जो कल तक मोदी को चुनौती देता था कि मुझे हराने के लिए मोदी जी आपको दूसरा जन्म लेना पड़ेगा, वो फरवरी 8 2025 को चारों खाने चित हो गया। ठीक 40 सीट से हिसाब हुआ, “आप” की पिछले चुनाव की 62 सीट से 40 कम होकर 22 रह गई और भाजपा की 8 सीट से 40 बढ़ कर 48 हो गई।
भाजपा और “आप” की वोटों में मात्र 2.21% का अंतर है। भाजपा को वोट मिले 45.76% और “आप” को मिले 43.55%। लेकिन पासा इन 2.21% वोट से पलटा। दरअसल खेल हुआ “आप” को पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार 10% कम और भाजपा को करीब 8% वोट ज्यादा मिलने से । वैसे दिल्ली वाले 43% ऐसे भी हैं जिन्हें केजरीवाल की चोरबाज़ारी पसंद है।
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लेखक चर्चित YouTuber |
केजरीवाल, सिसोदिया, सत्येंद्र जैन शराब घोटालेबाज समेत सौरभ भारद्वाज और सोमनाथ भारती सब दिग्गज हार गए लेकिन आतिशी और गोपाल राय सीट बचा गए।
एक भ्रम फैलाया जा रहा है कि मुसलमानों ने भी अबकी बार भाजपा को वोट दिया है और साजिद रशीदी का बयान सुनाया जा रहा है कि उसने पहली बार भाजपा को वोट दिया जिसे मैं तो मानने को तैयार नहीं हूं। जो व्यक्ति खुलेआम राम मंदिर को तोड़ने की बात करता है, काशी और मथुरा का विरोध करता हो, वह कैसे भाजपा को वोट दे सकता है? इतना ही नहीं अब टीवी पर एक और मौलाना शाहबुद्दीन का बयान प्रसारित किया जा रहा कि 'दिल्ली के मुसलमानों ने इस समझदारी से वोट किया है। पहले कांग्रेस को एकतरफा वोट करने वालों ने केजरीवाल पर भरोसा कर उनकी पार्टी को वोट देना शुरू कर दिया लेकिन इस चुनाव में तीन तरफ़ा वोट गया। अबकी बार मुसलमानों ने बीजेपी को भी वोट दिया।' अच्छी बात है मान लेते हैं लेकिन एक बात का जवाब दो कि रशीदी ने तो वोट डालते ही बोल दिया लेकिन मौलाना शाहबुद्दीन ने बीजेपी के प्रचंड बहुमत के बाद। अब इसे दोगलापन कहा जाये या कुछ और? नमूना देखा अदील और दिल्ली दंगों के आरोपी ताहिर के वोट मिलाने पर बीजेपी उम्मीदवार से ज्यादा। फिर ये ही दोनों मौलाना बताएं दिल्ली दंगों के आरोपी को 33474 वोट किसने दिए और क्यों?
और अगर मान भी लिया जाए कि उसने भाजपा को वोट दिया तो फिर मुसलमानों से वोट क्यों नहीं डालने को कहा। 22 में 17 सीट ऐसी हैं जो केजरीवाल को केवल मुस्लिम वोट के कारण मिली है। इसलिए यह बात तो निश्चित है मुस्लिम वोट भाजपा को नहीं पड़ा और न कभी पड़ेगा।
फैज़ाबाद लोक सभा सीट जीत कर अखिलेश और कांग्रेस ने ढोल पीटा था कि हमने भाजपा को अयोध्या में हरा दिया जबकि लोक सभा सीट के अयोध्या विधानसभा क्षेत्र में भाजपा जीती थी। लेकिन अबकी बार मिल्कीपुर सीट को भाजपा ने रिकॉर्ड 61000 वोट से जीत कर कथित अयोध्या हार का बदला ले लिया।
अखिलेश को हार दिखाई दे गई थी और तभी उसने चुनाव आयोग को मृत घोषित कर उसे कफ़न भेंट कर दिया था। महाकुंभ की रोज निंदा करके मुस्लिमों को खुश करना भी अखिलेश के काम नहीं आया। मिल्कीपुर तो हारे, फिर भी अखिलेश का चाचा रामगोपाल यादव कह रहा है कि दिल्ली में भाजपा 27 साल बाद सत्ता में आई है तो 7 महीने में हट जाएगी। यानी बुढ़ापे में सही पागलपन का शिकार हो गए हैं।
कांग्रेस का दिल्ली में जीरो की हैट्रिक ऐसे लगा जैसे “पंजा” उसके मुंह पर ही पड़ा हो और अब राहुल गांधी कहेगा, दिल्ली में भी अडानी की सरकार आ गई और अब अडानी दिल्ली वालों को भी चूसेगा। लेकिन बड़े अचरज की बात है कि राहुल गांधी क्या सोच कर कुंभ स्नान के लिए जा रहा है? अब बोलो खड़गे जी। कुंभ स्नान से किसकी गरीबी दूर करेगा राहुल और किस भूखे को खाना देगा।
केजरीवाल इतनी बड़ी हार के बाद भी आत्मनिरीक्षण नहीं करेगा कि किस बुरे कर्म का फल मिला है। उसे झूठ, फरेब, मक्कारी और घोटालों के पाप का दंड मिला, ये उसके दिमाग में नहीं आएगा। ऐसे ही कभी कांग्रेस ने आत्मनिरीक्षण नहीं किया कि क्यों 44 पर आए थे और उद्धव ने भी नहीं किया कि कईं सत्ता से बाहर हुआ और 20 सीट पर आ गया।
अवलोकन करें:-
“आदमी को चाहिए वक्त से डर कर रहे,
कौन जाने किस घड़ी वक्त का बदले मिजाज”
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