पृथ्वीराज चव्हाण को सेना का अपमान करने की हिम्मत सुप्रीम कोर्ट ने दी; राहुल गांधी को ऐसे ही अपमान के लिए जब 5 महीने की तारीख देंगे तो यही होगा

सुभाष चन्द्र

सेना और नरेंद्र मोदी का अपमान एक सोंची-समझी सियासत के तहत चल रहा है। राहुल गाँधी की good books में आने के लिए मिट्टी में मिल रहे नेता ऐसे बयान देकर कांग्रेस के ताबूत में कील ठोक रहे हैं। देश आज़ाद होने के बाद जवाहर लाल नेहरू भी सेना के प्रति सतर्क नहीं थे ठीक उसी को आधार मान पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा दिया कि सेना की क्या जरुरत है यानि दुश्मनों को देश पर कब्ज़ा करने का खुला मौका। ऐसे नाकारा है नेता और कांग्रेस।     

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने राहुल गांधी द्वारा सेना के अपमान के केस की 4 अगस्त की सुनवाई के बाद जो पहले 20 नवंबर के लिए तय थी,  जिसे आगे 4 दिसंबर के लिए बढ़ा दिया गया, उसे सुनवाई के लिए 22 अप्रैल, 2026 के लिए टाल दिया यानी सीधा 5 महीने बाद की तारीख  इसका मतलब साफ़ था कि सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायाधीश सेना के अपमान को कोई बड़ी बात नहीं मानते और कोई विशेष महत्त्व नहीं देते। एक बार भी राहुल गांधी को अगर अधिकतम सजा हो जाए तो अन्य कांग्रेसी भोपुओं की बोलने के हिम्मत नहीं होगी लेकिन लगता है ऐसा कोर्ट ऐसा चाहता ही नहीं

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सुप्रीम कोर्ट की ऐसी ही ढिलाई का परिणाम है कि कांग्रेस के नेता पृथ्वीराज चह्वाण ने राहुल गांधी से भी 4 कदम आगे बढ़ कर अपने ही देश सेना को पाकिस्तान के मुकाबले अति निकृष्ट बता दिया उसने वह बोल दिया जो पाकिस्तान ने नहीं कहा और नेहरू की तरह बोल गया कि देश को सेना की कोई जरूरत ही नहीं हैपृथ्वीराज चव्हाण ने कहा -

“ऑपरेशन सिंदूर में पहले दिन हार हुई;

पहले दिन हवाई लड़ाई में हारे;

सेना का एक किलोमीटर भी मूवमेंट नहीं था;

12 लाख सैनिकों की क्या जरूरत है;

भविष्य में भी जंग इसी तरह लड़े जाएंगे 

जो युद्ध 2-3 दिन में हुआ, वह aerial war and missile warfare था और भविष्य में भी ऐसे ही युद्ध लड़े जाएंगे तो फिर 12 लाख सैनिकों की क्या जरूरत है

एक तरफ कह रहा है कि भारत पाकिस्तान से हवाई लड़ाई में हारा और साथ में यह भी कहता है कि ये युद्ध aerial war and missile warfare था लेकिन यह मानने को तैयार नहीं है कि सेना ने पाकिस्तान के आतंकी कैंप और एयरबेस तबाह कर दिए

मुझे समझ नहीं आता कांग्रेस वाले कौन सी अफीम चाट कर बोलते हैं चव्हाण ने ऐसी बातें विजय दिवस 16 दिसंबर के एक दिन पहले पुणे बोली उन्होंने यहां तक कह दिया कि Air Force was Completely Grounded और अगर ग्वालियर, भटिंडा और सिरसा से कोई एयरक्राफ्ट उड़ता तो पाकिस्तान उसे मार गिराता

जैसे राहुल गांधी बयान देने से पहले यही समझता है कि कोई केस दर्ज हुआ तो 10 साल तो आराम से निकल जाएंगे जैसे अभी उसके सेना के अपमान के केस का ट्रायल शुरू भी नहीं हुआ क्योंकि उसे सुप्रीम कोर्ट ने लटका रखा है ऐसे ही अगर चव्हाण पर केस चला तो वह भी पुलिस में FIR से शुरू होगा, फिर ट्रायल कोर्ट में जाएगा जिसे रोकने के लिए हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जाएगा और कभी 5 या 7 साल बाद सजा हुई भी तो वह भी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से स्टे होगी और तब हो सकता है कोई बड़ी अदालत में कांग्रेस परिवार से आने वाला न्यायाधीश बैठा हो जो उसे “आर्टिकल 19” में बोलने की आज़ादी बता कर  बरी कर देगा जैसे राहुल गांधी की सजा पर रोक लगाई थी गवई साहेब ने

जस्टिस दीपांकर दत्ता ने राहुल गांधी के लिए 4 अगस्त की सुनवाई में कहा था कि अगर आप सच्चे भारतीय होते तो सेना के लिए ऐसी बातें न करते अब राहुल का केस देख रहे सुप्रीम कोर्ट के दोनों जजों को चव्हाण को सीधा समन कर उसे पूछना चाहिए कि सेना के खिलाफ बोलने के लिए तुम्हारे पास क्या सबूत हैं और स्वतः ही उसे सजा दे देनी चाहिए 

कांग्रेस और उसके नेताओं जैसे अन्य नेता सेना का अपमान करते हुए भूल जाते हैं कि किसी दिन अगर सेना के कुछ जवानों ने संयम खो दिया और “अज्ञात” बन गए तो क्या होगा 

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