कांग्रेस परिवार से आने वाले जस्टिस बीआर गवई और वामपंथी प्रशांत भूषण दिल्ली में भाजपा सरकार आते ही रेवड़ियों पर बरस पड़े; आदेश दीजिए कि 2100 रूपए और 21000 रूपए(गर्भवती) केवल उसी महिला को दिए जाएँ जिसके 2 बच्चे हों, 3 बच्चे वाली महिला को यह राशि न दी जाए

सुभाष चन्द्र

जस्टिस बीआर गवई ने जब से राहुल गांधी की सजा पर रोक लगाने से पहले कहा है कि वो कांग्रेसी परिवार से आते हैं, मुझे तब से ऐसा ही लगता है जैसे कोई कांग्रेस का सदस्य ही जज की कुर्सी पर बैठा है और कांग्रेस का एजेंडा चला रहा है। एक तरफ कांग्रेसी परिवार का जज और दूसरी तरफ उनके सामने याचिका लेकर गया वामपंथी वकील प्रशांत भूषण किसी भी केस का नज़ारा बदल सकते हैं

शहरी क्षेत्रों में बेघर लोगों के आश्रय के अधिकार से संबंधित प्रशांत भूषण की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस गवई और जस्टिस आगस्टीन जॉर्ज मसीह ने टिप्पणी करते हुए कहा कि “चुनावों से पहले राजनीतिक दलों द्वारा रेवड़ियां (मुफ्त चीज़ें) देना लोगों को अकर्मण्य बना रही हैं, राष्ट्रीय विकास के लिए लोगों को मुख्यधारा में लाने के बजाय क्या हम परजीवियों का एक वर्ग तैयार कर रहे हैं? लोग काम करने को तैयार नहीं है क्योंकि उन्हें मुफ्त राशन और पैसा मिल रहा है” जस्टिस गवई ने इन योजनाओं के बारे में बोलते हुए खासतौर पर लाड़ली बहन योजना का नाम लिया और कहा कि इन योजनाओं की वजह से लोग काम नहीं करना चाहते

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वामपंथी भूषण ने कहा कि देश में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जो काम न करना चाहता हो यदि उसके पास काम हो मतलब सरकार को दोष दे दिया कि लोगों को नौकरी नहीं दे रही

अब ये दो बातें तो विपरीत हो गई, प्रशांत भूषण कह रहा है कि लोग काम करना चाहते हैं लेकिन काम नहीं है लेकिन दोनों न्यायाधीश कह रहे हैं कि लोग काम नहीं करना चाहते

हालांकि एक याचिकाकर्ता को गवई साहेब ने यह भी कहा कि आपका यह कहना गलत है कि सरकार ने केवल अमीरों पर दया दिखाई है और गरीबों के लिए कुछ नहीं किया

गौरतलब यह है कि लोहे को लोहा ही काटता है। दिल्ली में केजरीवाल 2013 ले लगातार रेवड़ियां बांट रहा है लेकिन मीलॉर्ड ने कभी कुछ टिप्पणी नहीं की लेकिन इस बार पहले कांग्रेस ने और फिर भाजपा ने भी रेवड़ियां दी और जैसे ही वह चुनाव जीती है, मीलॉर्ड के पेट में दर्द हो गया सुप्रीम कोर्ट जबकि रेवड़ियों के खिलाफ अश्वनी उपाध्याय के एक याचिका 2022 से लिए बैठा है क्योंकि वे खुद असमंजस में हैं कि क्या रेवड़िया होती हैं और क्या समाज कल्याण की योजना?

कांग्रेस ने रेवड़ियां हिमाचल, कर्नाटक और तेलंगाना में भी बांटी थी, तब गवई साहेब कुछ नहीं बोले जबकि तीनों राज्यों को आर्थिक रूप से खोखला कर दिया कांग्रेस ने इधर दिल्ली का मालिक रेवड़ियां देते देते घोटाले कर गया लेकिन गवई साहेब ने उसे जमानत दे दी

आप हिम्मत कीजिए और आदेश दीजिए कि जिस परिवार में 5 से ज्यादा सदस्य हैं, उन्हें किसी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिलेगा आप क्या हिम्मत कर सकते हैं? मुस्लिम कौम को आदेश देने का जो सरकारी ख़ज़ाने में कोई योगदान नहीं करते लेकिन बच्चों की फ़ौज बढ़ाए जाते हैं। 2100 रूपए और 21000 रूपए(गर्भवती) केवल उसी महिला को दिए जाएँ जिसके 2 बच्चे हों, 3 बच्चे वाली महिला को यह राशि न दी जाए।     

आप सरकार के 80 करोड़ गरीब लोगों को भोजन देने पर भी एतराज कर रहे हैं जैसे सरकार कोई पाप कर रही है क्या मुफ्त राशन या लाड़ली बहना योजना में 1250 रुपए प्रति माह महिलाओं को देने से या कुछ और पैसे की मदद देने से घर का निर्वहन हो सकता है जो आप कह रहे हैं कि लोग काम ही नहीं करना चाहते ये योजनाएं किसी नौकरी से मिलने वाले वेतन का मुकाबला नहीं कर सकती 

सरकार ने लोगों को इतना योग्य बनाया है कि 10 साल में 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आ गए इसी मोदी सरकार ने 4 करोड़ लोगों को घर भी बना कर दिए है और 12 करोड़ घरो को नल से जल पहुंचा दिया, बिना किसी भेदभाव के

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