कॉलेजियम को ख़त्म करने की सुनवाई का लॉलीपॉप एक बार फिर दे रहे हैं नए चीफ जस्टिस

सुभाष चन्द्र

एक बार पूर्व CJI डी वाई चंद्रचूड़ ने सुप्रीम कोर्ट के वकील Mathews J Nedumpara को भरोसा दिया था कि वो उनकी कॉलेजियम को ख़त्म करने की याचिका पर सुनवाई करेंगे लेकिन नेदुमपरा के बार बार मेंशन करने पर भी सुनवाई की कोई तारीख तय नहीं की। लेकिन 2022 में दायर की गई उनकी याचिका सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने ही ख़ारिज कर दी 

लेखक 
चर्चित YouTuber 
मैंने अपने 28 अप्रैल, 2024 के लेख में लिखा था ➖

कोर्ट ने 2015 में 4:1 के बहुमत से NJAC एक्ट और कॉन्स्टिट्यूशनल अमेंडमेंट को असंवैधानिक और अमान्य बताकर खारिज कर दिया था। तब कहा गया था- कॉलेजियम सिस्टम, NJAC से पहले जैसा था फिर से ऑपरेटिंग हो जाएगा।

“26 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार पुनीत सहगल ने एडवोकेट मैथूस नेदमपरा की कॉलेजियम को ख़त्म करने और NJAC को बहाल करने की याचिका को accept करने से मना करते हुए कहा कि

“कॉलेजियम को पहले ही Upheld किया जा चुका है और NJAC को, जिसमे जजों की नियुक्ति के मामले में सरकार को बराबर के अधिकार दिए गए थे, संविधान पीठ ने October, 2015 में ख़ारिज कर दिया था review petition भी 2018 में ख़ारिज हो गई थी इसलिए Repeat litigation न्यायपालिका के समय और energy की बर्बादी करना है”

पुनीत सहगल ने 2013 के सुप्रीम कोर्ट के Rules का सहारा लेते हुए कहा कि -

“I hold that the registration of the present case was not proper and by virtue of order XV Rule 5 of the Supreme Court Rules, 2013 I hereby decline to receive the same”.

2013 के rule के अनुसार रजिस्ट्रार याचिका को Receive करने से मना कर सकता है अगर याचिकाकर्ता ने कोई reasonable cause नहीं बताया या यह याचिका तुच्छ है या इसमें scandalous matter है

याचिका Receive करने से मना करने का क्या मतलब हो सकता है जब यह याचिका नवंबर, 2022 से सुप्रीम कोर्ट में पड़ी है एडवोकेट नेदमपरा ने 17 नवंबर, 2022 को याचिका दायर की थी और CJI चंद्रचूड़ ने याचिका को उचित समय पर list करना स्वीकार किया था (The Hindu की 17 नवंबर, 2022 की रिपोर्ट कोई भी देख सकता है”

उसके बाद 23 अप्रैल 2023 को CJI चंद्रचूड़ ने नेदुमपरा द्वारा याचिका mention करने पर कहा था कि कॉलेजियम को 9 जजों के बेंच ने बनाया था, इसे क्या एक Writ Petition से Challenge कर सकते हैं “

अब नए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने वकील Mathews J Nedumpara को 76 वें संविधान दिवस पर उनके द्वारा मेंशन किए जाने पर एक बार फिर से सुनवाई का लॉलीपॉप दिया है जबकि सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री उनकी याचिका को पहले ही खारिज कर चुकी है

The Hindu ने इसकी रिपोर्ट देते हुए एक बात कही जो सत्य से विपरीत है उसने लिखा कि “NJAC, which briefly gave the government an equal role along with the judiciary in appointment of judges to constitutional courts, was struck down by the supreme court in 2015 as unconstitutional”. 

जजों की नियुक्ति के लिए सरकार को “बराबर” के अधिकार दिए गए थे, यह बात बिल्कुल झूठ है जिसका ढिंढोरा सुप्रीम कोर्ट ने लगातार पीटा है जबकि सच यह है कि NJAC में प्रस्तावित 6 सदस्यों की नियुक्ति समिति में सरकार की तरफ से केवल एक कानून मंत्री था और बाकी 5 सदस्यों के चयन में चीफ जस्टिस का ही रोल था

रिटायर होने से 4 दिन पहले चीफ जस्टिस बीआर गवई ने Tribunal Act, 2021 भी ख़ारिज कर दिया था और कहा था कि Tribunals के चैयरमेन के नियुक्ति भी कॉलेजियम करेंगे एक तरफ कॉलेजियम का दायरा और बढ़ा लिया और दूसरी तरफ सूर्यकांत कह रहे हैं कि वे कॉलेजियम को ख़त्म करने और NJAC को पुनर्जीवित करने के लिए सुनवाई करेंगे, क्या यह संभव है

वर्ष 2015 में 5 जजों की पीठ का NJAC को ख़त्म करने का फैसला पूर्णतया “गैर संवैधानिक” था क्योंकि संविधान 99th संशोधन NJAC बनाने के लिए सर्वसम्मति से संसद ने पास किया था जिसका मतलब 125 करोड़ जनता की आवाज़ थी उस बिल में जिसे 4 जज सुप्रीम कोर्ट के ख़ारिज नहीं कर सकते थे क्योंकि वे जनता के प्रति जवाबदेह नहीं थे और क्योंकि वे स्वयं Stakeholder और Interested Party थे, वे अपने खिलाफ किसी मुक़दमे का फैसला करने की शक्ति ही नहीं रखते थे न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर कोई खतरा नहीं था जबकि परदीवाला और महादेवन ने राष्ट्रपति को आदेश देकर एक “आतंकी फैसला” दे कर न्यायपालिका की स्वतंत्रता का दुरूपयोग किया था 

No comments: