नागपुर को जलाने के लिए क्यों न सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अभय ओका और जस्टिस अगस्टीन मसीह को दोषी माना जाए; क़त्ल के अपराधी को जमानत दे दी और 8 महीने बाद उसने नागपुर को आग लगा दी

सुभाष चन्द्र

हिंदू समाज नेता कमलेश तिवारी की 18 अक्टूबर, 2019 को की गई जघन्य हत्या तो आपको याद होगी। सईद असीम अली हत्या के साजिशकर्ता को महाराष्ट्र ATS ने नागपुर से 21 अक्टूबर, 2019 को गिरफ्तार कर लिया था 

अप्रैल, 2024 में उसकी जमानत अर्जी इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ख़ारिज करते हुए हत्या के लिए कहा था “ It is case driven by intense communal animosity (घोर सांप्रदायिक बैर), ultimately resulting in the vicious daylight killing of Tiwari”.

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सुप्रीम कोर्ट में उसकी जमानत याचिका लेकर वकील सिद्धार्थ दवे गए और 25 जुलाई, 2024 को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस अगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने असीम अली को जमानत दे दी जजों ने जमानत देते हुए कहा कि “आरोपी पहले ही साढ़े चार से जेल में बंद है, जेल में रहने से पहले का उसके कोई Criminal Antecedants भी नहीं हैं और UP Gangsters and anti-social Activities (Prevention) Act, 1986 में केस दर्ज नहीं किया गया है

UP Gangsters Act की बात आप कैसे कर रहे हैं जबकि सुप्रीम कोर्ट स्वयं इस एक्ट की वैधानिकता पर सुनवाई कर रहा है और अपनी टिप्पणियां में इसके कुछ प्रावधानों को खतरनाक कह चुका है

कमलेश तिवारी ने कथित तौर पर पैगम्बर मोहम्मद पर टिप्पणी की थी और अखिलेश सरकार ने उस पर NSA लगा दिया था जिसकी वजह से वह एक साल से भी ज्यादा जेल में रहा हाई कोर्ट ने NSA को ख़ारिज कर दिया और तब ही वह जेल से निकला तब से ही मुस्लिमों से उसे धमकियां मिल रही थी और अंतत 18 अक्टूबर, 2019 को मारा गया

यानी असीम अली से ज्यादा तो जेल में कमलेश तिवारी रहा लेकिन मीलॉर्ड को तरस अली पर आया पहले criminal record बेशक न रहा हो लेकिन यह तो ख्याल करते कि कि वह हत्या के आरोप में जेल में था जिसे आपने केवल इसलिए जमानत पर छोड़ दिया कि वह साढ़े चार साल जेल में रह चुका है

परिणाम क्या हुआ मीलॉर्ड, सईद असीम अली ने आपके छोड़ने के केवल 8 महीने बाद 17 मार्च, 2025 को नागपुर को आग के हवाले कर दिया इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा कही गई बात उसने साबित कर दी intense communal animosity जिसकी वजह से हिंदुओं के घरों को आग लगा दी गई, 30 लोग घायल हुए और सैकड़ों बाइक और कारें जला दी गई क्या कोई अधिकार था यह करने का उसे?

सही मायने में देखा जाए तो नागपुर को आग लगाने के लिए जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस अगस्टीन जॉर्ज मसीह जिम्मेदार हैं हर मामले में Bail Court बनने से पहले 50 बार सोचना चाहिए कि जिसे छोड़ रहे हो वह क्या करने की हिम्मत रखता है और अगर आप इतना भी नहीं भांप सकते तो आपको सुप्रीम कोर्ट का जज बने रहने का कोई अधिकार नहीं है? 

अपराधियों को छोड़ने की आदत देश में अनेक समस्याएं पैदा कर रही है और न्यायपालिका उसके पूरी तरह जिम्मेदार है एक दिन ऐसे ही किसी अपराधी का यह लोग भी शिकार बन सकते हैं और तब उन्हें गलती का अहसास होगा

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