फरवरी 8 से एक खबर चलाई जा रही है कि कांग्रेस की वजह से “आप” पार्टी कम से कम 14 सीट हार गई। इसके बारे में बताया जा रहा है कि कांग्रेस को इन 14 सीटों पर जो वोट मिले, उनसे कम वोट से “आप” के उम्मीदवार हारे है।
हां ऐसा हुआ है लेकिन सवाल यह है कि कांग्रेस अपने उम्मीदवार क्यों नहीं खड़े करती? अगर वह ऐसा करती तो केजरीवाल के साथ “गुप्त” समझौता माना जाता और वह केजरीवाल को जीत प्लेट में रख कर देती। इससे तो कांग्रेस स्वतः ही अपने को ख़त्म कर लेती, यानी जिस दिल्ली में वह 15 साल राज करती रही, उसमे बिना लड़े ही हार मान लेती और अन्य राज्यों की तरह दिल्ली में क्षेत्रीय दल भी नहीं रहती। INDI गठबंधन में भी कोई कांग्रेस को नहीं पूछता। दूसरे यह कि कांग्रेस के वोटबैंक पर ही केजरीवाल उछल कांग्रेस को कोसने के साथ-साथ सोनिया और राहुल गाँधी को जेल भेजने के लिए चीखता-चिल्लाता रहता था। कांग्रेस अगर अपना वोटबेंक वापस ले रही है INDI गठबंधन क्यों रो रहा है?
जो लोग यह कह रहे हैं कि कांग्रेस की वजह से “आप” हारी, वे भूल जाते हैं कि यदि कांग्रेस न होती और भाजपा/आप में सीधी टक्कर होती तो यह कैसे माना जा सकता है कि कांग्रेस को पड़े सभी वोट “आप” पार्टी को जाते? ऐसे में फिर जनता के पास भाजपा भी एक विकल्प होती और यह भी हो सकता है क़ि वे वोटर भाजपा को ही वोट करते क्योंकि उन्होंने 10 साल केजरीवाल के कुशासन और भ्रष्टाचार को चख लिया था और केजरीवाल की कांग्रेस को धमकियां भी सामने थी। कांग्रेस का दिल्ली नेतृत्व ऐसा कभी नहीं करता कि चुनाव न लड़ा जाए।
दिल्ली में जो संकल्प पत्र भाजपा ने दिया है, वह पूरा तो करेगी लेकिन उसमें एक बिंदु पर मेरा मतभेद है कि गर्भवती महिलाओं को 21,000 रुपए दिए जाएंगे। यह उचित नहीं है। दिल्ली में औसतन हर साल 3 लाख बच्चो का जन्म होता है और 21,000 रुपए हर किसी को देने से समस्या हो सकती है। इसलिए एक महिला को यह पैसा देने के लिए 3 बच्चों की सीमा तय होनी चाहिए, वह भी BPL में होनी चाहिए। अन्यथा तो आप जानते ही हैं मुस्लिम महिलाएं तो अधिक से अधिक बच्चे पैदा करने में आगे रहती हैं लेकिन वोट भाजपा को नहीं देती।
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इसके अलावा अन्य विषय हैं -
-शराब की दुकानें जो केजरीवाल ने रिहायशी इलाकों में, स्कूलों, मंदिरों और गुरुद्वारों के नजदीक खोली थी, उन्हें तुरंत बंद कर देना चाहिए, जिसको शराब चाहिए, वह 5 -10 किलोमीटर दूर से भी ला सकता है;
-केजरीवाल और उसके साथियों पर चल रहे मुकदमों के लिए Fast Track courts बना देने चाहिए जिससे फैसले जल्दी हो सके;
-शीश महल को जनता के लिए खोलने की बजाय, या तो किराए पर दे देना चाहिए या बेच देना चाहिए जिससे सरकार का खर्च हुआ पैसा वापस आ सके;
-सड़कों को ठीक करना और स्वच्छ पानी की व्यवस्था प्राथमिकता होनी चाहिए;
-यमुना सफाई के लिए शीघ्र कदम उठाए जाएं;
-वक्फ बोर्ड को जो अभी तक खैरात दी गई है, उसकी गहन जांच होनी चाहिए; वैसे उसकी जांच अमानतुल्लाह खान पर पहले से चल रही है;
-केजरीवाल और उसके गैंग के लोगों के मुक़दमे लड़ने वाले वकीलों, सिंघवी समेत, सभी की जांच होनी चाहिए और जो केस केजरीवाल के मुख्यमंत्री बनने से पहले के हैं, उनके लिए वकीलों को दी गई फीस का पैसा केजरीवाल से वसूल होना चाहिए;
-जनता के साथ संवाद कायम होना चाहिए और लोगों के जो भी सुझाव हों या शिकायत हो, उन पर शीघ्र कार्यवाही होनी चाहिए।
- बांग्लादेशी और रोहिंग्या सभी को 31 मार्च, 2025 तक नजदीकी पुलिस थाने में आत्मसमर्पण करने का ऐलान कर देना चाहिए और चेतावनी देनी चाहिए कि उसके बाद कोई रहम नहीं किया जाएगा - जो समर्पण करेगा उसे बांग्लादेश भेज दिया जाएगा।
ऐसे और भी मामले हैं जिन पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है लेकिन जनता को भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जो बेड़ागर्क 10 साल में किया है केजरीवाल ने उसे दुरुस्त करने में कुछ समय जरूर लगेगा। किसी जादू की छड़ी से सब कुछ तुरंत नहीं हो सकता।


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