SCO की स्थापना 2001 में China,Kazakhstan, Kyrgyzstan, Russia, and Tajikistan and Uzbekistan 6 देशों ने मिलकर की थी। इसमें भारत और पाकिस्तान 2017 में जुड़े और 2023 में ईरान को शामिल किया गया।
कल की SCO की रक्षा मंत्रियों की बैठक में जो खेल खेला चीन और पाकिस्तान ने मिलकर उसे हमारे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मिट्टी कर दिया और बैठक के बाद जारी होने वाले संयुक्त घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया जिससे वह जारी ही नहीं हो सका।
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लेखक चर्चित YouTuber |
राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान और चीन को आड़े हाथों लेते हुए साफ़ कहा कि शांति और आतंकवाद साथ साथ नहीं चल सकते और आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए दोहरा मापदंड नहीं होना चाहिए। राजनाथ ने आतंकवाद का समर्थन करने वालों देशों की जमकर निंदा की।
यह थी भारत की सही कूटनीति जिसने पाकिस्तान और चीन दोनों को थपड़िया दिया।
यह बात याद रखने की है कि ईरान इज़रायल युद्ध के संघर्ष विराम के बाद ईरान ने भारत को “धन्यवाद” कहा है और युद्ध के दौरान ईरान और इज़रायल दोनों ने अपने हवाई क्षेत्र भारतीयों को लाने के लिए खोल दिए थे। यह होती है कूटनीति की सफलता जबकि कांग्रेस के ढक्कन नेता फेल बता रहे थे जब असिम मुनीर ने ट्रंप के साथ लंच कर लिया था।
BRICS की स्थापना 2009 में Brazil, Russia, India, China ने मिलकर की थी लेकिन बाद में South Africa, Egypt, Ethiopia, Iran और UAE को शामिल किया गया। इंडोनेशिया को भी जल्द शामिल किए जाने की आशा है।
जुलाई महीने में BRICS का शिखर सम्मेलन ब्राज़ील में होना है लेकिन चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग ने उसमें जाने से मना कर दिया है। कारण है कि ब्राज़ील के राष्ट्रपति Lula da Silva ने शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान में राजकीय भोज देने की घोषणा कर दी जिसे चीन सहन नहीं कर सका। सहन तो चीन के भारत में बैठे चापलूस कांग्रेसी नेताओं को भी नहीं हो रहा होगा कि मोदी को राजकीय भोज क्यों दिया जा रहा है।
BRICS और SCO इसलिए चीन और पाकिस्तान के रहते किसी काम के संगठन नहीं हैं। BRICS को NATO के समकक्ष खड़ा करने की कोई भी कोशिश चीन के रहते हुए सफल नहीं हो सकती क्योंकि चीन पर कभी भरोसा नहीं किया जा सकता।
चीन खुलकर हमेशा आतंकी पाकिस्तान के साथ खड़ा रहता है। पाकिस्तान का अमेरिका के समीप जाना उसे पसंद नहीं है लेकिन जब भी पाकिस्तान के साथ भारत की बात होती है, वह पाकिस्तान के साथ होता है। अच्छा होगा यदि चीन रहित नए संगठनों की स्थापना की जाए।
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