क्लेशी और विपक्ष में समानता
जिस तरह परिवार में किसी क्लेशी को परिवार का, मौहल्ले का या कोई रिश्ते में भी कोई सम्मानित व्यक्ति भी खुश नहीं कर सकता, बिलकुल यही हालत हमारे विपक्ष की है। जिस तरह क्लेशी के पीछे कोई शैतान प्राणी चाबी भरता रहता है उसी तरह विपक्ष भी भारत विरोधी ताकतों के हाथ की कठपुतली बन किसी न किसी बहाने से उपद्रव करता रहता है। संवैधानिक संस्थाओं को कलंकित करता रहता है।
ये विपक्ष का चलन बन चुका है कि किसी भी मामले को पहले सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते है और फिर उसके बाद संसद और सड़कों पर हंगामा कर देते है। राफेल में भी किया और पेगासस मामले में भी किया था और हिंडनबर्ग की रिपोर्ट की तो बात ही अलग थी।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
बस फिर क्या था कांग्रेस, लालू की पार्टी और अन्य विपक्षी दल बिहार विधान सभा में और यहाँ दिल्ली में संसद में दबा कर बवाल काटने लगे सड़कों पर धरना प्रदर्शन और नारे बाजी शुरू कर दी। जब सारे फैसले पर ऐसे ही हंगामा करके/करना चाहते हो तो फिर सुप्रीम कोर्ट में काहे माथा फोड़ने गए। वैसे सुप्रीम कोर्ट को भी पूछना चाहिए था कि “आप यहां आए किसलिए”? "आपकी जगह तो सड़कों पर है।”
जुलाई 28 को भी सुप्रीम कोर्ट ने विपक्ष को लपेट दिया, आज वो चाहते थे कि आयोग जो ड्राफ्ट लिस्ट तैयार कर रहा है, उसे प्रकाशित करने पर रोक लगा दीजिए लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसके लिए भी हामी नहीं भरी।
जो सूचना बाहर निकल कर आ रही है उसके अनुसार करीब 50-60 लाख फर्जी मतदाता बाहर हो जाएंगे जिनके सहारे विपक्ष अपना खेल खेलता है। इसमें 22 लाख तो ऐसे है तो भगवान को प्यारे हो गए। बहुत से बांग्लादेशी हैं और रोहिंग्या हैं। बहुत राज्य से बाहर चले गए और बहुतों ने दूसरी जगह मतदाता पहचान पत्र बना लिया। अब विपक्ष चाहता है कि इन सबको वोटर लिस्ट में रख कर हमें हमारा तांडव करने दो।
खैर कोर्ट ने विपक्ष की आज भी ऐसी तैसी कर दी और ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित करने पर रोक लगाने से मना कर दिया।
सारे क्लेश में देखिए जिन लोगों के नाम काटे जा रहे हैं, उन्हें लेकर विपक्ष प्रदर्शन नहीं कर रहा, बस खुद अपने कपडे फाड़ रहे है। तेजस्वी ने अच्छा सुझाव दिया था कि हम शायद चुनाव का ही बहिष्कार कर देंगे। यह अति उत्तम होगा और इस काम के लिए उसे डॉक्टरेट की मानक डिग्री दे देनी चाहिए।

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