाल के ऊपर मेहरबान रहते हैं और इसके लिए एक केस से शुरू करता हूँ। 

ठीक एक साल पहले 25 जनवरी, 2024 को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संदीप मेहता ने स्वामी प्रसाद मौर्या के खिलाफ चल रही आपराधिक FIR पर रोक लगा दी उस पर आरोप था कि उसने श्री रामचरितमानस का अपमान किया, लोगों को भड़काया और मानस के पन्ने फाड़े

इस पर महान जजों ने उत्तर प्रदेश सरकार के वकील से कहा -

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“Why are you so touchy about these things? It is a matter of interpretation;

It's a line of thought, how is it an offence? Mourya cannot be held responsible for burning copies? संदीप मेहता ने कहा या तब कहा जब सरकार के वकील ने कहा कि मानस की प्रतियां जलाई जा रही हैं

ऐसा line of thought नूपुर शर्मा के लिए नहीं कहा पारदीवाला और सूर्यकांत ने और उसके खिलाफ तो जहरीला भाषण दे दिया था शिया मुस्लिम बोर्ड का अध्यक्ष वसीम रिजवी कुरान की 26 आयतो के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गया था ये उसका Line of thought था लेकिन आपने उस पर 50,000 रूपए का जुर्माना लगा दिया

आखिर सनातन को अपमानित करने वालों पर कोर्ट किस आधार पर freedom of speech कहकर दयालु हो जाते हैं। क्या है कारण कि अन्य महजबों के खिलाफ कुछ भी बोलने पर अदालतें सख्त हो जाती हैं? क्या यह अदालतों का दोगलापन नहीं? नूपुर शर्मा पर टिप्पणी करने से पहले कोर्ट ने यह क्यों नहीं पूछा कि "जो नूपुर शर्मा ने बोला क्या इस्लामिक किताबों में नहीं लिखा? अगर लिखा है फिर नूपुर दोषी क्यों? क्यों नहीं "सिर तन से जुदा गैंग" फौरन हिरासत में लेकर सख्त कार्यवाही करने की जरुरत है? दूसरे, वसीम रिज़वी पर 26 आयतों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने पर 50000 रूपए का जुर्माना क्यों लगाया? क्या सुप्रीम कोर्ट को नहीं मालूम कि कलकत्ता हाई कोर्ट में 124 आयतों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था, लेकिन कोई इस्लामिक जानकर उन विवादित आयतों के पक्ष में बोलने की हिम्मत नहीं कर पाया। Organiser Weekly में विस्तार से प्रकाशित सीताराम गोयल के लेखों(1981/82) में between the lines सच्चाई को पढ़ा जा सकता है।  
फिर दिल्ली तीस हज़ारी कोर्ट ने मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट Z S Lohat ने 31 जुलाई 1986 को हौज़ काज़ी थाने में दर्ज दो हिन्दू महासभा के खिलाफ 24 आयतों के खिलाफ दर्ज मुकदमें में बरी किया था। कोई इस्लामी विद्वान उन आयतों के पक्ष में कोई सफाई नहीं दे सका।              

यह बात ध्यान देने की है भगवान राम के अपमान को Line of thought कहने वाले दोनों जजों में बीआर गवई भी थे जो कांग्रेस हैं और जिनका कोई निर्णय हिंदुओं के पक्ष में नहीं होता

अब ये Line of thought हमारी भी हो सकती है कि आप लोग भ्रष्ट हैं और केजरीवाल पर मेहरबान रहने के लिए पैसे का खेल खेला जाता है कुछ बातों के सबूत नहीं होते लेकिन दर्पण की तरह साफ़ दिखाई देता है कुछ मामले दे रहा हूँ -

10 मई, 2024 संजीव खन्ना और दीपांकर दत्ता ने लोकसभा में प्रचार के लिए अंतरिम जमानत दी 

जबकि कल जस्टिस 22 जनवरी को जस्टिस पंकज मित्तल ने ताहिर हुसैन को जमानत न देते हुए कहा कि प्रचार करने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है There is no law.

12 जुलाई, संजीव खन्ना और दीपांकर दत्ता ने ED के केस में जमानत दे दी और गिरफ़्तारी की वैधता को लेकर मामला 3 जजों की बेंच को भेज दिया वो बेंच आज 6 महीने में भी नहीं बनी है और ये बात शंका पैदा करती हैं कि “कुछ तो गड़बड़ है”

12 सितंबर, CBI केस में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जवल भुइया ने उसे जमानत दे दी लेकिन गिरफ़्तारी की वैधता पर दोनों में मतभेद था सूर्यकांत की नज़र में गिरफ़्तारी सही थी लेकिन भुइया को गलत लगी खासकर गिरफ़्तारी की टाइम को लेकर 

ED और CBI दोनों केस में जमानत देते हुए शर्त लगाई गई थी कि केजरीवाल अपने केस के बारे में कोई बयान नहीं देगा लेकिन वह हर जगह कहता फिर रहा है कि उसे फर्जी केस में जेल भेज दिया गया। क्या केजरीवाल पर contempt केस नहीं बनता?  

17 जनवरी, कचरा प्रबंधन पर जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जवल भुइया ने कहा कि केंद्र सरकार को भी ध्यान देना चाहिए न्याय मित्र अपराजिता सिंह ने कहा कि इस मुद्दे को सुलझाने के लिए दिल्ली और केंद्र सरकार के बीच कोई समन्वय नहीं है मतलब MCD में “आप” पार्टी काम नहीं करेगी और सारा दोष केंद्र पर मढ़ देगी

16 जनवरी को LG से ED के केस में मुकदमा चलाने के मंजूरी देने पर संजय सिंह ने कहा कि एक बार फिर साबित हो गया कि केजरीवाल, सिसोदिया और मेरी गिरफ़्तारी गैरकानूनी थी यह शराब घोटाले का मामला पूरी तरह फर्जी था क्या ऐसा कोर्ट ने कहा था?

17 जनवरी, BR Gavai और AG Masih ने आयुष्मान भारत दिल्ली में लागू करने के दिल्ली हाई कोर्ट के 8 साल बाद दिए फैसले पर रोक लगा दी जज कांग्रेस के और केजरीवाल से करोड़ों कमाने वाला वकील भी कांग्रेसी अभिषेक मनु सिंघवी

इस फैसले पर केजरीवाल ने कहा कि “मुझे ख़ुशी है कि सुप्रीम कोर्ट ने पुष्टि की है कि आयुष्मान भारत एक फर्जी योजना है जबकि ऐसा कोर्ट ने कुछ नहीं कहा ये contempt of court है

अब CAG पर हाई कोर्ट का फैसला भी केजरीवाल को बचाने वाला लगता है

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