कथित चुनाव सुधारों (जो SIR के लिए थी) पर बहस का जवाब देते हुए अमित शाह ने बताया था कि भाजपा चुनाव क्यों जीतती है और कांग्रेस चुनाव क्यों हारती है। कांग्रेस का मतलब कांग्रेस और उसके संगी दलों से था। शिवसेना (उद्धव) कांग्रेस का दामन थाम कर कांग्रेस से बड़ा “सेकुलर” भांडो का दल हो गया, मुस्लिमों के लिए जान छिड़कने में कांग्रेस से बराबरी कर गया और अपना पुराने एजेंडे को आगे बढ़ाया “हिंदी भाषियों” को महाराष्ट्र से खदेड़ो, फिर निकायों के चुनाव हारने पर मलाल क्यों?
सड़कों पर हिंदी बोलने वालों की पिटाई करके क्या सोचा था वो या उनके साथ काम पर आश्रित महाराष्ट्र के लोग आपको वोट देंगे? 2011 जनगणना के अनुसार लगभग 10% लोग हिंदी भाषी थे महाराष्ट्र में और अब तो 2025 में और बढ़ गए होंगे। वैसे राज्य में हिंदी समझने वाले करीब 52% है। आपने तो बिहार और उत्तर प्रदेश वाले कोरोना में भी भगाए थे।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
जून में उद्धव और राज ठाकरे ने मिलकर सोचा कि महाराष्ट्र अब हमारा है और सड़कों पर उत्पात मचा दिया दोनों के कार्यकर्ताओ ने। अब संजय राउत कह रहा है कि पैसा पानी की तरह बहा कर चुनाव जीता है महायुति ने; 15000 करोड़ रुपया खर्च किया फडणवीस; जिस तरह सीट विधानसभा में आई थी, लगभग वैसी ही संख्या निकाय चुनाव में आई है; सब कुछ सेट था; कम से कम संख्या ही बदल लेते। और न जाने कितनी बातें।
संजय राउत के लिए कांग्रेस के तहसीन पूनावाला कहते हैं कि संजय मानसिक संतुलन खो चुके है और उनके बर्ताव एवं लगातार कांग्रेस की आलोचना से MVA को बहुत नुकसान हुआ है। संजय राउत के लिए उन्होंने कहा कि वो "uncultured," "disgraceful," and "buffoonery” हैं और उनकी बातों में न कोई विश्वसनीयता है और न विपक्ष की आवाज़ में एकजुटता दिखाती हैं। और उद्धव को संजय की लगाम कसने को भी कहा है।
विधानसभा चुनाव में भाजपा को 132 सीट मिली थी, शिवसेना (शिंदे) को 57 और NCP(अजित) को 41; दूसरी तरफ शिवसेना (उद्धव) 20 सीट, कांग्रेस 16 सीट और शरद पवार (एनसीपी) 10 सीट पर सिमट गई।
अब निकाय चुनावों में भाजपा को मिली 117 सीट, शिवसेना (शिंदे) 53 और NCP (अजित) को मिली 37 सीट। दूसरी तरफ अगाधी में कांग्रेस को मिली 28 सीट, शरद पवार (एनसीपी) को 7 और शिवसेना(उद्धव) को मिली हैं 9 सीट (कुल 44)। लगता है 44 का नंबर विशेष है।
अब विधानसभा और निकायों चुनाव नतीजों को एक जैसा देखता है संजय राउत तो ये उसका सिरदर्द है। लेकिन यह अभी से दिखाई दे रहा है कि BMC के 15 जनवरी के चुनाव नतीजे क्या होंगे। उसके बाद क्या विलाप करना है, उसका पूर्वाभ्यास (rehearsal) अभी से कर लो।
राहुल गांधी अमित शाह के भाषण के बाद लोगों से कह रहा था कि “आपने अमित शाह का चेहरा देखा, उसके हाथ देखे, चेहरा उतरा हुआ था और हाथ कांप रहे थे) लेकिन सच तो यह है कि अमित शाह शेर की तरह दहाड़ रहा था और राहुल गांधी और संजय राउत दोनों का चेहरा उन्हें बोलते हुए देखो। एक मायूसी, घबराहट दिखाई देगी जिनमें किसी तरह का कोई आत्मविश्वास नहीं होता।
सुना ये भी है शिवसेना वाले कह रहे है राहुल गांधी Seasonal नेता है और शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले अपने सांसदों के साथ प्रधानमंत्री मोदी से मिली थी। क्या इस गठबंधन को कोई शुभकामनाएं दे सकता है?

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