प्रयागराज में चल रहा महाकुंभ 144 वर्षों के बाद आया है और आज के समय में जितने भी लोग जीवित हैं, उनके जीवन काल में यह महाकुंभ फिर नहीं आएगा। हिंदू आस्था का यह पावन पर्व सदियों से मनाया जाने वाला ऐसा पर्व है जिसमें सभी श्रद्धालु एक ही रंग में रंगे होते हैं, कोई जात पात का भेदभाव नहीं। कोई किसी से नहीं पूछता “कौन जात हो”। ऐसे कुंभ में जो जाकर स्नान नहीं कर सकते वे भी मन ही मन गंगा जी में स्नान कर सकते है।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
जानबूझ कर अखिलेश ने तो पाप 2013 के कुंभ में किया था जब उसकी बागडोर एक मुसलमान आज़म खान को दे दी थी जिसका हिंदू आस्था में दूर दूर तक कोई विश्वास नहीं था।
समाजवादी पार्टी की राज्यसभा सांसद जया बच्चन का बयान तो बहुत शर्मनाक है। जब वह कहती है कि लाशों को गंगा में बहाने से प्रयाग में जल को सबसे ज्यादा प्रदूषित है। राम गोपाल यादव कहता है कि लाशों को दफना दिया गया है। इन पाखंडी कालनेमि हिन्दुओं से पूछा जाए कि जब लाशों को गंगा में बहाया और दफनाया जा रहा था तो वहां मौजूद मीडिया क्या कर रहा था?
एक सफ़ेद कुर्ते पर एक काली छींट पड़ जाए तो दूर से साफ़ दिखाई देती है लेकिन आज के नेताओं के कुर्ते पूरी तरह सफ़ेद होते हुए भी काले है और दिल का रंग उससे भी ज्यादा काला है, ये केवल राजनीति नहीं सियासत करना जानते हैं।
विपक्ष की बस एक चाहत है कि किसी भी तरह कुंभ में हादसे होते रहे और श्रद्धालु मरते रहे और इसके अलावा भी जो भी कुछ देश के विरुद्ध हो सके, हो जाए जिससे वे मोदी, योगी, अमित शाह और भाजपा को घेर सके।
जिस कुंभ स्नान के लिए अब तक 45 करोड़ लोग पहुंच गए, भूटान नरेश डुबकी लगा गए, 68 देशों के 137 राजनयिक स्नान कर गए, विदेशी महिलाएं स्नान कर रामायण पाठ और शिव तांडव स्रोत का जाप कर गई और न जाने कौन कौन आकर स्नान कर गए, उस कुंभ की निंदा करते करते अखिलेश, खड़गे थकते नहीं। उसकी असली वजह यह है कि इन्हे मुस्लिम वोटबैंक की ज्यादा चिंता है न की सनातन की।
ऐसे ही हिंदुओं की आस्था नहीं है कि समस्त देवों का कुंभ स्नान में आना होता है। नाग वासुकी भी स्वयं दर्शन दे गए और उनके साथ ऐसा नहीं हो सकता कि ब्रह्मा विष्णु और महेश न आ आए हो। कहा जा रहा है कि ब्रह्म महुर्रत में 3 तारे डुबकी लगाकर लुप्त हो जाते हैं। लेकिन आपने सभी का अपमान कर दिया जिसका दंड मिलना तो निश्चित है। जो अखिलेश कुंभ की व्यवस्था पर विधवा विलाप कर रहा है वह अपने पिता के साथ सैफई में फ़िल्मी सितारों के नृत्य देखता था जब मुजफ्फरनगर दंगों के पीड़ित 60,000 लोग शिविरों में ठंड से ठिठुर रहे थे।
उसे और खड़गे को पता नहीं कांग्रेस का नेता DK Shivkumar पत्नी सहित संगम में डुबकी लगा कर आए हैं और उन्होंने योगी के प्रबंधों की प्रशंसा की है।
दानवीर कर्ण जिसने अपना कवच कुंडल इंद्र को दान कर दिया लेकिन उसके एक पाप ने सभी पुण्य कर्मों को नष्ट कर दिया कि उसने अग्नि सुता द्रौपदी को वेश्या कहा और उसे नग्न लाने को भी सही कहा। हिरण्यकश्यप विष्णु से टकरा कर स्वयं ईश्वर बन गया और समाप्त हो गया।
इतिहास में ऐसे अनेक उदाहरण मिल सकते हैं जिनसे पता चलता है कि ईश्वर पाप और पुण्य का लेखा जोखा करने में कभी गलती नहीं करता और हिंदुत्व का विरोध जिस तरह ये सेकुलर लोग कर रहे हैं, वह तो अपने आप में घोर पाप है। दंड तो अवश्य मिलेगा लेकिन क्या मिलेगा और कब मिलेगा, यह विधि का विधान ही जानता है।
आज प्रयागराज का हर परिवार अपने परायों को स्नान करने में मदद न कर रहा हो, 45 करोड़ लोगों की व्यवस्था में कुछ कमी रह सकती है लेकिन ये विपक्ष के नेता तो उन कमियों का तिल का ताड़ बनाना चाहते हैं। दुनियाभर के देश कुंभ की व्यवस्थाओं की प्रशंसा कर रहे हैं लेकिन देश में बैठे कुछ निर्बुद्धि कुंभ को कोसने में लगे हैं। शर्म से डूब मरने की बात है।


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