जब जज धर्म और मजहब देख केस की सुनवाई करे ऐसे जज सही फैसला नहीं करने के साथ-साथ अपने पद का गलत इस्तेमाल करते हैं। किसी भी जज को मजहब का चश्मा उतार कर केस की सुनवाई करनी चाहिए। फिर अगर मजहब का चश्मा पहन कर सुनवाई करने वाले जजों को ऐसे मुकदमों से दूर रखना मुख्य न्यायाधीश का काम है। अगर मुख्य न्यायाधीश ऐसे जजों की मानसिकता को जानते हुए भी कट्टरपंथियों की कोर्ट में ऐसे केस दे फिर मुख्य न्यायाधीश भी किसी सांप्रदायिक तत्व से कम नहीं।
ऐसे मुक़दमे जो आतंकियों, हिंदू लड़कियों के बलात्कार और उनके धर्मांतरण से जुड़े हों या जिनमे मुस्लिम और ईसाई हितों के मामले शामिल हों, उनमे ये दोनों जज शामिल न किए जाएं।
-Justice Ahsanuddin Amanullah; और
-Justice A.G. Masih
इन दोनों जजों से हिंदुओं को न्याय मिलने की कोई आशा नहीं की जा सकती।
जस्टिस अमानुल्लाह IMA की शिकायत पर स्वामी रामदेव की माफ़ी पर अडिग थे लेकिन आज IMA से अल फ़लाह यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों की मान्यता ख़त्म करने के लिए कुछ नहीं कह रहे और न IMA कोई कार्रवाई कर रहा।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
इन्हे अगर अपनी निष्पक्षता साबित करनी है तो अल फ़लाह यूनिवर्सिटी पर स्वतः संज्ञान लेकर बुलडोज़र चलाने के आदेश देने चाहिए।
जब सुपरटेक के twin towers 28 अगस्त, 2022 को 3700 किलो विस्फोटक लगा कर गिराए जा सकते थे केवल इसलिए कि उनके कुछ हिस्से गैर कानूनी थे तो आतंक की फैक्ट्री चलाने वाली और आतंकी पैदा करने वाली यूनिवर्सिटी क्यों नहीं गिराई सकती? बुलडोज़र चलाने के बाद जांच होनी चाहिए कि हूडा ने यूनिवर्सिटी बनाने के लिए जमीन किसलिए दी और किसने कहने से दी।

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