अपने मुस्लिम वोट बैंक को खुश करने इस्लामिक आतंकवादियों को बचाने हिन्दू विरोधी कांग्रेस समर्थित यूपीए द्वारा "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" नाम देकर हिन्दू नहीं सनातन को कलंकित किया जा रहा था। वैसे सनातन को कलंकित करने का सिलसिला अभी भी नहीं बंद नहीं है। जब साध्वी प्रज्ञा ने अपने चुनाव अभियान हेमंत करकरे, ATS अधिकारी के खिलाफ बयान देने पर कांग्रेस चुनाव आयोग पहुँच गयी थी। करकरे ने जितने अत्याचार इन तीनों पर किये थे अगर उसका 1% भी किसी मुस्लिम आतंकवादी के साथ कर दिया होता वह आतंकवादी जेल से बाहर ही नहीं आता बलवा मच गया होता।
संक्षेप में इतना ही कहना कि इन तीनों की पीड़ा को अप्रैल/मई 2012 के Organiser के पृष्ठ 18 पर Agenga में तत्कालीन महामहिम प्रतिभा पाटिल के नाम प्रकाशित पत्र(सम्पादित) में पढ़ सकते हैं। अगर Organiser में पूरा पत्र पढ़ने को मिल जाए, रोंगटे खड़े हो जायेंगे।
साल 2008 के मालेगाँव ब्लास्ट मामले में NIA की एक विशेष अदालत ने गुरुवार (31 जुलाई 2025) को सभी आरोपितों को बरी कर दिया है। इसमें बीजेपी की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह, लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित समेत कुल 7 लोग शामिल हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि NIA आरोपों को साबित करने में नाकाम रही है। कोर्ट ने कहा कि NIA ने यह तो साबित कर दिया कि मालेगाँव में बम धमाका हुआ था, लेकिन यह साबित करने में नाकाम रही कि बाइक में बम प्लांट किया गया था। इसी के साथ कोर्ट ने पीड़ित परिवार को ₹2 लाख मुआवजा देने के आदेश दिए हैं।
कोर्ट ने विस्फोट के सभी छह पीड़ितों के परिवारों को 2-2 लाख रुपये और सभी घायल पीड़ितों को 50,000 रुपये मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है। एनआईए की स्पेशल कोर्ट फैसला आने से पहले मामले में आरोपी भाजपा की पूर्व सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित समेत सभी सात आरोपी अदालत पहुंच गए थे।
मामला 29 सितंबर 2008 में हुए मालेगाँव बम धमाका से जुड़ा है, जिसमें 6 लोगों की मौत हुई थी। हादसे में 100 से अधिक लोग घायल हुए थे। शुरुआत में मामले की जाँच महाराष्ट्र ATS ने की थी, लेकिन 2011 में NIA को जाँच सौंपी गई थी। NIA ने 5 साल की जाँच के बाद चार्जशीट में 7 लोगों को आरोपित बनाया था।
इनमें भोपाल की पूर्व बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, कर्नल प्रसाद पुरोहित, रमेश उपाध्याय अजय राहिलकर,
इसी ब्लास्ट से भगवा आतंकवाद जैसे शब्दों को जन्म हुआ था
19 अप्रैल को सुरक्षित रखा था आदेश
19 अप्रैल को अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था. शुरुआत में सातों आरोपियों को फैसले के लिए आठ मई को पेश होने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, बाद में फैसला 31 जुलाई के लिए पुननिर्धारित कर दिया गया।
हेमंत करकरे ने की थी इस मामले में जांच
केस की जांच का प्रारंभिक संचालन एटीएस के विशेष महानिरीक्षक हेमंत करकरे कर रहे थे। बाद में 26/11 के मुंबई आतंकवादी हमलों के दौरान वे शहीद हो गए थे। मामले में एटीएस ने 2009 में अपना आरोपपत्र दायर किया था।
सुधाकर चतुर्वेदी, समीर कुलकर्णी और सुधाकरधर द्विवेदी शामिल थे।
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