बेल कोर्ट ने “रणवीर इलहाबादिया” की गिरफ़्तारी पर रोक क्यों लगाई? फिर सुप्रीम कोर्ट की फटकार का क्या मतलब रह गया? मुद्दा एक फैसले तीन, क्यों? क्या कोई सुप्रीम कोर्ट का वर्तमान या कोई भी भूतपूर्व मुख्य न्यायाधीश जवाब देने की हिम्मत करेगा?

इस किताब के Preface में
between the lines
समझने की जरुरत है  
सुभाष चन्द्र 

पिछले कुछ वर्षों से देखा जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले बड़े अजीब से आ रहे हैं। इस सन्दर्भ में गौर करिए कलकत्ता हाई कोर्ट में क़ुरान की 124 विवादित आयतों के खिलाफ चला मुकदमा। अगर आज भी इस मुकदमें को दोबारा खोल सिर्फ दर्ज गवाहियों पर फैसला करवाया जाए। लेकिन जब इसी मुद्दे पर वसीम रिज़वी सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा करते हैं बेचारे पर जुर्माना ठोक दिया जाता है, क्यों? जुर्माना ठोकने वाले जज ने इसी मुद्दे पर पिछले केसों में दर्ज गवाहियों और फैसले को क्यों नहीं देखा? इतना ही नहीं, दिल्ली की तीस हज़ारी के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट Z S Lohat द्वारा हौज़ काज़ी थाने में दर्ज केस पर इसी कुरान की 24 आयतों के खिलाफ 31 जुलाई 1986 को फैसला दे दिया जाता है। मुद्दा एक फैसले तीन, क्यों? क्या भारत की सबसे बड़ी कोर्ट सुप्रीम कोर्ट का कोई जज जवाब देने की हिम्मत करेगा? मुकदमा अगर गवाहियों पर नहीं चलेगा फिर मुक़दमे के फैसले का क्या फायदा? सुप्रीम कोर्ट से कहीं ज्यादा सख्त फैसले निचली अदालतों से लेकर हाई कोर्ट दे रही हैं। सुप्रीम कोर्ट क्या इनके फैसलों को प्रभावहीन करने के लिए है? इस जरुरत से ज्यादा गंभीर मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट को सोंचना होगा, अपनी सोंच को बदलना होगा, अपनी मजहब आधारित सोंच को बदलना होगा। 

        

अब बात करते हैं फरवरी 18 को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने रणवीर  इलहाबादिया पर सख्त टिप्पणियां तो की लेकिन उसकी गिरफ़्तारी पर रोक लगा कर बड़ी राहत भी दे दी। आगे कुछ लिखने से पहले याद करा दूं कि जस्टिस सूर्यकांत उस पीठ में जस्टिस पारदीवाला के साथ थे जिसने नूपुर शर्मा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के इतिहास की सबसे निचले स्तर की हेट स्पीच दी थी

लेखक 
चर्चित YouTuber 
कल दोनों जजों की पीठ ने कहा - 

“अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर कुछ भी बोलने का लाइसेंस नहीं मिल जाता; रणवीर के दिमाग में गंदगी भरी है, जो उसने शो पर उगल दी; रणवीर की मानसिकता को विकृत और भाषा को निंदनीय करार देते हुए कहा कि उसकी भाषा बेटियों, बहनों, माता-पिता और यहां तक समाज को भी शर्मिंदगी महसूस कराती है” 

लेकिन पीठ ने रणवीर को जांच में सहयोग करने के निर्देश देने के साथ गिरफ़्तारी पर रोक लगा दी और यह रोक ऐसा लगता है स्थायी लगाईं है क्योंकि यह कहीं नहीं कहा गया कि गिरफ्तारी पर रोक कब तक के लिए लगाईं गई है। 

सही मायने में देखा जाए तो कोर्ट ने कुछ भी कहा हो लेकिन जजों ने उसके आरोप इतने गंभीर नहीं माने जिसके लिए उसे गिरफ्तार किया जाए। “बेल कोर्ट” है जिसकी शरण में जो भी बड़ा आदमी जाएगा उसे या तो बेल मिलेगी और या गिरफ्तारी पर रोक लगा दी जाएगी

समाज को लज्जित तो आपके इस आचरण से होना पड़ेगा कि एक मक्कार, नीच और अधम व्यक्ति को भी आप जेल में नहीं डालना चाहते। क्यों चाहेंगे जब वह 60 करोड़ संपत्ति का मालिक है और उसका वकील पूर्व चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ पुत्र अभिनव चंद्रचूड़ है?

रणवीर के खिलाफ 2 FIR हैं, एक गुवाहाटी में और दूसरी ठाणे, मुंबई में है और एक जयपुर में है, कोर्ट ने उन्हें एक साथ करने से मना करते हुए कहा कि दोनों जगह जगह में शामिल होना होगा। आगे और किसी FIR दर्ज करने पर रोक लगा दी। उसे और उसके साथियों को अगले आदेश तक India Got Latent पर कोई शो नहीं करना होगा; पासपोर्ट जमा करना होगा और बिना सुप्रीम कोर्ट की इज़ाज़त विदेश नहीं जा सकता

आप अभिनव चंद्रचूड़ की सोच देखो, जब कोर्ट ने पूछा कि अगर इस भाषा को अश्लील और अभद्र नहीं कहा जाएगा तो किसे कहा जाएगा, इसके मानक क्या हैं, तो चंद्रचूड़ ने कहा कि “इसे अश्लील नहीं, “लस्टफुल सेक्स थाट” कह सकते हैं। कहते हैं कि जब कोर्ट की नाराज़गी बरकार रही और कोर्ट ने पूछा ऐसे व्यक्ति को राहत क्यों दी जाए तो चंद्रचूड़ ने अमीश देवगन और अर्नब गोस्वामी के फैसलों का हवाला देते हुए राहत मांगी

जैसे बाप डी वाई चंद्रचूड़ ने विवाहित महिलाओं की sexual autonamy की परिभाषा गढ़ कर उन्हें घर से बाहर sex enjoy करने की अनुमति दे दी थी, वैसे बेटा “अश्लीलता” की नई परिभाषा गढ़ गया कोर्ट में। बेटे चंद्रचूड़ को पता नहीं कि अर्नब गोस्वामी और अमीश देवगन के मामले किसी “अश्लील भाषा” से नहीं जुड़े थे बल्कि राजनीतिक मामले थे। 

फिर क्यों रणवीर की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी कदाचित अनिश्चित समय के लिए और कहा कि उसने अपने माता-पिता को शर्मिंदा किया है। चंद्रचूड़ कहता है उसकी माता को धमकियां मिल रही है। ये एक पेड प्रोग्राम, केवल वयस्कों के लिए लेकिन किसी ने लीक कर दिया

सुप्रीम कोर्ट ने उसकी गिरफ़्तारी पर रोक लगा कर एक तरह रणवीर की अश्लीलता का समर्थन ही कर दिया। जो भाषा विषवमन करते हुए सूर्यकांत और पारदीवाला ने नूपुर के खिलाफ प्रयोग की थी उसकी 1% भी रणवीर के खिलाफ नहीं की। और रणवीर के माता-पिता क्या शर्मिंदा हुए ? उन्होंने तो रणवीर के प्रोग्राम पर कोई प्रतिक्रिया तक नहीं दी और न ही इसकी निंदा की

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