संसद/विधान सभा और सड़कों पर क्लेश करना है तो वोटर लिस्ट के लिए सुप्रीम कोर्ट क्यों गए थे? क्लेशी और विपक्ष में कोई फर्क नहीं; कुत्ते तक के आधार कार्ड बने हुए हैं, क्या कुत्ते को भी वोटर लिस्ट में शामिल किया जाए?

सुभाष चन्द्र
क्लेशी और विपक्ष में समानता 

जिस तरह परिवार में किसी क्लेशी को परिवार का, मौहल्ले का या कोई रिश्ते में भी कोई सम्मानित व्यक्ति भी खुश नहीं कर सकता, बिलकुल यही हालत हमारे विपक्ष की है। जिस तरह क्लेशी के पीछे कोई शैतान प्राणी चाबी भरता रहता है उसी तरह विपक्ष भी भारत विरोधी ताकतों के हाथ की कठपुतली बन किसी न किसी बहाने से उपद्रव करता रहता है। संवैधानिक संस्थाओं को कलंकित करता रहता है।   

ये विपक्ष का चलन बन चुका है कि किसी भी मामले को पहले सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते है और फिर उसके बाद संसद और सड़कों पर हंगामा कर देते है। राफेल में भी किया और पेगासस मामले में भी किया था और हिंडनबर्ग की रिपोर्ट की तो बात ही अलग थी

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ऐसा ही बिहार में चुनाव आयोग के चल रहे Special Intensive Revision (SIR) के खिलाफ तमाम विपक्ष और ADR जैसे विदेशी दलाल सुप्रीम कोर्ट में उसे स्टे कराने पहुंच गए जबकि एक भी वोटर ने याचिका दायर नहीं की उस दिन जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस बागची ने मामले को स्टे करने से मना कर दिया और कहा कि चुनाव आयोग संवैधानिक शक्तियों के अंतर्गत ही काम कर रहा है और वोटर लिस्ट को ठीक करना आयोग का काम है

बस फिर क्या था कांग्रेस, लालू की पार्टी और अन्य विपक्षी दल बिहार विधान सभा में और यहाँ दिल्ली में संसद में दबा कर बवाल काटने लगे सड़कों पर धरना प्रदर्शन और नारे बाजी शुरू कर दी जब सारे फैसले पर ऐसे ही हंगामा करके/करना चाहते हो तो फिर सुप्रीम कोर्ट में काहे माथा फोड़ने गए वैसे सुप्रीम कोर्ट को भी पूछना चाहिए था कि “आप यहां आए किसलिए”? "आपकी जगह तो सड़कों पर है” 

जुलाई 28 को भी सुप्रीम कोर्ट ने विपक्ष को लपेट दिया, आज वो चाहते थे कि आयोग जो ड्राफ्ट लिस्ट तैयार कर रहा है, उसे  प्रकाशित करने पर रोक लगा दीजिए लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसके लिए भी हामी नहीं भरी

जो सूचना बाहर निकल कर आ रही है उसके अनुसार करीब 50-60 लाख फर्जी मतदाता बाहर हो जाएंगे जिनके सहारे विपक्ष अपना खेल खेलता है इसमें 22 लाख तो ऐसे है तो भगवान को प्यारे हो गए बहुत से बांग्लादेशी हैं और रोहिंग्या हैं बहुत राज्य से बाहर चले गए और बहुतों ने दूसरी जगह मतदाता पहचान पत्र बना लिया अब विपक्ष चाहता है कि इन सबको वोटर लिस्ट में रख कर हमें हमारा तांडव करने दो

सबसे हैरान करने वाली बात जो सुप्रीम कोर्ट में सामने आयी कि बिहार में कुत्तों के तक के आधार बने हुए हैं। जो सरकारी तंत्र पर बहुत बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाता है। जिसने भी कुत्ते का आधार बनाया उस पर कड़ी कानूनी कार्यवाही करनी चाहिए। जब किसी कुत्ते तक का आधार बन सकता है घुसपैठियों के आधार बनना कोई बड़ी बात नहीं। 
आज सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस बागची ने आयोग को सलाह दी कि आधार कार्ड EPIC को शामिल करने पर विचार करें क्योंकि डॉक्यूमेंट तो कोई भी फर्जी हो सकता है
 वैसे यह तर्क कोर्ट का सही नहीं है कि वह दस्तावेज फर्जी हो सकता है तो इसे भी शामिल कर लो अगर इस फर्जी मान रहे हो। 

   

खैर कोर्ट ने विपक्ष की आज भी ऐसी तैसी कर दी और ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित करने पर रोक लगाने से मना कर दिया

सारे क्लेश में देखिए जिन लोगों के नाम काटे जा रहे हैं, उन्हें लेकर विपक्ष प्रदर्शन नहीं कर रहा, बस खुद अपने कपडे फाड़ रहे है तेजस्वी ने अच्छा सुझाव दिया था कि हम शायद चुनाव का ही बहिष्कार कर देंगे यह अति उत्तम होगा और इस काम के लिए उसे डॉक्टरेट की मानक डिग्री दे देनी चाहिए

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